गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर मास्टर प्लान के लिए एंकर विभाग पर्यटन विभाग होगाः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में चंपावत में गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर मास्टर प्लान के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर मास्टर प्लान के लिए एंकर विभाग पर्यटन विभाग होगा। उसमें आने वाले कम्पोनेंट के लिए सम्बन्धित विभाग कार्यदायी संस्था होंगे। उन्होंने अगले 15 दिन में गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर मास्टर प्लान को फाइनल किए जाने के निर्देश पर्यटन विभाग को दिए।

मुख्य सचिव ने गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर मास्टर प्लान में आने वाले समय में पीक टाईम का अधिकतम पर्यटकों की संख्या के अनुसार पार्किंग एवं रूकने की व्यवस्था आदि का आंकलन करते हुए प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सेंट्रल प्लाजा को ओपन एरिया की तर्ज पर बनाया जाए। उन्होंने प्रत्येक शहर में सेंट्रल प्लाजा बनाए जाने की भी बात कही। उन्होंने इसके लिए सचिव शहरी विकास को शहरी निकायों में सेंट्रल प्लाजा की तर्ज पर ओपन एरिया विकसित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि लोहाघाट एवं चम्पावत को ट्विन सिटी के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने चम्पावत और लोहाघाट के आसपास के सम्भावित पर्यटन स्थलों को भी तलाशकर विकसित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने लोहाघाट के पास श्यामलाताल सहित अन्य पर्यटन क्षेत्रों को साथ-साथ विकसित किए जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि चम्पावत में बनायी जा रही साइंस सिटी का कार्य भी तेजी से पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रत्येक जनपद में एक-एक साइंस सिटी बनाए जाने की बात कही। कहा कि प्रत्येक साइंस सिटी के लिए एक-एक मेंटर भी निर्धारित किया जाए, ताकि साइंस सिटी को रखरखाव एवं अपग्रेडेशन का कार्य नियमित रूप से चलता रहे।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव नितेश कुमार झा, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल, नवनीत पाण्डेय एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार उपस्थित थे।
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सीएस ने ली शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट्स के सम्बन्ध में बैठक
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट्स के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट्स को पीएम गतिशक्ति उत्तराखण्ड पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि अभी तक 44 विभागों ने लगभग 15000 करोड़ की लागत के 1020 शेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट्स पोर्टल पर अपलोड किए हैं।

मुख्य सचिव ने सभी विभागीय सचिवों को अपने प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रोजेक्ट्स की स्क्रूटनी के लिए वित्त एवं नियोजन सहित प्रशासकीय विभाग द्वारा संवीक्षा करते हुए स्वीकृति दी जाएगी और प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यथार्थवादी प्रस्तावों को ही स्वीकृति दी जाएगी।

मुख्य सचिव ने पोर्टल के माध्यम से ही इन प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग किए जाने की बात कही। कहा कि प्रोजेक्ट किस स्टेज में है, यह विभाग और शासन सभी को जानकारी मिलती रहेगी। उन्होंने सचिव आईटी को ई-ऑफिस और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग दोनों पोर्टल को शीघ्र इंटीग्रेट किए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, डॉ.बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनय शंकर पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी, दीपेन्द्र कुमार चौधरी एवं धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में हुई सिंचाई विभाग के जलाशयों में जमा सिल्ट को निकाले जाने के संबंध में बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सिंचाई विभाग के जलाशयों में जमा सिल्ट को निकाले जाने के संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित हुई।

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन जलाशयों में अधिक मात्रा में सिल्ट जमा हो चुका है तथा जिससे उसकी धारण क्षमता में अत्यधिक कमी आई है उनके सिल्ट को निकालने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रस्तुत करें। जिससे जलाशयों की धारण क्षमता में वृद्धि हो जाए तथा उसके डाउनस्ट्रीम में किसी भी तरह के जलभराव की आशंका न रहे।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सिल्ट निकालने के लिए फॉरेस्ट रिजर्व क्षेत्र के मानक का पालन करते हुए प्रस्ताव तैयार करें तथा इसके लिए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की जैसे संस्थान से स्टडी करवाना भी सुनिश्चित करें। ताकि सिल्ट निकालने की प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से संपन्न की जा सके।

