आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों का भुगतान एक सप्ताह के अंदर-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आई.एस.बी.टी देहरादून स्थित एक होटल में आयुष्मान भारत योजना के 3 वर्ष पूर्ण होने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित आरोग्य मंथन 3 कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आयुष्मान योजना के तहत अच्छा कार्य कर रहे 12 अस्पतालों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर घोषणा की कि आयुष्मान कार्ड बनाने का कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा। सरकार द्वारा इस शुल्क का भुगतान किया जायेगा। आयुष्मान योजना के तहत सभी अस्पतालों का भुगतान एक सप्ताह के अंदर किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी आयुष्मान भारत योजना दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज देश हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण योजना को लाने के लिए मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की जनता की ओर से उनका आभार व्यक्त किया। इस योजना का आम जनमानस सीधा लाभ मिल रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में देश में सराहनीय कार्य हुए हैं। आज भारत में मेगा कोविड वैक्सीनेशन अभियान तो चल ही रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के पद्चिन्हों पर चलकर राज्य में विकास के कार्य आगे बढ़ाये जा रहे हैं। प्रदेश के सभी परिवारों को राज्य में अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना से आच्छादित किया गया है। इस योजना के तहत अभी तक प्रदेश में लगभग 3.5 लाख लोग अपना उपचार करा चुके हैं, जिस पर 460 करोड़ रूपये का खर्च हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले यदि परिवार में कोई बीमार होता था तो कई परिवार बिलों का भुगतान करने में असमर्थ होते थे। इसलिए मरीज इलाज करवाने में असहज महसूस करते थे। अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना में जहां कमी है उन कमियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना के तहत जो कमियां सामने आ रही हैं, उनका निराकरण किया जा रहा है।
चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में निजी अस्पताल खोलने पर सरकार मानकों में शिथिलता प्रदान करने के साथ ही आर्थिक सहयोग भी करेगी। जबकि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सभी सूचीबद्ध अस्पतालों में योजना संबंधी जानकारी के बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिल सके। आयुष्मान कार्ड से वंचित लोगों के लिए विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ सभी प्रदेशवासियों को देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही ब्लॉक स्तर पर आयुष्मान कार्ड बनाने के शिविर आयोजित किये जायेंगे।
इस अवसर पर आयुष्मान भारत योजना एवं अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड से लाभान्वित लोगों ने इस योजना से उनको कैसे जीवनदान मिला, के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने इसके लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधायक विनोद चमोली, मेयर सुनील उनियाल गामा, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डी.के. कोटिया, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ अरूणेन्द्र चौहान एवं आयुष्मान योजना से लाभान्वित हुए लोग मौजूद थे।

बिना बेहोश किए सफल अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी में मिली सफलता

अ​खिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने छाती में ट्यूमर की समस्या से जूझ रहे एक मरीज को बिना बेहोश किए उसकी सफल अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी करने में विशेष सफलता प्राप्त की है। चिकित्सा क्षेत्र में उत्तर भारत का यह पहला मामला है, जिसमें मरीज को बिना बेहोश किए यह बेहद जटिल सर्जरी की गई। इस मरीज का उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। इलाज के बाद मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद स्थित चिन्यालीसौड़ निवासी 30 एक वर्षीय व्यक्ति पिछले लंबे अरसे से छाती में भारीपन और असहनीय दर्द की समस्या से जूझ रहा था। लगभग 3 महीने पहले परीक्षण कराने पर पता चला कि उसकी छाती में हृदय के ऊपर एक ट्यूमर बन चुका है। इलाज के लिए वह पहले राज्य के विभिन्न अस्पतालों में गया, लेकिन मामला जटिल होने के कारण अधिकांश अस्पतालों ने उसका इलाज करने में असमर्थता जाहिर कर दी। इसके बाद अपने उपचार के लिए मरीज एम्स ऋषिकेश पहुंचा। यहां विभिन्न जांचों के बाद एम्स के कार्डियो थोरेसिक व वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमन दरबारी जी ने पाया कि मरीज की छाती के भीतर व हार्ट के ऊपर थाइमिक ग्रंथी में संभवतः एक थायमोमा में एक ट्यूमर बन चुका है और उसका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
इस बाबत सीटीवीएस विभागाध्यक्ष व वरिष्ठ सर्जन डा. अंशुमन दरबारी ने बताया कि यदि मरीज का समय रहते इलाज नहीं किया जाता तो हार्ट के ऊपर बना ट्यूमर बाद में कैंसर का गंभीर रूप ले सकता था। उन्होंने बताया कि आसपास के महत्वपूर्ण अंगों के कारण छाती के भीतर ट्यूमर में सामान्यतरू बायोप्सी करना संभव नहीं होता है इसलिए मरीज की बीमारी के निराकरण के लिए रोगी की सहमति के बाद उसकी ’अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी’ करने का निर्णय लिया गया।
अत्याधुनिक तकनीक की बेहद जोखिम वाली इस सर्जरी में मरीज की छाती की हड्डी को काटकर मरीज को बिना बेहोश किए उसके हार्ट के ऊपर बना 10 गुना 7 सेंटीमीटर आकार का ट्यूमर पूर्णरूप से निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी में लगभग 2 घंटे का समय लगा और 4 दिन तक मरीज को अस्पताल में रखने के बाद अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। सर्जरी करने वाली विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम में डॉ. अंशुमन दरबारी के अलावा सीटीवीएस विभाग के डॉ. राहुल शर्मा जी और एनेस्थेसिया विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार जी शामिल थे।
एम्स निदेशक प्रोफेसर अरविंद राजवंशी ने इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले चिकित्सकों के कार्य की सराहना की है। उन्होंने बताया कि मरीजों के बेहतर उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम 24 घंटे तत्परता से कार्य कर रही है।

