सीएस ने अधिकारियों की एसीआर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लिखने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि विभाग द्वारा वर्ष 2021-22 से अपने अधिकारियों की एसीआर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लिखी जाएं। उन्होंने कहा कि इस सुविधा को राज्य सरकार द्वारा मॉडल के रूप में प्रदेश के पीसीएस अधिकारियों के लिए प्रदेश में लागू किया गया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग द्वारा अपनी विभागीय आवश्यकताओं के अनुसार इस प्रारूप को मॉडिफाई करते हुए अपने विभागों में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे एसीआर लिखे जाने की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूर्ण किया जा सकेगा। विभागों द्वारा इस पहल के क्रियान्वयन की मुख्य सचिव द्वारा लगातार समीक्षा की जाएगी।
मुख्य सचिव डॉ. सन्धु द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देश के अनुक्रम में सचिव कार्मिक अरविन्द सिंह ह्यांकी द्वारा उत्तराखण्ड प्रान्तीय सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि आई.एफ.एम.एस. पोर्टल पर ऑनलाइन किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड प्रान्तीय सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि का अंकन वर्ष 2021-22 से ऑनलाइन प्रक्रिया हेतु समय-सीमा भी निर्धारित की गयी है, ताकि वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि निर्धारित समय-सीमा के अन्तर्गत पूर्ण की जा सके।
सचिव ह्यांकी ने बताया कि प्रशासकीय/कार्मिक विभाग द्वारा ऑनलाइन मूलभूत सूचनाएं निर्गत किए जाने की अंतिम तिथि 31 मई एवं सम्बन्धित अधिकारी द्वारा स्वमूल्यांकन आख्या अंकित किए जाने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गयी है। प्रतिवेदक प्राधिकारी द्वारा मन्तव्य अंकित किए जाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई एवं स्वीकर्ता प्राधिकारी द्वारा मन्तव्य अंकित करने की तिथि 30 सितम्बर निर्धारित की गयी है। इसके साथ ही सम्बन्धित अधिकारी को वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि संसूचित किए जाने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर निर्धारित की गयी है।
सचिव ह्यांकी जारी आदेश में बताया कि यदि सम्बन्धित अधिकारी द्वारा स्वमूल्यांकन आख्या निर्धारित समयावधि में अंकित नहीं की जाती है तो ऐसी स्थिति में वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि पोर्टल द्वारा स्वतः ही प्रतिवेदक अधिकारी को और तदनुसार ही समीक्षक एवं स्वीकर्ता प्राधिकारी को भी निर्धारित समय सारणी के उपरान्त स्वतः ही पोर्टल द्वारा अग्रसारित हो जाएगी। प्रत्येक स्तर पर निर्धारित समय-सीमा के अन्तर्गत सम्बन्धित अधिकारी की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि के उपरोक्तानुसार संचरण की पोर्टल जनित सूचना एसएमएस व ई-मेल के माध्यम से सम्बन्धित अधिकारियों को भी प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि यदि सम्बन्धित अधिकारी द्वारा नियत तिथि के अन्दर स्वमूल्यांकन आख्या अंकित नहीं की जाती है तो प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा इसका उल्लेख अपने मन्तव्य में किया जाएगा और इस विषय में टिप्पणी सम्बन्धित सक्षम प्राधिकारी/अधिष्ठान द्वारा सम्बन्धित अधिकारी की सेवा पुस्तिका/व्यक्तिगत पत्रावली में संरक्षित की जाएगी। इसके साथ ही, यदि प्रतिवेदक/समीक्षक/स्वीकर्ता प्राधिकारी समय से प्रविष्टि अंकन सम्बन्धी अपने दायित्व निवर्हन में विफल रहते हैं तो इस विषय में टिप्पणी भी सम्बन्धित सक्षम प्राधिकारी/अधिष्ठान द्वारा सम्बन्धित प्रतिवेदक/समीक्षक/स्वीकर्ता प्राधिकारी की सेवा पुस्तिका/व्यक्तिगत पत्रावली में संरक्षित की जाएगी।

