सीएस की अध्यक्षता में हुई स्प्रिंग एंड रिवर रेज्युविनेशन अथॉरिटी की उच्च स्तरीय समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में स्प्रिंग एंड रिवर रेज्युविनेशन अथॉरिटी की उच्च स्तरीय समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने भूमिगत जल रिचार्ज पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सारा ग्राउंड वाटर रिचार्ज पालिसी तैयार करे।

मुख्य सचिव ने कहा कि सारा को गैर सरकारी एवं आवासीय सोसाईटी में वर्षा जल संरक्षण के दृष्टिगत भू-जल रिचार्ज की पॉलिसी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। इससे भूमिगत जल रिचार्ज को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने राज्यान्तर्गत पौराणिक व सांस्कृतिक महत्त्व के धारे-नौलों के संरक्षण एवं संवर्धन के जीर्णाेद्वार के कार्याे के प्रस्ताव भी जनपदों द्वारा शीघ्र भेजे जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में नदियों के पुनर्जीवीकरण पर कार्य हो रहा है। उन्होंने प्रदेश में नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए भी शीघ्र एक एसओपी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। ‘एक जनपद एक नदी‘ प्रोजेक्ट के तहत् आए प्रस्तावों को शीर्घ से शीघ्र शुरू किया जाए। बड़े प्रोजेक्ट्स को विभिन्न विभागों में कन्वर्जेंस के माध्यम से किया जा सकता है।

बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में सारा द्वारा विभिन्न जनपदों में कुल 86 परियोजनाएं गतिमान हैं। सारा के अन्तर्गत जनपद उत्तरकाशी, नैनीताल एंव टिहरी की कुल 16 परियोजनाएं पूर्ण हो गयी हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल. फैनई, सचिव दिलीप जावलकर, रणवीर सिंह चौहान, सी. रविशंकर, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सीएम धामी ने केंद्रीय रेल मंत्री से रेल परियोजनाओं एवं कनेक्टिविटी विस्तार पर की चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर राज्य में रेल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, रेल संपर्क के विस्तार तथा राज्य की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, धार्मिक एवं पर्यटन महत्व तथा जनहित की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रस्ताव केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से देश के प्रमुख राज्यों में से एक है। चारधाम यात्रा, हरिद्वार एवं ऋषिकेश के धार्मिक स्थलों, योग एवं आध्यात्मिक पर्यटन तथा आगामी कुम्भ-2027 के आयोजन के दृष्टिगत प्रतिवर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु एवं पर्यटक राज्य में पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती यात्री संख्या एवं पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए राज्य में आधुनिक, सुदृढ़ एवं सुविधाजनक रेल नेटवर्क का विस्तार समय की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रेल मंत्री को अवगत कराया कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुम्बई में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड मूल के नागरिक निवास करते हैं, जिनका अपने गृह राज्य से निरंतर आवागमन बना रहता है। इसके साथ ही चारधाम, बाबा नीम करौली धाम (श्री कैंची धाम), जागेश्वर धाम सहित राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। वर्तमान में मुम्बई से हरिद्वार एवं रामनगर के लिए संचालित रेल सेवाओं की संख्या एवं आवृत्ति यात्रियों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है, जिससे यात्रा सीजन, चारधाम यात्रा, अवकाश एवं त्योहारों के दौरान यात्रियों को आरक्षण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मुम्बई-देहरादून के मध्य वन्दे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा प्रारम्भ करने तथा मुम्बई-हरिद्वार एवं मुम्बई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यात्रियों, प्रवासी उत्तराखण्डवासियों एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी तथा राज्य में पर्यटन, व्यापार एवं निवेश को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने मुम्बई-देहरादून के मध्य वन्दे भारत अथवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा प्रारम्भ करने तथा मुम्बई-हरिद्वार एवं मुम्बई-रामनगर रेल सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन रेल सेवाओं के विस्तार से यात्रियों, प्रवासी उत्तराखण्डवासियों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधा प्राप्त होगी तथा राज्य में पर्यटन, व्यापार एवं निवेश को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने देहरादून-कोटा रेल सेवा को सूरत-वड़ोदरा-मुम्बई तक विस्तारित करने तथा रामनगर-मुम्बई एवं हरिद्वार-मुम्बई रेल सेवाओं को नियमित अथवा सप्ताह में कम से कम तीन दिन संचालित किए जाने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन को बंद कर उसकी भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (न्प्प्क्ठ), उत्तराखण्ड सरकार एवं रेल भूमि विकास प्राधिकरण (त्स्क्।), रेल मंत्रालय के मध्य एसेट मॉनेटाइजेशन एवं ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर की समग्र मास्टर प्लानिंग के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में त्स्क्। को आवश्यक औपचारिक निर्देश प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया।

मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रमुख रेल परियोजनाओं के संबंध में किच्छा-सितारगंज-खटीमा नई रेल लाइन परियोजना की सम्पूर्ण लागत भारत सरकार द्वारा वहन किए जाने, सर्वेक्षण कार्य से संबंधित स्थानीय किसानों की चिंताओं का समाधान किए जाने तथा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अंतर्गत शीघ्र रेल संचालन प्रारम्भ करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आजीविका एवं अन्य कारणों से मुम्बई सहित देश के विभिन्न स्थानों में निवास करते हैं। वहीं चारधाम, बाबा नीम करौली धाम (श्री कैंची धाम), जागेश्वर धाम सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों में वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। राज्य के कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशन रामनगर, देहरादून एवं हरिद्वार हैं, जहां से पर्वतीय क्षेत्रों के यात्रियों को रेल सुविधा उपलब्ध होती है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेल सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री ने विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री ने टनकपुर से संचालित त्रिवेणी एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस एवं दौराई एक्सप्रेस के यात्रा मार्ग में पड़ने वाले बनबसा रेलवे स्टेशन पर अल्प समय के ठहराव की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि बनबसा भारत-नेपाल सीमा से लगा हुआ व्यापारिक एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है तथा यहां भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की यूनिट भी स्थापित है। बनबसा स्टेशन पर ठहराव से स्थानीय नागरिकों, यात्रियों एवं सेना को बेहतर परिवहन सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने बनबसा स्टेशन पर उक्त रेल सेवाओं के अल्प ठहराव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण के अंतर्गत रायवाला से देहरादून तक लंबित कार्य को शीघ्र पूर्ण करने तथा हरिद्वार, हर्रावाला, देहरादून, खटीमा, लक्सर, रुड़की, टनकपुर एवं बनबसा रेलवे स्टेशनों के सौन्दर्यीकरण एवं विस्तारीकरण का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने उक्त प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने खटीमा-मझोला पीलीभीत के मध्य रेलवे फाटक संख्या-18ब् को जनहित में पुनः खोले जाने का अनुरोध भी केंद्रीय रेल मंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि रेलवे फाटक बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों, कृषकों एवं पर्यटकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित कोकोडायल पार्क में आने वाले पर्यटकों की सुविधा को देखते हुए रेलवे फाटक का संचालन पुनः प्रारम्भ किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय रेल मंत्री ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति प्रदान कर दी है।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रस्तुत विभिन्न प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

