यूपी की किशोरी की एम्स ऋषिकेश में हुई सफल हार्ट सर्जरी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश निवासी एक 12 वर्षीय किशोरी के दिल की जन्मजात गंभीर बीमारी का सफल ऑपरेशन कर उत्तराखंड में चिकित्सा क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।

बताया गया है कि इस किशोरी के दिल में जन्म से छेद था, जिससे उसका शरीर अक्सर नीला पड़ जाता था। अपने शहर के आसपास उच्च चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव के चलते अब तक किशोरी के माता-पिता उसका उपचार नहीं करा पा रहे थे, लिहाजा इस किशोरी को उम्र बढ़ने के साथ साथ दिल की जन्मजात बीमारी के कारण सांस लेने में कठिनाई होने लगी।

इसके बाद किशोरी के परिजनों ने उसके समुचित उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश की ओर रुख किया। एम्स अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन से पता चला कि किशोरी को डीओआरवी, पीएस नामक हृदय की बीमारी है,जिसके लिए ऑपरेशन की आवश्यकता है। इसके साथ ही उसके शरीर में कुछ ऐसी नसें भी थी, जिन्हें ऑपरेशन से पहले एन्जियोग्राफी से बंद करना था।

संस्थान की हृदय रोग विभागाध्यक्ष डा. भानु दुग्गल एवं डा. यश श्रीवास्तव ने एन्जियोग्राफी के माध्यम से किशोरी की इन नसों में छल्ला डाला, जिसके बाद सीटीवीएस विभाग के पीडियाट्रिक कॉर्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने उसकी जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

चिकित्सकीय टीम की इस सफलता के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने उन्हें प्रोत्साहित किया, साथ ही निदेशक प्रो. रवि कांत ने चिकित्सकों को भविष्य में भी इसी तरह मरीजों की मदद करने के साथ साथ सुपरस्पेशलिटी सुविधाओं के सुचारू संचालन का भरोसा दिलाया। डा. अनीश ने बताया ​कि​ सर्जरी के बाद एनेस्थेटिस्ट डा. अजेय मिश्रा की टीम ने किशोरी का भली प्रकार से खयाल रखा। किशोरी को अब पूर्णरूप से स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

क्या है डीओआरवी एवं पीएस बीमारी यह एक जन्मजात हृदय की बीमारी है,जिसमें स्वच्छ व गंदे खून की नसें एक साथ एक ही खाने भाग से निकलती हैं तथा फेफड़े की नस में रुकावट रहती है। जिसके कारण बच्चे का शरीर नीला पड़ता है, साथ ही उसे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। इस बीमारी से बच्चा कभी कभी बेहोश भी हो सकता है। इस बीमारी का पता इको और सीटी स्कैन से चल पाता है। जिसका उपचार ऑपरेशन से ही संभव है। इस बीमारी की जटिलता के हिसाब से बीमारी से संबंधित कई तरह से सर्जरी की जाती है। इस बीमारी के प्रति लापरवाही व बिना इलाज के जान जाने का खतरा होता है।

एम्स में दूसरे चरण का टीकाकरण शुरू, निदेशक सहित डीन एकेडमिक ने लगाया टीका

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान का दूसरा चरण सोमवार को शुरू हो गया। दूसरे चरण के अभियान के पहले दिन एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत, डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता समेत कई अन्य लोगों ने कोरोना टीकाकरण कराया।
निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि टीकाकरण के तहत दूसरी डोज लगने के बाद भी कोरोना का खतरा अभी अगले 2 महीने तक और रह सकता है। लिहाजा किसी को भी इसको लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

रविवार को भारत सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के बाद सोमवार से एम्स, ऋषिकेश में कोविड वैक्सीन टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू कर दिया गया। संस्थान के आयुष भवन स्थित कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में सोमवार को अन्य लोगों के साथ साथ एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत और डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने भी कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाई।

