उत्कृष्ट सेवा योगदान सम्मान से एम्स ऋषिकेश को सीएम ने किया सम्मानित

उत्तराखंड सरकार की ओर से आयोजित समारोह में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को अटल आयुष्मान योजनाध्आयुष्मान भारत योजना के सफल संचालन के लिए उत्कृष्ट सेवा योगदान सम्मान से नवाजा गया है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा की और संस्थान को आगे भी मरीजों की सेवा के लिए इसी तरह से सतत प्रयास जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में राज्य सरकार की ओर से उत्कृष्ट सेवा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अटल आयुष्मान योजना के बेहतर ढंग से संचालन के लिए एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत को उत्कृष्ट सेवा योगदान पुरस्कार प्रदान किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एम्स ऋषिकेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। जो कि प्रशंसनीय कार्य है। उन्होंने कहा ​कि जन स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए यदि एम्स प्रशासन की ओर से कभी कोई परामर्श अथवा योजना का प्रस्ताव दिया जाता है तो राज्य सरकार उस पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करेगी और उसके क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।

इस अवसर पर एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने अटल आयुष्मान योजना के रूप में उत्तराखंड के लोगों को हैल्थ इंश्योरेंस प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया, कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवा की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने जनस्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता के साथ इस तरह के प्रगतिशील कदम उठाने के लिए मुख्यमंत्री व सरकार को बधाई दी। कहा ​कि देश के अन्य राज्यों को भी जनस्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मामले में उत्तराखंड सरकार का अनुसरण करना चाहिए। बताया कि किसी भी देश की जीडीपी वहां के लोगों के हैल्थ स्टेटस पर निर्भर होती है। लिहाजा एम्स स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है।

निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत उपचार कराने के लिए एम्स आने वाले मरीजों को संस्थान द्वारा हरसंभव सहयोग किया जाता है,जिससे मरीजों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ मिल सके।

गौरतलब है कि संस्थान में अब तक आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कुल 35,229 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। जिसमें अटल आयुष्मान योजना के तहत 28,911 मरीजों और आयुष्मान भारत योजना में 6,318 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। समारोह में एम्स के आयुष्मान भारत योजना के प्रभारी डा. अरुण गोयल, डा. पूर्वी कुलश्रेष्ठा आदि मौजूद थे।

एम्स ऋषिकेश में अब कराएं बिना सर्जरी के पथरी का उपचार

पथरी स्टोन की समस्या से जूझ रहे रोगियों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश की ओर से अच्छी खबर है। संस्थान में अब बिना सर्जरी के भी गुर्दे की पथरी का इलाज संभव हो सकेगा। एम्स में अति अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित इस सुविधा का विस्तार करते हुए एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर स्थापित कर सेवाओं की शुरुआत कर दी गई है। बताया गया है कि यह उपचार आयुष्मान भारत योजना में शामिल है।

लगातार आधुनिकतम तकनीकियों और मेडिकल सुविधाओं में इजाफा कर रहे एम्स ऋषिकेश ने यूरोलाॅजी विभाग में अति आधुनिक मशीनों को स्थापित कर मरीजों की सुविधा के मद्देनजर यूरोलाॅजिकल सेवाओं में विस्तार किया है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना एम्स की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर में बिना सर्जरी किए अथवा बिना चीरा लगाए गुर्दे की पथरी के उपचार की सुविधा शुरू कर दी गई है। लिहाजा अब एम्स अस्पताल में उपलब्ध नई तकनीक और सुविधाओं से पथरी तोड़ने के लिए मरीज को बेहोश करने की आवश्यकता नहीं होगी। बताया कि उच्च तकनीक आधारित इस नई सुविधा के शुरू होने से गुर्दे की पथरी का इलाज कराने वाले मरीज को उसी दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस सेंटर के वीडियो यूरोडायनेमिक यूनिट में यूरिन की रुकावट संबंधी सभी तरह के परीक्षण आसानी से हो सकेंगे और इस प्रक्रिया में मरीज को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

