मुनिकीरेती पुलिस ने बिना वीजा और पासपोर्ट 18 साल से रह रहे विदेशी को पकड़ा

बिना पासपोर्ट और वीजा के पिछले 18 वर्षों से एक विदेशी नागरिक साधुवेश में तीर्थनगरी में डेरा डाले हुए है। कई साल से अवैध निवास कर रहे विदेशी नागरिक के बारे में पुलिस और एलआईयू को शुक्रवार को पता चल पाया। पुलिस सूचना मिलने के बाद मुनिकीरेती क्षेत्र स्थित नावघाट पहुंची। जब नागरिक से उसके वैध दस्तावेज मांगे गए तो उसने काफी देर तक एलआईयू टीम को प्रवचन के झांसे में उलझाए रखा। आखिरकार स्वीकार किया कि उसके पास कोई पासपोर्ट, वीजा या निवास का कोई वैध दस्तावेज नहीं है।
अवैध रूप से निवास कर रहा जर्मन नागरिक जर्गेन रुडोल्फ 1981 में भारत आया था। इस दौरान पिछले 38 साल से वह महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के विभिन्न शहरों में रहा। पिछले 18 साल से वह ऋषिकेश क्षेत्र में स्थान बदल-बदल कर रह रहा है। फिलहाल उसका मौजूदा ठिकाना मुनिकीरेती स्थित नावघाट बना हुआ है। वह गंगा किनारे बने सीढ़ी पर टेंट डालकर रह रहा है। अवैध तरीके से रहने की सूचना मिलने के बाद करीब 12 बजे मुनिकीरेती पुलिस और एलआईयू की सब इंस्पेक्टर उमा चैहान अपनी टीम के साथ पूछताछ को पहुंचे। पूछताछ के दौरान जर्गेन रुडोल्फ ने पहले तो आनाकानी की। बाद में अपना मूल निवास भी बताने से इनकार कर दिया।
बाद में उसने कुछ दस्तावेज दिखाए जिसके मुताबिक वह जर्मन नागरिक है, और 1981 में भारत आ गया था। तब से वह गेरुआ वस्त्र पहने पिछले 18 सालों से तीर्थनगरी में अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है। एलआईयू एसआई उमा चैहान के मुताबिक अवैध निवास कर रहे जर्मन नागरिक की सूचना संबंधित एंबेसी को दी जाएगी। फिलहाल अभी मामले की पड़ताल की जा रही है। वहीं थाना अध्यक्ष मुनिकीरेती आरके सकलानी का कहना है कि विदेशी नागरिक के अवैध प्रवास संबंधी मामले की गहन छानबीन हो रही है। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, विदेशी जर्गन रुडोल्फ का कहना है कि उसके पास वीजा, पासपोर्ट सहित सभी वैध दस्तावेज थे। कई साल पहले कुछ बदमाशों ने रुपयों के लालच में सारे दस्तावेज फाड़कर फेंक दिए। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। जर्मन एंबेसी में एक बार मदद की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद एंबेसी के लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। रुडोल्फ का कहना है कि अब उसने भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर लिया है। उसका नया नाम आशाराम गिरि है। पूरा विश्व मेरा कुटुंब है। परिवार में कोई नहीं है। मां गंगा ही मेरी सबसे बड़ी शुभचिंतक है।

