खंडूड़ी बोले मुझ पर आरोप लगते तो आत्महत्या कर लेता

102चौदहबीघा में भाजपा की पर्दाफाश यात्रा में बोले पूर्व मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मैं भी तो मुख्यमंत्री रहा, अगर ऐसे आरोप मुझ पर लगे होते तो मैं आत्महत्या कर लेता। चौदहाबीघा में भाजपा की पर्दाफाश यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री और गढ़वाल सांसद बीसी खंडूड़ी ने यह बात कही। उन्होंने कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कहा कि भाजपा सुशासन और भ्रष्टाचार रहित सरकार देगी। उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई।
भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को नरेन्द्रनगर विधानसभा के चौदहबीघा स्थित सब्जी मंडी मैदान में पर्दाफाश यात्रा का आयोजन किया। मुख्यवक्ता पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी ने तल्ख लहजे में लोगों से पूछा कि क्या इसलिए उत्तराखंड बनाया था। हमने, कौदा-झंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड राज्य बनाएंगे… का नारा देकर संघर्ष, बलिदान और अपमान सहकर अलग राज्य हासिल किया। क्या हमारा कोई कर्तव्य नहीं है कि राज्य कि चिंता करें, किस दिशा में हम जा रहे हैं।
खंडूड़ी ने कहा कि मैं वर्ष 1991 से सांसद रहा हूं, लेकिन मैंने ऐसी कांग्रेस सरकार नहीं देखी। पूरे प्रदेश में भय और भ्रष्टाचार का माहौल है। आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान सिर्फ पैसे बनाने पर है। खनन के सिवाय सरकार प्रदेश की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने पूछा कि जाति के नाम पर कब तक वोट देंगे? देश और राज्य के प्रति सोचने का वक्त आ गया है।

मैंने अपनों को भी ठीक किया
ऋषिकेश। पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हमारे द्वारा बनाए गए लोकायुक्त को प्रदेश में लागू नहीं कराया। क्या भ्रष्टाचार करने पर सिर्फ कांग्रेस नेताओं को ही सजा मिलने वाली थी, अन्य लोग इससे अछूते रहते। कहा कि आज लोकायुक्त होता तो प्रदेश में भ्रष्टाचार का बोलबाला नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था तो हमारे लोग भी गलती करते थे, मैंने उन्हें भी तो ठीक किया। लेकिन प्रदेश के हितों से कभी समझौता नहीं किया। आरोप लगाया कि वर्तमान में मुख्यमंत्री के सलाहकार और पीए सरकार चला रहे हैं।
पर्दाफाश यात्रा को हरिद्वार विधायक मदन कौशिक, रायपुर के पूर्व विधायक उमेश शर्मा काऊ, प्रदेश महामंत्री खजान दास, अनुशासन समिति के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान सिंह नेगी आदि ने भी संबोधित किया। संचालन दिनेश कोठियाल और मदन सिंह रावत ने संयुक्तरूप से किया। अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष सुरेन्द्र कुलियाल ने की। इससे पूर्व भाजपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री का नटराज चौक पर स्वागत किया। कार्यकर्ता दुपहिया वाहनों में रैली के रूप में सभास्थल पहुंचे। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष कुसुम कंडवाल, नगर पालिकाध्यक्ष शिवमूर्ति कंडवाल, पुष्पा ध्यानी, नारदेवी राणा, जयप्रकाश कोठारी, विनोद खंडूड़ी, पवन वर्मा, अशोक नगीना, पूरण पुंडीर, योगेश बहुगुणा, दीपक भटट, नलिन भट्ट, योगेश राणा आदि मौजूद रहे।

10 विभीषण गिराएंगे हरीश सरकार
ऋषिकेश। नरेन्द्रनगर के पूर्व विधायक सुबोध उनियाल ने कहा कि कांग्रेस के 10 विभीषण हरीश रावत सरकार को जड़ से उखाड़ फेकेंगे। आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने उनके विधानसभा के विकास कार्य रोक दिए हैं। उन्होंने इसका जवाब चुनाव में कांग्रेस को देने की अपील की।

 

