उत्तराखंडः आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को सभी तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं की मिलेगी निःशुल्क कोचिंग

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में कमजोर वर्गों के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि निःशुल्क कोचिंग योजना की गुणवत्ता बेहतर हो, प्रतियोगियों का चयन स्क्रीनिंग के माध्यम से हो तथा प्रतियोगियों की सुविधा के अनुरूप तैयारी का टाइम का प्रबंध किया जाए।

उन्होंने निर्देशित किया कि निःशुल्क कोचिंग में किसी भी तरह की खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए तथा इसका आउटकम जरूर निकलना चाहिए। उन्होंने इसके लिए शीघ्रता से सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के निर्देश दिए।

इस दौरान निदेशक शिक्षा डॉ मुकुल कुमार सती ने अवगत कराया कि इस वर्ष 10 हजार छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की निःशुल्क कोचिंग दी जानी है। कक्षा 11 में अध्ययनरत प्रतियोगियों को 2 वर्ष की कोचिंग दी जाएगी जबकि 12वीं पास करने वाले प्रतियोगियों को एक वर्ष की कोचिंग दी जाएगी।

कहा कि कोचिंग आर्ट्स, साइंस तथा कॉमर्स तीनों तरह के स्ट्रीम के अनुरूप दी जाएगी और इसमें लगभग सभी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त मेधावी प्रतियोगियों को 6 वर्ष की एडवांस कोचिंग भी दी जाएगी।

इस अवसर पर बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, अपर सचिव मनुज गोयल सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

झुग्गियों के पुनर्विकास के लिए गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकों को आयोजित कर लिए जाएः धामी

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास से सम्बंधित बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को झुग्गियों का पुनः सर्वे कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि वर्ष 2011-12 में किए गए सर्वे में चिन्हित श्रेणी 1 एवं श्रेणी 2 के पात्र लोगों का स्थानीय निकायों और जिलाधिकारियों की सहायता से अभियान चला कर विनियमित किया जाए। उन्होंने कहा कि झुग्गियों के पुनर्विकास के लिए गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकों को आयोजित कर लिए जाए। इसके उपरांत राज्य स्तरीय बैठक का भी शीघ्र आयोजन किया जाए।

मुख्य सचिव ने काठबंगला प्रोजेक्ट में निर्मित आवासों का आबंटन नवम्बर 2025 तक कर लिया जाए। उन्होंने सचिव शहरी विकास को इसकी निरन्तर मॉनिटरिंग किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि भूमि चिन्हीकरण, आबंटन के लिए नियम, आंकलन, पात्रता एवं डीपीआर तैयार किए जाने हेतु सचिव शहरी विकास, सचिव लोक निर्माण विभाग, एमडीडीए और नगर निगम संयुक्त बैठक लेकर निर्णय लें।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर सचिव गौरव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने राजकीय महिला गृहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा सचिवालय परिसर में राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों एवं राजकीय महिला गृहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों के लिए कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण की नियमित व स्थायी व्यवस्था किए जाने हेतु अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए इन बच्चों को सशक्त व स्वावलंबी बनाने के कारगर प्रयास किए जांय।

दीपावली के उपलक्ष्य में ने महिला कल्याण विभाग द्वारा स्थापित आलम्बन आउटलेट सेन्टर के माध्यम से आयोजित इस प्रदर्शनी का दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बच्चों एवं महिलाओं द्वारा निर्मित आकर्षक पेंटिग्स एवं विभिन्न उत्पादों की सराहना की। मुख्य सचिव ने महिला गृहों की संवासिनियों की प्रतिभा को निखारने के लिये व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा उत्पादों की गुणवत्ता संवर्द्धन की व्यवस्था किए जाने हेतु निर्देश दिये गये। मुख्य सचिव ने बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों की शिक्षा व प्रशिक्षण के लिये विशेष प्रयास करने हेतु भी निर्देशित किया गया।

महिला कल्याण विभाग द्वारा स्थापित आलम्बन आउटलेट सेन्टर के माध्यम से आयोजित यह प्रदर्शनी आगामी 17 अक्टूबर तक चलेगी। जिसमें राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं के बच्चों एवं राजकीय महिला गृहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों यथा- मोमबत्ती, करवा, दिये, चित्रकला, तोड़न, भीमल पेटिंग एवं ऐंपण पेटिंग से बने अनेक उत्पादों को प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए रखा गया है।

इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास के सचिव चन्द्रेश यादव, निदेशक बी.एल.राणा, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता, राज्य नोडल अधिकारी आरती बलोदी, जिला परिवीक्षा अधिकारी, देहरादून मीना बिष्ट एवं कार्यक्रम प्रबंधक प्रीति उपाध्याय उपस्थित रहे।

प्रदेश के लोगों को भूकम्प जैसी परिस्थितियों के लिए जागरूक किए जाने की आवश्यकताः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में उत्तराखण्ड भूकम्प जोखिम मूल्यांकन एवं शमन के सम्बन्ध में बैठक ली। बैठक में आईआईटी रूड़की और वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव ने कहा कि भूकम्प के प्रति संवेदनशीलता की दृष्टि से प्रदेश का एक बड़ा भू-भाग के जोन 5 में है, जिसके कारण यूईआरएएम के उद्देश्य, एक औपचारिक सुरक्षा-संचालित वातावरण तैयार करते हुए भूकंप से होने वाले मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करना पर विशेष फोकस किया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के लोगों को भूकम्प जैसी परिस्थितियों के लिए जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को भूकम्प के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए भूकम्प की मॉक ड्रिल के लिए एक दिन निर्धारित करते हुए नियमित रूप से भूकम्प जागरूकता दिवस मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे भूकम्प जैसी परिस्थिति में न्यूनतम मानवीय और आर्थिक नुकसान होगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि यूएसडीएमए द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के साथ एक विस्तृत एमओयू किया जाए जिसमें विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के लिए संस्थानों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि वाडिया संस्थान ग्लेशियर लेक पर काम कर रहा है तो आईआईटी रूड़की भूकम्प जोखिम मूल्यांकन और शमन पर कार्य कर सकता है। मुख्य सचिव ने कहा कि भूकम्प के प्रति संवेदनशीलता की दृष्टि से भवन निर्माण के लिए कुछ मापदंड भी निर्धारित किए जाने चाहिए। उन्होंने भूकम्परोधी भवनों के सम्बन्ध सीबीआरआई के साथ एमओयू किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर सचिव विनोद कुमार सुमन एवं अपर सचिव आनन्द स्वरूप सहित आईआईटी रुड़की, वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान और सीबीआरआई के वैज्ञानिक उपस्थित थे।

न्यायालयों के आवासीय व अनावसिया भवनों के निर्माण को भूमि हस्तांतरण के संबंध में हुई बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद एवं अधीनस्थ न्यायालयों, पारिवारिक न्यायालयों आदि के आवासीय एवं अनावसिया भवनों के निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी पौड़ी, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग एवं देहरादून को जनपद न्यायालयों के आवासीय एवं अनावसिया भवनों हेतु शीघ्र भूमि चिन्हित कर हस्तांतरित किए जाने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 21 सितंबर, 2025 को प्रस्तावित स्नातक स्तरीय परीक्षा को सफलता और पारदर्शिता के साथ आयोजित किए जाने के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों के साथ बैठक ली। उन्होंने परीक्षा को पारदर्शिता के साथ आयोजित किए जाने हेतु सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने गोपनीय सामग्री को डबल लॉक, सीसीटीवी और सुरक्षा गार्डों की निगरानी में रखे जाने हेतु व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा से पूर्व संवेदनशील जनपदों की सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान, नकल सम्बन्धी गतिविधियों में लिप्त और संदिग्ध लोगों और कोचिंग संस्थानों की निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल. फ़ैनाई, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, अध्यक्ष यूकेएसएसएससी जीएस मर्ताेलिया, सचिव शैलेश बगौली, नीतेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, रविनाथ रमन, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. नीरज खैरवाल, विनय शंकर पाण्डेय, दीपेन्द्र कुमार चौधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी एवं जनपद न्यायाधीश उपस्थित थे।

ऋषिकेश में पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि पर भूमिगत पार्किंग की व्यवस्था करेंः बर्द्धन

मुुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यकारिणी समिति की बैठक में राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी परियोजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन से जुड़े कामों को तत्परता से संचालित करने पर जोर दिया गया। बैठक में यूआईआईडीबी के संगठनात्मक ढांचे का सुदृढीकरण करने तथा विभिन्न स्तरों पर अधिकारों के विकेन्द्रीकरण के संबंध में भी विस्तार से चर्चा कर इससे जुड़े प्रस्ताव बोर्ड की आगामी बैठक में रखने का निश्चय किया गया।

