रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय मिशन है।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों एवं गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही संपूर्ण क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वे कराकर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नदी किनारे विकसित किए जाने वाले स्थलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का समुचित तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक प्रभावी टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी में कूड़ा गिरने की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने नगर पालिका मसूरी को निर्देश दिए कि मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न जाने दिया जाए। वहीं वन विभाग को नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म रणनीति के अनुरूप कार्य किए जाएं। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल उठान, गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन, नदी में कूड़ा फेंकने पर रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाए। वहीं लॉन्ग टर्म योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समग्र कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्टेªट आशीष तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

ई ऑफिस प्रणाली को प्रभावी बनाने को दून जनपद में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशों के अनुपालन में जनपद देहरादून के समस्त कार्यालयों में शासकीय कार्यों का संचालन पूर्णतः ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने की दिशा में कार्यवाही तेज कर दी गई है। इसी क्रम में आज एनआईसी सभागार, कलेक्ट्रेट देहरादून में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के संचालन, फाइल प्रबंधन, पत्राचार, नोटशीट तैयार करने, फाइलों के ऑनलाइन अग्रसारण, डिजिटलीकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यालयी कार्यों को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध, कागजरहित एवं प्रभावी बनाना है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी विभागों में शासकीय कार्यों का निष्पादन ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी के दृष्टिगत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण सत्र में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (छप्ब्) अंकुश पाण्डेय एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को वर्चुअल एवं फिजिकल माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने ई-ऑफिस पोर्टल पर लॉगिन प्रक्रिया, ई-फाइल निर्माण, दस्तावेज अपलोड, डिजिटल हस्ताक्षर, फाइल ट्रैकिंग तथा ऑनलाइन अनुमोदन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से कार्यों के निष्पादन से न केवल कार्यालयों में कार्य संस्कृति अधिक सुव्यवस्थित होगी, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी तथा अभिलेखों का सुरक्षित एवं सुगम रख-रखाव सुनिश्चित होगा। उन्होंने सभी विभागों से अपेक्षा की कि वे निर्धारित समयावधि में ई-ऑफिस प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाते हुए शासन की मंशा के अनुरूप डिजिटल प्रशासन को मजबूत करें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी वर्चुअल तथा प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे तथा ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त की। जिला प्रशासन द्वारा आगामी दिनों में भी आवश्यकता अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जनपद के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

अर्न्तराष्ट्रीय सेमीनार के आयोजन से उत्तराखण्ड की दालचीनी को वैश्विक स्तर पर मिलेगी पहचानः गणेश

कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास सस्थान सेलाकुई, देहरादून में दालचीनी प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारम्भ किया।

कृषि मंत्री द्वारा अपने सम्बोधन में सिनामन पर अर्न्तराष्ट्रीय सेमीनार के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इससे उत्तराखण्ड की दालचीनी का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार होगा। उन्होंने कहा कि महक कान्ति नीति के अन्तर्गत दालचीनी की खेती के विकास में वैज्ञानिक तरीके से कार्य किया जायेगा। इस सेमीनार में श्रीलंका, इण्डोनेशिया एवं भारत के प्रतिष्ठित सस्थानो से सिनामन के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, एरोमा उद्योगों से जुडे उद्यमियों के साथ-साथ राज्य में सिनामन की खेती कर रहे किसान सम्मिलित हुये है, जिससे किसानों को विशेषज्ञों के अनुभव का लाभ होगा तथा सिनामन की खेती में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकेगा।
इस अवसर पर डा० सुरेन्द्र नारायण पाण्डे, सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण द्वारा बताया गया कि महक कान्ति नीति के अन्तर्गत किसानों को सिनामन एवं अन्य सगन्ध फसलों की खेती हेतु नीति तैयार की गयी है। इस नीति के सफल क्रियान्वयन से राज्य में सगन्ध सेक्टर का टर्नओवर रु० 1180 करोड प्रतिवर्ष किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