संस्थान के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डाॅ. अंकुर मित्तल ने इस बाबत बताया कि एडवांस यूरोलाॅजी सेन्टर एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इस केंद्र में यूरोलाॅजी से संबंधित सभी तरह की अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और सर्जिकल की सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि इस नए केंद्र में अतिरिक्त काॅर्पोरल शाॅक वेव लिथोट्रिप्सी सुविधा उपलब्ध है। जिससे किडनी में स्थित अधिकतम डेढ़ सेमी. आकार की पथरी को बिना ऑपरेशन के तोड़ा जा सकता है। यह तकनीक बहुत ही सटीक और सुविधाजनक है।
डा. मित्तल ने बताया कि इससे मूत्र की पथरी को भी आसानी से हटाया जा सकता है। इस तकनीक से रोगी को बेहोश करने के लिए एनेस्थीसिया देने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। ईएसडब्ल्यूएल शाॅक वेव उत्पन्न करके मूत्र में स्थित पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है जो मूत्र मार्ग से आसानी से बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने बताया कि एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर में आधुनिक व नवीनतम उच्च तकनीक वाली डोर्नियर डेल्टा-2 मशीन लगाई गई है। साथ ही यहां मूत्र पथ की बीमारियों की जांच के लिए यूरोडायनेमिक्स परीक्षण की सुविधा के अलावा एडवांस वीडियो और एंबुलेटरी यूरोडायनामिक्स सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

इस अवसर पर डीन एकेडेमिक प्रोफेसद मनोज गुप्ता, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. लतिका मोहन,डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, आईबीसीसी की प्रमुख वरिष्ठ सर्जन डा. बीना रवि, डा. मधुर उनियाल, यूरोलाॅजी विभाग के प्रोफेसर एके मंडल, डा. विकास पंवार, डा. सुनील कुमार, डा. शेंकी सिंह, डा. रूद्रा आदि मौजूद थे।

यह हैं एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर की विशेषताएं
सेंटर में एक्स-रे, मिक्ट्युरेटिंग सिस्टोयूरेथोग्राम (एमसीयूजी), रेट्रोग्रेड यूरेथ्रोग्राम (आरयूजी), नेफ्रोस्टोग्राम, अल्ट्रासाउंड, ट्रांस-रेक्टल अल्ट्रासाउंड (टीआरयूएस) गाइडेड प्रोस्टेट बायोप्सी तथा इमेज गाइडेड थैराप्यूटिक प्रक्रियाओं की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए यहां नवीनतम इमेजिंग उपकरण, अल्ट्रासाउंड मशीन व सी-आर्म फ्लोरोस्कोपी मशीनें स्थापित की गई हैं।

इस तरह होगा उपचार आसान
यह मशीनें गुर्दे, मूत्राशय, मूत्रमार्ग और प्रोस्टेट में किसी भी मूत्र संबंधी विकार का पता लगा सकती हैं। जिससे उपचार करने में आसानी होती है और मरीज को आईपीडी में भर्ती किए बिना सभी आपातकालीन प्रक्रियाओं को डे-केयर में ही किया जा सकता है। इस सेंटर में एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों की दिक्कतें कम होंगी और उनका समय भी बचेगा। निकट भविष्य में यह केंद्र यूरोलॉजी के लिए नैदानिक सेवाएं प्रदान करने में सहायक होगा। एडवांस यूरोलाॅजी सेंटर में सेवाएं शुरू होने से मूत्र संबंधी विकारों के इलाज के लिए किसी भी मरीज को उत्तराखंड से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

एम्स ऋषिकेशः में अब ’स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक’ की सुविधा भी उपलब्ध

उत्तराखंड के युवाओं और खेल प्रतिभाओं के लिए अच्छी खबर है। स्पोर्टस इंजरी के दौरान चोटिल होने वाले खिलाड़ियों व युवाओं के उपचार की सुविधा के लिए अब एम्स ऋषिकेश में स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक की सुविधा शुरू कर दी गई है। संस्थान में उपलब्ध इस सुविधा का खासतौर से उन खिलाड़ियों को मिल सकेगा जो खेल के दौरान चोटिल अथवा गंभीर घायल हो जाते हैं।

राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, मगर अभी तक खेल आयोजनों में खिलाड़ियों द्वारा अपने प्रदर्शन के दौरान कईमर्तबा उनके घुटने, कंधे और कूल्हे के लीगामेंट्स, साकेट से संबंधित चोट लगने पर उन्हें उत्तराखंड में बेहतर इलाज नहीं मिल पाता था। वजह उत्तराखंड में अभी तक स्पोर्ट्स इंजरी के समुचित उपचार के लिए कोई विशेष अस्पताल अथवा क्लीनिक नहीं था और न ही अभी तक यहां स्पोर्ट्स इंजरी के समुचित इलाज की ही सुविधा थी। मगर अब एम्स ऋषिकेश में यह सुविधा शुरू हो गई है। जिसके तहत प्रथम चरण में संस्थान में ’विशेष स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक’ का संचालन शुरू किया गया है। यहां स्पष्ट कर दें कि विभिन्न खेलों में प्रदर्शन के दौरान या किसी वाहन दुर्घटना में घायल लोगों के घुटने, कंधे और कूल्हे के लीगामेंट्स अथवा साकेट का इलाज एम्स ऋषिकेश में पहले से उपलब्ध है। जबकि इसी कड़ी में अब संस्थान द्वारा खिलाड़ियों से जुड़े ऐसे मामलों के मद्देनजर एक स्पेशल ’स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक’ की शुरुआत की गई है।

