व्यय वित्त समिति की बैठक में विभिन्न कार्याे की स्वीकृति मिली

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राजीव गांधी नवोदय विद्यालय लोहाघाट के भवन एवं छात्रावास के अवशेष निमार्ण कार्यों, नैनीताल में कैंची धाम में सौन्दर्यीकरण एवं प्रकाशकीय कार्यों में बहुमंजिली कार पार्किंग, पैदल सेतु निर्माण तथा श्री बद्रीनाथ धाम में पावर ग्रेड द्वारा प्रायोजित One way Loop Road and State facade Enhancement Work के निर्माण, लेकफ्रन्ट डेवलपमेंट शेषनेत्र लेक के निर्माण कार्य, श्री बद्रीनाथ धाम में एनटीपीसी द्वारा प्रायोजित आईएसबीटी Building Refurbishment and Parking Development (Phase A) के पुनरीक्षित आगणन के निर्माण कार्य तथा महासू देवता हनोल में लंगर हाॅल तथा धर्मशाला निर्माण के कार्यों को सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में अनुमोदन दिया।

बैठक में सचिव श्री नितेश कुमार झा सहित नियोजन, वित्त, पर्यटन, शिक्षा एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

सभी कार्मिक ऑनलाइन प्रशिक्षण को कराएंगे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य सरकार के सभी कार्मिक को मिशन कर्म योगी के तहत क्षमता विकास के ऑनलाइन प्रशिक्षण हेतु अनिवार्यतः iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस मामले में शत प्रतिशत लक्ष्य को समयबद्धता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास को सभी विभागों में कार्य स्थल पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले यौन शोषण से संबंधित कानून की जानकारी एवं प्रशिक्षण के कार्यक्रम तत्काल संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएस श्रीमती रतूड़ी ने सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को उनके विभाग के तहत संचालित की जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों हेतु भी जानकारी एवं जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने की हिदायत दी है ताकि अधिक से अधिक नागरिक जनकल्याणकारी योजनाओं का आसानी से लाभ उठा सके।

उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने भारत सरकार की क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) की सदस्य डॉ अलका मित्तल के साथ राज्य सरकार के सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान क्षमता निर्माण आयोग से अनुरोध किया है कि सरकारी कार्मिकों की भांति ही नव निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाए ताकि उन्हे भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सके। इसके साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि नागरिकों हेतु विकसित भारत सहित सभी जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं जागरूकता से सम्बन्धित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए।

बैठक में क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य डा0 अल्का मित्तल ने बताया कि कर्मयोगी मिशन के तहत भारत सरकार का मुख्य फोकस सभी सरकारी कार्मिकों के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण पर हैं। अभी तक 100 केन्द्रीय संगठनों के लिए क्षमता निर्माण योजनाएं बन चुके हैं। सिविल सर्विस प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय मानक निर्धारित करते हुए 166 संस्थानों को मान्यता दी गई है। 10 लाख सिविल सेवकों के लिए बड़े स्तर पर जनसेवा कार्यक्रम प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जा रहे हैं। iGOT डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 75 लाख अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। 14 राज्यों एवं संघ शाषित प्रदेशों के साथ मिशन कर्मयोगी को लागू करने के लिए एमओयू किए गए हैं।

बैठक में क्षमता निर्माण आयोग के सदस्यों एवं अधिकारियों के साथ ही प्रमुख सचिव एल फैनई, सचिव बी के सन्त, चंद्रेश यादव, डा0 नीरज खैरवाल सहित सभी विभागों के सचिव एवं विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।

मुख्य सचिव ने लिया नाबार्ड को प्रस्ताव भेजने के दौरान प्रक्रियाओं में हो रहे विलम्ब का संज्ञान

