आंदोलन को धार देने के लिए की थी राजनीति, ऐसे थे रणजीत सिंह वर्मा

जननायक और पूर्व विधायक रहे रणजीत सिंह वर्मा की अंतिम यात्रा में आज सुबह भारी हुजूम उमड़ा। सुबह दस बजे उनके आवास से अंतिम यात्रा निकली और लक्खीबाग देहरादून में उनका अंतिम संस्कार किया। बतातें चले कि सोमवार सुबह सात बजे उनका स्वर्गवास हो गया था।
पूर्व विधायक और राज्य आंदोलनकारी रणजीत सिंह वर्मा का सोमवार सुबह जौलीग्रांट अस्पताल में निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। अस्पताल में पिछले पांच दिनों से उनका इलाज चल रहा था। वे अविभाजित उत्तरप्रदेश की मसूरी विधानसभा के दो बार विधायक रहे थे। उनके निधन पर उनके निकट सहयोगी रहे क्षेत्र के तमाम लोगों ने दुख जताया है। जौलीग्रांट के पूर्व प्रधान और उनके सहयोगी रहे कुंवर सिंह मनवाल कहते हैं कि उनके निधन की खबर डोईवाला के लिए अपूर्णनीय क्षति है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुरूख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड के निर्माण में रणजीत सिंह के संघर्षों को सदैव याद रखा जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के निधन पर डोईवाला क्षेत्र के लोग स्तब्ध हैं। उनका नाम शिक्षा के प्रचार प्रसार और गन्ना राजनीति में बेहद आदर के साथ लिया जाता है। आजीवन मूल्यों और सिद्धांतों पर चलकर उन्होंने गन्ना राजनीति और डोईवाला में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। पृथक राज्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा का कार्य क्षेत्र डोईवाला रहा।
तरली जौलीग्रांट में उनका निवास स्थान है। क्षेत्र में उनके पास काफी खेती बाड़ी होने के कारण प्रगतिशील किसान कहा जाता रहा है। गन्ना राजनीति में करीब तीन दशक से भी अधिक समय तक उनकी पकड़ रही है। गन्ना परिषद डोईवाला में करीब 25 सालों तक लगातार अध्यक्ष का दायित्व निभाया।
डोईवाला शुगर मिल के पुनर्निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा। अविभाजित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे स्व. नारायणदत्त तिवारी से उनका स्नेह होने के कारण डोईवाला चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाकर उसको आधुनिक रूप दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही एक शिक्षक के रूप में भी उन्होंने काम किया। क्षेत्र के सबसे पुराने पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला के प्रबंधक का काम साल 1966 से 2018 तक निभाया। जबकि आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज के वह अभी तक प्रबंधक रहे।

हिमालयी राज्यों की सुरक्षा और विकास को केन्द्र सरकार से मांगी मदद

हिमालयन कॉन्क्लेव में गहन मंथन के पश्चात प्रतिभागी हिमालयी राज्यों द्वारा ‘‘मसूरी संकल्प’’ पारित किया गया। इसमें पर्वतीय राज्यों द्वारा हिमालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और देश की समृद्धि में योगदान का संकल्प लिया गया। साथ ही, प्रकृति प्रदत्त जैव विविधता, ग्लेशियर, नदियों, झीलों के संरक्षण का भी प्रण लिया गया। भावी पीढ़ी के लिए लोककला, हस्तकला, संस्कृति आदि का संरक्षण किया जाएगा। पर्वतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परम्परा के संरक्षण व मानवता के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया। समानता व न्याय की भावना के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के सतत विकास की रणनीति पर काम किया जाएगा। पर्वतीय सभ्यताओं के महान इतिहास व विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया गया।