आकर्षण केन्द्र बन रहा डोबरा-चांटी पुल का डिजाईन

टिहरी झील में बन रहे देश के सबसे लंबे सस्पेंशन डोबरा-चांटी पुल के दोनों सिरे जुड़ चुके हैं और अब आसानी से डोबरा और चांटी के बीच जाया जा सकता है। इसी आकर्षण की वजह से डोबरा पुल पर इन दिनों स्थानीय और बाहर से आने वाले लोगों का जमावडा लगा है। ऐसे में लोनिवि को भी काम के दौरान परेशानी हो रही है। शनिवार को डीएम डॉ. वी षणमुगम ने पुल का दौरा किया और सुरक्षा प्रबंध के निर्देश दिए। डीएम ने चीफ प्रोजेक्टर मैनेजर एसके राय को निर्देश दिये कि जनपद के विभिन्न विभागों में तैनात इंजीनियरों की क्षमता विकसित करने के लिए उन्हें डोबरा-चांटी पुल का स्थलीय निरीक्षण करवाते हुए पुल निर्माण में आयी तकनीकि दिक्कतों एवं तकनीकि कमियों को दूर करने के लिए हुए प्रयासों से अवगत कराया जाए। साथ ही आइआइटी रूड़की व अन्य इंजीनियरिग कॉलेज के छात्र-छात्राओं व प्रोफेसरों को भी क्षमता विकसित करने के मकसद से डोबरा-चांठी पुल निर्माण की तकनीकि का अवलोकन कराया जाय। निर्माणाधीन डोबरा-चांटी पुल की कुल लंबाई 725 मीटर है। जिसमें 440 मीटर सस्पेंशन ब्रिज हैं तथा 260 मीटर आरसीसी डोबरा साइड एवं 25 मीटर स्टील गार्डर चांटी साइड है। पुल की कुल चैड़ाई सात मीटर है, जिसमें मोटर मार्ग की चैड़ाई 5.50 (साढ़े पांच) मीटर है, जबकि फुटपाथ की चैड़ाई 0.75 मीटर है। फुटपाथ पुल के दोनों ओर बनाया जा रहा है।

कंगसाली हादसे में मारे गए बच्चों के परिजनों को दो लाख रूपए देंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनपद टिहरी गढ़वाल के कंगसाली गांव में स्कूली बच्चों के वाहन दुर्घटना में मृतक बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रूपए एवं घायलों को 50 हजार रूपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश में घटित इस घटना का संज्ञान लेने तथा मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया है। विधायक प्रतापनगर विजय सिंह पंवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है।

ज्ञातव्य है कि टिहरी गढ़वाल के कंगसाली गांव में एक स्कूल के मृतक बच्चों के परिजनों को जिला प्रशासन द्वारा प्रति मृतक एक लाख रूपये की धनराशि तथा वाहन दुर्घटना के घायलों को प्रति घायल रूपये दस हजार की धनराशि दी गयी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी घटना स्थल पर जाकर मृतक बच्चों के परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी एवं आर्थिक सहायता के रूप में मृतक बच्चों के परिजनों को एक-एक लाख रूपये एवं घायलों को पचास हजार रूपये के चेक प्रदान किये।

मृतक बच्चों की आत्मशांति को किया मौन, घायलों का जाना हाल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा कंगसाली गांव पहुंचकर मैक्स दुर्घटना में एंजल इन्टरनेशनल स्कूल के मृतक बच्चों को श्रद्धांजलि दी गयी तथा मृतक बच्चों एवं घायल बच्चों के परिजनों को सांत्वना दी गयी। साथ ही मृतक आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। वाहन दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को जिला प्रशासन द्वारा प्रति मृतक एक लाख रूपये की धनराशि तथा वाहन दुर्घटना के घायलों को प्रति घायल रूपये दस हजार की धनराशि पूर्व में ही वितरित की जा चुकी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र द्वारा आज और एक लाख रूपये प्रति मृतक के परिजनों एवं पचास हजार रूपये प्रति घायल वितरित किये जाने हेतु चौक के रूप में जिलाधिकारी को उपलब्ध कराये गये हैं।

उन्होंने कहा कि वाहन दुर्घटना दुर्भाग्यपूर्ण है इसका सभी को बहुत दुख है। वाहन दुर्घटना की सूचना मिलते ही सरकार द्वारा अधिकारियों को दूरभाष पर घायलों के त्वरित उपचार की व्यवस्था के निर्देश दिये गये। घायल बच्चें शीघ्र अस्पताल पहुंच सके इस हेतु हैलीकॉप्टर की व्यवस्था की गयी। मृतक एवं घायलों के परिजनों की क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किये जाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। प्रदेश को शीघ्र ही 600 डॉक्टर मिलने की सम्भावना है। उन्होंने कहा कि प्रतापनगर क्षेत्र के लिए राज्य सरकार द्वारा एक ओर एम्बुलेंस बोट की व्यवस्था की जायेगी।