निदेशक एम्स प्रो. रविकांत ने इस बाबत बताया कि खिलाड़ियों और युवाओं में इस तरह की समस्याएं आम होती जा रही हैं। लिहाजा इस दिक्कतों को देखते हुए एम्स में शीघ्र ही ’स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर’ खोला जाना प्रस्तावित है। जिसके अंतर्गत पहले चरण में स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक की सुविधा शुरू की गई है। कि स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक में मरीजों के उपचार के लिए ट्रामा सर्जरी विभाग, ऑर्थोपेडिक्स विभाग और फिजिकल मेडिकल विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त टीम उपलब्ध कराई गई है। जिससे स्पोर्ट्स इंजरी से ग्रसित राज्य के खिलाड़ियों और युवाओं का एम्स ऋषिकेश में ही समुचित इलाज किया जा सके।

निदेशक प्रो. रवि कांत जी के अनुसार उत्तराखंड एवं अन्य राज्यों के आर्मी ट्रेनिंग सेंटर और स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर के सहयोग से सेना के जवानों, खिलाड़ियों तथा अन्य लोगों को इस केंद्र में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

इस बाबत विस्तृत जानकारी देते हुए ट्रामा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद कमर आजम ने बताया कि स्पोर्ट्स इंजरी को लिगामेन्ट्स इंजरी भी कहा जाता है। लिगामेन्ट्स इंजरी के दौरान व्यक्ति का घुटना टूट जाना अथवा उसके घुटनों के जोड़ों का संतुलन बिगड़ जाने की समस्या प्रमुख है। इसके अलावा कई बार घुटनों के ज्वाइन्ट्स भी अपनी जगह से खिसक जाते हैं। यह जोड़ एक हड्डी को दूसरी हड्डी से आपस में जोड़ने का काम करते हैं। मगर एक्सरे या सीटी स्कैन में इसका पता नहीं चल पाता है।

प्रो. आजम ने बताया कि जब मरीज की हड्डी घिस जाती है तो बाद में उसे उस जगह दर्द होने लगता है। स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक में ऐसे ही लोगों का इलाज किया जाएगा। संबंधित रोगी स्पोर्ट्स इंजरी की ओपीडी में अपनी जांच करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस स्पेशल क्लिनिक में पंजीकरण की सुविधा के लिए शीघ्र ही एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्पोर्ट्स इंजरी के मरीजों का इलाज संस्थान में पूर्व से ही किया जा रहा है। लेकिन सेवाओं के विस्तारीकरण के तहत अब विभाग द्वारा विशेष स्पोर्ट्स इंजरी क्लीनिक शुरू किया गया है। यह क्लीनिक दैनिकतौर पर ओपीडी के समय संचालित होगा। उन्होंने बताया कि साईकिलिंग, स्केटिंग, क्रिकेट, फुटबॉल, वाॅलीबॉल, बास्केटबॉल आदि खेलों में जिन खिलाड़ियों का घुटना अथवा कोहनी टूट जाती है, उन्हें इस सुविधा से विशेष लाभ होगा। खिलाड़ियों के लिए गेट ट्रेनिंग लैब अथवा रोबोटिक रिहैब मशीन भी एम्स में उपलब्ध है। प्रो. आजम ने बताया कि बीते वर्ष 2020 में एम्स के ट्रामा विभाग में 438 लोगों की लिगामेन्ट्स सर्जरी की जा चुकी है। जबकि पिछले ढाई साल के दौरान लिगामेन्ट्स इंजरी वाले लगभग 2000 लोगों का उपचार किया गया है। जिनमें ज्यादातर मामले बाइक से गिरकर अथवा फिसलकर घुटना टूट जाने की शिकायत वाले लोगों के रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के लिए यह उपचार योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।