क्या है ’अवेक कार्डियो सर्जरी’
सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. दरबारी ने बताया कि अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी की शुरुआत वर्ष-2010 में अमेरिका में हुई थी। भारत में यह सुविधा अभी केवल चुनिंदा बड़े अस्पतालों में ही उपलब्ध है। इस तकनीक द्वारा मरीज की रीढ़ की हड्डी में विशेष तकनीक से इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे उसकी गर्दन और छाती का भाग सुन्न हो जाता है। पूरी तरह से दर्द रहित होने के बाद छाती की सर्जरी की जाती है। खासबात यह है कि सर्जरी की संपूर्ण प्रक्रिया तक मरीज पूरी तरह होश में रहता है। यहां तक कि सर्जरी के दौरान मरीज से बातचीत भी की जा सकती है। सामान्यतौर पर सर्जरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को बेहोशी दवाओं का दुष्प्रभाव हो सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में वह बेहोशी दवाओं के दुष्प्रभाव से भी बच जाता है। इस तकनीक से मरीज को वेन्टिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता भी नहीं होती है। साथ ही तकनीक में मरीज की रिकवरी बहुत ही सहज और तेज हो जाती है।

एम्स ऋषिकेश के नए प्रभारी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने संभाला कार्यभार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में सोमवार को नए निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस दौरान संस्थान के अधिकारियों, फैकल्टी सदस्यों, चिकित्सकों ने उनका स्वागत किया।
सोमवार को एम्स रायबरेली के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने ऋषिकेश एम्स का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस दौरान उन्होंने संस्थान के अधिकारियों, चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों से मुलाकात की और उनसे एम्स ऋषिकेश के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रोफेसर अरविंद राजवंशी ने 1977 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला (हिमाचल प्रदेश) से एमबीबीएस किया। उन्होंने 1981 में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ से एमडी पैथोलॉजी और 1994 में रॉयल कॉलेज लंदन से एमआरसी पैथोलॉजी की डिग्री हासिल की। राजवंशी ने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से अपना सीनियर रेजीडेंसी किया।
साथ ही प्रो. राजवंशी वर्ष 2007 से 2019 तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के प्रभारी प्रोफेसर भी थे। इसके अलावा वह 23 मार्च 2020 तक पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के डीन (अनुसंधान) और डीन (अकादमिक) भी रहे हैं। उन्हें 23 मार्च 2020 को एम्स रायबरेली का कार्यकारी निदेशक और सीईओ नियुक्त किया गया और अब उन्होंने सोमवार (20 सितंबर) को एम्स ऋषिकेश का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है। गौरतलब है कि एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत बीती 13 सितंबर को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके स्थान पर प्रो. राजवंशी ने निदेशक का पदभार ग्रहण किया है।
इस अवसर पर संस्थान के संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता एवं अन्य संकाय सदस्य तथा अधिकारी मौजूद थे।

विस अध्यक्ष ने सरकारी अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाएं जांची