निदेशक, परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान डॉ. नृपेन्द्र चौहान द्वारा राज्य में सगन्ध सेक्टर में किये जा रहे प्रयासों के सम्बन्ध में सक्षिप्त में अवगत कराया गया तथा साथ ही बताया गया कि वृहद स्तर पर सगन्ध खेती के विस्तार हेतु राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड महक कान्ति नीति 2026-36 तैयार की गयी जिसके अन्तर्गत आज की कार्यशाला के विषय दालचीनी की खेती जनपद नैनीताल एवं चम्पावत में 5200 है० क्षेत्रफल में किये जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके अन्तर्गत 20800 किसानों को लाभान्वित किया जायेगा।

इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रुप में उपस्थित योगेश दूबे, अध्यक्ष फेगरेन्स एण्ड फ्लेवर एसोसियेशन ऑफ इण्डिया, मुम्बई, सुनीत गोयल, अध्यक्ष इन्शेसियल ऑयल एसोसियेशन आफ इण्डिया, नोयडा तथा रोहित सेठ, अध्यक्ष, सुगन्ध व्यापार संघ नई दिल्ली द्वारा काशीपुर, ऊधम सिंह नगर में स्थापित किये जा रहे एरोमा पार्क के प्रगति के सम्बन्ध में अपने सम्बोधनों में अवगत कराया गया और साथ ही उनके द्वारा एरोमा पार्क में मिलने वाले प्रोत्साहन योजनाओं के लाभ की सीमा को बढाने का अनुरोध किया गया।

कार्यक्रम में श्रीलंका से आये चिन्धका विदाना पथिराना, उपनिदेशक, नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिग सेटर, मुदिता जयतिलका, निदेशक, प्योर सिनेमन एक्सपोर्ट्स, श्रीलंका, डॉ. सेटियारी मरवान्तो. रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स, इंडोनेशिया के साथ-साथ देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानो जैसे स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया, आई०सी०ए०आर० एवं सी०एस०आई०आर के संस्थान, एफ०एस०एस०ए०आई०. डाबर इण्डिया लि० गाजियाबाद, हार्पेक श्रीनगर गढ़वाल आदि संस्थानों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उक्त के अतिक्ति कृषि, उद्यान, रेशम, बायोटेक आदि विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सिनामन सेमीनार के तकनीकी सत्र में आज श्रीलंका एवं इण्डोनेशिया से आये विशेषज्ञों द्वारा अपने अपने देश में सिनामन की उन्नत प्रवर्धन एवं नर्सरी तकनीक तथा बाजार पर व्याख्यान दिया गया। तदोपरान्त अण्डमान एवं निकोबार स्थित आई०सी०ए०आर० संस्थान से आये विशेषज्ञ डा० अजित वमन द्वारा उन्नत एग्रोनोमिक प्रैक्टिसेस् से खेती एव प्रवर्धन पर अपने अनुभव साझा किये गये। सेमीनार के दौरान पारडी द्वारा स्टॉल पर्दशन के माध्यम से श्रीलंका, इण्डोनिशिया एवं भारत के अन्य राज्यो के सिनामन के उत्पादों का भी प्रर्दशन किया गया।

इस अवसर पर प्रताप सिह गुसाई, उपाध्यक्ष, राज्य औषधीय पादप बोर्ड उत्तराखण्ड, सोना सजवाण, उपाध्यक्ष, जडी-बूटी सलाहकार समिति, डॉ० आनन्द श्रीवास्तव, अपर सचिव, कृषि एवं कृषक कल्याण तथा संस्थान के समस्त वैज्ञानिक एवं कार्मिक आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा० पंकज बिजल्वाण द्वारा किया गया।