सीएस राधा रतूड़ी ने सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को ऋण वितरण एवं अदायगियों में तेजी कार्य करने के निर्देश दिए हैं। विभागों द्वारा ऋण वितरण एवं अदायगियों के साथ ही नाबार्ड को प्रस्ताव भेजने के दौरान प्रक्रियाओं में हो रहे विलम्ब का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रक्रियाओं के सरलीकरण व तीव्रता के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने धीमी गति से चल रहे सभी प्रोजेक्ट्स पर तेजी से कार्य करने के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने नाबार्ड को प्रस्तावों की स्वीकृति में तेजी लाने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में नाबार्ड की आरआईडीएफ (ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि) पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्य सचिव ने कहा कि स्वीकृत प्रस्तावों के सापेक्ष विभागों द्वारा डिस्बर्समेंट की प्रगति संतोषजनक नहीं है। सभी विभागों को इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा वितरण और अदायगियों में आ रही समस्याओं का निवारण कर शीघ्र कार्यों को पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने प्रस्तावों की लगातार मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में नाबार्ड के तहत ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से 2.39 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई सुविधाओं का सृजन एवं पुनर्द्धार किया गया है। लगभग 15570 किमी ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क का निर्माण एवं सुधार किया गया है। 27729 मीटर ब्रिज का निर्माण हो चुका है। 23.77 लाख ग्रामीण आबादी को पेयजल सुविधा मिल चुकी है। 239 स्कूल एवं आईटीआई का निर्माण एवं पुनर्द्धार हो चुका है।

आज की बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, पंकज कुमार पांडेय सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव रतूड़ी की अध्यक्षता में सचिव समिति की बैठक हुई

राज्य में ईकोलॉजी एवं ईकोनॉमी के संतुलन के लिए निर्धारित किए गए फ्रेमवर्क ‘‘नौ सूत्र प्रगति प्रकृति संतुलन मिशन’’ पर गम्भीरता से कार्य करने की हिदायत देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में सचिव समिति की बैठक में सभी सचिवों से इस सम्बन्ध में सुझाव मांगे हैं।

नियोजित बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष बल देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिव कृषि को राज्य में बदलती जलवायु के अनुकूल खेती के तहत जैविक कृषि, मृदा संरक्षण व कुशल सिंचाई प्रबन्धन से सम्बन्धित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सचिव पर्यटन को राज्य में ईको-सर्टिफिकेशन, वेस्ट मेनेजमेंट तथा ईको टूरिज्म नीतियों को क्रियान्वित करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने सचिव उद्योग को उद्योग क्षेत्र में ग्रीन टेक्नॉलजी के उपयोग से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं सस्टेनिबिटी को कायम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सचिव ऊर्जा को ईकोलॉजिकल सेफगार्ड वाले छोटे जल विद्युत प्रोजेक्ट तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने सचिव आवास एवं लोक निर्माण विभाग को सत्तशील निर्माण तरीकों को इस्तेमाल करते हुए जलवायु अनुकूल आवासों और सड़कों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड राज्य के पर्यावरण तथा आर्थिकी में संतुलन के विजन को पूरा करने के लिए विश्वभर तथा अन्य राज्यों में अपनायी जा रही बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन करने तथा राज्य की परिस्थितियों के अनुकूल क्रियान्वित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अन्य देशों एवं राज्यों में विशेषरूप से कृषि, पर्यटन, मैन्यूफैक्चरिंग, ऊर्जा तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर में किए जा रहे बेहतरीन कार्यों के अध्ययन के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अधिकारियों को इस दिशा में मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किए गए नौ सू़त्र फ्रेमवर्क पर एक विस्तृत एक्शन प्लान बनाते हुए गम्भीरता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल फैनई, सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम सहित सभी विभागो के सचिव मौजूद रहे।