उन्होंने कहा कि टिहरी बांध से सर्वाधिक प्रभावित प्रतापनगर की जनता हुई है इसे ध्यान में रखते हुए डोबरा चांठी पुल निर्माण हेतु सरकार द्वारा एकमुश्त ही रूपये 88 करोड़ दिये गये। विश्वास है कि आगामी माह फरवरी तक डोबरा चांठी पुल जनता को समर्पित कर दिया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने दुर्घटना के मृतक एवं घायल बच्चों के परिजनों को आश्वस्त किया कि दुर्घटना की जांच चल रही है। इसमें जो भी दोषी पाया जायेगा उनके विरूद्ध नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जायेगी। मृतकों एवं घायलों के परिजनों की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा भारत सरकार से प्रदेश के प्रत्येक विकास खण्ड में एक केन्द्रीय विद्यालय खोलने की मांग की गयी है।

ट्रक खड़ा कर सो रहा था ड्राइवर, रूपयों से भरी कमीज लेकर भागा बंदर

मुनिकीरेती के ढालवाला क्षेत्र में ट्रक के अंदर सो रहे व्यक्ति की कमीज बंदर उठा ले गया। कमीज की जेब में करीब सात हजार रुपए, जरूरी दस्तावेज तथा गाड़ी की चाबी थी। एक स्थानीय ने बंदर को कुछ खाने को फेंका तो बंदर लालच में आकर कमीज छोड़ गया। कमीज में सात हजार रुपए, आईडी और गाड़ी की चाभी है। शनिवार की दोपहर चीनी गोदाम रोड ढालवाला में चाय की दुकान चलाने वाले कमलेश्वर कोठारी ने पुलिस को फोन से सूचना दी कि एक बंदर किसी की कमीज उठा ले आया है।

कमलेश्वर के मुताबिक बंदर अपने साथ कमीज लेकर घूम रहा है, जब उन्होंने उसे खाने की वस्तु दी तो उसने कमीज नीचे छोड़ दी। सूचना पाकर चौकी प्रभारी ढालवाला विनोद कुमार शर्मा ने दो कांस्टेबल को मौके पर रवाना किया।

पुलिस कर्मियों ने छोड़ी गई कमीज से आईडी देखने के बाद व्यक्ति की तलाश की तो उसकी पहचान सुरेश कुमार यादव पुत्र आदित्य राम यादव निवासी स्टार पोस्ट ऑफिस पीडी थाना कौंधियारा जिला इलाहाबाद के रूप में हुई। पुलिस कमीज लेकर चौकी आ गई और सुरेश कुमार यादव को चौकी बुलाया।

चौकी पहुंच सुरेश ने बताया कि वह हिलवेज कंपनी में ट्राला चलाता है। चीनी गोदाम रोड पर ट्राला खड़ा कर वह सो गया था। उसी दौरान बंदर ने केबिन के अंदर घुसकर उसकी कमीज उठाकर चलता बना। वे काफी देर से कमीज में रखे दस्तावेज, रुपयों और गाड़ी की चाभी को लेकर परेशान थे। मौके पर पुलिस ने सुरेश कुमार यादव को उसके 7000 रुपए, आधार कार्ड, पैन कार्ड और गाड़ी की चाभी सौंप दी