सीएम ने राज्य स्तरीय जागरूकता कार्यशाला में नशा मुक्ति एवं वरिष्ठ नागरिक सम्मान की दिलाई शपथ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्वे चौक स्थित आई. आर.डी. टी सभागार में राज्य स्तरीय सामूहिक जागरूकता अभिमुखीकरण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के तहत माह मई 2026 की पेंशन वन क्लिक के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरित की। 09 लाख 74 हजार 338 लाभार्थियों के खाते में कुल 176 करोड़ 59 लाख 24 हजार की धनराशि का हस्तांतरण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने नशा मुक्त अभियान एवं वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और देखभाल की शपथ भी दिलाई। मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय सामूहिक जागरूकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला सामाजिक कल्याण योजनाओं को समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक पात्र व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव, देरी और बाधा के योजनाओं का लाभ प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ देश में जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना और मुफ्त राशन योजना जैसी योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है। वहीं स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम स्वनिधि, दीनदयाल अंत्योदय योजना और राष्ट्रीय आजीविका मिशन के माध्यम से वंचित वर्गों को स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक न्याय को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अंत्योदय परिवारों को प्रतिवर्ष तीन गैस सिलेंडर निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। दिव्यांग कार्मिकों का वाहन भत्ता बढ़ाया गया है। स्वयं सहायता समूहों को ‘लखपति दीदी योजना’ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’, ‘मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना’, ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ तथा ‘अपणि सरकार पोर्टल’ के माध्यम से विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। राष्ट्रीय खेलों और जी-20 बैठकों के सफल आयोजन से उत्तराखंड को वैश्विक पहचान मिली है, जबकि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर रहे हैं। राज्य में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर माला मिशन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। शारदा कॉरिडोर, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर, यमुना कॉरिडोर, विवेकानंद कॉरिडोर एवं गोल्ज्यू कॉरिडोर पर भी कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की आर्थिकी डेढ़ गुना बढ़ी है तथा बीते एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले चार वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य की बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड कमी आई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। राज्य का बजट आकार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। होम-स्टे, उद्योग, स्टार्टअप, हेलिपोर्ट एवं बिजली उत्पादन के क्षेत्र में दो से तीन गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) सूचकांक में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। भारत सरकार के सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक में विशेष श्रेणी राज्यों में उत्तराखंड दूसरे स्थान पर रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य को ‘अचीवर्स’ तथा स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून एवं सख्त भू-कानून लागू किए गए हैं। सरकार द्वारा 11 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद पिछले साढ़े चार वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चार सूत्रीय रणनीति पर बल देते हुए कहा कि योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार, सरकारी प्रक्रियाओं का सरलीकरण, तकनीक का अधिकतम उपयोग तथा नियमित मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने आयोगों, परिषदों एवं समितियों के सदस्यों से जिलों और दूरस्थ क्षेत्रों का नियमित भ्रमण कर जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, पार्वती दास,, भूपाल राम टम्टा, सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, विभिन्न्न आयोगों, परिषदों एवं समितियों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष मौजूद थे।

नशे के खिलाफ सभी एजेंसियां मिलकर करें निर्णायक कार्रवाईः डीएम

जिलाधिकारी डा आशीष चौहान की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने, नशे की मांग एवं आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने तथा युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जिले में संचालित सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को भी नारकोटिक्स समिति से जोड़ा जाए, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में नशा उन्मूलन संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस विषय को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में भी शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी मिल सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि नशा समाज के लिए अत्यंत नुकसानदायक है तथा आदर्श राष्ट्र निर्माण की दिशा में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थानों एवं आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। बैठक में जिलाधिकारी ने औषधि विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जनपद में संचालित दवा फैक्ट्रियों एवं मेडिकल स्टोरों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए सघन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने सभी मेडिकल स्टोरों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराने के निर्देश भी दिए।
जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारियों एवं पुलिस क्षेत्राधिकारियों को अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विशेष टास्क फोर्स के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित सभी सरकारी एवं निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में वृहदस्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त पैडलरों एवं संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर उनकी जीआईएस टैगिंग की जाए, जिससे प्रभावी निगरानी एवं लक्षित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।

