राइफलमैन जसवंत सिंह कोविड सेंटर में ब्लैक फंगस का इलाज भी मिलेगा


आईडीपीएल स्थित राइफलमैन जसवंत सिंह कोविड केयर सेंटर में अब म्यूकर माइकोसिस के मरीजों का उपचार भी किया जाएगा। सेंटर में पहुंचने वाले म्यूकर ग्रसित रोगियों की भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत कर दी गई है।
एम्स ऋषिकेश द्वारा संचालित राइफलमैन जसवंत सिंह एमवीसी कोविड केयर सेंटर में म्यूकर माइकोसिस के मरीजों का इलाज भी शुरू कर दिया गया है। गौरतलब है कि अभी तक यहां केवल कोरोना संक्रमित मरीजों को ही भर्ती किए जाने की सुविधा थी। विशेषरूप से कोविड मरीजों के उपचार के लिए तैयार किए गए 500 बेड की सुविधा वाले इस कोविड केयर सेंटर का उद्घाटन बीते माह 26 मई को सूबे के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी द्वारा किया गया था।

एम्स निदेशक रविकांत ने इस बाबत बताया कि म्यूकर माइकोसिस के मरीजों का इलाज करने के लिए एम्स में उच्च अनुभवी चिकित्सकों की टीम और पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। महामारी को देखते हुए संस्थान तथा आईडीपीएल स्थित राइफलमैन जसवंत सिंह कोविड केयर सेंटर में कोविड और म्यूकर माइकोसिस के मरीजों का उपचार करना एम्स की पहली प्राथमिकता है। जिसके तहत एम्स के कुशल चिकित्सकों की टीम 24 घंटे मरीजों की सेवा में जुटी है।
इस बाबत जानकारी देते हुए राइफलमैन जसवंत सिंह कोविड केयर सेंटर के प्रभारी और एम्स के ट्राॅमा सर्जन डाॅ. मधुर उनियाल ने बताया कि म्यूकर माइकोसिस के रोगियों को कोविड केयर सेंटर की इमरजेंसी के माध्यम से तत्काल भर्ती किए जाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि सेंटर में भर्ती प्रक्रिया के लिए मरीजों को एम्स पहुंचने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी मरीज के उपचार में मेजर ओटी की आवश्यकता हुई, तो उसे एम्स तक पहुंचाने के लिए सेंटर पर 24 घंटे एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध है। जो कि सभी मरीजों के लिए निःशुल्क है।
डाॅ. उनियाल ने बताया कि सेंटर में मरीजों के लिए इलाज, भोजन, तमाम तरह के परीक्षण, दवा और एम्बुलेंस आदि सुविधाएं पूरे तौर से निःशुल्क रखी गई हैं। मरीज के तीमारदार सांय 6 से 8 बजे तक रैबार’ डेस्क के माध्यम से अपने मरीज के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा अस्पताल में मेडिकल सुविधाओं से संबंधित पूछताछ हेतु 76690 62536 और 76690 62537 टेलीफोन नंबर जारी किए गए हैं। इन नंबरों पर संपर्क कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

