उच्चस्तरीय समिति में तीर्थपुरोहित और हक-हकूकधारियों को किया सदस्य नामित

सरकार ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड को लेकर गठित उच्चस्तरीय समिति में नौ तीर्थपुरोहित और हक-हकूकधारियों को बतौर सदस्य नामित किया है। सचिव धर्मस्व एचसी सेमवाल की ओर से इसके आदेश किए गए।
चारधाम के तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड भंग करने की मांग कर रहे हैं। उनके विरोध को देखते हुए सरकार ने तीर्थ पुरोहितों एवं हकूकधारियों के सुझाव लेने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। इसकी कमान भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोहर कांत ध्यानी को दी गई है। ध्यानी इस मामले में अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को दे भी चुके हैं। हालांकि, तीर्थपुरोहित और हक-हकूकधारी ध्यानी का भी विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ध्यानी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। इसलिए, सरकार ने इस समिति में नौ तीर्थपुरोहितों को सदस्य नामित किया है।

इन्हें नामित किया गया सदस्य
-बदरीनाथ धाम से विजय कुमार ध्यानी, संजय शास्त्री और रवींद्र पुजारी
-केदारनाथ धाम से विनोद शुक्ला और लक्ष्मी नारायण जुगराण
-गंगोत्री धाम से संजीव सेमवाल और रवीन्द्र सेमवाल

देवस्थानम बोर्ड पर उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट सरकार को मिली

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सोमवार को सचिवालय में देवस्थानम बोर्ड के सम्बन्ध में गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष मनोहर कान्त ध्यानी ने भेंट की।
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष मनोहर कान्त ध्यानी ने देवस्थानम बोर्ड के सम्बन्ध में उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार की गई अन्तरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कई बिन्दुओं पर तीर्थ पुरोहित समाज व पंडा समाज से वार्ता के बाद संशोधन का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। जिन बिन्दुओं पर आपत्ति है वे बिन्दुओं पर सरकार अब क्या एक्शन लेगी ये तो सरकार ही तय करेगी।

बलूनी ने भी दिए थे संकेत
तीर्थ पुरोहितों से जुड़े हुए कुछ पदाधिकारियों ने दिल्ली में राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी से भेट की थी। जिसके बाद तीर्थपुरोहितों की ओर से ये दावा किया गया था कि अनिल बलूनी ने देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के संकेत दिये है। हालांकि सांसद की ओर से ऐसा कोई बयान नही आया था। सूत्र बतातें है कि चुनावी वर्ष में अब सरकार इसके नफा नुकसान का आंकलन करके ही आगे की रणनीति के तहत कार्य करेगी।

विस अध्यक्ष को वाल्मीकि समाज ने पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया

ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत गुरुवार देर शांय महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आईडीपीएल क्षेत्र में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस मौके पर महर्षि बाल्मीकि की जय जयकार से क्षेत्र गूंज उठा। आईडीपीएल बाल्मीकि मंदिर से प्रारंभ हुई शोभा यात्रा पर जगह-जगह पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी शोभायात्रा में शामिल हुए।
वाल्मीकि मंदिर आईडीपीएल से प्रारंभ हुई शोभायात्रा राम मंदिर, आईडीपीएल गेट, मीराबेन, बापूग्राम होते हुए नगर निगम शाखा कार्यालय पर संपन्न हुई। शोभायात्रा में महर्षि बाल्मीकि, लव कुश, राधा कृष्ण, बाबा भोलेनाथ, माता सबरी एवं हनुमान जी की झांकियां बैंड बाजे के साथ विभिन्न मार्गों से गुजरती हुई निकली, झांकी को देखने के लिए सड़क के दोनों और काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
शोभायात्रा में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का बाल्मीकि समाज द्वारा पगड़ी पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया। साथ ही महर्षि बाल्मीकि का चित्र भी उन्हें भेंट किया गया। इस दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अखाड़ा कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि महर्षि बाल्मीकि ने रामायण जैसे महान धार्मिक ग्रंथ की रचना की वह पूरे समाज के लिए पूजनीय हैं। विस अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि हमें महर्षि बाल्मीकि द्वारा बताए गए मार्ग पर चलकर श्रीराम के आदर्शों को अपनाना होगा। विस अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने पूरे संसार को संदेश दिया था कि मनुष्य की इच्छाशक्ति उसके साथ हो तो बड़ा काम भी आसान हो जाता है। महर्षि वाल्मीकि श्लोक के जन्मदाता थे उन्होंने ही संस्कृत का प्रथम श्लोक लिखा था। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मनुष्य जाति, धर्म, क्षेत्र से नहीं बल्कि कर्मों से महान बनता है।
इस अवसर पर भाजपा के अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष बाल्मीकि, बाल्मीकि समाज के अध्यक्ष सुरेश, बाल्मीकि जयंती के अध्यक्ष सनी, रविंद्र राणा, नरेश कुमार, आत्माराम, दिनेश, अनिल खन्ना, महिपाल, मंडल महामंत्री सुमन, निखिल, पार्षद रश्मि देवी, हेमा, नरेश, चंचल, राहुल, राकेश, राजीव, निखिल सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

