होटल में एक साथ बैठक लाॅकडाउन का किया उल्लंघन, पुलिस ने काटा चालान

मुनिकीरेती पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान होटल में सामाजिक दूरी का उल्लंघन करने पर 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने होटल संचालक का दस हजार और 10 लोगों का 500-500 रुपये का चालान किया है।
थानाध्यक्ष मुनिकीरेती राम किशोर सकलानी ने बताया कि शनिवार की रात्रि सूचना प्राप्त हुई कि तपोवन क्षेत्र के घुंघतानी होटल में कुछ लोग शोर शराबा और हुडदंगबाजी कर रहे है। थानाध्यक्ष ने मौके पर चैकी इंचार्ज विनोद कुमार शर्मा को भेेजा। चैकी इंचार्ज मौके पर पहुंचे, तो पाया कि रेस्टोरेंट संचालक कपिल 10 युवकों को खाना परोस रहा है। इस दौरान सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा गया। मौके पर शोर शराबा करने वाले सभी युवकों को तपोवन चैकी ले जाकर 500-500 रुपये का चालान किया गया। साथ ही होटल संचालक का 83 पुलिस एक्ट में 10 हजार रुपये का चालान किया गया।

अधिक दाम वसूलने पर आढ़ती का थोक लाइसेंस निरस्त किया

कृषि उत्पादन मंडी समिति में तोता राम एंड संस नाम की दुकान पर फुटकर में सब्जी बेची जा रही है। यह जानकारी मिलते ही मंडी समिति के अध्यक्ष विनोद कुकरेती ने आढ़ती का थोक लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
यह जानकारी देते हुए मंडी अध्यक्ष विनोद कुकरेती ने बताया कि तोताराम एंड संस के मालिक के पास केवल थोक में फल और सब्जियां बेचने का लाइसेंस है। मगर लगातार सूचना मिल रही थी कि मालिक रिटेल में महंगे दामों पर फल और सब्जी बेच रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तोताराम एंड संस के मालिक को थोक में बेचने के लिए जारी किया गया लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। बताया यदि और किसी आढ़ती की इस प्रकार की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ भी यही कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने कृषि उत्पादन मंडी समिति के अंदर फल और सब्जियों के थोक रेट की लिस्ट भी जारी की है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के पहले स्टेशन पर स्पेशल ट्रेन का ट्रायल

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के योग नगरी रेलवे स्टेशन पर सीसीआरएस स्पेशल ट्रेन का ट्रायल किया गया। ट्रायल का निरीक्षण करने पहुंचे रेल सुरक्षा आयुक्त ने ट्रेन का ट्रायल सफल रहा या नहीं, इस पर कुछ नहीं बोला। वहीं डीआरएम मुरादाबाद मंडल का कहना है कि ट्रायल सफल रहा, लेकिन इसकी फाइनल रिपोर्ट रेल सुरक्षा आयुक्त देंगे। वहीं, सूत्रों के अनुसार स्टेशन में रेल लाइन के समीप कुछ खामियां पाई गई हैं।
गौरतलब है कि पिछले काफी लंबे समय से योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन में ट्रेन के ट्रायल के लिए रेलवे विकास निगम वीरभद्र रेल लाइन और स्टेशन का कार्य जोरों से किया जा रहा था। इसके बाद मंगलवार को यहां स्टेशन मेें रेल सुरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक के नेतृत्व में सीसीआरएस स्पेशल ट्रेन के संचालन का ट्रायल किया गया।
इसके बाद ट्रायल की रिपोर्ट भी पेश की जानी थी। मगर रिपोर्ट पेश करने के बजाय मौके पर उपस्थित सभी आला अधिकारी चुप्पी साध गए। वहीं, संपर्क साधने पर डीआरएम मुरादाबाद तरुण प्रकाश ने बताया कि उनके अनुसार सीसीआरएस स्पेशल का ट्रायल सफल रहा है। वहीं, सूूत्रों के अनुसार प्लेटफार्म नंबर एक का टीनशेड काफी बाहर निकला हुआ है। समीप में रेल लाइन के ऊपर विद्युत लाइन होने से ट्रेन के संचालन के दौरान करंट का खतरा बना हुआ है।