बैठक में सचिव युगल किशोर पंत, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन रंजन कुमार मिश्रा, सिंचाई विभाग से सुभाष चंद्र पांडेय, मुख्य महाप्रबंधक जल संस्थान डी. के. सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सभी विभाग अपने विभागीय कार्यों का आउटपुट इंडिकेटर तैयार करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी सचिवों के साथ सचिव स्तर की समीक्षा बैठक आयोजित करते हुए संबंधित विभागों को विभिन्न मुद्दों के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को निर्देशित किया कि शहरी क्षेत्रों की ऐसी सभी बड़ी परियोजनाओं का विवरण तैयार करें जिनका अतिशीघ्र लोकार्पण अथवा शिलान्यास किया जाना हो।

उन्होंने भारत सरकार से साझा किए जाने वाले विभिन्न विभागीय प्रकरणों का स्टेटस तैयार करने तथा उसको भारत सरकार को प्रेषित करने को कहा।

मुख्य सचिव ने विभागों के आउटपुट इंडिकेटर की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने विभागीय कार्यों का आउटपुट इंडिकेटर तैयार करें।

विभागीय कार्यों में नई तकनीक का समावेश अथवा किसी अभिनव प्रयोग से कितना सुधार हुआ है, इसका तुलनात्मक विवरण तैयार करने को कहा।

उन्होंने सभी सचिवों को अपने विभागीय कार्यों का वर्क प्लान बनाते हुए उसका अनुमोदन करवाने के भी निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि जो विभाग कार्बन क्रेडिट का लाभ लेने की स्थिति में हैं वे अपने क्रियान्वयन में कार्बन क्रेडिट का लाभ लेने का प्रयास करें तथा इससे संबंधित विवरण भी तैयार करें।

बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु व एल एल फैनई, शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, दिलीप जावलकर, डॉ रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. श्रीधर बाबू अद्यंकी, चंद्रेश यादव, डॉ आर राजेश कुमार, एस एन पांडेय, दीपेंद्र कुमार चौधरी, दीपक कुमार, वी षणमुगम, विनोद कुमार सुमन, सी रविशंकर, रणवीर सिंह चौहान, नीरज खैरवाल, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गबर्याल, अपर सचिव विजय कुमार जोगदंडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड ग्रीन परिवहन की अवधारणा को साकार करने को बेहतर इंसेंटिव प्रावधानों को पॉलिसी में शामिल करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों द्वारा उत्तराखंड की इलेक्ट्रिक वाहन (मैन्युफैक्चरिंग एंड परचेजिंग) पॉलिसी- 2025 का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया।

उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन के अनुकूल इकोसिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही ईवी पॉलिसी के विभिन्न आयामों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

उत्तराखंड ग्रीन परिवहन की अवधारणा को साकार करने के लिए बेहतर इंसेंटिव प्रावधानों को पॉलिसी में शामिल करेंः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि उत्तराखंड में ग्रीन परिवहन की अवधारणा को साकार करने तथा मा. प्रधानमंत्री के इलेक्ट्रिक वाहन के संबंध में 2030 तक के लक्ष्य के अनुरूप पॉलिसी में मैन्युफैक्चरर, उपभोक्ता और संचालक सभी के लिए बेहतर इंसेंटिव का प्रावधान शामिल करें जिससे इलेक्ट्रिक वाहन का एक बेहतर इकोसिस्टम डेवलप हो सके।

उन्होंने बेहतर इंसेंटिव के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन के अनुकूल में आने वाले अवरोधों के त्वरित समाधान के लिए पॉलिसी में प्रभावी और त्वरित निगरानी तंत्र का प्रावधान करने के भी निर्देश दिए।