जिलाधिकारी ने विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही निजी एवं शासकीय सभी शिक्षण संस्थानों में गठित एंटी ड्रग्स कमेटियों को सक्रिय करते हुए उनकी सूची प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की सूचना देने के लिए संचालित मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 एवं एनसीओआरडी/मानस पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों एवं अन्य प्रमुख स्थानों पर बैनर एवं पोस्टर लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नशे के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त किया जा सके।

जिलाधिकारी ने एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), औषधि नियंत्रक विभाग तथा अन्य प्रवर्तनकारी एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों का विश्लेषण करते हुए मादक पदार्थों के कारोबार में संलिप्त नेटवर्क, उनके लिंकेज तथा कार्यप्रणाली का अध्ययन कर प्रभावी रणनीति तैयार की जाए। बैठक में नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने पर भी विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकाओं के माध्यम से गांव-गांव तक लोगों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही प्रत्येक नागरिक तक मानस हेल्पलाइन नंबर एवं पोर्टल की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति नशे के अवैध कारोबार से संबंधित सूचना आसानी से प्रशासन तक पहुंचा सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद ढौंडियाल, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी शिव प्रसाद, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान कीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून में विकसित भारत 2047 के निर्माण में उच्च शिक्षा का महत्त्व विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं, जो भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 भारतीय शिक्षा प्रणाली के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नवाचार, अनुसंधान एवं व्यावहारिक कौशल को बढ़ावा देने के साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को केवल शिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आज विश्व का प्रमुख स्टार्टअप हब बन रहा है तथा डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आज भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड शिक्षा, ज्ञान और अध्यात्म की समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। राज्य सरकार शिक्षा में नवाचार, डिजिटल लर्निंग और भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन शिक्षण सुविधाओं के विस्तार के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे आधुनिक विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय में स्थापित सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और अनुसंधान को नई दिशा देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में युवाओं को भविष्य के अनुरूप कौशल, नवाचार और नेतृत्व क्षमता से युक्त बनाना आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय, इंटर्नशिप, इंडस्ट्री-लिंक्ड पाठ्यक्रमों तथा स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सेंटरों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है।

मुख्यमंत्री ने उपस्थित शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं प्रबुद्धजनों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने ज्ञान और अनुभव को विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के अध्यक्ष सुनील कुमार, उपाध्यक्ष अजय कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति सहित विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षाविद, विशेषज्ञ एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