उत्तराखंड में जश्न का माहौल, मुख्यमंत्री के कार्यो की हो रही प्रशंसा

गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री ने एक ओर मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को धराशायी कर दिया। सरकार ने सत्र को आगे बढ़ाते हुए भराड़ीसैंण में 26 मार्च को बजट पास करवाने का निर्णय लिया है।
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सात मार्च तक सदन को जारी रखने का फैसला लिया गया, लेकिन इस दौरान बजट पर सामान्य चर्चा सात मार्च को ही होगी। बजट पास कराने के लिए इसी सत्र में सदन 25 से 27 मार्च तक भराड़ीसैंण में ही चलेगा। 25 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होगी। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव इसी दिन स्वीकार किए जाएंगे। 26 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होने के बाद उन्हें स्वीकृत किया जाएगा।
इससे पहले कार्यमंत्रणा समिति ने सात मार्च तक बजट पारित करने का फैसला किया था। इस पर विपक्ष ने खासा हो हल्ला मचाया था और बजट सत्र बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद इस पर भी विचार हुआ कि होली के बाद दो दिन का सत्र देहरादून में आयोजित कर लिया जाए। लेकिन इसमें तकनीकी अड़चन रही। सरकार बजट पास कराए बिना सत्र को समाप्त नहीं कर सकती थी। देहरादून में बजट पास कराने का मतलब होता कि सरकार को भराड़ीसैंण का सत्र समाप्त करना पड़ता और देहरादून में अलग से सत्र आयोजित करना पड़ता। कार्य संचालन नियमावली में स्थान और समय दोनों को लेकर सत्र की घोषणा की व्यवस्था है।

भराड़ीसैंण में जश्न का माहौल
मौसम की आंखमिचैली के बीच सरकार पर ग्रीष्मकालीन राजधानी का जश्न हावी रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल समेत भाजपा विधायकों ने जमकर गुलाल खेला। ढोल व दमाऊ की थाप पर जमकर नाच किया। इस दौरान स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वहीं, गैरसैंण के आसपास की महिलाओं ने झोड़ा चांचरी नृत्य से अपनी खुशी का इजहार किया। तो विधायकों ने स्थानीय लोगों के साथ ढोल की थाप पर पांव थिरकाए। इन सब से दूर रहे विपक्ष ने सदन में प्रश्न काल नहीं चलने दिया और सरकार को नियमों व परंपराओं में बांधे रखने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार देर शाम ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की थी, जिसका असर पूरे उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है। आंदोलनकारियों की गैर मौजूदगी में जगह-जगह चेकिंग से भी लोगों को रियायत मिली। भराड़ीसैंण के विधानमंडल भवन के सामने ढोल दमाऊ की थाप के बीच जश्न का माहौल बन गया। गैरसैंण के आसपास गांव गवाड़ तल्ला, सिलंगी, सिमटी समेत अन्य गांवों से आई महिलाएं जश्न में शामिल हुई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहां पहुंचे तो जोश और उत्साह बढ़ गया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री व भाजपा विधायकों का स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का भी इसी तरह स्वागत हुआ। उत्साह का आलम ये रहा कि नेता फूल मालाओं से लदे सदन में पहुंच गए।
इसके उलट विपक्ष खामोश, जश्न से दूर रहते हुए बैकफुट पर दिखाई दिया।

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपा कर किया सम्मान
सत्र शुरू होने के कुछ देर बाद नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत सदन में पहुंचे तो सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपा कर उनका सम्मान किया। सामान्य रूप से नेता सदन के पहुंचने को सत्ता पक्ष के विधायक खामोशी से स्वीकार करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भी कुछ समय तक ही सदन में रहे।

कुंभ की व्यवस्थाएं अलौकिक और दिव्य बनाने की तैयारी

वर्ष 2021 में आयोजित हो रहे हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे।
सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।
वहीं, महाकुंभ के आयोजन के लिए सरकार ने केंद्र से भी पांच हजार करोड़ की अलग से मांग की है। अभी तक सरकार ने कुंभ के कार्यों के लिए 250 करोड़ का बजट जारी किया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक महाकुंभ के लिए केंद्र से सहायता जल्द मिलने की उम्मीद है।