ऋषिकेशः नशे के रोगियों को मिल सकेगा उच्चस्तरीय उपचार, एम्स में शुरू हुआ एटीएफ

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष-2019 में किए गए एक शोध में यह पाया गया कि उत्तराखंड में तम्बाकू के अलावा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले नशे के प्रकारों में शराब, कैनाबिस उत्पाद (भांग/गांजा/चरस), ओपिऑइड्स (स्मैक/हेरोइन/कोकेन/ डोडा आदि ) व इन्हेलन्ट्स भी प्रमुखरूप से शामिल है।
इस सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तराखंड में विभिन्न प्रकार का नशा करने वाले मौजूदा पुरुष उपभोगकर्ताओं की संख्या शराब से 38.1 प्रतिशत, कैनाबिस उत्पाद से 1.4 प्रतिशत, ओपिऑइड्स से 0.8 प्रतिशत और इन्हेलन्ट्स का इस्तेमाल करने वाले 10 से 17 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 1.7 फीसदी है। देशभर में हर पांच में से एक व्यक्ति शराब और हर 11 में से एक व्यक्ति कैनाबिस नशे का रोगी है, जिन्हें तत्काल उपचार की नितांत आवश्यकता है।
इसके अलावा लगभग 77 लाख भारतियों को ओपिऑइड्स नशे के लिए शीघ्र इलाज शुरू करने की जरुरत है। आजकल देखा गया है कि वयस्क लोग ही नहीं बल्कि बच्चे भी नशे के रोगी बनते जा रहे हैं। इसकी एक अहम वजह है लोगों के जीवन में स्ट्रेस बहुत बढ़ गया है। कोरोना पान्डेमिक के चलते भी इस स्ट्रेस में बहुत बड़ा इजाफा हुआ है। ऐसे लोगों में आम धारणा बन गई है कि नशा करना स्ट्रेस से जूझने और निपटने का एक आसान तरीका है, मगर यह स्ट्रेस को कम अथवा समाप्त करने का सबसे गलत तरीका है।
नशे की शुरुआत आमतौर पर खुद व्यक्ति की इच्छा से, प्रयोग करने की उत्सुकता, दोस्तों के दबाव, पारिवारिक परेशानियों, काम का स्ट्रेस व अन्य परेशानियों से होने की वजह से होती है। मगर एक बार इससे ग्रसित होने पर यह नशे का रोग बन जाता है। नशे की बीमारी केवल एक आदत, इच्छाशक्ति में कमी या कमज़ोरी का कम होना नहीं बल्कि एक काम्प्लेक्स तरीके की दिमागी बीमारी है। नशे से व्यक्ति के दिमाग में अस्थायी एवं स्थायी बायोकैमिकल बदलाव आते हैं, जिसके लिए इलाज की जरुरत पड़ती है।

नशा ग्रस्त व्यक्ति का दिमाग उसका साथ नहीं दे पाता अथवा वह इस नशे की बीमारी से अपने आप कभी भी बाहर नहीं आ पाता। नशे के रोग से बहुत से लोगों का घर- परिवार खराब हो जाता है और प्रतिवर्ष लाखों लोग अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्ति के आर्थिक, सामाजिक जीवन व रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका बहुत हद तक दुष्प्रभाव पड़ता है। निदेशक प्रोफेसर रवि कांत के निर्देशन में शुरू की गई एटीएफ सर्विस ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है और वह फिर से मुख्यधारा से जुड़कर अपने अमूल्य जीवन को संवार सकते हैं।
एम्स निदेशक ने बताया कि रोगियों को नशे की समस्याओं से दूर करने के लिए एम्स ऋषिकेश ने एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ए.टी.एफ.) की शुरुआत की है, जिसमें नशावृत्ति के शिकार रोगियों को परामर्श व उपचार की सभी प्रकार उच्चस्तरीय सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि संस्थान में इस सुविधा को ए.टी.एफ. एन. डी. डी.टी.सी. एम्स दिल्ली द्वारा समन्वित तथा भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की सहायता से शुरू किया गया है। इस सेवा के शुरू किए जाने का उद्देश्य प्रदेश में नशे से ग्रस्त रोगियों को मुफ्त एवं उच्चस्तरीय उपचार मुहैय्या कराना है। संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ए.टी.एफ. के नोडल ऑफिसर डा. विशाल धीमान ने बताया कि एम्स में संचालित ए.टी.एफ के तहत, ओपीडी OPD और एडमिशन (IPD) दोनों तरह से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल में सभी मरीजों के लिए बिस्तर की सुविधा, सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं, अत्याधुनिक उपचार प्रणाली निशुल्क उपलब्ध कराने के साथ ही रोगियों की काउंसलिंग भी की जाएगी। जिसमें उन्हें नशे की तलब को कंट्रोल करने की अलग-अलग तकनीकें बताई जाएंगी, साथ ही रोगियों की मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग भी की जाएगी।