सचिव विनय शंकर पांडेय और परिवहन विभाग द्वारा प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए इस पॉलिसी में मैन्युफैक्चरर से लेकर उपभोक्ता, संचालक और चार्जिंग स्टेशन स्थापन इत्यादि के लिए बेहतर इंसेंटिव का प्रावधान किया जा रहा है। कहा कि इस पॉलिसी में कार्बन क्रेडिट बेनिफिट के लिए प्रेरक इंसेंटिव, इंडस्ट्री साइड और उपभोक्ता साइड के लिए इंसेंटिव, कैपिटल सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी, ब्याज सब्सिडी, भूमि रिबेट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी इत्यादि सभी के लिए इंसेंटिव का प्रावधान की बात है।

इसमें वाहन की अलग-अलग श्रेणी टू व्हीलर, थ्री व्हीलर, फोर व्हीलर, ई बस इत्यादि के क्रम में इंसेंटिव का प्रावधान शामिल होगा।

उन्होंने अवगत कराया कि भारत में कुल वाहन की संख्या 34 करोड़ है। जिसमें 61.65 लाख इलेक्ट्रिक वाहन शामिल है।

उत्तराखंड में कुल वाहन 4215496 हैं जिसमें कुल इलेक्ट्रिक वाहन 84614 हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव विनय शंकर पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार व एस. एन. पांडेय सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

डीएफओ और विभागों के साथ वन भूमि स्थानांतरण से संबंधित मामलों के निराकरण की प्रत्येक माह समीक्षा करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के जनपदों से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण के संबंध में जिलाधिकारियों और जनपद के संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी विभाग संबंधित जिलाधिकारियों के समन्वय से अपनी सभी विभागीय परिसंपत्तियों और एसेट्स का सितंबर माह के अंत तक जियो टैगिंग और जिओ फेंसिंग कराना सुनिश्चित करें।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को संबंधित डीएफओ और विभागों के साथ वन भूमि स्थानांतरण से संबंधित मामलों के निराकरण के लिए प्रत्येक माह समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिए।

साथ ही विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भूमि की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक जनपद को पूर्व में लैंड बैंक बनाने के दिए गए निर्देशों का गंभीरता से अनुपालन करने के निर्देश दिए।

वन क्षेत्रों में डिग्रेडेड फॉरेस्ट लैंड का विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को भूमि स्थानांतरण से संबंधित सभी प्रकरणों की एसओपी बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि पब्लिक ग्रीवांस पोर्टल पर सेवा के अधिकार से संबंधित ऐसी दूसरी सेवाओं को भी शामिल करें जिनकी समय सापेक्ष अधिक प्रासंगिकता है।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों को दो बेस्ट प्रैक्टिसेज (सफलता की कहानियों) का विवरण देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी आयोजन, बैठक, कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों के उपयोग से संबंधित पूर्व में जो निर्देश दिए गए हैं उनका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।

उन्होंने निर्देशित किया कि आगामी हरेला पर्व पर व्यापक वृक्षारोपण के लिए सभी जिलाधिकारी संबंधित विभागों के समन्वय से तत्काल प्लांटेशन प्लान प्रस्तुत तैयार करें।

मुख्य सचिव ने क्लस्टर विद्यालयों के संबंध में शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि संबंधित जिला अधिकारी के समन्वय से ट्रांसपोर्टेशन प्लान बनाना सुनिश्चित करें। प्रथम चरण में जिन माध्यमिक विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों से जोड़ने का काम हो चुका है उनका उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रेषित करें जिससे अग्रिम चरण की वित्तीय धनराशि जारी की जा सके।

शिक्षा सचिव ने अवगत कराया कि पहले चरण में माध्यमिक विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालय से जोड़ने का कार्य चल रहा है और शीघ्र ही प्राथमिक विद्यालयों को भी जोड़ने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
उन्होंने अवगत कराया कि 559 माध्यमिक विद्यालयों में से 68 क्लस्टर विद्यालय इस वित वर्ष संचालित हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत विभिन्न जनपदों से संबंधित पार्किंग के प्रकरणों की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्किंग के लिए साइट का चयन पार्किंग की आवश्यकता के आधार पर करें ना की भूमि उपलब्धता की सुविधा के आधार पर। उन्होंने कहा कि जहां पार्किंग की डिमांड होती है वहां पर ही पार्किंग बनाई जानी चाहिए। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन जनपदों से पार्किंग निर्माण से संबंधित प्रस्ताव अभी तक अप्राप्त हैं वे तत्काल प्रस्ताव तैयार करके प्रेषित करें।

महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला और बच्चों से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन करें तथा इसके लिए नियमित बैठक करें तथा निगरानी तंत्र को भी मजबूत करें।

इस दौरान सचिव आईसीडीएस ने अवगत कराया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल विकास एवं महिला कल्याण से संबंधित संचालित की जा रही विभिन्न योजना और कार्यक्रमों का थ्त्ै (फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम) से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु व मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, रविनाथ रमन, सी रविशंकर, चंद्रेश कुमार यादव, विनोद कुमार सुमन वन विभाग से रंजन कुमार मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी सभागार में उपस्थित थे तथा आयुक्त गढ़वाल व कुमायूं और संबंधित जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में उपस्थित थे।

हरिद्वार के मुख्य धार्मिक केंद्रों का पैदल मार्ग का सर्किट प्लान बनाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड औद्योगिक निवेश एवं विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यकारी समिति (Ex C) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उत्तराखंड नियोजन विभाग के अंतर्गत गठित यूआईआईडीबी द्वारा हरिद्वार गंगा कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत हरिद्वार शहर के संपूर्ण डेवलपमेंट और 2027 में हरिद्वार कुंभ मेला की आवश्यकता से संबंधित विभिन्न प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण दिया गया।

प्रस्तुतीकरण में हरिद्वार शहर का सुगम मोबिलिटी प्लान, सौंदर्यीकरण, सैनिटेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, तीर्थ यात्री फ्रेंडली एक्सेस डेवलपमेंट, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, पब्लिक सुविधाओं का विकास, भीड़ प्रबंधन, कल्चरल हब डेवलपमेंट, पार्किंग, सती कुण्ड डेवलपमेंट, 10 जंक्शंस का ज्यामितीय इंप्रूवमेंट, मल्टी मॉडल टूरिज्म एक्टिविटी, सीसीटीवी कैमरा व पब्लिक ऐड्रेसिंग सिस्टम, तीर्थ यात्री फ्रेंडली सुविधाओं, चंडी देवी, मनसा, देवी, माया देवी व विलकेश्वर मंदिर से जुड़े डेवलपमेंट कार्यों पर आगामी 2027 के कुंभ मेला के दृष्टिगत व्यापक विचार- विमर्श किया गया।

हरिद्वार के मुख्य लैंडमार्क (धार्मिक केंद्रों) का पेडेस्ट्रियन वे (पैदल मार्ग) सर्किट प्लान बनाएं

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि मनसा देवी, चंडी देवी, माया देवी, दक्ष मंदिर, हर की पैड़ी, भारत माता मंदिर, दक्षिणेश्वर काली इत्यादि हरिद्वार के मुख्य धार्मिक केंद्रों का पेडेस्ट्रियन वे सर्किट प्लान बनाएं।

उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रियों का पैदल मार्ग ऐसा हो जिसमें उनको कहीं पर भी थोड़े समय के लिए भी रुकना ना पड़े (कोई भी अवरोध ना हो) तथा ऐसा पेडेस्ट्रियन मार्ग वन वे हो जिसमें सुरक्षा के भी सभी वैकल्पिक इंतजाम हो।
उन्होंने मेलाधिकारी, स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, संबंधित कंसल्टेंट एजेंसी और संबंधित स्टेकहोल्डर को आपसी समन्वय से 15 दिवस के भीतर इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

हर की पैड़ी में आरती पॉइंट पर व्यवस्थित एंट्री – एग्जिट प्लान बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव ने मेला अधिकारी, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि हरकी पैड़ी का आरती पॉइंट सबसे अधिक भीड़ – भाड़ वाला स्थान रहता है तथा यहां पर क्राउड मैनेजमेंट करना सबसे बड़ी चुनौती भी रहती है। इसको दृष्टिगत रखते हुए व्यवस्थित प्रवेश और निकासी का दुरुस्त प्लान बनाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

