किसानों को राहत, त्रिवेन्द्र सरकार ने कृषि उत्पाद खरीदने की खुली छूट दी

लॉकडाउन के कारण किसानों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए त्रिवेन्द्र सरकार ने बिना लाइसेंस कृषि उत्पाद खरीदने की छूट किसान समूहों, सहकारी समितियों व किसान उत्पादक संगठनों को दी है। अब लोग सीधे किसानों से कृषि उत्पाद की खरीद कर सकते हैं। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की ओर से जारी अधिसूचना 20 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू हो गई है।
कोरोना वायरस को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को तीन मई 2020 तक बढ़ाया है। इस कारण प्रदेश के किसानों को कृषि उत्पाद बेचने और भंडारण करने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने उत्तराखंड कृषि उत्पाद (विकास एवं विनियमन) अधिनियम की व्यवस्था को अतिक्रमित कर कृषि उत्पाद खरीदने की खुली छूट दे दी है।
अधिसूचना के अनुसार लॉकडाउन अवधि में राज्य में घोषित मंडी क्षेत्र के तहत किसान समूह, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समितियों को सीधे किसान से कृषि उत्पाद खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए लाइसेंस जरूरी नहीं होगा। वहीं, उत्पादों को भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर, गोदाम, क्लस्टर को उप मंडी घोषित किया गया है।
अभी तक उत्तराखंड कृषि उत्पाद (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में फल, सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार के लिए मंडी समिति लाइसेंस जारी करती है। मंडी से बाहर कृषि उत्पादों का थोक कारोबार बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता है। सरकार की ओर से छूट देने से किसानों को उत्पाद बेचने का झंझट नहीं रहेगा और मंडियों में भी भीड़ कम होगी।