श्यामपुर ऋषिकेश में खुलेगा नया डिग्री कॉलेज

गुरू गोरखनाथ महाविद्यालय, यमकेश्वर का प्रान्तीकरण करने के निर्देश
पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि मेलों के आयोजन पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने श्यामपुर में डिग्री कॉलेज खोलने, राजकीय महाविद्यालय भनोली में पदों के सृजन, तलवाडी में अर्थशास्त्र, गरूड़ में गृह विज्ञान, काडा व चन्द्रबदनी में विज्ञान, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वारहाट में एम.एस.सी, राजकीय महाविद्यालय रानीखेत व गरूड में गृह विज्ञान व छात्रसंघ भवन, टनकपुर में एम.ए.अंग्रेजी, स्याल्दे में राजनीतिशास्त्र, चन्द्रबदनी में बी.एस.सी, रा.स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में सहा. लाइब्रेरियक पद की स्वीकृति, छात्रावास तथा छात्राओं के लिए कामन हाल के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने चन्द्रावती तिवारी कन्या महाविद्यालय ऊधमसिंहनगर एवं गुरू गोरखनाथ महाविद्यालय, यमकेश्वर का प्रान्तीकरण किये जाने के भी निर्देश दिए हैं।
सचिवालय में उच्च शिक्षा कृषि, उद्यान, दुग्ध विकास व पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने निर्देश दिए कि जिन डिग्री कॉलेजों के भवन निर्माणाधीन हैं उन्हें शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने लम्बगांव डिग्री कॉलेज में कम्प्यूटर लैब, खेल मैदान, जहरीखाल में बहुउदे्शीय हाल की स्वीकृति भी प्रदान की। 102
कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री रावत ने जोशीमठ, मुनस्यारी, नौगांव व नैनबाग में कृषि मण्डी की स्थापना के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि मेलों के आयोजन पर ध्यान देने को कहा। इसके लिए 2-2 लाख की धनराशि भी उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में परम्परागत कृषि उत्पादों के उत्पादन के लिए अभियान संचालित करने, इन उत्पादों के क्रय के लिए विभिन्न स्थानों पर क्रय केन्द्र स्थापित करने को कहा। गॉवो का कलस्टर तैयार कर सूअर रोधी दीवार बनाने तथा जल संग्रहण क्षेत्रों के विकास पर भी ध्यान देने तथा कृषि यंत्रों पर छूट दिये जाने की योजना को अमल में लाये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने बंगापानी व मदकोट में जैविक मण्डी स्थापित करने, कालाढुंगी को फलमण्ड़ी के रूप में विकसित करने, मंडुवा व चौलाई के लिए अलग-अलग विपणन बोर्ड गठित करने व मण्डी में चौलाई का प्रोसेसिंग प्लान्ट लगाये जाने के भी निर्देश दिए। स्थानीय खाद्यान्नों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा इन्हंें उचित बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में दो फूड मेलों के आयोजन के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।
मुख्यमंत्री ने बिना बीज की लीची की प्रजाति विकसित करने, भतरोज खान में फल संरक्षण केन्द्र स्थापित करने, फल उत्पादन के कलस्टर तैयार करने, अखरोट मिशन के तहत अधिक से अधिक पेड़ लगाने, खाली घरों में मशरूम उत्पादन के साथ ही इसके लिए रिसोर्स परसन तैयार करने को कहा। इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था हो, उन्होंने मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में कार्य कर रही दिव्या रावत को ब्राड एम्बेसडर की जिम्मेदारी देने को कहा। उन्होंने जलवायु परिर्वतन के कारण फलोत्पादन में आ रही गिरावट को दूर करने के लिए जोन मेपिंग के साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्रो के साथ इसकी कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने पशुपोत्पादन को मण्डी से जोडने पर बल दिया। तेज पत्ता, टिमरू, चाय व जड़ी-बूटी के विकास से सम्बंधित योजनाओं को धरातल पर लाने का भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये है।
पशुपालन एवं दुग्ध विकास की समीक्षा करते हुए उन्होंने गौचर में पशु प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने के साथ ही दुग्ध उत्पादन के लिए बद्री गाय योजना के क्रियान्वयन पर बल दिया। इस योजना को पर्वतीय क्षेत्रों के नौ जनपदों में विशेष रूप से संचालित किये जाने को कहा। उन्हांेंने दुग्ध संघो को मजबूती प्रदान करने पर बल देते हुए दुग्ध संघ अल्मोड़ा को 25 लाख तथा नवाडगदेरे में चिली प्लांट लगाने, दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वंय सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने तथा महिला स्वंय सहायता समूहों को प्रति लीटर 6 रूपये बोनस दिये जाने की योजना के लिए 30 लाख की धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों से सम्बंधित उनके द्वारा जनहित से जुड़ी जो घोषणाएं की गई हैं उन पर शीघ्र अमल किया जाये ताकि जनता को उनका लाभ मिल सके। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह, सचिव अमित नेगी, डी.एस.गर्ब्याल, अपर सचिव डा. रणजीत सिन्हा, जेपी जोशी, आरसी शर्मा निदेशक उद्यान बीएस नेगी व सम्बंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य के विकास के लिए हमें मिलकर कार्य करना हैः पॉल

