यूपी-उत्तराखंड के नारसन बॉर्डर पर बिना पास के एंट्री कराने पर शिक्षक गिरफ्तार

(एनएन सर्विस)
यूपी-उत्तराखंड के नारसन बॉर्डर पर तैनात एक शिक्षक ने बिना पास के प्रदेश में एंट्री करवाने के लिए पैसे मांगे तो लोगों ने मौके पर हंगामा कर दिया। विवाद बढ़ा तो मौके पर मौजूद पुलिस ने शिक्षक को हिरासत में लिया। साथ ही मामले की शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कर दी। बताया जा रहा कि शिक्षक के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की सिफारिश भी की है।
कोरोना संक्रमण के चलते अन्य प्रदेशों से आने वाले वाहनों के लिए पास अनिवार्य किया गया है। इसके लिए नारसन बॉर्डर पर पुलिस के साथ-साथ शिक्षकों की भी ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बृहस्पतिवार रात अन्य प्रदेश से कुछ लोग यूपी-उत्तराखंड के नारसन बॉर्डर पर पहुंचे थे। शिक्षक को इन लोगों ने पास नहीं होने की जानकारी दी। आरोप है कि इस पर शिक्षक ने प्रति व्यक्ति के हिसाब से पर्ची बनवाने के लिए 300 रुपये लिए। जब यह लोग वहां से निकासी द्वार पर पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने रोककर पास मांगा। इस पर उन लोगों ने बताया कि पास नहीं होने पर ड्यूटी में तैनात एक कर्मचारी ने उनसे 300 रुपये लेकर पर्ची बनाई है, लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने नहीं दिया। जिस पर लोगों ने अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए मौके पर हंगामा कर दिया। विवाद बढ़ता देख पुलिस ने संबंधित शिक्षक को हिरासत में ले लिया और उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी शिकायत की गई। चैकी प्रभारी लक्ष्मण सिंह कुंवर ने बताया कि एक शिक्षक मौके पर अवैध तरीके से 300 रुपये में पर्ची बना रहा था। हंगामा कर रहे लोगों के पहचान करने पर शिक्षक को हिरासत में ले लिया गया है। चेक पोस्ट प्रभारी जय सिंह ने बताया कि शिकायत से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामि बंसल ने बताया कि शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। वहीं, कुछ दिन पहले नारसन बॉर्डर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर वसूली करते एक व्यक्ति को पकड़ा गया था। मामले में पुलिस की रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम से कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने स्वरोजगार के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पर्यटन विभाग स्वरोजगार योजनाओं का लाभ देने के लिए कोई कमसर नही छोड़ना चाहता है। इसके लिए विभाग ने ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। ऑनलाइन सिस्टम से घर बैठे ही आवेदन किया जा सकता है। इससे आवेदकों को बड़ा फायदा होगा। अब उन्हें कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वहीं, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 प्रतिशत या 15 लाख तक सब्सिडी मिलेगी।
कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। स्वरोजगार की योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में तहत अब बेरोजगार युवा प्रदेश के अंदर विभिन्न मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें खरीद कर रोजगार शुरू कर सकते हैं। बसों का संचालन परिवहन निगम के निर्धारित रूटों के साथ ही अंतर नगरीय क्षेत्रों में किया जाएगा। 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में इलेक्ट्रिक बसों के अलावा अन्य वाहनों की खरीद पर पूर्व की भांति 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। वहीं, गैर वाहन मद में आवेदकों को पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत या 15 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या 10 लाख तक सब्सिडी दी जा रही है। होम स्टे के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत  या 10 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या अधिकतम सात लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
पर्यटन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था लागू होने से योजना में पारदर्शिता आएगी और घर बैठे लोग आवेदन कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और योजना की रियल टाइम में मानीटरिंग हो सकेगी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और होम स्टे योजना के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। 

यहां करें आवेदन 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर्यटन विभाग की वेबसाइट http://vcsgscheme-uk-gov-in पर किया जाएगा। स्वरोजगार शुरू करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति घर बैठे आवेदन कर सकता है।

डेंगू से बचाव कार्यो की तैयारी में जुटा स्वास्थ्य विभाग, दिए जिलाधिकारियों को निर्देश