हरिद्वार में फॉरेस्ट से सटे क्षेत्रों में डेवलपमेंट हेतु राजाजी पार्क प्रशासन होगी कार्यदाई एजेंसी

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न धार्मिक केंद्रों, पब्लिक सुविधाओं के विकास और अन्य डेवलपमेंट से संबंधित ऐसे कार्य जो राजाजी पार्क प्रशासन के क्षेत्र के निकट हैं अथवा आंशिक रूप से उनके क्षेत्र से संबंधित हों उन कार्यों के क्रियान्वयन के लिए राजाजी पार्क प्रशासन को कार्यदाई एजेंसी बनाया जाए ताकि डेवलपमेंट से जुड़े कार्य तेजी से पूरे हो सके।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सैनिटेशन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रबंधन को रखें उच्च प्राथमिकता में

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि जो कार्य अधिक महत्वपूर्ण प्रकृति के हैं और शीघ्रता से पूरे किए जाने हैं उनको उच्च प्राथमिकता में रखें।

उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सैनिटेशन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के आपातकालीन उपाय इत्यादि कार्यों को उच्च प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए।

जहां जरूरी हो तो संबंधित स्थानीय निकाय, ट्रस्ट, गंगा सभा, स्थानीय प्रतिनिधि आदि हितधारकों को विश्वास में लेकर कार्य संपादित करें

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न कार्यों को संपादित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जहां पर स्थानीय लोकल बॉडी, प्रतिनिधि अथवा स्थानीय ट्रस्ट आदि का इन्वॉल्वमेंट जरूरी हो वहां पर उनके समन्वय से कार्य करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और स्टेकहोल्डर को हरिद्वार के डेवलपमेंट के संबंध में संयुक्त रूप से संपूर्ण शहर का विजिट करने के निर्देश दिए और डेवलपमेंट प्लान में जहां पर कुछ और प्रावधान किए जाने की आवश्यकता हो तो उनको भी प्लान में शामिल करने हेतु प्रस्ताव बनाने को कहा।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव एल एल फैनई व आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर व डॉ पंकज कुमार पांडेय, विशेष सचिव अजय मिश्रा, कुंभ मेला अधिकारी हरिद्वार श्रीमती सोनिका सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

उत्तराखंड से हिमाचल प्रदेश जाएगा यूएसडीएमए का विशेषज्ञ दल

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का एक विशेषज्ञ दल हिमाचल प्रदेश में अतिवृष्टि के चलते उत्पन्न स्थितियों तथा इन हालातों से निपटने के लिए हिमाचल में शासन-प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखने तथा उनका अध्ययन करने के लिए जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को इसके निर्देश दिए हैं।

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में प्रदेश में वर्षा से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश न सिर्फ पड़ोसी राज्य हैं, बल्कि दोनों प्रदेशों की भौगोलिक परिस्थितियां भी एक जैसी हैं। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश में बारिश से काफी नुकसान हुआ है। इन स्थितियों से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश में किस प्रकार आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है, शासन-प्रशासन द्वारा किस तरह इन स्थितियों में प्रतिक्रिया की जा रही है, इसे जानने और समझने की आवश्यकता है ताकि अगर ऐसे ही हालात उत्तराखण्ड में भी उत्पन्न हों तो हिमाचल के अनुभवों के आधार पर एक प्रभावी रणनीति बनाई जा सके।