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स्वतंत्रता दिवस की 69वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल ने राजभवन में ध्वजारोहण करके राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी दी। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश को आजाद कराने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीर शहीदों के बलिदान को स्मरण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।
आजादी के इस महान राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर सभी को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमे आजादी के महानायकों का कठिन संघर्ष और बलिदान याद रखते हुए आजादी को कायम रखने के लिए निरन्तर सजग व सकारात्मक सोच के साथ सक्रिय रहना होगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने के लिए 2 वर्ष से जारी स्वच्छता अभियान को साकार करने के लिए सभी को अपना योगदान देना है। राज्यपाल ने राज्यगठन के आन्दोलनकारियों के संघर्ष व त्याग को याद करते हुए कहा कि राज्यगठन के लिए जिन आन्दोलनकारियों ने कठिन संघर्ष किया उनकी तथा जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास के लिए हमें मिलकर कार्य करना है। यह गर्व की बात है कि हमारा राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है। जिसकी छवि देश के सबसे स्वच्छ, स्वस्थ, सुन्दर, समृ़द्ध तथा संभावनाओं के अवसरों से भरपूर राज्य के रूप में स्थापित करने के लिए सबकी समान भागीदारी भी जरूरी है। ध्वजारोहण के बाद आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में राज्यपाल द्वारा राजभवन परिसर में जिकोंबायलोबाज् के पौधे का रोपण किया गया जिसकी उम्र लगभग 1000 वर्ष मानी जाती है। ध्वजारोहण कार्यक्रम में पी.ए.सी. के जवानों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज एवं राज्यपाल को सलामी दी गई। इस अवसर पर राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी एवं सचिव श्री अरूण ढौंडियाल, वित्त नियंत्रक के.सी.पाण्डे, परिसहाय डा० योगेन्द्र सिंह रावत, अनुज राठौर सहित राजभवन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

उधम सिंह काम्बोज का बलिदान दिवस मनाया

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देहरादून।
शिरोमणी शहीद उधम सिंह काम्बोज के 77वें बलिदान दिवस प्रदेश के वन एवं खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने उनके चित्र पर श्रद्वासुमन अर्पित किये। अग्रवाल ने कहा कि आजादी के उन परवानों, दीवानों के साहस एवं दृढ इच्छाशक्ति को कभी नही भूलना चाहिए, जिन्होने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करते हुए हमें आजादी दी है। उन्होने कहा कि हमारी नई पीढी को हमारे शहीदों से प्रेरणा लेते हुए उनकी जो विरासत हमें मिली है तथा उसको आगे बढाने का कार्य करना है, जिससे देश प्रदेश की प्रगति के लिए कार्य करना है तथा उन्होने जो सपना देखा था उनके सपनों का पूरा करना है।
अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार शहीदों के सम्मान में कभी पीछे नही है तथा शहीद परिवारों के समस्याओं को दूर करने के लिए बचनबद्ध है। इस अवसर पर राज्य पिछडा वर्ग आयोग के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने शहीद उधम सिंह कम्बोज को श्रद्वासुमन अर्पित किये। उन्होंने शहीद उधम सिंह को एक महान नायक बताया, कहा कि भारत की आन-बान-शान के लिए अपने प्राणों की आहूति दी है। उन्होने कहा कि काम्बोज समुदाय ओबीसी में आता है तथा उन्होनें सरकार से ओबीसी बच्चों को मिलने वाले प्रमाण पत्र की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करायी है तथा आय प्रमाण पत्र के लिए 12 हजार वार्षिक आय के स्थान पर वार्षिक आय 44500 रुपये की गई है।
इस अवसर पर कागेंस पार्टी के महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान, महानगर अध्यक्ष भाजपा उमेश अग्रवाल, पूर्व ब्लाक प्रमुक खेम सिंह पाल, दून काम्बोज सभा के अध्यक्ष मदन काम्बोज, केेजी बहल, उपेन्द्र सिंह, कैलाश चन्द्र कम्बोज, पूर्व प्रधान मोथरोवाला मामचन्द, प्रधान केवलाकला खुर्द हरीप्रसाद भट्ट, प्रधान मोहब्बेवाला वीरेन्द्र कुमार, प्रधान बंजारावाला घनीमाला, योगमाया, टीपी तिवारी सहित कम्बोज समुदाय के लोग एवं कई जनप्रतिनिथि उपथित थे।