किसी भी धोखाधड़ी को न करने को लेकर कॉमन सर्विस सेंटरों को निर्देश

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जानकारी दी है कि आयुष्मान कार्ड राज्य के एनएफएसए/एसएफएसए राशन कार्ड धारक लाभार्थी को जारी किया जाता है। सीएस ने स्पष्ट किया कि कार्ड निर्माण के दौरान आधार का उपयोग केवल केवाईसी के लिए किया जाता है। राज्य के पास संग्रहित डेटाबेस में मौजूद आधार के विवरण तक किसी भी प्रकार की पहुंच नहीं है। फर्जी कार्डों की जांच के लिए एनएचए की मदद से पहले से जारी आयुष्मान कार्डों का विश्लेषण और सत्यापन किया जाता है। भर्ती के दौरान आधार पर अंकित पते की प्रामाणिकता की जांच करने और मूल आधार कार्ड और राशन कार्ड मांगने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की जा रही है। पिछले 1-2 वर्षों के दौरान बने राशन कार्डों, विशेष रूप से राशन कार्ड में केवल एक सदस्य होने के सत्यापन के लिए खाद्य विभाग को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जानकारी दी है कि अन्य राज्यों से आने वाले लाभार्थियों के मामले में अधिक सतर्क रहने और मूल आधार कार्ड और राशन कार्ड मांगने के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्देश दिए जा रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटरों को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे किसी भी धोखाधड़ी गतिविधि में शामिल न हों अथवा सख्त कार्रवाई का सामना करें। एसएचए ऐसी किसी भी धोखाधड़ी गतिविधि का पता लगाने के लिए अधिक सतर्क रहेगा।

सचिवालय में अपनी समस्या लेकर आने वाले दिव्यांगों के लिये अच्छी खबर

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से अपनी समस्याओं की गुहार लेकर प्रतिदिन मिलने वाले फरियादियों विशेषकर दिव्यांगजनों की सुविधा के दृष्टिगत सचिवालय स्थित मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचने के लिए सीएस राधा रतूड़ी के निर्देश पर भूतल से लिफ्ट की व्यवस्था कर दी गई है।

ज्ञात्व्य है कि अब तक मुख्य सचिव राधा रतूड़ी दिव्यांगजन फरियादियों की समस्याओं को जानने के लिए सचिवालय परिसर में स्वयं उनके पास पहुंचती थी।

अब मुख्य सचिव कार्यालय तक लिफ्ट की व्यवस्था होने से प्रतिदिन राज्य के दूर दराज क्षेत्रों से अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्य सचिव से मिलने वाले दिव्यांग फरीयादियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। दिव्यांगजन अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सीधे मुख्य सचिव से उनके कार्यालय में मुलाकात कर पाएंगे।

कार्मिकों की लग्न से वर्ष 2025 में प्रदेश हर क्षेत्र में प्रथम स्थान हासिल करेगाः राधा रतूड़ी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय परिसर में आयोजित ‘नववर्ष शुभकामनाएं’ कार्यक्रम में समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नववर्ष 2025 की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने समस्त प्रदेश वासियों की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की, उन्होंने कहा कि सचिवालय एक सर्वाेच्च प्रशासनिक संस्था है, जिसके सहयोग से प्रदेश ने एसडीजी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपील की कि नये वर्ष में और अधिक लगन एवं जोश से कार्य करें जिससे राज्य का प्रथम स्थान बरकरार रहे। उन्होंने विश्वास जताया, कि आगामी वर्ष 2025 में उनके सहयोग से प्रदेश हर क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त करेगा।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि सचिवालय एक सर्वाेच्च प्रशासनिक इकाई है, जहां आम जनता के प्रवेश होते ही उन्हें अनुभव होना चाहिए, कि वे शीर्ष संस्थान में आए हैं। उन्होंने इस बात को ध्यान में रखते हुए समस्त कार्मिकों से ऐसी कार्यशैली से कार्य करने को कहा, जिससे आम आदमी को ससमय राहत मिले तथा अंतिम व्यक्ति को योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित सचिवालय के सभी कार्मिक मौजूद रहे।

पेयजल विभाग को गोबर धन योजना के सफल संचालन को प्रभावी कार्ययोजना के अध्ययन के निर्देश