सरकार का अनुमान है कि महाकुंभ में करीब 10 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से सरकार ने भीड़ नियंत्रण पर भी फोकस किया है। सुरक्षा व्यवस्था पर 60 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। प्रदेश सरकार ने बजट में जनवरी 2021 में प्रस्तावित कुंभ मेले के लिए पुलिस विभाग के लिए 60.12 करोड़ का प्रावधान किया है। हालांकि कुंभ मेले को छोड़कर पुलिस आधुनिकीकरण और जेलों के उद्धार को कुल 174.33 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पुलिस महकमे में थाना और नई चैकियों के भवनों के निर्माण होने की उम्मीद जगी है।
सरकार ने बजट में प्रस्तावित कुंभ मेले में बेहतर व्यवस्थाओं और पुलिस आधुनिकीकरण के संकल्प को दोहराया है। कहा गया कि जनसहभागिता से शांति बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पर्यटन गतिविधियों को सुचारु बनाने को पुलिस विभाग का निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून के लिए चलेगी तेजस ट्रेन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में रेल मंत्री पीयूष गोयल से भेंट कर उत्तराखण्ड में रेल सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए रेल मंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड की रेल परियोजनाओं के लिए बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर नई दिल्ली-हरिद्वार-देहरादून के लिए समस्त आधुनिक सुविधाओं से युक्त तेजस ट्रेन को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। पाथ-वे उपलब्ध होते ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। उत्तराखण्ड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम दिखने लगा है। इसके लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और उनकी टीम की प्रशंसा की जानी चाहिए। हमें दूसरे राज्यों में जो समस्याएं आती है, उत्तराखण्ड में नहीं आई। पूरा प्रयास रहेगा कि अगले ढ़ाई वर्ष में श्रीनगर गढ़वाल तक रेल पहुंचा दी जाए। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में इनोवेटिव काम किया जाएगा। वर्ष 2021 मे हरिद्वार में होने वाले कुम्भ मेले के लिए रेलवे विभाग, प्रयागराज की भांति ही पूरी तैयारी करेगा। देहरादून, हरिद्वार स्टेशनों की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।दून रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण इस वर्ष नवम्बर तक कर दिया जाएगा। जल्द ही रेलवे के उच्च अधिकारियों के दल को उत्तराखण्ड भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से सम्भावित यातायात के लिए मजबूत तंत्र जरूरी
इससे पूर्व बैठक में मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन परियोजना की वर्तमान प्रगति से केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि 126 किमी0 लम्बी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के अन्तर्गत फॉरेस्ट लैंड को नॉन फॉरेस्ट लैंड में परिवर्तन को स्वीकृति मिल गयी है। उन्होंने कहा कि 167 हेक्टेयर प्राईवेट रेवेन्यू लैंड का अधिग्रहण कर लिया गया है। परियोजना के लिए जियो टैक्नीकल इन्वेस्टीगेशन भी पूर्ण हो गयी है। इसके अन्तर्गत एक आरयूबी (रोड अंडर ब्रिज) एवं एक आरओबी (रोड ओवर ब्रिज) को तैयार कर लिया गया है, जिन्हें नियमित यातायात के लिए खोल दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस क्षेत्र में रेल यातायात में वृद्धि होना स्वाभाविक है। इसे देखते हुए हरिद्वार-रायवाला अथवा हरिद्वार-देहरादून के मध्य रेल लाइन का दोहरीकरण किया जाना चाहिए, साथ ही, पुराने ऋषिकेश में भारी माल लादने व उतारने एवं कंटेनरों से लदे रेल वैगनों के रूकने के लिए एक रेल कंटेनर डिपो स्थापित किए जाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देहरादून व योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन के मध्य सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए लक्सर की भांति रायवाला स्टेशन से पहले डाइवर्जन लाइन का निर्माण किये जाने की भी जरूरत है।