बताया कि दूसरी डोज लगाने के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन लगने पर कुछ सामान्य दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन यह वैक्सीन लगने के बाद के सामान्य लक्षण होते हैं। लिहाजा इनसे घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरी डोज लगने के बाद भी हमें कोरोना से बचाव के नियमों को नहीं भूलना है। उन्होंने कोविड संक्रमण से बचाव के लिए 5 बातों को विशेष ध्यान रखने और अनिवार्यरूप से इनका पालन करने की बात कही। कहा कि अगले 2 महीने तक दूसरी डोज लग जाने के बाद भी हमें सही ढंग से मास्क का दैनिक तौर से उपयोग करना होगा। इसके अलावा हाथों को साबुन से ठीक तरह से धोना, एक-दूसरे से 2 गज की दूरी बनाए रखना, किसी प्रकार के लक्षण दिखने पर स्वयं को अन्य लोगों से अलग करना तथा लक्षण दिखने पर तत्काल जांच कराना बहुत जरूरी है।

दूसरी डोज लगने के बाद संस्थान के डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि टीकाकरण ही कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और लोगों को चाहिए कि किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। उन्होंने कहा कि देश से कोरोना के खात्मे के लिए वैक्सीन लगवाना ही एकमात्र उपाय है। इस अवसर पर डीएमएस डा. अनुभा अग्रवाल, डा. रूवी गुप्ता, डा. मधुर उनियाल, डा. शैलेश, डा. देवेंद्र त्रिपाठी आदि फैकल्टी सदस्यों ने टीके लगवाए।

महाकुंभ के दौरान आपात स्थिति के लिए एम्स ऋषिकेश का ट्राॅमा सेंटर रिजर्व

कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को मेडिकल सुविधा प्रदान करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश पूरी तरह से तैयार है। संस्थान की ओर से चिकित्सकों की टीम भी हरिद्वार में तैनात की जाएगी। इसके अलावा आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्स के ट्राॅमा सेंटर को आरक्षित रखा गया है। जिसमें श्रद्धालुओं के उपचार के लिए ट्राॅमा सेंटर में 24 घंटे मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

निदेशक प्रो. रवि कांत की देखरेख में महाकुंभ में स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्थान की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आगामी 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा और उसके बाद के प्रमुख स्नान पर्वों पर हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। लिहाजा इसके मद्देनजर एम्स ऋषिकेश अस्पताल प्रशासन ने संपूर्ण कुंभमेला अवधि तक हरिद्वार में ही चिकित्सकों की टीम तैनात करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए संस्थान के चि​कित्सकीय दल हरिद्वार स्थित बैरागी कैंप में बनाए जा रहे मेला अस्पताल में तैनात रहेंगे।
मेलाकाल में किसी प्रकार की अप्रिय घटना, भगदड़ व श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी अन्य आपात स्थितियों के दौरान चिकित्सकीय दल द्वारा मौके पर ही पेशेंट का प्राथमिक उपचार कर ग्रीन काॅरीडोर के माध्यम से उन्हें अविलंब एम्स ऋषिकेश के ट्राॅमा सेंटर भेजा जाएगा।

उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में देश-दुनिया से शिरकत करने वाले श्रद्धालुओं को वर्ल्डक्लास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स ऋषिकेश पूरी तरह से राज्य सरकार का सहयोग करेगा। मेले के दृष्टिगत की गई तमाम तैयारियों के बाबत संस्थान के डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रोफेसर यूबी मिश्रा ने बताया कि कुंभ मेले के मद्देनजर एम्स के ट्राॅमा सेंटर में 12 बेड का आईसीयू तैयार किया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए ट्राॅमा सेंटर में एक डिजास्टर वार्ड भी बनाया गया है। इस वार्ड में कुंभ मेले के श्रद्धालुओं के उपचार केलिए 22 बेड रिजर्व रखे गए हैं।

उन्होंने बताया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डिजास्टर वार्ड के अलावा ट्राॅमा सेंटर के अतिरिक्त आईसीयू को भी उपयोग में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुंभ के लिए विशेषतौर से चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कई टीमें गठित की जा चुकी हैं। जो कि कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए हर समय हरिद्वार मेलाक्षेत्र में उपलब्ध रहेंगी।

