टिहरी झील को पर्यटन की दृष्टि से और विकसित करेंगे

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को टिहरी में तीन दिवसीय टिहरी लेक महोत्सव-2019 का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी झील हमारे लिये अनमोल धरोहर की तरह है, जिसमें देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता है। इस झील में हमे उत्तराखण्ड के बच्चों का भविष्य नजर आता है। प्रदेश के युवाओं के बेहतर भविष्य एवं संकल्पना को साकार करने के लिये झील महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें प्रदेश को पर्यटन प्रदेश के रूप में विकसित करना है। खर्चीलें टूरिस्ट यहां आयेंगे तो इस क्षेत्र की आर्थिकी को और मजबूती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि जो व्यक्ति टिहरी झील को देखेगा वह बार-बार यहां आयेगा। गत वर्ष 13 राज्यों के प्रतिभागी टिहरी झील महोत्सव में आये थे और इस बार 24 राज्यों के प्रतिनिधि इस महोत्सव में प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा 13 जिले 13 डेस्टीनेशन की योजना पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई टिहरी क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए सरकार प्रयासरत हैं। डोबरा-चांठी पुल के निर्माण के बाद टिहरी के दोनो ओर होटल, रिजोर्ट एवं शिक्षण संस्थान बनेगें। इससे पर्यटकों को अधिक सुविधाये उपलब्ध हो सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी में आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने एक मुश्त रूपये 88 करोड़ डोबरा-चांठी पुल निर्माण के लिए अवमुक्त किये हैं। ऑलवेदर रोड़ पर भी कार्य चल रहा है। ऑलवेदर रोड़ बनने के बाद ऋषिकेश से नई टिहरी पहुंचने में मात्र डेढ घण्टे का समय लगेगा। टिहरी झील में सी प्लेन उतारने के लिए भारत सरकार द्वारा सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शीघ्र ही टिहरी झील में सी प्लेन उतारा जायेगा। अगले आने वाले 10-15 वर्षो में टिहरी का एक नया स्वरूप सामने आयेगा जो निश्चित रूप से देश व दुनिया को अपने ओर आकर्षित करने में मददगार रहेगा।
गंगा नदी की स्वच्छता एवं निर्मलता बनाये रखने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘‘यह कल-कल बहती गंगा की धारा क्या कहती….. ‘‘ पंक्तियों के माध्यम से पवित्रगंगा का स्मरण किया। उन्हांने कहा कि गंगा नदी हमें त्याग व समर्पण सीखाती है निर्मलता का संदेश देती है। हम सभी को गंगा की निर्मलता एवं स्वच्छता को बनाये रखने में योगदान देना होगा। उन्होंने टिहरी की जनता से अतिथि सत्कार की भावना विकसित करने की भी अपील की ताकि अधिक से अधिक पर्यटक टिहरी भ्रमण पर आने के लिए प्रेरित हों।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नई टिहरी साहसिक खेल अकादमी का नाम एवरेस्ट विजेता स्व दिनेश सिंह रावत के नाम पर रखे जाने की घोषणा की।

उन्होंने मां राजेश्वरी महिला स्वयं सहायता समूह को सिलाई व्यवसाय, जागृति महिला वचन समूह को डेरी व्यवसाय एवं भगवती महिला स्वयं सहायता समूह को अगरबत्ती उद्योग विकसित करने के लिए जीरो प्रतिशत ब्याज पर रूपये पांच-पांच लाख के ऋण के चेक वितरित किये।
इस अवसर पर जनपद के प्रभारी मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र के विकास के लिए प्रदेश सरकार द्वारा गत वर्षो से अभिनव प्रयास किये जा रहें है।
पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने अपने सम्बोधन में कहा कि शासन की सोची समझी रणनीति के तहत ही टिहरी लेक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का मकसद टिहरी झील क्षेत्र की सूरत बदलना है। इस महोत्सव के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों का ध्यान टिहरी क्षेत्र की ओर आकर्षित करना हैं। जिसके लिए शासन और प्रशासन कार्य कर रहा हैं।
कार्यक्रम को टिहरी सांसद मालाराज लक्ष्मी शाह एवं क्षेत्रीय विधायक धन सिंह नेगी ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर विधायक विजय सिंह पंवार व शक्तिलाल शाह, गढवाल मण्डल विकास निगम के अध्यक्ष महाबीर सिंह रांगड, जिला पंचायत अध्यक्ष सोना सजवाण, स्वामी चिदानंद मुनी, जिलाधिकारी सोनिका, पुलिस अधीक्षक डॉ योगेन्द्र सिंह रावत, मुख्य विकास अधिकारी आशीष भटगांई आदि उपस्थित थे।

