मुख्यमंत्री ने पेयजल योजनाओं की प्रतिमाह मॉनिटरिंग करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में पेयजल परियोजना अन्तर्गत कार्यों की समीक्षा हेतु एनआईसी द्वारा तैयार वेब पोर्टल को लांच किया। विश्व बैंक पोषित अर्द्धनगरीय पेयजल योजनाओं, जल शक्ति मिशन एवं अन्य पेयजल योजनाओं का अनुश्रवण एवं मूल्यांकन इस ऑनलाइन पोर्टल से किया जायेगा। इस पोर्टल के माध्यम से पेयजल योजनाओं की कार्य प्रगति, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, योजना के तहत लगाये गये एवं अवशेष कनेक्शनों की जानकारी भी प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये की पेयजल योजनाओं की प्रतिमाह मॉनिटरिंग कर प्रगति रिपोर्ट दी जाय। जल शक्ति मिशन एवं अर्द्धनगरीय पेयजल योजनाओं के सफल संचालन के लिए कार्यों की निश्चित समयावधि तय की जाय। नमामि गंगे के तहत अवशेष कार्यों को जल्द पूर्ण किया जाय। वहीं, सचिव पेयजल अरविन्द सिंह ह्ंयाकी ने जानकारी दी कि राज्य के अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति में सुधार के लिए 385.81 करोड़ रूपये की 12 पेयजल योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। विश्व बैंक पोषित अर्द्धनगरीय पेयजल योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 22 अर्द्धनगरीय क्षेत्र चिन्हित हैं। इस योजना के तहत 4.39 लाख लोगों को प्रतिदिन 12 से 16 घण्टे पेयजल आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर विधायक पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, एमडी स्वजल उदयराज सिंह एवं एनआईसी के अधिकारी उपस्थित थे।

सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य सरकार के कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण होने पर सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका ‘‘विकास के तीन सालः बातें कम, काम ज्यादा’’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने सरकार को सहयोग देने के लिए प्रदेशवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही है। तीन वर्ष के दौरान अनेक बड़े निर्णय लिए गए। 4 मार्च को गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की गई। यह हमारे दृष्टि पत्र में भी था। हमने जनता से किया गया वायदा पूरा किया। प्रदेश की जनता ने भी इसके पक्ष में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। हमारा दूसरा बड़ा निर्णय चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन था। अब चारधाम यात्रा इसके तहत की जाएंगी।
हमने जनता से सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वायदा किया था। हमने इसके लिए कड़े कदम उठाए, भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार किया। साबित किया कि सरकार ईमानदारी से भी चल सकती है। पारदर्शी शासन के लिए ई-आफिस, सीएम हेल्पलाईन, सीएम डैशबोर्ड की व्यवस्था की है। तीन साल में एक बड़ा निर्णय अटल आयुष्मान योजना शुरू करना रहा है। इसमें प्रदेश के सभी लोगों को शामिल किया। रैफर के प्रावधान को हटाया गया है। प्रदेश में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट की गई। 1 लाख 24 हजार करोड़ के एमओयू किए गए। इनमें से 21 हजार करोड़ से अधिक का निवेश ग्राउन्ड हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बहुत से निर्णय लिए, जहां सुधार की गुंजाईश होती है, वहां सुधार भी किए जाते हैं।
ऑल वेदर रोड़, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट, एनएच, भारतमाला, टिहरी बांध, शहरी विकास, एयर कनेक्टीवीटी, जमरानी, सौंग, मसूरी पेयजल योजना आदि के रूप में डबल इंजन का प्रभाव देखा जा सकता है। केंद्र से 94 हजार करोड़ रूपए से अधिक के प्रोजेक्टों की स्वीकृति ली गई। पलायन को रोकने के लिए नहीं बल्कि रिवर्स पलायन के लिए ग्राम्य विकास और पलायन आयोग का गठन किया गया। उसने विस्तृत अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट दी। 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टीनेशन, होम स्टे से स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। ग्रोथ सेंटर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। हम ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं। सोलर और पिरूल एनर्जी नीति पर्वतीय क्षेत्र में काफी फायदेमंद होंगी। प्रदेश में एयर कनेक्टीवीटी का भी विस्तार हुआ है। देहरादून, देश के प्रमुख शहरों से जुड़ चुका है। चिन्यालीसौड़, गौचर भी हवाई सेवा से जुड़ चुके हैं। उड़ान के अंतर्गत हेली सेवा शुरू करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है। आर्गेनिक खेती में भी बड़ी पहल की गई है। साहसिक पर्यटन के लिए अलग से विभाग बनाया जा रहा है। साहसिक पर्यटन हमारे युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी हम अपने विकास के एजेंडे पर आगे बढ़ते रहेंगे। सभी डिग्री कॉलेजों, आंगनबाड़ी केंद्रों को भवन और स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध करवाया जाएगा। कनेक्टीवीटी के लिए जहां भी पुलों की आवश्यकता होगी, बनाए जाएंगे। बालिका अनुपात में काफी सुधार आया है, इस पर और ध्यान दिया जाएगा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चैहान, देहरादून मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक हरबंस कपूर, गणेश जोशी, मुन्ना सिंह चैहान, खजान दास, महानिदेशक सूचना डा.मेहरबान सिंह बिष्ट उपस्थित रहे।