एवीएसडी नामक बीमारी की एम्स में हुई सफल सर्जरी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सक इन दिनों छोटे बच्चों व युवाओं के दिल के जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं। विभाग में ए.वी.एस.डी नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित तीन मरीजों की सफल सर्जरी पर एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने चिकित्सकों की प्रशंसा की और उन्हें और मरीजों की सेवा और बेहतर ढंग से करने के लिए प्रोत्साहित किया। निदेशक एम्स ने कहा कि संस्थान में मरीजों को वर्ल्डक्लास स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें किसी भी मर्ज के इलाज के लिए उत्तराखंड से बाहर के अस्पतालों में अपने उपचार के लिए परेशान नहीं होना पड़े।
एम्स ऋषिकेश में सहारनपुर, उत्तरप्रदेश निवासी एक 20 वर्षीय युवक जो कि 20 साल से दिल की जन्मजात गंभीर बीमारी ए.वी.एस.डी से जूझ रहा था, मगर आसपास उच्चतम मेडिकल सुविधाओं के अभाव के चलते इलाज नहीं करा पा रहा था। उक्त मरीज की ए.वी.एस.डी नामक बीमारी का एम्स के सीटीवीएस विभाग में सफलतापूर्वक हार्ट सर्जरी की गई।

इस जटिल शल्य चिकित्सा को अंजाम देने वाले पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डा. अनीश गुप्ता ने बताया ​कि इस 20 वर्षीय युवक के दिल में छेद होने के साथ ही दो वाल्व लीक कर रहे थे, इसकी वजह इन वाल्व का जन्म से ही पूर्णरूप से विकसित नहीं होना था। इस ऑपरेशन में हार्ट के ब्लॉक होने एवं पेसमेकर डालने का भी खतरा होता है। मगर डा. अनीश ने चिकित्सकीय टीम के सहयोग से इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
इससे कुछ समय पूर्व पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन डा. अनीश हरिद्वार निवासी एक अन्य 20 वर्षीय युवक और हल्द्वानी के एक 4 साल के बच्चे का भी ए.वी.एस.डी का सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। निदेशक प्रो. रविकांत ने इस जटिल सर्जरी के लिए चिकित्सकीय टीम की सराहना की है, साथ ही काॅर्डियक एनिस्थीसिया के डा. अजेय मिश्रा व पीडियाट्रिक काॅर्डियोलॉजिस्ट डा. यश श्रीवास्तव की भी पीठ थपथपाई।
क्या है ए.वी.एस.डी बीमारी यह एक जन्मजात दिल की बीमारी है। जिसमें दिल के अंदर की बनावट पूरी नहीं होती है। यह दो प्रकार से होता है। पार्शियल या कम्प्लीट। इस बीमारी में मनुष्य के दिल में एक या दो छेद होने के साथ ही दो वाल्व भी अधूरे विकसित होते हैं, जो कि लीक करने लगते हैं। इस स्थिति में दिल में दो छेद वाले बच्चों का जन्म से पहले साल में ही ऑपरेशन करना होता है अन्यथा यह बीमारी लाइलाज हो जाती है। मगर दिल में एक छेद वाले (प्राइमम एएसडी) रोग से ग्रसित बच्चे जब कुछ बड़े हो जाते हैं, उन्हें इसके बाद इस बीमारी से दिक्कत बढ़ने लगती है।

16 जनवरी से अब तक एम्स ऋषिकेश में 3554 स्वास्थ्य कर्मियों को लगा कोरोना टीका

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में कोविड19 वैक्सीनेशन के तहत अब तक कुल 3,554 हैल्थ केयर वर्करों को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है। टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के उद्देश्य से कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में अलग-अलग 10 काउंटर स्थापित किए हैं।