ग्राम प्रहरियों की आपदा प्रबन्धन में महत्वपूर्ण भूमिका: मुख्यमंत्री

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मोबाइल खरीदने 1000 रुपये, मोबाइल भते के रुप में 200 रुपये प्रतिमाह देगी सरकार
देहरादून।
प्रदेश में अब दैवीय आपदा से पीड़ित परिवारो को अनुमन्य राहत राशि के अलावा 1 लाख रूपये फिक्सड डिपोजिट के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा। आपदा में मृतक के लिये यह धनराशि अब 5 लाख होगी। ग्रामों में तैनात ग्राम प्रहरियों को मोबाइल खरीदने हेतु 1000 रू० तथा प्रति माह मोबाइल भते के रूप में 200 रू० दिये जायेंगे। आपदा से क्षतिग्रस्त भवनों की क्षतिपूर्ति राशि 2 लाख रूपये से बढाकर 3 लाख रू० की जायेगी। आपदा से प्रभावित पीड़ित जो स्वयं के मकान क्षतिग्रस्त होने के कारण किराये के भवनों में रह रहे है उनका किराया भता बढ़ाया जायेगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीजापुर अतिथि गृह में आपदा प्रबन्धन विभाग के कार्याे की प्रगति की समीक्षा करते हुए यह निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदाग्रस्त परिवारों के प्रति मृतक को दी जाने वाली अनुमन्य राहत राशि रू. 4 लाख के अलावा 1 लाख रूपये फिक्सड डिपोजिट के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा। आपदा में मृतक के मामले में यह धनराशि अब 5 लाख होगी। क्षतिग्रस्त भवनों की क्षतिपूर्ति राशि को भी 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रूपये करने के निर्देश दिये गये है। भवनों की क्षतिग्रस्तता की परिभाषा के सम्बन्ध में बने संशय तथा तकनीकी जटिलताओ पर विचार करते हुए भवन को क्षतिग्रस्त घोषित करने के सम्बन्ध में अब एक तीन सदस्य वाली समिति द्वारा भवन का प्रमाणीकरण किया जायेगा जिसमें एक कनिष्ठ अंभियन्ता भी होगा। यह समिति भवनों का ध्वस्तीकरण भी सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली 3 लाख रूपये की क्षतिपूर्ति राशि उन सभी भवन स्वामियों को प्रदान की जायेगी जिन्हे राज्य प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त घोषित किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्राम प्रहरियों की आपदा प्रबन्धन में महत्वपूर्ण भूमिका होने तथा आपदा के सम्बन्ध में सूचना को ससमय पहुचानें में सक्रिय सहयोग दिये जाने के दृष्टिगत प्रत्येक ग्राम प्रहरी को 1000 रूपये मोबाइल खरीदने तथा 200 रूपये मासिक मोबाइल भता दिये जाने के निर्देश दिए है। आपदा प्रबन्धन हेतु ग्राम प्रहरी के अतिरिक्त ग्राम स्तर पर कार्य करने वाले सभी सरकारी व अर्ध सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा जिसमें पंचायत सचिव, राशन विक्रेता, जनप्रतिनिधि भी सम्मिलित होंगे। इस सम्बन्ध में जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण को निर्देश शीघ्र जारी किये जायेगे। ग्राम प्रहरियो की कार्यशैली तथा सक्रियता की प्रशंसा करने हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा सम्बन्धी सूचना जिला सूचना केन्द्रो तक तीव्रता से पहुचाने में ग्राम प्रहरी महत्वपूर्ण व रचनात्मक भूमिका निभा सकते है। ग्राम प्रहरियो को जिला सूचना केन्द्रो से जोड़ा जाना चाहिये ताकि सूचना तंत्र को अधिक मजबूत किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सीमित आर्थिक संसाधनों पर विचार करते हुए आपदा राहत हेतु धन जुटाने हेतु आबकारी पर उपकर (सेस) लगाने पर विचार किया जायेगा तथा खनन की रॉयल्टी से भी इसकी संभावनाऐ तलाशी जायेगी। निर्देश दिये कि आपदा के दौरान पशु-धन हानि के आकलन में पारदर्शिता तथा सरलीकरण हेतु एसडीएम व ग्राम प्रधान के प्रतिवेदन तथा गांव के पांच लोगो के सांक्ष्याकन के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था की जाय।
बैठक में सचिव, आपदा प्रबंधन शैलेश बगोली ने बताया कि आपदा राहत मद में प्रति जनपद पर्वतीय जनपदों को 7 करोड़ रूपये तथा मैदान जनपदो को 5 करोड रूपये की धनराशि उपलब्ध करायी जा चुकी है। आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त धनराशि के आवंटन की भी कार्यवाही की जा रही है। बैठक में कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह, प्रीतम सिंह पंवार, नवप्रभात, मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी, अपर सचिव सी रविशंकर, उप सचिव आपदा प्रबन्धन संतोष बडोनी आदि उपस्थित थे।