सरकार का ऐतिहासिक फैसला, प्रमोशन में अब आरक्षण नही चलेगा

उत्तराखंड में प्रमोशन से रोक हटाने के प्रदेश सरकार के फैसले के बाद परेड मैदान में जुटे जनरल ओबीसी कर्मचारियों ने एक दूसरे को रंग लगाकर होली मनाई। उन्होंने इसे आंदोलन की जीत करार दिया। लेकिन सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज फेडरेशन भड़क गया है। फेडरेशन ने विरोध में आज सभी जिला मुख्यालयों पर सरकार का पुतला फूंकने का फैसला किया है। बुधवार को प्रमोशन से रोक हटने का आदेश जारी होने के बाद एससी-एसटी कर्मचारी जुट गए और उन्होंने एक सभा कर सरकार पर उनके हितों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाया।
इससे पूर्व सचिवालय में उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी, प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसांई, बीपी नौटियाल, ठाकुर प्रहलाद सिंह, अरुण पांडेय, राकेश जोशी निगम अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुसांई, प्रदेश महामंत्री बीएस रावत समेत कई कर्मचारी नेताओं के साथ मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की वार्ता हुई। इस वार्ता में सहमति बनने के बाद कर्मचारी नेता परेड मैदान स्थित धरना स्थल पर पहुंचे जहां उन्होंने प्रमोशन से रोक हटने, पदोन्नति के आदेश जारी होने और कार्य बहिष्कार की अवधि अर्न लीव (उपार्जित अवकाश) में एडजस्ट होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेमियादी हड़ताल को स्थगित किया जा रहा है। यदि कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमे वापस न हुए और उनके खिलाफ कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई हुई फिर आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने सभी हड़ताली कर्मचारियों का आभार जताया और इसे कर्मचारियों के एकजुट संघर्ष की जीत करार दिया। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया। उन्होंने जमकर होली खेली। एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसांई ने बताया कि हड़ताल के दौरान कर्मचारियो ंने होली नहीं मनाई थी। आज उन्होंने मांगें पूरी होने की खुशी में उन्होंने होली मनाई।

सरकार की कार्रवाई, आम लोगों को राहत देने और हड़ताल रोकने के लिए एस्मा लागू

आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड में प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल रोकने के लिए शासन ने एस्मा लागू कर दिया है। शासन ने इसकी अधिसूचना जारी कर छह माह के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद शासन ने उत्तर प्रदेश अति आवश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम 1966 के तहत स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों, पैरामेडिकल व अन्य कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है।
अपर सचिव युगल किशोर पंत की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में तैनात डॉक्टरों व कर्मचारियों की सभी सेवाओं को आवश्यक सेवाएं घोषित कर हड़ताल पर रोक लगाई गई है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जहां सरकार प्रदेश भर में हाई अलर्ट जारी कर चुकी है, वहीं प्रमोशन में आरक्षण के लिए खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में डॉक्टर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, लैब टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ संघ की ओर से दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा था।
स्वास्थ्य कर्मचारी संगठनों की ओर से पूर्ण कार्य बहिष्कार करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था। इसे देखते हुए शासन ने एस्मा लागू कर स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है।

सराहनीय फैसलाः रेट लिस्ट लगाकर उचित मूल्य पर सेनेटाइजर और मास्क की बिक्री करने के निर्देश

