ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कर रही है ठोस प्रयास: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग, उत्तराखण्ड की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार–पाँच वर्षों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेने पर पात्र लाभार्थियों को अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाए, जिनमें देश एवं विदेश में कार्यरत प्रवासियों को आमंत्रित किया जाए। उन्हें राज्य सरकार की रिवर्स पलायन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाए और उनके सुझाव भी प्राप्त किए जाएँ।
मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों से अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देने के साथ ही पलायन रोकने और रिवर्स पलायन से जुड़े नवाचारों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। इन स्थलों में सभी मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए लघु उद्योगों के संवर्धन पर भी बल दिया गया।

*रिवर्स पलायन की दिशा में उत्साहजनक परिणाम*

ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ॰ एस.एस. नेगी ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अब रिवर्स पलायन का रुझान देखने को मिल रहा है। अब तक लगभग 6282 व्यक्ति वापस अपने गाँवों में लौटे हैं। इनमें देश के भीतर और विदेशों से लौटे लोग भी शामिल हैं। अधिकतर लोग पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बैठक में आयोग के सदस्यों ने रिवर्स पलायन को और गति देने के लिए कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अपर सचिव अनुराधा पाल, डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, संतोष बडोनी, सुरेश जोशी, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं रंजना रावत उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने अधिकारियों को दिए प्रदेश में राजस्व वसूली बढाने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व वसूली बढ़ाने पर विशेष ध्यान देते हुए तय लक्ष्य समय पर पूरे किये जाएं। संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जिलाधिकारियों द्वारा जनपदों में इसकी नियमित निगरानी की जाए। कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। निबंधन एवं रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी कार्यों का डिजिटाइजेशन किया जाए। सब रजिस्ट्रार कार्यालयों का जिलाधिकारियों एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए। रजिस्ट्री के दौरान संपति का उचित मूल्य दर्ज हो इसकी जाँच के लिए संपतियों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जा जाए।

प्रदेश से बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस लेने की कार्यवाही में लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने परिवहन विभाग को ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए राज्य के हित में वन संपदा का सही उपयोग किया जाए। तराई क्षेत्रों में कमर्शियल प्लांटेशन तथा जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए राजस्व में बढोतरी करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “इस दशक को उत्तराखंड का दशक” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए संसाधन वृद्धि को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही, खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को ₹200 करोड़ की केंद्रीय प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, जो राज्य के सही दिशा में बढ़ने का परिचायक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹24,015 करोड़ का कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 62 प्रतिशत से अधिक प्राप्ति हो चुकी है। उन्होंने संबंधित विभागों से आगामी अवधि में लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए समन्वित और सक्रिय प्रयास किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता के लिए पूंजीगत निवेश पर विशेष बल दे रही है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिलेगी और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने के लिए नीति सुधार, नवाचार तथा नई तकनीकों पर निरंतर ध्यान दिया जाना जरूरी है। पारदर्शिता, जवाबदेह और जनहित में ठोस परिणाम देने वाला प्रशासन हमारा उद्देश्य है। जिसके लिए सभी अधिकारियों को कड़े वित्तीय अनुशासन, बेहतर प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य में जुटे रहना होगा।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, एल. फैनई, सचिव दिलीप जावलकर, युगल किशोर पंत, सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. रंजन कुमार मिश्रा अपर सचिव अहमद इकबाल, सोनिका, हिमांशु खुराना, अनुराधा पाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, मनमोहन मैनाली, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

अधिक से अधिक नागरिक केंद्रित सेवाओं को सेवा का अधिकार एक्ट के दायरे में लाया जाए: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में सेवा का अधिकार के अंतर्गत सेवाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि अधिक से अधिक नागरिक केंद्रित सेवाओं को सेवा का अधिकार एक्ट के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने आईटीडीए को आरटीएस और नॉन आरटीएस 1053 अधिसूचित सेवाओं को शीघ्र ऑनलाइन किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभागों द्वारा निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत सेवाओं को उपलब्ध कराया जाए। निर्धारित समयावधि में उक्त सेवा प्रदान नहीं की जाती है तो सिस्टम द्वारा अपनेआप उच्च स्तरीय अधिकारी तक पहुंच जाए।