स्पोर्ट्स लिगामेन्ट्स इंजरी के लक्षण-
लिगामेन्ट्स इंजरी होने पर एक हड्डी को दूसरी हड्डी से जोड़ने वाले घुटने का जोड़ टूट जाता है। जिससे चलते समय पैरों का बेलेंस बिगड़ना, व्यक्ति का संतुलित होकर न चल पाना, कंधा दर्द करना, सीढ़ी चढ़ने-उतरने में दिक्कत होना, पैरों से लचक कर चलना, हाथ का ठीक तरह से ऊपर न उठना और काम करते हुए हड्डी में दर्द रहना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

पोषण जागरूकता कार्यक्रम के तहत मरीज व तीमारदारों को दी स्वस्थ्य दिनचर्या की जानकारी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ओपीडी में मरीजों के लिए स्वस्थ खानपान तथा स्वस्थ जीवन के लिए पोषण जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान की आहार एवं पोषण विशेषज्ञ द्वारा मरीजों व उनके तीमारदारों को सही खानपान और दिनचर्या की जानकारी दी गई।
निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि आहार एवं पोषण का महत्व हमारी सामान्य जीवनशैली में कितना अहम होता है। कहा कि सही पोषण नहीं मिलने पर होने वाले रोगों जैसे चयापचय (मैटावोलिज्म) रोगों की रोकथाम में सही पोषण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

संस्थान की ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए डीन एकेडमिक एवं रेडिएशन ओंकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनोज गुप्ता की देखरेख में स्वस्थ जीवन के लिए पोषण जनजागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ने बताया कि स्वस्थ्य भोजन से ही हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है तथा सही भोजन से ही हमारा शारीरिक तथा आर्थिक विकास होता है। कार्यक्रम में एम्स फैकल्टी तथा न्यूट्रिशन सोसायटी ऑफ इंडिया की सदस्य प्रो. सत्यवती राणा, डॉ. किरण मीणा व डाॅ. अनु अग्रवाल ने भी विशेषरूप से प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर डिपार्टमेंट ऑफ रेडिएशन ओंकोलॉजी की आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डा. अनु अग्रवाल ने ओपीडी में आए मरीजों तथा उनके तीमारदारों को पोषण तथा जीवनशैली को लेकर जागरुक किया। उन्होंने मरीजों को खाद्य पदार्थों के समूहों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि हमारे खाने के साथ खाद्य समूहों को किस प्रकार से अपने प्रतिदिन के आहार में लेना चाहिए। जिसमें उन्होंने खान समूह जैसे अनाज, दाल फल सब्जियों घी तेल चीनी तथा मेवे के अलग अलग प्रकार के बारे में बताया कि किस तरह से इन सभी खाद्य पदार्थों के सभी प्रकार को अपने आहार में सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर उन्होंने खाद्य समूह के बाबत बताया कि इन खाद्य समूहों के उपयोग से किस प्रकार से हम अपने शरीर में सामान्य पोषण तत्वों की कमी को पूरा कर सकते हैं। इस मौक पर उन्होंने भोजन से मिलने वाले पोषण तत्व जैसे कार्बोहाईड्रेट्स, प्रोटीन्स, रेशे, पानी तथा सुक्ष्म पोषण तत्व जैसे बिटामिन्स, खनिज पदार्थ की उपयोगिता के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।
सही जीवनशैली के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने मरीजों को बताया कि सुबह सोकर उठने से लेकर रात्रि विश्राम से पहले तक किस तरह से अपने खाने को छोटे छोटे मील्स में विभाजित करें तथा भोजन के बाद की जाने वाली क्रियाओं वॉकिंग आदि पर भी चर्चा की, ताकि मरीज मोटापे तथा भविष्य में होने वाली चयापचय संबंधी बीमारियों से अपनेआप को सुरक्षित कर सके। साथ ही मरीजों को यह भी बताया गया ​कि घर से बाहर निकलते वक्त, अस्पताल आते वक्त अथा अस्पताल में कुछ दिन रुकने की स्थिति में किस तरह का आहार को व्यवस्थित करना चाहिए जिससे हमारे शरीर को सभी तरह के पोषण तत्व मिल सकें।