उत्तराखंड में किसी भी मेडिकल स्टोर पर डॉक्टर के परामर्श के बिना खांसी जुकाम, बुखार व दर्द की दवाईयां नहीं दी जाएंगी। फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स कमिश्नर डॉ.पंकज कुमार पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। कैमिस्ट की दुकानों पर रेट लिस्ट लगाकर उचित मूल्य पर सेनेटाइजर व मास्क की बिक्री करने के निर्देश दिए गए।
फूड सेफ्टी ड्रग्स प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार कोरोना वायरस पूरे विश्व में गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रदेश सरकार ने वायरस को माहमारी रोग घोषित किया है। आदेश में कहा गया कि कोई भी कैमिस्ट बिना डॉक्टर के परामर्श के बिना किसी भी व्यक्ति को खांसी, जुकाम, बुखार व दर्द की दवाईयां न दें।
इसके लिए खांसी जुकाम से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह लेने की सलाह दी गई। प्रदेश के सभी ड्रग्स इंस्पेक्टरों को आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। आम लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने के लिए मेडिकल स्टोर में भी सेनेटाइजर व मास्क के रेट की लिस्ट लगाई जाए।
कोरोना के वायरस से बचने के लिए फिलहाल ठंडे खाद्य पदार्थों से परहेज करना फायदेमंद साबित हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडे खाद्य पदार्थों पर वायरस तेजी से पनपते और बढ़ते हैं। इसके अलावा इम्युनिटी पावर भी कमजोर होती है।
डॉक्टरों के अनुसार इन दिनों गर्म पानी पीना ज्यादा फायदेमंद रहता है। आइसक्रीम जैसे ठंडे खाद्य पदार्थ नुकसान पहुंचा सकते हैं। दरअसल इनसे सीधा नुकसान तो नहीं है, लेकिन ये शरीर को कमजोर कर सकते हैं। इम्युनिटी कम होने से वायरस बहुत तेजी से हमला करते हैं, जिससे रोग तेजी से फैलता है। ठंडा और बासी खाना तेजी से वायरस को बढ़ाता है।
वहीं, कोरोना के खतरे को देखते हुए बैंक कैशियर भी चिंता में हैं। दरअसल उन्हें नोट गिनने होते हैं, जो अनगिनत हाथों से होकर गुजरे होते हैं। ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि इससे वायरस का अटैक न हो जाए। डॉक्टरों के अनुसार नोट गिनते वक्त थूक लगाना नुकसान कर सकता है। नोट गिनने के बाद हाथों को लगातार सैनेटाइज करते रहे और हाथों को चेहरे पर लगाने से बचें।

मुख्यमंत्री ने स्वयं संज्ञान लेकर फसलों के नुकसान की रिपोर्ट देने के दिए निर्देश

उत्तराखंड में भारी वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को पहुंचे नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बेहद गंभीर है। इसके तहत मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को फसल क्षति का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को आश्वासन देते हुए कहा है कि किसानों की हरसंभव मदद की जाएगी।
इन दिनों नियमित अंतराल में हो रही वर्षा और ओलावृष्टि रबी की फसल पर भारी पड़ रही है। विशेषकर मैदानी क्षेत्रों में रबी की मुख्य फसल गेहूं समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों के माथों पर बल पड़े हैं। अब मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को ओलावृष्टि और भारी वर्षा से किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद कृषि महकमा हरकत में आ गया है। सचिव कृषि आर.मीनाक्षी सुंदरम ने कृषि निदेशक को निर्देश दिए हैं कि वह भी अपने स्तर से फसलों को पहुंचे नुकसान का आकलन कराकर रिपोर्ट शासन को भेजना सुनिश्चित करें। उधर, कृषि निदेशक गौरीशंकर ने बताया कि सभी जिलों के मुख्य कृषि अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में जल्द से जल्द सर्वे कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति की जा सके। दूसरी तरफ, निदेशक हार्टिकल्चर मिशन संजय श्रीवास्तव ने बताया कि वर्षा और ओलावृष्टि से फल-सब्जियों को पहुंची क्षति का भी आकलन कराया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने स्वयं इसका संज्ञान लिया है। यह राज्य के किसानों के लिए अच्छी खबर है। नही तो पहले हमें सरकार से मांग करनी पड़ती थी। किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है कि उनकी समस्याओं का संज्ञान लेकर त्रिवेन्द्र सरकार समय-समय पर राहत देती आ रही है। गौरतलब है कि पहले भी किसानों की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार ने किसानों के हितों को लेकर कई राहत देने वाले कार्य किये है। इस बार का बजट भी किसानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वही गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर भुगतान के लिए अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था भी त्रिवेन्द्र सरकार ने की है।