मुख्य सचिव ने सेवा का अधिकार के तहत् विभागों द्वारा दी जा रही सेवाओं की जानकारी अनिवार्य रूप से कार्यालयों के आगे पटल पर प्रदर्शित किए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि प्रथम एवं द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी की जानकारी भी प्रदर्शित की जाए।

मुख्य सचिव ने आयुक्त, सेवा का अधिकार आयोग को सेवा का अधिकार के लिए ड्राफ्ट नियम तैयार किए जाने की बात कही, ताकि इसे और प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, आयुक्त सेवा का अधिकार आयोग भूपाल सिंह मनराल एवं निदेशक आईटीडीए आलोक पाण्डेय भी उपस्थित थे।

विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस: सीएम ने अल्पसंख्यक मेधावी छात्रों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र, नींबूवाला, देहरादून में विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को सम्मानित एवं विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया।

बड़ी संख्या में आई मुस्लिम महिलाओं ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री धामी एक भाई के रूप में प्रदेश और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कार्य कर रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि आज का दिन भारत की एकता और अखंडता के संरक्षण के लिए हमारे मौलिक कर्तव्यों को याद करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में सदियों से समानता और सभी धर्मों तथा समुदायों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। भारत में अनेकों संस्कृतियों, परंपराओं, भाषाओं और खान-पान की विविधता के बावजूद एकता की भावना रही हैं। उन्होंने कहा वसुधैव कुटुम्बकम के महान सिद्धांत को आत्मसात करते हुए भारत ने हमेशा समूची दुनिया को एक परिवार के रूप में माना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ सभी समुदायों को आगे बढ़ाया जा रहा है। आज जन-धन योजना, उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना, मुफ्त राशन योजना जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के सभी लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, लंगर से सभी प्रकार के करों को हटाना, जियो पारसी योजना, बौद्ध सर्किट का विकास, जैन अध्ययन केंद्र की स्थापना, हज यात्रा की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने एवं तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत जैसे निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के माध्यम से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा नए वक़्फ़ कानूनों में सुधार के माध्यम से वक़्फ़ संपत्तियों के पारदर्शी, उत्तरदायी की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि इन संपत्तियों का वास्तविक लाभ समाज के गरीब, जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुँच सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहन राशि दे रही है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को वार्षिक छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा जनता से किए वादे के अनुसार हमने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का काम किया है। हमने समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में पूरे देश को एक नई दिशा दिखाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में मांग के अनुरूप आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास को गति देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निधि की स्थापना भी की गई है। जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हुनर योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना के अंतर्गत स्वरोजगार के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मौलाना आज़ाद एजुकेशन ऋण योजना के अंतर्गत अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब छात्र-छात्राओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसके अंतर्गत पिछले 4 वर्षों में 169 लाभार्थियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया है। ये कानून किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के सभी अल्पसंख्यक समुदायों सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और मुस्लिमों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और संवैधानिक अधिकार प्रदान करेगा। जिसके अंतर्गत सभी मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी धर्मों की स्वायत्तता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून भी लागू किया है। ताकि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या छल से होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सके और सामाजिक सौहार्द बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा विश्व के कई अन्य देशों में अल्पसंख्यक समुदायों को भेदभाव, उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने विश्व अल्पसंख्यक दिवस के अवसर पर सभी अल्पसंख्यको से आह्वान करते हुए कहा कि सभी सोशल मीडिया के माध्यम से उन देशों में हो रहे अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएं।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम, पद्मश्री डॉ. आर.के जैन, श्री हेमकुंड साहिब ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, अध्यक्ष वक्फ बोर्ड शादाब शम्स एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री की पहल पर राज्यभर में ‘‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’’ अभियान का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में ‘‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’’ अभियान का बुधवार को शुभारंभ हो गया है। न्याय पंचायतों में कैम्प आयोजित कर आम लोगों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही जरूरतमंद लोगों को मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के लाभ प्रदान करने के लिए यह महत्वाकांक्षी अभियान पैंतालीस दिनों तक संचालित किया जाएगा। अभियान में राजस्व, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि, समाज कल्याण सहित 23 विभाग शामिल रहेंगे। अभियान के पहले दिन राज्य के सभी जिलों में तय कार्यक्रम के अनुसार चयनित न्याय पंचायतों में आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में आम लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी पहल से शुरूआती दिन राज्य के विभिन्न स्थानों पर आयोजित शिविरों में हजारों ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया।