नशा छोड़ने के इच्छुक लोग इस नंबर से लें सहायता
संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ए.टी.एफ. के नोडल ऑफिसर डा. विशाल धीमान जी ने बताया कि नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए एम्स के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा हेल्पलाइन नंबर 7456897874 (टेली-एडिक्शन सर्विस) भी जारी किया गया है, जिसमें सोमवार प्रातः 9:00 बजे से शुक्रवार शाम 4:00 बजे तक और शनिवार सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चिकित्सकीय परामर्श लिया जा सकता है। ए.टी.एफ प्रोजेक्ट का उद्देश्य उत्तराखंड और इसके आसपास के क्षेत्रों को नशखोरी के विरुद्ध लोगों को जागरुक करना और इससे ग्रसित रोगियों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, जिससे वह समाज की मुख्यधारा से जुड़कर अपनी उन्नति के साथ सामान्य जीवन जी सकें।

एम्स के विशेषज्ञों की राय, लाॅकडाउन में स्वास्थ्य के प्रति नहीं बरतें लापरवाही

यदि आप कई दिनों तक एक ही मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइये। आपकी यह लापरवाही म्यूकर माइकोसिस से ग्रसित होने की वजह बन सकती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश ने इस बाबत सलाह दी है कि कोविड19 से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सूती कपड़े के मास्क को दोबारा पहनने से पहले दैनिकतौर से अवश्य धो लें, यह बेहद जरूरी है।

जून और जुलाई के महीने वातावरण में आर्द्रता बहुत कम हो जाती है। ऐसे में जब हम नाक से सांस लेते हैं तो उसके आगे मास्क लगे होने से मास्क के अन्दर की ओर नमी बनी रहती है। मास्क को लगातार पहने रहने से इस नमी में कीटाणु पनपने लगते हैं और जिससे फंगस के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता है। फिर नाक और मुंह से होता हुआ यह फंगस धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों को संक्रमित कर देता है।

एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कान्त ने बताया कि सूती मास्क हमेशा धुले हुए और साफ-सुथरे पहनने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कोई जरूरी नहीं है कि जिसे कोविड नहीं हुआ हो उसे म्यूकर माइकोसिस नहीं हो सकता। नाॅन डिस्पोजल मास्क को दैनिकतौर से साफ नहीं करने वाले लोगों को भी इस बीमारी का खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि कोविड और म्यूकर माइकोसिस दोनों ही बीमारियों से तभी बचाव संभव है, जब कोविड गाइडलाइनों का पूर्ण पालन करने के साथ साथ मास्क का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। खासतौर से जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की नितांत आवश्यकता है।

कोविड के नोडल अधिकारी डाॅ. पीके पण्डा ने बताया कि लाॅकडाउन के कारण अधिकांश नाॅन कोविड रोगी अपने स्वास्थ्य संबंधी जांचों के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। ऐसे में नियमित जांच नहीं कराए जाने से उन्हें अपनी इम्युनिटी और ब्लड में शुगर लेवल की मात्रा का पता नहीं चल पाता। उन्होंने कहा कि म्यूकर माइकोसिस से बचाव के लिए ब्लड में शुगर की मात्रा की रेगुलर जांच कराना जरुरी है। म्यूकर रोगियों के उपचार की सुविधा के बारे में उन्होंने बताया कि ऐसे रोगियों के लिए एम्स में 7 वार्ड बनाए गए हैं। इनमें कुल 185 बेड हैं, जिनमें 65 आईसीयू सुविधा वाले बेड हैं।