इससे पूर्व हिमालयन कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हिमालयन राज्यों के सम्मेलन के आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निश्चित रूप से यह आयोजन हिमालयी राज्यो के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हिमालयन राज्य भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन सभी राज्यों का विकास भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसमें पंचायतीराज संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा कर ही पलायन को रोका जा सकता है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोग देश की सुरक्षा में आंख और कान का काम करते हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। हमे विकास के साथ ही पर्यावरणीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। पर्वतीय राज्यों में ऑर्गेनिक कृषि पर फोकस किया जाना चाहिए। इसमें स्थानीय युवाओं को जोड़े जाने की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए स्टार्ट-अप महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे पलायन तो रुकेगा ही साथ ही क्षेत्र भी आर्थिक रूप से विकसित होगा। केन्द्रीय वितमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। विकास योजनाओं को फलीभूत करने के लिए स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सम्मेलन में प्रतिभागी राज्यों द्वारा चर्चा किये गये विषयों पर केन्द्र द्वारा गंभीरता से विचार किया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कॉन्क्लेव में आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि देश की सीमाओं की चैकसी की जिम्मेदारी मिली है। हिमालय राज्यों के सम्मेलन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ है यह उत्तराखण्ड के लिए सम्मान की बात है। हिमालय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां समान हैं। मुझे आशा है कि देश की समृद्धि में योगदान करने के लिए यह एक अच्छा मंच साबित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जल की एक-एक बूंद बचाने के संकल्प में हिमालयी राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम सभी को मिलकर जल संचय एवं जल संरक्षण के लिए काम करना होगा। नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए केन्द्रीय स्तर पर अलग से बजटीय प्रावधान किया जाना चाहिए। इको सिस्टम सर्विसिज के लिए हिमालयी राज्यों को और प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2025 तक आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हिमालयी राज्यों में वैलनेस व टूरिज्म पर काम करना होगा। आपदा, पलायन सभी हिमालयी राज्यों की एक समान समस्या है। हम सभी को मिलकर देश की प्रगति के लिए काम करना है।
15वें वित आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने हिमालयन कॉन्क्लेव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अपनी साझा समस्याओं को रखने व उनके हल के लिए नीति निर्धारण में यह एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित होगा। केन्द्र भी हिमालयी राज्यों के साथ है। वित आयोग, हिमालयी राज्यों की समस्याओं से भलीभांति अवगत है। सम्मेलन में उठायी गयी बातों से वित्त आयोग भी सहमत है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए संवैधानिक दायरे में हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। हिमालयी राज्य वैश्विक पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां जीवन स्तर को सुधारने के लिए क्या सिस्टम बनाया जा सकता है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन अत्यंत कठिन होता है। यहां की समस्याएं अन्य राज्यों से अलग हैं। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में रेल व हवाई कनैक्टीविटी विकसित किये जाने की आवष्यकता बतायी। छोटे राज्यों के सीमित संसाधनों को देखते हुए केन्द्र द्वारा वित्तीय सहायता में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि कि हिमालयी राज्यों में विकास की बहुत संभावनाएं हैं। इसके लिए हमें टारगेट सेट करने की आवश्यकता है। पर्यटन की संभावनाओं की दृष्टि से भी सभी हिमालयन राज्य बहुत ही समृद्ध हैं। अभी यहां घरेलू पर्यटकों की अधिकता है। पर्यटन को और अधिक तेजी से विकास करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जाना बहुत ही जरूरी है। वैल्यू एडेड एग्रीकल्चर को प्रोत्साहित करना जरूरी है। लक्ष्यों को निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से योजनाओं का क्रियान्वयन करना जरूरी है। इस सम्मेलन के माध्यम से सभी हिमालयन राज्य आपसी तालमेल से नई योजनाओं को साझा कर नीति आयोग के समक्ष रख सकते हैं। हमे अपनी समस्याओं और संभावनाओं का अध्ययन कर उसके अनुसार योजनाओं को बनाना चाहिए। हमे अपनी कृषि की लागत को कम करने की आवश्यकता है। संसाधनों की समीक्षा करने की आवश्यकता है। भविष्य में पानी की समस्या को देखते हुए सभी राज्यों द्वारा जल संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बनाई जानी चाहिए। इसके लिए वॉटरशेड मैनेजमेंट की अत्यधिक आवश्यकता है। हमें नदियों के स्रोतों को बचाने के प्रयास करने होंगे। जल संरक्षण के लिए सभी राज्यों को अंतरराजयीय सहयोग से नीतियां तैयार करनी होंगी। सीमांत राज्यों को पलायन को रोकने और सीमांत क्षेत्रों में विकास करने की आवश्यकता है। विकास के लिए आकांक्षी जनपदों में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड कोंगकल संगमा ने कहा कि हिमालयी राज्यों में विकास योजनाओं की लागत अधिक होती है। इसलिए केन्द्र द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं के मानकों में इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। आर्थिक विकास व पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाये रखना, हिमालयी राज्यों की दोहरी जिम्मेदारी होती है। हमें सतत विकास के लिए रिस्पोंसिबल टूरिज्म पर फोकस करना होगा। उन्होंने पर्वतीय राज्यों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की आवष्यकता पर बल दिया। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने सम्मेलन को बेहतर शुरूआत बताते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका संवर्द्धन व इको सिस्टम के महत्व पर जोर दिया। अरूणाचल के उप मुख्यमंत्री चोवना मेन ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विषेष ध्यान देना होगा। मिजोरम के मंत्री टी.जे.लालनुनल्लुंगा ने अपने सम्बोधन में प्राकृतिक आपदा, जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय लोगो की भागीदारी, डिजीटल कनैक्टीविटी पर जोर दिया। सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता भारत सरकार परमेष्वरमन अय्यर ने जल शक्ति अभियान पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने जल संरक्षण में स्प्रिंगषेड मैनेजमेंट को प्रभावी ढंग लागू करने की बात कही। इसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय उपयोगी सिद्ध होगा। जमींनी स्तर पर पैरा हाइड्रोलॉजिस्ट तैयार किये जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में ट्रेंचध्खांटी के माध्यम से जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों की प्रधानमंत्री ने सराहना की है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने डिजास्टर रिस्क मैंनेजमेंट पर प्रस्तुतिकरण देते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में वहां की परिस्थितियों के अनुरूप भवन निर्माण पर जोर दिय जाने की बात कही। सिक्किम के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. महेन्द्र पी.लामा ने केन्द्रीय सहायता में ईको सिस्टम सर्विसेज को विषेष भार दिये जाने की बात कही।
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के.के.शर्मा, आई.आई.एफ.एम. की डॉ. मधु वर्मा व सुशील रमोला ने भी विचार व्यक्त किये। सम्मेलन के समापन अवसर पर उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव वित्त अमित नेगी, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, डी.जी.पी. अनिल रतूड़ी, सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अलग-अलग कूड़े का उठान और उपयोग पर कोरिया करेगा सहयोग