राज्य में ग्रामीण रोजगार एवं किसानों की आय को बढ़ावा देने के साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने को लेकर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने भारत सरकार की अम्ब्रेला स्कीम गोबर धन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पेयजल, पशुपालन, उरेडा, डेयरी, कृषि विभाग को जिम्मेदारी तय करते हुए कार्य योजना पर समन्वयित प्रयासों से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

सीएस राधा रतूडी ने पेयजल विभाग को गोबर धन योजना के सफल संचालन के लिए प्रभावी कार्ययोजना के अध्ययन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डेयरी विकास विभाग के तहत प्रस्तावित बायोगैस योजनाओं के समयबद्धता एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने बायोगैस संयत्रों हेतु गोबर, अन्न आदि स्थानीय किसानों से खरीदने के निर्देश दिए हैं। डेयरी विकास के तहत गढ़वाल दुग्ध संघ (श्रीनगर) द्वारा 400 किलो बायोगैस प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का बायो गैस संयंत्र संयुक्त उद्यम मॉडल पर स्थापित किया जा रहा है। संयुक्त उद्यम हेतु प्राइवेट उद्यमी का चयन किया जा चुका है। गोबर का उपार्जन तथा प्लांट का संचालन प्राइवेट पार्टनर द्वारा किया जाएगा। यहां पर 400 किग्रा बायोगैस प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का बायोगैस संयंत्र, 1000 किग्रा प्रतिदिन क्षमता की बायो पेंट इकाई एवं 3000 किग्रा प्रतिदिन उत्पादन क्षमता की जैविक खाद इकाई स्थापित की जा रही है। संयंत्र के संचालन हेतु प्रतिदिन 4 हजार किग्रा० गोबर तथा लगभग 3 हजार किग्रा० बायोमास की आवश्यकता होगी।श्रीनगर से 25 किलोमीटर के दायरे में लगभग 29 दुग्ध समितियां एवं 2 गौशालायें स्थित हैं जिसके अंतर्गत लगभग 150 सदस्य एवं 400 पशु आच्छादित करते हुए बायोगैस संयंत्र हेतु लगभग 4000 किग्रा० गोबर क्रय किया जायेगा। बायोगैस सयंत्र हेतु आवश्यक अतिरिक्त कच्चे माल की उपलब्धता बायोमास के द्वारा सुनिश्चित की जायेगी। प्लांट संचालन के उपरान्त उत्पादित बायोगैस का उपयोग दुग्ध प्रसंस्करण तथा बेकरी उत्पाद हेतु किया जायेगा। बायोगैस के अतिरिक्त लगभग 3 मीट्रिक टन जैविक खाद एवं आवश्यकता अनुसार बायो पेंट का उत्पादन किया जायेगा। बायोगैस संयंत्र पर गोबर पहुंचाने पर किसानों से रू० 02.00 प्रति किग्रा की दर से गोबर क्रय किया जायेगा तथा गांव / समिति स्तर परं एग्रीगेशन पॉइंट में गोबर क्रय की दर रू० 01.00 प्रति किग्रा होगी।