लक्ष्मण झूला पुल का विकल्प तलाशन में जुटी सरकार, जल्द तैयार होगा नया पुल

ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला पुल को बंद किए जाने के फैसले पर राज्य सरकार अडिग है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जन सुरक्षा सरकार के लिए सवरेपरि है। इसीलिए लक्ष्मण झूला पुल पर किसी भी तरह की आवाजाही तुरंत रोकने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार लक्ष्मण झूला पुल का विकल्प जल्द ही तैयार कर लेगी। वहां वैकल्पिक पुल बनाने का निर्णय लिया गया है। लक्ष्मण झूला पुल को धरोहर के तौर पर संरक्षित रखने की कार्ययोजना भी बनाई जाएगी। वहीं, पुल पर पैदल आवाजाही जारी रखने से आम जन को राहत है। उधर, इस का असर अब रामझूला पुल पर पड़ने वाला है। रामझूला पुल पर अब दोगुना भार पड़ जाएगा, जो सुरक्षा की दृष्टि से इस पुल के लिए भी चिंता का विषय है।
शासन ने शुक्रवार को लक्ष्मण झूला पुल पर आवाजाही रोकने के आदेश जारी किए, लेकिन स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। इस बीच शनिवार को यमकेश्वर क्षेत्र की विधायक ऋतु खंडूड़ी ने लक्ष्मण झूला पुल के संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि छह माह पहले आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों से लक्ष्मण झूला पुल की फिजिबिलिटी पर अध्ययन कराया गया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार इस झूला पुल की स्थिति ऐसी नहीं है कि लोगों की आवाजाही को अनुमति दी जा सके। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले में भारी भीड़ को देखते हुए इस पर आवाजाही जारी रखना उचित नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा के दृष्टिगत लक्ष्मण झूला पुल पर किसी भी तरह की आवाजाही को तुरंत रोकने का निर्णय किया गया है। साथ ही झूलापुल का विकल्प जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्मण झूला पुल एक सांस्कृतिक धरोहर है। यह ऋषिकेश का प्रमुख आकर्षण का केंद्र और देश-विदेश में इसकी ख्याति है। कई फिल्मों का फिल्मांकन भी यहां हुआ है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण झूला पुल का समुचित रखरखाव करते हुए इसे धरोहर के तौर पर संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों की राय से कार्ययोजना बनाई जाएगी।
उधर, शासन ने भले ही लक्ष्मण झूला पुल पर आवाजाही पर रोक लगा दी हो, मगर शनिवार को भी इस पर लगातार आवाजाही होती रही। हालांकि, प्रशासन की ओर से शासन के फैसले का विरोध कर रहे लोगों को समझाने की कोशिशें की गईं, मगर यह परवान नहीं चढ़ पाईं। वहीं, माना जा रहा है कि इस झूला पुल के बंद होने से रामझूला पर अधिक दबाव बढ़ेगा। यही नहीं, तीन दिन बाद कांवड़ यात्रा भी शुरू होने जा रही है। ऐसे में कांवड़ में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के साथ ही लक्ष्मण झूला पुल की सुरक्षा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

लक्ष्मणझूला पुल पर खतरा बढ़ा, समय रहते नही जागी सरकार

ऋषिकेश में लक्ष्मणझूला पुल की मियाद खत्म हो चुकी है, लिहाजा इस पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही अब खतरे से खाली नहीं है। इस बात का खुलासा पीडब्ल्यूडी की सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। विभाग ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
मामला इसलिए और अहम है, क्योंकि एक सप्ताह बाद ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। प्रशासन से कांवड़ियों के नीलकंठ जाने के लिए लक्ष्मणझूला के जरिये ही रूट तय किया है। लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण 1929 में हुआ था, जिसे आवाजाही के लिए 1930 में खोला गया था। करीब 90 साल पुराने इस पुल समेत 1986 में बने रामझूला पुल का पीडब्ल्यूडी के डिजाइनर पीके चमोली ने कुछ दिन पहले तकनीकी सर्वे किया था।
इसमें पुल की लोडिंग क्षमता और आयु आदि की जांच की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 89 साल पहले के डिजाइन और क्षमता के हिसाब से पुल आज इस स्थिति में नहीं है कि इस पर अब बड़ी संख्या में लोग आवाजाही कर सकें।

