बिना बेहोश किए सफल अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी में मिली सफलता

अ​खिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने छाती में ट्यूमर की समस्या से जूझ रहे एक मरीज को बिना बेहोश किए उसकी सफल अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी करने में विशेष सफलता प्राप्त की है। चिकित्सा क्षेत्र में उत्तर भारत का यह पहला मामला है, जिसमें मरीज को बिना बेहोश किए यह बेहद जटिल सर्जरी की गई। इस मरीज का उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। इलाज के बाद मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद स्थित चिन्यालीसौड़ निवासी 30 एक वर्षीय व्यक्ति पिछले लंबे अरसे से छाती में भारीपन और असहनीय दर्द की समस्या से जूझ रहा था। लगभग 3 महीने पहले परीक्षण कराने पर पता चला कि उसकी छाती में हृदय के ऊपर एक ट्यूमर बन चुका है। इलाज के लिए वह पहले राज्य के विभिन्न अस्पतालों में गया, लेकिन मामला जटिल होने के कारण अधिकांश अस्पतालों ने उसका इलाज करने में असमर्थता जाहिर कर दी। इसके बाद अपने उपचार के लिए मरीज एम्स ऋषिकेश पहुंचा। यहां विभिन्न जांचों के बाद एम्स के कार्डियो थोरेसिक व वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अंशुमन दरबारी जी ने पाया कि मरीज की छाती के भीतर व हार्ट के ऊपर थाइमिक ग्रंथी में संभवतः एक थायमोमा में एक ट्यूमर बन चुका है और उसका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
इस बाबत सीटीवीएस विभागाध्यक्ष व वरिष्ठ सर्जन डा. अंशुमन दरबारी ने बताया कि यदि मरीज का समय रहते इलाज नहीं किया जाता तो हार्ट के ऊपर बना ट्यूमर बाद में कैंसर का गंभीर रूप ले सकता था। उन्होंने बताया कि आसपास के महत्वपूर्ण अंगों के कारण छाती के भीतर ट्यूमर में सामान्यतरू बायोप्सी करना संभव नहीं होता है इसलिए मरीज की बीमारी के निराकरण के लिए रोगी की सहमति के बाद उसकी ’अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी’ करने का निर्णय लिया गया।
अत्याधुनिक तकनीक की बेहद जोखिम वाली इस सर्जरी में मरीज की छाती की हड्डी को काटकर मरीज को बिना बेहोश किए उसके हार्ट के ऊपर बना 10 गुना 7 सेंटीमीटर आकार का ट्यूमर पूर्णरूप से निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी में लगभग 2 घंटे का समय लगा और 4 दिन तक मरीज को अस्पताल में रखने के बाद अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। सर्जरी करने वाली विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम में डॉ. अंशुमन दरबारी के अलावा सीटीवीएस विभाग के डॉ. राहुल शर्मा जी और एनेस्थेसिया विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार जी शामिल थे।
एम्स निदेशक प्रोफेसर अरविंद राजवंशी ने इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाले चिकित्सकों के कार्य की सराहना की है। उन्होंने बताया कि मरीजों के बेहतर उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम 24 घंटे तत्परता से कार्य कर रही है।

क्या है ’अवेक कार्डियो सर्जरी’
सीटीवीएस विभाग के वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. दरबारी ने बताया कि अवेक कार्डियो थोरेसिक सर्जरी की शुरुआत वर्ष-2010 में अमेरिका में हुई थी। भारत में यह सुविधा अभी केवल चुनिंदा बड़े अस्पतालों में ही उपलब्ध है। इस तकनीक द्वारा मरीज की रीढ़ की हड्डी में विशेष तकनीक से इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे उसकी गर्दन और छाती का भाग सुन्न हो जाता है। पूरी तरह से दर्द रहित होने के बाद छाती की सर्जरी की जाती है। खासबात यह है कि सर्जरी की संपूर्ण प्रक्रिया तक मरीज पूरी तरह होश में रहता है। यहां तक कि सर्जरी के दौरान मरीज से बातचीत भी की जा सकती है। सामान्यतौर पर सर्जरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को बेहोशी दवाओं का दुष्प्रभाव हो सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में वह बेहोशी दवाओं के दुष्प्रभाव से भी बच जाता है। इस तकनीक से मरीज को वेन्टिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता भी नहीं होती है। साथ ही तकनीक में मरीज की रिकवरी बहुत ही सहज और तेज हो जाती है।