एम्स में प्रेशर इंजरी एविडेंस बेस्ड नर्सिंग एप्रोच विषय पर हुई कार्यशाला आयोजित

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में डिपार्टमेंट ऑफ नर्सिंग सर्विसेस की ओर से प्रेशर इंजरी एविडेंस बेस्ड नर्सिंग एप्रोच विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेशर इंजरी की तत्काल पहचान, बचाव व उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि प्रेशर इंजरी मैनेजमेंट को अंतरराष्ट्रीय स्तर की दक्षता लाने के लिए एम्स ऋषिकेश प्रयासरत है, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मानक के तहत संस्थान में नर्सिंग ऑफिसर तैयार किए जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश से दक्ष नर्सेस निकट भविष्य में देश ही नहीं दुनियाभर में मरीजों को बेहतर नर्सिंग सेवाएं देंगे।
संस्थान में शुक्रवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, डीएचए प्रो. यूबी मिश्रा व फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. वीके बस्तिया ने संयुक्तरूप से शुभारंभ किया।
डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि हॉस्पिटल में प्रेशर इंजरी मैनेजमेंट व ट्रीटमेंट में नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिसे संबंधित पेशे से जुड़े लोगों को ठीक से समझने की आवश्यकता है, वह तभी अस्पताल में आने वाले मरीजों की बेहतर चिकित्सा में मददगार साबित हो सकते हैं।
प्रो. यूबी मिश्रा ने प्रेशर इंजरी के इतिहास पर प्रकाश डाला, जिसमें उन्होंने इस दिशा में लगातार आ रहे बदलावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस कार्य में फ्लोरेंस नाईटेंगल के योगदान को भी याद किया।

इस अवसर पर संस्थान के पीएमआर विभाग की प्रोफेसर डा. राजलक्ष्मी अय्यर ने प्रेशर इंजरी ओवरव्यू के बारे में जानकारी दी। डिपार्टमेंट ऑफ बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी की डा. मधुबरी वाथुल्या ने प्रेशर इंजरी की ग्रेड क्लासिफिकेशन के बारे में बताया।

एएनएस कमलेश व वंदना ने एविडेंस बेस्ड नर्सिंग मैनेजमेंट के बाबत जानकारी दी। इस अवसर पर डा. अनुभा अग्रवाल, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. मनीष शर्मा, एएनएस पुष्पा, कल्पना, जितेंद्र, ज्योतिष, नर्सिंग ऑफिसर अज्जो उन्नीकृष्णन, पंकज पुनजोत आदि मौजूद थे।

14 वर्षीय किशोर के एम्स में चिकित्सकों की टीम ने बदले दिल के वाॅल्व

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने मार्फन सिंड्रोम से ग्रसित एक 14 वर्षीय किशोर के हार्ट के 3 वाल्व का ऑपरेशन कर उसे जीवनदान दिया है। निदेशक प्रो. रविकांत ने हाईरिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए ​चिकित्सकीय टीम की सराहना की है। कहा कि अस्पताल में मरीजों की सेवा के लिए ड्यूटी हावर्स के बाद भी जरुरत पड़ने पर वरिष्ठ चिकित्सकों का हरसंभव सहयोग मिलेगा।

गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश निवासी एक 14 वर्षीय किशोर जो कि मार्फन सिंड्रोम नामक जेनेटिक बीमारी से ग्रस्त था, इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति की लंबाई अत्यधिक रहती है साथ ही हाथ व पैरों की अंगुलियां औसत से कहीं अधिक लंबी होती हैं।

इस बीमारी में आंख में लैम्स का खिसकना एवं दिल के वाल्व का लीक होना या ऑर्टा नामक धमनी का फटना आम बात होती है जिससे किसी भी इंसान की मृत्यु भी हो सकती है। इस किशोर के दिल के 3 वॉल्व लीक कर रहे थे, बावजूद इसके समय रहते इलाज नहीं करवाने से उसका हार्ट फेल हो गया था। साथ ही उसका लीवर व गुर्दा भी फेल हो गया था,जिसकी वजह से उसके ऑपरेशन में अत्यधिक रिस्क बढ़ गया था। इन तमाम बीमारियों के कारण उसके पेट व पैरों में सूजन आ गई थी, साथ ही उसे पीलिया की शिकायत थी।

चिकित्सकों के अनुसार किशोर को ऑक्सीजन से भी सांस नहीं आ रही थी और उसकी छाती में पानी भर गया था। तमाम तरह की शारीरिक व्याधियों के बावजूद पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने अपनी टीम के साथ इस किशोर का इमरजेंसी ऑपरेशन किया,जिसमें उसके दो वाल्व बदले गए, जबकि उसके एक वॉल्व को रिपेयर किया गया। ऑपरेशन के दौरान किशोर के दिल में जमा खून के थक्के भी निकाले गए। सर्जरी के बाद मरीज को काफी समय तक आईसीयू में रखा गया और उसके बाद स्थिति थोड़ा सामान्य होने पर उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया जहां अब वह स्वस्थ है।

