जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश, सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन हो

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से फोन के माध्यम से कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु रखी जाए, खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुओं की पूर्ण उपलब्धता रखी जाए, सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन कराया जाए, प्रदेश की जनता को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की आवश्यकताओं के लिए शासन के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए, यह ध्यान रहे कि खाद्यान्न एवं अन्य सामग्री में ओवर रेटिंग की शिकायत ना हो।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों से भी स्वास्थ्य सुविधाओं एवं आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी ली। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आवश्यक सामग्री के लिए स्वास्थ्य सचिव एवं डीजी स्वास्थ्य से संपर्क करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के पूरे परिवार ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दी धनराशि
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना वायरस के दृष्टिगत अपने 5 माह का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता रावत ने कोरोना वायरस के दृष्टिगत 1 लाख रुपए का चेक, मुख्यमंत्री की बेटी कृति रावत ने 50,000 एवं सृजा ने 2000 रुपए का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दिए हैं।

अन्य बीमारी से राहत दिलाने के लिए अब खुलेगी अन्य अस्पतालों की ओपीडी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सीएम आवास में कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के संबंध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए राज्य सरकार हर सम्भव कोशिश कर रही है। इसमें प्राईवेट चिकित्सा संस्थानों का सहयोग बहुत जरूरी है। वर्तमान में दून अस्पताल, महंत इंद्रेश अस्पताल, एम्स ऋषिकेश व हिमालयन अस्पताल में कोविड-19 कोरोना के मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखे गए हैं। यहां के चिकित्सकों को कोरोना के ईलाज मे नियुक्त किया गया है। इससे अन्य निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी बढ गई है। इसलिए सभी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम अपने यहां ओपीडी खुली रखें। ताकि आमजन अन्य बिमारियों की दशा में अपना ईलाज सुगमता से करा सके। सरकार निजी चिकित्सा संस्थानो को हर प्रकार की सहायता देगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि निजी अस्पतालों में ओपीडी की व्यवस्था सही रखने में सहयोग करें। मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि कोरोना से लङाई में सरकार का पूरा सहयोग किया जाएगा। यह लङाई केवल सरकार की नहीं पूरे देश और समाज की है।
बैठक में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ धनसिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव स्वास्थ्य नितेश झा, एनएचएम के निदेशक युगल किशोर पंत, आईएमए के अध्यक्ष डॉ अजय खन्ना, सीएमआई के चेयरमैन डॉ आरके जैन, डॉ महेश कुडियाल, डॉ अरविंद ढाका, डॉ डीडी चैधरी, डॉ अजीत गैरोला, डॉ सिद्धार्थ गुप्ता, डॉ संजय गोयल, डॉ कृष्ण अवतार, डाॅ प्रवीण मित्तल, डॉ शनवीर बामरा आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए प्रमुख अस्पतालों की ली बैठक
मुख्यमंत्री कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के संबंध में प्रमुख अस्पतालों के प्रबंधन के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए राज्य सरकार हर सम्भव कोशिश कर रही है। इसमें प्राईवेट चिकित्सा संस्थानों का सहयोग बहुत जरूरी है। वर्तमान में दून अस्पताल, महंत इंद्रेश अस्पताल, एम्स ऋषिकेश व हिमालयन अस्पताल में कोविड-19 कोरोना के मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखे गए हैं।
एम्स ऋषिकेश, हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट, दून अस्पताल व महंत इंद्रेश अस्पताल में कोरोना के ईलाज के लिए पृथक से व्यवस्था की जा रही है। आवश्यकता अनुसार स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इनमें कोरोना के मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। बताया गया कि एम्स ऋषिकेश व दून अस्पताल में 400-400 बेड कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं। हिमालयन अस्पताल व महंत इंद्रेश अस्पताल में 200-200 बेड इसके लिए उपलब्ध हैं। जरूरत पङने पर इन दोनों अस्पतालों में इसे बढ़ाया जा सकता है। आर्मी अस्पताल देहरादून में भी इसके लिए 200 बेड की व्यवस्था रहेगी। इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर की संख्या आवश्यकता पङने पर बढाई जायेगी और एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाएगी। समुचित समन्वय के दृष्टिगत एम्स ऋषिकेश व हिमालयन अस्पताल के लिए आईपीएस नीरू गर्ग और दून अस्पताल व महंत इंद्रेश अस्पताल के लिए आईपीएस केवल खुराना को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
बैठक में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ धनसिंह रावत, महंत देवेन्द्र दास, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल राजेन्द्र सिंह ठाकुर, सचिव नितेश झा, एनएचएम के निदेशक युगल किशोर पंत, हिमालयन अस्पताल के विजय धस्माना, एम्स ऋषिकेश के प्रोफेसर डॉ रविकांत उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने दी स्वीकृति, इस मसय डयूटी दे रहे कार्मिकों का होगा बीमा