म्यूकर माइकोसिस फंगस अक्सर कोविड के लक्षण उभरने के 3 सप्ताह बाद से पनपना शुरू होता है। कमजोर इम्युनिटी और शुगर पेशेंट के लिए यह फंगस सबसे अधिक घातक है। म्यूकर माइकोसिस ट्रीटमेंट टीम के हेड और ईएनटी सर्जन डाॅ. अमित त्यागी का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर का पीक टाईम मई का दूसरा सप्ताह था। इस लिहाज से मई अंतिम सप्ताह और जून के पहले सप्ताह तक म्यूकर के मरीजों का ग्राफ तेज गति से बढ़ा था। लेकिन अब इसमें कमी आनी शुरू हो गई है। मई महीने में एम्स में दैनिकतौर पर म्यूकर ग्रसित 7 से 12 पेशेंट आ रहे थे। जबकि अब यह संख्या 4 से 7 प्रतिदिन हो गई है। उन्होंने बताया कि एम्स में अभी तक म्यूकर के कुल 208 पेशेंट आ चुके हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिले सीएम तीरथ, की एम्स की शाखा कुमाऊं में खोलने की मांग


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से भेंट की। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से कुमाउं मण्डल में एम्स की शाखा की स्थापना के साथ ही कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज खोलने का अनुरोध किया। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस संबंध में उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।

आरटीपीसीआर रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए जाने पर पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया, जांच शुरू


फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट की सूचना पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ढालवाला चेकपोस्ट पर छापेमारी की । इस मामले में संलिप्त एक युवक को पुलिस ने हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ जारी है।

घटनाक्रम के अनुसार शुक्रवार दोपहर को कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ढालवाला स्थित स्वास्थ्य विभाग की चेकपोस्ट में पहुंचे। यहां पर छापामारी की कार्रवाई करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और एंटीजन रैपिड टेस्ट की रिपोर्टों का गहनता से निरीक्षण किया। इस दौरान मौके पर मौजूद हरियाणा के चार युवकों ने कैबिनेट मंत्री को बताया कि यहां चेकपोस्ट पर घंटेभर में ही उन्हें आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाकर दी गई है। जिसके बाद कैबिनेट मंत्री का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना स्वास्थ्य और पुलिस प्रशासन के आलाधिकारियों को दी। इसके साथ ही उक्त प्रकरण के जांच के निर्देश दिए। जिसके बाद आनन- फानन में मौके से पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

इस दौरान पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी, मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती, मुनिकीरेती थाना निरीक्षक कमल मोहन भंडारी, वरिष्ठ उपनिरीक्षक सदानंद पोखरियाल, चैकी प्रभारी आशीष कुमार मौजूद थे।

फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाने वालो की शिकायत मिल रही थी। जोकि गंभीर मामला है। जिसके बाद शुक्रवार को ढालवाला चेकपोस्ट पर छामामारी की कार्रवाई गई। जहां पर फर्जीवाड़ा का मामला पकड़ में आया। मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए।
सुबोध उनियाल, कैबिनेट मंत्री

विश्व तम्बाकू निषेध दिवसः प्रत्येक वर्ग की भूमिका से तंबाकू सेवन पर लग सकता है प्रतिबंध


प्रतिवर्ष तंबाकू का सेवन करने वाले दस में से एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, इस पर रोक लगाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी। तंबाकू का सेवन न केवल मुंह के कैंसर का कारण है अपितु यह फेफड़ों में भी कैंसर पैदा करता है।

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर अपने संदेश में एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकान्त ने कहा कि तम्बाकू हृदय की कोरोनरी वाहिकाओं को प्रभावित करता है। इसकी वजह से हृदय में रक्त की आपूर्ति की कमी हो जाती है। इसे इस्कीमिक या कोरोनरी हृदय रोग कहते हैं। मुंह के कैन्सर का प्रमुख कारण तम्बाकू ही है। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी अग्रवाल ने बताया कि तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में कैन्सर का खतरा 6 से 8 गुना ज्यादा होता है। यदि तम्बाकू सेवन करने वाला व्यक्ति शराब का भी आदी हो तो फिर यह खतरा 10 गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि स्कूल-कालेज के अध्यापकों, समाजसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रत्येक वर्ग को इस मामले में जागरूकता लाने की आवश्यकता है।