रामझूला पुल सुरक्षित
पुराने समय में झूला पुलों का निर्माण करते हुए पुल की क्षमता का ध्यान नहीं रखा जाता था, जबकि वर्तमान में 500 किलोग्राम प्रति स्क्वायर मीटर की क्षमता के झूला पुल बनाए जाते हैं।
सर्वे रिपोर्ट से स्थानीय पुलिस को भी अवगत करा दिया गया है। पीडब्ल्यूडी (नरेंद्रनगर डिवीजन) के एक्सईएन मोहम्मद आरिफ खान का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार अगला कदम उठाया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने अपने सर्वे में हालांकि आवाजाही के लिहाज से रामझूला पुल को सुरक्षित पाया है। इससे आवाजाही की जा सकती है। बता दें कि इस पुल को बने हुए भी 33 साल हो चुके हैं।
वहीं, नरेंद्र नगर के विधायक सुबोध उनियाल ने बताया कि बोर्ड बैठक में यह मामला पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने उठाया था। अपर मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी और डीएम पौड़ी को पुल के दोनों ओर बेरिकेडिंग लगाने को कहा गया है, ताकि एक बार में अधिक संख्या में लोग पुल पर न चढ़ें।

वाटरड्रोम के लिए एमओयू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड

टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन की दिशा में ठोस शुरूआत की गई है। बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति में टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन हेतु वाटरड्रोम की स्थापना के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण व राज्य सरकार के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। वाटर ड्रोम की स्थापना के लिए एमओयू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। इसी प्रकार पिथौरागढ़ स्थित नैनी सैनी में हवाई सेवाओं के सफल संचालन के लिए भी सीएनएस-एटीएम (कम्यूनिकेशन, नेवीगेशन, सर्विलांस एंड एयर ट्रैफिक मेनेजमेंट सर्विसेज) एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए।
मुख्यमंत्री ने दोनों एमओयू पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासित अवसर बताते हुए कहा कि टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन के लिए बड़ी शुरूआत हुई है। इससे टिहरी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। क्षेत्र में पर्यटन संबंधी गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। जिससे स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों को लाभ होगा। पिछले कुछ समय में टिहरी की पहचान प्रमुख टूरिस्ट डेस्टीनेशन के तौर पर बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ राज्य का दूरस्थ क्षेत्र है। इसका सामरिक महत्व भी है। नैनी सैनी में हवाई सेवाओं के संचालन से पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी बहुत सुविधा होगी। राज्य सरकार पिथौरागढ़ को डेस्टीनेशन के तौर पर विकसित कर रही है। वहां 50 हेक्टेयर में ट्यूलिप गार्डन बनाया जाएगा। जो कि देश का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन होगा।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव उषा ने बताया कि यह एमओयू भारत सरकार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। वाटरड्रोम के लिए पहली बार किसी राज्य के साथ एमओयू किया गया है। उड़ान योजना के क्रियान्वयन में मुख्यमंत्री जी व उत्तराखण्ड सरकार ने काफी सक्रियता दिखाई है। प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने हमेशा सहयोग दिया है। उड़ान योजना में एयरपोर्ट डेवलपमेंट की लागत का सौ प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