इस समय राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत सभी जिलाधिकारियों को जनपद की परिस्थिति के अनुकूल आम आदमी की समस्याओं के समाधान में मानवीय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि शादी विवाह में दूल्हा और दुल्हन दोनों के पक्षों की व्यावहारिकता देखें। ऐसे प्रकरण अंतर्जनपदीय भी हो सकते हैं। विवाह के लिए केन्द्र सरकार के सामाजिक दूरी व अन्य निर्देशों का अनुपालन करते हुए अनुमति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जो लोग अपनी रिश्तेदारी आदि वजह से लॉक डाउन में फंस गए हैं उनका स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए ग्रीन कैटेगरी के जनपदों में जाने की अनुमति प्रदान की जाए। यही नहीं जिन लोगों को क्वॉरेंटाइन में रखे हुए 14 दिन पूरे हो गए हैं उन्हें 15वें दिन स्वास्थ्य परीक्षण के बाद यथा स्थान भेजने की व्यवस्था कर दी जाए।
मुख्यमंत्री आवास में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के दृष्टिगत इससे संबंधित बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा एवं भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन के संबंध में व्यापक चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि काश्तकारों के व्यापक हित में आम व लींची के सीजन के दृष्टिगत इसे क्रय करने हेतु आने वाले ठेकेदारों को भी आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा जांच के बाद आवागमन की सुविधा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि मटर की खेती करने वाले किसानों के हित में फ्रोजन मटर की प्रोसेसिंग करने वाले उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री ने गर्मी व सर्दी के मौसम में प्रदेश के सीमांत जनपदों उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ में माइग्रेट होने वाले लोगों के आवागमन, पशुओं को चारा-पानी, गर्मी के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के कारण प्रदेश में हजारों लोगों ने रिवर्स माइग्रेशन किया है, लॉक डाउन के बाद भी इनकी संख्या और बढ़ सकती है इसके लिए एक प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है जिसमें उनकी दक्षता आदि का पूरा विवरण तैयार किया जाना है। इसके लिए 30 हजार आवेदन भेजे जा चुके हैं। यह प्रक्रिया भविष्य की योजना तैयार करने में मददगार हो सकेगी। जिला अधिकारी अपने जनपदों में इसका भी ध्यान रखें। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने की भी अपेक्षा की। इस धनराशि से जनकल्याण के कार्यों में बड़ी मदद मिल सकती है। उन्होंने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी निर्देश राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 के दृष्टिगत राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में जारी किए जा रहे हैं उनका पालन गंभीरता के साथ सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों से जनपद में मेडिकल स्टाफ की तैनाती के साथ ही उनके प्रशिक्षण पर ध्यान देने को कहा ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप कृषि व खेती से संबंधित कार्यों को सुचारू रूप से संचालन की व्यवस्था की जाए। माइग्रेट लेबरों के हित में उद्योगों से समन्वय कर उनकी आवश्यकता के दृष्टिगत उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि माइग्रेट कैम्पों में नियमित रूप से हेल्थ चेकिंग व उनके मनोबल को बढ़ाने के भी प्रयास किए जाएं।
कहा कि आवश्यक सामान लेकर जाने वाले ट्रक ड्राइवरों को कतिपय जनपदों में 14 दिन के लिए क्वॉरेंटाइन किए जाने की बात भी सामने आ रही है, ऐसे ड्राइवरों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें जाने दिया जाए। उन्होंने वितरित की जा रही सामग्री की एकाउंटिंग पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को कोविड-19 के दृष्टिगत वन विभाग के जिन कर्मचारियों की तैनाती की गई है उन्हें वनाग्नि के बचाव आदि कार्यों के दृष्टिगत कार्यमुक्त कर दें, इनके स्थान पर पीआरडी स्वयं सेवकों की तैनाती की जाए ।
अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग, चारधाम सड़क परियोजना, कुंभ मेले से संबंधित कार्य, पुलों, नाबार्ड, लोनिवि, राज्य योजना व जिला योजना से संबंधित 75 प्रतिशत प्रगति वाले निर्माण कार्य किए जाने हैं, इसका परिचालन मानकों के अनुरूप किया जाना है। उन्होंने निर्माण कार्यों के मजदूरों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही इसका साप्ताहिक अनुश्रवण किए जाने तथा कार्य स्थल पर अथॉरिटी इंजीनियर, जे.ई. की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा, इसकी व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी इनकी रहेगी।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार, सचिव स्वास्थ्य नितेश झा, सचिव वित्त अमित नेगी, सचिव शहरी विकास शैलेश बगोली, सचिव पेयजल अरविंद ह्यांकी, सचिव कृषि आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव खाद्य सुशील कुमार एवं पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने उनके स्तर पर की जाने वाली व्यवस्थाओं पर जिलाधिकारियों से चर्चा की। जिलाधिकारियों ने अपनी समस्याओं से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

सीएम बोले, मैकेनाइज्ड हैंड वाॅश मशीन सार्वजनिक स्थलों के लिए उपयोगी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष शुक्रवार को वैज्ञानिक शाबिर अहमद ने मैकेनाइज्ड हैंड वॉश मशीन का डेमो दिया। उन्होंने कहा कि यह मशीन कोविड-19 के दृष्टिगत बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। इस मशीन से नल एवं साबुन को छुए बिना हाथ धोया जा सकता है। इस मशीन में पानी एवं साबुन का कंट्रोल पांवो से किया जाता है। मशीन में दो पेडल हैं जिनसे आवश्यकतानुसार पानी एवं साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी औसतन लागत लगभग 9,500 रुपए है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि यह हैंडवाश मशीन सार्वजनिक स्थलों के लिए कारगर साबित होगी। कोविड-19 पर नियंत्रण में भी यह मशीन उपयोगी सिद्ध होगी।

गैस खरीदने के लिए केन्द्र सरकार उज्ज्वला कनेक्शन धारकों के अकांउट में धनराशि भेजी