इसके साथ ही आँचल पशु आहार निर्माणशाला रुद्रपुर के तहत 1000 किलों बायो सीएनजी प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का बायो गैस संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस प्लांट की स्थापना एवं संचालन का कार्य ठव्ज् मॉडल में प्रस्तावित किया जा रहा है। गोबर गैस संयंत्र की स्थापना प्राइवेट पार्टनर द्वारा की जायेगी तथा निर्धारित अवधि में संचालन के उपरान्त यू०सी०डी०एफ०. को हस्तांतरित किया जायेगा। पशु आहार निर्माणशाला में डेयरी विकास विभाग के नाम से कुल 04.85 हेक्टेयर भूमि आवंटित है जिसमें से वर्तमान में 01.60 हेक्टेयर भूमि अनुपयोगी है। प्लांट की स्थापना हेतु लगभग 1.5 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी जिसके लिये उक्त अनुपयोगी भूमि का उपयोग किया जायेगा। संबंधित भूमि पर 1000 किग्रा० बायो सी०एन०जी० प्रतिदिन उत्पादन क्षमता का बायो सी०एन०जी० संयंत्र, 5000 किग्रा० प्रतिदिन क्षमता की पेन्ट इकाई एवं 30000 किग्रा० प्रति दिन क्षमता की एक जैविक खाद (च्त्व्ड) इकाई स्थापित की जायेगी।इस संयंत्र के संचालन हेतु प्रतिदिन 25 हजार किग्रा गोबर तथा लगभग 15 हजार किग्रा बायोमास की आवश्यकता होगी। बायो सी०एन०जी० संयंत्र रुद्रपुर से 30 किलोमीटर के दायरे में लगभग 3225 पशु आच्छादित करते हुए लगभग 32000 किग्रा०/दिन गोबर क्रय किया जायेगा। बायो सी०एन०जी० के अतिरिक्त लगभग 24 मीट्रिक टन च्त्व्ड एवं आवश्यकता अनुसार बायो पेट का उत्पादन किया जायेगा। गोबर की उपलब्धता हेतु दुग्ध मार्गाे पर स्थित दुग्ध समितियों अथवा अन्य दुग्ध उत्पादकों से गीबर क्रय किया जायेगा। बायो सी०एन०जी० सयंत्र पर गोबर पहुंचाने पर किसानों से रू0 2 प्रति किग्रा की दर से गोबर क्रय किया जायेगा तथा गांव/समिति स्तर पर एग्रीगेशन पॉइंट में गोबर क्रय की दर रू० 01.00 प्रति किग्रा होगी। बायो सी०एन०जी० सयंत्र हेतु अतिरिक्त कच्चे माल की आवश्यकता बायोमास के द्वारा पूर्ति की जायेगी।

बैठक मे भविष्य में बायोगैस योजनाओं के विषय में जानकारी दी गई कि व्यक्तिगत बायोगैस संयंत्र योजनान्तर्गत चयनित लाभार्थियों को 02 घन मी क्षमता के व्यक्तिगत बायोगैस संयंत्र स्थापित कराये जायेगे। कच्चे माल के रूप में लगभग 40 से 50 किग्रा० गोबर की प्रतिदिन आवश्यकता होगी जो 4 से 5 पशुओं से प्राप्त हो सकेगा। प्लांट से उत्पन्न होने वाली बायोगैस को लाभार्थी घरेलू एल०पी०जी० के विकल्प के रूप में उपयोग करेंगे। प्रस्तावित प्लांट हेतु लगभग रू0 50 हजार की आवश्यकता आंकलित की गयी जिसमे लगभग रु० 17 हजार एन०डी०डी०बी से अनुदान के रूप में प्राप्त होगा तथा अवशेष धनराशि बौद्ध राज्य सहायता एवं सम्बन्धित लाभार्थियों द्वारा वहन की जायेगी।सार्वजनिक एवं संयुक्त बायोगैस संयंत्र योजना के तहत क्लस्टर आधारित 25 एवं 40-50 घन मी ० श्रमता के सार्वजनिक बायोगैस संयंत्र स्थापित कराये जायेंगे जिसमे क्रमशः 10-15 एवं 20-25 परिवारों का समूह मिलकर कार्य करेगें। कच्चे माल के रूप में क्रमशः लगभग 600 किग्रा० एवं 1200 किग्रा० गोबर की प्रतिदिन आवश्यकता होगी जो 60-120 पशुओं से प्राप्त हो सकेगा।