एम्स में आयोजित वेबिनार में बच्चों के बढ़ते मोटापे पर चिंता व्यक्त की गई

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बच्चों में बढ़ते मोटापे की वृद्धि को रोकने के लिए जंक फूड पैकेजों में चीनी, नमक व वसा के चेतावनी लेवल को दर्शाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने कहा कि इस मामले में ठोस नीति बनाने की नितांत आवश्यकता है। एम्स ऋषिकेश ने वेबिनार के माध्यम से पैकेज फूड्स में चीनी, नमक और वसा के चेतावनी लेवल को दर्शाने के लिए जनजागरुकता मुहिम की शुरुआत की है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में होने वाली मोटापे की वृद्धि स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक है। राष्ट्रीय स्तर के इस वेबीनार में देश के विभिन्न मेडिकल संस्थानों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने बताया कि जंक फूड में चीनी, नमक और वसा पर चेतावनी लेबल और इनकी मात्रा का उल्लेख होने से भारत में बच्चों में बढ़ती मोटापे की वृद्धि को रोका जा सकता है। संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि चिकित्सक होने के नाते हम सभी को इस समस्या को समझना होगा। इस स्थिति को रोकने के लिए अकेले बच्चे या उनके परिवार वाले ही नहीं बल्कि नीति निर्माताओं, खाद्य उद्योग और चिकित्सकों का सामुहिक कर्तव्य है।

क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर उमेश कपिल का कहना है कि जंक फूड वाले पैकेजों में भारत को नमक, चीनी और संतृप्त वसा के लिए स्पष्ट कट ऑफ स्थापित करने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ ने फ्रंट ऑफ पैकेजिंग लेबलिंग (एफओपीएल) को एक नीति के रूप में पहचाना है। इस नीति के लागू होने से बच्चों और उपभोक्ताओं को सूचना के साथ स्वस्थ भोजन का विकल्प चयन करने में मदद मिलेगी। एम्स ऋषिकेश में इस प्रोजेक्ट का संचालन कम्यूनिटी एवं फेमिली मेडिसिन विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर डा. प्रदीप अग्रवाल कर रहे हैं।

सीएम ने वर्चुअल तरीके से किया श्रीनगर मेडिकल कालेज का वर्चुअल लोकार्पण

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में स्थापित 30 नए आईसीयू बेड का वर्चुअल माध्यम से लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि कोविड के समय में इन आईसीयू बेड की उपलब्धता से विशेषकर पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग एवं टिहरी जिले के लोगो को ईलाज में मदद मिलेगी। इन जनपदों से अधिकांश मरीज ईलाज के लिए श्रीनगर आते हैं। कोविड के बाद अन्य बीमारियों के ईलाज के लिए भी इन आईसीयू बेड का उपयोग होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में आईसीयू, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता है। मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पतालों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनका विस्तार सीएचसी एवं पीएचसी लेवल तक किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि जल्द ही नैनीडांडा, थलीसैंण एवं प्रदेश के अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोविड की तीसरी लहर के लिए अभी से सतर्कता बरतनी होगी। सभी अस्पतालों में बच्चों के लिए अलग से व्यवस्था हो। इसकी समय से पूरी तैयारी रखी जाय।

इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से उच्च शिक्षा एवं सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, जिलाधिकारी पौड़ी विजय जोगदंडे, सीएमओ पौड़ी डॉ मनोज शर्मा, प्रिंसिपल श्रीनगर मेडिकल कॉलेज डॉ सीएमएस रावत आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री तीरथ ने आईडीपीएल ऋषिकेश में 500 बेड के कोविड सेंटर का किया उद्घाटन

कोविड केयर सेंटर में सभी ऑक्सीजन युक्त बेड की सुविधा

100 आईसीयू बेड की भी है व्यवस्था

ब्लैक फंगस के मरीजों और बच्चों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने आईडीपीएल ऋषिकेश में डीआरडीओ द्वारा स्थापित 500 बेड के अस्थाई कोविड केयर सेंटर (राइफलमैन जसवंत सिंह रावत, एम.वी.सी) का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कोविड केयर सेंटर की सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया।