माता के जागरण में प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राजपाल खरोला ने ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत चंद्रेश्वर नगर में जय दुर्गा समिति द्वारा आयोजित माँ भगवती के जागरण में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की खुशी के लिए दुआ भी मांगी।
खरोला ने कहा कि हाल में प्रकृति के भयावह रूप से हुई त्रासदी से प्रदेश वासियो को कई परेशानियों से होकर गुजरना पड़ा है। वह मां भगवती से कामना करते है कि इस त्रासदी के दौर पर प्रदेशवासियो की रक्षा करे और प्रदेश में सुख शांति बनी रहे।
इस मौके पर भरत लाल यादव, संजीव चौहान, तेज बहादुर यादव, जितेंद्र पाल पाठी, देवेंद्र प्रजापति, एकान्त गोयल, मोहित कुमार, विशाल चौहान, अंकित कुमार, देवेंद्र सिंह, सुमित कुमार, उदय, नीरज सिंह, श्याम शर्मा, सुजीत यादव, चंदेश्वर यादव, अशोक कुमार, ऋषभ मित्तल, संजीत कुमार, विशाल कुमार, रोहित राम, अंकित धीमान, अमन पाण्डेय, गोपी चंद, नीरज कुमार, ऋषि राम, ऋतिक राम, प्रदीप गौड़, ऋतिक पाल और सैकड़ो क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

चारधामों के कपाट बंद होने के तिथि की हुई घोषणा

चारधाम यात्रा के लिए अब कम समय बचा है। अगले माह चारों धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसकी औपचारिक घोषणा शुक्रवार को विजयादशमी पर हो गई है। केदारनाथ व यमुनोत्री धाम के कपाट छह नवंबर को भैया दूज के दिन बंद होंगे। वहीं, गंगोत्री धाम के कपाट पांच नवंबर को गोवर्धन पूजा के दिन बंद होंगे।

यह रहेगा दिन और समय
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि विजयदशमी के दिन शुक्रवार को घोषित की गई। बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी 20 नवंबर को शाम 6:45 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूठ के पावन पर्व पर पांच नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर बंद होंगे। वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज पर छह नवंबर को दोपहर साढ़े बारह बजे बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में गंगा मां की भोग मूर्ति के दर्शन उनके मायके ग्राम मुखबा और मां यमुना के दर्शन खरशाली स्थित उनके शीतकालीन मंदिरों में होंगे।
 
तुंगनाथ के कपाट 30 अक्टूबर व मद्महेश्व के कपाट 22 नवंबर को होंगें बंद
द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए 22 नवंबर को प्रातरू साढे आठ बजे वृश्चिक लग्न में बंद हो जाएगे। जबकि डोली आगमन पर मद्महेश्वर मेला 25 नवंबर को आयोजित होगा। तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट शनिवार 30 अक्टूबर को दोपहर एक बजे शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे।

17 अक्तूबर को बंद होंगे चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट
मध्य हिमालय में चतुर्थ केदार के रूप में विख्यात भगवान रुद्रनाथ के कपाट 17 अक्तूबर को कार्तिक संक्रांति के पावन पर्व पर ब्रह्ममुहूर्त में अभिषेक पूजा के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अनसूया प्रसाद भट्ट, रुद्रनाथ के पुजारी धर्मेंद्र तिवाड़ी, गोपीनाथ-रुद्रनाथ मंदिर के प्रबंधक आशुतोष भट्ट और हक-हकूकधारी देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि उसी दिन भगवान की उत्सव डोली पनार बुग्याल और सगर गांव से होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हो जाएगी।