*पिथौरागढ*
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत पिथौरागढ़ जिले के विकास खंड बिण की न्याय पंचायत दौला में आयोजित शिविर का शुभारंभ कुमाऊँ मण्डल के आयुक्त श्री दीपक रावत द्वारा किया गया। इस शिविर में 800 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग कर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाया तथा अपनी समस्याएँ आयुक्त के समक्ष रखीं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही निस्तारण किया गया। इस अवसर पर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप इस अभियान के दौरान जनसमस्याओं का स्थायी, पारदर्शी एवं समयबद्ध समाधान का प्रभावी माध्यम सुनिश्चित किया जाय। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने बताया कि पिथौरागढ़ जिले की सभी 64 न्याय पंचायतों में शिविरों के आयोजन की व्यवस्था की गई है।
इस अवसर पर दायित्वधारी गणेश भंडारी, अध्यक्ष जिला पंचायत जितेंद्र प्रसाद, मेयर नगर निगम श्रीमती कल्पना देवलाल ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा संचालित इस योजना को जनता के हित में प्रभावी एवं दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इससे शासन की योजनाएँ सीधे आमजन तक पहुँचेंगी और नागरिकों को त्वरित लाभ प्राप्त होगा।

*चम्पावत*
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान की अंतर्गत चम्पावत जिले के सिमल्टा में आयोजित शिविर में 500 से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया। शिविर में जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं व शिकायतों को गंभीरता से सुना और मौके पर ही 100 से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा बाल विकास विभाग की बालिका जन्मोत्सव मनाने की पहल को आगे बढाते हुए नन्हीं बालिकाओं के साथ केक काटा गया।
इस शिविर में श्रम विभाग से 13, चिकित्सा विभाग से 100 से अधिक, महिला एवं बाल विकास से 30, ऊर्जा विभाग से 3, सहकारिता से 6, पशुपालन से 56, समाज कल्याण से 4, डेयरी विभाग से 70, वन विभाग से 19, राजस्व विभाग से 3, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से 6, ग्राम विकास विभाग से 10, पंचायती राज से 6, कृषि विभाग से 25, आयुष विभाग से 80, होम्योपैथी से 57, मत्स्य विभाग से 4, सेवायोजन विभाग से 11 तथा आपदा प्रबंधन विभाग से 17 लाभार्थियों को सेवाएँ प्रदान की गईं। शिविर में 6 आधार कार्ड भी बनाए गए और से कृषि यंत्र भी बांटे गए। शिविर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अंतर्गत पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम के दौरान सिंग्देव नौले में व्यापक स्वच्छता एवं संरक्षण अभियान भी चलाया गया।
इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख चम्पावत श्रीमती अंचला बोहरा सहित अनेक जन-प्रतिनिधिगण, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जी.एस.खाती, अपर जिलाधिकारी श्री कृष्ण नाथ गोस्वामी भी उपस्थित रहे।

*अल्मोड़ा*
अभियान के पहले दिन अल्मोड़ा जिले में 11 विकासखंडों की 13 न्याय पंचायतों में शिविरों का आयोजन किया गया। न्याय पंचायत सल्लाभाटकोट के अंतर्गत रा.इ.का. भल्यूटा में आयोजित शिविर में मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा, डीएफओ प्रदीप कुमार धौलाखंडी , पुलिस उपाधीक्षक जीडी जोशी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई तथा प्राप्त शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शिविर में दिव्यांगों को एक व्हीलचेयर एवं दो छड़ियाँ वितरित की गईं तथा 77 लोगों को चिकित्सीय परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया। शिविर में राजस्व विभाग द्वारा 15 भूमि प्रमाणपत्र निर्गत करने के साथ ही नाम संशोधन का कार्य भी संपादित करने के साथ ही विभन्न विभागों द्वारा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

*बागेश्वर*
बागेश्वर में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में न्याय पंचायत गढ़सेर के अंतर्गत ब्लॉक सभागार गरूड़ में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आमजन को केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही आवेदन, शिकायत निस्तारण एवं लाभ स्वीकृति की सुविधा उपलब्ध कराई गई। शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर विभागीय सेवाओं एवं योजनाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित किया। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा, एसडीएम वैभव कांडपाल सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