उत्पन्न बायो गैस का संबंधित लाभार्थियों द्वारा घरेलू एल०पी०जी० के विकल्प के रूप में उपयोग करेंगे। 25 घन मी० क्षमता के प्रस्तावित प्लांट एवं पाइप लाइन इत्यादि की स्थापना हेतु लगभग 3.50 लाख रुपये एवं 40-50 घन मी० क्षमता के प्रस्तावित प्लांट हेतु लगभग रू0 7.00 लाख की आवश्यकता आंकलित की गयी जिसमें क्रमशः रू0 70400 एवं रू0 2.0 लाख एन०डी०डी०बी से अनुदान के रूप में प्राप्त होंगे तथा अवशेष धनराशि ब्ैत्/ राज्य सहायता एवं संबंधित लाभार्थियों द्वारा वहन की जायेगी।

बैठक में सचिव डॉ. बी वी आर सी पुरुषोत्तम सहित पेयजल, पशुपालन, डेयरी, उरेडा एवं कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव ने राज्य के सभी हेल्थ सेन्टर, हॉस्पिटल तथा मेडिकल कॉलेजों में सोलर रूफटॉप पैनल लगाने के निर्देश दिए

समयबद्धता से कार्य न होने की दशा में योजनाओं की लागत बढ़ने के दृष्टिगत मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अधिकारियों को व्यय वित्त समिति में अनुमोदित सभी कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर करने की सख्त हिदायत दी हैं। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिव स्वास्थ्य को राज्य के सभी हेल्थ सेन्टर, हॉस्पिटल तथा मेडिकल कॉलेजों में अनिवार्यतः सोलर रूफटॉप पैनल लगाने हेतु तत्काल आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएस ने महानिदेशक शिक्षा को राज्य के सभी स्कूल एवं हॉस्टल में भी सोलर रूफटॉप पैनल लगाने हेतु आज ही आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने सचिव स्वास्थ्य को अधिक मातृत्व मृत्यु दर वाले संवेदनशील क्षेत्रों में मेटरनल डेथ ऑडिट करने के बाद इन क्षेत्रों में पर्याप्त डॉक्टर्स तैनात करने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जिला चिकित्सालय चम्पावत के तहत लोवर ग्राउण्ड फलोर पर पार्किंग निर्माण, प्रथम एवं द्वितीय तल पर डायग्नोस्टिक विंग तथा ओटी के निर्माण हेतु सैद्धान्तिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी है। जनपद चम्पावत में चिकित्सकीय सुविधाओं की बढ़ती मांग के दृष्टिगत पृथक पार्किंग एवं एडमिनिस्टेªटिव विंग के निर्माण से मुख्य भवन में लगभग 6 कक्ष खाली हो जायेगे, जिनकों अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं हेतु उपयोग में लाया जायेगा। चिकित्सालय को और अधिक सुविधायुक्त बनाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त कार पार्किंग से मरीजों/तीमारदारों को कार पार्किंग की बेहतर सुविधा प्राप्त होगी तथा वर्तमान पार्किंग स्पेस का इस्तेमाल विभागीय वाहन एम्बुलेन्स आदि की पार्किंग हेतु किया जा सकेगा।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आज की ईएफसी में जनपद उत्तरकाशी में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला को उप जिला चिकित्सालय के रूप में उच्चीकृत करने के प्रस्ताव पर अनुमोदन दिया। सीएस ने इस योजना में रिवर प्रोटेक्शन वर्क पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जनपद हरिद्वार में उप जिला चिकित्सालय रूड़की में 50 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण कार्य, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, बागेश्वर के भवन/छात्रावास के निर्माण कार्य तथा जनपद हरिद्वार के खानपुर में 50 बेड के उपजिला चिकित्सालय भवन एवं आवासीय भवन के निर्माण कार्याे पर सैद्धान्तिक एवं वित्तीय अनुमोदन प्रदान किया।

बैठक में सचिव डा0 आर राजेश कुमार सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

नीतियों की नई परिस्थितियों के अनुरूप समीक्षा, विकास की बाधाओं को खत्म किया जाएः सीएस