एसपीएस राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश में प्रस्तावित ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट एवं ऑक्सीजन स्टोरेज प्लांट को स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी गई है, जिसको लेकर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने राजकीय चिकित्सालय पहुंचकर ऑक्सीजन प्लांट एवं स्टोरेज प्लांट लगाने के लिए चिन्हित स्थान का निरीक्षण किया।
अवगत करा दें कि एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट एवं ऑक्सीजन स्टोरेज प्लांट स्थापित किए जाने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन द्वारा विभाग द्वारा प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। शीघ्र ही वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने पर एसपीएस राजकीय चिकित्सालय के परिसर में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट एवं ऑक्सीजन स्टोरेज प्लांट स्थापित किया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा चिन्हित स्थान का निरीक्षण करने के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक विजयेश भारद्वाज ने अवगत कराया कि प्रस्तावित ऑक्सीजन प्लांट के निर्मित होने के बाद प्लांट से 24 घंटे 800 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन का उत्पादन होगा वहीं स्थापित होने वाले ऑक्सीजन स्टोरेज प्लांट की क्षमता 10 मिट्रिक टन ऑक्सीजन स्टोर करने की है। सीएमएस ने बताया कि प्लांट से अस्पताल को निर्बाध रूप से ऑक्सीजन की सप्लाई मिलती रहेगी, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को उनके बेड पर ही 24 घंटे हाईफ्लो ऑक्सीजन मिल सकेगी।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही ऑक्सीजन प्लांट को वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होगी, जिसके बाद ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित होने से अस्पताल में भर्ती मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की संभावित तिथि लहर से रोकथाम के प्रयास के लिए निश्चित ही इसका लाभ प्राप्त होगा। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने ऑक्सीजन प्लांट से संबंधित अन्य जानकारी भी उपस्थित अधिकारियों से प्राप्त की।
वहीं, इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने डेंगू मरीजों के लिए बनाए गए वार्ड का भी निरीक्षण किया, इस दौरान डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज से बातचीत कर स्वास्थ्य का हाल-चाल भी जाना। श्री अग्रवाल ने इस मौक़े पर कोरोना टीकाकरण से संबंधित जानकारी भी डॉक्टरों से प्राप्त की।
इस अवसर पर राजकीय चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक विजयेश भारद्वाज, बीपी भट्ट, डॉ पीपी गर्ग, नगर निगम पार्षद शिव कुमार गौतम, संजीव पाल, राजू नरसिम्हा, जयंत किशोर शर्मा, हरिशंकर प्रजापति, दुर्गेश जाटव, कविता शाह, रवि दुबे, राजू दिवाकर, सुमित सेठी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

सरकारी अस्पताल की दुर्दशा पर कांग्रेस नेता ने आंदोलन को चेताया

उत्त्ताराखंड कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड सरकार ने पहली व दूसरी कोरोना की लहर के दौरान खस्ता स्वास्थ्य सुविधाओं से गयी लाखो लोगो की जान से अभी तक सबक नहीं लिया और इसका सीधा प्रमाण इस बात से लगाया जा सकता है की जो 21 वेंटीलेटर ऋषिकेश के एक मात्र सरकारी अस्पताल मे कोरोना की दूसरी लहर के दौरान शोपीस बने हुए थे, वैसे ही आजतक बने हुए है।
खरोला ने बताया कि उत्तराखंड सरकार जो सरकारी अस्पताल मे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं पर विज्ञापनों से अपनी पीठ थपथपा रही है। उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बया कर रही है। अस्पतालों के पास न उपकरण चलाने के लिए विशेषज्ञ है और ना ही प्रशिक्षित स्टाफ।
खरोला ने कहा कि भाजपा सरकार को आगामी विधानसभा चुनावों की चिंता है बस परन्तु कोरोना की तीसरी लहर की तैय्यारियो पर सरकार मौन है।
खरोला ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्राइवेट अस्पतालों की लूट को समर्थन और सरकार की प्राइवेट अस्पतालों के साथ सांठ-गांठ के चलते उत्तराखंड सरकार सरकारी अस्पतालों के प्रति गंभीर नहीं है।
खरोला ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा के जनता के प्रति संवेदनशील मुद्दों पर सरकार असंवेदनशीलता दिखायेगी तो कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी और जल्द ही अगर ऋषिकेश के वेंटीलेटरो को शुरू नहीं किया गया तो जनता के साथ कांग्रेस की आवाज ऋषिकेश से देहरादून तक सुनाई देगी ।

प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के नर्सिंग स्टाफ को एम्स दे रहा प्रशिक्षण