*ऊधमसिंहनगर*
ऊधमसिंहनगर जिले में मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी के नेतृत्व में खटीमा में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टाल लगाकर योजनाओं की जानकारियां दी गयी व पात्र लोगों को योजनाओं से लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर 73 शिकायतें दर्ज की गई, जिसमे से 38 मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शिविर में एनआरएलएम योजनान्तर्गत 09 महिला स्वयं सहायता समूहों को रू. 36 लाख 15 हजार की धनराशि के चैक विततरित किए गए। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा सहित अनेक जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।
अभियान के दौरान रूद्रपुर में उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में भूमि जांच से सम्बन्धित 03 शिकायतों का निस्तारण करने के साथ ही खतौनी-वितरण के 46, स्थायी निवास के 21, जाति प्रमाण पत्र के 07, आय प्रमाण पत्र के 08, उत्तरजीवी प्रमाण पत्र के 02 तथा 01 हैसियत प्रमाण पत्र बनाकर शिविर में उपलब्ध कराये गये।

*देहरादून*
देहरादून जिले में अभियान का शुभारंभ विकास खंड चकाराता की सूदूरवर्ती न्याय पंचायत क्वांसी से हुआ। शिविर में 109 समस्याएं प्रस्तुत की गई। डीएम सबिन बंसल ने शिविर में उपस्थित रहकर जनता की समस्याओं व शिकायतों को सुना और अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का संकल्प के अनुरूप सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक नागरिक तक सरकार की योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पहुँचे तथा कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। शिविर में 658 से अधिक लोगों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, दिव्यांग एवं अन्य प्रमाण पत्र निर्गत करने के सेवाएं उपलब्ध कराई गई। शिविर में जिलाधिकारी ने तीन लाभार्थियों को 80 प्रतिशत सब्सिडी पर पावर वीडर प्रदान किए। वयोश्री योजना के अंतर्गत पीएम दिव्यांग केंद्र की तरफ से 50 बुजुर्गो को निःशुल्क 250 सहायक उपकरण वितरित किए। साध ही 15 लाभार्थियों को किशोरी व वेबी किट प्रदान किए। शिविर में पहुंची असहाय 90 वर्षीय दिव्यांग महिला रामू देवी का आधार कार्ड न बनने की समस्या पर डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी को बुजुर्ग महिला को आधार केन्द्र तक ले जाकर आधार कार्ड बनवाने के निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें दिव्यांग पेंशन सुविधा से भी लाभान्वित किया जाय।
शिविर में दायित्वधारी गीता राम गौड़ सहित अन्य जन प्रतिनिधि तथा अधिकारी मौजूद रहे।

*रुद्रप्रयाग*
जनपद रुद्रप्रयाग में राजकीय इंटर कॉलेज, तैला में जिलाधिकारी प्रतीक जैन की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों द्वारा लगभग 100 से अधिक समस्याएं प्रस्तुत की गई जिनमें से अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर लंबित समस्याओं के शीघ्र निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए। शिविर में क्षेत्र पंचायत प्रमुख विनीता चमोली, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, उप जिलाधिकारी जखोली अनिल सिंह रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

*उत्तरकाशी*
उत्तरकाशी जिले में इस अभियान की शुरूआत दूरस्थ विकासखण्ड मोरी के न्याय पंचायत नानई से की गई। मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित नानई में आयोजित शिविर में 42 शिकायतें प्रस्तुत की गई, जिनमें से मौके पर ही निस्तारण करने के बाद शेष मामलों पर संबंधित विभागों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए गए। शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 59 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा राजस्व विभाग द्वारा 20 लोगों के जाति व आय प्रमाण पत्र निर्गत किए गए है। इस अवसर पर कृषि और उद्यान विभाग द्वारा कृषि उपकरण और रसायनों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख रणदेव सिंह राणा, उपजिलाधिकारी मुकेश चन्द रमोला, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

*टिहरी गढ़वाल*
टिहरी गढ़वाल जिले में अभियान के अंतर्गत जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में न्याय पंचायत दिखोलगांव के श्रीदेव सुमन राजकीय इंटर कॉलेज चम्बा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में विकासखंड देवप्रयाग की पलेटी न्याय पंचायत अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज, हिण्डोलाखाल में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसी क्रम में जिला विकास अधिकारी मो. असलम की अध्यक्षता में विकासखंड कीर्तिनगर के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज, मलेथा में तथा परियोजना निदेशक डीआरडीए पी.एस. चौहान की अध्यक्षता में विकासखंड कार्यालय थत्यूड़ में और मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराडी की अध्यक्षता में विकासखंड नरेंद्रनगर के मुख्यालय फकोट में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन शिविरों में लगभग दो दर्जन विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही विभागीय सुविधओं एवं सेवाओं को उपलब्ध कराया गया। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत प्रमुख चंबा सुमन सजवान सहित भारी संख्या में जनता उपस्थित रही।