सीएम धामी ने बैंकर्स से राज्य के कम ऋण जमा अनुपात वाले जनपदों में विशेष अभियान चलाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 97वीं बैठक में बैंकिंग सेवाओं, ऋण वितरण, वित्तीय समावेशन तथा विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बैंकों से आम लोगों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों तक ऋण की पहुंच आसान बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य में ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने बागेश्वर, पौड़ी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और टिहरी जनपदों में कम ऋण-जमा अनुपात पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि इन जिलों में नियमित रूप शिविर लगाए जाएं। जिला प्रशासन, लीड बैंक और संबंधित विभाग मिलकर पात्र लोगों की पहचान करें और उन्हें समय पर ऋण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य का ऋण-जमा अनुपात आगामी राष्ट्रीय औसत तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी भी पात्र व्यक्ति को परेशानी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी आवेदन में कोई कमी हो तो उसे केवल तकनीकी आधार पर निरस्त करने के बजाय संबंधित व्यक्ति का मार्गदर्शन कर कमियों को दूर कराया जाए। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने में बैंक सक्रिय भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वार्षिक ऋण योजना के अंतर्गत लगभग 96 प्रतिशत उपलब्धि और एमएसएमई क्षेत्र में 111 प्रतिशत उपलब्धि राज्य की बेहतर आर्थिक प्रगति का संकेत है। राज्य का ऋण-जमा अनुपात बढ़ना भी सकारात्मक है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने के लिए सभी बैंकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-2.0, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम-स्टे योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना तथा किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं में पात्र लोगों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए बैंकिंग सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान को गांव-गांव तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने वित्तीय समावेशन को और मजबूत बनाने तथा प्रधानमंत्री जनधन योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार और बैंक मिलकर कार्य करेंगे तो रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति मिलेगी तथा राज्य का समग्र विकास और तेजी से होगा।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), आईसीआईसीआई बैंक तथा एचडीएफसी बैंक के प्रतिनिधियों को भी जोड़ा जाए, ताकि साइबर ठगी से संबंधित मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक से पूर्व उप समिति (सब-कमेटी) की नियमित बैठक आयोजित की जाए, ताकि विभिन्न विषयों पर विस्तृत समीक्षा कर समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बैंकों से आजीविका संवर्धन तथा औद्योगिक क्षेत्र को ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार, लघु उद्योग, एमएसएमई तथा अन्य उत्पादक क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाकर राज्य में रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को और गति दी जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु , डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, नितेश झा, डॉ बी.वी. आर. सी पुरुषोत्तम, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, श्री श्रीधर बाबू अदांकी, धीराज गर्ब्याल, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय रिजर्व बैंक अरविन्द कुमार, मुख्य महाप्रबंधक हर्ष कुमार गौतम, महा प्रबंधक नाबार्ड पंकज यादव, अध्यक्ष इन्डस्ट्रीज एसोसियेशन ऑफ उत्तराखंड पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक नई दिल्ली प्रभास बोस, महाप्रबंधक शैलेश कुमार, उप महाप्रबन्धक एसबीआई देहरादून राजीव रंजन, उप महाप्रबन्धक एसबीआई हल्द्वानी राजीव रंजन रतन, सहायक महाप्रबन्धक, एस.एल.बी.सी. उत्तराखंड शैलेन्द्र कुमार उनियाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सेवा पखवाड़ा बना जनसेवा का महाअभियान, प्रदेशभर में हजारों नागरिकों ने उठाया सरकारी योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित सेवा, सुशासन एवं समर्पण तथा जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बहुउद्देशीय जनसेवा शिविर, थीम आधारित जनजागरूकता कार्यक्रम एवं विकास प्रदर्शनी का व्यापक आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक शासन-प्रशासन की सीधी पहुंच सुनिश्चित करते हुए हजारों नागरिकों को विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया।

अल्मोड़ा, बागेश्वर, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली, चम्पावत, हरिद्वार, नैनीताल तथा ऊधम सिंह नगर सहित विभिन्न जनपदों में आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में आमजन ने प्रतिभाग किया। विभागीय स्टॉलों के माध्यम से स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, पशुपालन, उद्योग, स्वरोजगार, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास, शिक्षा, राजस्व, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, आयुष, सेवायोजन, दुग्ध विकास, मत्स्य, सहकारिता सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

शिविरों में स्वास्थ्य परीक्षण, निःशुल्क औषधि वितरण, आधार एवं प्रमाण-पत्र निर्माण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, महालक्ष्मी किट वितरण, कृषि एवं उद्यान सहायता, पशुपालन एवं डेयरी योजनाएं, रोजगार पंजीकरण, छात्रवृत्ति, किसान योजनाएं तथा अन्य जनकल्याणकारी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं।

प्रदेशभर में आयोजित शिविरों में प्राप्त जनसमस्याओं एवं शिकायतों का बड़ी संख्या में मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष मामलों को संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई हेतु प्रेषित किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित समय सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए।

विभिन्न जनपदों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान जनप्रतिनिधियों, आयोगों एवं परिषदों के अध्यक्षों, विधायकों, सांसदों, जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों तथा विभागीय अधिकारियों ने शिविरों का निरीक्षण कर लाभार्थियों से संवाद किया और विभागों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