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में स्त्री रोग विभाग की ओर से नर्सिंग ऑफिसरों के लिए महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर स्क्रिनिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम विधिवत शुरू किया गया। जिसमें एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सक प्रशिक्षण देंगे। 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में राज्य सरकार के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात नर्सिंग ऑफिसर प्रशिक्षण ले रहे हैं।
मंगलवार को मुख्य अतिथि एम्स के संकायाध्यक्ष शैक्षणिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. जया चतुर्वेदी की देखरेख में आयोजित दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महिलाओं में सर्वाधिक पाया जाने वाला सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए उनकी नियमिततौर पर स्क्रिनिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा ​कि राज्य सरकार को महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इस बीमारी को इंगित कर इसके उपचार व रोकथाम को प्राथमिकता देनी चाहिए। संकायाध्यक्ष प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि तब तक इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाओं से कोई लाभ नहीं होगा जब तक राज्य सरकार प्रशिक्षित नर्सिंग आफिसरों को अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराती। लिहाजा उत्तराखंड सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और इसे धरातल पर उतारने की जरुरत है। उन्होंने बताया कि राज्य के चिकित्सकों व नर्सेस को प्रशिक्षित कर दक्ष बनाना एम्स का कर्तव्य है,जिसका निर्वहन संस्थान भली प्रकार से कर रहा है, मगर राज्य सरकार को चाहिए कि वह कार्मिकों की दक्षता का लाभ आम जनमानस तक पहुंचाने की दिशा में कार्य करे। उन्होंने राज्य में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम व उपचार के लिए उत्तराखंड में गायनी ओंकोलॉजिस्ट की तैनाती को नितांत आवश्यक बताया। जिससे ग्रसित मरीजों का राज्य के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही उपचार हो सके। उन्होंने बताया कि सर्विक्स कैंसर महिलाओं में सर्वाधिक पाया जाने वाला दूसरे नंबर का कैंसर है,लिहाजा इस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रो. जया चतुर्वेदी ने प्रशिक्षणार्थियों को महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड की निदेशक डा. सरोज नैथानी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से मरीजों को राज्य सरकार के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही इलाज संभव हो पाता है। उन्होंने महिलाओं से अपने परिवार के साथ साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरुक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य में जनसामान्य के स्वास्थ्य को लेकर और अधिक जिम्मेदारी से कार्य करने की आवश्यकता है। डा. सरोज नैथानी ने समय समय पर राज्य के चिकित्सकों व नर्सिंग आफिसरों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं के आयोजन के लिए एम्स प्रशासन का आभार जताया। सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना ने बताया कि महिलाओं को बच्चेदानी के कैंसर की रोकथाम के लिए स्वयं जागरुक होने व दूसरों को भी जागरुक करने की जरुरत है। उन्होंने बताया कि दुनियाभर में लगभग 1.5 लाख महिलाएं प्रतिवर्ष इस कैंसर से ग्रसित हो जाती हैं, जागरुकता की कमी, समय पर उपचार नहीं मिलने अथवा किन्हीं अन्य वजहों से इनमें से करीब 40 फीसदी महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने ऐसे मामलों को कम करने के लिए महिलाओं से नियमिततौर पर अपनी स्क्रिनिंग कराने को कहा है, साथ ही नर्सिंग आफिसरों से समुदाय को इस कैंसर को लेकर जागरुक करने पर जोर दिया। प्रशिक्षण कार्यशाला की समन्वयक व एम्स के स्त्री रोग विभाग की कैंसर शल्य चिकित्सक डा. शालिनी राजाराम ने महिलाओं से बच्चेदानी के कैंसर की रोकथाम के लिए समय समय पर अपना स्वास्थ परीक्षण कराने व इसके लिए उपलब्ध वैक्सीन की डोज लगाने को कहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की जागरुकता से ही सर्विक्स कैंसर का खात्मा हो सकता है। इस अवसर पर गायनी विभाग की डा. रूबी गुप्ता, डा. कविता खोईवाल, डा. लतिका चावला, सीएफएम विभाग के डा. अजीत भदौरिया, अस्पताल प्रशासन से डा. पूजा भदौरिया, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य जैवियर वैल्सियाल, एएनएस कमलेश चंद्र आदि मौजूद थे।

पैक्ड फूड व पेय पदार्थों से पैदा हो रही बीमारियां, चिकित्सकों ने बंद करने दिया जोर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित कार्यशाला में देश के राष्ट्रीय महत्व के चिकित्सा संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जनमानस को एनसीडी और मोटापे के संकट को दूर करने के लिए फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल (एफओपीएल) पर तत्काल कार्रवाई का मांग की है। उनका कहना है कि पैक्ड फूड व पेय पदार्थों के बढ़ता चलन लोगों के अनेक घातक बीमारियों से ग्रसित होकर असमय मृत्यु का कारण बन रहा है, लिहाजा इसे रोका जाना चाहिए।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंसेज, इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन, इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स एंड एपिडेमियोलॉजिकल फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने अन्य शीर्ष चिकित्सा संस्थानों के प्रमुख ​चिकित्सकों के साथ अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक फूड लेबल के लिए विशेष मांग की है।