एसटीपी, सीवर परियोजनाओं, नाला टैपिंग एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों की डीएम ने की गहन समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला गंगा संरक्षण समिति के साथ ही अर्धकुंभ मेला 2027 के लिए प्रस्तावित कार्यों के सम्बन्ध बैठक लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने जनपद अन्तर्गत संचालित गंगा संरक्षण, सीवरेज, अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल प्रस्तुतिकरण (प्रेजेंटेशन) नहीं, बल्कि धरातल पर कार्यों के प्रभावी परिणाम दिखाई देने चाहिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता जल संस्थान एवं परियोजना प्रबंधन निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) को निर्देशित किया कि जनपद में संचालित सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हों, यह सुनिश्चित किया जाए।
टपकेश्वर मंदिर, गढ़ी कैंट क्षेत्र में प्रस्तावित एसटीपी निर्माण कार्य हेतु भूमि चयन की प्रक्रिया में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों के साथ पृथक बैठक आयोजित कर भूमि चयन की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने ऋषिकेश क्षेत्र में निर्माणाधीन एसटीपी, सीवेज पम्पिंग स्टेशन (एसपीएस) एवं सीवर लाइन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर निगम ऋषिकेश को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए जीआईजेड एवं नगर निगम ऋषिकेश द्वारा संयुक्त रूप से आवास विकास वार्ड में संचालित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पायलट परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उसे मॉडल वार्ड के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक में नगरीय क्षेत्रों में डेयरी वेस्ट प्रबंधन की जानकारी मांगे जाने पर नगर निगम देहरादून के संबंधित अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
बिंदाल नदी में गिरने वाले प्रदूषित नालों की टैपिंग कार्यों में हो रही देरी पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पेयजल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नाला टैपिंग के सभी कार्य निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किए जाएं। साथ ही आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर नालों की नियमित एवं प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने गंगा नदी सहित अन्य नदियों के तटों पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि संभावित प्रदूषण स्थलों का चिन्हीकरण कर लक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार की जाए तथा नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
मसूरी क्षेत्र में 0.70 एमएलडी क्षमता के कैमल बैक एसटीपी की समीक्षा के दौरान वर्ष 2022 में बजट स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ न होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पेयजल निगम, मसूरी के संबंधित अधिकारी को कार्यप्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी दी।
इसी प्रकार अर्केडिया जोन में प्रस्तावित 0.70 एमएलडी एसटीपी परियोजना में वर्ष 2022 से स्वीकृति प्राप्त होने के बावजूद भूमि चिन्हीकरण एवं म्यूटेशन की कार्यवाही लंबित रहने पर जिलाधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया तथा संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी को मामले की जांच कर सात दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सभी नगर निगमों एवं नगर निकायों को निर्देशित करते हुए कहा कि मा0 मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव द्वारा स्वच्छता व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में रखा गया है। उन्होंने सभी निकाय कूड़ा उठान व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएं तथा डंपिंग जोन का चिन्हीकरण कर वहां सीसीटीवी एवं अन्य तकनीकी माध्यमों से निगरानी सुनिश्चित करने को निर्देशित किया। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ एवं परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष बल दिया। नगर पंचायत सेलाकुई में अभी तक स्लज वाहन उपलब्ध न होने पर जिलाधिकारी ने हैरानी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को अपने संसाधनों से तत्काल वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने फल्ड प्लानिंग जोनिंग चिन्हीकरण की समीक्षा की बैठक में बताया गया कि गंगा नदी की हरिद्वार तक तथा रिस्पना नदी का फल्ड जोन चिन्हिकरण कर लिया गया है। आसन रिवर का चिन्हकरण कार्य पूर्ण हो गया है। सुसवा, सौंग, जाखन/रानीपोखरी, चन्द्रबागा, यमुना सर्वे कर लिया गया है, जिस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि फल्ड जोन चिन्हिकरण कार्य समयबद्ध पूर्ण कर लिया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अर्धकुंभ मेला 2027 हेतु प्रस्तावित निर्माण कार्यों को एनएमसीजी की अनुमति एवं निर्धारित एसओपी के अनुसार पूर्ण किए जाएं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर आयुक्त नगर निगम ऋषिकेश गोपाल राम बिनवाल, समिति सदस्य पंकज गुप्ता, पर्यावरणविद् विनोद जुगलान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पारिवारिक परिस्थितियों से निस्तेज हुई बालिकाओं की शिक्षा के दीपक में शिक्षारूपी लौ जला रहा प्रोजेक्ट “नंदा-सुनंदा”