नगर निगम ऋषिकेश की संकरी गलियों में अब कूड़ा उठान के लिए ई-रिक्शा का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए नगर निगम प्राथमिकता पर काम कर रहा है। शुरुआती चरण में निगम क्षेत्र की गलियां और घर से गलियों के बाहर तक आने की दूरी का आंकलन किया जा रहा है। इसके बाद ही ई-रिक्शा की जरूरत का अंदाजा लग पाएगा। बृहस्पतिवार को मेयर अनिता ममगाईं ने एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) और केईआईटीआई (कोरिया एनवायरमेंट इंडस्ट्री एवं टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट) के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। नगर निगम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए केईआईटीआई और एडीबी ज्वाइंट मिशन के लिए बैठक आयोजित हुई। इस दौरान तीनों नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों तथा क्षेत्र के व्यापारियों, स्कूल प्राध्यापकों आदि ने ऋषिकेश में ठोस अपशिष्ट पदार्थों को लेकर अपने-अपने सुझाव दिए। बता दें कि एडीबी नगर निगम ऋषिकेश को कूड़ा प्रबंधन के लिए फंड जारी कर रहा है जबकि केईआईटीआई से सही तरह से कूड़ा प्रबंधन के लिए सुझाव लिए जा रहे हैं। बैठक में पालिकाध्यक्ष मुनिकीरेती रोशन रतूड़ी, नगर पंचायत जौंक अध्यक्ष माधव अग्रवाल, शहरी विकास विभाग से सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रवि पांडे, एडीबी से बागेश कुमार, सैमदास गुप्ता, नगर आयुक्त चतर सिंह चैहान, अधिशासी अधिकारी पालिका मुनिकीरेती बद्री प्रसाद भट्ट, केईआईटीआई से स्यूंगडू किम, येचांम जोंग, टाडातेरु ह्यासी, ली सैंग क्यू आदि उपस्थित रहे।


पब्लिक का सहयोग होना जरुरीः प्रो. किम
कोरिया एनविरोनमेंट इंडस्ट्री एवं टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर व ठोस अपशिष्ट के एक्सपर्ट स्यूंगडू किम ने कहा कि कूड़ा निस्तारण की योजना को पूरा करने के लिए तीन चरण आवश्यक हैं। पहला पब्लिक का साथ, दूसरा टेक्निकल और तीसरा फाइनेंस। उन्होंने कहा कि शुरूआती दौर में छह माह तक इसका रोडमैप तैयार होगा। इसके बाद डीटीआर तैयार होगी। उन्होंने बताया कि कोरिया में नगर का कूड़ा आर्गेनिक, रिसाइकिल तथा डिस्पोजल के रूप में बनता है। वहां घरों से कूड़ा उठान के लिए कूड़ा बैग अलग-अलग साइज में दिए गए हैं। जितना बड़ा बैग होगा, उतना ही ज्यादा चार्ज होगा। उन्होंने बताया कि वहां मंडी से निकलने वाले कूड़े को तुरंत जानवरों को आहार के रूप में दिया जाता है।