बताया गया है कि 135 मिलियन लोग मोटापे और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के कारण होने वाली मौतों की वर्तमान वृद्धि दर है, जबकि भारत खराब भोजन के विनाशकारी प्रभाव का सामना कर रहा है। पैकेज्ड जंक फूड जो अस्वास्थ्यकर आहार का एक प्रमुख घटक है। विशेषज्ञ चिकत्सकों के अनुसार दुनियाभर में किसी भी अन्य जोखिम कारक की तुलना में अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार है और मोटापे, टाइप- 2 मधुमेह, हृदय रोग (सीवीडी) और कैंसर का एक प्रमुख कारण है। मोटापे की महामारी और एनसीडी के प्रसार में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में शर्करा, सोडियम और संतृप्त वसा के उच्च स्तर वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बाजार उपलब्धता में तेजी का हवाला देते हुए, भारत के शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपील की है कि इसकी रोकथाम के लिए एक प्रभावी एफओपीएल को अपनाना आवश्यक है।

एम्स ऋषिकेश द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीरी साइंसेज, पीजीआईएमईआर, आईपीएचए, नेशनल हेल्थ मिशन, उत्तराखंड और अन्य चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने दावा किया कि यदि देश में नमक, चीनी, संतृप्त वसा के लिए वैज्ञानिक कट-ऑफ सीमा लागू करता है और पैकेज्ड उत्पादों पर स्पष्ट और सरल चेतावनी लेबल अनिवार्य करता है, जैसा कि चिली, मैक्सिको और ब्राजील जैसे देशों में किया गया है तो ऐसा करने से इन तमाम वजहों से होने वाली अकाल मौतों को रोका जा सकता है।

निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने देश के लिए एक मजबूत और प्रभावी एफओपीएल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि भारत का चिकित्सा समुदाय इस महत्वपूर्ण नीतिगत उपाय के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है, जिससे कि हजारों भारतीय लोगों की जीवन रक्षा हो सकती है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड डॉ. सरोज नैथानी ने कहा कि स्वस्थ भोजन हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए, हमारे पूर्वजों द्वारा कहा गया है कि “भारत की एक समृद्ध परंपरा है जो ऐसे भोजन की वकालत करता है जो पौष्टिक, शुद्ध और स्वादिष्ट हो, लेकिन बाजार में पैक्ड खाद्य पदार्थों के आने से हमारा जीवन, खानपान बदल गया है। उन्होंने बताया कि युवा आमतौर पर प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड के आदी होने लगे हैं और इस तरह का भोजन आमतौर पर हरेक घर में इस्तेमाल किया जाने लगा है। जो कि स्वास्थ्य वर्धक न होकर जनस्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उनका कहना है कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि य​दि ऐसी खाद्य सामग्री पर कड़ाई से रोक लगाई जाती है तो लगतार बढ़ती हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

उनका कहना है कि आंकड़ों के मुताबिक लगभग 5.8 मिलियन लोग यानि 4 में से 1 व्यक्ति की 70 वर्ष की आयु तक पहुंचने से पहले ही एनसीडी से मृत्यु हो जाती है।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (आईएपीएसएम) की अध्यक्ष डॉ. सुनीला गर्ग के अनुसार मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग या कैंसर जैसी कई अन्य घातक बीमारियां पैक्ड फूड व पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बढ़ रही हैं। लिहाजा दुनियाभर के कई देश इस बात को स्वीकार करने लगे हैं कि उपभोक्ताओं को उनके स्वास्थ्य के अधिकार के हिस्से के रूप में इन उत्पादों के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है जो कि उन्हें दिया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि दुनिया के देश बीते वर्ष जब कोविड-19 महामारी के दुष्प्रभाव का सामना कर रहे थे, तब खाद्य और पेय उद्योग जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक पैक्ड फूड व शर्करा युक्त पेय पदार्थों के अपने बाजार का विस्तार कर रहे थे। यूरोमॉनिटर के अनुमान के मुताबिक, भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री 2005 में प्रति व्यक्ति 2 किलोग्राम से बढ़कर 2019 में 6 किलोग्राम हो गई है और 2024 में 8 किलोग्राम तक बढ़ने की उम्मीद है।
एम्स ऋषिकेश द्वारा शुरू की गई इस मुहिम के तहत आयोजित कार्यक्रम के समन्वयक व सीएफएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि एम्स द्वारा की गई यह पहल जन-जन तक पहुंचनी चाहिए। उनका कहना है कि इसके जनजागरुकता अभियान बनने से ही समुदाय एवं आम नागरिकों का स्वास्थ्य लाभ संभव हो सकता है।
इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन (आईपीएचए) के अध्यक्ष डॉ. संजय राय ने जोर दिया कि एफओपीएल वास्तव में सार्वजनिक स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है।