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित किया

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कैबिनेट के फैसले की पुष्टि की है। वायरल संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में उत्तराखंड महामारी रोग अधिनियम (कोविड-19) में लागू कर दिया है। इससे जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को वायरस की रोकथाम के लिए असीमित अधिकार प्राप्त हो जाएंगे।
मदन कौशिक ने बताया कि इसके तहत अब स्कूल और आंगनबाड़ी के बाद राज्य के सभी कॉलेज, सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स 31 मार्च तब बंद रहेंगे। लेकिन मेडिकल कॉलेज खुले रहेंगे। वहीं राज्य में आइसोलेशन वार्ड के लिए 50 करोड़ की राशि मंजूर की है।
उत्तराखंड सरकार ने मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल की बैठक में कोरोनो वायरस को लेकर यह फैसला लिया है। सबसे खास बात ये है कि कोरोना को राज्य सरकार ने महामारी घोषित कर दिया है। प्रदेशभर में कोरोना से बचाव के मद्देनजर सावधानी व जागरुकता पर जोर दिया गया है। मॉल पर फिलहाल निर्णय नहीं हुआ है। किसी भी प्रकार के कार्यक्रम से पहले सरकार से अनमुति लेनी जरूरी होगी। कोरोना को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ के खाली पद भरे जाएंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त पद सृजित किए जाएंगे। बसों में सेनिटेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ज्यादा लोगों एक जगह पर एकत्र होने से रोका जाएगा। इस आदेश की अवहेलना करने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत 1 माह से 6 माह के कारावास का प्रावधान किया गया है। भविष्य में कोरोना की तीव्रता बढ़ने पर प्रीफेब्रिकेटेड 100 बेड का हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर निजी भवन, चिकित्सा ईकाई भवन को अस्पताल बनाया जाएगा। आपात स्थिति से निपटने के लिए 140 विभागीय एम्बुलेंस को अलर्ट पर रखा गया है।

स्वास्थ्य सचिव को असीमित अधिकार
महामारी अधिनियम लागू होने के बाद सचिव स्वास्थ्य को असीमित अधिकार होंगे। सचिव स्वास्थ्य अपनी शक्तियां जिलों में जिलाधिकारी और सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) डेलिगेट करेगा। इसके तहत कई शक्तियां डीएम में निहित होंगी। राज्य सरकार पहले ही तमाम बड़े आयोजनों को रद्द कर चुकी है। 12वीं तक के स्कूलों और विद्यालयों में 31 मार्च तक अवकाश घोषित किया गया है। वहीं सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी पर भी रोक लगाई जा चुकी है।

दो ट्रेनी आईएफएस सहित छह के सैंपल भेजे
कोरोना की आशंका के चलते दो ट्रेनी आईएफएस समेत छह और मरीजों के सैंपल शनिवार को जांच के लिए वायरोलॉजी लैब हल्द्वानी भेजे गए हैं। इस तरह से जिले से शनिवार तक 20 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जिसमें से अब तक आई सभी 11 मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर सतर्कता बरत रहे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों से संपर्क कर रही हैं। इसी क्रम में शनिवार को छह सैंपल जांच के लिए डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज, हल्द्वानी स्थित वायरोलॉजी लैब भेजे गए। इसमें दो सैंपल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे दो ट्रेनी आईएफएस के भी शामिल हैं।
अकादमी के 62 ट्रेनी आईएफएस के अलग-अलग ग्रुप पिछले दिनों विभिन्न देशों से ट्रेनिंग टूर से लौटे थे। सभी की स्क्रीनिंग करने के बाद शुक्रवार को चार ट्रेनी आईएफएस के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। शनिवार को भी दो और ट्रेनी आईएफएस के सैंपल दून अस्पताल से जांच के लिए भेजे। इसके अलावा शनिवार को जो चार और मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं, उनमें एम्स ऋषिकेश और निजी अस्पतालों में इलाज कराने को पहुंचे थे। ये चारों भी हाल में विदेश से लौटे हैं। सीएमओ डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। साथ ही संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को निगरानी पर रखा जा रहा है।

बच्चों ने मंगलगीत गाकर मनाया फूलदेई का त्योहार

सुख-समृद्धि का प्रतीक फूलदेई त्योहार उत्तराखंड की गढ़ कुंमाऊ संस्कृति की पहचान है। वसंत का ऋतु के आते ही बच्चों को इस त्योहार का खासा इंतजार रहता है। देहरादून में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बच्चों के साथ यह त्योहार मनाया और उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पौधरोपण भी किया। बच्चें हर घर-घर में फूलों की बारिश करते है और हर घर सुख-समृद्धि से भरपूर हो, ऐसी प्रभु से कामना करते है। इसी भावना के साथ बच्चे अपने गांवों के साथ-साथ आस-पास के गांव में जाकर घरों की दहजीज पर फूल गिराते हैं और उस घर के लिए मंगलमय कामना करते हैं।