शिविरों में उद्योग एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने, कृषि एवं पशुपालन में नवाचार, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा किसानों एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने से संबंधित योजनाओं का विशेष रूप से प्रचार-प्रसार किया गया। कई स्थानों पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले लाभार्थियों को सम्मानित भी किया गया तथा लाभार्थियों ने योजनाओं से प्राप्त लाभ के अपने अनुभव साझा किए।

सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा भी विभिन्न जनपदों में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित प्रचार सामग्री एवं ष्मेरी योजनाष् पुस्तिका का वितरण कर नागरिकों को योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

प्रदेशभर में आयोजित इन जनसेवा शिविरों के माध्यम से लगभग 5,300 से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की तथा 4,470 से अधिक पात्र लाभार्थियों को विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ प्रदान किया गया। शिविरों में 415 शिकायतें एवं आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 179 से अधिक मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष मामलों को समयबद्ध कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया।

अल्मोड़ा में लगभग 1300, बागेश्वर में 205, उत्तरकाशी में 185, पौड़ी में 128, चमोली के कर्णप्रयाग में 200 से अधिक, कनोल में 150 से अधिक, चम्पावत में 440, हरिद्वार में 1130 प्रतिभागियों (386 लाभार्थियों), नैनीताल में 510 तथा ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में 1150 प्रतिभागियों (951 लाभार्थियों) ने विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक सुशासन और जनसेवा की पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि ष्सेवा, सुशासन एवं समर्पणष् केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सरकार की कार्यसंस्कृति है। जनसेवा शिविरों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे लोगों का समय, श्रम और धन बच रहा है तथा समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और प्रत्येक पात्र नागरिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मानसून को लेकर दून डीएम सख्त, जलभराव, जर्जर भवन, गड्ढों, विद्युत सुरक्षा एवं डेंगू नियंत्रण पर दिए कड़े निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में आगामी मानसून के दृष्टिगत शहर क्षेत्र में आवश्यक व्यवस्थाओं, सड़क सुरक्षा, जल निकासी, विद्युत व्यवस्था एवं जनसुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को मानसून अवधि में सतर्कता बरतते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने रिस्पना एवं बिंदाल नदी किनारे निवासरत लोगों की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने एवं आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था एवं मानसून के दृष्टिगत नालियों/नालों की सफाई कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी प्रमुख नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर पूर्व में ही आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभगा के अधिकारियों को शहर में नहर एवं अण्डरग्राउंड नहर के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने शहर क्षेत्र में रोड कटिंग के उपरांत सड़क रिस्टोरेशन कार्यों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए सड़क कटिंग के बाद तत्काल मरम्मत कार्य पूर्ण करें, ताकि आमजन को आवागमन में असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने मानसून के दौरान सड़कों पर उत्पन्न होने वाली संभावित समस्याओं के समाधान हेतु कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान खोदी गई सड़कों को पुर्नस्थापित करने के निर्देश साथ ही चेतावनी दी तथा सदस्य सचिव सड़क सुरक्षा समिति अधीक्षण अभियंता लोनिवि, नगर निगम, यूयूएसडीए संचालित निर्माण कार्यों स्थलीय निरीक्षण करते हुए आख्या प्रस्तुत करने तथा सड़क को तत्काल गुड्डामुक्त करते हुए यातायात हेतु सुरक्षित करने के निर्देश दिए। साथ ही गेल द्वारा संचालित कार्यों में सुरक्षा मानकों की लापरवाही बरतने की शिकायत पर सम्बन्धित ठेकेदार के विरूद्ध अर्थदण्ड की कार्यवाही करने तथा पुनरावृत्ति होने पर ब्लैकलिस्ट की चेतावनी दी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया किया यदि सड़क पर गड्डो से यदि कोई दुर्घटना होती है अथवा जानमाल की हानि होती है तो सम्बन्धित की जिम्मेदारी तय करते हुए विधिक कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में डेंगू नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग एवं नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग, लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई तथा जनजागरूकता अभियान प्रभावी रूप से संचालित किए जाएं। जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को जिले में अवस्थित समस्त स्कूलों में डेंगू, मलेरिया सुरक्षा के दृष्टिगत बच्चों को फूल बाजू की डेªस में आने की व्यवस्था लागू करने के साथ ही डेंगे मलेरिया से जनमानस को जागरूक करने हेतु जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मानसून सीजन के दृष्टिगत दुर्गम क्षेत्रों में हाईरिस्क प्रेगनेंसी, गर्भवती महिलाओं से दूरभाष पर वार्ता कर उनका हॉल चाल जाना तथा मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के निरंतर मॉनिटिरिंग की जाए, निर्देशित किया कि महिलाओं को प्रसव तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही नजदीकि चिकित्सालय सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।