यूआईआईडीबी की कार्यकारिणी समिति की 8वीं बैठक सचिवालय स्थित मुख्य सचिव सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने यूआईआईडीबी के कार्यों की विस्तार से समीक्षा कर शारदा कॉरीडोर, ऋषिकेश कॉरीडोर एवं हरिद्वार कॉरीडोर परियोजनाओं के़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि ऋषिकेश में त्रिवेणीघाट परियोजना के तहत घाट पर गंगाजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाय। इसके लिए हाइड्रोलॉजीकल अध्ययन कराते हुए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए जाने वाले आवश्यक उपाय अमल में लाए जायें। ऋषिकेश में पुराने रेलवे स्टेशन की भूमि पर भूमिगत पार्किंग की व्यवस्था सहित हरित पार्क एवं हेरीटेज फारेस्ट वाक-वे के निर्माण की परियोजना के प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना के रख-रखाव एवं संचालन की व्यवहार्यता का समुचित आकलन कर लिया जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश तक रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के विस्तार एवं ऋषिकेश से देहरादून के मध्य रेलवे लाईन के निर्माण किए जाने की संभावनाओं को देखते हुए ऋषिकेश में रेलवे स्टेशन व इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में भविष्य की आवश्यकताओं का ध्यान रख जरूरी अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने के प्राविधान भी शामिल किये जायें। मुख्य सचिव ने ऋषिकेश में शहर के अंदर भीड़ एवं यातायात के अत्यधिक दबाव को देखते हुए आईएसबीटी और चारधाम यात्रा पंजीकरण केन्द्र को उपयुक्त स्थल पर पुनर्स्थापित करने के मामले में मंडलायुक्त, पुलिस, जिला प्रशासन, पर्यटन, परिवहन, संयुक्त रोटेशन व्यवस्था समिति सहित सभी संबद्ध हितधारकों से विचार-विमर्श कर प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

हरिद्वार कॉरीडोर की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी कुंभ मेला को देखते हुए इस परियोजना के स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाय। मुख्य सचिव ने हरिद्वार में सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंध के लिए उच्च तकनीकी व आधुनिक सुविधाओं से युक्त इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर बनाए जाने के लिए मेला नियंत्रण कक्ष के निकट उपयुक्त स्थान की व्यवस्था किए जाने के साथ ही इस परियोजना के प्रस्तावों में मेलाधिकारी, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के सुझावों को शामिल किए जाने की हिदायत दी। हरिद्वार में घाटों के विस्तार, पार्किंग, रोपवे, पैदल मार्गों के निर्माण तथा परिवहन, सार्वजनिक प्रसारण व्यवस्था, विभिन्न प्रकार की नागरिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन किए जाने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि चंडीघाट में सांस्कृतिक केन्द्र और मल्टी मॉडल टूरिज्म निर्माण की महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए भी तेजी से आगे बढा जाये। मुख्य सचिव ने देहरादून में यमुना कॉलोनी के पुनर्विकास, नए ग्रीनफील्ड शहरों का विकास की योजना सहित यूआईआईडीबी द्वारा प्रस्तावित अन्य योजनाओं के लिए भी समुचित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, डॉ. वी. षणमुगम, युगल किशोर पंत, सीसीएफ डॉ. पराग मधुकर धकाते, रेजिडेंट कमिश्नर अजय मिश्रा, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित एवं मेलाधिकारी सोनिका, अपर सचिव अभिषेक रूहेला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस निर्देश, प्रदेश में पर्यावरण विभाग होगा कार्बन क्रेडिट के लिए नोडल विभाग