सीएस ने रोजगार संबंधी प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रधानमंत्री इम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की समीक्षा की।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारी इन योजनाओं के लिए विशेष अभियान चलाएं ताकि अधिक से अधिक लोग इन महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने बैंकों को भी निर्देश दिए कि निर्धारित टारगेट को पूर्ण करने के लिए 15 दिसंबर तक आवेदन को स्वीकृत करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों को छोटी-छोटी त्रुटियां दूर करके स्वीकृत किया जा सकता है, ऐसे आवेदनों में विशेष फोकस किया जाए, ताकि रिजेक्शन कम से कम हो।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि एप्लीकेशन की स्क्रूटिनी के लिए एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार करें ताकि क्वालिटी एप्लीकेशन बैंकों तक जाएंगी, इससे भी आवेदनों का रिजेक्शन कम से कम होगा। उन्होंने उद्योग मित्र बैठकों को लगातार आयोजित किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि मैदानी क्षेत्रों में प्रत्येक माह एवं पर्वतीय जनपदों ने प्रत्येक 2 माह में उद्योग मित्र बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या के लिए टाइम बाउंड सॉल्यूशन किए जाने की आवश्यकता है, तभी किसी योजना का अधिक से अधिक लाभ अर्जित किया जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को उद्योगों को स्थापित करने हेतु लैंड बैंक बनाए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि हमें सॉल्यूशन फाइंडर की भूमिका निभानी है, तभी किसी समस्या का हल निकाला जा सकेगा।
मुख्य सचिव ने बैंकों से भी कहा कि जिन योजनाओं के लिए बैंक लोन चुकाने का समय 15 साल निर्धारित किया गया है, बहुत से बैंक उन योजनाओं के लिए 5 से 7 साल के लिए ही ऋण दे रहे हैं। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के लिए ही ऋण दिया जाए, तभी आवेदक योजनाओं का लाभ लेने को प्रोत्साहित होंगे। उन्होंने कहा कि इन सभी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य बेरोजगारी को कम करना है। हमारा टारगेट अधिक से अधिक बेरोजगारों को इन योजनाओं का लाभ दिलाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
इस अवसर पर सचिव अमित नेगी, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारियों सहित बैंकों के सम्बन्धित उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे।

मिलावट से संबंधित मामलों की फास्ट ट्रैक में हो सुनवाई-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने गुरुवार को सचिवालय में खाद्य पदार्थों में मिलावट के सम्बन्ध में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए ठोस योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरों को एहसास कराना आवश्यक है कि आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने टेस्टिंग लैब निर्माण में तेजी लाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही, खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए अभियान चलाए जाएं। यह अभियान सिर्फ त्यौहारी सीजन को देखते हुए न हो, बल्कि इसे नियमित आधार पर चलाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि फूड एडल्ट्रेशन को रोकने के लिए सख्त से सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक इसके प्रति आमजन जागरूक नहीं होगा तब तक फूड एडल्ट्रेशन को रोकना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरों की जानकारी देने वालों को रिवार्ड भी दिया जाना चाहिए ताकि लोग जानकारी देने को प्रोत्साहित हों।
मुख्य सचिव ने मिलावट से संबंधित मामलों की जनपदवार रिपोर्ट उपलब्ध कराए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि यह भी बताया जाए कि किस जनपद में कितने मामले कब से पेंडिंग हैं। उन्होंने मिलावट से संबंधित सभी मामलों को फास्ट ट्रैक पर निपटाने के निर्देश दिए। कहा कि मिलावट के गंभीर मामलों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र से शीघ्र फैसला किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि नियमित जांच और कठोर कार्रवाई से ही खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी को रोका जा सकता है। उन्होंने इसके लिए ठोस एक्शन प्लान के साथ ही इसके कार्यान्वयन की टाइम लाइन निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव अमित नेगी एवं कमिश्नर फूड सेफ्टी डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