गौरतलब है कि देशभर में कोविड वैक्सीन के टीकाकरण की शुरुआत बीते महीने 16 जनवरी से हुई थी। एम्स ऋषिकेश में चलाए जा रहे कोविड टीकाकरण अभियान के तहत फैकल्टी, नर्सिंग ऑफिसर्स, तकनीशियन, सपोर्टिंग स्टाफ, सुरक्षाकर्मियों, सफाई कर्मी और संस्थान के अन्य कर्मचारियों को टीके लगाए जा रहे हैं। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने टीकाकरण अभियान के बाबत बताया कि 16 जनवरी से अब तक संस्थान के 65 प्रतिशत से अधिक स्टाफ को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अभियान की शुरुआत में कोविड एरिया में ड्यूटी दे रहे फ्रंट लाइन हैल्थ केयर वर्करों का प्राथमिकता से टीकाकरण किया गया था। जबकि इसके बाद अब एम्स में कार्यरत अन्य कार्मिकों को भी चरणबद्ध तरीके से टीके लगाए जा रहे हैं।
निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को पहले टीके के ठीक 28 दिन बाद दूसरा टीका लगाया जाना है।

उल्लेखनीय है कि एम्स के आयुष भवन में बनाए गए कोविड टीकाकरण केंद्र में इस अभियान को सफल बनाने के लिए कम्युनिटी एंड फेमिली मेडिसिन विभाग विशेष भूमिका निभा रहा है। सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना जी दैनिक तौर पर स्वयं इस अभियान की माॅनिटरिंग कर रही हैं। प्रो. वर्तिका सक्सैना ने बताया कि संस्थान में कुल 5,632 लोगों का स्टाफ कार्यरत है। जिनमें से अब तक 3,554 लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के उद्देश्य से कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में बीती 2 फरवरी से 10 अलग-अलग टीकाकरण काउंटरों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जिससे कोविड नियमों का पालन करते हुए कम समय में अधिक से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा सके और टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।
उन्होंने कोविड वैक्सीन को पूरी तरह से भरोसेमंद और सुरक्षित बताया। बताया कि सभी लोग स्वैच्छा से कोविड वैक्सीन लगाने के लिए आगे आ रहे हैं। टीकाकरण अभियान के दौरान सीएफएम विभाग की डा. रंजीता कुमारी, डा. महेंद्र सिंह, डा. योगेश बहुरूपी, डा. अजीत भदौरिया आदि मौजूद थे।

सरकारी अस्पताल में है सुविधाओं का अभावः राजकुमार अग्रवाल


राज्य आंदोलनकारी व देवभूमि उत्तरांचल उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन के जरिए उन्होंने राजकीय चिकित्सालय को एम्स ऋषिकेश से संचालित करने की मांग की है।

आज उन्होंने उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को ज्ञापन देकर बताया कि ऋषिकेश तथा आसपास के पहाड़ी क्षेत्र की जनता बीमारी के इलाज के लिए राजकीय चिकित्सालय आते है। मगर अस्पताल में चिकित्सकों दवाओं व उपकरणों की कमी के चलते भारी समस्या उठानी पड़ रही है। साथ ही गंभीर रोगियों की देखभाल के लिए कर्मचारियों की नितांत आवश्यकता है, जो कि यहां नहीं है। बताया कि कुंभ, कावड़ यात्रा, चार धाम, हेमकुंड यात्रा जैसे कार्यक्रमों के दौरान बीमार होने पर मरीज इसी अस्पताल का रुख करते हैं उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस राजकीय चिकित्सालय का प्रबंध करें। जिससे जनता को इसका लाभ मिल सके। ज्ञापन देने वालों में कविता शाह, वेद प्रकाश धींगड़ा, मनीष अग्रवाल, शिव कुमार अग्रवाल, अमित कुमार, हरीश आनंद आदि शामिल रहे।