अब तक सवा लाख यात्रियों ने किए चारधामों के दर्शन
त्योहारी सीजन में विश्व प्रसिद्ध चारधामों के दर्शन के लिए तीर्थ यात्रियों की तादाद लगातार बढ़ रही है। अब तक सवा लाख यात्रियों ने बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के दर्शन किए हैं। बाबा केदार के दर्शन के लिए 8354 यात्री हेली सेवा से पहुंचे हैं। 

प्रदेश में अगले महीने चारधामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने से यात्रा भी स्थगित हो जाएगी। यात्रा के अंतिम दिनों में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम में दर्शनों के लिए तीर्थ यात्रियों की तादाद बढ़ रही है। उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुताबिक गुरुवार को चारधामों में 7823 यात्रियों ने दर्शन किए। अब तक चारधामों में 1,14,195 तीर्थ यात्री दर्शन कर चुके हैं। 
देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ ने बताया कि 18 सितंबर से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। अब तक चारधामों में दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या एक लाख पार हो चुकी है। ई-पास की व्यवस्था समाप्त होने से चारधाम यात्रा में आने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए बस टर्मिनल ऋषिकेश में निशुल्क कोविड जांच केंद्र स्थापित किया गया है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए चारधामों में नियमों का पालन करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सनकादिक पीठ में श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ के पाचवें दिन नंद महोत्सव मनाया

ब्रह्मपुरी राम तपस्थली सनकादिक पीठ में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान महायज्ञ के पाचवें दिन नंद महोत्सव में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक पहुंचे और कथा का लाभ उठाया। इस दौरान ऋषि कुमारों ने उनका पुष्प वर्षा और स्वस्तिवाचन से स्वागत किया।
तुलसी मानस मंदिर के अध्यक्ष रवि शास्त्री ने बताया कि मदन कौशिक के पहुंचने पर ब्रह्मपुरी राम तपस्थली के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर दयाराम दास महाराज ने उत्तरीय एवं तुलसी का पौधा भेंट किया। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष कौशिक ने सभी आए हुए महामंडलेश्वर संत महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य सतीश कौशिक महाराज को पुष्पहार पहनाकर आशीर्वाद लिया।
उन्होंने कहा कि आज पृथ्वी पर अगर धर्म बचा है तो आज उसका श्रेय घर-घर हो रही भागवत कथा, राम कथाओं को जाता है। जो इन संत महात्माओं के द्वारा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमे अपने बच्चों को संस्कार देने चाहिए, जिससे धर्म की रक्षा की सके। हम सभी धर्म अनुरागी भक्तों आज मां गंगा के तट पर संकल्प लें कि गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के साथ-साथ हम अपने क्षेत्र के आसपास पौधारोपण जरूर करेंगे। अपने घर जन्मदिन मनाए किंतु पौधा जरूर लगाएं। कौशिक ने भगवत कथा में सभी भक्तों के साथ मिलकर नंद महोत्सव भी मनाया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर दया राम दास महाराज, संदीप गुप्ता, संजय व्यास, महावीर दास, प्रमोद दास, मीना श्रीवास्तव, डॉ राहुल श्रीवास्तव, आरती श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव, निधि श्रीवास्तव, गौरव पुष्पेंद्र, राखी, मनीष, सुनील, आहूजा आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

शारदीय नवरात्रों में कब करनी है घट स्थापना, जानिए पूरी विधि

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत कल से हो रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। 7 अक्टूबर को नवरात्रि का पहला दिन है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है और अखंड ज्योत जलाई जाती है। नवरात्रि का दौरान मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और मां दुर्गा की पूजा विधि जानिए।

अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना का विशेष महत्व है। घट स्थापना के दिन चित्रा नक्षत्र जैसे शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन कन्या राशि में चर्तुग्रही योग का शुभ संयोग बन रहा है। घट स्थापना मुहूर्त 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट के बीच है। जो लोग इस शुभ योग में कलश स्थापना न कर पाएं, वे दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक लाभ का चौघड़िया में और 1 बजकर 42 मिनट से शाम 3 बजकर 9 मिनट तक अमृत के चौघड़िया में कलश-पूजन कर सकते हैं।

पूजा विधि-
इस दिन सुबह उठकर जल्गी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें।
मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।
धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।
मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।

पूजा सामग्री-
लाल चुनरी
लाल वस्त्र
मौली
श्रृंगार का सामान
दीपक
घी/ तेल
धूप
नारियल
साफ चावल
कुमकुम
फूल
देवी की प्रतिमा या फोटो
पान
सुपारी
लौंग
इलायची
बताशे या मिसरी
कपूर
फल-मिठाई
कलावा