(एनएन सर्विस)
कोविड-19 के साथ ही डेंगू की रोकथाम के लिए भी प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। सचिव अमित सिंह नेगी ने सभी जिलाधिकारियों को डेंगू निरोधात्मक गतिविधियों का संचालन करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारियों को जारी निर्देशो में यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोविड-19 के नियंत्रण के लिए बनाए गए क्वारेंटाईन फैसिलिटी और कोविड केयर सेंटरों में जलभराव की समस्या न हो। इसी प्रकार जिला चिकित्सालयों और अन्य चिकित्सा इकाईयों में भी पानी इकट्ठा न होने पाए। यहां जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पीआरडी के कार्मिकोंध्स्वयंसेवकों को तैनात किया जा सकता है। जिन स्थानों पर भी पानी की निकासी अवरुद्ध रहती है, वहां समस्या का निराकरण समय से कर लिया जाए। जन जागरूकता व जनसहभागिता के लिए आई०ई०सी० संसाधनों का समुचित व समयान्तर्गत उपयोग हो। स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य विभागों जैसे नगर निगम, शिक्षा विभाग, ग्राम्य एवं शहरी विकास, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, लोक निर्माण, जल संस्थान, जल निगम आदि में अंतर्विभागीय समन्वय किया जाए। सभी जिलाधिकारी, डेंगू की रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की नियमित रूप से समीक्षा भी करें।

डेंगू की रोकथाम के लिए ब्लॉकवार माइक्रो प्लान
डेंगू रोग पर रोकथाम और नियंत्रण के लिए ब्लाक वार, माइका्रे प्लान बनाकर कार्यवाही की जाए। जनपदों के चिकित्सालयों (जिला/बेस व मेडिकल कालेज) में भारत सरकार की गाईडलाइन के अनुसार आवश्यक कार्यवाही जैसे पृथक डेंगू आईसोलेशन वार्ड तैयार कर मच्छरदानी युक्त पर्याप्त बेड की उपलब्धता, स्टेंडर्ड केस मैनेजमेंट आदि सुनिश्चित किया जाए और डेंगू आइसोलेशन वार्ड के लिए नोडल अधिकारी नामित किया जाए।

प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित हो
डेंगू पीड़ित गंभीर रोगियों के लिए प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। डेंगू जांच केन्द्रों में समय से आवश्यक सामग्री जैसे एलिसा जांच किट व अन्य जांच सामग्री की उपलब्धता अवश्य हो। डेंगू रोगियों की शुरूआती चरण में पहचान के लिए फीवर सर्वे किये जाए, लक्षणों के आधार पर डेंगू रोग की संदिग्धता होने पर जांच की जाये। डेंगू रोगी पाये जाने की स्थिति में रोगी के घर के आस-पास लगभग 50 घरों की परिधि में आवश्यक रूप से स्पेस/फोकल स्प्रे कराने के साथ-साथ जनपदीय आर0आर0टी0 द्वारा क्षेत्र में सघन फीवर सर्विलेन्स एवं लार्वा निरोधात्मक कार्यवाहियां (सोर्स रिडक्शन) कराई जाएं। स्वास्थ्य विभाग व आई0एम0ए0 प्रतिनिधियों/निजी चिकित्सालयों/पैथोलॉजी लैबों के मध्य समन्वय बैठक की जाये ताकि आमजन में डेंगू रोग के प्रति व्याप्त भ्रान्ति/भय को दूर किया जा सके। किसी भी प्रकार की आकस्मिक/आपातकालीन आवश्यकता के दृष्टिगत जनपद स्तर पर जिला कार्ययोजना में भी डेंगू के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया जाये।

डेंगू के लिए हेल्पलाईन 104
आमजन को डेंगू सम्बन्धी जागरूकता और समुचित जानकारी प्रदान करने के लिये राज्य मुख्यालय पर इंटीग्रेटेड हेल्पलाईन क्रियाशील है जिसका टोल फ्री नं 104 है। इसी प्रकार जनपद स्तर पर डेंगू के संक्रमण काल (माह जून से नवम्बर तक) के दौरान कन्ट्रोल रूम स्थापित कर उक्त दूरभाष न० से राज्य एन०वी०बी०डी०सी०पी0 यूनिट को अवगत कराया जाए।

नगर क्षेत्रों में पार्षदों के सहयोग से हो साफ-सफाई
सचिव अमित सिंह नेगी ने सभी नगर निगमों के नगर आयुक्तों और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को नगर क्षेत्रों में जन सहयोग से डेंगू की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगमों द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया जाये ताकि डेंगू रोग के मच्छरों को पनपने से रोका जा सके। समस्त पार्षदों के सहयोग से लोगों को जागरूक किया जाए और साफ-सफाई की मॉनिटरिंग की जाए। निगम और नगर पंचायतों में ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए जहां मच्छर पनपने का खतरा बना रहता है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ परिसीमांत उप नगरीय क्षेत्रों में डेंगू निरोधात्मक गतिविधियों जैसे सोर्स रिडक्शन (डेंगू मच्छर के पैदा होने के स्थान को नष्ट करना), फागिंग आदि कार्य सुनिश्चित किए जाएं।