लॉकडाउन के कारण केंद्र सरकार ने उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को तीन महीने फ्री में गैस सिलेंडर देने की घोषणा की है। जिला देहरादून में अभी तक 3330 लोगों के खाते में आईओसी कंपनी (इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन) की ओर से सिलेंडर खरीदने के लिए धनराशि पहुंचा दी गई है।
अभी तक उज्ज्वला के तहत 2780 बुकिंग हो चुकी है, जिसमें से 2450 लोगों को गैस सिलेंडर मिल चुका है। केंद्र सरकार उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को तीन महीने अप्रैल, मई और जून फ्री में सिलेंडर उपलब्ध करा रही है। इसके तहत आईओसी कंपनी सिलेंडर धारकों के खाते में पहले धनराशि पहुंचा रही है।
देहरादून जिले में इसकी शुरुआत हो चुकी है। जिले में उज्ज्वला के तहत कुल 17980 कनेक्शन धारक हैं। इनमें से 14870 उपभोक्ताओं के खाते में धनराशि पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आईओसी के मुताबिक 3330 उपभोक्ताओं के खातों में पैसा डिलीवर हो चुका है। इनमें से अभी तक 2780 उपभोक्ताओं ने गैस की बुकिंग की है। जिसमें से 2450 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिल भी चुका है। अन्य लोगों को भी गैस की डिलीवरी की जा रही है।
वहीं, लॉकडाउन के दौरान पिछले 15 दिनों में जिला प्रशासन एक लाख 14 हजार से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचा चुका है। इस दौरान जहां करीब एक लाख लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया गया, वहीं करीब 14 हजार लोगों को अन्नपूर्णा किट वितरित की गई।
जिलाधिकारी डॉ आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि 27 मार्च को जिला प्रशासन ने भोजन और राशन वितरण शुरू किया था। इसमें शहर की तमाम सामाजिक संस्थाएं, संगठन और दानदाता सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना करीब पांच से 10 हजार लोगों को पका हुआ खाना दिया जा रहा है। वहीं करीब एक हजार लोगों को राशन की अन्नपूर्णा किट वितरित की जा रही है।

कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की समुचित देखभाल होः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंसिग में प्रतिभाग किया। वीडियो कांफ्रेंसिग के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री ने जो निर्देश दिये हैं, उनका पालन किया जाए। एक दो दिन में आगे के लिए केन्द्र से गाइडलाइन आ जाएगी। इसकी अनुपालना सुनिश्चित करनी है।
आरोग्य सेतु मोबाईल एप की उपयोगिता को देखते हुए इसे डाउनलोड करने के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित किया जाए। प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार कोरोना वायरस से लङने के लिए सामाजिक और फोकस्ड प्रयास करने हैं। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि हमारे स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार न हो। ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। आवश्यकता होने पर टेस्टिंग लेब बढाने का प्रयास किया जाए। यह भी देखा जाए कि कहीं भी आवश्यक वस्तुओं का संग्रहण और कालाबाजारी न हो। उत्तराखंड में अभी तक कोरोना से एक भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है। जबकि 5 लोग ठीक हो चुके हैं। आगे भी हमें देखना है कि कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की समुचित देखभाल हो।
इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, डीजीपी अनिल कुमार रतूङी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, डॉ पंकज कुमार पाण्डेय, निदेशक एनएचएम युगल किशोर पंत उपस्थित थे।

कंट्रोल रूम से मुख्यमंत्री ले रहे राहत और बचाव कार्यो का फीडबैक

मुख्यमंत्री के कैम्प कार्यालय में बेहतर समन्वय के लिए केन्द्रीकृत कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां से मुख्यमंत्री, आवश्यकतानुसार कोविड-19 के लिए स्थापित सभी जिला कंट्रोल रूम और राज्य कंट्रोल रूम से फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने फोन पर राज्य के विधायकगणों से बात कर उनके क्षेत्रों में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति और बचाव हेतु प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने विधायकगणों को अपने क्षेत्र में लगातार सम्पर्क बनाए रख कर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करने और लॉकडाऊन में घर पर ही रहने के लिये प्रेरित करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें लोगों सतर्क और सावधान करने के साथ ही उनकी आवश्यकताओं का भी ध्यान रखना है। कोई भी गरीब भूखा न रहे। बाहर से आए लोगों पर लगातार नजर रखनी है। क्वारेंटाईन किए गए लोगों में से कोई इसका उल्लंघन करता है तो तुरंत प्रशासन को जानकारी दें। अगर किसी को खांसी, जुकाम, बुखार जैसी समस्या हो तो स्वास्थ्य विभाग को सूचित करे ताकि उचित इलाज हो सके। विधायकगण अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं को भी प्रेरित करें। हमारे पास केवल और केवल यही एक समाधान है कि हम सामाजिक दूरी बनाकर रखें। हम सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें। इसका स्वयं भी पालन करें और औरों को भी इसका पालन करने हेतु जागरूक करें।