पर्यटन गतिविधियों से रोजगार बढ़ाने को मुख्य सचिव ने की समीक्षा

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में पर्यटन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि माउंटेनियर्स और ट्रैकर्स के लिए रिस्टबैंड की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें सैटेलाईट व अन्य माध्यमों से उनकी लोकेशन की जानकारी मिल सके। सर्च ऑपरेशन्स में इससे काफी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहियों एवं ट्रैकर्स की सुरक्षा के लिए अन्य आवश्यक इंतजाम भी सुनिश्चित किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा सीजनल होती है, परन्तु ऑफ सीजन टूरिज्म की व्यापक सम्भावनाएं है। इन्हें तलाशते हुए योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले कनेक्टिविटी पर कार्य किया जाए। हेलीपैड्स एवं हेलीपोर्ट्स के निर्माण पर शीर्घ से शीघ्र कार्य किया जाए। पर्यटन स्थलों में हेलीपैड्स विकसित करने के लिए प्राथमिकता तय की जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पर्यटन विकास की बहुत अधिक सम्भावनाएं हैं, परन्तु कनेक्टिविटी के कारण पिछड़ रहे हैं, उन क्षेत्रों में प्राथमिकता पर फोकस किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि यात्रा मार्गों पर हर 20-30 किलोमीटर पर पानी व टॉयलेट आदि की सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं, ताकि यात्रियों और आमजन को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए सुचारू संचालन के लिए छोटी-छोटी शॉप्स आदि की व्यवस्था की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों पर सभी उम्र के पर्यटकों के अनुसार सुविधाएं विकसित की जानी चाहिए। युवा वर्ग टेक्नोलॉजी का बहुत प्रयोग करता है। युवाओं को प्रत्येक जानकारी फोन पर चाहिए इसके लिए ऐसी ऐप और वेबसाईट तैयार की जाए जिस पर हर प्रकार की जानकारी उपलब्ध हो, परन्तु वृद्धों के लिए ऑफलाईन जानकारियों की व्यवस्था भी रखी जाए। ऐप और वेबसाईट को सिटीजन फ्रेंडली एवं ईज़ी टू यूज बनाया जाए। पर्यटन स्थलों को बच्चों के सैर-सपाटे के अनुरूप भी विकसित किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्रों में पर्यटन की सम्भावना होने के बावजूद, सुविधाओं के अभाव के कारण यह सब सम्भव नहीं हो पा रहा है, वहां रिसोर्ट विकसित किए जा सकते हैं, जिन्हें शुरुआत में जीएमवीएन एवं केएमवीएन के माध्यम से चलाकर प्रॉफिट गेनिंग होने पर बेचा जा सकता है और उस पैसे से नई जगह डेवेलप की जा सकती हैं। इससे प्रदेश में अनेक पर्यटन स्थल विकसित हो जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए।
मुख्य सचिव ने सभी कार्य योजनाओं पर समयबद्धता के साथ कार्य किया जाए। प्रत्येक कार्य के लिए समयसीमा पूर्व में ही निर्धारित की जाएं। प्रत्येक योजना को साप्ताहिक अथवा पाक्षिक मॉनिटरिंग की जाए, ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण हो सके। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मार्केटिंग और पब्लिसिटी पर भी विशेष फोकस किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव युगल किशोर पंत एवं सीईओ युकाडा स्वाति भदौरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

परिवहन निगम को बसों के फेरे बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए-सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने गुरुवार को सचिवालय में परिवहन विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग को अपग्रेड करने के लिए अन्य प्रदेशों द्वारा अपनायी जा रही बेस्ट प्रेक्टिसिस का अध्ययन कर प्रदेश में भी लागू किया जाए।
मुख्य सचिव ने डग्गामारी को रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सेंट्रलाइज्ड कन्ट्रोल रूम तैयार किया जाए। साथ ही, मॉनिटरिंग एवं सर्विलांस सिस्टम का आधुनिकीकरण करते हुए एनपीआर कैमरा इंस्टॉलेशन कार्य में तेजी लायी जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले दिनों डग्गामारी पर लगाम लगाए जाने से अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। डग्गामारी रूकने से परिवहन निगम की बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने परिवहन निगम को बसों के फेरे बढ़ाए जाने हेतु प्रयास किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में सी.एन.जी. एवं इलेक्ट्रिक बसें चलाए जाने पर फोकस किया जाए।