ऑनलाइन कक्षाओं में डेंगू से बचाव की जानकारी दी जाए
सचिव नेगी ने शिक्षा विभाग से भी अपेक्षा की है कि विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से डेंगू रोग से बचाव के लिए जागरूक किया जाए। अभिभावकों को भी जागरूक किया जाए। सभी विभागाध्यक्षों को भी निर्देशित किया गया है कि राजकीय कार्यालयों में नियमित रूप से परिसर में साफ सफाई की जाए। पानी की टंकियों को ढक कर रखा जाए। परिसर में कहीं भी जलभराव की समस्या न हो।

स्टाॅक में लाखों रुपये की हेराफेरी, एक्सपायरी माल देख भड़की मंत्री

(एनएन सर्विस)
टिहरी जिले में स्थित मुनिकीरेती स्थित पशुपालन विभाग के केंद्रीय औषधि भंडारण गृह में उस समय हड़कंप मच गया, जब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने औचक निरीक्षण कर छापेमारी की। छापेमारी के बाद रेखा आर्य ने बताया कि गोदाम में लाखों रुपए की ऐसी दवाइयां रखी गई है जो कि एक्सपायर हो चुकी है। वहीं, कुछ लाखों रुपए के बिल ऐसे भी पाए गए हैं, जो कि आर्डर के बाद दवाइयां आई ही नहीं। जबकि इनका भुगतान फर्म को कर दिया गया है।
राज्यमंत्री ने बताया कि स्टॉक रजिस्टर में 2019 के दौरान दिए गए, आर्डर को 2020 में दर्ज किया गया है। और 2020 के आर्डर 2019 में दर्ज किया गया है। जिसे देखने से पता चला कि इस मामले में भी बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है। यह घोटाला विभागीय उच्च अधिकारियों के इशारे पर किया जाना बताया गया है। जिसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद घोटाले में संलिप्त सभी बड़े से बड़े अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
राज्य मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि यह बड़े स्तर पर की गई वित्तीय अनियमितता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि दवाई खरीदने मे अधिकारियों ने अपनी कमाई ही देखी है। सरकार का फायदा नहीं देखा है। उनका कहना था की यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण लापरवाही है जिसकी गंभीरतापूर्वक जांच की जाएगी। उनका कहना था कि छापेमारी पशुपालकों की शिकायत पर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी पशुपालक का दवाई खरीदने मे उत्पीड़न नहीं होने देगी। जिसे उनके विभाग द्वारा गंभीरता पूर्वक लिया गया है। छापेमारी के दौरान निजी सचिव लाल सिंह नागरकोटी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे ।

मंत्री ने दिए एफआइआर के आदेश दिए
राज्य मंत्री रेखा आर्य ने भ्रष्टाचार में लिप्त सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम को एफआइआर के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि दवा भंडारगृह में निरीक्षण करने के दौरान कई तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं। साफ पता लगता है कि दवाओं को लेकर बड़ा घोटाला हुआ है। मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। फिलहाल रजिस्टर और भंडारगृह को सील किया गया है।