एम्स ऋषिकेश के नए प्रभारी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने संभाला कार्यभार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में सोमवार को नए निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस दौरान संस्थान के अधिकारियों, फैकल्टी सदस्यों, चिकित्सकों ने उनका स्वागत किया।
सोमवार को एम्स रायबरेली के निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने ऋषिकेश एम्स का अतिरिक्त कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इस दौरान उन्होंने संस्थान के अधिकारियों, चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों से मुलाकात की और उनसे एम्स ऋषिकेश के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रोफेसर अरविंद राजवंशी ने 1977 में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला (हिमाचल प्रदेश) से एमबीबीएस किया। उन्होंने 1981 में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ से एमडी पैथोलॉजी और 1994 में रॉयल कॉलेज लंदन से एमआरसी पैथोलॉजी की डिग्री हासिल की। राजवंशी ने पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से अपना सीनियर रेजीडेंसी किया।
साथ ही प्रो. राजवंशी वर्ष 2007 से 2019 तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के प्रभारी प्रोफेसर भी थे। इसके अलावा वह 23 मार्च 2020 तक पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के डीन (अनुसंधान) और डीन (अकादमिक) भी रहे हैं। उन्हें 23 मार्च 2020 को एम्स रायबरेली का कार्यकारी निदेशक और सीईओ नियुक्त किया गया और अब उन्होंने सोमवार (20 सितंबर) को एम्स ऋषिकेश का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है। गौरतलब है कि एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत बीती 13 सितंबर को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके स्थान पर प्रो. राजवंशी ने निदेशक का पदभार ग्रहण किया है।
इस अवसर पर संस्थान के संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता एवं अन्य संकाय सदस्य तथा अधिकारी मौजूद थे।

कर्नाटक मूल के एम्स में डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थिति में मौत

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में स्नातकोत्तर के तृतीय वर्ष के एक चिकित्सक की मौत हो गई है एम्स के लॉ ऑफिसर प्रदीप पांडे ने बताया कि चिकित्सक ने हॉस्टल के कमरे के अंदर सुसाइड कर लिया है वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है अप पुलिस मौत के कारणों की जांच में जुट गई है।।

कोतवाल शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि 26 वर्षीय शिवानंद बोन पुत्र बच कांत बोर्न निवासी गंगा कॉलोनी बसवा कल्याण जिला बिदार कर्नाटक हाल निवासी जूनियर रेजिडेंट ऐम्स ऋषिकेश में रहता था। सोमवार की रात उसकी डयूटी थी। मगर डयूटी पर न आने और फ़ोन भी न उठाने पर जब हॉस्टल के कमरे में गये तो कमरा भीतर से बंद था। मौके पर पुलिस की मौजूदगी में कमरा खोला तो शिवानंद मृत मिला। उसके कमरे से पुलिस को कुछ दवाइयां और इंजेक्शन मिले हैं हत्या के कारणों की अभी जानकारी नहीं मिल पाई है फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

साइकिल यात्रा का मकसद शरीर को फिट रखना

स्वास्थ्य के प्रति जन सामान्य को जागरुक करने के उद्देश्य से रविवार को स्वास्थ्य सेवा से राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित अखिल भारतीय अनुषांगिक संगठन नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन, उत्तराखंड प्रांत की एम्स ऋषिकेश इकाई द्वारा ’स्वस्थ जीवनशैली साइकिल यात्रा’ का सफल आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
साइकिल रैली को एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रोफेसर रवि कान्त के साथ ही डीन प्रो. मनोज गुप्ता, एनएमओ अध्यक्ष डा. मीनाक्षी धर, डा. नवनीत मैगन व एनएमओ उत्तराखंड के सचिव डा. विनोद ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस दौरान निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने जन सामान्य को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए संस्था की इस पहल को सराहनीय बताया।
लगभग 10 किलोमीटर साइकिल रैली के आयोजन में फायरफॉक्स साईकिल कंपनी का विशेष सहयोग रहा।
इस अवसर पर नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन उत्तराखंड के प्रदेश सचिव व एम्स ऋषिकेश के सीनियर रेजिडेंट डॉ. विनोद ने बताया की स्वस्थ जीवन शैली साइकिल यात्रा का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, व स्टाफ को जागरूक करना व बढ़ती बीमारियों व मानसिक तनाव को दूर करना था।
कार्यक्रम में भाग लेने और सफल बनाने के लिए डा. प्रशांत, पी.सी मीणा, विकास, हंसराज, कौशल, संकेत, सुभम, मोहित, नवीन, सोनू, बृजेश, लोकेश, अंकुर, सुमेर के साथ ही अन्य सभी डाक्टर्स, नर्सिंग ऑफिसरों और मेडिकल स्टूडेंट्स का आभार व्यक्त किया गया।

