अगले 45 दिनों तक प्रदेश की प्रत्येक न्याय पंचायत के प्रत्येक पात्र नागरिक को 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। बैठक के दौरान ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ अभियान के तहत प्रदेशभर की विभिन्न न्याय पंचायतों में कैम्प लगाकर जन सामान्य को राज्य एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाए जाने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मूल उद्देश्य राज्य के प्रत्येक नागरिक तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

मुख्य सचिव ने कहा कि 17 दिसम्बर से अगले 45 दिनों तक प्रदेश की प्रत्येक न्याय पंचायत के प्रत्येक पात्र नागरिक को 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए प्रत्येक जनपद को रोस्टर तैयार कर कैम्प लगाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक को मिले इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने अंतर्गत न्याय पंचायतों की संख्या के आधार पर रोस्टर निर्धारित कर सकता है। कहा कि ज्यादा न्याय पंचायतों वाले जनपद इस अभियान को तब तक जारी रखेंगे जब तक सभी प्रदेशवासी योजनाओं के लाभ से संतृप्त नहीं हो जाते। उन्होंने कहा कि जनपद में अधिकारियों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक सप्ताह में 2 से 3 कार्य दिवसों में प्रत्येक तहसील की प्रत्येक न्याय पंचायत को संतृप्त किया जाना है।

मुख्य सचिव ने कहा कि कैम्प लगाए जाने से पहले न्याय पंचायत में इसका प्रचार प्रसार अनिवार्य रूप से कर लिया जाए ताकि कैम्प में पात्र अभ्यर्थी विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें, साथ ही अपने जरूरी दस्तावेज भी तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार के लिए सोशल मीडिया टूल का भी इस्तेमाल किया जाए ताकि लोगों को जानकारी रहे कि किस न्याय पंचायत में कौन-कौन से दिन कैम्प लगना है। उन्होंने निर्देश दिए कि कैम्प लगने से 2-3 दिन पूर्व उस न्याय पंचायत में अनिवार्य रूप से सभी प्रकार के आवेदन पत्र और जानकारी उपलब्ध करा दी जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारियों द्वारा कैम्प के उपरान्त न्याय पंचायत के आसपास के गांवों का भ्रमण कर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के पात्र अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र भरवाए जाएं। प्रयास किए जाएं कि न्याय पंचायत के सभी पात्र निवासीगण सरकारी जनहित की योजनाओं से संतृप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण की विभिन्न पेंशन योजनाओं, प्रमाण पत्रों और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लाभार्थियों का पंजीकरण आदि सहित कुल 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं का लाभ इस बहुद्देशीय कैम्प के पात्र लाभार्थियों को दिया जाना है। राज्य एवं जनपद स्तर बैंकर्स समिति को भी विभिन्न योजनाओं के तहत् ऋण लाभ के लिए इस कैम्प में शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रभारी सचिवों द्वारा अपने अधीन जनपदों में लगने वाले बहुद्देशीय कैम्पों का औचक निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कैम्प में आमजन की शिकायतों का तत्काल निस्तारण के निर्देश देते हुए लगातार इसकी मॉनिटरिंग किए जाने की भी बात कही। कहा कि प्रत्येक सप्ताह आयोजित कैम्पों की प्रगति आख्या मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय एवं सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को सभी आयोजित कैम्प का डेटाबेस तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कैम्प का डॉक्यूमेंटेशन के लिए एक ऐप तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्धांकी, डॉ. वी. षणमुगम एवं विनोद कुमार सुमन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