उषा ने कहा कि पिथौरागढ़ में हवाई सेवाओं के संचालन को बहुत गम्भीरता से लिया गया है। राज्य में 13 हेलीपोर्ट विकसित किए जाने हैं इनमें से 10 की डीपीआर दे दी गई है। जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट को भी विकसित किया जा रहा है। इसके टर्मिनल की क्षमता को 150 से बढ़ाकर 1800 किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में फिक्की के सहयोग से देहरादून में हेलीकाप्टर कान्क्लेव आयोजित किया जाएगा। उन्होंने पवन हंस की ओर से सीएसआर के अंतर्गत शिक्षा के क्षेत्र में 60 लाख रूपए की सहयोग राशि दिए जाने की बात भी कही।
सचिव नागरिक उड्डयन, उत्तराखण्ड सरकार दिलीप जावलकर ने बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत सी-प्लेन संचालन के लिए टिहरी झील को चयनित किया गया है। योजना के तहत वाटरड्रोम की स्थापना व हवाई सेवाओं के संचालन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण व उत्तराखण्ड सरकार के मध्य त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके लिए टिहरी झील के निकट 2.5 हैक्टेयर भूमि का चयन कर लिया गय है। वाटरड्रोम की स्थापना ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की तरह की जाएगी। उड़ान योजना के तहत अवस्थापना पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति भारत सरकार से की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत संचालित होने वाली हवाई सेवाओं के लिए एटीएफ पर वैट की दर को घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी सोना सजवाण, विधायक विनोद कण्डारी, धन सिंह नेगी, विजय सिंह पंवार, शक्ति लाल शाह, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक एस चड्ढा, अपर सचिव नागरिक उड्डयन उत्तराखण्ड सोनिका, डीएम टिहरी वी.षणमुगम, मुख्यमंत्री के नागरिक उड्डयन सलाहकार कैप्टन दीप श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

ब्रेक फेल होने से पेड़ से टकराई बस, एक घायल

प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर लौट रही एक बस ब्रेक फेल होने के कारण पेड़ से टकरा गइ। इससे एक व्यक्ति घायल हो गया।

पुलिस के अनुसार, एटा के तीर्थयात्री बस (यूपी 55 टी 1294) में सवार होकर नीलकंठ दर्शन कर तपोवन से ऋषिकेश बाई पास होते हुए एटा के लिए लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक बस भद्रकाली के पास खड़े एक डंपर से टकरा गई और पेड़ पर जाकर अटक गई। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया।

ढालवाला चौकी प्रभारी विनोद कुमार फोर्स के पहुंचे और घायल बस ड्राइवर अखिलेश पुत्र श्रीकांत को राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया। वहीं, बस को क्रेन की सहायता से उठाकर किनारे किया गया। साथ ही श्रद्धालुओं को अन्य बस से बस अड्डा पहुंचाया गया।

जिस्मफरोशी के धंधे का पुलिस ने किया भंडाफोड़, रेट जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

मुनिकीरेेती पुलिस ने जिस्म फरोशी करते छह महिलाओं सहित चार पुरुषों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से आपत्तिजनक सामाग्री भी बरामद की है। पुलिस की इस कामयाबी पर सभी प्रशंसा की है।
मुनिकीरेती पुलिस के अनुसार तपोवन स्थित होटल शिवान्ता में होटल संचालक की ओर से जिस्म फरोशी का व्यापार करने की सूचना एक महिला ने पुलिस को दी। मौके पर पुलिस क्षेत्राधिकारी उत्तम सिंह जिमिवाल, थानाध्यक्ष आरके सकलानी ने फोर्स के साथ होटल शिवान्ता में सोमवार की देर रात को दबिश दी। जहां छह महिलाएं और तीन पुरुष आपत्तिजनक स्थिति में मिले। पुलिस ने सभी नौ महिला-पुरुष तथा होटल संचालक को देह व्यापार अधिनियम में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी शाहनूर आपराधिक किस्म का व्यक्ति है। जिस पर थाना मुजफ्फरनगर में वर्ष 2018 में शस्त्र अधिनियम में मुकदमा पंजीकृत है। पुलिस अन्य लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है।

