सीएम धामी ने पैरालंपिक में कांस्य जीतने वाले मनोज सरकार को दी फोन पर बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद उधमसिंह नगर निवासी मनोज सरकार द्वारा टोक्यो पैरालंपिक में बैडमिंटन के पुरुष सिंगल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने पर उन्हें बधाई दी है।
मुख्यमंत्री ने मनोज सरकार को फोन पर बधाई देते हुए उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर आमंत्रित किया है। कहा कि आपने अपनी खेल प्रतिभा से प्रदेश का ही नहीं बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने भी मनोज सरकार को कांस्य पदक जीतने पर उन्हें बधाई दी है।

राज्य सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने वाली नई खेल नीति लाएगी-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी पार्क से ’नीरज चोपड़ा ग्लोरी क्रॉस कंट्री रन’ को फ्लैग ऑफ किया। मुख्यमंत्री ने भी इसमें जॉगिंग करते हुए प्रतिभाग किया। इसका आयोजन राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर खेल विभाग उत्तराखण्ड और उत्तराखण्ड एथलेटिक्स संघ द्वारा किया गया।
मुख्यमंत्री ने हॉकी खिलाङी मेजर ध्यानचंद का स्मरण करते हुए खेल दिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रकार की नई खेल नीति लाएगी जिसमेँ खिलाड़ियों को तैयारी के लिए संसाधनों की कमी न रहे। राज्य सरकार की कोशिश है कि खिलाड़ियों को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जाए। अभावों के कारण खेल प्रतिभा दबी न रहे। आगे बढने के पूरे अवसर मिलें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों ओलम्पिक में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन हम सभी को गौरवान्वित करने वाला रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल भावना सर्वाेपरि है। जीवन के हर क्षेत्र में स्पोर्ट्समैन शिप होनी चाहिये। जीवन में भी खेल की तरह कभी आगे बढते हैं कभी पीछे हटते हैं। जीवन में बहुत से अभावों का सामना करना पड़ता है। परन्तु अगर हम ठान लें और संकल्प लेकर प्रयास करें तो सफलता जरूर मिलती है। मेहनत करने से मंजिल मिलती है। अगर संकल्प लिया है तो दूसरे विकल्प के बारे में नहीं सोचना चाहिए। मन में उत्साह होना चाहिए। उत्साह है तो ऊर्जा है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजानदास, मेयर सुनील उनियाल गामा, खेल विभाग के अधिकारी, खिलाङी और खेल प्रेमी मौजूद थे।