साइकिल यात्रा का मकसद शरीर को फिट रखना

स्वास्थ्य के प्रति जन सामान्य को जागरुक करने के उद्देश्य से रविवार को स्वास्थ्य सेवा से राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित अखिल भारतीय अनुषांगिक संगठन नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन, उत्तराखंड प्रांत की एम्स ऋषिकेश इकाई द्वारा ’स्वस्थ जीवनशैली साइकिल यात्रा’ का सफल आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
साइकिल रैली को एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रोफेसर रवि कान्त के साथ ही डीन प्रो. मनोज गुप्ता, एनएमओ अध्यक्ष डा. मीनाक्षी धर, डा. नवनीत मैगन व एनएमओ उत्तराखंड के सचिव डा. विनोद ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस दौरान निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने जन सामान्य को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए संस्था की इस पहल को सराहनीय बताया।
लगभग 10 किलोमीटर साइकिल रैली के आयोजन में फायरफॉक्स साईकिल कंपनी का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन उत्तराखंड के प्रदेश सचिव व एम्स ऋषिकेश के सीनियर रेजिडेंट डॉ. विनोद ने बताया की स्वस्थ जीवन शैली साइकिल यात्रा का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, व स्टाफ को जागरूक करना व बढ़ती बीमारियों व मानसिक तनाव को दूर करना था।
कार्यक्रम में भाग लेने और सफल बनाने के लिए डा. प्रशांत, पी.सी मीणा, विकास, हंसराज, कौशल, संकेत, सुभम, मोहित, नवीन, सोनू, बृजेश, लोकेश, अंकुर, सुमेर के साथ ही अन्य सभी डाक्टर्स, नर्सिंग ऑफिसरों और मेडिकल स्टूडेंट्स का आभार व्यक्त किया गया।

यह है आगामी योजना
साइकिल यात्रा की प्रारंभिक सफलता को देखते हुए आयोजकों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक रविवार को एम्स के गेट नंबर-एक से ग्रुप रैली और महीने के पहले रविवार को विशाल जागरुकता रैली निकाली जाएगी।

एम्स ऋषिकेश में डिजीटल बैंक की शुरुआत, लोगों को मिलेंगी कई सुविधाएं

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में पंजाब नेशनल बैंक का डिजिटल बैंक (ईज आउटलेट) ​विधिवत शुरू हो गया है। बैंक अधिकारियों के अनुसार यह पीएनबी का उत्तराखंड में पहला ईज आउटलेट है। बिना मेनपावर के संचालित होने वाले इस डिजिटल बैंक के माध्यम से लोग बैंक से संबंधित तमाम सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। उक्त सुविधाएं लोगों को बैंक कार्य दिवस के साथ साथ राजकीय व साप्ताहिक अवकाश के दिनों में भी 24 घंटे निर्बाध उपलब्ध हो सकेंगी। शुक्रवार को एम्स परिसर में आयोजित कार्यक्रम में निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी व पीएनबी देहरादून के अंचल प्रबंधक आरडी सेवक ने संयुक्तरूप से पीएनबी/ईज आउटलेट (डिजिटल बैंक) का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत जी ने कहा कि संस्थान में पीएनबी की ओर से राज्य का पहला ईज आउटलेट स्थापित होने से ऋषिकेश व आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ एम्स में उपचार के लिए आने वाले लोगों को 24 घंटे बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। निदेशक एम्स ने पीएनबी ईज आउटलेट के शुभारंभ अवसर पर मौजूद बैंक के अधिकारियों को बधाई दी व जनसुविधाएं मुहैया कराने के लिए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर पीएनबी के अंचल प्रबंधक आरडी सेवक ने कहा कि कोविडकाल ने हमें डिजिटिलाइजेशन का महत्व समझाया है, लिहाजा पीएनबी का डिजिटल बैंक उसी की पहल है, जिससे लोग भीड़भाड़ से दूर अपनी बैंक संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। उन्होंने बताया कि ईज आउटलेट एटीएम, बीएनए पासबुक प्रिंटिंग मशीन और चौक जमा मशीन से युक्त डिजिटल बैंक में लोगों को नकद धनराशि जमा करने, नकदी निकासी, बैंक पासबुक प्रिंटिंग और चेक जमा करने आदि बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
सर्किल हेड वाईएस राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी के देश में डिजिटलाइजेशन की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए पंजाब नेशनल बैंक द्वारा देश के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान एम्स ऋषिकेश में डिजिटल बैंक की सुविधा शुरू की है।
पीएनबी की वीरभद्र शाखा प्रबंधक गजेंद्र चौधरी ने बताया कि एम्स डिजिटल बैंक ब्रांच में रविवार के अलावा अन्य राजकीय अवकाश के दिनों, दूसरे और चौथे शनिवार, बैंक होलिडे में भी अपने ग्राहकों के साथ साथ अन्य बैंकों से जुड़े ग्राहकों को भी यह सुविधा मिल सकेगी।
इस अवसर पर एम्स के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, डीएचए प्रो. यूबी मिश्रा, वित्तीय सलाहकार कमांडेंट पीके मिश्रा, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी, डीडीओ संदीप सिंह के अलावा पीएनबी के उप अंचल प्रबंधक डीएस भंडारी, अनिल सिन्हा, मंडल प्रमुख राजिंदर भाटिया आदि मौजूद थे।