डा. अनीश के मुताबिक इस हाईरिस्क सर्जरी में मरीज की जान को अत्यधिक खतरा था, बावजूद इसके उसके जीवन की सुरक्षा के लिए वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ प्रोफेसर भानु दुग्गल, पी​डियाट्रिक कॉर्डियोलॉजिस्ट डा. यश श्रीवास्तव एवं कॉडियक ऐनेस्थिसिया डा. अजय मिश्रा की संयुक्त टीम द्वारा अथक प्रयासों से मरीज की जान बच पाई। उन्होंने बताया कि ऐसे जटिल कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने चिकित्सकीय टीम का हौंसला बढ़ाया।

एम्स में हाउस कीपिंग स्टाफ की महिला को लगा सर्वप्रथम टीका

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में कोविड19 टीकाकरण अभियान शुरू हो गया। इसके तहत पहले दिन करीब 100 हैल्थ केयर वर्करों को वैक्सीन लगाई गई।

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर में कोविड19 टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया। इसके साथ ही एम्स ऋषिकेश में निदेशक प्रो. रविकांत ने फीता काटकर संस्थान में टीकाकरण अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए सबसे पहला टीका एम्स के कोविड सेंटर में तैनात महिला हाउस कीपिंग स्टाफ मीना देवी को लगाया गया।

इस अवसर पर लोगों में कोविड19 वैक्सीन को लेकर चल रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत जी ने स्वयं दूसरा टीका व संस्थान के डीन प्रो. मनोज गुप्ता ने तीसरा टीका लगवाया।

इस अवसर पर निदेशक एम्स ने कहा कि चिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा अपने ही देश में तैयार की गई कोविड19 वैक्सीन को लेकर लोगों में चल रही तमाम भ्रांतियां फिजूल हैं। लिहाजा हमें टीकाकरण को लेकर किसी भी अवैज्ञानिक व तथ्यहींन बातों में नहीं आना चाहिए, वरन कोविड संक्रमण से बचाव व सुरक्षा के लिए टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दुनिया का सबसे बड़ा कोविड 19 टीकाकरण अभियान की शुरुआत कर दी गई है, जो कि निसंदेह जल्द ही सफलता का मुकाम हासिल करेगा और देशवासी कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी तरह से सुरक्षित रह सकेंगे।


निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि कोविड टीकाकरण अभियान के तहत दूसरी वैक्सीन 28 दिन के बाद लगेगी, लिहाजा तब तक हमें कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरतनी है। उन्होंने सभी को आगाह किया ​कि जब तक देशभर में शत- प्रतिशत लोगों को कोविड वैक्सीन नहीं लग जाती है, तब तक हमें एक दूसरे से दो गज की दूरी और मास्क है जरुरी नियम का अनिवार्यरूप से पालन करना होगा।
इस अवसर पर संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में शनिवार को कोविड वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू कर दिया गया है। जो लगभग 4 महीने तक चलेगा। उन्होंने बताया कि इसके तहत सबसे पहले कोविड एरिया में कार्य करने वाले चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ व सफाईकर्मियों को वैक्सीन लगाई जाएगी और इसके बाद संस्थान में कार्यरत अन्य कर्मचारियों का टीकाकरण किया जाएगा।
इस अवसर पर मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. लतिका मोहन, डीन हॉ​स्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा, कोविड टीकाकरण अभियान समिति की चेयरपर्सन प्रो. वर्तिका सक्सैना, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, डा. सोमप्रकाश बासू, डा. नवनीत कुमार बट्ट, डा. मधुर उनियाल, डा. पीके पांडा, डा. रवि गुप्ता, डा. वेंकटेश पाई, डा. योगेश बहुरूपी, डा. अजीत सिंह भदौरिया, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. महेंद्र सिंह, डा. रंजीता कुमारी, डा. मीनाक्षी खापरे, डा. अंकित अग्रवाल, डा. संतोष कुमार, डा. राजेश कुमार, डा. राकेश शर्मा, रजिस्ट्रार राजीव चैधरी, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, विधि अधिकारी प्रदीप चंद्र पांडेय आदि मौजूद थे

एम्स ऋषिकेश में आप भी कर सकते है अपने नेत्र का दान, डायल करें…

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में गतवर्ष 2020 में लाॅकडाउन के मद्देनजर स्थगित की गई नेत्रदान की सुविधा को फिर से शुरू कर दिया गया है। बीते अक्टूबर माह से अब तक एम्स के आई बैंक में 13 लोगों के संकल्प के तहत आंखें दान की गई हैं, जिनसे 19 लोगों का जीवन रोशन हुआ है।