वर्चुअल रजिस्ट्री के पंजीकरण से समय की बचत होगीः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में परिसंपत्तियों यथा भूमि के क्रय-विक्रय का वर्चुअल रजिस्ट्रेशन करने के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों से वर्चुअल रजिस्ट्रेशन के कार्यों की प्रगति का स्टेटस लेते हुए निर्धारित टाइमलाइन में इसका क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि के क्रय-विक्रय का वर्चुअल रजिस्ट्रेशन पूर्ण करने के लिए सभी संबंधित हितधारकों से समन्वय स्थापित किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित एप्लीकेशन/पोर्टल में इस तरह का प्रावधान किया जाए कि भूमि के क्रय – विक्रय से संबंधित जितने भी दस्तावेज विभिन्न हितधारकों, विभागों, निकायों और एजेंसियों के बीच शेयर करने होते हैं वे सभी दस्तावेज ऑटो मोड पर और पेपरलेस प्रक्रिया से त्वरित गति से शेयर हो जाए।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तैयार होने से भूमि के क्रय- विक्रय में पारदर्शिता आएगी, विभिन्न विभागों, निकायों, एजेंसियों और हितधारकों के मध्य भूमि का एक जैसा और सही रिकॉर्ड साझा हो सकेगा तथा इससे भूमि के क्रय- विक्रय से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।

इस दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि संबंधित एप्लीकेशन बन चुकी है तथा इस संबंध में आज प्राप्त हुए मार्गदर्शन के अनुसार इसका थोड़ा मॉडिफिकेशन किया जाएगा। उसके पश्चात इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए टेंडरिंग प्रोसेस प्रारंभ की जाएगी।

अवगत कराया कि इस एप्लीकेशन /पोर्टल में भूमि के क्रय-विक्रय के संबंध में तीन तरह के विकल्प उपलब्ध रहेंगे।

पहले विकल्प के तहत भौतिक रूप से दस्तावेज सहित रजिस्ट्रेशन के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना होगा। दूसरे विकल्प के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन कार्यालय में बिना किसी दस्तावेज़ के (पेपरलेस) उपस्थित होकर रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा।

तीसरे विकल्प के अंतर्गत बिना किसी मीडिएटर के वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से भूमि की रजिस्ट्री की जा सकेगी।

कहा कि इस परियोजना को 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू करने के प्रयास किए जाएंगे।

इस दौरान बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव सोनीका व आलोक कुमार पांडेय, सहायक महानिरीक्षक निबंधक अतुल शर्मा, उपसचिव सुनील सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

देहरादून इंदिरा मार्केट व आढ़त बाजार के कार्यों में लायी जाए तेजीः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून शहर के मोबिलिटी प्लान से सम्बन्धित एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण की बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने देहरादून शहर के लिए यातायात संकुलन योजना की प्रगति की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित अधिकारियों को मोबिलिटी प्लान के तहत सुधारीकरण के लिए चिन्हित स्थानों में सुधार प्रक्रिया शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अगले एक माह में कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर एनफोर्समेंट बढ़ाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को लगातार इसकी मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए हैं ताकि कार्यों को समय से पूर्ण किया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि लगातार नई पार्किंग स्थल चिन्हित कर तैयार किए जाएं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को अंडरग्राउंड पार्किंग पर भी कार्य किए जाने की बात कही। कहा कि अंडरग्राउंड पार्किंग के लिए सचिवालय एवं परेड ग्राउंड के साथ ही चकराता रोड पर उपलब्ध स्थानों की फिजिबिलिटी स्टडी करवा ली जाए। उन्होंने सीएमपी में दिए गए सुझावों और नए चिन्हित सम्भावित पार्किंग स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने इंदिरा मार्केट एवं आढ़त बाजार के कार्यों की प्रगति की जानकारी भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने आढ़त बाजार भूमि आबंटन प्रक्रिया नवंबर तक पूर्ण कर शीघ्र अग्रेत्तर कार्यवाही शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इंदिरा मार्केट के फेज-1 और फेज-2 के कार्यों में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने दोनों कार्यों के लिए टाईमलाईन निर्धारित कर शीघ्र प्रस्तुत किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि नई बसें शीघ्र संचालित किए जाने के साथ ही यातायात नियमों के प्रति सजगता बढ़ाए जाने की दिशा में भी लगातार कार्य किए जाने पर बल दिया जाए।

इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, अपर सचिव विनीत कुमार, रीना जोशी, एमएनए नमामी बंसल एवं उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से बृजेश कुमार मिश्रा सहित संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

नर्सिंग कोर्स संचालन को संस्थानों के आवेदनों को विभिन्न स्तरों में सिंगल विंडो सिस्टम तैयार की जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नर्सिंग पाठ्यक्रम संचालन हेतु गठित एम्पावर्ड समिति की बैठक आयोजित हुयी। बैठक के दौरान समिति द्वारा विभिन्न मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों को नर्सिंग कोर्स संचालन एवं सीट वृद्धि की संस्तुति दी गयी।

मुख्य सचिव ने नर्सिंग कोर्स संचालन हेतु संस्थानों के आवेदनों को विभिन्न स्तरों में छंटनी करने के बजाय इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे संस्थानों को आवेदन करने से लेकर शासन से स्वीकृति की प्रक्रिया में सरलता आएगी। उन्होंने तत्काल इस दिशा में कार्य शुरू किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि संस्थानों द्वारा आवेदन किए जाने से लेकर विभिन्न चरणों की प्रक्रिया की एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी शीघ्र तैयार की जाए।

बैठक के दौरान समिति द्वारा 39 कॉलेजों की 1790 नई नर्सिंग सीट्स को संस्तुति प्रदान की गयी। सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि स्टेट नर्सिंग काउंसिल में वर्ष 2024 तक पंजीकृत नर्सों की कुल संख्या 21541 है। वर्तमान में सरकारी एवं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों में 9806 लोगों का नर्सिंग प्रशिक्षण चल रहा है।
इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीएस ने यूकॉस्ट और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग को इस दिशा में कारगर पहल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखंड में स्थित राष्ट्रीय महत्व के वैज्ञानिक संस्थानों का राज्य के हित में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार संवाद, बेहतर समन्वय व सतत सहयोग की व्यवस्था हेतु एक सुव्यवस्थित व सुसंगठित प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में आगामी 12 से 14 नवंबर तक विज्ञान धाम में प्रस्तावित छठे देहरादून इंटरनेशनल साईंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टीवल के पोस्टर एवं ब्रोशर का विमोचन करते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्य सचिव ने प्रस्तावित फेस्टीवल हेतु आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नित नई प्रगति होने से बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं। समाज और विशेषकर युवा पीढी को विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी से जोड़ने और इस क्षेत्र में आगे बढने के लिए प्रेरित करने में इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि टेक्नोलॉजी की जननी मौलिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य होने के नाते उत्तराखंड के लिए विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी अत्यधिक आवश्यक व महत्वपूर्ण है। देहरादून एवं उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्तर के कई वैज्ञानिक एवं शैक्षिक संस्थान मौजूद हैं, जिनका राज्य के हित में समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लिया जाता है। उत्तराखंड के हित में सभी महत्वपूर्ण संस्थानों का अधिकतम सहयोग व बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्य सचिव ने यूकॉस्ट और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग को इस दिशा में कारगर पहल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर सचिव उत्तराखंड शासन डॉ. आर. राजेश कुमार, चन्द्रेश यादव, दीपेन्द्र चौधरी, हेस्को के संस्थापक पद्मभूषण अनिल जोशी, उत्तराखंड पेट्रोलियम विश्वविद्यालय के वीसी राम शर्मा, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डीपी उनियाल आदि ने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन कुंवर राज अस्थाना ने किया।

सीएस बोले, राज्य में ईएसआईसी के अस्पताल खोलने कोे मानकों में ढील देने का प्रस्ताव तैयार कर क्षेत्रीय परिषद को भेजेंगे