सैनिक आश्रितों के छात्रवृत्तियों और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि करने का निर्णय

उत्तराखण्ड सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य करें पुनर्वास संस्था: राज्यपाल
देहरादून।
उत्तराखण्ड के राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड सैनिक पुनर्वास संस्था की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें संस्था के कार्यकलापों की गहन समीक्षा की गई तथा कई अहम निर्णय लिए गए।
पूर्व सैनिकों के कल्याण की दृष्टि से 1945 में स्थापित इस संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संस्था को लीज पर उपलब्ध कराई गई 482.785 एकड कृषि भूमि तथा 940.143 एकड़ वन भूमि के अधिकाधिक व्यावसायिक लाभ की सारी सम्भावनाएं खोजने औैर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की दृष्टि से राज्यपाल द्वारा अपर मुख्य सचिव कृषि डा. रणबीर सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है जो 2 माह के अन्तर्गत अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
तीन वर्ष बाद आहूत इस बैठक में राज्यपाल ने कहा कि पुनर्वास संस्था के आय के स्रोत में वृद्धि के लिए उद्यमिता कौशल के साथ इस बेशकीमती व उपजाऊ भूमि का दोहन करना होगा। इससे संस्था के वित्तीय घाटे को लाभ में परिवर्तित किया जाना आसान होगा। उन्होंने ‘कमर्शियल कैश क्रौप’ (नकदी फसलें) लगाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि इस सम्बंध में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता का लाभ लिया जाना सर्वाधिक उपयुक्त होगा।
राज्यपाल ने जखोली रूद्रप्रयाग में निर्माणाधीन सैनिक स्कूल केे लिए संस्था की निधि से निर्गत रू0 5 करोड़ की धनराशि की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार से कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही संस्था को प्राप्त कृषि और वन भूमि के लीज नवीनीकरण/विस्तार पर भी यथाशीघ्र कार्यवाही किए जाने की अपेक्षा भी की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि सैनिक विधवाओं द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय की व्यवस्था सुनिश्चित होनी जरूरी है। इसके लिए सभी राजकीय प्रदर्शनियों/मेलांे में एक्स सर्विस मैन के लिए एक निःशुल्क काउंटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल द्वारा, संस्था की निधि का उपयोग केवल पूर्व सैनिकों के परिवार तथा सैनिक विधवाओं के कल्याणार्थ एवं पुनर्वास योजनाओं पर ही किए जाने के निर्देश दिए गए। आज की बैठक में विभिन्न छात्रवृत्तियों और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि किए जाने का भी निर्णय लिया गया।
इस समीक्षा बैठक में 05 अप्रैल, 2013 की बैठक में उठाये गये बिन्दुओं के अनुपालन, लीज पर दी गई कृषि हेतु भूमि को गैर कृषि उपयोग के प्रबन्धन की स्थिति सहित संस्था के विगत वर्षोें के आय-व्यय, 2016-17 के प्रस्तावित बजट पर चर्चा और अनुमोदन की औपचारिकताओं के साथ ही पूंजीगत लाभ, गत वर्षों में लिए गए नीतिगत निर्णयों आदि विषयों पर विचार-विमर्श के दौरान राज्यपाल ने कहा कि संस्था की बैठक नियमित रूप से आहूत की जानी चाहिए।
आज की इस बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव एस.रामास्वामी, अपर मुख्य सचिव (कृषि) डा. रणबीर सिंह, सचिव सैनिक कल्याण आनन्द वर्द्धन, सचिव राज्यपाल अरूण ढौंडियाल, सब एरिया जीओसी मेजर जनरल एस सब्बरवाल तथा निदेशक सैनिक पुनर्वास ब्रिगेडियर केबीचंद सहित संस्था के अनेक अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