आधुनिक सुविधायुक्त इस कोविड केयर सेंटर में सभी बेड ऑक्सीजन युक्त हैं। 100 बेड में आईसीयू की व्यवस्था भी है। इसमें म्यूकरमायोसिस (ब्लैक फंगस) के मरीजों एवं बच्चों के लिए भी अलग से वार्ड बनाये गये हैं। बच्चों के वार्ड में स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी आईसोलेशन एरिया बनाया गया है। मात्र 02 सप्ताह में डीआडीओ द्वारा इसे तैयार किया गया है। इस कोविड केयर सेंटर का क्लीनिकल मैनेजमेंट एम्स ऋषिकेश द्वारा किया जायेगा। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस कोविड केयर सेंटर की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि कोविड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में तेजी से वृद्धि की गई है। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आईसीयू एवं ऑक्सीजन बेड की पर्याप्त उपलब्धता है। जल्द ही हल्द्वानी में भी 500 बेड का कोविड केयर सेंटर बनकर तैयार हो जायेगा। आई.डी.पी. एल ऋषिकेश में राइफलमैन जसवंत सिंह रावत, एम. वी.सी के नाम से यह कोविड केयर सेंटर बनाया गया। मुख्यमंत्री तीरथ ने कहा कि राइफलमैन जसवंत सिंह रावत ने 1962 भारत-चीन युद्ध में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया। इस युद्ध में वे शहीद हो गए थे। पौड़ी के बीरोखाल के बाड्यू पट्टी में जन्मे जसवंत सिंह रावत की वीरता की कहानी आज भी सबको प्रेरणा देती है।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, एम्स निदेशक प्रो. रविकान्त, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष श्रीवास्तव, डिप्टी मेडिकल सुप्रिटेंट एम्स ऋषिकेश डॉ. मधुर उनियाल एवं डीआडीओ के अधिकारी उपस्थित थे।

बच्चों को तीसरी लहर से बचाने के लिए राज्य में गठित हुई टास्क फोर्स

देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना महामारी की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.हेम चंद्र की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स में सेवानिवृत्त व विभिन्न अस्पतालों में तैनात बाल रोग विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.तृप्ति बहुगुणा ने टास्क फोर्स गठित करने के आदेश जारी किए। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण का प्रभाव ज्यादा होने की आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने टास्क फोर्स का गठन किया है। जो सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच समन्वय बनाने, संक्रमित बच्चों के उपचार के लिए बेड उपलब्ध कराने, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति, मानव संसाधन, उपचार की प्रक्रिया को प्राथमिक से माध्यमिक और माध्यमिक से उच्च स्तर पर व्यवस्था करने का काम करेगी।

टास्क फोर्स में इन्हें किया शामिल
टास्क फोर्स में डॉ.हेम चंद्र को अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ.सरोज नैथानी को सचिव सदस्य बनाया गया है। इनके अलावा स्वास्थ्य निदेशक डॉ.एसके गुप्ता, सेवानिवृत्त स्वास्थ्य महानिदेशक एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.डीएस रावत, सेवानिवृत्त स्वास्थ्य महानिदेशक एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अर्चना श्रीवास्तव, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ.आलोक सेमवाल व सचिव डॉ.पीएस रावत, एम्स ऋषिकेश के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ.एनके भट्ट, एचआईएचटी के नवजात विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो.गिरीश गुप्ता, बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो.अश्वनी सूद, दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो.अशोक कुमार, एचआईएमएस बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ.अप्ला गुप्ता, महंत इन्दिरेश हास्पिटल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ.उत्कर्ष शर्मा, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.रितु रखोलिया, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.अमित सुयाल, एफआईएपी रुड़की के एमडी डॉ.सुधीर चैधरी, सहोता मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल काशीपुर से डॉ.रवि सहोता, डॉ.रवि अदलखा, ऐरन हास्पिटल रुड़की के डॉ.अशांक ऐरन, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राजेश अग्रवाल और विश्व स्वास्थ्य संगठन उत्तराखंड के एसएमओ डॉ.विकास को सदस्य बनाया गया है।