जिलाधिकारी ने पेयजल निगम एवं जल संस्थान को पानी शुद्वता एवं खाद्य सुरक्षा विभाग को संचालित होटल रेस्टोंरेट में खाने गुणवत्ता एवं की निरंतर जांच कराते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने शहर में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति की समीक्षा करते हुए खराब एवं बंद पड़ी लाइटों को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश नगर निकाय एवं संबंधित विभागों को दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय प्रकाश व्यवस्था बेहतर रहना जनसुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीएम ने नगर मजिस्टेªट एवं उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय के अधिकारी अपने क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईटों का निरीक्षण करते हुए खराब स्ट्रीट लाईट ठीक कराने तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईट नही है वहां स्ट्रीट लाईट लगवाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी स्वयं इसकी मॉनिटिरिंग कर रहे हैं। बैठक में शहर क्षेत्र में संचालित रैनबसेरों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी रैनबसेरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर आश्रय एवं अन्य सुविधाएं मिल सकें। जिलाधिकारी ने शहर में स्थित जर्जर एवं असुरक्षित भवनों के संबंध में की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि ऐसे भवनों का चिन्हीकरण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा ऋतु में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके, नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि नगर में 23 भवन चिन्हिकरण किए गए है जिस पर जिलाधिकारी ने कहा कि मा0 न्यायालय में लम्बित वाद वालें भवनों को छोड़कर जनसुरक्षा के दृष्टिगत ऐसे शेष भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत् ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाए।

बैठक में विद्युत पोलों, आवासीय भवनों एवं वृक्षों से सटे अथवा लटकते विद्युत तारों की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ढीले एवं असुरक्षित तार जनसुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। यूपीसीएल के अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र चिन्हित करते हुए केबल भूमिगत कराने के कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूर्ण करने तथा विद्युत लाईन की स्थिति तथा मानसून के दृष्टिगत खराब विद्युत लाईन चिन्हीकरण एवं सुधारीकरण कार्य हेतु टास्कफोर्स बनाने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वि/रा के.के मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 मनोज शर्मा, अधीक्षण अभियंता लोनिवि ओमपाल सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा निगम, स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम ने राज्य के विभिन्न विकास कार्यों के लिये स्वीकृत किये 24 करोड़

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जनपद हरिद्वार के विधानसभा क्षेत्र भगवानपुर में 200 हैण्डपम्प का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 1.43 करोड़, रूडकी शहर सीवरेज हेतु ₹ 3.16 करोड तथा न्यू हरिद्वार मॉडल कालौनी और गोविन्दपुरी में क्षतिग्रस्त वितरण पाईप लाईन का प्रतिस्थापन हेतु ₹ 4.50 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित गढ़वाल एवं कुमायूं परिक्षेत्र में स्थित जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में मानकों के परीक्षण हेतु ऑटोमैटिक एनालाइज़र सिस्टम आईएस 3025 पार्ट 82 – 83 क्रय किये जाने हेतु ₹ 2.54 करोड की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा जनपद देहरादून की गडूल नदी (सौंग नदी की सहायक नदी) का पुनर्जीवन/ट्रीटमेंट के विभिन्न कार्य हेतु ₹ 6.02 करोड एवं जनपद उत्तरकाशी की कमल गंगा नदी का पुनर्जीवन/ट्रीटमेंट के विभिन्न कार्य हेतु ₹ 4.17 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा क्षेत्र चम्पावत में ओखलढूंगा झील के सुरक्षात्मक एवं विकास कार्य हेतु ₹ 74.38 लाख, जनपद उधमसिंहनगर के विधानसभा क्षेत्र नानकमत्ता में बंगाली कालौनी के नव निर्मित दुर्गा मंदिर के सौन्दर्यकरण हेतु ₹ 56.51 लाख, विधानसभा क्षेत्र अल्मोडा के सेराघाट में मॉ मंगला भगवती माता मंदिर परिसर में धर्मशाला का निर्माण किये जाने हेतु ₹ 72.83 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने के साथ ही विधानसभा क्षेत्र हरिद्वार के न्याय पंचायत लालढांग के अन्तर्गत लाला ओम प्रकाश ज्ञानदीप कन्या इंटर कालेज की चाहर दीवारी के निर्माण हेतु ₹ 53.18 लाख स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