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में कार्बन क्रेडिट के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के लिए कार्बन क्रेडिट आय के नए स्रोत के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सभी विभागों द्वारा कार्बन क्रेडिट की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में पर्यावरण विभाग कार्बन क्रेडिट के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि कार्बन क्रेडिट उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य, जिसका अधिकतम भूभाग वन से आच्छादित है, के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में मदद करता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास के भी नए अवसर पैदा करता है। उत्तराखण्ड के किसान और स्थानीय समुदाय कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि वन, कृषि और सहकारिता विभाग विभाग में कार्बन क्रेडिट की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने सहकारिता विभाग को अपने अंतर्गत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को इसमें शामिल कर कार्बन क्रेडिट्स की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग को कार्बन क्रेडिट और ग्रीन क्रेडिट की दिशा में शीघ्र तेजी से कार्य किए जाने की बात कही। उन्होंने कृषि विभाग एवं दुग्ध विकास विभाग को भी कार्बन क्रेडिट पर कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय समुदायों की सहभागिता से जैव विविधता की रक्षा होगी एवं सतत जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के नए अवसर के साथ ही किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर भी मिलेगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, विनोद कुमार सुमन, सी. रविशंकर, श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव विनीत कुमार एवं हिमांशु खुराना सहित नाबार्ड के प्रतिनिधि सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नदियों में बैराज बनाकर प्रदेशभर को संतृप्त किया जाएः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सिंचाई, लघु सिंचाई सहित जल स्रोत एवं नदी पुनर्जीवीकरण प्राधिकरण के साथ प्रदेश में बैराज, चेकडैम एवं जलाशयों आदि के निर्माण एवं संतृप्तिकरण की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेशभर में चौकडैम और बैराज के लिए अगले 5 वर्षों का प्लान तैयार किया जाए। साथ ही, टाईमलाईन के साथ कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए।

मुख्य सचिव ने सिंचाई, लघु सिंचाई एवं जलश्रोत एवं नदी पुनर्जीवीकरण प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि चौकडैम और बैराज से प्रदेशभर को संतृप्त किया जाना है। उन्होंने निर्देश दिए कि नदियों में बैराज बनाकर प्रदेशभर को संतृप्त किया जाए। कहा कि पेयजल की कम उपलब्धता वाले स्थानों को प्राथमिकता पर लेते हुए बैराज बनाए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि चौकडैम बनाए जाने के लिए विभागों द्वारा जलश्रोत एवं नदी पुनर्जीवीकरण प्राधिकरण की गाइडलाइन्स का अनुपालन अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने चौकडैम बनाए जाने के लिए जल ग्रहण क्षेत्र और जलश्रोतों के उपचार पर भी फोकस किया जाना चाहिए। कहा कि चौकडैम भूजल स्तर को सुधारने के साथ ही मानसून सीजन में धराली जैसी घटनाओं को रोकने में भी कारगर हो सकते हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि बैराज और चौकडैम की सूची तैयार कर प्राथमिकता तय की जाए। पेयजल एवं सिंचाई वाली योजनाओं को प्राथमिकता पर लिया जाए। साथ ही, उन्होंने शहरी क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण के लिए भी प्राधिकरण को लगातार कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने जैव-अनुकूल तकनीक को भी अपनाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में जलाशयों के निर्माण कार्य में भी तेजी लाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय निर्माण में तेजी लाए जाने हेतु सचिव सिंचाई को साप्ताहिक समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जनपद पौड़ी के सतपुली बैराज को शीघ्र पूर्ण किए जाने और जनपद नैनीताल में प्रस्तावित खैराना बैराज का निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान सिंचाई, लघु सिंचाई एवं जलश्रोत एवं नदी पुनर्जीवीकरण प्राधिकरण द्वारा किए जाने रहे कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, युगल किशोर पंत एवं अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने दिए वन विभाग को राजस्व बढ़ाए जाने के लिए नए श्रोत जोड़े जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय स्थित अपने सभागार में राजस्व अभिवृद्धि के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण विभागों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राजस्व बढ़ाये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राजस्व बढ़ाए जाने के लिए नवाचार एवं तकनीक के प्रयोग को बढ़ाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को राजस्व बढ़ाए जाने के लिए नए श्रोत जोड़े जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जड़ी बूटी वन विभाग के राजस्व का एक बड़ा स्रोत हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कार्बन क्रेडिट और ईको टूरिज्म को बड़ा श्रोत बनाने की दिशा में काम किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जड़ी बूटी के क्षेत्र में संभावनाओं का परीक्षण कराते हुए अपने सभी डिविजन को लक्ष्य दिया जाए। कहा कि ईको टूरिज्म को प्रोत्साहन दे कर इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए, इस से राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने टिम्बर बिक्री की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू किए जाने के निर्देश दिए, साथ ही वन निगम के वर्किंग प्लान में एक हज़ार मीटर से ऊपर के क्षेत्र को सम्मिलित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को अपने खनन लक्ष्य पुनः निर्धारित करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही खनन विभाग को लंबित लॉट्स को शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। कहा कि लंबित पड़े 14 लोट्स को अक्टूबर से पहले शुरू कर लिया जाए। उन्होंने विभाग को नए लॉट्स लगातार चिह्नित किए जाने की भी बात कही। मुख्य सचिव ने पारदर्शिता लाने के लिए सर्विलांस सिस्टम शीघ्र शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि वन निगम, कुमाऊॅ मण्डल विकास निगम एवं गढ़वाल मण्डल विकास निगम को निर्देश दिये गये कि उनको आवंटित समस्त लॉटस् का शत प्रतिशत संचालन सुनिश्चित किया जाय।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्टेट जीएसटी का सेक्टर वार विश्लेषण कराया जाए, ताकि जीएसटी प्राप्त करने की स्थिति में सुधार किया जा सके। उन्होंने परिवहन विभाग की एएनपीआर प्रणाली का भी प्रभावी उपयोग किया जाये। परिवहन विभाग और वन विभाग को एएनपीआर और सर्विलांस सिस्टम को शीघ्र इंटीग्रेट किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने स्टेट जीएसटी को इस वर्ष लक्ष्य बढ़ाये जाने के भी निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल फैनाई, सचिव दिलीप जावलकर, युगल किशोर पंत, वन विभाग से कपिल लाल, अपर सचिव डॉ अहमद इकबाल, हिमांशु खुराना एवं सोनिका सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं में मंडलायुक्त होंगे नोडल अधिकारीः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने को सचिवालय स्थित अपने सभागार में प्रदेश के महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबन्धन आदि के सम्बन्ध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्य सचिव ने कहा कि हरिद्वार के मनसा देवी में श्रद्धालुओं में हुई भगदड़ जैसी घटनाओं पर काबू पाने के लिए प्रदेश के ऐसे सभी धार्मिक स्थलों, जहाँ महत्त्वपूर्ण दिवसों में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ जैसी घटनाओं की आशंका बनी रही है, को चिन्हित कर उन में अंशकालिक एवं दीर्घकालिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि धार्मिक स्थलों के मार्गों में सार्वजनिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कर मार्गों का चौड़ीकरण कराया जाए। मार्गों से अतिक्रमण हटाने के लिए लगातार अभियान चलाए जाएं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों में भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का प्रयोग भी किया जाए। कहा कि धार्मिक स्थलों में अत्यधिक भीड़ होने पर मार्गों में श्रद्धाओं को रोके जाने हेतु स्थल तैयार किए जाएँ।