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने उद्योगों से जुड़े प्रकरणों का तत्परता से निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा है कि राज्य में उद्योगों को समुचित सुविधाएं एवं बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए शासन प्रतिबद्ध है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को उद्योगों व उद्यमियों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय उद्योग मित्र समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने की हिदायत देते हुए कहा है कि तात्कालिक महत्व के मामलों में इन समितियों की बैठकों की प्रतीक्षा न कर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाय।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राज्य स्तरीय उद्योग मित्र समिति की प्राधिकृत समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने बैठक में राज्य के उद्यमियों एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत मामलों को विस्तार से सुनने के साथ ही उद्योगों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण प्रकरणों पर विस्तार से विचार-विमर्श कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यमियों के साथ सचिव वित्त द्वारा जीएसटी की नई व्यवस्था से संबंधित प्रकरणों को लेकर बैठक कर समस्याओं एवं शंकाओं का समुचित समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में ईएसआईसी के अस्पताल खोले जाने के मानकों में ढील देने का प्रस्ताव तैयार कर क्षेत्रीय परिषद को भेजा जाएगा। उन्होंने देहरादून जनपद में ईएसआईसी अस्पताल के लिए आवश्यक भूमि की व्यवस्था के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में उद्योगों की स्थापना व संचालन के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के साथ ही औद्योगिक आस्थानों में समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों और संगठनों को उद्योगों के लिए सभी आवश्यक अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने, बिजली की पर्याप्त व निर्बाध आपूर्ति करने तथा लॉजिस्टिक की बेहतर सुविधाएं देने के लिए भी कारगर कदम उठाने के निर्देश देते हुए कहा कि उद्यमियों द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों का समय से समाधान सुनिश्चित किया जाय।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, शैलेश बगोली, विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव विनीत कुमार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी गण एवं उद्योग संगठनों केे प्रतिनिधिगण व अनेक उद्यमी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने जलवायु लचीलापन व जल स्थिरता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने आज अंतर्राष्ट्रीय जल विज्ञान संघ (आईएएचएस) की बारहवीं वैज्ञानिक सभा का उद्घाटन किया। इस सभा में दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं नीति निर्माता सतत जल संसाधन प्रबंधन, जल विज्ञान संबंधी नवाचारों एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए। इस सभा में 49 देशों के 627 से अधिक प्रतिभागी और 682 वैज्ञानिक योगदान शामिल हैं, जो इसे आईएएचएस के इतिहास की सबसे बड़ी सभाओं में से एक बनाता है। सप्ताह भर चलने वाला यह कार्यक्रम जल स्थिरता एवं जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक चर्चाओं, कार्यशालाओं व नेटवर्किंग के माध्यम से वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देगा।

मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य सचिव उत्तराखण्ड, आनंद बर्द्धन ने सत्र का उद्घाटन किया और जल विज्ञान अनुसंधान और इसके सामाजिक अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाने में उनके वैश्विक योगदान के लिए आईआईटी रुड़की एवं आईएएचएस की सराहना की। मुख्य सचिव बर्द्धन ने कहा, जल विज्ञान जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है। आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान वैश्विक ज्ञान को स्थानीय समाधानों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो समुदायों और नीति निर्माताओं दोनों को सशक्त बनाते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं आईआईटी रुड़की कुलगीत के साथ हुई, जिसके बाद प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों ने अपने संबोधन दिए, जिनमें आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, आईएएचएस के अध्यक्ष प्रो. साल्वातोरे ग्रिमाल्डी, आईएनएसए के उपाध्यक्ष एवं सीएसआईआर-एनईआईएसटी के निदेशक डॉ. वी.एम. तिवारी, आईएएचएस एसए 2025 के अध्यक्ष प्रो. सुमित सेन तथा संयोजक प्रो. अंकित अग्रवाल शामिल थे।