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर प्रदेश में हो रही वर्षा से उत्पन्न स्थिति की जानकारी ली तथा आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वर्तमान में प्रदेश में मानसून की स्थिति, आने वाले दिनों में मौसम का पूर्वानुमान, अब तक हुई बारिश तथा प्रदेश भर में भूस्खलन के चलते बंद सड़कों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक संसाधन तथा उपकरण तैनात किए जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए की 15 मिनट के भीतर जेसीबी तथा अन्य सभी आवश्यक उपकरण घटनास्थल पर पहुंच जाए। उन्होंने ग्रामीण सड़कों को भी तत्परता के साथ खोलने के निर्देश दिए।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि देहरादून, नैनीताल तथा बागेश्वर में मौसम विभाग द्वारा ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार सभी जनपदों में बुधवार से येलो अलर्ट है। उन्होंने बताया कि जून में सामान्य से कम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। पूरे मानसून सीजन में सामान्य से 108 फीसदी अधिक वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रदेशभर में 317.1 मिमी बारिश हुई है। सबसे अधिक बागेश्वर में 765.5, चमोली में 428.2, रुद्रप्रयाग 388.8 तथा देहरादून 380.4 मिमी बारिश हो चुकी है।

इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, ड्यूटी आफिसर उप सचिव आलोक कुमार, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ मनीष भगत, रोहित कुमार, डॉ. पूजा राणा, डॉ, वेदिका पंत, हेमंत बिष्ट तथा तंद्रीला सरकार आदि उपस्थित थे।

2853 परिवारों का पुनर्वास

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में वर्ष 2012 से वर्तमान में दिनांक 08.07.2025 तक प्राकृतिक आपदा से प्रभावित कुल 258 ग्रामों के 2853 परिवारों का पुनर्वास किया गया। विस्थापन हेतु कुल बजट प्राविधान रु0 20.00 करोड़ रुपये है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा प्रभावित ग्रामों के पुनर्वास/विस्थापन हेतु कुल बजट प्राविधान रूपये बीस करोड़ के सापेक्ष वर्तमान तक 24 ग्रामों के कुल 337 आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास/विस्थापन हेतु कुल रू0 12,16,70,300/- की धनराशि निर्गत की गयी है। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन निधि तथा राज्य सेक्टर से कुल 175.50 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है। राज्य आपदा मोचन निधि से जनपदों को कुल 165 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है।

सचेत ऐप, 112, 1070, 1077 हों सभी के फोन में

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि सचेत एप आपदाओं से बचाव की दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा ऐप है, जिसमें न सिर्फ मौसम तथा बारिश के एलर्ट प्राप्त होते हैं बल्कि आपदाओं से बचाव की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों से इस ऐप को डाउनलोड करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को ईआरएसस 112, 1070, 1077 का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये तीन नंबर सभी लोगों के फोन में होने चाहिए ताकि आपदा के समय या किसी मुश्किल घड़ी में लोग इन नम्बरों पर कॉल कर मदद मांग सकें।

तहसील स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि आम जनता तक मौसम संबंधी विभिन्न प्रकार की चेतावनियों तथा अन्य जानकारियों को कम से कम समय में पहुंचाया जाए, ताकि लोग समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठा सकें। उन्होंने कहा कि विभिन्न अलर्ट जारी करने वाले एजेंसियों से जो भी अलर्ट मिलते हैं, वह एसईओसी तथा डीईओसी के माध्यम से 15 मिनट के भीतर लोगों तक पहुंच जाएं। उन्होंने कहा कि सूचनाओं तथा चेतावनियों के आदान-प्रदान में बिलकुल भी विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति तक अलर्ट तथा अन्य सूचनाओं को पहुंचाने के लिए तहसील स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रियल टाइम सूचनाओं का आदान-प्रदान कुशल तथा प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी है। इस अवसर पर उन्होंने एसईओसी में विभिन्न विभागों के वायरलेस सेटों, सेटेलाइट फोन की सक्रियता भी परखी।

एसईओसी की अपनी एसओपी बनेगी

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य तथा जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र की अपनी स्वयं की एसओपी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम में किस अधिकारी/कर्मचारी की क्या भूमिका तथा दायित्व हैं, इसमें किसी भी प्रकार भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कंट्रोल रूम की भी मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए।