मार्च 2020 में विश्वव्यापी कोविड19 महामारी के मद्देनजर देशभर में लाॅकडाउन के बाद एम्स ऋषिकेश के नेत्र कोष विभाग में काॅर्निया प्रत्यारोपण की प्रक्रिया भी स्थगित कर दी गई थी। यह सुविधा सितंबर 2020 महीने तक स्थगित रखी गई। मगर इसके बाद हालात सामान्य होने पर अक्टूबर माह से इसे फिर से शुरू कर दिया गया। तब से अब तक एम्स स्थित नेत्र विभाग के आई बैंक में 13 लोगों के नेत्रदान महादान के संकल्प के तहत आंखें दान कर 19 लोगों को जीवन ज्योति प्रदान की गई।

इस बाबत एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने अपने संदेश में बताया कि नेत्रदान करना सबसे महान कार्य है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान से किसी के अंधेरे जीवन को रोशन करने के समान कोई दूसरा महादान नहीं है। लिहाजा जो लोग अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेते हैं, वह जरुरतमंद व्यक्ति को नेत्र ज्योति देकर मृत्यु उपरांत भी अमर हो जाते हैं। निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में स्थापित आई बैंक में कोई भी व्यक्ति अपनी आंखें दान कर सकता है। इस प्रक्रिया में किसी भी उम्र तक का व्यक्ति प्रतिभाग कर नेत्र दान जैसे पुण्यकार्य का प्रतिभागी बन सकता है।

गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश में लोगों को नेत्र दान जैसे पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से नेत्र कोष आई बैंक की स्थापना 26 अगस्त 2019 को की गई थी। जिसमें लगभग डेढ़ वर्ष में एम्स आई बैंक के माध्यम से काॅर्निया प्रत्यारोपण के बाद 92 लोगों को जीवन ज्योति प्राप्त हो चुकी है। इस बाबत संस्थान के नेत्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीव मित्तल जी ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में काॅर्निया प्रत्यारोपण की सभी विश्वस्तरीय आधुनिकतम सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि आंखें दान करने के इच्छुक व्यक्ति अपने इस संकल्प को साकार करने के एम्स आई बैंक में सीधे संपर्क कर अथवा ’ऋषिकेश आई बैंक’ से ऑनलाइन जुड़कर इस महान कार्य में योगदान कर सकता है। डाॅ. मित्तल ने बताया कि संस्थान में कोविड19 महामारी की वजह से स्थगित रखी गई काॅर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा को अक्टूबर 2020 से फिर से बहाल कर दिया गया है। लिहाजा आंखें दान करने को इच्छुक व्यक्ति ऋषिकेश आई बैंक के 90685 63883 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एम्स संस्थान में संचालित काॅर्निया प्रत्यारोपण प्रक्रिया में कोविड19 गाइडलाइन का पूरा पालन करते हुए विशेष सावधानी बरती जा रही है।

एम्स ऋषिकेश में कोविड-19 वैक्सिनेशन की तैयारियां तेज, ड्राइ रन का हुआ आयोजन

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में कोविड19 वैक्सिनेशन की तैयारियों के मद्देनजर आज ड्राइ रन का आयोजन किया गया। इसके लिए संस्थान के सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की ओर से आयुष भवन में भारत सरकार के मानकों के अनुरूप वैक्सिनेशन सेंटर की संपूर्ण व्यवस्था की गई है। ड्राइ रन में एम्स के 25 चिकित्सकों, सिक्योरिटी व अन्य अधिकारियों, कर्मिचारियों ने प्रतिभाग किया। सेंटर में पहले चरण में कुल 5,632 लोगों का टीकाकरण किया जाएगा।
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत की देखरेख में 16 जनवरी से शुरू होने वाली कोविड19 वैक्सिनेशन प्रक्रिया के लिए संस्थान में सभी व्यवस्थाएं चाकचैबंद कर दी गई हैं। मंगलवार को एम्स के आयुष भवन में स्थापित कोविड वैक्सिनेशन सेंटर में ड्राइ रन का आयोजन किया गया। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से नियुक्त अपीडोमोलॉजिस्ट (महामारी विशेषज्ञ) डा. पीयूष आगस्टीन जी ने वैक्सिनेशन व्यवस्था व ड्राइ रन की संपूर्ण प्रक्रिया का निरीक्षण किया व सराहना की।
एम्स की कम्यूनिटी एंड फेमिली मेडिसिन विभागाध्यक्ष व वैक्सिनेशन कमेटी की चेयरपर्सन प्रो. वर्तिका सक्सेना जी ने बताया कि संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी के निर्देशन में भारत सरकार की गाइड लाइन के तहत कोविड 19 वैक्सिनेशन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं, जिसके तहत मंगलवार को ड्राइ रन का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी का कोविन एप में वैरिफिकेशन व वैक्सिनेशन किया जाएगा, इसके बाद प्रत्येक व्यक्ति को 30 मिनट तक आब्जर्वेशन में रखा जाएगा, जिससे किसी भी व्यक्ति को टीकाकरण के बाद किसी प्रकार के साइड इफेक्ट होने की स्थिति में तत्काल आपात आवश्यक उपचार दिया जा सके।