आईआईटी रुड़की में आयोजित यह आईएएचएस वैज्ञानिक सभा नवाचार, सहयोग एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से वैश्विक जल चुनौतियों के समाधान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह जल विज्ञान अनुसंधान एवं सतत जल प्रबंधन में भारत की अग्रणी भूमिका को सुदृढ़ करती है। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा, मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह छह दिवसीय सभा नए विचारों, दीर्घकालिक साझेदारियों और परिवर्तनकारी नवाचारों को प्रेरित करेगी, जो जल विज्ञान एवं समाज दोनों के लिए सार्थक योगदान देंगी। सत्र के दौरान आईएएचएस वैज्ञानिक सभा 2025 की कार्यवाही का विमोचन भी किया गया, जो एक सप्ताह तक चलने वाले वैज्ञानिक विचार-विमर्श, तकनीकी सत्रों, प्रदर्शनी एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगों की शुरुआत का प्रतीक है।

अगले तीन माह में करें एक वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों के निस्तारणः बर्द्धन

मुख्य सचिव एवं अध्यक्ष राजस्व परिषद आनन्द बर्द्धन ने राजस्व परिषद सभागार में जिलाधिकारियों के साथ राजस्व वादों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि धारा 34 एवं 143 से सम्बन्धित एक वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को अगले तीन माह में निपटारा कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को धारा – 34 और 143 से सम्बन्धित वादों में गंभीर अनियमितताओं पर तत्काल विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने तहसीलदार विकास नगर को वादों के निस्तारण में धीमी गति पर कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वादों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की कोताही न की जाए।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में ऑनलाइन म्यूटेशन प्रक्रिया लागू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरसीएमएस पोर्टल शीघ्र ही पूर्णतः संचालित होने लगेगा। इससे रजिस्ट्री होते ही तत्काल म्यूटेशन की प्रक्रिया पूर्ण हो सकेगी। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को तहसील मुख्यालयों एवं एसडीएम कार्यालयों में भी ई-ऑफिस शीघ्र लागू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां नेटवर्क एवं हार्डवेयर की अनुपलब्धता है, शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं।

मुख्य सचिव ने जनपदों में कार्मिकों के स्थानान्तरण हो जाने के बावजूद जनपदों से कार्यमुक्ति न दिए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बैठक समाप्ति के तत्काल बाद सभी स्थानान्तरित कार्मिकों को कार्यमुक्त किया जाए एवं जनपदों द्वारा आज शाम तक कार्यमुक्ति से सम्बन्धित प्रमाण पत्र उपलब्ध करा कर अवगत कराया जाए।

मुख्य सचिव ने राजस्व वसूलियों से सम्बन्धित समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। उन्होंने दोनों मंडलों के आयुक्तों को भी अपनी मासिक बैठकों में राजस्व वादों एवं राजस्व वसूली से सम्बन्धित मामलों की समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेवेन्यू रियलाइजेशन कमिटी, वन, वाणिज्य, रजिस्ट्रेशन और आरसीएस से सम्बन्धित बैठकों को भी नियमित रूप से आयोजित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने आपदा से क्षतिग्रस्त पटवारी चौकियों एवं तहसील भवनों का आंकलन शीघ्र भेजे जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रमोशन के पदों के लिए पात्र कार्मिकों की प्रमोशन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए, ताकि पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार आदि के पदों को शीघ्र भरा जा सके और वादों के निस्तारण में तेजी आए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि सेवा का अधिकार के अंतर्गत समस्त प्रमाणपत्रों के निर्गत किए जाने की समय सीमा का उल्लेख सम्बन्धित कार्यालयों के सम्मुख अनिवार्य रूप से चस्पा की जाए, ताकि आवेदकों को, उनके द्वारा आवेदित प्रमाण पत्र कब तक उपलब्ध हो जाएंगे, इसकी जानकारी मिल सके।

इस अवसर पर सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपदों से जिलाधिकारी एवं आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत उपस्थित थे।