कोविड केयर सेंटर में मेडिकल सुविधाओं के साथ ही योगा एवं मेडिटेशन की व्यवस्था होगीः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम रायपुर, देहरादून में बनाये गये कोविड केयर सेंटर का निरीक्षण किया। इस कोविड सेंटर में कोविड-19 के मानकों के अनुसार सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करायी गई हैं। अभी इस सेंटर में 750 बैड की व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इस सेंटर की क्षमता को बढ़ाकर चार हजार बैड तक की जा सकती है। कोविड केयर सेंटर में ठहरने वाले लोगों के लिए सुरक्षात्मक दृष्टि से फ्री में आवश्यक सामग्री की किट दी जायेगी। दिन में तीन टाइम के भोजन की व्यवस्था की गई है, जिसमें स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दी गई है। आयुष विभाग द्वारा इम्युनिटी बढ़ाने के लिए काढ़ा भी उपलब्ध कराया गया है।
अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में बनाये गये इस सेंटर में लोगों को ठहरने के लिए चार फ्लोर में व्यवस्था की गई है। इसमें 38 वार्ड एवं 750 बैड की व्यवस्था की गई है। कोविड केयर सेंटर में मेडिकल सुविधाओं के साथ ही योगा एवं मेडिटेशन की व्यवस्था की गई है। सुबह के समय एक्सपर्ट द्वारा आनलाईन योगा एवं मेडिटेशन की क्लास दी जायेगी। इसके लिए एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था की गई है। कोविड केयर सेंटर में सैनेटाइज, थर्मल स्क्रीनिंग, सीसीटीवी कैमरे एवं कोविड के मानकों के हिसाब से अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। फैमली वार्ड अलग से बनाये गये हैं। सेंटर में मनोरंजन की अनेक सामग्रियां उपलब्ध कराई गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के दृष्टिगत राज्य सरकार ने सुरक्षात्मक दृष्टि से हर सम्भव प्रयास किये हैं। अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम रायपुर में कोविड के दृष्टिगत हाईटैक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किये गये हैं। शासन, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ ही स्वयं सेवी संस्थाओं ने भी इसके लिए सहयोग किया है। कोविड-19 पर नियंत्रण एवं लोगों को रोजगार के अवसर उपलबध कराना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां पर चार हजार लोगों की ठहरने की व्यवस्था हो सकती है। कोविड पर नियंत्रण के लिए जिस तरह से प्रदेश में सतर्कता बरती जा रही, उम्मीद है कि हम जल्द ही नियंत्रण की स्थिति में होंगे। प्रदेश में कोरोना पाॅजिटव के रिकवरी रेट में वृद्धि हुई है, डबलिंग रेट में भी सुधार आया है। अभी हमारा रिकवरी रेट 65 प्रतिशत एवं डबलिंग रेट 25 दिन है।
इस अवसर पर पर्यावरणविद् डाॅ.अनिल प्रकाश जोशी, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, डीजीपी लाॅ एण्ड आॅर्डर अशोक कुमार, आईजी मेला संजय गुंज्याल, कमांडेंट एसडीआरएफ तृप्ति भट्ट, सीएमओ देहरादून डाॅ. वी.सी. रमोला, अपर जिलाधिकारी बीर सिंह बुदियाल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने विशेष सैक्टर चिन्हित करके रोजगार उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

(एनएन सर्विस)
कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेशवासियों को रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विशेष सैक्टर चिन्हित किये जाएं, जिसमें लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार विभिन्न क्षेत्रों में उपनल के माध्यम से भर्ती की जा सकती है। स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं तकनीक के क्षेत्र में कार्मिकों की और तैनाती की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपनल के माध्यम से जो भी भर्ती की जायेगी, उसमें पूर्व सैनिकों एवं सैनिक आश्रितों को सबसे पहले प्राथमिकता दी जायेगी। यदि किसी क्षेत्र में पूर्व सैनिकों एवं सैनिक आश्रित की उपलब्धता नहीं हो पाती है, तब ही अन्य लोगों को उपनल के माध्यम से भर्ती की जायेगी। नौकरी के लिए विभिन्न क्षेत्र चिन्हित होने के बाद उपनल द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। इसके लिए इस वित्तीय वर्ष के अन्त तक अर्थात् 31 मार्च 2021 तक आवेदन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय जिसमें समय की मांग एवं परिस्थितियों के अनुसार प्रदेशवासियों विशेषकर पूर्व सैनिकों एवं सैनिक आश्रितों एवं महिला समूहों को उपनल के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश के बड़े शहरों देहरादून एवं हल्द्वानी में वरिष्ठ नागरिकों, जो विभिन्न कारणों से अपने घर से बाहर निकलने में असमर्थ हैं। उनके लिए उपनल के माध्यम से मल्टीसर्विस सेंटर स्थापित किये जाय। वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए उपनल के माध्यम से उचित दरों पर सेवाएं दी जा सकती हैं। उपनल के माध्यम से सेवाएं देने पर सेवाकर्ता का पूरा रिकॉर्ड रहेगा। इससे लोगों में विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, सचिव वित्त अमित नेगी, अपर सचिव प्रदीप रावत, उपनल के प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर पी.पी.एस. पहावा (से.नि), निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास ब्रिगेडियर के.वी चन्द (से.नि) आदि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत राज्य में सिंचाई व्यवस्था होगी सुढ़ढ