रूड़की-देवबंद रेल परियोजना
मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री को बताया कि देवबन्द-रूड़की रेल लाईन परियोजना को विशेष रेल प्रोजेक्ट का दर्जा प्रदान किया गया है। उक्त योजना को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में 50ः50 प्रतिशत के रेलवे एवं उत्तराखण्ड राज्य के मध्य अंशदान के रूप में स्वीकृत दी गयी है। उत्तराखण्ड सरकार द्वारा परियोजना हेतु राज्य सरकार का अंशदान के रूप में वर्तमान तक कुल रू0 261.61 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा अब तक अवमुक्त धनराशि को पर्याप्त मानते हुए परियोजना की अवशेष धनराशि का वित्त पोषण रेल मंत्रालय अथवा भारत सरकार द्वारा वहन किए जाने का अनुरोध किया।

नई रेल लाईनों की स्वीकृति का अनुरोध
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रेल मंत्री से लालकुंआ-खटीमा, टनकपुर-बागेश्वर और काशीपुर-धामपुर नई रेल लाईनों की स्वीकृति का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उक्त तीनों रेल लाईनों का पर्वतीय क्षेत्र के विकास और सामरिक दृष्टि से काफी महत्व है। लालकुआं-शक्तिफार्म-सितारगंज-खटीमा नई रेल परियोजना को स्वीकृति देते हुए इसका शत प्रतिशत वित्त पोषण केंद्र द्वारा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ व बागेश्वर क्षेत्र में आर्थिक विकास की गति को तेज करने, पर्यटक के विकास और सस्ती परिवहन सुविधा के लिए टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की नितांत आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने काशीपुर से धामपुर वाया जसपुर नई रेल लाइन का भी शत प्रतिशत वहन केंद्र सरकार से करने का आग्रह किया। बैठक में रेल मंत्रालय और उत्तराखण्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

देहरादून जाने से पहले करा ले अपने वाहन की फिटनेस

राजधानी देहरादून सहित आसपास के इलाकों में प्रदूषण फैला रहे वाहनों की अब खैर नहीं होगी। परिवहन विभाग की ओर से आज से बडे़ स्तर पर जांच अभियान शुरू किया जा रहा है।
बताया जा रहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर वायु प्रदूषण नियंत्रण को गठित मॉनीटरिंग कमेटी की पहल पर परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा गाड़ियों की जांच की जाएगी। अभियान चलाने को लेकर एआरटीओ प्रवर्तन अरविंद पांडे की अगुवाई में अफसरों की सात सदस्यीय टीम भी गठित कर दी गई है।
एआरटीओ (प्रवर्तन) अरविंद पांडे ने बताया कि अभियान की शुरुआत सुबह सात बजेे से हुई। इस दौरान गाड़ियों के प्रदूषण जांच के साथ ही ओवरलोडिंग, ओवरस्पीड, फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस की भी जांच की जाएगी। अभियान के दौरान प्रदूषण जांच पर खास फोकस रहेगा। जिन गाड़ियों के प्रदूषण निर्धारित मानकों से अधिक पाए गए, उन गाड़ियों पर तत्काल मौके पर ही नियमों के तहत भारी जुर्माना लगाने के साथ ही सीज करने की भी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद पांच माह पहले परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा गाड़ियों के प्रदूषण जांच को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था इस दौरान हजारों हजारों गाड़ियों का चालन करने के साथ ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी।
गाड़ियों के प्रदूषण जांच कराने को लेकर जबरदस्त मारामारी मची थी। आलम यह रहा कि गाड़ियों की प्रदूषण जांच कराने को लेकर जांच केंद्रों पर लंबी लाइनें लगी रहीं। गाड़ियों के प्रदूषण की जांच जल्द की जा सके, इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से शहर में 100 से अधिक जांच केंद्र खोले गए थे।