उत्तराखंड में चीन की घुसपैठ! चमोली की सीमा में घुसे चीनी सैनिक

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सीएम हरीश रावत ने केन्द्र सरकार से की वार्ता
देहरादून।
उत्तराखंड में चमोली से सटी चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों ने चमोली सीमा पर घुसपैठ की है, लेकिन अच्छी बात यह है कि वहां मौजूद महत्वपूर्ण नहर तक चीनी सेना नहीं पहुंच पाई है।
बीजापुर गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान सीएम हरीश रावत ने चमोली से सटी चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर कहा कि मुझे यकीन है केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान लेगी। चमोली सीमा पर हो रहे चीनी घुसपैठ का पता तब चला जब सीमा क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंची प्रशासन की टीम को चीनी सैनिकों ने जांच करने से रोकते हुए वापस खदेड़ दिया। हर बार की तरह इस बार भी जोशीमठ के उप जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन की 19 सदस्यीय टीम 19 जुलाई को चीन सीमा के निरीक्षण को गई थी। टीम सुमना क्षेत्र तक वाहन से पहुंची। यहां होतीगाड़ नदी का जलस्तर बढ़ने से टीम को वाहन यहीं छोड़ने पड़े। इसके बाद दूसरे छोर पर खड़े वाहनों से टीम सेना चौकी रिमखिम पहुंची। करीब आठ किमी दूर सीमा क्षेत्र में पहुंचने पर यहां पहले से चीन सैनिकों को मौजूद देख टीम के होश उड़ गए।
भारतीय दल को देखते ही चीनी सैनिकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और टीम सदस्यों को तुरंत लौट जाने का इशारा किया। चीनी सैनिकों के तेवर देख टीम ने निरीक्षण छोड़ तुरंत वापस लौटने में ही भलाई समझी। टीम के सदस्यों ने इसकी जानकारी सीमा क्षेत्र में मुस्तैद आईटीबीपी के अधिकारियों को भी दी। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार बाड़ाहोती क्षेत्र में पहुंचते ही टीम को दूर से ही चीनी सैनिक दिखाई दे गए थे। टीम आगे पहुंची तो चीनी सैनिकों ने उन्हें वापस चले जाने का इशारा किया। गौरतलब है कि चीन सीमा क्षेत्र में प्रशासन का निरीक्षण नियमित प्रक्रिया है। इसकी गोपनीय रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाती है। चमोली जनपद से सटी भारत-चीन सीमा में बाड़ाहोती क्षेत्र नो मेंस लैंड एरिया है।
हर वर्ष चमोली जिला प्रशासन की टीम सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को देखने और भारत की मौजूदगी दर्ज करने के लिए यहां सामान्य निरीक्षण के लिए जाती है। पूर्व में टीम वर्ष में दो बार जाती थी, लेकिन वर्ष 2015 से टीम वर्ष में तीन बार सीमा क्षेत्र के निरीक्षण को जाती है। चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर सीएम हरीश रावत ने कहा कि मुझे यकीन है केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान लेगी। उन्होंने कहा है कि घुसपैठ की जानकारी भारतीय एजेंसियों को है। आईटीबीपी इस पूरे क्षेत्र की निगरानी कर कर रही है। आईटीबीपी और सेना को इसकी जानकारी है। सीएम ने कहा है कि इस क्षेत्र में लगातार चीन की सक्रियता बनी हुई है, लेकिन अच्छी बात यह है कि वहां एक नाला है, वह चीनी सैनिकों ने अभी नहीं छुआ है।