मुख्य सचिव ने कहा की प्रत्येक धार्मिक स्थल के लिए रूट और सर्कुलेशन प्लान तैयार किया जाए, ताकि धार्मिक स्थलों में अचानक भीड़ ना हो। भीड़ होने की संभावना को देखते हुए श्रद्धालुओं को रोके जाने के लिए पूर्वनिर्धारित स्थानों में रोका जाए। मुख्य सचिव ने श्रद्धालुओं की संख्या का आंकलन करने के लिए तकनीक का उपयोग करते हुए भीड़ प्रबंधन तंत्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी प्रकार की भौतिक एवं तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने अधिक महत्त्वपूर्ण मंदिरों को प्राथमिकता पर लेते हुए पहले चरण में मनसा देवी, चण्डी देवी, नीलकंठ, कैंचीधाम और पूर्णागिरि मंदिर का विशेषज्ञों के माध्यम से विश्लेषण करा लिया जाए। स्थानीय प्रशासन एवं धार्मिक स्थलों के हितधारकों को विशेषज्ञों की टीम को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह विशेषज्ञों की टीम मंदिर क्षेत्र का विश्लेषण कर भीड़ प्रबंधन, निकासी योजना और बॉटल नेक एरिया के लिए सिविल इंजीनियरिंग और तकनीकी पहलुओं का परीक्षण कर विभिन्न जगहों पर रुकने के स्थान आदि के लिए एक प्रॉपर प्लान और प्रॉपर एसओपी तैयार करेगी।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु सचिव शैलेश बगौली, धीराज सिंह गरब्याल, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में माध्यम से कमिश्नर कुमायूँ दीपक रावत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।