ऋ​षिकेश एम्स में 4 साल में बढ़े छह गुना मरीज

बीते 4 वर्षों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखंड व इसके समीपवर्ती प्रदेशों में ही नहीं वरन समूचे देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हालांकि यहां वर्ष 2013 में वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन वर्ष 2016 के बाद से इस संस्थान में न केवल विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाई जानी शुरू की गई, अपितु यह देश का पहला ऐसा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी बन गया, जहां हैली एम्बुलैंस के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से आपात स्थिति के मरीजों को सीधे अस्पताल परिसर तक पहुंचाया जा सकता है।
एम्स, ऋषिकेश की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का ही प्रमाण है कि पिछले 4 वर्षों के दौरान संस्थान की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में 6 गुना तक वृद्धि हो चुकी है। जबकि इस दौरान उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती किए गए मरीजों की संख्या में 30 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि ऋषिकेश में एम्स संस्थान की नींव वर्ष 2004 में 1 फरवरी को रखी गई थी। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज ने अस्पताल की नींव रखते हुए कहा था कि उत्तराखंड की इस देवभूमि में ’एम्स ऋषिकेश’ राज्यवासियों के लिए भविष्य में वरदान साबित होगा, और हुआ भी वही। निर्माण के बाद धीरे-धीरे एम्स अपने स्वरूप में आया तो शुरुआत में कुछ चिकित्सकों की तैनाती होने के बाद वह दिन भी आया जब 27 मई 2013 से यहां मरीजों के स्वास्थ्य जांच के लिए ओपीडी की सुविधा शुरू कर दी गई।

इसके ठीक 8 महीने बाद 30 दिसंबर- 2013 से एम्स अस्पताल में आंतरिक रोगी विभाग (आईपीडी) और फिर 2 जून 2014 से शल्य चिकित्सा की शुरुआत की गई, इसके बाद यहां न केवल उत्तराखंड बल्कि देश के लगभग दर्जनभर अन्य राज्यों से भी मरीजों ने एम्स ऋषिकेश पहुंचना शुरू कर दिया। ओपीडी में मरीजों की आमद में सतत बढ़ोत्तरी के मद्देनजर वर्ष 2016-17 तक के शुरुआती 4 वर्षों तक अस्पताल प्रशासन विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करने के लिए प्रयासरत रहा। मगर संस्थान ने स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में रफ्तार वर्ष 2016-17 के बाद ही पकड़ी। संस्थान के निदेशक प्रो. रविकांत के कुशल मार्गदर्शन में यहां न केवल आधुनिक तकनीक आधारित उपचार की सुविधा शुरू हुई अपितु उच्च अनुभवी व विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति के साथ-साथ गरीब से गरीब मरीज को भी बेहतर उपचार मुहैया कराना एम्स का एकमात्र ध्येय बन गया।

वर्ष 2016 के बाद एम्स ऋषिकेश के खाते में साल दर साल कई उपलब्धियां जुड़ती चली गईं। इनमें 100 से अधिक आफ्टरनून क्लीनिकों का संचालन किया जाना विशेष उपलब्धि में शामिल है। इन क्लीनिकों के शुरू होने पर ओपीडी के अलावा प्रतिदिन सैकड़ों मरीज अलग से देखे जाने लगे। यही नहीं पिछले 4 वर्षों के दौरान एम्स की ओपीडी में मरीजों की 6 गुना बढ़ोत्तरी का आंकड़ा दर्ज होना साबित करता है कि एम्स ऋषिकेश द्वारा उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं के प्रति आमजन में विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

आंकड़ों पर गौर करें तो प्रारंभ से वर्ष 2016-17 तक संस्थान की ओपीडी में 4 लाख 48 हजार 932 मरीजों का पंजीकरण किया गया था। जबकि इसके बाद के चार साल के समयांतराल में 31 दिसंबर- 2020 तक ओपीडी में पंजीकृत मरीजों का आंकड़ा 28 लाख 11 हजार 105 हो चुका है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि गरीब से गरीब व्यक्ति का समुचित और बेहतर उपचार करने के लिए एम्स संस्थान संकल्पबद्ध है। उन्होंने बताया कि आमजन और खासकर गरीब पृष्ठभूमि के लोगों की चिकित्सा सुविधा के लिए पिछले 4 वर्षों के समयांतराल में एम्स में 100 से अधिक नए क्लीनिक शुरू किए गए हैं। जिनमें लंग कैंसर, ब्रोनिकल अस्थमा, काॅर्डियक इलैक्ट्रोफिजियोलाॅजी, एआरटी, पीडियाट्रिक डेर्मोटोलाॅजी, सीओपीडी, काॅर्निया, काॅस्मेटिक, फीवर, ग्लूकोमा, हार्ट फेलियर, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, स्पेशियल इमरजेंसी मेडिसिन, स्पोर्ट्स इंजरी, स्लीप डिस्ऑर्डर, सर्जिकल ओंकोलॉजी क्लीनिक जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण क्लीनिक शामिल हैं।