(एनएन सर्विस)
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति की बैठक में 2020-21 के 344 करोड़ 76 लाख रूपये लागत की प्रस्तावित योजनाओं को अनुमोदित किया गया। इसी के साथ वर्ष 2019-20 के लघु सिंचाई की पूर्व में उपलब्ध धनराशि 29 करोड़ 78 लाख लागत की योजना में धनराशि जारी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह द्वारा सूक्ष्म सिंचाई निधि के अन्तर्गत चाय बागानों हेतु सिंचाई की सुविधाओं की स्थापना से सम्बन्धित लगभग 15 करोड़ 63 लाख लागत के प्रस्तावित योजना में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वाईस चासंलर डाॅ अजित कुमार कर्नाटक के प्रस्ताव के सुझाव को शामिल करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के वांइस चांसलर डाॅ. तेज प्रताप सिंह तथा भारत सरकार के अपर आयुक्त वी.वी.एम. राव ने भी वीडियो कांन्फ्रेसिंग के माध्यम से अपने सुझाव दिए। मुख्य सचिव द्वारा सुझाव को प्रस्तावित योजना में शामिल करने के निर्देश दिये गये। बैठक में सचिव कृषि आर मीनाक्षी सुन्दरम, संयुक्त सचिव सिंचाई ओमकार सिंह, मुख्य अभियन्ता लघु सिंचाई मोहम्मद उमर, प्रमुख अभियन्ता राजकीय सिंचाई मुकेश मोहन सहित कृषि एवं उद्यान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नही कटेगा वेतन मुख्यमंत्री ने दिए आदेश, कई राहत भरी घोषणाएं भी की

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने घोषणा की है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री के खाते में एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि दी जाएगी। इनकी संख्या 50 हजार से अधिक है। वहीं, मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 15 करोड़ रूपये की धनराशि भी स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त गढ़वाल एवं कुमाऊँ मंडल विकास निगम हेतु भी मुख्यमंत्री ने 2-2 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। कोविड-19 के दृष्टिगत पूर्व में लॉकडाउन के कारण परिवहन निगम के साथ ही कुमाऊँ मंडल विकास निगम एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के आय के संसाधनों में कमी के कारण संसाधनों के विकास हेतु मुख्यमंत्री ने यह धनराशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में शीघ्र आदेश निर्गत हेतु सचिव वित्त को निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धनराशि से इन निगमों के नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो सकेगी तथा कार्य संचालन में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा की परिवहन निगम की बसों का संचालन शुरू किया गया है इसमें यात्रियों को सुविधा होने के साथ ही परिवहन निगम के आय के संसाधनों में वृद्धि होगी। इस हेतु गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष महावीर सिंह रांगड ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
उधर, मुख्यमंत्री ने सचिवालय एवं अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व स्वास्थ्य कर्मियों के 1 दिन के वेतन कटौती के आदेश को वापस लिए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के इस आदेश से सचिवालय परिचारक संघ के अध्यक्ष विशन सिंह राणा व अन्य कार्मिकों ने उनका आभार व्यक्त किया है।