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव कार्यों में फ्रंटलाईन में कार्यरत 68457 कार्मिकों को 4-4 लाख का बीमा लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसकी स्वीकृति दी है। 1 वर्ष की अवधि के लिए इस पर 17.02 करोङ रूपए का व्यय आएगा। इसका वहन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों का बीमा केन्द्र सरकार के स्तर से किया जा चुका है। राज्य सरकार के स्तर पर बीमा लाभान्वितों में 22523 पुलिस कार्मिक, 7988 सफाईकर्मी, 14595 आंगनबाङी कार्यकत्रि, 14376 आंगनबाङी सहायिका, 4924 मिनी आंगनबाङी सहायिका, 464 सुपरवाईजर, 78 सीडीपीओ, 9 डीपीओ, जीएमवीएन व केएमवीएन के 3000 कार्मिक, एसईओसी/डीईओसी के 500 कार्मिक शामिल हैं। मीडिया कर्मियों के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है।

सबके सहयोग से ही हम कोरोना वायरस को हरा सकते हैंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने फेसबुक लाईव द्वारा प्रदेशवासियों से एक बार फिर से सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि बङी संख्या में उत्तराखंड के लोग बाहर हैं जो आना चाहते हैं। परंतु इस समय जो जहां है वहीं रहना है। भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों को निर्देशित किया है कि अपने अपने राज्यों में बाहर के जो लोग फंस गए हैं उनके लिए भोजन आदि की पूरी व्यवस्था करें। कोई भी भूखा नहीं रहेगा। हालांकि दिक्कत जरूर होगी परंतु इन दिक्कतों में संयम और सतर्कता बनाकर रखना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में जो लोग बाहर से अपने गांवों में आ चुके हैं, वे सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करे। अपने बच्चों से भी कुछ दिनों के लिए दूर रहें। खुद को भी बचाएं और अपने परिवार और गांव को भी बचाएं। जाने अनजाने में कोई भी गलती नहीं करनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में बङी संख्या में दूसरे प्रदेशों के श्रमिक और पर्यटक हैं। इन सभी के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सबके सहयोग से ही हम कोरोना वायरस को हरा सकते हैं। कोरोना हारेगा, उत्तराखंड जीतेगा।

31 मार्च को अपने घर जाने की व्यवस्था वाला आदेश राज्य सरकार ने किया निरस्त

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि 31 मार्च, मंगलवार को लाॅकडाउन के कारण फंसे लोगों को राज्य के भीतर अपने घर जाने की जो व्यवस्था की गई थी, उसे निरस्त कर दिया गया है। रविवार को गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों में एक जिले से दूसरे जिले में मूवमेंट को भी रोके जाने को कहा गया है। हमें देश को कोरोना से मुक्त करने के लिए और सख्ती से लॉकडाऊन को लागू करना है। इससे कुछ कष्ट हो सकता है, परंतु यह हम सभी के हित में है।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने जिलाधिकारियों को गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों की अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं।

ऋषिकेश से मुनिकीरेती नहीं प्रवेश कर पाएंगे लोग, बाॅर्डर सील

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय टिहरी गढ़वाल के निर्देश पर थाना मुनिकीरेती पर अपने ऋषिकेश से लगे बॉर्डर रविवार को सील कर दिए हैं। इन स्थानों से अब पैदल व्यक्ति नहीं आ जा पाएंगे। केवल इलाज हेतु ’एम्स अन्य निजी चिकित्सालय, सरकारी चिकित्सालय’ जाने की ही छूट होगी। इसके लिए भी आते जाते समय पुलिस को मेडिकल प्रपत्र दिखाने पड़ेंगे। किसी को भी देहरादून क्षेत्र से आने जाने की अनुमति नहीं होगी।

18 लोगों को किया कुरएन्टीन
नियम का उलंघन कर जनपद में प्रवेश करने पर 18 लोगों को टिहरी प्रशासन की ओर से गढ़वाल मंडल विकास निगम के ऋषिलोक होटल में 14 दिन के लिए कुरएन्टीन में भेज दिया है इनकी सुरक्षा में पुलिस तैनात कर दी गयी है। ऐसे लोगो को रखने के लिए प्रशासन द्वारा अन्य होटलों को भी अधिग्रहित कर लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्रियों को कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए जिलेवार जिम्मेदारी दी