सीएम ने किया पुस्तक प्राचीन व वर्तमान टिहरी का विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भवानी प्रताव सिंह द्वारा संपादित पुस्तक प्राचीन एवं वर्तमान टिहरी का विमोचन किया। टिहरी महोत्सव कार्यक्रम में पहुंच सीएम में 31 करोड़ 95 लाख रूपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया।

विधानसभा क्षेत्र टिहरी गढ़वाल के विकासखण्ड जाखणीधार के आवासीय भवनों हेतु एक करोड 57 लाख रूपये के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया गया। विकासखण्ड जाखणीधार के कार्यालय भवन हेतु एक करोड़ आठ लाख 55 हजार रूपये के निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। इसके अलावा जिन निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। उनमें केन्द्रीय वित्त पोषित योजना ’स्वदेश दर्शन’ के अन्तर्गत कोटी में निर्मित टूरिस्ट पाथवे, पार्किंग, व्यू प्वाइंट, फ्लोटिंग हट तथा सर्विस सेटअप, चम्बा में मल्टी लेवल कार एवं बस पार्किंग एवं सिराई में ईको लॉज, मल्टीपरपस हॉल तथा यूटिलिटी भवन शामिल है।

मुख्यमंत्री ने भवानी प्रताप सिंह द्वारा सम्पादित पुराना दरबार ट्रस्ट की पुस्तक ’प्राचीन एवं वर्तमान टिहरी’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ज्ञान सिंह नेगी को पेंशन का चैक देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि 16 मई को टिहरी झील में कैबिनेट कराने का जो निर्णय लिया, यह निर्णय भविष्य में पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा देने के लिये ’13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन’ की सरकार की परिकल्पना है। जिसमें टिहरी जिले में टिहरी झील को शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से टिहरी झील में बड़ा पोटेंशियल दिखता है। इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर टिहरी झील एक प्रमुख डेस्टिनेशन के रूप में उभर कर आयेगा। वेलनेस, योगा टूरिज्म, एडवेंचर, फिल्म आदि के क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टिहरी झील राज्य में युवाओं को आर्थिक एवं आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत करेगी। उत्तराखण्ड का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को उत्तराखण्ड आने के लिये आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उत्तराखण्ड को प्रकृति द्वारा दी गई इस देन को समझना होगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिये जाने से पर्यटन राज्य की रोजी रोटी का जरिया बनेगा। उन्होंने कहा कि टिहरी महोत्सव के आयोजन से देश व विदेशीयों के लिये टिहरी झील आकर्षण का केन्द्र बनेगी। फ्लोटिंग हट्स यह कि विशिष्ट पहचान है। वॉटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग एवं अन्य गतिविधियां टिहरी में पर्यटन के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटक स्थलों पर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है।

श्रद्धालुओं के लिये बद्रीनाथ धाम में लगा हारपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर

यात्रियों की आमद को देखते हुये सूबे के सीएम ने श्रद्धालुओं के चिकित्सा सुविधा की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए है। इसके तहत बद्रीनाथ धाम में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर लगाया गया है, जबकि केदारनाथ धाम, गंगोत्री व यमुनोत्री में भी यह सुविधा जल्द शुरू होने वाली है।