*हरिद्वार*
जनपद हरिद्वार में विकास खंड बहादराबाद, नारसन, खानपुर के अंतर्गत बहुउद्वेशीय शिविरों का आयोजन कर विभागों योजनाओं एवं सेवाओं से सैकड़ों लोगों को लाभान्वित किया गया। बहादराबाद में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों से सम्बन्धित 40 शिकायतें दर्ज करायी गयी। जिलाधिकारी द्वारा 18 प्रकरणों का मौके पर निस्तारण कर शेष समस्याओं पर संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर विधायक रानीपुर आदेश चौहान, दायित्वधारी देशराज कर्णवाल भी उपस्थित रहे।
विकासखण्ड नारसन के जूनियर हाई स्कूल मूण्डलाना में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों से सम्बन्धित 28 शिकायतें दर्ज करायी गयी। जिसमें से 12 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। विकासखण्ड खानपुर में उपजिलाधिकारी सौरभ असवाल की अध्यक्षता में शिविर का आयोजन किया गया।

*चमोली*

अभियान के तहत चमोली जिले में न्याय पंचायत बैरांगना में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन कर 23 विभागों के स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को सरकार की जनोपयोगी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ इस दौरान दर्ज 181 शिकयातें एवं आवेदन पत्र प्राप्त हुए। अधिकांश शिकायतों का मौके पर निस्तारण कर शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी की उपस्थिति में आयोजित इस शिविर में विभागीय सेवाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों के लिए आवेदन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर निशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया।

पौड़ी जनपद में अभियान की शुरूआत गुरूवार को यमकेश्वर ब्लॉक के गंगा भोगपुर मल्ला न्याय पंचायत से होगी।

दून व कुमाऊं विश्वविद्यालय के लैंग्वेज स्कूल को मजबूत और प्रभावी बनाएं: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के सम्बन्ध में बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने दून विश्वविद्यालय एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के लैंग्वेज स्कूल को मजबूत और प्रभावी बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भीतर सरकारी नर्सिंग प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विदेशी भाषा को अनिवार्य किया जा सकता है, या इच्छुक प्रशिक्षणार्थियों को इच्छित भाषा का भी प्रशिक्षण देने पर विचार किया जा सकता है। इस दिशा में अन्वेषण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में बनाए जा रहे पुस्तकालयों में भाषा लैब को भी जोड़े जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे पुस्तकालयों में जाने वाले इच्छुक छात्र भाषा लैब में ऑडियो-विजुअल्स के माध्यम से विदेशी भाषाओं को सीख सकते हैं, साथ ही अन्य ऑनलाईन प्लेटफॉर्म का भी प्रयोग किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशिक्षण पा रहे अभ्यर्थियों को भाषा सीखने के लिए प्रेरित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने विदेश रोजगार प्रकोष्ठ एवं तकनीकी शिक्षा को क्रेडिट आधारित विदेशी भाषा लर्निंग कार्यक्रम संचालित किए जाने के निर्देश दिए हैं। इससे विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण ले रहे युवा विदेशी भाषा सीखने के प्रति प्रेरित होंगे।

मुख्य सचिव ने जापान, जर्मनी और यूके के दूतावासों से सम्पर्क कर उनके सुझाव लिए जा सकते हैं। और अच्छी भाषा सिखाने वाली एजेन्सी को हायर किया जा सकता है। उन्होंने विदेशों में रोजगार के अवसर के लिए दूतावासों के माध्यम से सीधे विदेशी नियोक्ताओं से भी सम्पर्क किए जाने की बात कही। कहा कि इससे विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार विदेशों में जॉब सूची और रिक्तियों के अनुरूप प्रशिक्षण पा चुके छात्र-छात्राओं को इसकी जानकारी उपलब्ध करायी जा सकती है। इस सूची का प्रचार प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को विदेशों में रोजगार से जोड़ा जा सकता है।