सीसीटीवी कैमरों से रखेंगे नजर
पालिकाध्यक्ष ने बताया कि क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के लिए पुलिस को 17 लाख तथा नगर पालिका को 25 लाख रुपए मिले हैं। इन सीसीटीवी कैमरों के जरिए रात में खुले में कूड़ा डालने वालों पर नकेल कसी जा रही है। इसी क्रम में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालान की कार्रवाई की जा रही है। रोशन रतूड़ी ने बताया कि हमारे यहां सफाई कर्मियों को समय से वेतन जारी किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों का मनोबल हमेशा बरकरार रहता है। दूसरी ओर नगर निगम की कार्यप्रणाली पूरी तरह से लचर दिखी। यहां तमाम दावों के बावजूद न तो सड़कों से आवारा पशु हट पाए, आउटसोर्सिंग कर्मियों के बकाया वेतन का मामला भी विवादों में रहा। इसके अलावा तमाम कोशिशों के बावजूद कूड़े का निस्तारण बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है।


मुनिकीरेती पालिका कूड़ा निस्तारण में अव्वल
नगर पालिका मुनिकीरेती ने स्वच्छता के मामले में नगर निगम ऋषिकेश को आइना दिखाया है। बृहस्पतिवार को निगम में हुई बैठक में पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने एडीबी और केईआईटीआई की टीम के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि उनकी पालिका क्षेत्र में प्रति परिवार को 20 रुपये में थैला दिया गया है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए लोगों में चालान की कार्रवाई के जरिये भय बनाने पर काम किया जा रहा है। क्षेत्र में प्रतिदिन 12 टन कूड़ा एकत्र होता है, इसमें से आठ टन हरिद्वार भेजा जाता है, चार टन को रिसाइकिल कर गड्ढे भरने के उपयोग में लाया जा रहा है। मुनिकीरेती पालिका में प्रत्येक घर में गमला दिया गया है। इसमें गीले कूड़ा का इस्तेमाल खाद के रूप में किया जा रहा है। सूखा कूड़ा पालिकाकर्मी उठाते हैं।

सुझावों पर एक नजर…
– छोटी गलियों से कूड़ा उठान के लिए डिब्बे उपलब्ध कराए जाएं
– कूड़ा डंपिंग की व्यवस्था आबादी क्षेत्र से दूर इलाके में हो
– पॉलिथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए
– गंगा नदी में पूजन सामग्री न डाली जाए
– पॉलिथीन की जगह जूट के उत्पाद वितरित कर प्रचलन में लाएं
– गीला कूड़ा और सूखा कूड़ा अलग-अलग उठाया जाए
– वार्डों से कूड़ा उठान से पूर्व गोविंदनगर ट्रंचिंग ग्राउंड से कूड़ा हटाया जाए
– वैकल्पिक तौर पर आईडीपीएल कांवड़ मेला पार्किंग स्थल पर कूड़ा डंप हो
– गीले कूड़े को घर में ही खाद बनाने का हुनर सिखाया जाए
– कूड़े के प्लास्टिक से फर्नीचर बनाने का उपक्रम प्रचलन में लाया जाए