हरेला पर्व उत्तराखंड की संस्कृति व पर्यावरण का प्रतीक

देहरादून।
हरेला पर्व संस्कृति एवं पर्यावरण का प्रतीक है। हरेला से घी संग्रांद तक वृक्षारोपण का अभियान चलाया जा रहा है। इस वर्ष जन सहभागिता से हरेला वृहद स्तर पर मनाया जा रहा है। बुधवार को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज, रायपुर में वन विभाग द्वारा आयोजित हरेला पर्व के अन्तर्गत वृक्षारोपण एवं पौध वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ने शिरकत की।
इस अवसर पर हरेला के तहत मुख्यमंत्री रावत ने रूद्राक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने स्कूली बच्चों को पौधे भी वितरित किए। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि पिछली बार हरेला पर्व राज्य सरकार की ओर से मनाया गया था। किन्तु इस बार जन संगठनों द्वारा हरेला को वृहद स्तर पर मनाया जा रहा है। इस बार राज्य सरकार की भूमिका इसमें एक सहयोगी की है। हरेला संस्कृति एवं पर्यावरण का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री रावत ने वन विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि वन विभाग द्वारा मांग के अनुरूप पौधे उपलब्ध कराए गए है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण हमारी आदत का हिस्सा होना चाहिए। हम सभी को वृक्षारोपण के प्रति दूसरो को भी जागरूक करना चाहिए। एक वृक्ष भी जीवन में परिवर्तन ला सकता है। अधिक से अधिक पौधे लगाए एवं पर्यावरण संरक्षण में सहायक बनें। मुख्यमंत्री रावत ने जिला प्रशासन, एम.डी.डी.ए. एवं वन विभाग को निर्देश दिए कि देहरादून के सभी शिवालयों में रूद्राक्ष का पौधा जरूर लगाएं। उन्होंने वन विकास निगम को निर्देश दिए कि जहां भी वन विकास निगम के डिपो है, वे डिपो के चारों ओर काष्ठ उद्योग में सहायक वृक्ष लगाए। इसके साथ ही रामगंगा घाटी में गैरसैंण से भिकियासैंण तक तून के पेड़ लगाए।
इस अवसर पर पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, सचिव, खेल शैलेश बगोली, प्रमुख वन संरक्षक राजेन्द्र कुमार महाजन, डी.बी.एस. खाती सहित स्कूली बच्चे व अन्य उपस्थित थे।

स्पेशल कपोनेन्ट प्लान की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को मिलें

अल्मोड़ा के बहुउद्देशीय शिविर में अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष बाराकोटी ने अधिकारियों को दियें निर्देश
अल्मोड़ा।
अनुसूचित जाति के लोगों हेतु राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाया जाये, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नही की जायेगी। यह बात अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष राजेन्द्र बाराकोटी ने मजखाली मे आयोजित एक बहुउद्देशीय शिविर में कही।
अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष राजेन्द्र बाराकोटी ने कहा कि स्पेशल कपोनेन्ट प्लान के अन्तर्गत जो भी योजनायें संचालित की जाती है उसका लाभ पात्र लोगों को मिले इसका ध्यान रखना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे अनेक निर्धन लोगों के राशन कार्ड आन-लाइन नहीं हो पा रहे है इस पर जिला प्रशासन को ध्यान देना होगा, साथ ही आधार कार्ड बनाने मंे भी जो समस्यायें आ रही है इसके समाधान के लिये भी जिला प्रशासन को भी ठोस पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि जो विभाग बहुउद्देशीय शिविर में अनुपस्थित है उनका स्पष्टीकरण लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित पेंशन योजनाओं का लाभ अधिकाधिक लोगों को मिले इसके लिये समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर इस सुविधा से वंचित लोगों को चिन्हित कर इस योजना का लाभ दिलाना होगा। उन्होंने कहा कि पेयजल, जल संस्थान से जुडे अधिकारी इस बात का ध्यान रखेंगे कि स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के अन्तर्गत संचालित पेयजल योजनाओं का कार्य किस स्तर पर है उसका भी ध्यान रखेंगे।
इस बहुउद्देशीय शिविर में १०१ शिकायतें प्राप्त हुई अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। जिनमें पूर्ति, समाज कल्याण, लोनिवि, स्वजल, विद्युत आदि विभागों की थी। इस दौरान समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेशन के ३०, विधवा पेंशन के १० फार्म भरें गये साथ ही विभाग द्वारा जरूरतमंदो को ३ बैशाखी, २ व्हील चीयर, २ लाठी, १ कॉन की मशीन भी वितरित की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ८ विकलांग प्रमाण पत्र सहित १०० लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और दवाईयॉ भी वितरित की गई। शिविर में ५ आधार कार्ड बनाये गये। शिविर मे राजस्व, पूर्ति, कृषि, उद्यान, समाज कल्याण, रेशम, सहकारिता, पशुपालन आदि विभागों के स्टाल भी लगाये गये। उपाध्यक्ष ने कृषि विभाग व उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि ग्रामीण क्षेत्रों मंे काश्तकारों के बीच जाकर उनकी समस्या का निराकरण करना सुनिश्चित करें। शिक्षा के अधिकारियें को निर्देश दिये कि अनुसूचित जाति वर्ग के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति समय से उन्हें पहुॅच रही या नही के साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत विद्यालयों में छात्रों को प्रवेश मिल रहा है या नहीं इसका भी ध्यान रखें।
इसके अलावा विद्युत विभाग के अधिकारी अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र जो विद्युत सुविधा से वंचित है उन क्षेत्रों में विद्युत सुविधा बहाल करें। निर्माण विभाग के अधिकारी इस बात का ध्यान रखेगे कि अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों को सड़कों से अधिकाधिक मात्रा में जोड़ा जायें।
इस अवसर पर महामंत्री जिला कांग्रेस कमेटी दिनेश पिल्खवाल, हवालबाग ब्लाक अध्यक्ष गोपाल खोलिया, नारायण सिंह अधिकारी, प्रमोद कुमार, नन्दन राम, राजेन्द्र नाथ गोस्वामी, संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत विनीत कुमार, परियोजना निदेशक डी०डी० पंत, जिला विकास अधिकारी मो० असलम, जिला समाज कल्याण अधिकारी राजीव नयन तिवारी सहित समस्त विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