इनकी महिला-पुरुषों की हुई गिरफ्तारी
मुनिकीरेती पुलिस ने गिरफ्तार महिला की पहचान 47 वर्षीय साधना पत्नी स्व. अशोक कुमार गुप्ता निवासी रामपुरी थाना मुजफ्फरनगर, 23 वर्षीय आयशा पुत्री आरीफ निवासी हापुड चुंगी मेरठ, 23 वर्षीय शिबा पुत्री शादाब निवासी खालापार मुजफ्फरनगर, 19 वर्षीय साहना पत्नी परवेज निवासी बुन्दुगढ थाना ननौता जिला सहारनपुर, 22 वर्षीय रेश्मा पुत्री मुस्तफ, 37 वर्षीय तोहमिना पत्नी स्व. मो. कलाम दोनों निवासी ग्राम चाकपडा थाना स्यालदा पश्चिम बंगाल के रूप में कराई। जबकि गिरफ्तार पुरुषों की पहचान 21 वर्षीय परवेज पुत्र आकिल निवासी ग्राम बुन्दुगढ थाना ननौता जिला सहारनपुर, 25 वर्षीय जान मोहम्मद उर्फ अमित पुत्र वसीरुद्घीन निवासी ग्राम ढण्ढेरा थाना ककरौली जिला मुजफ्फरनगर, 24 वर्षीय शाहनूर पुत्र गफूर निवासी जामियानगर थाना मुजफ्फरनगर को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके अलावा होटल शिवान्ता संचालक 50 वर्षीय अनूप सिंह राणा पुत्र चंदन सिंह राणा निवासी मौहल्ला सिद्घपुरम, हर्रावाला थाना डोइवाला को भी गिरफ्तार किया है।

यह सामान हुआ बरामद
मुनिकीरेती पुलिस ने होटल शिवान्ता में दबिश के दौरान गिरफ्तार महिला-पुरुषों से 13 मोबाइल फोन बरामद किए है। इसके अलावा दो दर्जन सिम, भारी संख्या में आपत्तिजनक समाग्री तथा 10000 रुपए नगद बरामद किए है।

ऋषिकेश में चार माह पूर्व किराए में लिया था फ्लैट
पुुलिस क्षेत्राधिकारी उत्तम सिंह जिमिवाल ने बताया ‌कि गैंग की मुखिया साधना है, उसने पति अशोक की मृत्यु हो जाने के बाद राशिद उर्फ राहुल से ‌शादी कर ली। दोनों मुजफ्फरनगर में वर्ष 2008 से देह व्यापार में संलिप्त थे। दोनों ने चार माह पूर्व ही ऋषिकेश में सीमा डेंटल के एक फ्लैट किराए में लिया था। होटल शिवान्ता के संचालक अनूप राणा की मुलाकात इनसे मुजफ्फरनगर में हुई थी।

जस्ट डॉयल से करते थे ग्राहकों की तलाश
सीओ उत्तम सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान साधना और राशिद ने बताया कि जस्ट डायल ऐप से जरिए यह ग्राहकों की तलाश किया करते थे। साधना ग्राहकों को तवोपन में अन्य होटलों पर कमरा किराए पर लेने को कहती थी। इसके बाद जान मोहम्मद उर्फ अमित ग्राहकों से रकम वसूल कर ‌होटल शिवान्ता में ग्राहकों की पसंद के मुताबिक महिलाओं को भेजता था।

एक घंटा का एक हजार, पूरी रात का सात हजार रुपए होता था चार्ज
थानाध्यक्ष आरके सकलानी ने बताया कि यह महिलाएं पूरी रात होटल में बिताने के पांच से सात हजार रुपए लेती थी। जबकि साधना व राशिद उक्त ग्राहकों से इससे दुगनी कीमत वसूलते थे। इसके अलावा दिन में यह ‌महिलाएं एक घंटे के एक हजार रुपए वसूलती थी।

फर्जी पहचान पत्र से लेते थे होटल में कमरा
पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों में परवेज-साहना और शिबा-शाहनूर आपस में पति पत्नी है। जो सहमति से जिस्म फरोशी कराते थे। साधना व राशिद अन्य सभी महिलाओं को पहचान छुपाने के लिए फर्जी पहचान पत्र उपलब्ध कराते थे। इन फर्जी पहचान पत्र के आधार पर यह महिलाएं होटल में कमरा किराए पर लेती थी।