जिला प्रशासन देहरादून द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “नंदा-सुनंदा” के 15वें संस्करण में आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में 39 जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करते हुए रू0 12.98 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं को चेक वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा शिक्षा के प्रति निरंतर समर्पित रहने का संदेश दिया। नंदा-सुनंदा 15वें संस्करण में प्राइमरी की 12, अपर प्राइमरी की 9, सेकेंडरी की 5, सीनियर सेकेंडरी की 7, ग्रेजुएशन की 5 तथा पोस्ट ग्रेजुएशन की 1 बालिका को सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान भावुक क्षण तब आए जब बालिकाओं एवं उनकी माताओं ने अपनी जीवन संघर्ष की कहानी साझा की। कई बालिकाओं ने बताया कि पिता की मृत्यु, आर्थिक तंगी, पारिवारिक संकट अथवा एकल अभिभावक की परिस्थितियों के कारण उनकी शिक्षा बीच में रुकने की स्थिति में पहुंच गई थी। उनकी पीड़ा सुनकर सभागार में उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी एवं अभिभावकों की आंखें नम हो गईं।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति से हर कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें प्राप्त अवसरों का पूरा उपयोग कर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि “नंदा-सुनंदा” मा० मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर बालिकाओं की शिक्षा को बाधित होने से बचाना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी प्रतिभा आर्थिक अभाव के कारण पीछे न रह जाए। जिलाधिकारी ने इस अभियान से जुड़े समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्राउंड टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बेटियों के सपनों को नई उड़ान देने का अभियान है।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि बच्चों को पूरी जिम्मेदारी और लगन से पढ़ाई करनी चाहिए, ताकि आगे चलकर वे स्वयं सक्षम बनें और समाज के अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए भी सहयोग का माध्यम बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार एवं जिला प्रशासन हर हाल में यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक अभाव में न रुके। कार्यक्रम में कई प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए।

अंशिका शर्मा, एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा ने बताया कि उनकी माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ती हैं तथा आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई जारी रखना कठिन हो गया था। मदीहा बेग, बीसीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता सिलाई कर परिवार चला रही हैं। तनिष्का मेहर ने कहा कि पिता के निधन के बाद पूरा परिवार मां के सहारे है और आर्थिक संकट के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। हर्षिता, बीएससी ओटीटी की छात्रा ने बताया कि उनकी विधवा माता सिलाई कार्य कर परिवार चला रही हैं और फीस भरना संभव नहीं था। आंचल पुण्डीर, बीएससी नर्सिंग की छात्रा ने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण उनकी शिक्षा रुकने की स्थिति में थी। अमृता शर्मा, बीए-बीएड की छात्रा ने बताया कि वर्ष 2020 में पिता के निधन के बाद उनकी माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के रूप में परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। सभी 39 बालिकाओं ने जिला प्रशासन द्वारा मिली सहायता का सदुपयोग करते हुए आगे बढ़ने तथा सफल होकर समाज के जरूरतमंद एवं असहाय लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया।

जिला प्रशासन का यह प्रोजेक्ट अब तक 175 बालिकाओं की शिक्षा को नया जीवन दे चुका है। अब तक कुल रू0 57 लाख की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत प्राइमरी की 41, अपर प्राइमरी की 31, सेकेंडरी की 24, सीनियर सेकेंडरी की 31, ग्रेजुएशन की 34, पोस्ट ग्रेजुएशन की 6, पीएचडी की 2, एएनएम की 1, सिविल इंजीनियरिंग की 1, एमबीबीएस की 1, होटल मैनेजमेंट की 1 तथा स्किल डेवलपमेंट की 2 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जा चुकी है।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, संबंधित क्षेत्रों की सीडीपीओ, अन्य अधिकारी, कार्मिक, बालिकाएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

डीएम के प्रयासों से कैंसर पीड़ित विधवा को मिली आर्थिक सहायता, बच्चों की शिक्षा और उपचार में मिला सहारा