रोडवेज बसों का संचालन कल से, सोशल डिस्टेसिंग का करना होगा पालन

प्रदेशभर में रोडवेज बसों का संचालन 25 जून से किया जा रहा है। परिवहन निगम की बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया। देहरादून मंडल के 37, नैनीताल मंडल के 36 और टनकपुर मंडल के 10 मार्गों पर बसों का संचालन किया जाएगा। अभी दूसरे राज्यों के लिए बसें संचालित नही की जायेंगी।
अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश की अध्यक्षता में परिवहन निगम की बोर्ड बैठक हुई। जिसमें बसों के संचालन को मंजूरी दी गई। बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, पहले चरण में राज्य के अंदर ही चुनिंदा 83 मार्गों पर ही बसों का संचालन किया जाएगा। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही गाड़ियों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जायेगी। वहीं, कल से शुरू होने जा रही रोडवेज बसों के लिए परिवहन निगम ने एडवाइजरी जारी कर दी है। इसके तहत तीन यात्रियों वाली सीट पर दो और दो यात्री वाली सीट पर एक मुसाफिर ही सफर कर सकेगा। एडवाइजरी में यात्रियों के लिए मास्क की अनिवार्यता के साथ ही सैनिटाइजेशन आदि की जिम्मेदारी परिचालकों को सौंपी गई है।
एडवाइजरी के अनुसार सभी बसों में ड्राइवर-कंडक्टर के लिए अलग से केबिन बनाना होगा। बसों में कोरोना संक्रमण के जागरुकता से जुड़े स्टीकर भी लगाने होंगे। बसों के रवाना होने से पहले ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को सैनिटाइजेशन का प्रमाणपत्र देना होगा। बसों के साथ पूरे स्टेशन परिसर को प्रतिदिन सैनिटाइजेशन कराना होगा। 
सोशल डिस्टेंसिंग पर रहेगी कड़ी नजर
किसी भी डिपो के अंदर दाखिल होने वाले सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों की अलग से ड्यूटी लगाई जाएगी। शाम सात बजे के बाद कोई भी बस रवाना नहीं होगी। सहायक महाप्रबंधक यात्रा मार्गों पर निरीक्षक की ड्यूटी होगी जो बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित कराएंगे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर संबंधित चालक-परिचालक के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है।
इन मार्गों पर होगा संचालन
पहले चरण में देहरादून से मसूरी, बड़कोट, पुरोला, टिहरी, उत्तरकाशी, जोशीमठ, बीरोंखाल, श्रीनगर, हरिद्वार, कालसी, विकासनगर, ऋषिकेश, रुड़की के लिए बसों का संचालन किया जाएगा। हरिद्वार डिपो की जेएनएनयूआरएम की बसों को हरिद्वार से लक्सर, ऋषिकेश एम्स रुड़की, देहरादून, लक्सर से देहरादून, नारसन के लिए बसों का संचालन किया जाएगा। रुड़की डिपो की ओर से देहरादून और हरिद्वार, ऋषिकेश के लिए बसें संचालित की जाएंगी।
नैनीताल मंडल में रानीखेत से हल्द्वानी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, टनकपुर, भवाली से नैनीताल रामनगर, नैनीताल, हल्द्वानी, नौकुचियाताल, घोड़ाखाल के लिए बसों का संचालन होगा। इसके अलावा रामनगर से टनकपुर, हल्द्वानी, नैनीताल, काशीपुर, जसपुर, काशीपुर से टनकपुर, हल्द्वानी, रुद्रपुर से हल्द्वानी, टनकपुर, खटीमा, काशीपुर के लिए गाड़ियों का संचालन होगा। वही हल्द्वानी डिपो से नैनीताल, जंगलिया गांव, पिथौरागढ़, टनकपुर, चोरगलिया टनकपुर के लिए गाड़ियों का संचालन होगा। काठगोदाम डिपो से टनकपुर, नैनीताल, जसपुर के लिए गाड़ियां संचालित की जाएंगी।
वाल्वो व एसी बसें नहीं होंगी संचालित
वाल्वो के साथ ही वातानुकूलित बसों के संचालन पर रोक रहेगी। साथ ही परिवहन निगम की नियमित बसों के अलावा अनुबंधित बसों का भी संचालन नहीं किया जाएगा। महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि दूसरे राज्यों में बसों का संचालन शुरू होने के बाद ही वातानुकूलित वॉल्वो और अनुबंधित बसों का संचालन किया जाएगा।
यात्री मिलने के बाद अतिरिक्त बसों का होगा संचालन
25 जून से चलने वाली रोडवेज बसों का संचालन यात्रियों की संख्या पर निर्भर होगा। अगर पर्याप्त संख्या में यात्री होंगे, तभी बस संचालित की जाएगी। यात्री कम होनी की स्थिति में ड्यूटी पर तैनात स्टेशन प्रभारी को बसों को रोकने का अधिकार होगा।

ज्योतिष गणना के अनुसार महाकुम्भ मेले का आयोजन निर्धारित समय पर ही

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व अखाङा परिषद के संत महात्माओ ने सीएम आवास में आयोजित बैठक में महाकुम्भ मेला 2021 के संबंध में विचार विमर्श किया। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरीगिरी महाराज ने बताया कि उनकी सभी अखाङो के संतों के साथ चर्चा हुई है। सभी ने इस बात पर सहमति दी है कि ज्योतिष गणना के अनुसार महाकुम्भ मेले का आयोजन निर्धारित समय पर ही हो। इसका स्वरूप क्या होगा, किस स्तर तक होगा, इस पर सरकार द्वारा अगले वर्ष फरवरी माह में तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाए। मुख्यमंत्री ने सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परम्पराओं का ध्यान रखते हुए अगले वर्ष कुम्भ मेले का आयोजन समय पर होगा। परंतु आगामी फरवरी माह में उस समय की परिस्थितियों के अनुरूप संत महात्माओ के मार्ग दर्शन से मेले के स्वरूप के बारे में निर्धारित किया जाएगा। स्थाई प्रकृति के निर्माण कार्य चलते रहेंगे। बैठक में महंत नारायण गिरी महाराज, महंत महेशपुरी महाराज सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।