मुख्य सचिव ने लीकेजिज को रोकने हेतु विशेष प्रयास किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिना टिकट यात्रा और डीजल चोरी पर भी लगाम लगाए जाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही मेंटेनेंस के लिए वर्कशॉप के मॉर्डनाइजेशन पर भी ध्यान दिए जाने की बात कही।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, मनीषा पंवार, सचिव परिवहन डॉ. रंजीत सिन्हा, प्रबन्ध निदेशक परिवहन निगम डॉ. नीरज खैरवाल सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने मंगलवार को सचिवालय में खाद्य पदार्थों में मिलावट के सम्बन्ध में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को लोगों की जिन्दगी से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सख्त कदम उठाते हुए, इसे राज्य की प्राथमिकता बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए अभियान चलाया जाए। यह अभियान सिर्फ त्यौहारी सीजन को देखते हुए न हो, बल्कि इसे नियमित आधार पर चलाया जाए।

मुख्य सचिव ने फूड टेस्टिंग लैब बढ़ाए जाने के दिए निर्देश
मुख्य सचिव ने कहा कि अभी राज्य में एक ही फूड टेस्टिंग लैब है, जो कि रूद्रपुर में है। उन्होंने अधिकारियों को देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी में भी फूड टेस्टिंग लैब खोले जाने के नर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गढ़वाल एवं कुमाऊं हेतु एक-एक मोबाईल फूड टेस्टिंग लैब की व्यवस्था भी की जाए। साथ ही, फूड एडल्ट्रेशन को रोकने के लिए सख्त से सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स के माध्यम से लोगों में जागरूकता फैलायी जाए। उन्होंने कहा कि जब तक इसके प्रति आमजन जागरूक नहीं होगा तब तक फूड एडल्ट्रेशन को रोकना आसान नहीं होगा।

मिलावट को रोकने के लिए बनाए गए नियमों का अनुपालन हो सुनिश्चित
मुख्य सचिव ने होटल व्यवसायियों को स्वच्छता रेटिंग के लिए प्रोत्साहित किया जाए, इसके लिए होने वाले व्यय को सरकार द्वारा वहन किए जाने हेतु प्रस्ताव लाया जाए। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए बनाए गए नियमों और मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए पोर्टल बेस्ड मॉनिटरिंग की जाए। होटल व्यवसायियों को इसके लिए जागरूक किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि नियमित जांच और कठोर कार्रवाई के अभाव में मिलावट पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए लगातार सघन निरीक्षण अभियान के साथ ही मिलावटखोरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर उदाहरण पेश किया जाए ताकि लोगों में मिलावटखोरी के प्रति भय हो, और इसे रोका जा सके।
इस अवसर पर सचिव अमित नेगी एवं कमिश्नर फूड सेफ्टी डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

केन्द्रीय योजनाओं का राज्य विकास में बेहतर सदुपयोग करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी।
मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की वस्तुस्थिति का विवरण प्राप्त करते हुए निर्देश दिये कि केन्द्रीय योजनाओं का राज्य विकास में बेहतर सदुपयोग और राज्य की जनता को उसका समुचित लाभ दिलाने के लिए उनका गंभीरता से और संजीदगी से इम्प्लीमेंटेशन करें। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन में जिस स्तर पर जो भी विभिन्न बाधाएं आ रही हैं उनको तत्काल दूर करें।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि सभी विभाग अपने सभी कार्यों का वार्षिक कैलेण्डर बनायें तथा उसके अनुरूप कार्य करें। कहा कि भारत सरकार से प्राप्त होने वाले वित्त के समुचित सदुपयोग करने के लिये विभागीय स्तर पर की जाने वाली जरूरी प्रक्रियाओं को पहले ही पूरा कर लें। उसको अंतिम समय (जीरो टाइम) के लिए लम्बित ना रखें।