कोरोना वायरस से निपटने, प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य के मंत्रीगणों एवं राज्यमंत्रियों को उत्तराखण्ड के जनपदों का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
शुक्रवार को मंत्रियों को तैनाती देते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को हरिद्वार, सुबोध उनियाल को टिहरी व उत्तरकाशी, डा. हरक सिंह रावत को पौड़ी, अरविन्द पाण्डेय को चम्पावत व पिथौरागढ़, यशपाल आर्य को अल्मोड़ा व नैनीताल एवं मदन कौशिक को देहरादून व उधमसिंह नगर, राज्यमंत्री डा. धनसिंह रावत को रुद्रप्रयाग व चमोली एवं रेखा आर्या को बागेश्वर का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण पहले स्टेज में, सावधानी बरतने की जरुरत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देर सांय वीडियो कांफ्रेंसिग के माध्यम से प्रदेश में कोरोना वायरस की अद्यतन स्थिति और इसके संक्रमण को कम करने के लिए की गई तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि गेहूँ की आटा मिलें चलती रहें, ये सुनिश्चित कर लिया जाए। पंजीकृत और अन्य श्रमिकों व अन्य जरूरतमंदों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। आवश्यक सावधानियां बरतते हुए फार्मा इंडस्ट्री चलती रहें। जो लोग बाहर से आ रहे हैं, उनको होम क्वारेंटाईन कराया जाए। कोरोना संदिग्ध लोगों जिनकी रिपोर्ट लम्बित है, को सख्ती के साथ घर पर क्वारेंटाईन किया जाए। इस पर लगातार चैकिंग भी की जाए। जिलाधिकारी इनको क्रास चेक करा लें। जिलों में होम डिलीवरी व्यवस्था को मजबूत करें। सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अभी तक की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसी प्रकार आपसी समन्वय से आगे भी काम करना है। कोई छोटी से छोटी कोताही भी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता होने पर देहरादून व हल्द्वानी में 500 बेड के प्री फैब कोरोना अस्पताल बनाए जा सकते हैं, इसके लिए संबंधित जिलाधिकारी 5 एकङ भूमि चयनित कर लें। जिन भी सीएमओ व अन्य अधिकारियों के नम्बर सार्वजनिक कर रहे हैं उन्हें सहायक भी दे दे। छोटी आटा चक्कियो को चलने दे। थोक सप्लाई को न रोके। दुकानों पर रेट लिस्ट अवश्य लगें। फूड प्रोसेसिंग से संबंधित फेक्ट्री चलती रहें। कल मार्केट आवश्यक वस्तुओं के लिए सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक खुले रहेंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कम समय होने पर भीङ एक साथ आ जाती है। फल सब्जी, दूध दिनभर उपलब्ध होगी। सब्जियों की ठेलिया चल सकती हैं। चार पहिया वाहन पूरी तरह बंद रहेंगे। दोपहिया वाहन सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक चलेंगे परंतु इनपर एक ही व्यक्ति बैठेगा।
बैठक में सचिव नितेश झा ने बताया कि अभी उत्तराखंड कोरोना के फेज एक में ही है। यहां पाए गए पाजिटिव केस बाहर से आए हुए हैं। स्थानीय संक्रमण नहीं हुआ है। सोशल डिस्टेंसिंग रखने में सफल रहे तो राज्य में कोरोना मामलों को रोकने में अवश्य कामयाब रहेंगे। आयुष चिकित्सकों की सेवाएं भी ली जाएंगी। जिला चिकित्सालयों में कोरोना स्पेसिफिक अस्पताल स्थापित कर रहे हैं। आवश्यक दवाओं और उपकरणों की व्यवस्था की गई है।
सचिव सुशील कुमार ने बताया कि खाद्यान्न पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूङी, सचिव अमित नेगी अन्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