उन्होंने बताया कि ऑब्जर्वेशन के दौरान किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए वैक्सिनेशन सेंटर में ही एईएफआई सेंटर भी स्थापित किया गया है। जिसका संचालन आपात चिकित्सा क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट की देखरेख में किया जाएगा।

बताया गया है कि कोविड वैक्सिनेशन सेंटर में लोगों के लिए दो पतीक्षालय व दो टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं। सेंटर में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक औसतन 100 से 200 लोगों के टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। एम्स स्थित वैक्सिनेशन सेंटर में पहले चरण में 5,632 ​चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसरों, तकनीकि सहायकों व अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों का टीकाकरण किया जाएगा।

इस अवसर पर टीकाकरण समिति के सदस्य सचिव डा. योगेश बहुरुपी, सीएफएम विभाग के डा. महेंद्र सिंह, डा. प्रदीप अग्रवाल, डा. संतोष कुमार,डा. हिदायत, डा. मीनाक्षी आदि मौजूद थे।

एम्स ऋषिकेश की ओपीडी में कोविडकाल में पहुंचे ढाई लाख मरीज

कोविड19 के विश्वव्यापी संक्रमण के मद्देनजर गतवर्ष 2020 में लाॅकडाउन के बावजूद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान म्स ऋषिकेश ने ढाई लाख से अधिक मरीजों को कोविड उपचार, आपात व ओपीडी सुविधाएं प्रदान की हैं। जबकि इतना ही नहीं इस दौरान 29 हजार से अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनका समुचित उपचार किया गया।

वर्ष 2020 के मार्च महीने में देशभर लाॅकडाउन के बाद हर कोई कोरोना संक्रमित लोगों से दूर भाग रहा था। लोगों के जेहन में विश्वव्यापी महामारी कोविड19 के संक्रमण का खौफ इस कदर बन गया था कि राज्य के अधिकांश अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी बंद कर दी गई थी। इन चुनौतियों के बावजूद एम्स ऋषिकेश ने अपनी ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को मरीजों की सुविधा के लिए निर्बाधरूप से जारी रखा व आपातकाल में अपना फर्ज निभाते हुए संस्थान के चिकित्सकों व नर्सिंग व अन्य स्टाफ ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मरीजों की सेवा की।

इस बाबत संस्थान के डीन हॉ​स्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि कोविडकाल में उपचार की प्राथमिकता कोरोना के मरीजों के लिए निर्धारित की गई थी, साथ ही अनिवार्य और आपात स्थिति के मरीजों का इलाज भी एम्स में 24 घंटे जारी रखा गया। उन्होंने बताया कि गत वर्ष दिसंबर – 2020 तक ढाई लाख मरीज एम्स की ओपीडी में पहुंचे। इनमें से 29 हजार 299 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनका समुचित उपचार किया गया। जबकि कोरोनाकाल की इसी समयाव​धि में विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 10 हजार मरीजों की मेजर सर्जनी भी सफलतापूर्वक की गई। 4500 मरीजों की डायलिसिस व 4000 रोगियों की कीमो थैरेपी दी गई।
गौरतलब है कि कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश को लेबल 3 श्रेणी में रिजर्व रखा गया था। इस श्रेणी में कोविड संक्रमित उन्हीं मरीजों का उपचार किया जाता है, जो गंभीर अवस्था के होते हैं व जिन्हें ऑक्सीजन, वेन्टिलेटर या आईसीयू में रखे जाने की जरुरत पड़ती है। डीएचए के अनुसार एम्स की लैब में अब तक 1 लाख 20 हजार कोविड सैंपलों की जांच व कोविड स्क्रीनिंग एरिया में अभी तक 46 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें से ढाई हजार कोविड मरीजों का उपचार कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एम्स में कोरोना के 92 मरीजों का उपचार चल रहा है।