उत्तराखण्ड के विकास में नीति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास के नेतृत्व में नीति आयोग की टीम ने भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड के समग्र एवं सतत विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसांख्यिकीय चुनौतियों तथा विकास की संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी एवं दूरदर्शी नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास में नीति आयोग का सदैव सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति आयोग का मार्गदर्शन एवं सहयोग मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय, तीर्थाटन, पर्यटन प्रधान राज्य के लिए नीति निर्माण में केवल स्थायी आबादी ही नहीं, बल्कि राज्य की फ्लोटिंग पॉपुलेशन को भी विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्थायी आबादी की तुलना में प्रतिवर्ष लगभग सात से आठ गुना अधिक लोग उत्तराखण्ड आते हैं, जिससे स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, परिवहन तथा अन्य बुनियादी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए योजनाओं के निर्माण एवं संसाधनों के आवंटन में इस तथ्य का समुचित समावेश आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ जनजागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रभावी रूप से मिल सके।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास को राज्य की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि इस दिशा में निरंतर और परिणामोन्मुख प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने बच्चों को कुपोषण से मुक्त बनाने तथा महिलाओं में एनीमिया की समस्या के प्रभावी समाधान के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार कर उसे धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि, बागवानी, पर्यटन, जल संसाधन, जैव विविधता, कौशल विकास तथा अन्य संभावनाओं वाले क्षेत्रों में विषय विशेषज्ञों के साथ नीति आयोग के सहयोग से नियमित सेमिनार एवं विचार-विमर्श आयोजित किए जाएं। इससे राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक एवं नवाचार आधारित नीतियां तैयार करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने जल संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक योजनाओं पर विशेष रूप से कार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, प्रदेश के लोगों की आजीविका के संसाधनों में वृद्धि, स्थानीय रोजगार सृजन तथा सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बेहतर नीति निर्धारण एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और नीति आयोग के बीच समन्वित प्रयासों से उत्तराखण्ड के सर्वांगीण एवं संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र भण्डारी, डॉ. संदीप तिवारी, एसीईओ सेतु मनोज पंत, सलाहकार एवं कार्यक्रम निदेशक नीति आयोग डॉ. सोनिया पंत, उप सचिव नीति आयोग दीपक कुमार विशेष कार्याधिकारी नीति आयोग डॉ. शोभित कुमार मौजूद थे।

उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रही सरकार, चारधाम यात्रा ने बनाए नए कीर्तिमान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेमनगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित पूज्य मोरारी बापू की श्रीराम कथा के समापन समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन धरा पर उन्हें अद्वितीय आध्यात्मिक सुख और आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने पूज्य मोरारी बापू का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोरारी बापू केवल श्रीराम कथा के वाचक नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, विचारों और जीवन-दर्शन के जीवंत संवाहक हैं, जिन्होंने विश्वभर में भारतीय संस्कृति, सनातन दर्शन और अध्यात्म का संदेश पहुंचाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और आतंकवाद जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भारत की सनातन संस्कृति का ष्वसुधैव कुटुम्बकम्ष् का संदेश पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है और उत्तराखंड सरकार देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर तथा प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक यात्राओं ने इस वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा में पिछले सभी रिकॉर्ड टूट रहे हैं और दो माह के भीतर ही 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसी प्रकार हेमकुंड साहिब यात्रा में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं, जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा में 55000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जहाँ पहले पूरे वर्ष में सीमित संख्या में ही यात्रियों को भेजा जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 जुलाई को कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को रवाना करने का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड में विकसित हो रहे बेहतर बुनियादी ढांचे, सुरक्षित यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ-2027 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि कुंभ केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का महापर्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास भी और विरासत भी के मंत्र के साथ देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक गरिमा और सनातन परंपरा के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संतों के आशीर्वाद और जनसहभागिता से उत्तराखंड आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री सुनील सैनी, देशराज कर्णवाल, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, आदेश सैनी, जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम के आदेश पर बदरीनाथ धाम चढ़ावा मामले पर उच्चस्तरीय समिति गठित