वहीं, सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में संत निरंकारी मंडल के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कोरोना महामारी हेतु सहायता राशि के रूप में 50 लाख रूपये का चेक सौंपा। इस मौके पर हरभजन सिंह ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संत निरंकारी मिशन के प्रदेश में स्थित सभी सत्संग भवनों को आइसोलेशन के लिए प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन कोरोना वायरस से लड़ाई में प्रदेश सरकार की हर सम्भव सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन द्वारा जरूरतमंदों को राशन, सेनेटाइजर, मास्क इत्यादि भी वितरित की जा रही है।

केन्द्र ने राज्यों को 30 अरब रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की

सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए राज्यों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निधि से अतिरिक्त तीन हजार करोड़ रूपए जारी किए हैं। इससे पहले इस निधि में 11 सौ करोड रुपये जारी किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नई दिल्ली इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान देशभर में अब तक 16 लाख 94 हजार मीट्रिक टन अनाज का परिवहन किया गया। इस बीच, देश में पिछले 24 घंटे में छह सौ 93 लोगों में कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके साथ ही संक्रमित लोगों की संख्या चार हजार 67 हो गई। इनमें से दो सौ 91 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक सौ नौ लोगों की मृत्यु हुई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कुल मामलों में से 76 प्रतिशत पुरूष और 24 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमित लोगों में से एक हजार चार सौ 45 तब्लीगी जमात से संबंधित हैं।
अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 के शिकार एक सौ नौ लोगों में से 63 प्रतिशत की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। मृतकों में 40 से 60 वर्ष की उम्र के 30 प्रतिशत जबकि 40 वर्ष से कम उम्र के सात प्रतिशत लोग थे। उन्होंने उच्च जोखिम वाले लोगों को सरकार के निर्देशों और दिशानिर्देशों का पालन करने का सुझाव दिया।
अग्रवाल ने देशवासियों से कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकेने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने और दिशा निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया।
अग्रवाल ने बताया कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान देशभर में अब तक 16 लाख 94 हजार मीट्रिक टन अनाज का परिवहन किया गया। उन्होंने कहा कि 13 राज्यों में एक लाख 30 हजार मीट्रिक टन गेहूं और आठ राज्यों में एक लाख 32 हजार मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया। कहा कि भारतीय खाद्य निगम के पास केंद्र के हिस्से वाला 55 लाख 47 हजार मीट्रिक टन अनाज है।
अग्रवाल ने कहा कि इस महामारी के प्रबंधन के लिए राज्यों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निधि से 11 अरब रुपये जारी किए गए हैं। इस संबंध में 30 अरब रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की गई है।
गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि लॉकडाउन के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं और चीजों की उपलब्धता संतोषजनक है।
तब्लीगी जमात से संबंधित मामलों के बारे में सुश्री श्रीवास्तव ने कहा कि अथक प्रयायों से तब्लीगी जमात के 25 हजार पांच सौ से अधिक स्थानीय लोगों और उनके सम्पर्क में आए लोगों को क्वारेंटीन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने छुपने वाले और छुपाने वाले दोनों पर सख्त एक्शन लेने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर रात्रि 9 बजे अपने आवास में दीपक प्रकाशित किए। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को भी उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि कोरोना वायरस से संघर्ष में इससे अवश्य ही हम सभी का उत्साह बढ़ेगा। पूरे देश ने जिस संयम और एकजुटता का परिचय दिया है, वह प्रेरणादायक है। हम अपने आत्मबल की शक्ति से कोरोना वायरस के खिलाफ लङाई में जरूर जीतेंगे। बस हमें निराश नहीं होना है, धैर्य और संयम बनाए रखना है, घर पर रहना है, सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी है और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करना है।