72 घंटे में दी जाए अहेतुक सहायता

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रभावितों को अहेतुक सहायता वितरित करने में विलंब न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित को हर हाल में 72 घंटे के भीतर अहेतुक सहायता उपलब्ध करा दी जाए। साथ ही उन्होंने आपदा में क्षतिग्रस्त संपत्ति के नुकसान का सर्वे भी शीघ्रता से करने के निर्देश दिए ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता मिल जाए और वह दोबारा सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।

सीएस बोले, सभी विभाग बेस्ट प्रैक्टिसेज का प्रेजेंटेशन तैयार करें

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में सचिव स्तर की बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने बैठक में सभी अधिकारियों को उनके बेहतर विभागीय कार्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज (सफलता की कहानियां) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बेस्ट प्रैक्टिसेज में ऐसा यूनिक इनिशिएटिव हो जो किसी भी राज्य द्वारा नहीं किया गया हो अथवा जो अन्य से अलग हो। बेस्ट प्रैक्टिसेज संस्थागत अथवा व्यक्तिगत जिस स्तर का भी हो उसका प्रेजेंटेशन तैयार करें।
उन्होंने सभी सचिवों से उनके विभागों में हो रहे बेहतरीन कार्यों की जानकारी लेते हुए उनका बेस्ट प्रैक्टिसेज के रूप में संकलन तैयार करने के निर्देश दिए। जिससे लोगों को बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि आईटी, कृषि, उद्यान, बाल विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, सहकारिता, पशुपालन, वन विभाग, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, हायर एजुकेशन, आयुष इत्यादि विभागों में बेस्ट प्रैक्टिसेज की अधिक संभावना है।

मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को निर्देशित किया कि विभिन्न विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का बेहतर तरीके से इंप्लीमेंटेशन करें ताकि जनमानस को उसका अधिक-से- अधिक लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने सभी विभागों को अपनी विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक -से-अधिक ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने पर जोर देने के निर्देश दिए। जिससे एक खुली, पारदर्शी, सहज और व्यवस्थित कार्यप्रणाली और व्यवस्था डेवलप हो सके।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण – पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 का गंभीरता से अनुपालन कराएं

मुख्य सचिव ने संबंधित सचिवों को निर्देशित किया कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण – पोषण और कल्याण अधिनियम – 2007 का गंभीरता से अनुपालन कराएं ताकि ज्ञान और अनुभव की पूंजी हमारे वरिष्ठ नागरिक अपनी वृद्धावस्था को सम्मानपूर्वक जी सके। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से इस एक्ट का कड़ाई से अनुपालन करवाने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल एल फैनई व प्रदीप पंत, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, नीतेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. श्रीधर बाबू आद्यंकी, चंद्रेश यादव, डॉ आर राजेश कुमार, दीपेंद्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान, धीराज सिंह गर्ब्याल उपस्थित थे।

साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर में बैंकर्स प्रतिनिधि की तैनाती कराएं आरबीआईः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में आरबीआई के तत्वाधान में आयोजित 25 वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आरबीआई और गृह विभाग द्वारा विगत बैठक में दिए गए निर्देशों की एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि आज के डिजिटल युग में वित्तीय और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सभी बैंकर्स और इंप्लीमेंटेशन एजेंसी तथा विभागों के मध्य बेहतर तालमेल हो, वित्तीय अपराधों से संबंधित FIR, इन्वेस्टिगेशन, चार्जशीट, कंप्लायंस इत्यादि में तेजी दिखाई जाए तथा इस प्रकार के वित्तीय फ्रॉड को रोकने के लिए बड़े कारगर संस्थागत प्रयास किए जाने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने इसके लिए जन सामान्य को जागरूक करने के साथ-साथ इस पर नियंत्रण पाने के लिए सुदृढ़ निकाय की भी आवश्यकता बताई।