श्रमिकों की सुविधाओं का ध्यान रही केन्द्र सरकार-भूपेन्द्र यादव

केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केन्द्रीय राज्य मंत्री श्रम एवं रोजगार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस रामेश्वर तेली, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इण्डस्ट्रियल एरिया सिडकुल हरिद्वार स्थित 300 बिस्तरों (50 सुपर स्पेशलिटी बिस्तर सहित) के कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल (ई0एस0आई0सी0 अस्पताल) की साईट का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह ई0एस0आई0सी0 अस्पताल पहले 100 बेड का था, जिसे अब 300 बेड़ का किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 15 नवम्बर तक इसकी टेंडर आदि की समस्त औपचारिकताए पूर्णं कर ली जाएंगी तथा इसका निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने रुद्रपुर स्थित ई0एस0आई0सी0 अस्पताल का जिक्र करते हुए केन्द्र सरकार से इस अस्पताल को उत्तराखण्ड सरकार को संचालित करने की अनुमति देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून, काशीपुर अस्पताल के लिए जमीन की व्यवस्था जल्द ही कर ली जाएगी। इसके अलावा कोटद्वार, सितारगंज तथा चम्पावत में भी ई0एस0आई0सी0 अस्पताल खोलने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने वन कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि बहुत सारी ऐसी योजनाएं हैं, जिनके कारण कई योजनाओं के संचालित करने की अनुमति नहीं मिल पाती है। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे अधिकांश अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लग गये हैं।
वैक्सीनेशन के संबंध में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। इस महीने हमें 20 लाख वैक्सीन मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि दिसम्बर तक सभी को वैक्सीन की पहली डोज जरूर लग जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने विषम परिस्थितियों में अच्छा कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने अपील करते हुए कहा कि जिन लोगों के द्वारा अभी तक कोरोना वैक्सीन नहीं लगवायी गयी है, वह अपने नजदीक के केन्द्रों पर जाकर वैक्सीन अवश्य लगवा लें।
रामेश्वर तेली, श्रम एवं रोजगार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री भारत सरकार ने 300 बेड़ के बनने वाले ई0एस0आई0सी0 अस्पताल के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी तथा उन्होंने कहा कि हमने कोविड-19 रिलीफ फण्ड की शुरूआत की है, उन्होंने कहा कि हमने अब उज्ज्वला योजना फेज 2 की शुरूआत की है।
डॉ. हरक सिंह रावत, श्रम मंत्री उत्तराखण्ड सरकार ने कहा कि आज हम सबके लिए खुशी का अवसर है। उन्होंने कहा कि हम काफी समय से इस ई0एस0आई0सी0 अस्पताल के लिए प्रयासरत थे, लेकिन वह धरातल पर आज उतर पाया है। मैं तमाम उद्योगों के कर्मचारियों को बधाई देता हूं।
प्रदेश अध्यक्ष भाजपा मदन कौशिक ने कहा कि सिडकुल काफी बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, इस अस्पताल की मांग काफी समय से हो रही थी, आज यह मांग पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इसके तैयार हो जाने से हमारे कामगार भाइयों को बेहतर स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध होंगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक रानीपुर आदेश चौहान ने कहा कि इस अस्पताल के लिए हम 2012 से प्रयासरत थे, काफी प्रयास के बाद आज यह शुभ अवसर आया है।