विकास कार्यों से सम्बन्धित जो प्रस्ताव भारत सरकार को अगले वर्ष जाने हैं उन सभी की विभागीय और राज्य स्तर पर की जाने वाली विभिन्न औपचारिकताएं पहले से ही पूरे कर लें ताकि भारत सरकार से सम्बन्धित योजना और मद में शीघ्रता से पैसा प्राप्त हो सके।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि सभी विभाग मासिक भौतिक प्रगति व विभागीय प्रगति रिपोर्ट इत्यादि नियोजन विभाग के ई-आकलन पोर्टल पर निर्धारित प्रारूप में प्रेषित करें। कहा कि आगे से नियोजन विभाग के पोर्टल में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ही विभागों के कार्यों की समीक्षा की जायेगी। उन्होंने कहा कि वे सबसे कम प्रगति की 10 योजनाओं की मासिक समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन भी विभागों के भारत सरकार के स्तर पर विभिन्न कारणों से विकास योजनाओं से सम्बन्धित मुद्दे लम्बित हैं उनका विवरण नियोजन विभाग को उपलब्ध करवायें तथा भारत सरकार में स्थानीय आयुक्त से भी उसका नियमित रूप् से अपडेट करवायें। इसके अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी विभागों को केन्द्रीय स्कीमों के उपयोगिता प्रमाण पत्र यथाशीघ्र भारत सरकार को प्रेषित करने के विभागों को निर्देश दिये। जिससे उन योजना और मदों में शीघ्रता से पैसा प्राप्त हो सके। कहा कि इस संबंध में विभाग भारत सरकार स्तर पर लगातार पहल भी करते रहें।
इस दौरान बैठक में अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार व आनन्द बर्द्धन, सचिव नितेश झा, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, शैलेश बगोली, एच.सी. सेमवाल, बी.एस. मनराल, एस.ए. मुरूगेशन, प्रभारी सचिव विनोद कुमार सुमन, डॉ. वी षणमुगम सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बांध परियोजनाओं की समीक्षा, सीएस बोले-विस्थापन कार्यों को तेजी से निपटाये अधिकारी

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने सोमवार को सचिवालय में जमरानी बाँध पेयजल बहुद्देश्यीय परियोजना एवं सौंग बाँध पेयजल बहुद्देश्यीय परियोजना की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने दोनों परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने दोनों परियोजनाओं के पूर्ण किए जाने हेतु प्रत्येक कार्य के लिए टाईमलाईन निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के सभी कार्यों एवं समस्याओं के निस्तारण को प्राथमिकता पर लेते हुए परियोजनाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
मुख्य सचिव ने जमरानी बाँध एवं सौंग बाँध पेयजल बहुद्देश्यीय परियोजना के विस्थापन एवं पुनर्वास कार्यों हेतु तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सौंग बाँध हेतु फॉरेस्ट क्लीयरेंस, एनवायरमेंट क्लीयरेंस एवं वन्यजीव क्लीयरेंस आदि के लिए लगातार प्रयास किए जाएं, साथ ही, जमरानी बाँध हेतु फॉरेस्ट स्टेज-2 क्लीयरेंस एवं नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी से क्लीयरेंस के कार्य में भी तेजी लाई जाए।
बैठक में बताया गया कि जमरानी बाँध के फेज-1 का कार्य, जिसमें गोला बैराज का निर्माण एवं 40 किमी लम्बी नहरों का निर्माण शामिल है, वर्ष 1981 में पूर्ण हो गया था। फेज-2 में 150.6 मी हाई रोलर कॉम्पैक्टेड कॉन्क्रीट डैम प्रस्तावित है, जिससे 117 एमएलडी पेयजल के साथ ही 14 मेगावॉट विद्युत उत्पादित होगी। परियोजना हेतु सेंट्रल वाटर कमिशन, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी एवं जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय सहित फॉरेस्ट स्टेज-1 की स्वीकृति और पर्यावरणीय स्वीकृतियां ले ली गयी हैं। फॉरेस्ट स्टेज-2 क्लीयरेंस एवं नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी से क्लीयरेंस शीघ्र ही प्राप्त की ली जाएगी।
बताया गया कि सौंग बाँध पेयजल बहुद्देश्यीय परियोजना के द्वारा देहरादून शहर और आसपास के क्षेत्र की 10 लाख की आबादी को गुरुत्व आधारित 150 एमएलडी पेयजल आपूर्ति की जा सकेगी। इस परियोजना से 3.5 किमी लंबी झील बनाएगी, जो पर्यटन की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण होगी। परियोजना हेतु हाईड्रोलॉजी क्लीयरेंस, भूवैज्ञानिक रिपोर्ट, जल परिवहन प्रणाली डिजाइन, फाउंडेशन इंजीनियरिंग और भूकंपीय पहलू सहित अन्य रिपोर्ट्स प्राप्त कर ली गयी हैं। परियोजना हेतु फॉरेस्ट क्लीयरेंस, एनवायरमेंट क्लीयरेंस एवं वन्यजीव क्लीयरेंस प्राप्त की जानी शेष हैं, जो शीघ्र प्राप्त कर ली जाएंगी।