आध्यात्म, पर्यटन और वेलनेस को लेकर सीएम की आध्यात्मिक गुरु सदगुरु से चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता दर्शन हॉल में आध्यात्मिक गुरु सदगुरु के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सदगुरु से जीवन दर्शन से जुड़े विषयों के साथ ही आध्यात्म, पर्यटन और वेलनेस आदि के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने की चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड दुनिया का खूबसूरत प्रदेश है जहां पहाड़, हिमाच्छादित चोटियां, नदियां, वन संपदा की भरमार है, हमारा प्रयास पर्यटन और आध्यात्म के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को शिखर पर ले जाने का है। उत्तराखण्ड दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी बने इसके लिये भी हम प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में हर व्यक्ति अलग-अलग ज़िम्मेदारी के साथ काम करता है और समय समय पर व्यक्ति की ज़िम्मेदारी भी बदलती हैं। हमें जो जिम्मेदारी मिली है उसे पूरे मनोयोग तथा प्राण प्रण से निभाना है। अन्त्योदय के साथ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सुविधाओं का हमें लाभ पहुंचाना है। हमारे लिये नर सेवा नारायण सेवा है। सभी जरूरतमंदों की मदद करना ही हमारे लिये आध्यात्मिकता है।
संवाद कार्यक्रम के दौरान सद्गुरु ने कहा कि उत्तराखंड तमाम प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर राज्य है। इस राज्य में एशिया का सबसे बेहतर सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन राज्य बनने की क्षमता है। एशिया का स्विट्जरलैंड भी यह बन सकता है। स्वदेशी तौर-तरीकों को विकसित कर इसे आगे बढ़ाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आने वाले हर व्यक्ति को यहाँ की प्रकृति और पहाड़ों की जीवटता को महसूस करना चाहिए। हिमालय विभिन्न संस्कृतियों का जनक रह है। सद्गुरु ने कहा कि यहां की संस्कृति अपने आप में श्रेष्ठ है इसकी तुलना देश दुनिया में किसी से नहीं की जा सकती है। उन्होंने इस अवसर पर प्रश्नोत्तर के माध्यम से आध्यात्मिक व जीवन दर्शन से सम्बन्धित अनेक प्रश्नों के भी उत्तर दिये।
सद्गुरु ने वर्तमान में विश्वव्यापी चुनौती कोविड-19 संक्रमण को लेकर भी चर्चा करते हुए कहा कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए हम सबको जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार करना होगा। अगर हम सब जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार नहीं करेंगे तो सरकार अपने स्तर पर कुछ नहीं कर पाएगी। समस्याओं के समाधान में आम जनता का भी सहयोगी बनना होगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन, शासन प्रशासन के उच्चाधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।