निदेशक ने बताया कि वर्ष 2018 सितंबर माह में शुरू हुई ’आयुष्मान भारत’ योजना के तहत 31 जनवरी-2021 तक 35 हजार 350 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि देश जब कोविड 19 वैश्विक महामारी के दौरान कोरोना संक्रमितों के इलाज के प्रति एम्स ऋषिकेश ने दो कदम आगे बढ़कर अपनी पूरी जिम्मेदारी का निर्वहन किया व इस आपात स्थिति में संस्थान के चिकित्सकों, नर्सिंग ऑफिसरों, टेक्नीशियनों सहित सभी फ्रंटलाइन वर्करों ने कोविड संक्रमण के जोखिम की परवाह किए बिना अपना संपूर्ण समय मरीजों की सेवा व उनकी जीवनरक्षा के प्रयासों में लगाया।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने पिछले 4 वर्षों के दौरान संस्थान की तमाम उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला व बताया कि वर्ष 2016-17 तक एम्स में महज 3 ऑपरेशन थियेटर की सुविधा उपलब्ध थी, यह संख्या वर्तमान में बढ़कर 54 ऑपरेशन थियेटर हो गई है। ऐसे में नए ऑपरेशन थियेटरों के स्थापित होने से एक ही समय में कई मरीजों की एकसाथ सर्जरी की जा सकती हैं। अस्पताल में ज्यादा ऑपरेशन थियेटर होने से अब एक ही दिन में कई मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है।

बकौल, एम्स निदेशक अस्पताल में पहले मात्र 300 बेड थे। जिनकी संख्या बढ़कर अब 960 हो गई है। सततरूप से सुविधाओं के विस्तारीकरण के मद्देनजर ऋषिकेश एम्स अस्पताल में समूचे उत्तराखंड ही नहीं वरन हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरला, हरियाणा, जम्मू एंड कश्मीर, झारखंड आदि राज्यों के मरीजों ने स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाया है। लगातार बढ़ रहे मरीजों के दबाव के मद्देनजर भारत सरकार से लगातार संपर्क कर उच्च अनुभवी व विशेषज्ञ फैकल्टी सदस्यों की नियुक्ति बढ़ाई गई। एम्स निदेशक प्रो. रविकांत के अनुसार वर्तमान में संस्थान में 246 फैकल्टी मेंबर मौजूद हैं, जबकि संस्थान में उनकी ज्वाइनिंग के समय यह संख्या महज 94 थी। एम्स के खाते में दर्ज हो रही नित नई-नई उपलब्धियों के लिए निदेशक ने अपने कर्मठ व अनुभवी चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की सराहना की, साथ ही उन्होंने संस्थान को उत्तरोत्तर प्रगति के सोपान पर पहुंचाने के लिए सभी कर्मचारियों के सतत योगदान को मुक्तकंठ से सराहा।

राम मंदिर के निर्माण के लिए एक माह का वेतन देकर एम्स निदेशक ने पत्नी सहित पेश की मिशाल