वहीं, दिनभर के घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस को रोकने में प्रशासनिक कार्यवाही का विरोध करने वालों पर डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत कङी कार्रवाई की जाएगी। क्वारेंटाईन किए गए लोग अगर छुपते हैं या कोई उन्हें छुपाते हैं तो छुपने वाले व छुपाने वाले दोनों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ लोगों ने सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्हें सख्त हिदायत दी जाती है कि सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर चार गुना वसूली की जाएगी। कुछ छिटपुट जगहों पर लोग अफवाहो के बहकावे में भी आए हैं। प्रदेशवासियों से अनुरोध है अफवाहो में न आएं और केवल सरकारी प्रामाणिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। स्वास्थ्य विभाग समय समय पर गाइडलाइन जारी करता है जिसे मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी लोग कोरोना वायरस से लङाई में जुटे हैं। कुछ लोगों को इनकी तपस्या को बेकार करने नहीं दिया जाएगा।

जमाती सामने आए नही आए तो गंभीर धाराओं में मुकदमा होगा दर्ज

उत्तराखंड में कई जमाती मेडिकल जांच कराने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। इस पर रविवार को मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने चेतावनी जारी की कि छिपे हुए जमातियों के पास सोमवार (आज) को पुलिस के सामने आने का आखिरी मौका है। यदि उसके बाद कोई पकड़ा जाता है तो उस पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
उनके संक्रमण से किसी की जान जाती है तो फिर संबंधित पर हत्या का केस दर्ज होगा। उत्तराखंड में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 26 कोरोना पॉजिटिव में 19 जमाती हैं। इनमें आठ देहरादून जिले से हैं। हिमाचल प्रदेश के डीजीपी के बाद उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने रविवार को जमातियों को कड़ी चेतावनी जारी की है।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि निजामुद्दीन मरकज और जमात में गए 675 लोगों को क्वारंटीन किया जा चुका है। पुलिस के अनुरोध के बावजूद जमाती खुद को छिपा रहे हैं, जो चिंताजनक है। सरकार और पुलिस हर नागरिक की सुरक्षा के लिए गंभीर है। जमाती सामने आए तो पूरे समाज के लिए बेहतर होगा।
कोरोना वायरस से काफी लोग ठीक हो रहे हैं। इसलिए डरने की कोई बात नहीं हैं। जरूरी होगा तो उनका मेडिकल कराया जाएगा। जमातियों के सामने आने का सोमवार को आखिरी दिन है। सामने आने वालों का पुलिस पूरा साथ देगी। इसके बाद आने वाले जमातियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

अगले 3 माह तक सभी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 5 किलो चावल निशुल्क मिलेगा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आने वाले प्रत्येक राशन कार्ड धारक को प्रति सदस्य के हिसाब से 3 माह तक मुफ्त में पांच-पांच किलो अतिरिक्त चावल दिए जाने का राज्य सरकार ने निर्णय लिया है। शासन ने इस संबंध में सभी जिलों को आदेश भी जारी कर दिए हैं।
सचिव खाद आपूर्ति सुशील कुमार की ओर से जारी आदेश में योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में आने वाले प्रदेश के 13 लाख परिवारों के 62 लाख लोगों को यह लाभ दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी को अप्रैल, मई और जून यानि की 3 माह तक प्रतिमाह 5 किलो चावल निशुल्क दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने यह व्यवस्था की है कि राशन कार्ड में यदि 5 सदस्य हैं तो परिवार को प्रतिमाह 25 किलो चावल मुफ्त में अलग से मिलेगा। सरकार की ओर से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्ड धारकों को मिलने वाला सस्ता राशन इस बार एडवांस में दिया जा रहा है। सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि इस योजना के तहत आने वाले एवं प्राथमिकता वाले परिवारों को निशुल्क चावल वितरित करना शुरू कर दें। जिन जिलों में अप्रैल का राशन वितरित कर दिया गया है, वहां भी यह व्यवस्था अमल में लाई जाएगी।