अब खिलाड़ियों को भी परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर परेड ग्राउण्ड स्थित बहुउद्देशीय क्रीडा हॉल में महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज देहरादुन के उदीयमान खिलाड़ियों, टेबल टेनिस एवं बेडमिंटन प्रतियोगिता के विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य में खेलों के प्रति अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये अनेक घोषणायें भी की। मुख्यमंत्री ने स्वयं भी बेटमिंटन खेल कर प्रतियोगिता की शुरूआत की।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 8 वर्ष से 14 वर्ष तक की आयु के 50-50 बालक बालिकाओं को उनकी खेल प्रतिभा के अनुसार चिन्हित कर उन्हें प्रति वर्ष मुख्यमंत्री खिलाड़ी उन्नयन छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। खिलाड़ियों का दैनिक भत्ता बढ़ाकर रू0 225/- किया जायेगा। महिला खिलाड़ियों के खेल कौशल विकास हेतु जनपद उधमसिंह नगर में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जाएगा। नेशनल गेम्स में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को उत्तराखंड राज्य परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाएगी। महाविद्यालयों, व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु 5 प्रतिशत का उत्कृष्ट खिलाड़ी खेल कोटा प्रदान किया जाएगा। नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को भी एशियन/कामनवेल्थ/वर्ल्ड/ओलंपिक पदक विजेताओं की भाँति सरकारी सेवा प्रदान की जाएगी। खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उत्कृष्टता लाने हेतु, वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक तकनीक को सुनिश्चित करने हेतु ’खेल विज्ञान केंद्र’ की स्थापना राज्य खेल विकास संस्थान में की जायेगी। ओलंपिक खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों की प्रतिभागिता सुनिश्चित करने हेतु कोच की व्यवस्था की जाएगी। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून में ’स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी’ बनाए जाने का प्रयास किया जाएगा। नेशनल गेम्स/एशियन/कॉमनवेल्थ/वर्ल्ड/ओलम्पिक में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को खेल दुर्घटनाओं/खेल इंजरी एवं अन्य खेल आकस्मिकताओं के दृष्टिगत बीमा/आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य में खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने हेतु निजी क्षेत्र द्वारा स्पोर्ट्स कांपलेक्स, खेल अकादमी, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने हेतु ’मेजर ध्यानचंद निजी क्षेत्र खेल प्रतिभागिता प्रोत्साहन कोष की स्थापना की जाएगी। राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने हेतु खिलाड़ियों को यात्रा मार्ग व्यय, स्पोर्टस किट्स इत्यादि की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। टेबल टेनिस के खिलाड़ियों के लिये अलग से हॉल की व्यवस्था की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खिलाड़ियों के व्यापक हित में बेहतर खेलनीति बनायी जायेगी ताकि हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा देश के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का सराहनीय कार्य किया गया है। उनके पदचिन्हों पर चल कर हम भी अपने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया को 25 लाख की धनराशि प्रदान करने के साथ ही उन्हें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मिशन को सफल बनाने के लिये ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने उन्होंने खिलाड़ियों का आहवान किया कि उन्हें अपनी मेहनत, मनोयोग एवं संकल्प के साथ मैदान में जीतकर आसमान छूने के लिये प्रयत्नशील बनना होगा। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी नीरज चोपड़ा से बात कर उन्हें बधाई दी तथा उत्तराखण्ड आने के लिये आमंत्रित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में साधारण परिवेश से निकले महापुरूषों ने साधारण से असाधारण कार्य कर इतिहास बनाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की महानता का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे खेल के प्रति प्रतिबद्ध तो थे ही राष्ट्र के प्रति भी उनका श्रेष्ठ आदर भाव रहा। जब हिटलर ने उनसे जर्मनी की नागरिकता ग्रहण करने की बात की तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया।
इस अवसर पर विधायक खजान दास ने खेल दिवस पर खिलाड़ियों को बधाई दी। इस अवसर पर उत्तराखण्ड टेबल टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष चेतन गुरंग, संयुक्त निदेशक खेल डॉ. धर्मेन्द्र भट्ट, उप क्रीडाधिकारी सेफाली गुरंग, प्रिंस विपिन, डीएम लखेड़ा, नवनीत सेठी, देवेन्द्र बिष्ट, राकेश डोभाल एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी एवं उनके अभिभावक भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने वंदना को 25 लाख रूपये का चेक और तीलू रौतेली पुरस्कार से किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वन्दना कटारिया के रोशनाबाद, हरिद्वार स्थित आवास पर जाकर टोक्यो ओलंपिक में वंदना के शानदार प्रदर्शन पर उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन्दना कटारिया को 25 लाख रूपये का चेक प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन्दना कटारिया को तीलू रौतेली पुरस्कार से भी सम्मानित किया। इसके तहत उन्हें 31 हजार रूपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। वंदना कटारिया को महिला सशक्तीकरण के तहत ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान’’ का ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन्दना कटारिया ने टोक्यो ओलंपिक में अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाया है। उत्तराखण्ड की बेटी ने एक मैच में हैट्रिक बनाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने वन्दना को आगे भी इसी मनोबल से खेलने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सके, इसके लिए राज्य में नई खेल नीति बनाई जा रही है। उन्होंने वंदना कटारिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, यतीश्वरानन्द, विधायक आदेश चौहान, देशराज कर्णवाल, सचिव हरि चन्द्र सेमवाल एवं वंदना कटारिया के परिवारजन मौजूद थे।

वंदना के परिजनों का खेल मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने किया सम्मान

विद्यालयी शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, खेल, युवा कल्याण एवं पंचायती राज मंत्री, उत्तराखंड सरकार अरविन्द पाण्डेय ने हरिद्वार ग्राम रोशनाबाद में देश की अंतर्राष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया के निवास स्थान पर पहुंचकर उनकी माता एवं परिवारजनों से मुलाकात कर उन्हें शॉल ओढ़ाकर व फूल गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया तथा बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।