21 दिनों तक घर की लक्ष्मण रेखा को न लांघेः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश की जनता से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा अगले 21 दिनों के सम्पूर्ण लॉकडाऊन के आह्वान में पूरा सहयोग देने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से इस लङाई में हम सभी भारतवासी अपने प्रधानमंत्री के साथ हैं। जब जब भी देश पर और मानवता पर संकट आया है, हम सभी की एकजुटता से संकट को दूर करने में कामयाब हुए हैं। आईये हम संकल्प लें कि अगले तीन सप्ताह अर्थात 21 दिनों तक हम अपने घर में ही रहेंगे। प्रदेशवासियों को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कोई कमी नहीं हो, इसके लिए राज्य सरकार और प्रशासन ने पूरी तैयारियां कर रखी हैं। राज्य सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। शासन प्रशासन पूरी तरह एक्टिव है। तमाम कोशिशों के बाद भी हमें कुछ कष्ट उठाना पङ सकता है, परन्तु हम सभी के सामने आए इस भयावह संकट के सामने ये कष्ट कुछ भी नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र विकल्प है। घर की लक्ष्मण रेखा को न लांघकर कोरोना वायरस के संक्रमण की चैन को तोङना है। केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों की सबसे बडी प्राथमिकता अपने नागरिकों के जीवन को बचाना है। चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिसकर्मियों, सफाई कर्मियों, दूसरे अधिकारियों, कर्मचारियों, मीडिया के साथियों के योगदान में सहयोग देने के लिये घर पर रहें।

मुख्यमंत्री ने दिलाया भरोसा, सरकार सबका रख रही है ध्यान, एडवायजरी का करें पालन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव वित्त अमित नेगी, स्वास्थ्य एवं गृह सचिव नितेश झा के साथ आपात बैठक ली। बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि जनता कर्फ्यू को 31 मार्च, 2020 तक जारी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस अनुभवों और उसकी भयावहता को देखते हुए, आज राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश के अन्तर्गत हमारी अन्तर्राज्जीय परिवहन सेवा और राज्य के अन्तर्गत सार्वजनिक परिवहन सेवा को प्रतिबन्धित किया जा रहा है। दूसरी बात जो राज्य में हमारी आवश्यक सेवाएं हैं, चाहे स्वास्थ्य सम्बन्धी हों, खाद्य सम्बन्धी हों और अन्य जो भी अन्य आवश्यक सेवाएं हैं वो उपलब्ध रहेंगी, इनकी दुकानें खुली रहेंगी। सभी जिलाधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। सभी प्रदेशवासियों से यह भी अनुरोध है कि वो अपने शहर, अपने मुहल्लों को न छोड़ें। जो गांव के लोग हैं वो अपने गांव से बाहर न निकलें। जब बहुत जरूरी हो, तभी गांव से बाहर निकलें। आगामी 31 मार्च, 2020 तक के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसका शासनादेश जारी कर दिया जाएगा।
मैं प्रदेशवासियों से यही कहना चाहूंगा कि हमारे पास कोरोना वायरस से लड़ने का सबसे ज्यादा समर्थ तरीका एक यही कि सामाजिक दूरी बनाए रखें। यही इसका सबसे बड़ा बचाव है। राज्य में सभी जगह प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट में है। मुझे पूरा विश्वास है कि उत्तराखण्ड की जनता ने जिस प्रकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को स्वीकार किया, अपना समर्थन किया है, उसी प्रकार अपने देश के बचाव के लिए, अपने राज्य के बचाव के लिए, अपने घर-परिवार के बचाव के लिए वो निश्चित रूप से सरकार का सहयोग करेगी। जनता कर्फ्यू आज पूरी स्वेच्छा से देश में लागू हुआ, अब पूरे राज्य में कर्फ्यू केवल आवश्यक सेवाओं के लिए खुला रहेगा, अब पूरे राज्य में कर्फ्यू 31 मार्च तक लागू रहेगा।
हमारे राज्य में जितने भी रजिस्टर्ड मजदूर हैं, उनके खाते में एक हजार रूपये डालेंगे ताकि उनको खाद्यान्न की दिक्कत न रहे। मैं उन्हें आश्वासन देना चाहता हूं कोई भूखा न रहे सरकार इसकी व्यवस्था करेगी। सैनेटाईजेशन की कार्यवाही पूरे राज्य में गतिमान है। राज्य के संस्थान एवं सरकार इकाईयों ने व्यापक सैनेटाईजेशन का कार्य कर रही है। जनता से मैं यही कहना चाहूंगा कि सरकार विश्वभर के विशेषज्ञों की राय एवं अनुभवों के आधार पर निर्देश दे रही। आप उन परामर्शों को ध्यान से पढ़िए, अखबारों में, इलेक्ट्रोनिक मीडिया, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, आदि द्वारा जो भी समय-समय पर दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं उनका पालन करें। मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहता हूं जो भी सोशल मीडिया में एक्टिव रहते हैं, राज्य सरकार ने नोडल अधिकारी नामित किए हैं उनसे कहना चाहता हूं वही अधिकृत खबरें प्रकाशित करें। यदि कोई अफवाह फैलाने की कोशिश करते हैं, उनके साथ दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।