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जरूरतमंद, असहाय एवं वंचित परिवारों के कल्याण हेतु संवेदनशीलता, तत्परता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ निरंतर कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित न रहकर पीड़ित एवं संकटग्रस्त परिवारों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है। उपचार, शिक्षा, आर्थिक सहायता, रोजगार एवं ऋण राहत जैसे विषयों पर जिला प्रशासन द्वारा सैकड़ों प्रकरणों का प्रभावी निस्तारण कर जरूरतमंदों को नई आशा एवं संबल प्रदान किया गया है।
डोईवाला निवासी कैंसर पीड़ित एकल महिला सुनीता कलवार को जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण आर्थिक एवं शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। सुनीता कलवार ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वह एक विधवा महिला हैं तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण उनके समक्ष उपचार एवं बच्चों की शिक्षा दोनों को जारी रखना कठिन हो गया था। उन्होंने अपने दोनों बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए फीस माफी एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किए जाने का अनुरोध किया था।
प्रकरण को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा तत्काल आवश्यक निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन द्वारा रायफल क्लब फंड से विधवा सुनीता कलवार को रू0 50,000 की आर्थिक सहायता स्वीकृत एवं उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त उनके पुत्र का विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित कराया गया, जबकि उनकी पुत्री की बाधित शिक्षा को जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से पुनः प्रारंभ कराया गया। जिला प्रशासन की इस पहल से दोनों बच्चों के भविष्य को नई दिशा एवं सुरक्षा मिली है।
उल्लेखनीय है कि सुनीता कलवार का 11 जुलाई 2024 को जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में कैंसर का ऑपरेशन हुआ था तथा वर्तमान में उनका उपचार निरंतर जारी है। उपचार के दौरान आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे इस परिवार को जिला प्रशासन ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि मानवीय सहयोग एवं भरोसे का भी संबल दिया है। जिला प्रशासन द्वारा उनके उपचार एवं पारिवारिक सहयोग के लिए लगातार समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन द्वारा विगत वर्षों में भी अनेक जरूरतमंद परिवारों को लाखों रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। साथ ही विद्युत एवं जल संबंधी बकाया प्रकरणों के निस्तारण, बैंक ऋण राहत, चिकित्सा सहायता एवं रायफल क्लब फंड से सहयोग उपलब्ध कराकर कई परिवारों को राहत पहुंचाई गई है। वहीं ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंद एवं असहाय बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें पुनः मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन की यह पहल शासन की संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी कार्यशैली का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें प्रशासन जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

उत्तराखंड की बोली-भाषा का संवर्द्धन और बच्चों को नैतिक संस्कार देने जरूरीः बंशीधर तिवारी

देहरादून। आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डा. आर. राजेश कुमार ने कहा है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता राज्य का चहुंमुखी विकास है। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के विकास की योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। पिछले चार साल के दौरान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं, संचार और संसाधनों में तेजी से सुधार हुआ है। प्रदेश के लोगों का जीवन स्तर सुधरा है और साथ ही आर्थिक विकास की गति भी तेज हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास की किरणें सीमांत गांव के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचे।

आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डा. आर राजेश कुमार एक निजी होटल में मासिक पत्रिका उत्तरजन टुडे के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सम्मान समोराह और मंथन ‘उत्तराखंड का दशकः चुनौतियां और संभावनाएं‘ विषय पर सरकार की विकास योजनाओं का खाका पेश कर रहे थे।‘ उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को बुनियादी समस्याओं से निजात दिलाना है और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। इस दौरान उन्होंने सरकार की स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, संसाधन और रोजगारपरक विकास योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि यह दशक उत्तराखंड का बने और प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो सके। इस मौके पर उन्होंने 1962 में बाक्सिंग में पहली बार देश को एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल दिलाने वाले अर्जुन अवार्डी आनरेरी कैप्टन पदम बहादुर मल्ल और प्रख्यात हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. जयंत नवानी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया।

वहीं, इस मौके पर अति विशिष्ट अतिथि और मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने कहा कि आज समाज में जीवन मूल्यों का पतन हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को नैतिक संस्कार जरूर दें। इस मौके पर उन्होंने आम जनता से अपील की कि अपने बच्चों को पंचतंत्र की कहानियां सुनाएं। बच्चे यदि नैतिक तौर पर संस्कारवान होंगे तो वह भविष्य में समाज के अच्छे नागरिक साबित होंगे। उन्होंने अपनी बोली-भाषा के संवर्द्धन के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बोली-भाषाओं का संरक्षण और संवर्द्धन के लिए भी जागरूकता की जरूरत है। प्रदेश सरकार इस दिशा में काम कर रही है और साथ ही स्थानीय उत्पादों को भी प्रोत्साहित कर रही है।