सीएस ने प्रदेश की 13 ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगाने को वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को जिम्मेदारी दी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान, जीएसआई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, सेंट्रल वॉटर कमीशन आदि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ लैंड स्लाइड न्यूनीकरण के सम्बन्ध में बैठक की। बैठक के दौरान सभी वैज्ञानिक संस्थानों के साथ भूस्खलन न्यूनीकरण की समस्याओं के निराकरण पर चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने सभी वैज्ञानिक संस्थानों को प्रदेश के अंतर्गत भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर एक प्रिडिक्शन मॉडल तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें एक इस प्रकार के मैकेनिज्म को तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो सैटेलाइट इमेज और धरातल परीक्षण के बाद तैयार मॉड्यूल के आधार पर यह पूर्वानुमान लगा सके कि कितनी वर्षा होने पर किसी विशेष स्थान के भूस्खलन की संभावना है, ताकि हम निचले स्थानों को खाली कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा सकें।

मुख्य सचिव ने इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान एवं सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को मिलकर इस दिशा पर कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में वृहत स्तर पर और तत्काल कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने प्रदेश की 13 ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगवाए जाने हेतु वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में प्रदेश की 6 संवेदनशील झीलों का सैटेलाइट एवं धरातलीय परीक्षण कर सेंसर स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील झीलों की संवेदनशीलता किस प्रकार से कम की जा सकती है, इस दिशा में भी कार्य किए जाना है। उन्होंने कहा कि वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल वॉटर कमीशन, यू-सैक आदि आवश्यक वैज्ञानिक संस्थानों की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने वाडिया संस्थान को आश्वासन दिया कि इस कार्य के लिए आवश्यक फंड्स की किसी प्रकार से कमी नहीं होने दी जाएगी और उपलब्ध करायी जाएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह एक मल्टी इंस्टीट्यूशनल टास्क है। इसे हम सभी को गंभीरता के साथ तत्काल इस दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सचिव विनोद कुमार सुमन, आईजी एसडीआरएफ अरुण मोहन जोशी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल वॉटर कमीशन के वैज्ञानिक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने जीबी कृषि विश्वविद्यालय को प्रदेश के लिए कार्बन क्रेडिट एजेंसी के रूप में कार्य करने पर दिया बल

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग समिति की बैठक दिसंबर माह एवं राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति की यह बैठक मार्च माह में कराये जाने के निर्देश दिये, ताकि अप्रैल से प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो सके।

मुख्य सचिव ने कृषि विभाग द्वारा मालियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए स्किल इंडिया के एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया को कोर्स और सिलेबस को एडॉप्ट कर इस डिप्लोमा कोर्स की महत्त्व बढ़ाया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जनपद अपने अपने क्षेत्र में फार्म मशीनरी बैंकों का मूल्यांकन कराएं। कहा कि फार्म मशीनरी बैंकों के आने के बाद उत्पादकता में क्या प्रभाव पड़ा इसका आंकलन तैयार कराया जाए।

मुख्य सचिव ने जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय को प्रदेश के लिए कार्बन क्रेडिट एजेंसी के रूप में कार्य किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश कार्बन क्रेडिट की दिशा में बहुत कुछ कर सकता है, इसके लिए जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य सचिव ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार को ग्राफ्टिंग की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वॉलनट के ग्राफ्टेड प्लांट्स की प्रदेश में अत्यधिक मांग है, जिसे बाहर से सप्लाई कराना पड़ता है। उन्होंने विश्वविद्यालय को इस दिशा में शीघ्र कार्य किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने इन सभी प्रोजेक्ट्स के आउटकम इंडिकेटर्स निर्धारित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी प्रोजेक्ट्स समय पर पूर्ण हों इसके लिए सभी स्टेज की समयसीमा निर्धारित की जाएं।

इस अवसर पर सचिव श्रीधरबाबू अद्दांकी, डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. एस.एन. पाण्डेय, वीसी वीसीएसजी औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार डॉ. परविंदर कौशल, अपर सचिव आनन्द श्रीवास्तव, नवनीत पाण्डेय सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।