यह है आगामी योजना
साइकिल यात्रा की प्रारंभिक सफलता को देखते हुए आयोजकों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक रविवार को एम्स के गेट नंबर-एक से ग्रुप रैली और महीने के पहले रविवार को विशाल जागरुकता रैली निकाली जाएगी।

एम्स ऋषिकेश में डिजीटल बैंक की शुरुआत, लोगों को मिलेंगी कई सुविधाएं

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में पंजाब नेशनल बैंक का डिजिटल बैंक (ईज आउटलेट) ​विधिवत शुरू हो गया है। बैंक अधिकारियों के अनुसार यह पीएनबी का उत्तराखंड में पहला ईज आउटलेट है। बिना मेनपावर के संचालित होने वाले इस डिजिटल बैंक के माध्यम से लोग बैंक से संबंधित तमाम सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। उक्त सुविधाएं लोगों को बैंक कार्य दिवस के साथ साथ राजकीय व साप्ताहिक अवकाश के दिनों में भी 24 घंटे निर्बाध उपलब्ध हो सकेंगी। शुक्रवार को एम्स परिसर में आयोजित कार्यक्रम में निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी व पीएनबी देहरादून के अंचल प्रबंधक आरडी सेवक ने संयुक्तरूप से पीएनबी/ईज आउटलेट (डिजिटल बैंक) का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत जी ने कहा कि संस्थान में पीएनबी की ओर से राज्य का पहला ईज आउटलेट स्थापित होने से ऋषिकेश व आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ एम्स में उपचार के लिए आने वाले लोगों को 24 घंटे बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। निदेशक एम्स ने पीएनबी ईज आउटलेट के शुभारंभ अवसर पर मौजूद बैंक के अधिकारियों को बधाई दी व जनसुविधाएं मुहैया कराने के लिए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर पीएनबी के अंचल प्रबंधक आरडी सेवक ने कहा कि कोविडकाल ने हमें डिजिटिलाइजेशन का महत्व समझाया है, लिहाजा पीएनबी का डिजिटल बैंक उसी की पहल है, जिससे लोग भीड़भाड़ से दूर अपनी बैंक संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। उन्होंने बताया कि ईज आउटलेट एटीएम, बीएनए पासबुक प्रिंटिंग मशीन और चौक जमा मशीन से युक्त डिजिटल बैंक में लोगों को नकद धनराशि जमा करने, नकदी निकासी, बैंक पासबुक प्रिंटिंग और चेक जमा करने आदि बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
सर्किल हेड वाईएस राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी के देश में डिजिटलाइजेशन की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए पंजाब नेशनल बैंक द्वारा देश के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान एम्स ऋषिकेश में डिजिटल बैंक की सुविधा शुरू की है।
पीएनबी की वीरभद्र शाखा प्रबंधक गजेंद्र चौधरी ने बताया कि एम्स डिजिटल बैंक ब्रांच में रविवार के अलावा अन्य राजकीय अवकाश के दिनों, दूसरे और चौथे शनिवार, बैंक होलिडे में भी अपने ग्राहकों के साथ साथ अन्य बैंकों से जुड़े ग्राहकों को भी यह सुविधा मिल सकेगी।
इस अवसर पर एम्स के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, डीएचए प्रो. यूबी मिश्रा, वित्तीय सलाहकार कमांडेंट पीके मिश्रा, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी, डीडीओ संदीप सिंह के अलावा पीएनबी के उप अंचल प्रबंधक डीएस भंडारी, अनिल सिन्हा, मंडल प्रमुख राजिंदर भाटिया आदि मौजूद थे।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ स्पेशल लंग क्लीनिक