विजन उत्तराखण्ड /2047 के सम्बन्ध में विभागों को राज्य में बेहतरीन संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान करते हुए उन्हें ग्रोथ इंजन के रूप में चिन्हित करने की हिदायत देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी विभागों को समयबद्धता से इस सम्बन्ध में एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में विकसित भारत /2047 के तर्ज पर विकसित उत्तराखण्ड /2047 के तहत विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने के सम्बन्ध में बैठक लेते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने विकसित उत्तराखण्ड /2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा बन रही सरकारी नीतियों की नई परिस्थितियों के अनुरूप समीक्षा पर बल दिया।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्वतीय कृषि में विशेषरूप से जैविक कृषि, एरोमेटिक व जड़ी-बूटियां, आयुष, रिन्युएबल एनर्जी, वन सम्पदा, पर्यटन तथा आईटी व एमएसएमई को पहले ही उत्तराखण्ड विजन 2030 के तहत ग्रोथ ड्राइवर के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। इसके साथ ही सशक्त उत्तराखण्ड पहल के तहत राज्य की सकल घरेलू उत्पाद को दुगना करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित करते हुए समावेशी विकास एवं रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कार्य किया जा रहा है।

बैठक में चर्चा के दौरान उत्तराखण्ड में हॉर्टीकल्चर एवं जैविक खेती, आयुष एवं वेलनेस हब, पर्यटन, वन क्षेत्र, ऊर्जा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य को मुख्य ग्रोथ ड्राइवर के रूप में विजन 2047 के डॉक्यूमेंट में महत्व देने पर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि मुख्य ग्रोथ इंजन के रूप में होर्टीकल्चर और आर्गेनिक फार्मिंग के तहत उच्च मूल्य वाली फसलें सुगंधित और औषधीय पौधों, पॉलीहाउस-खेती, बागवानी फसलों, केसर, सेब और कीवी फल, स्थानीय खट्टे फल और अखरोट की खेती को बढ़ावा देना होगा। कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए विकेन्द्रीकृत सौर ऊर्जा संचालित कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करना होगा । कृषि-पर्यटन के बागवानी को पर्यटन के साथ एकीकृत करना होगा । सेब मिशन, कीवी मिशन, 2023-2030 के तहत राज्य भर में फैली 12 परियोजनाओं के माध्यम से सेब उत्पादन को 10 गुना बढ़ाना और किसानों की आय को 10-15 गुना बढ़ाना है। जलवायु-लचीली कृषि रणनीति के हिस्से के रूप में किसानों को 50,00,00 पॉलीहाउस प्रदान करना है । खट्टे फल और अखरोट मिशन के तहत फसल क्षेत्र के अलावा बागवानी किसानों की आय बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी। जैविक राज्य के विजन के तहत राज्य को जैविक उच्च मूल्य वाले उत्पादों के रूप में विकसित करना, विशेष रूप से राज्य के पहाड़ी क्षेत्र में बाजरा मिशन, हर्बल मिशन और फूल मिशन सफल बनाना है।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आयुष विभाग के अधिकारियों के हिदायत दी कि प्रमुख विकास चालक के रूप में आयुष और वेलनेस हब की अपार संभावनाएं हैं। उत्तराखंड आयुष नीति – 2023 के तहत उत्तराखंड को विश्व प्रसिद्ध आयुष गंतव्य में बदलना है। राज्य में दुर्लभ औषधीय पौधों की 1,000 से अधिक प्रजातियाँ मौजूद हैं। औषधीय पौधों की खेती, आयुष विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, कल्याण, शिक्षा और अनुसंधान प्रमुख क्षेत्र हैं। राज्य में 900 हेक्टेयर क्षेत्र में 2500 मीट्रिक टन उत्पादनऔर 30 करोड़ रुपये का राजस्व के साथ इस क्षेत्र में 232 प्रमाणित आयुर्वेद, 8 होम्योपैथी और 2 यूनानी विनिर्माण इकाइयाँ हैं इस क्षेत्र का जीएसडीपी योगदान 4000-5000 करोड़ रुपये है।
20,000-25,000 लोग रोजगार में संलग्न हैं विजन 2047 के तहत उत्तराखंड को देश का प्रमुख आयुष गंतव्य बनाना है जड़ी-बूटियों और एमएपी उत्पादन राज्य बनाना, लगभग 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा। राज्य के 100 गंतव्यों को वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित करना, 1000 आयुष गांव और योग ग्राम बनाना है।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि राज्य में ग्रोथ इंजन के रूप में पर्यटन का अत्यंत महत्व है, यह जीएसडीपी में 10-12 प्रतिशत का योगदान देता है और 4 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है। राज्य में मान्यता प्राप्त इको-टूरिज्म हॉटस्पॉट फूलों की घाटी (यूनेस्को विरासत स्थल), बिनसर वन्यजीव अभयारण्य और नंदा देवी बायोस्फीयर है। राज्य ने 59.6 मिलियन से अधिक घरेलू पर्यटकों और 1.5 लाख विदेशी पर्यटकों का स्वागत किया है। प्रमुख पर्यटक आकर्षण आध्यात्मिक, कल्याण, साहसिक, प्रकृति, वन्यजीव, खगोल-पर्यटन, इको-टूरिज्म स्थल है ।