जानिए किसने कहा-बीजेपी उत्तराखंड बहुत चतुराई से कौवे को भी तीतर बताकर खा जाती है

देवप्रयाग में शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर सियासी हमले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपनी फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ई-पत्र लिखा है। चुटीले अंदाज में लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि उनके कार्यकाल में देवप्रयाग क्षेत्र में पानी व फ्रूटी बॉटलिंग प्लांट लगा। मेरा लगाया पौधा, पानी व फ्रूटी बॉटलिंग प्लांट का था। आपने कुशल माली के तौर पर उस पर अन्य कलम लगा दी। मेरे कार्यकाल में केवल लाइसेंस दिया गया, जिस पर आगे की कार्रवाई आपकी पार्टी सहित स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए रोक दी गई। यदि आप शराब बनाने का लाइसेंस नहीं देना चाहते तो आपकी सरकार रिन्युअल नहीं करती। बीजेपी उत्तराखंड बहुत चतुराई से कौवे को भी तीतर बताकर खा जाती है।
दरअसल, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बीते रोज उक्त बॉटलिंग प्लांट को अनुमति देने को पूर्व सीएम हरीश रावत पर यह कहते हुए हमला बोला था कि वह पहले पौधा लगाते हैं, फिर उसे उखाड़ने में लग जाते हैं। इस पर प्रतिक्रिया में पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि हमने मैदानों में डिस्टलरीज, फुटहिल्स में वाइनरीज व रागी बियर प्लांट व मध्य हिमालय में फ्रूट वाइन्स व वाटर व ऑयल बॉटलिंग प्लांट लगाने की नीति पर काम किया। समय कम मिला, हम इन नीतियों को पूरी तरह धरातल पर नहीं उतार पाए।

पूर्व मंत्री नैथानी ने बोला भाजपा सरकार पर हमला
पूर्व शिक्षा मंत्री एवं देवप्रयाग क्षेत्र के पूर्व विधायक मंत्री प्रसाद नैथानी ने एनसीसी ट्रेनिंग एकेडमी श्रीकोट माल्दा (टिहरी) से हटाकर देवाल गांव (पौड़ी) ले जाने के मौजूदा भाजपा सरकार के फैसले पर सख्त आपत्ति की है। उन्होंने टिहरी जिलाधिकारी के श्रीकोट माल्दा के ग्रामीणों के सशर्त भूमि देने के कथन को झूठा करार दिया। उनके क्षेत्र में शराब के बॉटलिंग प्लांट लगाने के सरकार के फैसले को जनविरोधी करार देते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में कांग्रेस, उन्हें और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
देवप्रयाग क्षेत्र से एनसीसी एकेडमी हटाने और शराब के बॉटलिंग प्लांट मामले में पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी खुलकर सामने आए। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवनों में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने दोनों मुद्दों पर भाजपा सरकार पर हमला बोला। साथ ही इस मामले में पिछली कांग्रेस सरकार का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी एकेडमी की श्रीकोट माल्दा में स्थापना को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पांच दिसंबर, 2016 को शिलान्यास किया था। एकेडमी के लिए श्रीकोट माल्दा के किसानों ने 200 नाली भूमि दान स्वरूप दी। उन्होंने कहा कि एनसीसी एकेडमी बचाओ संघर्ष समिति देवप्रयाग विकासखंड मुख्यालय हिंडोलाखाल में आंदोलन जारी रखेगी। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।

गैरसैंण में भूमि खरीद पर रोक हटाने के विरोध में उतरी प्रदेश कांग्रेस
कांग्रेस प्रदेश में सरकार के फैसलों के खिलाफ जन आक्रोश को भुनाने में जुट गई है। राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं से जुड़े गैरसैंण समेत आसपास के 27 गांवों में जमीनों की खरीद-फरोख्त पर लगी पाबंदी हटाने के त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने आंदोलन को तेज करने की ठान ली है। गैरसैंण में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपनी दिल्ली यात्रा के बीच से ही वापस गैरसैंण लौटने और शुक्रवार को वहां गिरफ्तारी देने की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी कहा कि गैरसैण में पूर्व में लागू भू कानून को यथावत रखा जाए अन्यथा पार्टी पूरे प्रदेश में सड़कों पर उतर कर इसका विरोध करेगी।
गैरसैंण को लेकर एक बार फिर सरकार व सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस फिर आमने-सामने हो गई हैं। मंत्रिमंडल ने बीते रोज चमोली जिले के गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद पर पाबंदी खत्म करने का फैसला लिया है। पिछली कांग्रेस सरकार ने 16 नवंबर, 2012 को आदेश जारी कर गैरसैंण व आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद चमोली के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 23 नवंबर, 2012 को आदेश जारी कर गैरसैंण तहसील के 27 गांवों में भूमि की खरीद-बिक्री पर रोल लगा दी थी। अब भाजपा सरकार ने गैरसैंण व आसपास के क्षेत्रों में भूमि खरीद-बिक्री का बैनामा या रजिस्ट्री न होने और 10 रुपये के स्टांप पेपर पर भूमि की खरीद किए जाने से मालिकाना हक को लेकर विवाद को आधार बनाकर उक्त रोक हटाने का निर्णय लिया है।
कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का विरोध करने का निर्णय लिया है। गैरसैंण में इस मामले पर हो रहे प्रदर्शन को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समर्थन तो दिया ही, साथ में खुद भी गैरसैंण पहुंचकर गिरफ्तारी देने की घोषणा की है। कांग्रेस इस मुद्दे को तूल देने जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य की प्रस्तावित राजधानी गैरसैंण में जमीनों की खरीद फरोख्त पर लगाई गई रोक हटाने का फैसला राज्य निर्माण आंदोलन की भावना के विपरीत है। इस मामले में भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए प्रीतम ने कहा कि इस निर्णय से राज्य निर्माण की भावनाएं आहत हुई हैं। गैरसैंण को राजधानी बनाने के सपने को ग्रहण लगा है। राज्य सरकार खनन माफिया, भू-माफिया और शराब माफिया के हाथों की कठपुतली बन गई हैं।