साथ ही घर की गृहणी उनको फूल वर्षा के बदले चावल, गुड़ के साथ दक्षिणा के रूप में रुपए भी देती है। यह त्योहार आमतौर पर चैत्र पंचमी को आता है। इस दिन लोग गांवों में अपने घरों को साफ-सफाई कर लाल मिट्टी से सजाते हैं। फिर इसके बाद बच्चे इन घरों में विभिन्न प्रकार के फूलों की वर्षा कर गांव की उन्नति के गीत गाते हैं। फूलदेई त्योहार में बुरांस के फूल विशेष होते हैं। बच्चे एक दिन पहले ही जंगल जाकर बुरांस के फूल एकत्र करते हैं।
इसके साथ ही प्यूंली, हिलांश, सरसौं आदि के फूलों से सजी रिंगाल की टोकरियों को सिर पर रखकर बच्चे गीत गाते हुए आंगन-आंगन जाते हैं। फिर गांव के सार्वजनिक चैक में वसंत ऋतु के आगमन को लेकर गीत गाकर नृत्य करते हैं।

यहां जाकर, अब मसूर की दाल भी सस्ती खरीदों

मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना के तहत उत्तराखंड के 23 लाख राशन कार्ड धारकों को इसी माह से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर सस्ती दरों पर मसूर दाल मिलेगी। सरकार ने मसूर दाल के रेट 50 रुपये प्रति किलो. तय किया है। इसमें सरकार आठ रुपये की सब्सिडी देगी।
प्रदेश के राशन कार्ड धारकों को सस्ती दरों पर दालें वितरित करने के लिए 12 सितंबर को मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना शुरू की गई थी। योजना में प्रत्येक राशन कार्ड पर प्रति माह दो प्रकार की दाल एक-एक किलो देने की व्यवस्था है, लेकिन अभी तक कार्ड धारकों को 41 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दो किलो चना दाल ही दी जा रही थी। योजना में अब सरकार ने मसूर दाल के रेट निर्धारित कर दिए हैं। सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन कार्ड धारकों को 50 रुपये प्रति किलो की दर से मसूर दाल उपलब्ध होगी। जबकि बाजार में इस दाल की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो है।

सब्सिडी-आठ रुपये
दाल के रेट अधिक होने से सरकार ने भी अपने संसाधनों से मसूर दाल पर आठ रुपये की सब्सिडी दी है। सचिव खाद्य एवं आपूर्ति सुशील कुमार ने बताया कि मसूर दाल के रेट पर सरकार की अनुमति मिल गई है।
राशन कार्ड धारकों की संख्या के अनुसार 23 हजार क्विंटल मसूर दाल की डिमांड केंद्र सरकार को भेजी गई है। जल्द ही दाल की आपूर्ति होते ही उपभोक्ताओं को सस्ते गल्ले की दुकानों पर चना के साथ मसूर की दाल भी मिलेगी।

कोरोना वायरसः जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में कोरोना वायरस से निपटने हेतु राज्य स्तर पर की गयी तैयारियों के सम्बन्ध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने समस्त जिलाधिकारियों को अपने जनपदों में आइसोलेशन वार्ड की स्थापना, प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं पैरामेडिक स्टाफ सहित आवश्यक दवाईयों की व्यवस्था करने निर्देश दिए। उन्होंने संदिग्ध मरीजों के स्थानांतरण हेतु डेडिकेटेड एम्बुलेंस और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।
अफवाहों को रोकने हेतु लगातार किया जाए सूचनाओं का आदान प्रदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव एवं जागरूकता हेतु प्रदेशभर में चलायी जा रही वर्चुअल क्लासिस एवं विश्वविद्यालयों का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु जारी एडवायजरी का प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस से निपटने हेतु सभी विभागाध्यक्षों को आपस में समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की अफवाहों को रोकने हेतु लगातार मुख्य चिकित्साधिकारियों द्वारा जिला सूचना कार्यालयों के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान तेजी से किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सैनेटाईजर एवं मास्क आदि की ओवर रेटिंग एवं कालाबाजारी न होने पाए, इसके लिए भी व्यवस्थाएं बनायी जाएं। कालाबाजारी एवं ओवर रेटिंग को रोकने हेतु कड़े कदम उठाए जाएं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रियों की लगातार की जाए स्क्रीनिंगः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने चीन एवं नेपाल से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में यात्रियों की लगातार स्क्रीनिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि कोरोना वायरस के प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु संदिग्ध रोगी या किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति की सूचना मिलने पर राज्य एवं जनपद स्तर पर रेपिड रिस्पान्स टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर यथाशीघ्र शासन को अवगत कराया जाए, ताकि समय पर आवश्यक व्यवस्थाएं बनायी जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को चम्पावत में पूर्णागिरी के मेले के अवसर पर अतिरिक्त चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।