आगामी दिसम्बर माह तक पूरे प्रदेश में सम्पूर्ण वैक्सीनेशन-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आस्था पथ, हरिद्वार में ब्रह्मलीन वीतराग सन्त शिरोमणि स्वामी वामदेव महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया तथा सन्तों का आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि आस्था पथ स्थित यह वाटिका सन्त शिरोमणि स्वामी वामदेव के नाम से जानी जायेगी तथा इस वाटिका की देखरेख का कार्य हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्मलीन बीतराग सन्त शिरोमणि स्वामी वामदेव महाराज श्री राम मन्दिर आन्दोलन के स्तम्भ सन्त थे। वे विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने गोरक्षा तथा श्री राम मन्दिर के लिये अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उत्तराखण्ड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने के साथ ही आर्थिक रूप से भी सशक्त व मजबूत राज्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की वजह से कांवड़ यात्रा हमें प्रतीकात्मक करनी पड़ी, जिसमें सभी का सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि आगामी दिसम्बर माह तक पूरे प्रदेश में सम्पूर्ण वैक्सीनेशन किया जायेगा। बागेश्वर तथा रूद्रप्रयाग जनपद में शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन हो गया है तथा कुछ जनपदों में 95 प्रतिशत तक वैक्सीनेशन हो गया है। उन्होंने कहा कि हमें केन्द्र से पर्याप्त वैक्सीन प्राप्त हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जो भी घोषणाएं की जा रही हैं, वे सभी पूर्ण की जायेंगी। वित्त विभाग से परामर्श के बाद ही घोषणा की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस कार्य का भी हम शिलान्यास करेंगे, उसका लोकार्पण भी करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले 10 सालों में उत्तराखण्ड को अनेक क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाया जायेगा।
स्वामी अनन्त गिरि महाराज ने कहा कि स्वामी वामदेव जी ने हमेशा सनातनी परम्पराओं का पालन किया। महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महन्त रविन्द्रपुरी ने कहा कि सभी के अथक प्रयासों से आज मां गंगा के तट पर स्वामी वामदेव की प्रतिमा का अनावरण हुआ, जिसके लिये सभी बधाई के पात्र हैं।
इस अवसर पर जगत्गुरू शंकराचार्य, महामण्डलेश्वर हरिचेतनानन्द, स्वामी वासुदेवानन्द महाराज, राजेन्द्र देवाचार्य, विश्व हिन्दू परिषद के संरक्षक दिनेश चन्द्र, डॉ. सच्चिदानन्द साक्षी, महन्त ज्ञानदेव महाराज निर्मल अखाड़ा, महन्त अविचलदास महाराज, स्वामी राजेन्द्र देवाचार्य, महामण्डलेश्वर अनन्तदेव गिरि महाराज, स्वामी देवानन्द सरस्वती महाराज, आचार्य धर्मदेव, स्वामी ललितानन्द, स्वामी जितेन्द्रानन्द, नितिन गौतम, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, जिलाधिकारी विनय शंकर पाण्डेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी प्यारेलाल शाह, एचआरडीए सचिव उत्तम सिंह चौहान, एसडीएम पूरण सिंह राणा, सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार सिंह सहित पदाधिकारीगण तथा साधु-सन्त उपस्थित थे।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नेरन्द्र गिरी की मौत, पुलिस जांच में जुटी

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का सोमवार को निधन हो गया है। नरेंद्र गिरि का शव प्रयागराज के उनके बाघंबरी मठ में ही फांसी के फंदे से लटकता मिला। उस कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची तो उनका शव फंदे से लटका था। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। सूत्रों के मुताबिक इस सुसाइड नोट में शिष्य आनंद गिरि पर मानसिक तौर पर परेशान करने का आरोप लगाया गया है। जिसके बाद हरिद्वार पुलिस ने आनंद गिरि को हिरासत में ले लिया है।
जानकारी के मुताबिक, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि बाघंबरी मठ में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए। पुलिस के मुताबिक अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ में फांसी के फंदे से लटकता मिला। पुलिस के मुताबिक बाघंबरी मठ में जहां महंत नरेंद्र गिरि का शव फंदे से लटकता मिला, वहां चारो तरफ से गेट बंद मिला। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर इसे आत्महत्या बताया है।
गौरतलब है कि आचार्य नरेंद्र गिरि का पिछले दिनों अपने ही शिष्य आनंद गिरि के साथ विवाद हो गया था। हाल ही में इस विवाद का पटाक्षेप हुआ था। महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्वामी सव्विदानंद सरस्वती ने इसे साजिश करार दिया। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है, नहीं मान सकती। उन्होंने इसे लेकर और कुछ कहने से इनकार करते हुए कहा कि ये जांच का विषय है।
प्रयागराज के आईजी केपी सिंह ने बताया कि सात पन्नों का सुसाइड नोट मिला है जिसे वसीयत की तरह लिखा गया है। इस सुसाइड नोट में आनंद गिरि का भी नाम है। उन्होंने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि को जानने वाले लोग ये बता रहे हैं कि हैंड राइटिंग उन्हीं की है। हम फॉरेंसिक जांच के बाद लेटर जारी करेंगे। आनंद गिरि ने आईजी की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए कहा कि ये बड़ी साजिश है. उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की सरकार से निवेदन करता हूं कि निष्पक्ष जांच हो। इसमें बड़े लोग शामिल हैं। दोषी हूं तो सजा पाने को तैयार हूं।
यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा है कि आनंद गिरि को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने बताया कि आनंद गिरि को हरिद्वार से हिरासत में लिया गया। इस संबंध में उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि यूपी पुलिस की ओर से फोन कॉल आने के बाद आनंद गिरि को हरिद्वार आश्रम में ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। यूपी पुलिस के करीब 10 पुलिसकर्मी हरिद्वार पहुंच गए हैं। वहीं, प्रयागराज में लेटे हनुमानजी के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी यूपी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सुसाइड नोट में इनके भी नाम थे।