यदि आप धूम्रपान करते हैं और आपको लम्बे समय से खांसी की शिकायत के साथ थकान महसूस हो रही है, तो सावधान हो जाएं। यह लंग कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार कैंसर से होने वाली मौतों में सर्वाधिक मौतें लंग कैंसर की वजह से होती हैं। ऐसे मरीजों के लिए एम्स ऋषिकेश में अब स्पेशल लंग क्लीनिक शुरू किया गया है। इस क्लीनिक का संचालन प्रत्येक शुक्रवार को किया जाएगा।
फेफड़े के कैंसर में फेफड़ों के किसी भाग में कोशिकाओं की अनियंत्रित व असामान्य वृद्धि होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार कईदफा फेफड़े के कैंसर का शुरुआती दौर में पता नहीं चल पाता है और यह अंदर ही अंदर बढ़ता जाता है। लिहाजा इसके लक्षण अक्सर विलंब से पता चलते हैं।
इस बाबत एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि फेफड़े का कैंसर एक गंभीर बीमारी है लेकिन आधुनिक मेडिकल साइंस में हुई प्रगति के कारण अब कैंसर से छुटकारा संभव है। लक्षणों के आधार पर समय पर उपचार शुरू कर दिए जाने से कैंसर की गंभीर स्थिति से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में लंग कैंसर के लिए स्पेशल क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इस बीमारी के समुचित इलाज के लिए एम्स में सभी तरह की आधुनिक मेडिकल सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है।
पल्मोनरी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मयंक मिश्रा ने बताया कि बीड़ी-सिगरेट आदि धूम्रपान का सेवन करना फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के तम्बाकू उत्पाद, खैनी, गुटखा, सिगार का सेवन करने, धुएं के संपर्क में रहने, घर या कार्य स्थल पर एस्बेस्टस या रेडॉन जैसे पदार्थों के संपर्क में आने और पारिवारिक इतिहास होने के कारण भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है।

आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में लंग कैंसर के मरीजों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एम्स ऋषिकेश में इस बीमारी से ग्रसित औसतन 40 से 50 मरीज प्रति माह आ रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर एम्स के पल्मोनरी विभाग में अलग से लंग क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। इस क्लीनिक में केवल लंग कैंसर से ग्रसित मरीज ही देखे जाएंगे।
फेफड़ों के कैंसर के लक्षण
लंबे समय से खांसी-बलगम की शिकायत, खांसी में खून आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, वजन का कम होना, चेहरे या गले में सूजन, आवाज बदल जाना, भूख कम लगना, लगातार थकान महसूस होना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।
शुक्रवार को संचालित होगा लंग क्लीनिक
पल्मोनरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मयंक मिश्रा जी ने बताया कि लंग क्लीनिक प्रत्येक शुक्रवार को अपराह्न 2 से 4 बजे तक संचालित होगा। इस क्लीनिक में केवल वही मरीज देखे जाएंगे, जिन्हें पल्मोनरी विभाग की जनरल ओपीडी से रेफर किया गया हो। लिहाजा जरूरी है कि मरीज पहले पल्मोनरी की ओपीडी में अपना परीक्षण करा लें। क्लीनिक में पल्मोनरी विभाग के अलावा, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के विशेषज्ञ चिकित्सक भी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 13वां विश्वस्तरीय एटीएलएस एवं 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया। जिसमें एम्स के साथ ही अन्य मेडिकल संस्थानों के 16 चिकित्सक एवं 16 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर व नर्सिंग ऑफिसर टर्सरी केयर सेंटर में भर्ती होने वाले दुर्घटना में घायल ट्रॉमा मरीजों के उपचार संबंधी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आज एडवांस सेंटर फॉर कंटिनिवस प्रोफेशनल डेवलपमेंट (एसीसीपीडी विभाग) में एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में तीन दिवसीय एटीएलएस एवं एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। निदेशक ने कहा कि दुनिया का कोई भी ट्रॉमा सिस्टम ट्रेंड ट्रॉमा चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के बिना प्रभावी नहीं हो सकता। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इस तरह का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नितांत आवश्यक है, इसकी सबसे मुख्य वजह यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न तरह की दुर्घटनाओं के कारण ट्रॉमा के मामले सर्वाधिक होते हैं, लिहाजा प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को टर्सरी केयर लेवल पर चिकित्सा कार्य करने के लिए यह प्रशिक्षण लेना जरुरी है, तभी वह दुर्घटना में घायल मरीजों की ठीक प्रकार से देखभाल कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ट्रॉमा मैनेजमेंट एक टीमवर्क है, लिहाजा उसकी ट्रेनिंग भी विश्वस्तरीय मानकों के तहत कराई जानी जरुरी है। ट्रेनिंग प्रोग्राम डा. अजय कुमार व दीपिका कांडपाल के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।
ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की अगुवाई में आयोजित एटीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर डा. मधुर उनियाल व ट्रेनिंग फैकल्टी डा. फरहान उल हुदा, डा. अजय कुमार,डा. जितेंद्र चतुर्वेदी, डा. दिवाकर कोयल, डा. अंकिता काबि, दिल्ली एम्स ट्रामा सेंटर से डा. दिनेश बगराई ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया, जबकि एटीसीएन कोर्स में महेश देवस्थले, डा. राजेश कुमार, चंदू राज बी., अरुण वर्गीस, जोमोन चाको ने प्रशिक्षणार्थियों को ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।