इस अवसर पर सचिव हरि चन्द्र सेमवाल सहित मुख्य अभियंता सिंचाई मुकेश मोहन सही अन्य सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए बाजार उपलब्ध कराये-संधु

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने कहा कि किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराए जाने की दिशा में हर संभव प्रयास किए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के बदलाव के कारण अन्य प्रदेशों के द्वारा विकसित बीजों की सफलता की सम्भावना कम होती है। फसलों की नई वैरायटी विकसित करने हेतु प्रदेश स्तर में ही प्रयास किए जाएं, इससे प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विकसित बीजों की सफलता का प्रतिशत होगा। उन्होंने दालों, पोषक अनाजों और तिलहन की खेती को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किए जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के बहुत से उत्पाद बाय-डिफॉल्ट ऑर्गेनिक हैं, हमें इनकी मार्केटिंग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। राज्य को जैविक प्रदेश के रूप में विकसित करने के लिए छोटे-छोटे क्षेत्रों में रासायनिक कीटनाशकों को प्रतिबन्धित करते हुए, इसकी शुरूआत करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसी ब्लॉक या छोटे क्षेत्र को ऑर्गेनिक एरिया घोषित करने पर शुरुआत में उत्पादन में कमी आ सकती है, किसानों को ऑर्गेनिक खेती हेतु प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से सपोर्ट किया जाए।
मुख्य सचिव ने योजना के तहत वितरित स्ट्रॉ रीपर के आउटकम पर अध्ययन कराए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि स्ट्रॉ रीपर का वितरण सफल रहा है तो इनकी संख्या बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि अच्छी योजनाओं के लिए फण्ड की कमी नहीं होने दी जाएगी। इन योजनाओं पर आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार से भी फण्ड उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि योजना के तहत चिन्हित जनपदों में चावल, गेहुं, मोटे अनाज, पोषक अनाज, तिलहन और गन्ने के उत्पादन को क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता को बढ़ावा देने के साथ ही इंडिविजुअल फॉर्म लेवल पर मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए यह योजना लागू की गयी है। बताया गया कि उत्तराखण्ड राज्य ने कैटेगरी-2 में 2011-12, 2016-17 और 2017-18 के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त किया है। इस अवसर पर सचिव आर.मीनाक्षी सुन्दरम सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बड़ी योजनाओं में पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) के तहत ऋषिकेश-कर्णप्रयाग न्यू रेलवे लाइन, देवबंद रुड़की न्यू रेल लाइन विष्णुगाड-तपोवन जल विद्युत परियोजना, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना एवं टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट के प्रगति की समीक्षा की। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के संबंध में मुख्य सचिव ने रेलवे अधिकारियों एवं जिला प्रशासन को आपसी तालमेल के साथ सभी पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को पेंडिंग कंपनसेशन डिस्बर्समेंट को मामलों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव द्वारा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट हेतु टीएचडीसी को माइनिंग प्लान शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण किए जाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में स्थानीय प्रतिरोध के हल के लिए ज्वाइंट विजिट कर निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के संबंध में मुख्य सचिव ने एनटीपीसी को निर्देश दिए कि आपदा से परियोजना कार्यों में हुई क्षति का आंकलन शीघ्र कराया जाए।
इस अवसर पर सचिव अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।