उत्तराखंड सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने बताया कि यात्रा मार्ग पर चिकित्सा अधिकारी/फार्मेसिस्ट एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप वाले लोगों एवं वरिष्ठ नागरिक को आकस्मिक उपचार के लिए इकोस्प्रिन एवं सोर्बिट्रेट दवाओं की व्यवस्था की गई है। अधिक ऊचाँई पर होने वाले रोगों के उपचार हेतु प्रशिक्षित ‘सिक्स सिगमा हेल्थ केयर’, नई दिल्ली द्वारा उत्तराखण्ड में चारांे धाम के यात्रा मार्गों पर 21 जून तक विशिष्ठ सेवाएं दी जायेगी। इस हेल्थ केयर सेंटर द्वारा केदारनाथ धाम में कार्डियोलॉजिस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यमुनोत्री धाम में भी शीघ्र ही कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराये जाएंगे। चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नम्बर-104 को भी सुदृढ़ किया गया है। जिसके माध्यम से सभी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सूचना दी जायेगी तथा शिकायत एवं सुझाव भी लिए जायेंगे। हेल्प लाइन के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्गो पर श्रद्धाुलुओं को स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जायेगी।

उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा मार्गों में कुल 20 स्थानों पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट बनाये गये हैं। 08 स्थानों पर फर्स्ट मेडिकल रिस्पोन्डर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जबकि 103 स्थानों पर चिकित्सा इकाईयां बनाई गई हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों, फार्मासिस्टों एवं स्टाफ नर्स की समुचित व्यवस्था की गई है। चारधाम यात्रा मार्ग में 50 प्रमुख स्थानों पर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।

जल्द हटेगा अंग्रेजों कानून, पटवारी के बजाए पुलिस संभालेगी कानून व्यवस्था

अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के लगभग बारह हजार गांवों में अंग्रेजों के बनाये कानून को दरकिनार करते हुये पर्वतीय जिलों में सभी जगह पुलिस थानों खोले जायेंगे।

दरअसल, अंग्रेजी हुकूमत के दौरान वर्ष 1816 में कुमाऊं के तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के 16 पद सृजित किए थे। इन्हें पुलिस, राजस्व संग्रह, भू अभिलेख का काम दिया गया था। साल 1874 में पटवारी पद का नोटिफिकेशन हुआ। रजवाड़ा होने की वजह से टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी में पटवारी नहीं रखे गए। साल 1916 में पटवारियों की नियमावली में अंतिम संशोधन हुआ। 1956 में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून जिले के गांवों में भी पटवारियों को जिम्मेदारी दी गई।

वर्ष 2004 में नियमावली में संशोधन की मांग उठी तो 2008 में कमेटी का गठन किया गया और 2011 में रेवेन्यू पुलिस एक्ट अस्तित्व में आया। मगर गौर करने वाली बात यह कि रेवेन्यू पुलिस एक्ट बना तो दिया गया, लेकिन आज तक कैबिनेट के सामने पेश नहीं किया गया।

अंग्रेजों ने अपनी नीतियों के लिहाज से राजस्व वसूली और कानून व्यवस्था संभालने के लिए दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पटवारी पद सृजित किए थे। तब से लेकर आज तक पर्वतीय जिलों में इसके मुताबिक काम हो रहा है। इन जिलों में सिविल पुलिस नहीं है। हालांकि, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पटवारियों ने ब्रिटिश कमिश्नर की नियमावली में संशोधन की मांग उठाई, मगर उनकी आवाज दबकर रह गई।
कैबिनेट मंत्री एवं प्रवक्ता राज्य सरकार मदन कौशिक का कहना है कि पर्वतीय राज्यों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में आए हाइकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद सरकार इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएगी।