विधायक ज्वालापुर सुरेश राठौर ने कहा कि हमारी सरकार गरीब, मजदूर तथा कमजोर वर्ग के हित में लगातार कार्य कर रही है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये श्रम एवं रोजगार तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भारत सरकार भूपेन्द्र यादव ने कहा कि हमने हरिद्वार के 100 बेड के ई0एस0आई0सी0 अस्पताल को 300 बेड़ के अस्पताल में परिवर्तित कर दिया है तथा इसके लिए धनराशि स्वीकृत की गयी है। उन्होंने कहा कि सारी औपचारिकतायें पूरी करते हुये जल्दी ही इसका भूमिपूजन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोटद्वार व खटीमा में भी ई0एस0आई0सी0 अस्पताल खोलने की कार्यवाही करेंगे। उन्होंने रुद्रपुर के ई0एस0आई0सी0 अस्पताल का संचालन उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जाने के मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड एवं वन मंत्री के अनुरोध पर ई0एस0आई0सी0 अस्पताल रुद्रपुर को उत्तराखण्ड सरकार द्वारा संचालित किये जाने की सहमति प्रदान की।
केन्द्रीय मंत्री यादव ने कहा कि हमने विगत 26 अगस्त को आम श्रमिकों के लिए ई-श्रम पोर्टल लांच किया है, जिसमें अभी तक 20 लाख से अधिक असंगठित मजदूरों ने पंजीकरण करवाया है। उन्होंने कहा हम हर वर्ग तक सरकार की प्रत्येक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हमने व्यापारियों के लिए पेंशन योजना लागू की थी, जिसका काफी बड़ी संख्या में व्यापारी वर्ग लाभ उठा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने अभी तक इस योजना का लाभ नहीं उठाया है, वह भी इसका लाभ उठायें।
इस अवसर पर अपूर्व चन्द्र, सचिव श्रम व रोजगार ने बताया कि ई0एस0आई0सी0 मेडिकल सुविधा बीमित कामगारों को निःशुल्क मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के लिए लगभग 300 करोड़ स्वीकृत किये गये हैं।
सचिव श्रम व रोजगार ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल (ई0एस0आई0सी0 अस्पताल) पर प्रकाश डालते हुये कहा कि अस्पताल में बेसमेंट में फिजियोथैरपी, योगा, मॉर्चरी, हॉस्पिटल स्टोर्स एवं सर्विस तथा बिल्डिंग सर्विस, ग्राउंड फ्लोर पर इमरजेंसी, मेन एंट्रेस लॉबी, सेन्ट्रल रिसेपशन, रजिस्ट्रेशन डेस्क, रेडियोलॉजी इमेजिंग डिपार्टमेंट, सेन्ट्रल वेटिंग एरिया, हॉस्पिटल किचन, फर्स्ट फ्लोर में ओपीडी कॉम्प्लेक्स, सेकेण्ड फ्लोर में ब्लड बैंक, आईपीडी जनरल वार्ड-136 बेड, थर्ड फ्लोर में कैथलैब, आईपीडी जनरल वार्ड-136 बेड़, फोर्थ फ्लोर में सुपर स्पेशलिटी वार्ड-52 बेड़, डायालिसिस वार्ड-10 बेड, कीमोथैरेपी वार्ड-6 बेड़, आईसीयू-22 बेड़, पीआईसीयू-6 बेड, पांचवें फ्लोर में ओटी कॉम्प्लेक्स-6 ओटीस, लेबर कॉम्प्लेक्स, नर्सरी, एनआईसीयू तथा सिक्स्थ फ्लोर में एडमिन डिपार्टमेंट तथा डायोग्नोस्टिक लैब आदि की सुविधाएं उपलब्ध रहेगी।
इस ई0एस0आई0सी0 अस्पताल का साइट एरिया 5 एकड़ (20234 वर्ग मी0), कुल निर्मित क्षेत्रफल 59,669 वर्ग मी0, कुल ग्राउंड कवरेज 5394 वर्ग मी0, हॉस्पिटल एरिया 40,035 वर्ग मी0 आवासीय एरिया 6600 वर्ग मी0, मल्टीलेवल पार्किंग एरिया 12360 वर्ग मी0, सर्विस ब्लॉक एरिया 674 वर्ग मी0, कुल उपलब्ध करायी जाने वाली पार्किंग में 550 ईसीएस अस्पताल के लिए तथा 56 ईसीएस आवासीय पार्किंग हेतु उपलब्ध करायी जाएगी।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोविड-19 से मृत्यु होने वाले बीमित कामगारों के आश्रितों को ईएसआईसी रिलीफ फण्ड के अंतर्गत, वित्तीय सहायता हेतु प्रमाण पत्र वितरित किये।
इस मौके पर वन मंत्री हरक सिंह रावत ने केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव, रामेश्वर तेली एवं मुख्यमंत्री को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, यतीश्वरानंद, सांसद राज्यसभा नरेश बंसल, मेयर नगर निगम हरिद्वार अनीता शर्मा, महानिदेशक ई.एस.आई.सी. अनुराधा प्रसाद, सचिव श्रम हरबंस सिंह चुग, जिलाधिकारी हरिद्वार विनय शंकर पाण्डेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत सहित अधिकारीगण एवं जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।