मुख्य सचिव ने विदेश में रोजगार के साथ ही आंतरिक रोजगार की दिशा में निरन्तर प्रयास किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा स्किल्ड हो इसके लिए भी लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान की परिस्थितियों के अनुरूप नए नए कोर्स संचालित किए जाने पर फोकस किया जाए।

सचिव सी. रविशंकर ने बताया कि विदेश रोजगार प्रकोष्ठ में अभी तक कुल 206 लोगों ने पंजीकरण किया है। जिसमें से नवम्बर, 2025 तक कुल 76 लोगों को विदेश में रोजगार प्राप्त हुआ है। नवाचार योजना के तहत स्टेट नर्सिंग कॉलेजों में 248 अभ्यर्थियों को जर्मन में, 35 को जापानी भाषा का, 62 को फ्रेंच भाषा का, 11 को स्पेनिश और 185 अभ्यर्थियों को अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, रविनाथ रमन, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, अपर सचिव रोहित मीणा एवं मनुज गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हर न्याय पंचायत में बहुद्देशीय शिविर, कोई पात्र लाभार्थी ना छूटे: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में “प्रशासन गाँव की ओर अभियान” के अंतर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि दिनांक 17 दिसम्बर, 2025 से आगामी 45 दिनों तक प्रदेश की सभी न्याय पंचायतों में चरणबद्ध रूप से बहुद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जाए। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर आमजन से आवेदन पत्र प्राप्त किए जाएँ और पात्र व्यक्तियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करते हुए उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर कार्यक्रम का संचालन किया जाए तथा बड़ी न्याय पंचायतों में आवश्यकता अनुसार एक से अधिक शिविर आयोजित किए जाएँ। शिविरों में केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की समुचित जानकारी दी जाए और कोई भी पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे, यह सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि शिविरों के उपरान्त निकटवर्ती गांवों में अधिकारियों द्वारा भ्रमण कर पात्र लाभार्थियों से आवेदन भरवाए जाएँ तथा योजनाओं से वंचित लोगों की पहचान कर कमियों को दूर किया जाए। शिविरों के आयोजन से पूर्व व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और न्याय पंचायत के सभी निवासियों को कम से कम 3–4 दिन पूर्व सूचित किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक सप्ताह आयोजित होने वाले किसी एक शिविर में जिलाधिकारी की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, जबकि अन्य शिविरों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहें। नामित विभागों के अधिकारी शिविरों में उपस्थित रहकर जनसमस्याओं का मौके पर समाधान करें।

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों की शिविरों में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। संगठनात्मक नेतृत्व और प्रतिनिधि नेतृत्व जनसमस्याओं के समाधान एवं योजनाओं के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्यक्रम का विधिवत पंजीकरण किया जाए, लाभार्थियों की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए तथा कार्यक्रमों की साप्ताहिक प्रगति आख्या मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराई जाए।

इस अवसर पर विधायक भरत सिंह चौधरी, सुरेश गड़िया, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव बंशीधर तिवारी तथा वर्चुअल माध्यम से प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट सहित अनेक विधायक, जनप्रतिनिधि एवं भारतीय जनता पार्टी के संगठन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे।

स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण हमारा संकल्प: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 3848 लाभार्थियों के बैंक खातों में 33.22 करोड़ रुपये की धनराशि का मुख्यमंत्री आवास से ऑनलाइन माध्यम से वितरण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड का युवा नौकरी ढूंढने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना राज्य की उन प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसने वास्तविक रूप से पलायन को रोकने, रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के दौरान लौटे प्रवासी, युवा उद्यमी, कारीगर, हस्तशिल्पी एवं शिक्षित बेरोजगार इस योजना के प्रमुख लाभार्थी हैं। योजना के अंतर्गत राज्य के मूल और स्थायी निवासियों को विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में राष्ट्रीयकृत, सहकारी एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विनिर्माण इकाइयों के लिए ₹25 लाख तक और सेवा एवं व्यापार इकाइयों के लिए ₹10 लाख तक की परियोजना लागत अनुमन्य है। योजना के अंतर्गत परियोजना लागत का 15 से 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी उपादान (सब्सिडी) के रूप में प्रदान किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत लगभग 32 हजार लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, इस योजना से अब तक 35 हजार से अधिक लाभार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के तहत अब तक ₹1,389 करोड़ से अधिक का ऋण वितरण किया गया है, जिससे लगभग 64,966 नए रोजगार सृजित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रमाण है कि योजना केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि धरातल पर सशक्त रूप से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने इसे छोटे व्यापारियों और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रदेश के लिए एक “गेम चेंजर योजना” बताया। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता को देखते हुए वर्ष 2025 से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 (MSY 2.0) प्रारंभ की गई है, जिसमें MSY और नैनो योजना का एकीकरण किया गया है। नई व्यवस्था में सब्सिडी की सीमा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक कर दी गई है। साथ ही भौगोलिक, सामाजिक और उत्पाद बूस्टर की अवधारणा के अंतर्गत अतिरिक्त 5 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जिससे योजना आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी सशक्त बनेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को सब्सिडी ऑनलाइन माध्यम से सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। यह सरकार की पारदर्शिता, टेक्नोलॉजी-आधारित और भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यप्रणाली का प्रमाण है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हर जिले में स्थानीय उद्यम, हर गांव में रोजगार और हर युवा के हाथ में काम हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करते हुए डबल इंजन सरकार उत्तराखंड के युवाओं को स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से लाभार्थियों से संवाद भी किया। लोहाघाट, चंपावत के कमल सिंह पार्थोली ने कहा कि उन्होंने स्मार्ट लाइब्रेरी के लिए इस योजना के तहत 10 लाख रुपये का लोन लिया। अभी यहां 130 बच्चे पढ़ रहे हैं, वे अब ई-लाइब्रेरी भी बनाएंगे। उधम सिंह नगर के प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने गाड़ी सर्विस के कार्य के लिए 10 लाख रुपये का लोन लिया; वे पहले साइकिल रिपेयरिंग का कार्य करते थे। उत्तरकाशी के जसपाल ने बताया कि उन्होंने फिटनेस क्लब की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये का लोन लिया, अब वे इसका और विस्तार कर रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल के अयान मंसूरी ने बताया कि उन्होंने रजाई और गद्दा निर्माण के कार्य के लिए 10 लाख रुपये का लोन लिया, उनके साथ इस रोजगार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई लोग जुड़े हैं। इस साल उनका कारोबार तीन करोड़ रुपये होने का अनुमान है। बागेश्वर की चंपा देवी ने कहा कि उन्होंने मोबाइल सेल एंड सर्विस के लिए सात लाख रुपये का लोन लिया था। इस कार्य से उनकी आजीविका बढ़ी है।

इस अवसर पर सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय, महानिदेशक उद्योग एवं एमडी सिडकुल डॉ. सौरभ गहरवार, उप सचिव शिव शंकर मिश्रा, उद्योग विभाग से अपर निदेशक मृत्युंजय सिंह, संयुक्त निदेशक अनुपम द्विवेदी, दीपक मुरारी, उप निदेशक महावीर सजवान, राजेंद्र कुमार, उद्योग मित्र अभिषेक नैनवाल एवं अनुराग गुप्ता मौजूद थे।

अगले 45 दिनों तक प्रदेश की प्रत्येक न्याय पंचायत के प्रत्येक पात्र नागरिक को 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। बैठक के दौरान ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ अभियान के तहत प्रदेशभर की विभिन्न न्याय पंचायतों में कैम्प लगाकर जन सामान्य को राज्य एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाए जाने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मूल उद्देश्य राज्य के प्रत्येक नागरिक तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

मुख्य सचिव ने कहा कि 17 दिसम्बर से अगले 45 दिनों तक प्रदेश की प्रत्येक न्याय पंचायत के प्रत्येक पात्र नागरिक को 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए प्रत्येक जनपद को रोस्टर तैयार कर कैम्प लगाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक को मिले इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने अंतर्गत न्याय पंचायतों की संख्या के आधार पर रोस्टर निर्धारित कर सकता है। कहा कि ज्यादा न्याय पंचायतों वाले जनपद इस अभियान को तब तक जारी रखेंगे जब तक सभी प्रदेशवासी योजनाओं के लाभ से संतृप्त नहीं हो जाते। उन्होंने कहा कि जनपद में अधिकारियों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक सप्ताह में 2 से 3 कार्य दिवसों में प्रत्येक तहसील की प्रत्येक न्याय पंचायत को संतृप्त किया जाना है।