इस संबंध में एडीजी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार का कहना है कि पर्वतीय जिलों में पुलिस थाने खोलने के संबंध में हाइकोर्ट के आदेश को पढने के बाद आगे कदम उठाए जाएंगे।

उत्तराखंड में 334 विद्यालय हो सकते है बंद

अब ऐसे विद्यालयों जिनकी छात्र संख्या दस या उससे भी कम है। सरकार उन्हें बंद करने का मन बना चुकी है। जी हां, जिले में प्राथमिक व जूनियर 334 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर छात्र संख्या दस से कम रह गई है, और ऐसे में सरकार इस पर जल्द फैसला लेगी।
प्राथमिक विद्यालयों में लगातार छात्रसंख्या घट रही है। कम संख्या वाले सबसे ज्यादा विद्यालय देवप्रयाग में 42 व सबसे कम प्रतापनगर में 26 हैं। इन विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा। जिले में शून्य छात्र संख्या वाले करीब 80 विद्यालय पहले से ही बंद है। दस से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की सूची तीन सौ से ऊपर है, लेकिन इसमें दूरी का भी ध्यान रखा गया है। बंद होने वाले विद्यालय की दूरी समायोजित होने विद्यालय से दूरी एक किमी रखी गई है ताकि बंद होने वाले विद्यालयों के छात्रों को दूसरे विद्यालय जाने में परेशानियों का सामना न करना पड़े। एक किमी दूरी वाले विद्यालयों को ही बंद किया जाता है तो फिर बंद होने वाले स्कूलों की संख्या कुछ कम हो जाएगी।

अगले साल के अंत तक पूरी हो जाएगी चार धाम सड़क परियोजना

केंद्रीय सड़क, परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तराखंड में ‘चार धाम’ सड़क संपर्क परियोजना को सरकार 2018 के अंत तक पूरा कर लेगी। 12 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े 10 प्रस्तावों को पर्यावरण मंजूरी भी मिल गई है।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने परियोजना पर काम तेज कर दिया है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर है। इस परियोजनाओं से जुड़े अन्य अटके प्रस्तावों को भी जल्द ही मंजूरी प्राप्त हो जाएगी। क्योंकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय समेत विभिन्न मंत्रालयों के साथ बैठकें जारी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह लोगों को सबसे बड़ा उपहार होगा। क्योंकि आस्था से जुड़ी चार धाम यात्रा लोगों के एजेंडे में शीर्ष पर रहती है। विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग चार धाम यात्रा के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि 900 किमी के नए अलाइनमेंट पर राजमार्गो का निर्माण किया जा रहा है और सुरंगों का निर्माण भी तेज गति से हो रहा है। यह मार्ग सभी मौसम में खुले रहेंगे।
मालूम हो कि इसी महीने की शुरुआत में गडकरी ने आधारभूत ढांचे पर एक बैठक की अध्यक्षता की थी। इसमें उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों से मंजूरियों के अभाव में लटके चार धाम यात्रा के 18 प्रस्तावों में तेजी लाने का अनुरोध किया था। चार धाम परियोजना की आधारशिला पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी।

छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर बागी शिवम ने लहराया परचम, पूर्व में रह चूके हैं विवि प्रतिनिधि