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए एम्स ऋषिकेश में कार्यरत चिकित्सक व अन्य कर्मचारी भी सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। मंदिर निर्माण के लिए जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जुटी विभिन्न संगठनों के प्रति​निधियों का कहना है कि ​संस्थान में कार्यरत कर्मचारी उन्हें अपनी सामर्थ्य अनुसार आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इस अभियान के तहत एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत व उनकी धर्मपत्नी वरिष्ठ सर्जन प्रोफेसर बीना रवि ने अपनी एक-एक महीने की तनख्वाह दानस्वरूप भेंट की है।
गौरतलब है कि इन दिनों विभिन्न संस्थाएं भव्य मंदिर निर्माण को लेकर जनसहयोग की अपील कर रही हैं,जिसके तहत विभिन्न इलाकों में लोगों से आर्थिक सहयोग एकत्रित किया जा रहा है। नेशनल मेडिकोज एसोसिएशन एम्स शाखा इसके लिए आगे आई है।

नेशनल मेडिकोज एसोसिएशन की शाखा अध्यक्ष डा. मीनाक्षी धर व आरडीए के अध्यक्ष डा. विनोद ने बताया कि संस्थान के फैकल्टी, चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों से सहयोग राशि एकत्रित की जा रही है।

डा. विनोद के अनुसार लोग इस कार्य में अपने स्तर पर भी बढ़चढ़कर प्रतिभाग कर रहे हैं। बताया कि कई लोग अभियान से जुड़े सदस्यों से संपर्क कर अपनी सामर्थ्य अनुसार सहयोग राशि प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक काफी संख्या में चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, एमबीबीएस व नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ ही संस्थान के सुरक्षाकर्मी व अन्य स्टाफ के लोग उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान कर रशीद प्राप्त कर चुके हैं।

इसी क्रम में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत व वरिष्ठ शल्य चिकित्सक प्रो.बीना रवि ने अपनी एक- एक माह की तनख्वाह दानस्वरूप भेंट कर सहभागिता की है।
इस अभियान में डा.रविराज, डा.जितेंद्र, डा.आनंद, डा.अजय, डा.शिशिरा,कौशल, संकेत, रवेंद्र,बलराज, नवीन, दिव्यांश आदि सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं।

लेप्रोस्कोपी सर्जरी व बेहतर तरीके से टांके लगाने का प्रशिक्षु चिकित्सकों ने लिया प्रशिक्षण

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित शिविर में कनिष्ठ व प्रशिक्षु चिकित्सकों ने लेप्रोस्कोपी सर्जरी व बेहतर तरीके से टांके लगाने के गुर सीखे। बताया गया कि यह प्रशिक्षण एक सप्ताह तक जारी रहेगा। जिसमें ईएनटी, सर्जिकल ओंकोलॉजी, गाइनी, जनरल सर्जरी विभाग के कनिष्ठ चिकित्सकों, एमबीबीएस के विद्यार्थियों आदि को प्रशिक्षित किया जाएगा।

एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत की देखरेख में जॉनसन एंड जॉनसन इंस्टीट्यूट के सहयोग से ऑन व्हील प्रोग्राम के तहत सिमुलेशन कौशल के लिए तैयार कि​ए गए स्पेशल सचल वाहन में इस शिविर का आयोजित किया गया। बताया कि सिमुलेशन ​स्किल से फैकल्टी व रेजिडेंट्स चिकित्सकों को प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वह अपने कार्यक्षेत्र में दक्षता हासिल करेंगे व अभ्यास से वह अपना कार्य कुशलता से कर सकेंगे। लिहाजा यह दक्षता प्रत्येक व्यक्ति में होनी चाहिए जो कि जरुरी है।
प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से प्रतिदिन क्रमवार सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग, नाक कान गला विभाग, अस्थि रोग विभाग, स्त्री एवं प्रसूति विभाग, कैंसर शल्य ​चिकित्सा विभाग आदि के रेजिडेंट डॉक्टर्स, एमबीबीएस छात्र-छात्राएं बेहतर तरीके से टांके लगाने के साथ ही लेप्रोस्कोपी सर्जरी स्किल में दक्षता हासिल करेंगे।
इस अवसर पर जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. सोमप्रकाश बासू ने बताया ​कि शल्य चिकित्सा एक विषय है जिसमें ज्ञान के साथ साथ कला और अनुभव की आवश्यकता होती है। लिहाजा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कनिष्ठ चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों के कौशल और आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी में मददगार साबित होगा।
उन्होंने बताया कि सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को विकसित करने में सहायक सिद्ध होता है। इस अवसर पर जनरल सर्जरी विभाग की वरिष्ठ सर्जन व आईबीसीसी प्रमुख प्रोफेसर बीना रवि, डीन( एकेडमिक) प्रो. मनोज गुप्ता, डीन (हॉस्पिटल अफेयर्स ) प्रो. यूबी मिश्रा, डा. अनुभा अग्रवाल, डा. प्रतीक शारदा, जॉनसन एंड जॉनसन की ओर से सुमित कौशिक, संदीप राणा आदि मौजूद थे।