उन्होंने निर्देशित किया कि EOU (economic offence wing) जो अभी सीबीसीआईडी के अधीन कार्यरत हैं इस एजेंसी को इंडिपेंडेंस एजेंसी बनाने के लिए कार्य करें। इस एजेंसी में एसटीएफ के अधीन काम करने वाली FFU (फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट) को भी मर्ज करने की कार्रवाई की जाय।
उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर में बैंक प्रतिनिधि की भी अनिवार्य उपस्थिति हो ताकि वित्तीय फ्रॉड करने वाले किसी भी संस्थान /फर्म की वेबसाइट/पोर्टल को तत्काल ब्लॉक किया जा सके और लोगों का वित्तीय नुकसान होने से तत्काल बचाया जा सके।

उन्होंने कहा कि लोगों से वित्तीय पूंजी प्राप्त करने वाले संस्थाओं /फर्म का नियमित निवेश (BUDS पोर्टल) की वेबसाइट https//www.niyamitnivesh.in पर पंजीकरण कराने के लिए सभी बैंकों की ओर से नोडल अधिकारियों की तैनाती भी की जाय। ताकि लोगों को अधिकृत वित्तीय पूंजी प्राप्त करने वाले संस्थान की जानकारी प्राप्त हो सके।

इस अवसर पर बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, महानिरीक्षक पुलिस नीलेश आनंद भरणे, रिजर्व बैंक इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार, महाप्रबंधक नीता आदि अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में यूपीसीएल के ऊर्जा भवन में निदेशक मंडल की 124वीं बैठक आयोजित

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में देहरादून स्थित यूपीसीएल के ऊर्जा भवन में निदेशक मंडल की 124वीं बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित प्रोजेक्ट के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई तथा ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और समस्याओं के समाधान पर भी मंथन किया गया।

मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग को निर्देशित किया कि विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण से संबंधित जितनी भी परियोजनाएं गतिमान हैं उनको समय से पूरा करें और उपभोक्ताओं को विश्वसनीय और किफायती बिजली उपलब्ध कराने के लिए सभी कार्यों का बेहतर तरीके से इंप्लीमेंट करें।

उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रोजेक्ट से संबंधित तकनीकी बिंदुओं के बेहतर क्लेरिफिकेशन और स्टडी के लिए निदेशक मंडल में एक तकनीकी मेंबर की नियुक्ति की जाए। उन्होंने निदेशक मंडल की बैठक में यूईआरसी (उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग) द्वारा पारित टैरिफ ऑर्डर को भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कंपनियों के बढ़े हुए ऑथराइजेशन कैपिटल की सूचना सरकार से भी साझा करने को कहा। साथ ही सितंबर 2025 तक ईआरपी (उद्यम संसाधन योजना) को पूरी तरीके से स्थिर करने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि सीमांत जनपदों के ऐसे सीमांत गांव जो अभी तक सोलर विद्युत से आच्छादित हैं उनको ग्रिड आधारित विद्युत आपूर्ति से भी आच्छादित करें।

ट्रांसफार्मर में कैपेसिटर बैंक लगाने का निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन

वोल्टेज की गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे प्रदेश में ट्रांसफार्मर में 76 हजार से अधिक कैपेसिटर बैंक लगाए जाने हैं जिसका निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन किया गया।

बीईएसएस (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) लगाने की सहमति

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन 100 मेगावाट की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करने जा रहा है जिसका निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदन किया गया। यह परियोजना उत्तराखंड के नवीनीकरण ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट से संबंधित धनराशि सस्ती ब्याज दरों पर उपलब्ध हो सके इसके लिए विभिन्न वित्तीय संस्थानों से प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों का आकलन करने के पश्चात ही निर्णय लिया जाए।

उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अपनी उपलब्धियां को साझा करते हुए कहा कि विगत 3 वर्षों से निगम के राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि हुई है। विद्युत उपभोक्ता रैंकिंग में सुधार हुआ है तथा एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल लॉसेज में विगत 3 वर्षों में कमी आई है।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव वित्त दिलीप जावलकर, स्वतंत्र निदेशक मंडल से बीपी पांडेय व पराग गुप्ता, प्रबंध निदेशक यूपीसीएल अनिल कुमार, पिटकुल पीसी ध्यानी व यूजेवीएनएल संदीप सिंहल उपस्थित थे।