मैं ईश्वर की शपथ खाकर कहता हूं कि मैं अपने कर्तव्यों व जिम्मेदारियों का पूर्ण निष्ठा के साथ निर्वहन करूंगा। साथ ही राजकीय ऑटोनॉमस महाविद्यालय में शिक्षा को आगे ले जाने के लिये हर संभव तत्पर रहंूगा। कुछ इसी पंक्ति के साथ राजकीय महाविद्यालय के विजयी उम्मीदवारों ने शपथ ग्रहण समारोह में पद की मर्यादा की कसम खायी। इस वर्ष मतदान का प्रतिशत 79 रहा। जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 3 प्रतिशत आगे रहा।
उत्तराखंड राज्य के एकमात्र ऑटोनॉमस कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई के सर्मिर्थत व एबीवीपी के बागी प्रत्याशी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा कर अपने प्रतिद्वंद्वी व एबीवीपी के प्रत्याशी विजय जुगरान को 328 मतो के अंतर से हरा कर एबीवीपी को सबक सिखाया है। वहीं महासचिव पद पर पहली बार मुस्लिम समुदाय से आने वाले व एनएसयूआई के प्रत्याशी इमरान खान ने ऑर्यन के शिखर भंडारी को 101 मतों से पराजित किया। इसी प्रकार उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के प्रत्याशी अजय कुमार जायसवाल 1522 मतो के साथ विजयी रहे। वहीं सह-सचिव पद एबीवीपी के प्रत्याशी कार्तिक शर्मा को 1423 मतो के साथ विजयी घोषित किया गया। कोषाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई की निकिता पंत को 1238 मतों के साथ सफल उम्मीदवार बनाया गया। विश्व विद्यालय पद पर एबीवीपी के रवि कुमार 1256 मतों के साथ विजयी करार दिये गये। वहीं शाम सात बजे सफल उम्मीदवारों को शपथ ग्रहण दिलवायी गयी।
बारिश के दौरान भी कम नहीं हुआ छात्रों का उत्साह
सुबह आठ बजे से मतदान के शुरू होने के दो घंटे यानी दस बजे से बारिश ने अपनी दस्तक दे डाली। बावजूद छात्र-छात्राओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। बारिश के दौरान ही छात्रसंघ चुनाव में लड़ रहे उम्मीदवारों के प्रशंसक कॉलेज परिसर के बाहर नारेबाजी कर समर्थन हासिल करते दिखे।
किसी ने दीदी कहा, तो किसी ने जोड़े हाथ
छात्रसंघ चुनाव के दौरान सभी उम्मीदवार कॉलेज के प्रवेश द्वार के आगे एक पंक्ति में खड़े थे। इस दौरान वह अपने-अपने पक्ष में मत डालने के लिये अपने से छोटी उम्र की लड़कियों को दीदी तक कह रहे थे, तो कोई मतदान को अपने पक्ष में खींचने की कोशिश में हाथ जोड़ता भी दिखा।
चुनाव के दौरान समर्थकों में टकराव की स्थिति भी रही
छात्रसंघ चुनाव में अपने-अपने समर्थकों के पक्ष में नारेबाजी कर रहे छात्र गुटों में टकराव की स्थिति भी बनी। ऑर्यन गुट के समर्थक वोटर को अपने पाले में वोट डलवाने के लिये एक घेरा बनाकर चल रहे थे। इस पर दूसरे गुट के समर्थकों ने घेरा तोड़ना चाहा तो इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल ने भीड़ को मौक्े पर ही अलग-थलग कर मोर्चा संभाला।
नहीं रहा स्वच्छता का ध्यान
एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान की मुहिम चला रहे है, तो दूसरी ओर छात्रसंघ चुनाव में समर्थकों ने पोस्टर व पंपलेट से पूरी सड़कों में मानों एक चादर सी बिछा दी हांे।
चुनाव में दिखे बाहरी युवक
छात्रसंघ में भीड़ जुटाने के लिये शहर व आस-पास क्षेत्र के इंटर कॉलेजों व प्राइवेट संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को भी शामिल किया गया था।
शपथ-ग्रहण के बाद जुलुस का मौका दिया
सफल उम्मीदवारों को क्षेत्राधिकारी मंजूनाथ टीसी ने कॉलेज के प्रवेश द्वार से लेकर बड़ी मंडी के समीप लगे बैरिकैडिंग तक जुलुस निकालने की अनुमति दी।
उम्मीदवारों को पुलिस ने गाड़ी में बिठा, छुड़वाया घर
बैरिकैडिंग तक जुलुस निकालने के बाद सीओ मंजूनाथ टीसी के आदेश पर सभी सफल उम्मीदवारों को पुलिस की गाड़ी में बिठा कर सम्मान पूर्वक घर पहुंचाया गया।