पीएपीवीसी व दिल में छेद की सफल सर्जरी कर दिया जीवनदान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों ने राजस्थान निवासी एक व्यक्ति के जन्मजात दिल में छेद होने से साइनस विनोसस डिफैक्ट बीमारी की जटिल सर्जरी कर उसे जीवनदान दिया है। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने चिकित्सकीय टीम की सफलतापूर्वक जटिल सर्जरी को अंजाम देने के लिए प्रशंसा की है।

निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि हम अस्पताल में वर्ल्ड क्लास सुपरस्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान का प्रयास है कि यहां विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएं​, जिससे उत्तराखंड व समीपवर्ती राज्यों के मरीजों को उपचार के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ जैसे महानगरों में परेशान नहीं होना पड़े।
गौरतलब है कि राजस्थान निवासी एक व्यक्ति जो कि पिछले दो महीने से सांस फूलने की बीमारी से पीड़ित थे। एम्स अस्पताल में जांच करने पर पता चला कि उनके दिल में जन्म से छेद है,जिसकी उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं थी। इसके चलते उनके स्वच्छ खून की नसें गलत खाने (भाग) में खुल रही हैं। इसे मेडिकल साइंस में साईनस विनोसस डिफैक्ट एवं पी.ए.पी वीसी के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने राजस्थान में कई चिकित्सकों से संपर्क कर इस बाबत परामर्श लिया। जहां मालूमात हुआ कि ऑपरेशन कराने के बाद मरीज को पेसमेकर की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके बाद उन्होंने इस बीमारी से निजात पाने के लिए एम्स ऋषिकेश के सीटीवीएस विभाग के चिकित्सकों से संपर्क साधा, विभाग के शल्य चिकित्सक डा. अनीष गुप्ता जो कि जन्मजात हृदय संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ शल्य चिकित्सक हैं।

उन्होंने डा. अजेय मिश्रा व डा. यश श्रीवास्तव से परामर्श के बाद उनकी इस हाईरिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जिसके बाद अब उक्त व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हैं। डा. अनीष ने बताया कि यदि वक्त रहते यह ऑपरेशन नहीं किया जता तो यह बीमारी लाइलाज हो सकती थी, जिससे मरीज का हार्ट फेल हो सकता था।
हार्ट सर्जरी कराने वाले मरीज ने इस ऑपरेशन के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी का आभार व्यक्त किया है,जिनके अथक प्रयासों की बदौलत उत्तराखंड में ऐसी सुपरस्पेशलिटी सेवाएं एम्स ऋषिकेश में उपलब्ध हो पाई हैं एवं गरीब व बीमारी से दुखी मरीजों को दिल्ली अथवा चंडीगढ़ के अस्पतालों में इलाज के लिए धक्के नहीं खाने पड़ रहे हैं।

साथ ही मरीज ने ऑपरेशन को अंजाम देने वाली चिकित्सकीय टीम के सदस्य नर्सिंग ऑफिसर केशव, गौरव, सबरी नाथन, कलई मणी व तुहीन के साथ साथ वार्ड में भर्ती के दौरान उनका खयाल रखने वाले नर्सिंग ऑफिसर धन सिंह, प्रियंका आदि का भी आभार जताया है।