इको-टूरिज्म जोन में शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वाले मॉडल इको-टूरिज्म गांवों की स्थापना, स्थायी पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देना (जैसे, अपशिष्ट से ऊर्जा संयंत्र, सौर ऊर्जा से चलने वाले आवास) विज़न में है । साहसिक और कल्याण पर्यटन के तहत योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन को एकीकृत करते हुए उत्तराखंड को साहसिक खेलों और कल्याण रिट्रीट के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में ब्रांड करें।

विजन 2047 के तहत सालाना 200 मिलियन पर्यटकों को आमंत्रित करने और पर्यटन के योगदान को जीएसडीपी के 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि ग्रोथ इंजन के रूप में राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राज्य का लक्ष्य आत्मनिर्भरता और निर्यात के लिए 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है ।
जलविद्युत शक्ति का उपयोग करके हरित हाइड्रोजन उत्पादन में उत्तराखंड को भारत का अग्रणी राज्य बनाना है।

2047 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन करना है। मुख्य फोकस क्षेत्र जलविद्युत विस्तार है, सूक्ष्म और लघु जलविद्युत सहित 26215 मेगावाट (वर्तमान 3355.02 मेगावाट) की पूरी क्षमता का दोहन करना है। ग्रिड स्थिरता और ऊर्जा भंडारण के लिए पंप स्टोरेज परियोजनाओं को प्राथमिकता देना है। नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के तहत सौर और पवन हाइब्रिड प्रणालियों को बढ़ाना, विशेष रूप से जलाशयों (फ्लोटिंग सोलर) पर, पीक डिमांड प्रबंधन के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) विकसित करना है। हरित नवाचार के तहत औद्योगिक अनुप्रयोग और निर्यात बाजारों के लिए एक हरित हाइड्रोजन हब स्थापित करना, भूतापीय ऊर्जा का दोहन करना है। स्मार्ट-ऊर्जा अवसंरचना के तहत रियल टाइम मॉनिटरिंग और कंट्रोल के साथ राज्य-व्यापी स्मार्ट ग्रिड सिस्टम लागू करना व बढ़ी हुई ऊर्जा दक्षता और चोरी में कमी के लिए स्मार्ट-मीटरिंग परियोजनाओं का विस्तार करना है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु सहित सभी विभागों के सचिव, अपर सचिव आदि मौजूद रहे।
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विकसित उत्तराखंड /2047 के विज़न के तहत राज्य की अर्थव्यवस्था को एक समृद्ध, प्रगतिशील एवं स्वस्थ राज्य में परिवर्तित करना है ताकि राज्य के लोग शिक्षित हो कर एक समतापूर्ण समाज में लाभकारी रोजगार प्राप्त कर सकें, पर्यावरण और निवासियों के बीच तालमेल बढ़ सके तथा विकास प्रक्रिया सतत और समावेशी हो।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी