मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में जघन्य अपराधों के मामलों की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने अभियोजन विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनपदों में अभियोजन से संबंधित मामलों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि मामलों के निस्तारण में तेजी लाते हुए अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाए जाने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अभियोजन की प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना है। इसके लिए सम्बन्धित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने इस सम्बन्ध में स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें निर्धारित समय पर आयोजित नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठकें नियमित एवं निर्धारित समय-सारणी के अनुसार आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि अभियोजन से सम्बन्धित मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में जघन्य अपराधों के मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करते हुए प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए जघन्य अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अभियोजन प्रक्रिया के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर प्रक्रियात्मक अथवा समन्वय सम्बन्धी समस्या सामने आती है, तो उसका तत्काल समाधान किया जाए, ताकि मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और बेहतर किया जाए। इसके लिए लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के साथ-साथ प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक के दौरान महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने सेवा संकल्प अभियान के तहत सभी जिलाधिकारियों को 15 सितम्बर, 2026 से 18 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अवसर पर प्रदेश में 15 सितम्बर से 18 अक्टूबर, 2026 तक विभिन्न कार्यक्रम एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ‘भारत 2047’ कार्यक्रम के अंतर्गत 17 सितम्बर से 08 अक्टूबर, 2026 तक विकसित भारत एवं ‘भारत 2047’ विषय पर छात्र निबंध, चित्र एवं भाषण प्रस्तुत करेंगे। जिला स्तर पर प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी तथा श्रेष्ठ चित्रों को एनिमेटेड लघु फिल्मों में सम्मिलित कर प्रदर्शित किया जाएगा।

महानिदेशक सूचना ने कहा कि ‘सेवा और सपना’ के अंतर्गत प्रदेशभर के विद्यालयों में प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि 01 से 07 अक्टूबर, 2026 तक ‘हैकाथॉन और इनोवेशन चौलेंज’ का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें युवाओं, स्टार्टअप्स एवं रिसर्चर्स को टेक्नोलॉजी, विकास एवं सोशल इनोवेशन सहित विभिन्न विषयों पर भारत के भविष्य के लिए समाधान तैयार करने हेतु आमंत्रित किया जाएगा।

महानिदेशक सूचना ने कहा कि ‘जन कल्याण संवाद’ के माध्यम से प्रौद्योगिकी, खेल, कला, विज्ञान एवं सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में प्रभावशाली व्यक्तियों को एक मंच पर लाया जाएगा। संवाद के माध्यम से समाज एवं दुनिया के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का अन्वेषण किया जाएगा। इसके साथ ही, 07 अक्टूबर, 2026 को ‘सेवा ज्योति यात्रा दिवस’ के अवसर पर रिले मैराथन में पेशेवर एथलीटों के साथ आम नागरिक भी प्रतिभाग करेंगे। इसके साथ ही खेल प्रतियोगिता, साइकिलिंग तथा बाइक रैली का आयोजन भी किया जाएगा।

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना

चेन्नई में ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ’ में उत्तराखंड की फिल्म नीति और राज्य की खूबसूरत शूटिंग लोकेशंस को प्रस्तुत किया गया। कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रमुख फिल्ममेकर्स, प्रोड्यूसर्स तथा फिल्म कमीशन के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में प्रसार भारती वेव्स ओटीटी, उत्तराखंड एफडीसी और महाराष्ट्र एफएससीडीसी सहित विभिन्न प्रदर्शकों ने प्रतिभाग किया। साथ ही ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान सहित कई देशों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रही। कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद् के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने प्रतिभाग कर राज्य की फिल्म नीति और शूटिंग की संभावनाओं के संबंध में विचार साझा किए।

चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहन देने के लिए फिल्म नीति लागू की गई है। फिल्म नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को हर सम्भव सहायता प्रदान की जा रही है। उत्तराखंड में फिल्माई गई हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में फिल्म शूटिंग की अनुमति अब ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने के साथ सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 7 दिनों के भीतर फिल्मांकन की अनुमति प्रदान की जा रही है। प्रदेश में शूटिंग शुल्क को माफ किया गया है। शूटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था तथा जीएमवीएन और केएमवीएन गेस्ट हाउसों में विशेष छूट भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष 200 से अधिक फिल्म वेब सीरीज सीरियल की शूटिंग उत्तराखण्ड में हो रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।

चौहान ने बताया कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त राज्य है। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनाते हुए उत्तराखण्ड को एक सशक्त फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित करना है।

कॉन्क्लेव के दौरान उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद् के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान द्वारा तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स एवं डायरेक्टर्स के साथ वन-टू-वन बैठकें आयोजित की गईं। इंडिया टॉकीज, स्टोन बीच स्टूडियो, गिरीश प्रधान, बीटीजीआई प्रोडक्शंस (यूएस), पारसा पिक्चर, लाइका प्रोडक्शंस, मसाला पिक्स और कवि क्रिएशन्स, ड्रीम वारियर पिक्चर सहित कई प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग के प्रति रुचि दिखाई है।

चौहान ने बताया कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों और अनुकूल फिल्म नीति के दृष्टिगत इस आयोजन में सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ-साथ फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन देना भी जरूरीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को सम्मानित किया तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों एवं छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान गंगा सम्मान समारोह केवल सम्मान और छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का सराहनीय प्रयास है। किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल उसकी आर्थिक सहायता करना नहीं, बल्कि उसके सपनों को पूरा करने में सहभागी बनना है।

मुख्यमंत्री ने स्व. कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगीत, साहित्य और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, सामाजिक जागरूकता एवं जनकल्याण के क्षेत्र में मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वाेच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि विद्यार्थी को दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार देने के साथ उसकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। एक शिक्षक कक्षा में केवल एक विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ऐसे संस्कार और जीवन-मूल्य देने का आह्वान किया, जो उन्हें अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में रहा है। राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों को सुविधाएं देने के साथ अपना समय, अच्छे संस्कार और अनुशासन देने तथा प्रत्येक परिस्थिति में उनका सकारात्मक मार्गदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का उज्ज्वल भविष्य केवल अच्छी शिक्षा से नहीं बनता, इसके लिए विद्यालय और परिवार दोनों का साथ चलना आवश्यक है। आने वाली पीढ़ी के निर्माण में माता-पिता और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली असफलताओं से सीखते हुए लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। कठिन रास्ते ही अक्सर बड़ी मंजिलों तक लेकर जाते हैं। विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, खिलाड़ी, उद्यमी, प्रशासनिक अधिकारी अथवा किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ें, सबसे पहले एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा, मेहनत और अच्छे संस्कारों के बल पर उत्तराखंड और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. कुसुम कांता का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाज सेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा और संस्कारों को सदैव महत्वपूर्ण स्थान दिया। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाज हित में किए जा रहे कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं।

डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, आर्यन देव उनियाल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण करने वाले नन्हे बच्चों ने सीएम से की भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में तंजानिया स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण करने वाले उत्तराखंड के नन्हे पर्वतारोही मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने भेंट की।

मुख्यमंत्री ने दोनों बच्चों को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी का सफल आरोहण करना उनके साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का परिचायक है। दोनों बच्चों ने अपनी इस उपलब्धि से उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत अल्मोड़ा के चीनाखान और 10 वर्षीय प्रिशा रावत नैनीताल जनपद के बैलपड़ाव की निवासी हैं। दोनों ने 22 अगस्त 2026 को 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो चोटी का सफल आरोहण कर तिरंगा फहराया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेल एवं अन्य साहसिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए एक करोड़ की धनराशि की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी घोषणा की कि हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष हिमालय दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष तथा 21वीं उत्तराखण्ड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारे लिए केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। आदि काल से हिमालय हमारे ऋषियों, मुनियों, साधकों और विचारकों की तपोभूमि रही है। गंगा और यमुना सहित अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम हिमालय से होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं और इनका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों पर संकट तथा अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। हिमालय की संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी राज्य या देश की सीमाओं को देखकर अपना प्रभाव नहीं डालता। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में बहुत कम योगदान देने वाले हिमालयी क्षेत्रों को भी इसका बड़ा मूल्य चुकाना पड़ सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी और उसके समाधान के प्रयास साझा होने चाहिए। हिमालयी राज्यों की इस चिंता और आवाज को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंचों तक और मजबूती से पहुंचाने की आवश्यकता है। हिमालय के ग्लेशियर और जल स्रोत प्रभावित होने का असर नदियों, कृषि, पेयजल और करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए हिमालय संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि हमारे भविष्य से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी पर्यावरण को लेकर जागरूक है। आज युवा हिमालय, नदियों, जंगलों, स्वच्छ हवा और पानी जैसे विषयों पर गंभीरता से सोच रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां हमसे केवल बड़ी इमारतों और चौड़ी सड़कों का हिसाब नहीं मांगेंगी, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी, नदियों और जंगलों का भी हिसाब मांगेंगी। इसलिए हमें आज ही तय करना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों को कैसा उत्तराखण्ड सौंपकर जाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार की आवश्यकता है, लेकिन उत्तराखण्ड के विकास का मॉडल राज्य की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर ही निकलेगा। हमें ऐसा विकास चाहिए जिसमें सड़क भी बने और जंगल भी बचें, रोजगार भी बढ़े और नदियां भी निर्मल रहें, पर्यटन भी बढ़े और पहाड़ों की धारण क्षमता का भी ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी मंत्र ‘मिशन लाइफ’ अर्थात ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ दिया है। पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की नीतियों से नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में भी बदलाव लाना होगा। पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक का प्रयोग कम करना, स्वच्छता रखना, स्थानीय उत्पादों को अपनाना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और सतत विकास को गति दी जा रही है। राज्य सरकार भी उत्तराखण्ड को हिमालय संरक्षण की दिशा में मॉडल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड हिमालय संरक्षण के विषय में केवल अपनी चिंता व्यक्त करने वाला राज्य न रहे, बल्कि पूरे देश को दिशा और नेतृत्व देने वाला राज्य बने। इसके लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों के टिकाऊ समाधान तलाशने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है। हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित न रहकर जन-जन का आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुग्याल हमारी जैव विविधता और जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आधार हैं, जंगल हमारी हवा, पानी और मिट्टी के रक्षक हैं तथा नदियां हमारी सभ्यता की जीवनधारा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण को पहाड़ की समृद्धि से भी जोड़ना होगा। गांवों में रोजगार, स्थानीय उत्पादों को बाजार, मातृशक्ति का आर्थिक सशक्तिकरण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देकर पलायन को कम किया जा सकता है। हिमालय का संरक्षण और पहाड़ की समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। हमारे जंगल, बुग्याल, जैव विविधता, नदियां, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पाद हमारी इकोलॉजिकल वेल्थ हैं और यही भविष्य में हमारी इकोनॉमिक स्ट्रेंथ भी बन सकते हैं।

इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय, हेस्को के संस्थापक एवं पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, रजिस्ट्रार वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय डॉ. राजेश उपाध्याय, संयुक्त निदेशक यू कॉस्ट श्री डी.पी. उनियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

सीएम धामी ने पारंपरिक आभूषणों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजपुर रोड देहरादून स्थित होटल में सर्राफ मंडल देहरादून द्वारा आयोजित भव्य एग्जीबिशन का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एग्जीबिशन में प्रदर्शित विभिन्न प्रकार के आभूषणों, पारंपरिक डिजाइनों और स्वर्णकारों की कला एवं हुनर का अवलोकन किया तथा आयोजकों और स्वर्णकार समाज को इस आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन भारतीय कला, संस्कृति, परंपरा और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। स्वर्णकार समाज केवल आभूषणों का निर्माण नहीं करता, बल्कि भारत की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने एवं उसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य भी करता है। विवाह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों सहित हमारे जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर आभूषण हमारी परंपराओं, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश के कारीगरों, स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी हुनर को नई पहचान एवं नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के अनुरूप भारत को वैश्विक ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग का प्रमुख हब बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प एवं स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के साथ ही कौशल विकास और आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के समृद्ध पारंपरिक आभूषणों—गढ़वाली नथ, पौंजी, चंपकली हार, कुमाऊंनी गुलोबंद, पिचौरा हार, झूमका आदि को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक डिजाइनों को आधुनिक आवश्यकताओं और बदलते समय के अनुरूप विकसित कर ‘लोकल टू ग्लोबल’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इससे उत्तराखंड के स्थानीय कारीगरों और स्वर्णकारों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा युवा पीढ़ी भी अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से और अधिक जुड़ सकेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पारंपरिक आभूषणों के संरक्षण के साथ-साथ स्वर्णकार समाज के कौशल विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आवश्यक योजना तैयार कर स्वर्णकारों एवं कारीगरों को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य’ बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने इस संकल्प को साकार करने में स्वर्णकार समाज से सक्रिय सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया।

इस अवसर पर सर्राफ मंडल देहरादून के पदाधिकारी एवं सदस्य, स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधि, आभूषण व्यवसायी, कारीगर एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज का महत्वपूर्ण योगदान: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसवंत सिंह ग्राउंड, गढ़ी कैंट, देहरादून में आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरितालिका तीज उत्सव को सरकारी स्तर पर और अधिक भव्य रूप से आयोजित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने गोर्खाली समाज की माताओं-बहनों को हरितालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरितालिका तीज माता पार्वती की अटूट तपस्या, विश्वास, समर्पण और शक्ति का प्रतीक है। यह पर्व हमें दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। माताएं और बहनें हमारी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों की सबसे बड़ी संरक्षक हैं। उनके प्रयासों से हमारी भाषा, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोर्खाली समाज अपनी वीरता, निष्ठा, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के लिए जाना जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोर्खा वीरों ने सदैव अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की गोर्खा समाज की भावना पर पूरे देश को गर्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षा, खेल, कला-साहित्य और समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अमर शहीद कप्तान दल बहादुर थापा की स्मृति में बनने वाले ‘आजाद हिन्द फौज शहीद द्वार’ का शिलान्यास भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह शहीद द्वार गोर्खा समाज के अदम्य शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को उनके त्याग और बलिदान से परिचित कराएगा।

मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच केवल पड़ोसी देशों का संबंध नहीं, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते हैं। सीमांत क्षेत्र से होने के कारण उन्होंने भारत और नेपाल की साझा संस्कृति, आत्मीयता और परस्पर जुड़ाव को निकटता से अनुभव किया है। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में भारत नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपाल के शीघ्र इस संकट से उबरने की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तीकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया है। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में 3 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि अपने परिवार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सशक्तीकरण और उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आचार्य बालकृष्ण, गीता पुष्कर धामी, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव कमेटी की अध्यक्ष प्रभा शाह, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, नेहा जोशी, सिद्धार्थ अग्रवाल, अनुकृति गुसाईं सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बिना मान्यता के चल रहे मदरसों पर फिर हुई कार्रवाई, देहरादून और हल्द्वानी में कराया गया बंद

देहरादून। प्रदेश में निर्धारित मान्यता एवं शैक्षणिक मानकों का अनुपालन नहीं करने वाले मदरसों के विरुद्ध राज्य सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता संचालित मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि देहरादून में तीन मदरसों के संबंध में कार्रवाई की गई। इनमें आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को सील किया गया, जबकि मदरसा दार-ए-अरकम, आजाद कॉलोनी, माजरा तथा मदरसा दारूल उलूम रहीमिया के प्रबंधकों द्वारा मदरसों का संचालन बंद किए जाने संबंधी लिखित अंडरटेकिंग दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है, जबकि तीन मदरसों के प्रबंधकों ने संचालन बंद किए जाने की लिखित सूचना दी है। इस प्रकार अब तक कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन बंद कराया गया है।

इसी क्रम में नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में शनि बाजार रोड, गौजाजाली उत्तर स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना तथा इंदिरा नगर, बनभूलपुरा में संचालित बिना मान्यता प्राप्त मदरसे को भी सील किया गया है।

हल्द्वानी नगर मजिस्ट्रेट ए.बी. वाजपेयी ने बताया कि संबंधित मदरसा प्रबंधकों को मान्यता से जुड़े आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों एवं मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा। राज्य में लागू नई व्यवस्था के अंतर्गत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर संचालित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने किया प्रतिभाग

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर पुलिस लाइन परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और धार्मिक विरासत समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उपदेशों से परिचित होने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म, कर्तव्य, कर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने और समाज एवं प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में गीता धामी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव सहित पुलिस महानिदेशक एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा अन्य प्रशासनिक कार्मिक उपस्थित रहे।

हनुमान अंश देख सीएम धामी हुए बाबा नीम करौली की भक्ति और सेवा भावना से अभिभूत, फिल्म को किया टैक्स फ्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज हाथीबड़कला स्थित सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल पहुंचे, जहां उन्होंने परम बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन, उनकी भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा सहित विभिन्न दायित्वधारी एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म देखने के बाद कहा कि भारत की संत परंपरा सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाती रही है। बाबा नीब करौरी महाराज जी का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बाबा की भक्ति, मानव सेवा और सभी के प्रति प्रेम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। बाबा नीब करौरी महाराज जी का कैंची धाम आज विश्वभर में श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसी आध्यात्मिक विभूतियों के जीवन और संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले रचनात्मक प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ भारत की समृद्ध संत परंपरा, भक्ति, सेवा, प्रेम और मानव कल्याण की भावना को केंद्र में रखती है। फिल्म के माध्यम से बाबा नीब करौरी महाराज जी की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं।

मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माताओं एवं पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक एवं प्रेरणादायी फिल्मों से समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।

उल्लेखनीय है कि ‘हनुमान अंश’ का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है और फिल्म में शोभिनव सतैया सहित अन्य कलाकारों ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म को 7 अगस्त 2026 को हिंदी में देशभर में रिलीज किया गया।