छह दिसंबर से एम्स में आयोजित होगी सोसाइटी ऑफ यंग बायोमेडिकल साइंटिस्ट्स प्रतियोगिता

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में सोसाइटी ऑफ यंग बायोमेडिकल साइंटिस्ट्स, भारत के तत्वावधान में 6 से 10 दिसंबर 2021 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैव चिकित्सा अनुसंधान प्रतियोगिता वार्षिक वैज्ञानिक कार्यक्रम का निदेशक एम्स प्रोफेसर रवि कांत ने पोस्टर जारी किया।

सोसाइटी के अध्यक्ष व आयोजन सचिव रोहिताश यादव ने बताया कि एम्स, ऋषिकेश तथा पीजीआईएमईआर-चंडीगढ़ में सोसाइटी द्वारा आयोजित पहले और दूसरे राष्ट्रीय जैव चिकित्सा अनुसंधान प्रतियोगिता के सफल समापन के बाद एम्स ऋषिकेश में तीसरी वार्षिक अनुसंधान प्रतियोगिता देश के राष्ट्रीय महत्व के 7 अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर आयोजित की जाएगी।

राष्ट्रीय महत्व व युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने वाली उक्त प्रतियोगिता की पहल 15 अक्टूबर 2018 को एम्स ऋषिकेश से शुरू की गई थी, जो आज बहुत बेहतर तरीके से संचालित हो रही है तथा इस आयोजन के जरिए देश के युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

प्रो. रवि कांत जी ने संस्थान की ओर से इस प्रतियोगिता के पुरस्कार की धनराशि के तौर पर 1 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

एम्स में भर्ती ब्लड कैंसर से पीड़ित महिला के पति को सीएम ने दिया पांच लाख रूपए का चेक


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एम्स ऋषिकेश में ब्लड कैंसर से पीड़ित अनु धामी के इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 05 लाख रुपए का चेक उनके पति मदन धामी को सौंपा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनु धामी के इलाज के लिए सरकार की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अनु धामी की बीमारी का पता चलते ही उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून आर राजेश कुमार को उनकी स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए एम्स ऋषिकेश भेजा। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने अनु धामी के इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से धनराशि स्वीकृत की।

इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत एवं जिलाधिकारी देहरादून आर. राजेश कुमार मौजूद थे।

रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी की ओपीडी एम्स ऋषिकेश में शुरू

विश्व की पहली रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी की डिवीजन जो कि एम्स ऋषिकेश में स्थापित है ने हर सप्ताह सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुबह 8.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपनी ओपीडी शुरू की है। पूर्व में विभाग की ओपीडी सेवाएं कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण भारत सरकार के नियमानुसार स्थगित की गई थी।
रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी डिवीजन के प्रमुख डा. नवनीत मग्गो ने बताया कि अपनी ओपीडी सेवाओं के माध्यम से नारी सेवा करना उनके लिए बहुत गौरव की बात है। गौरतलब है कि डा. मग्गो एक सुप्रसिद्ध अंतराष्ट्रीय कॉस्मेटिक शल्य चिकित्सक हैं, जो कि अमेरिका और यूरोप से इस चिकित्सा में प्रशिक्षित हैं, लिहाजा उन्होंने अपना जीवन महिलाओं की निजी चिकित्सकीय समस्याओं के मद्देनजर नारी कल्याण के लिए समर्पित किया है।
उन्होंने जुलाई सन 2019 में निदेशक प्रो. रविकांत के मागर्दशन में संस्थान में रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी डिवीजन की स्थापना की थी। यह डिवीजन एक सुपर स्पेशलिटी डिवीजन है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की निजी स्वास्थ्य समस्याओं का निवारण करना है। ऐसी समस्याओं में स्ट्रेस यूरिनरी इनकंटीनेंस, संबंध बनाने में परेशानी, योनि के रास्ते से शरीर के हिस्से का बाहर आना, फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन आदि मुख्यरूप से शामिल हैं।