विस्थापितो की समस्या को दरकिनार कर रही सरकार

ऋषिकेश।
आज देश के विकास का प्रतीक बना टिहरी बांध में 16 वर्ष पहले गोदी, सिरांई, माली देवल, उपूं, छाम, गिरांणी, लम्पोखरी, डोबरा, डोबरा प्लास, असेना, बड़कोट, क्यारी, पिनार्स नाम की 12 ग्रामसभा हुआ करती थी जो कि आज बढ़कर 15 ग्राम सभाएं हो चुकी है, लेकिन विकास के प्रतीक टिहरी बांध में अपनी भूमि देने के बाद पुर्नवास विभाग नई टिहरी द्वारा ऋषिकेश के पशुलोक, आमबाग और श्यामपुर क्षेत्र की वन भूमि पर बसाए गए 3000 परिवारों को आज 16 साल बाद भी अपने भूमिधरी अधिकार नही मिल पाया है।
अपने घर, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को त्याग कर ऋषिकेश में बसे ग्रामीणों को भूमिधरी अधिकार न मिल पाने के कारण, इनके स्थाई निवास सहित अन्य कोई प्रमाण पत्र नही बन पाते है। इन्हे जमीन की जमानत पर बैक लोन भी नही मिल सकता है। कारण यह कि तब पुर्नवास विभाग ने इस विस्थापितों को वन विभाग की भूमि पर बसाया गया था जिसके कारण आज तक ग्रामीणों को भूमिधरी का अधिकार नही मिल पाया है।
ऋषिकेश के पशुलोक, आमबाग और श्यामपुर क्षेत्र में टिहरी विस्तापितों के 3000 से अधिक परिवार रहते है जो आज तक ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत और निगर निकाय के चुनावों से वंचित रहे है इन लोगों को केवल लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार है, चुनाव से पूर्व दो मुख्यमंत्री तक यहां आए और राजस्व ग्राम बनाने का वादा किया, लेकिन चुनावी जुमला होने के कारण वादे भूला दिये गये। ऐसे में अब ग्रामीणों ने आन्दोलन शुरू कर दिया है, सामुदायिक भवन में ग्रामीणों का धरना जारी है यही नही नेताओं के वादों से तंग हो चुके ग्रामीणों ने अब आने वाले विधानसभा चुनाव के बहिस्कार की चेतावनी तक दे डाली है, वही ऋषिकेश तहसील प्रशासन का कहना है कि राजस्व ग्राम का प्रस्ताव तहसील द्वारा बहुत पहले ही शासन को भेजा जा चुका है जिस पर शासन कुण्डली मार कर बैठा है।