श्री बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे आदि के संबंध में प्राप्त कथित अनियमितताओं की शिकायतों एवं प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखण्ड शासन ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल होंगे। समिति में प्रबंध निदेशक, एनएचएम संदीप तिवारी तथा कार्यालय महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।

सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आदेश के अनुसार समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान-चढ़ावे से संबंधित कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी तथा 15 दिनों के भीतर अपनी जांच आख्या एवं संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी।

जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर समिति किसी भी अधिकारी, विशेषज्ञ अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग एवं परामर्श प्राप्त कर सकेगी। साथ ही समिति दान-चढ़ावे के प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों एवं सुझावों से भी शासन को अवगत कराएगी।

सीएम धामी ने वन क्लिक से 9.80 लाख लाभार्थियों को ₹145.42 करोड़ की पेंशन राशि की जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाएं केवल वर्तमान आवश्यकताओं को नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाएं ऐसी हों जो समय के साथ निरंतर प्रभावी बनी रहें तथा अन्य राज्यों के लिए भी बेस्ट प्रैक्टिस का उदाहरण बनें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, डोईवाला (देहरादून), बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, पाइनस (नैनीताल) तथा बाबू जगजीवन राम बालिका छात्रावास, सोमेश्वर (अल्मोड़ा) के निर्माण कार्य हर हाल में अक्टूबर माह तक पूर्ण किए जाएं, ताकि अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को शीघ्र बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का इंटीग्रेशन किया जाए तथा योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निर्माण कार्यों में वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही पात्र नागरिक स्वतः वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में आ जाएं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की अनावश्यक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े और समय पर पेंशन का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं की माह जून-2026 की देय पेंशन राशि का डीबीटी (वन क्लिक) के माध्यम से हस्तांतरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कुल 9,80,950 लाभार्थियों को लगभग ₹145 करोड़ 42 लाख की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की। इसमें केंद्र सरकार का अंश लगभग ₹7 करोड़ 2 लाख तथा राज्य सरकार का अंश लगभग ₹138 करोड़ 40 लाख रहा।

माह जून-2026 में वितरित इस राशि में वृद्धावस्था पेंशन के 6,11,245 लाभार्थियों को ₹91.69 करोड़, विधवा पेंशन के 2,35,850 लाभार्थियों को ₹35.38 करोड़, दिव्यांग पेंशन के 88,787 लाभार्थियों को ₹13.32 करोड़, किसान पेंशन के 27,207 लाभार्थियों को ₹3.26 करोड़, परित्यक्ता पेंशन के 8,258 लाभार्थियों को ₹99.10 लाख, भरण-पोषण अनुदान के 7,297 लाभार्थियों को ₹51.08 लाख, तीलू रौतेली पेंशन के 2,179 लाभार्थियों को ₹26.15 लाख तथा बौना पेंशन के 127 लाभार्थियों को ₹1.52 लाख की सहायता प्रदान की गई।

बैठक में बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की भी समीक्षा की गई। यह योजना अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक, उच्च एवं विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार प्रति छात्र ₹3.25 लाख तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है तथा आवश्यकता होने पर राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप राशि देकर आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण छात्रावासों का निर्माण सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है जो आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करे। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान प्रत्येक पात्र नागरिक का अधिकार है। उत्तराखण्ड में ऐसा सुशासन मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाने के लिए प्रेरित हों।

बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण सचिव सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।