गैरसैंण तहसील के इन क्षेत्रों में भूमि खरीद पर लगी रोक हटाई
आदि बदरी के हालीसेरा एफ आदि बदरी, खेती व मालसी गांव
गैरसैंण के मरोड़ा, कुनेली लग्गा मरोड़ा, सलियाणा, ग्वाड, जैंतोली ग्वाड, पटौडी लग्गा गैड़, गैड, कोलियाणा, गडोली, धार गैड़, सौनियाणा, रीठिया व निगालसैंण गांव
सिलपाटा के सारकोट व परवाड़ी गांव
पंचाली के सिंलगी, बौसाड व सैंजी गांव
महलचैरी के आगर लग्गा गांवली, फरसौं, विसराखेत, भनोट ग्वाड, मैहलचैरी व रंगचैड़ा गांव।

टिहरी के नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी

देवप्रयाग के निकटवर्ती इलाके डडुवा भंडाली के बाद अब टिहरी जिले के ही नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी की जा रही है। हाइलैंड बॉटलस नाम के इस प्लांट को स्थापित करने की अनुमति मिल चुकी है। अब केवल बॉटलिंग की अनुमति मिलनी बाकी है। इसके वजूद में आने के बाद टिहरी जिले में यह दूसरा बॉटलिंग प्लांट होगा।
डडुआ भंडाली में बॉटलिंग प्लांट लगाने की अनुमति वर्ष 2016 में दी गई थी और इसी साल जून में प्लांट में बॉटलिंग का लाइसेंस जारी किया गया। यहां बॉटलिंग की गई शराब की पहली खेप बाजार में पहुंचने पर यह बात सार्वजनिक हुई। स्थानीय लोग बॉटलिंग प्लांट का विरोध कर रहे हैं। इस बीच, इसी जिले के जौनपुर ब्लाक के नैनबाग में एक और बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी का पता चला है।
आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार हाइलैंड बाटलस के नाम इस प्लांट को स्थापित करने की प्रक्रिया भी वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। अगस्त 2018 में यहां प्लांट स्थापित करने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन अभी बॉटलिंग का लाइसेंस नहीं दिया गया है। संपर्क करने पर जिला आबकारी अधिकारी रेखा जुयाल भट्ट ने पुष्टि की कि नैनबाग में बॉटलिंग प्लांट की स्थापना के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन अभी बॉटलिंग की अनुमति नहीं दी गई है।

एसडीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
एसडीएम अनुराधा पाल ने बुधवार को डडुवा भंडाली पहुंचकर बॉटलिंग प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट के दस्तावेजों के का अवलोकन करने साथ ही प्लांट में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जुटाई। प्लांट में काम कर रहे स्थानीय लोगों से सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाई। एसडीएम ने बताया कि प्लांट के दस्तावेज सही पाए गए हैं। यहां पर बॉटलिंग की गई शराब का एक बैच की पिछले महीने बाजार में आपूर्ति की गई।

बीयर और मिनरल वाटर प्लांट तैयार
डडुवा भंडाली में एक ही कैंपस में तीन फैक्ट्री खोलने की तैयारी है। बॉटलिंग प्लांट के अलावा यहां पर एक बीयर प्लांट और एक मिनरल वाटर प्लांट भी बनाया गया है। हालांकि, बीयर और मिनरल वाटर प्लांट अभी संचालित नहीं हो रहे हैं। बॉटलिंग प्लांट की अनुमति मिल गई है, लेकिन यहां बीयर बनाने के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है। बताया गया कि बॉटलिंग प्लांट संचालकों ने बीयर प्लांट और मिनरल वाटर प्लांट बनाने के लिए भी वर्ष 2016 में आवेदन कर दिया था, लेकिन अभी इनका लाइसेंस नहीं मिल पाया है।

मुख्यमंत्री ने किया ल्वाली झील निर्माण का शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखण्ड पौड़ी के अन्तर्गत रू0 692.77 लाख लागत की ल्वाली झील निर्माण का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को झील निर्माण के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस झील के माध्यम से क्षेत्रवासियों को काफी लंबे समय तक पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे लगभग 34 हेक्टेयर भूमि भी सिंचित हो सकेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘मन की बात‘‘ कार्यक्रम को सुना। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण एवं योग को अपनाकर इसके प्रचार प्रसार के विषय पर बात की गयी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आने वाले 5 वर्षों के कार्यकाल के लिए जल संरक्षण को अपना महत्वपूर्ण लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ भूमि के जल स्तर में कमी हो रही है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पानी की चिन्ता करनी है। इस झील के निर्माण से पानी के जल स्तर में भी सुधार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे उत्तराखंड में हम विभिन्न स्थानों पर झीलों का निर्माण कर रहे हैं। जनपद पौड़ी के लिए भी हमने 3 झीलें ल्वाली, सतपुली एवं जयहरीखाल में स्वीकृत की हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में झीलें है या बनायी गयी हैं, उन क्षेत्रों में सब्जियों की बहुत अच्छी खेती होती है। ल्वाली झील के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में सब्जी उत्पादन की बहुत अधिक सम्भावनाएं बढ़ जाएंगी। इस क्षेत्र में फल उत्पादन की भी बहुत सम्भावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस झील का निर्माण 1 वर्ष के अंदर कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी योजना शुरू की जाती है, उसके कार्य समापन की तिथि भी पहले से ही निश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन खेतों को बनाने में हमारी पीढ़ियां लगी हैं। हमें पहाड़ की खेती को आबाद करते हुए खेती की सम्भावनाएं तलाशनी हैं। इसके लिए हमें पेशेवर तरीके से सोचना शुरू करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में खेती और पर्यटन दोनों में विकास की असीम सम्भावनाएं हैं। सीतामाता मंदिर में पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा। साथ ही दीपावली के बाद इस मंदिर में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा, जो इस क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ने में मददगार होगा।

कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर से युवाओं का संवरेगा भविष्य

उत्तराखड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खोला जायेगा। यह भारत का पाँचवा कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर होगा। 28 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस भर्ती सेंटर के लिए भूमि का शिलान्यास करेंगे। यह भर्ती सेंटर कुंआवाला (हर्रावाला) देहरादून में बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने मुलाकात कर इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने के लिए भारत सरकार का अनुमति पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर खुलने से उत्तराखण्ड के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कोस्टगार्ड एस.डी.आर.एफ को आपदा से राहत व बचाव के तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी देगा। युवाओं को भी कोस्टगार्ड द्वारा आपदा से राहत व बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य प्रदेश है। सेना के विभिन्न अंगों मे उत्तराखण्ड के जवान है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को पांचवे सैन्य धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यह उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि देश का पांचवा कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने का प्रस्ताव दिया था। उसी का परिणाम है कि भारत सरकार से इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने डीजी कोस्टगार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि देहरादून में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है। इस भर्ती केन्द्र का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी। नोएडा, मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता के बाद यह उत्तराखण्ड में 5वां कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड को सैन्य धाम के रूप में 5वां सैन्य धाम विकसित करने की बात कही है। यह कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड के जवानों को समर्पित होगा। इस भर्ती केन्द्र का लाभ उत्तराखण्ड के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश व हरियाणा के युवाओं को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल में यह भर्ती केन्द्र बनकर तैयार हो जायेगा।

29 जून में पर्वतीय क्षेत्रों को पौड़ी में मिल सकती है कई सौगात

पौड़ी गढ़वाल कमिश्नरी के गठन की स्वर्ण जयंती, यानी 50 वर्ष पूरे होने के मौके को त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार खास बनाने जा रही है। 29 जून को पौड़ी में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की जा रही है। यह तीसरा मौका है जब त्रिवेंद्र सरकार देहरादून के बाहर पर्वतीय क्षेत्र में मंत्रिमंडल की बैठक करेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को सचिवालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि कि पौड़ी गढ़वाल कमिश्नरी के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 29 जून को पौड़ी में मंत्रिमंडल की बैठक होगी। इस बैठक में मंत्रिमंडल पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से संबंधित फैसलों पर मुहर लगा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले देहरादून से इतर पर्वतीय क्षेत्रों में दो दफा त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल की बैठकें हो चुकी हैं। बीते वर्ष टिहरी महोत्सव के उपलक्ष्य में मंत्रिमंडल की बैठक टिहरी में आयोजित की जा चुकी है।
त्रिवेंद्र मंत्रिमंडल की बैठक गैरसैंण में भी हो चुकी है। गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान मंत्रिमंडल की बैठक आहूत की गई थी। इसके अलावा पूर्व की सरकारों के समय भी तीन बार राजधानी देहरादून से बाहर कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं। पौड़ी में मंडल मुख्यालय होने की वजह से कई मंडलस्तरीय कार्यालय भी वहां हैं। यह दीगर बात है कि पौड़ी में मंडल मुख्यालय समेत पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी कार्यालय होने के बावजूद अधिकारियों की इन कार्यालयों में नियमित उपस्थिति की समस्या अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी बरकरार है। माना जा रहा मंत्रिमंडल पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को देखते हुए अहम फैसले ले सकती है।

इन शहरों में बिछेगी नेचुरल गेस पाइप लाइन

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय में गेल गैस लिमिटेड के अधिकारियों के साथ हरिद्वार-ऋषिकेश-देहरादून नेचुरल गैस पाइपलाइन के सम्बन्ध में बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट को तेजी से पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर की आवश्यकता को देखते हुए यह प्रोजेक्ट शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट में त्वरित गति से कार्यवाही करते हुए सभी प्रकार के क्लियरेंस सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से दिए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट से सम्बन्धित सभी विभाग आपसी सहयोग से कार्य करें।

यह भी पढे …
सरकार की इच्छा शक्ति से समय पर बनकर तैयार हुआ फ्लाईओवर

मुख्य सचिव ने गेल गैस लिमिटेड को निर्देश दिए कि सिटी गेट स्टेशन एवं सीएनजी स्टेशन के लिए भूमि चयन का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाए, ताकि इसके आगे की कार्यवाही शुरू की जा सके। उन्होंने ने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण में यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पीएनजी कनेक्शन के माध्यम से घरेलू व कमर्शियल उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति हो सकेगी। मुख्य सचिव ने गेल गैस लिमिटेड के सीईओ ए.के. जाना को राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

यह भी पढे …
ध्यान रहे कि जलापूर्ति निर्बाध रुप से जारी रहेः मुख्यमंत्री

बैठक में गेल गैस लिमिटेड के सीईओ जाना ने बताया कि देहरादून सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट के अन्तर्गत देहरादून, ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, चकराता, कालसी व त्यूनी को सम्मिलित हैं। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 5 सालों के लिए 786.00 करोड़ रुपए एवं 25 वर्षों के लिए 1795.00 करोड़ रुपए है। इसके अन्तर्गत 50 सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस अवसर पर प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, जिलाधिकारी हरिद्वार दीपक रावत, जिलाधिकारी देहरादून मुरुगेशन सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

श्रद्धांजलि देते समय भावुक हुए साथी, बताया अपना गुरु

दिवंगत प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर पहले दिल्ली और फिर विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट लाया गया। दिवंगत पंत के पार्थिव शरीर को जौलीग्रांट हवाई अड्डे के निकट एसडीआरएफ भवन में श्रद्धांजलि और दर्शनार्थ रखा गया। जहां मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट सहित कई मंत्रियों, विधायकों के अलावा कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने स्वर्गीय पंत को श्रद्धांजलि अर्पित की। एसडीआरएफ भवन के प्रागंण में दिवंगत पंत के पार्थिव शरीर को पुलिस के द्वारा सलामी भी दी गई।

मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं ने स्वर्गीय पंत के पार्थिव शरीर को कंधा भी लगाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने अपने प्रिय नेता स्वर्गीय प्रकाश पंत के अंतिम दर्शन कर उन्हें भावनभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी दिंवगत पंत को जौलाग्रांट स्थित एसडीआरफ भवन में श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने वालों में नेता प्रतिपक्ष डाॅ. इंदिरा हृद्येश भी शामिल रहीं। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी के अलावा वरिष्ठ पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी और विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।

यह भी पढ़े …
राजकीय सम्मान के साथ “श्रीमन” को अंतिम विदाई