मुख्यमंत्री की पहल से कुपोषण से मुक्त हुए बच्चें, बेहतर परिणाम से सरकार खुश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर अतिकुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना के अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा गोद लिए गए कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। विगत वर्ष सितम्बर माह में ‘‘कुपोषण मुक्ति हेतु गोद अभियान’’ की शुरूआत की गई थी। मुख्यमंत्री सहित मंत्रीगणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने चिन्हित अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था। कुपोषित बच्चों को न केवल गोद लिया गया बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधि व अधिकारी, इन बच्चों के अभिभावकों के लगातार सम्पर्क में रहे। इसके सार्थक परिणाम भी मिल रहे हैं। 6 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं, जबकि 11 बच्चों की ग्रेड में सुधार हुआ है और 207 बच्चों के वजन में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, ‘‘कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी जिम्मेवारी लेने की पहल की गई थी। इसके सुखद परिणाम मिलने लगे हैं। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। हमारा उद्देश्य प्रदेश को कुपोषण से पूरी तरह से मुक्त करना है। लगभग सभी गोद लिए गए बच्चों के वजन में संतोषजनक वृद्धि हुई है। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी गोद लिए बच्चे कुपोषण से मुक्त होंगे।’’

जनता की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्धः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने “आपकी सरकार आपके द्वार“ के तहत डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत वन विभाग से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर वन्यजीव संघर्ष के मामलों में राहत वितरण निधि के चेक वितरित किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वन विभाग से संबंधित क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के समाधान पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान समय से हो तभी उसका सही लाभ मिल पाता है। राज्य सरकार आपकी समस्याओं के निराकरण के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि प्रदेश को अच्छी सुविधाएं और अच्छी सेवाएं प्रदान की जाएं। क्षेत्र में जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूर्यधार योजना के तैयार होने के बाद 29 गावों को ग्रेविटी बेस्ड पानी उपलब्ध होगा। सौंग का कार्य भी लगभग अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि सुस्वा नदी को बारह मास साफ पानी उपलब्ध कराया जा सके और रिस्पना नदी को भी पुनर्जीवित करना सरकार की प्राथमिकताओं में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य होने के नाते पशुओं के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है। पशुधन का उपयोग करने के बाद हमें उन्हें छोड़ना नहीं चाहिए। पशु पक्षी पेड़ पौधे हमारे सिस्टम का ही हिस्सा है। प्रकृति का संरक्षण करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना बहुत ही आवश्यक है।

पौराणिक मान्यताओं को आज भी निभा रहा श्री भरत मंदिर

वसंतोत्सव-2020 के तहत बसंत पंचमी के शुभमुहुर्त पर भगवान श्री भरत की शोभायात्रा धूमधाम से नगर क्षेत्र में निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भरत के जयकारों से डोली का स्वागत कर पुष्पवर्षा की। पावन पर्व पर श्रद्घालुओं ने भगवान भरत के दर्शन कर पुण्य अर्जित किए।
बुधवार को झंडा चैक स्थित श्री भरत मंदिर परिसर से शोभा यात्रा का आयोजन हुआ। इससे पूर्व मंदिर में श्री भरत भगवान की पूजा अर्चना विधिवत रूप से की गई। शोभा यात्रा झंडा चैक स्थित मंदिर से शुरू होकर मायाकुंड होते हुए विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों से गुजरकर मां गंगा के तट पहुंची। यहां पर श्री भरत भगवान की मूर्ति को गंगा स्नान करवाने के बाद पूजा अर्चना की गई। यहां से शोभा यात्रा सुभाष चैक, श्री भरत मंदिर रोड और झंडा चैक से होते हुए मंदिर परिसर में संपन्न हुई। शोभा यात्रा का नगर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक, राजनैतिक, धार्मिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत अशोक प्रपन्न शर्मा, कार्यक्रम संयोजक हर्षवर्धन शर्मा, मेयर अनिता ममगाईं, पंडित वत्सल शर्मा, पंडित वरुण शर्मा आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने किए दर्शन
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बसंत पंचमी के अवसर पर भरत मन्दिर ऋषिकेश में आयोजित बसन्तोत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को बसन्त पंचमी की शुभकामनायें दी तथा भरत मन्दिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बसन्तोत्सव प्रकृति के श्रृगांर एवं नई ऊर्जा का संचार करने वाला पर्व है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने आयोजकों की इस आयोजन के लिए भी सराहना की।