टिहरी बांध का जलस्तर बढ़ने से गांवों पर मंडरा रहा खतरा

टिहरी बांध झील का जलस्तर पर बढ़ने से प्रतापनगर क्षेत्र के गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों के घर और आंगन में दरारें गहराने लगी है, जिस कारण ग्रामीणों में दशहत बनी हुई है।
जिला पंचायत सदस्य कंगसाली आंनद रावत ने गांवों के विस्थापन की मांग की है। तीन दिवसीय क्षेत्र भ्रमण के दौरान जिपं सदस्य आनंद रावत ने कंगसाली, रौलाकोट, गडोली, चांठी, मोटणा, चौंधार, भैंगा, जणगी आदि गांवों का भ्रमण किया। बताया कि टिहरी झील का जल स्तर बढ़ने से इन गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। गांवों के विस्थापन को लेकर शीघ्र डीएम से भेंट की जाएगी। हटवाल गांव में अधर में लटके प्रसिद्ध भोमेश्वर महादेव मंदिर का काम टीएसडीसी के सीएसआर मद से पूरा करवाने की मांग की। उन्होंने डोबरा-चांठी पुल का भी निरीक्षण कर पुल निर्माण शीघ्र पूरा करने की जरूरत बताई।

काश्तकारों को बड़ी राहत, जौनपुर विकासखण्ड में खुलेगा कोल्ड स्टोर

टिहरी जिले के जौनपुर विकासखण्ड के सकलाना क्षेत्र में काश्तकारों की नकदी फसल को बचाने के लिए एक कोल्ड स्टोर खोला जायेगा। यह निर्देश सचिव उद्यान डी सैंथिल पांडियन ने दिए है। सकलाना पट्टी के राजीव गांधी संसाधन परिषद मंज गांव में एकीकृत आजीविका मिषन की और से आयोजित कार्यषाला में उद्यान सचिव ने कहा कि योजना का मुख्य उद्देष्य काष्तकारों को आत्मनिर्भर बनाना है। कहाकि कृषि और उद्यान की उत्तराखण्ड में अपार संभावना है। बताया कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र में सात बडे और चालीस छोटे बीज संग्रह केन्द्र और 170 रैन वॅाटर हार्वेस्टिग टैंकों का निर्माण किया जाएगा। किसानों को फसल बीमा की जानकारी देते हुए समूह के माध्यम से फल, सब्जी, जड़ी-बूटी उत्पादन को प्रोत्साहन देने और मिलने की बात कही। सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए सचिव उद्यान ने बताया कि शीघ्र ही प्रदेष में नर्सरी लागू की जा रही है।

भूस्खलन से दस दुकानें हुई मलबे में ध्वस्त

भारी बारिश से चमियाला बाजार में भूस्खलन से दस निर्माणाधीन दुकानें मलबे में दब गईं। यहां सड़क पर खड़ा डंपर भी मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया।
चमियाला-बूढ़ाकेदार सड़क पर मलबा आने से दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। भूस्खलन से आसपास की दुकान और भवनों को भी खतरा बना हुआ है।
चमियाला क्षेत्र में बुधवार शाम से ही भारी बारिश शुरू हो गई थी, जिससे रात को चमियाला बाजार में भूस्खलन हो गया। भूस्खलन से चमियाला निवासी सोहन लाल पुत्र रैठू लाल की निर्माणाधीन दुकानें मलबे में दब गईं।
दुकानों पर एक सप्ताह पूर्व छत डाली गयी थी, लेकिन भूस्खलन से आठ दुकानें पूरी तरह मलबे में दब गई। जबकि दो दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं। आसपास के भवन और दुकानों को भी भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। भूस्खलन के मलबे से चमियाला-बूढ़ाकेदार मार्ग पर गुरुवार सुबह दो घंटे तक यातायात बाधित रहा।