निदेशक ने बताया कि रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी डिवीजन की ओपीडी सेवाएं महिलाओं के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऋषिकेश एम्स में दुनियाभर में अपनी तरह की इस पहली चिकित्सा ओपीडी में इस तरह की समस्याओं से पीड़ित महिलाएं आएंगी और विशेषज्ञों को अपनी निजी परेशानियों से अवगत कराकर इन सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का लाभ लेंगी। यह सेवाएं ग्रसित महिलाओं को नवजीवन प्रदान करेंगी।
जानें, कब कौन सी ओपीडी होगी संचालित

इस सुपरस्पेशलिटी विभाग की पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स क्लिनिक सोमवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक चलेगा। बताया गया कि उत्तराखंड में बहुत सी महिलाएं बच्चेदानी के बाहर निकलने की समस्या से पीड़ित हैं, क्योंकि यह पहाड़ी क्षेत्र है। लिहाजा इस तकलीफ का सबसे आधुनिक उपचार उत्तराखंड में पहली बार एम्स ऋषिकेश द्वारा स्थापित रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी डिवीजन में उपलब्ध कराया गया है, जिसे साइट स्पेसिफिक रिपेयर कहते हैं, इसमें चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा अमेरिका से दक्षता हासिल की गई है।
फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन क्लिनिक, मंगलवार दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक चलेगा। बताया गया कि समाज के कुछ समुदाय इस समस्या से ग्रसित हैं, जिसमें एक महिला के बाहरी यौन अंग नष्ट करके उसका जीवन नष्ट कर दिया जाता है। डॉक्टर नवनीत मग्गो अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या का उपचार करने के लिए दक्षता हासिल हैं, जो कि इस तरह की समस्या से पीड़ित महिलाओं के लिए वरदान है।

फीमेल सेक्सुअल डिस्फंक्शन क्लिनिक, बुधवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विभाग की ओपीडी में संचालित किया जाएगा। बताया गया है कि समाज में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं वैवाहिक परस्पर संबंध बनाने की परेशानी से ग्रस्त हैं, मगर वह चुप्पी साधे रहती हैं। जिसका दुष्प्रभाव अमूमन पारिवारिक ढांचे पर पड़ता है और परिवार टूट जाते हैं। विभाग के चिकित्सकों का इस समस्या से ग्रसित महिलाओं से अनुरोध किया है कि वह अपनी समस्या का समय रहते संपूर्ण इलाज कराएं।

वजाइनल रिजूवनेशन क्लिनिक, शनिवार सुबह 10 से 12 बजे तक संचालित होगा। जिन महिलाओं की योनि का रास्ता बच्चा होने या उम्र के साथ साथ ढीला हो जाता है, वह रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी के इस क्लिनिक का लाभ उठा सकती हैं। बताया गया कि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा रेडियोफ्रीक्वेंसी और लेजर जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके महिलाओं की इस समस्या का स्थायी निवारण किया जाएगा।
स्ट्रेस यूरिनरी इनकंटिनेंस क्लिनिक, शुक्रवार दोपहर 2 से 4 बजे तक शुरू किया जा रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि स्ट्रेस यूरिनरी इनकंटीनेंस की समस्या में महिलाओं के खांसने, छींकने, हंसने, वजन उठाने पर पेशाब स्वतरू छूट जाता है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक तीन में से एक महिला इस परेशानी से पीड़ित है और विज्ञान के अनुसार, इसका सबसे आधुनिक इलाज रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी में उपलब्ध है। डॉ. नवनीत मग्गो के द्वारा इस विषय में लिखे गए विज्ञान पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और पुस्तकों में प्रकाशित हुए हैं।