मुख्य सचिव ने कहा कि कैम्प लगाए जाने से पहले न्याय पंचायत में इसका प्रचार प्रसार अनिवार्य रूप से कर लिया जाए ताकि कैम्प में पात्र अभ्यर्थी विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें, साथ ही अपने जरूरी दस्तावेज भी तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार के लिए सोशल मीडिया टूल का भी इस्तेमाल किया जाए ताकि लोगों को जानकारी रहे कि किस न्याय पंचायत में कौन-कौन से दिन कैम्प लगना है। उन्होंने निर्देश दिए कि कैम्प लगने से 2-3 दिन पूर्व उस न्याय पंचायत में अनिवार्य रूप से सभी प्रकार के आवेदन पत्र और जानकारी उपलब्ध करा दी जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारियों द्वारा कैम्प के उपरान्त न्याय पंचायत के आसपास के गांवों का भ्रमण कर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के पात्र अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र भरवाए जाएं। प्रयास किए जाएं कि न्याय पंचायत के सभी पात्र निवासीगण सरकारी जनहित की योजनाओं से संतृप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण की विभिन्न पेंशन योजनाओं, प्रमाण पत्रों और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लाभार्थियों का पंजीकरण आदि सहित कुल 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं का लाभ इस बहुद्देशीय कैम्प के पात्र लाभार्थियों को दिया जाना है। राज्य एवं जनपद स्तर बैंकर्स समिति को भी विभिन्न योजनाओं के तहत् ऋण लाभ के लिए इस कैम्प में शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रभारी सचिवों द्वारा अपने अधीन जनपदों में लगने वाले बहुद्देशीय कैम्पों का औचक निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कैम्प में आमजन की शिकायतों का तत्काल निस्तारण के निर्देश देते हुए लगातार इसकी मॉनिटरिंग किए जाने की भी बात कही। कहा कि प्रत्येक सप्ताह आयोजित कैम्पों की प्रगति आख्या मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय एवं सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को सभी आयोजित कैम्प का डेटाबेस तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कैम्प का डॉक्यूमेंटेशन के लिए एक ऐप तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्धांकी, डॉ. वी. षणमुगम एवं विनोद कुमार सुमन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा का दिन है विजय दिवस: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस के अवसर पर गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने 1971 के युद्ध के सैनिकों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सैनिक कल्याण निदेशालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय (डीडीहाट, हरबर्टपुर, पिथौरागढ़ एवं हरिद्वार) इन सभी पाँच कार्यालयों में सरकारी वाहन दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी वीर बलिदानियों को समस्त प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से 1971 के युद्ध में राष्ट्र की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा की। आज भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा को स्मरण करने का दिन है, जो हमारे इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने हमारी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में वीरभूमि उत्तराखंड के 248 बहादुर सपूतों ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे प्रदेश के 74 सैनिकों को अपने अदम्य साहस और शौर्य के लिए विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही सेना को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। ऑपरेशन सिंधु के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारे सैनिकों के साथ-साथ हमारे स्वदेशी हथियार भी किसी से कम नहीं हैं। इस अभियान में भारत में निर्मित आकाश मिसाइल, डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियारों ने पूरे विश्व में भारत का डंका बजा दिया। आज दुश्मन की एक-एक गोली का जवाब गोलों से दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का करारा जवाब देता है और उन्हें उनके ठिकानों में ही नेस्तनाबूद कर देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वीर जवानों के हित में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन योजना हो, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि कर सैनिकों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करना हो, या बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना—ऐसे अनेक कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार भी सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिकी राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। अशोक चक्र की राशि 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये, महावीर चक्र और कीर्ति चक्र की राशि 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रुपये तथा वीर चक्र और शौर्य चक्र की एकमुश्त राशि 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है। प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं। राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। देहरादून के गुनियाल गाँव में ‘‘भव्य सैन्य धाम’’ का निर्माण भी किया जा रहा है।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान करीब 4 हज़ार सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें उत्तराखंड राज्य के 248 शहीद सैनिक शामिल थे। करीब 9 हज़ार सैनिक घायल हुए थे। उत्तराखंड के 74 सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए, जो हमारे राज्य के लिए गौरव की बात है। सैनिकों का सम्मान हर देशवासी का कर्तव्य है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया है। सैनिकों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, विधायक सविता कपूर, सचिव सैनिक कल्याण दीपेन्द्र चौधरी, मेजर जनरल (से.नि.) सम्मी सबरवाल तथा पूर्व सैनिक और वीरांगनाएँ उपस्थित थीं।