इसी क्रम में माननीय खेल मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने वंदना कटारिया को खेल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के फल स्वरुप बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के अंतर्गत 2020-21 के लिए हरिद्वार जनपद का ब्रांड एंबेसडर घोषित किया।

साथ ही खेल मंत्री ने ग्राम रोशनाबाद में मार्ग की स्थिति का संज्ञान लेते हुए मार्ग को शीघ्र ठीक करवाने हेतु सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। साथ ही कहा कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात उक्त मार्ग का नाम वंदना कटारिया किया जाएगा।

खेल मंत्री ने हर्ष सहित वंदना कटारिया के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है की टोक्यो ओलंपिक्स में वंदना कटारिया ने तीन गोल करके ओलंपिक्स इतिहास में हैट्रिक लगाने वाली भारत की प्रथम महिला हॉकी खिलाड़ी होने का खिताब हासिल किया।

वंदना ने अपनी क्षमता और सामर्थ्य से जो मील का पत्थर स्थापित किया है और युवाओं के लिए सशक्त पदचिन्ह बनाए हैं वह निश्चित ही प्रदेश में युवा खिलाड़ियों को नया दृष्टिकोण और नया आयाम प्रदान करेंगे। सभी युवाओं को कड़ी मेहनत और सतत प्रयास के लिए प्रेरित करते हैं। इस दौरान विधायक रानीपुर आदेश चौहान भी उपस्थित रहे।

ओलंपिक में 13 साल बाद भारत को मिला गोल्ड

भारतीय जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक के जैवलिन थ्रो फाइनल में इतिहास रच दिया है। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल हासिल किया है। नीरज ने 87.58 की सर्वश्रेष्ठ दूरी तय करते हुए गोल्ड पर कब्जा किया। क्वालिफिकेशन राउंड में भी नीरज अपने ग्रुप में टॉप पर रहे थे। बता दें कि 2008 बीजिंग ओलंपिक के बाद ये भारत का पहला गोल्ड मेडल है।

नीरज ने रचा इतिहास
जैवलिन थ्रो के फाइनल में नीरज चोपड़ा शुरुआत से ही सबसे आगे रहे। उन्होंने अपनी पहली ही कोशिश में 87.03 मीटर की दूरी तय की है। वहीं दूसरी बार में उन्होंने 87.58 की दूरी तय करी। इसी के साथ उन्होंने अपने क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड से भी ज्यादा दूर भाला फेंका है। जैवलिन थ्रो में ये भारत का अब तक का सबसे पहला मेडल है। इतना ही नहीं एथलेटिक्स में भी ये भारत का पहला ही मेडल है।

13 साल बाद मिला गोल्ड
ओलंपिक खेलों में ये भारत का 13 साल बाद पहला गोल्ड मेडल है। नीरज चोपड़ा से पहले बीजिंग ओलंपिक में शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड मेडल जीता था। ये ओलंपिक में भारत का कुल दूसरा व्यक्तिगत गोल्ड है। इससे पहले भारत ने हॉकी में 8 गोल्ड मेडल जीते हैं।

पूरे देश को थी गोल्ड की उम्मीद
नीरज चोपड़ा से पूरे देश को आज गोल्ड मेडल की उम्मीद थी और वो सबकी उम्मीदों पर खरे उतरे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 86.65 की दूरी तय करते हुए पहला नंबर हासिल किया था। नीरज भारत को टोक्यो में पहला गोल्ड मेडल जितवाने के सबसे बड़े दावेदार थे।

अब तक भारत के 7 मेडल
टोक्यो ओलंपिक में भारत अब 1 गोल्ड 2 सिल्वर और 4 कांस्य सहित कुल 6 मेडल जीत चुका है। नीरज चोपड़ा के अलावा भारत की ओर से मीराबाई चानू (वेट लिफ्टिंग) और रवि दहिया (कुश्ती) ने सिल्वर मेडल जीता है। वहीं पीवी सिंधु, बजरंग पूनिया, लवलीना और भारतीय हॉकी टीम ने भारत के लिए ब्रॉन्ज जीता।