टिहरी गढ़वाल के अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी ने सरकार द्वारा जनहित में किये जा रहे कार्यों और योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विगत चार-पांच साल के दौरान बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है। सरकार आम जनता तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जन जन की सरकार, जन-जन के द्वार जैसे कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं ताकि ग्रामीणों की समस्याओं का उनके दरवाजे पर समाधान मिल सके।

श्रीनगर मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना ने मेडिकल चिकित्सा के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल्द ही रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कालेज भी शुरू होंगे। इससे रोजगार सृजन होगा और प्रदेश में और अधिक भावी डाक्टरों के लिए दरवाजे खुलेंगे। उन्होंने नर्सिंग और पैरामेडिकल के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

इस मौके पर उत्तरजन की एक्सीक्यूटिव एडिटर रंजना रावत ने महिलाओं के सशक्तीकरण पर किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा और उन्हें अधिक स्किल्ड बनाने पर जोर दिया। उत्तरजन के संपादक पीसी थपलियाल ने पत्रिका के विगत दस वर्षों की यात्रा और भविष्य का रोडमैप बताया। मंच संचालन योगाम्बर पॉली और मोनिका बिष्ट ने किया।

इस मौके पर समाज के विभिन्न वर्गों के 20 विभूतियों को उत्तराखंड गौरव पुरस्कार दिये गये और 35 अन्य लोगों को उल्लेखनीय कार्यों के लिए स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। इस मौके पर पूर्व आईजी सत्यशरण कोठियाल, पूर्व सूचना आयुक्त जेपी ममगाई, ललित जोशी, पूर्व कर्नल यदुवीर रावत, पूर्व कर्नल उमेश रावत, कर्नल राकेश कुकरेती, शिक्षाविद कमला पंत, इरा कुकरेती, सुरेश डंडरियाल, उद्यमी सुशील सिंह, वैभव गोयल, आदि प्रमुख लोग मौजूद थे।

बाक्स

1- पदम बहादुर मल्ल, अर्जुन अवार्डी बाक्सिंग
2- डा. जयंत नवानी, आर्थाेपेडिक सर्जन

उत्तराखंड गौरव से सम्मानित व्यक्ति
1- डा. हेमंत पांडे वेज्ञानिक
2- डा0 सन्तन बड़थ्वाल और शैलेष पांडे, वैज्ञानिक एफआरआई
3- डा. एमपीएस बिष्ट भू- वैज्ञानिक
4 – डा. महेश कुड़ियाल, न्यूरो सर्जन
ब्रेक संस्कृति विभाग की टीम की प्रस्तुुति
5 – डॉली डबराल, साहित्यकार
6- अभिलाषा भारद्वाज, शिक्षाविद्
7- शकुंतला इष्टवाल, साहित्यकार
8- जयदीप रावत, असिस्टेंट डायरेक्ट, वाणिज्य कर विभाग
9- कर्नल रि. यशपाल नेगी, रिवर्स माइग्रेशन
10- डा. उदय बलूनी, सर्जन, बलूनी अस्पताल..
11- डा. रमेश कुंवर, डिप्टी सीएमओ हरिद्वार
12- सौरभ मैठाणी, लोक गायक, गाने के लिए अनुरोध
13- एडवोकेट नलिन सौन, हाईकोर्ट
14 -सतीश धौलाखंडी, सोशल एक्टिविस्ट टीम के साथ एक जनगीत
15- डा. अजय ढौंडियाल, पत्रकार
16 – श्याम सिंह चौहान, गीतकार
17 – आशीष ध्यानी, पत्रकार
18 – दीपक पोखरियाल, कैप्टन मर्चेंट नेवी
19 -संजय पालीवाल, होटल व्यवसायी
20 – राकेश चौहान, एक्सीक्यूटिव शेफ