वंदना को राज्य सरकार देगी 25 लाख और तीलू रौतेली पुरस्कार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग करने वाली भारतीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया से बात कर शानदार प्रदर्शन के लिए वंदना एवं महिला हॉकी टीम में प्रतिभाग करने वाली सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को मनोबल बनाए रखने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदना कटारिया के शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का मान सम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने वंदना को टोक्यो से वापस आते ही मुख्यमंत्री आवास में मिलने हेतु आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में नई खेल नीति बनाई जा रही है। जिसमें विभिन्न खेलों में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को हर संभव सुविधा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाङी वंदना कटारिया को 25 लाख रुपए दिये जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वंदना कटारिया को तीलू रोतेली पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने वंदना कटारिया के भाई सौरभ कटारिया से भी फोन से वार्ता कर वंदना के शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी।
भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया ने उनके उत्साह वर्धन पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सचिव हरि चंद्र सेमवाल भी उपस्थित थे।

अब मेजर ध्यानचंद के नाम से जाना जायेगा खेल का सबसे बड़ा सम्मान, पीएम ने की घोषणा

भारत में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे बड़े सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया गया है। इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके दी है। पीएम मोदी ने कहा कि लोगों की भावनाओं को देखते हुए इस अवार्ड का नाम अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने क्या ट्वीट किया?

पीएम मोदी ने कहा है, देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। जय हिंद

ओलंपिक्स में हॉकी खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा- मोदी

एक अन्य ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा, ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है। जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

खेल रत्न का इतिहास

इस अवार्ड को 1991-92 में शुरू किया गया था। तब इसका नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था। इस अवार्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता फैलाना है साथ ही खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाना है, ताकि वह समाज में और ज्यादा सम्मान प्राप्त कर सकें।

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न की जगह मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले का खेल जगत ने स्वागत किया है। ध्यानचंद को महानतम हॉकी खिलाड़ी माना जाता है। हॉकी के इस जादूगर ने अपने 1926 से 1949 तक के करियर के दौरान 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक का शीर्ष खिताब हासिल किया था। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में 29 अगस्त को देश का राष्ट्रीय खेल दिवस भी मनाया जाता है।

विश्व चैंपियनशिप में भारत की एकमात्र एथलेटिक्स पदक विजेता और यह पुरस्कार 2003 में हासिल करने वाली अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा कि खेल पुरस्कारों के नाम खिलाड़ियों के नाम पर रखे जाने चाहिए। उन्होंने कहा, यह सही समय है जब हम अपने खेल पुरस्कारों का नाम अपने खेल के दिग्गजों के नाम पर रखें। यह सही कदम है. ध्यानचंद हमारे खेल नायक और हॉकी के दिग्गज हैं और हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है. यह उचित ही है कि देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार का नाम ध्यानचंद के नाम पर ऐसे समय रखा गया है जब भारत ने 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीता है।

इस फैसले की सराहना करते हुए पूर्व हॉकी कप्तान अजीतपाल सिंह ने कहा कि पहचान देर से मिली लेकिन देर आये दुरुस्त आये। उन्होंने कहा, यह एक स्वागत योग्य कदम है। यह एक अच्छा फैसला है जो प्रधानमंत्री ने लिया है। खेल पुरस्कार हमेशा खिलाड़ियों के नाम पर होने चाहिए और ध्यानचंद जी से बड़ा देश में कोई खिलाड़ी नहीं है। यह मान्यता देर से मिली, लेकिन कभी नहीं से बेहतर है कि देर से मिली।

ओलंपिक कांस्य पदक मुक्केबाज विजेन्दर सिंह ने कहा कि ध्यानचंद जी को सम्मान देना अच्छी बात है लेकिन यह देश में खेलों के स्तर को उठाने के लिए काफी नहीं है। उन्होंने कहा, इस कदम के खिलाफ कुछ भी नहीं है, क्योंकि हम सभी ध्यानचंद जी के अपार योगदान का सम्मान करते हैं । लेकिन सरकार को खिलाड़ियों का समर्थन करने के लिए इससे कुछ ज्यादा करना चाहिए। उन्हें बुनियादी स्तर पर सुविधाओं की जरूरत है, जब तक हम ऐसा नहीं कर सकते, केवल पुरस्कारों का नाम बदलने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेल रत्न पुरस्कार को अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीमों के शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया।

केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ध्यानचंद खेलों में भारत के सबसे बड़े नायक रहे हैं। उन्होंने कहा, मेजर ध्यानचंद जी ने अपने असाधारण खेल से विश्व पटल पर भारत को एक नई पहचान दी और अनगिनत खिलाड़ियों के प्रेरणास्रोत बने। जनभावना को देखते हुए खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार करने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक धन्यवाद।

भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी से सांसद बने गौतम गंभीर कहा, किसी (खेल) नायक का नाम पुरस्कार को और प्रतिष्ठित बनाता है। वहीं ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने भी इस कदम के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया करते हुए कहा, खेल के सबसे बड़े पुरस्कार खेल रत्न को देश के श्रेष्ठ खिलाड़ी और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले के लिए मैं भारत सरकार और आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक धन्यवाद करता हूं।

सीएम की घोषणा, वंदना को 25 लाख रुपये देंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हाॅकी टीम की खिलाङी वंदना कटारिया को 25 लाख रुपये दिये जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा हमें गर्व है कि टोक्यो ओलिंपिक खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम के शानदार प्रदर्शन में उत्तराखंड की बेटी वंदना कटारिया का शानदार योगदान रहा है।
शीघ्र ही हमारे राज्य में एक नई एवं आकर्षक खेल नीति लागू की जाएगी। इस नीति में विशेष रूप से हमारे युवाओं में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा का विकास करने हेतु उचित आर्थिक प्रोत्साहन का प्रावधान होगा। हमारा प्रयास होगा कि प्रदेश के कोने कोने में वंदना जैसी प्रतिभा के द्वीप प्रज्ज्वलित हों!

उत्तराखंड की बेटी ने हॉकी में हैट्रिक लगाकर टीम इंडिया को दिलाई जीत

हरिद्वार के छोटे से गांव की वंदना कटारिया ने ओलंपिक में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी वंदना कटारिया ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में वंदना ने तीन गोल दागे और टीम को जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।

वंदना ने ओलंपिक में हैट्रिक लगाकर पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी का यह खिताब भी अपने नाम कर लिया है। बता दें कि 1984 के बाद किसी भारतीय ने ओलंपिक में हैट्रिक नहीं लगाई थी।

वंदना ने ऐतिहासिक उपलब्धि से दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि दी है। अपनी तैयारी के चलते वह पिता के निधन पर भी गांव नहीं आ सकी थीं। वंदना की इस उपलब्धि पर परिजनों, ग्रामीणों और जिले के खेल अधिकारियों में जश्न का माहौल है। बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के गांव रोशनाबाद निवासी वंदना कटारिया ने पढ़ाई के साथ हॉकी को अपना कॅरियर बनाने के लिए जी जान से मेहनत की है।

वंदना कटारिया का जन्म 15 अप्रैल 1992 में रोशनाबाद में ही हुआ है। वंदना कटारिया ने पहली बार जूनियर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में 2006 में प्रतिभाग किया। वर्ष 2013 में देश में सबसे अधिक गोल करने में सफल रहीं।

जर्मनी में हुए जूनियर महिला विश्वकप में वंदना कटारिया कांस्य पदक विजेता बनीं। वंदना ने हॉकी में फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं।

2021 मई में पिता नाहर सिंह का आकस्मिक निधन हो गया। तब गांव नहीं आ पाई थीं। तब ओलंपिक के लिए बेंगलुरु में चल रहे कैंप में तैयारी कर रही थीं। उसकी हैट्रिक लगाने से गांव में जश्न है।

ग्रामीण परिवार के लोगों को शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। उप जिला खेल अधिकारी वरुण बेलवाल ने वंदना कटारिया को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि करोड़ों भारतीय की दुआओं से महिला हॉकी टीम जरूर ओलंपिक से मेडल लेकर आएगी।