दूनः समाधान दिवस में 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त, डीएम ने दिए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश

आज कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में जन समाधान दिवस आयोजित किया गया। जन समाधान दिवस में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याएं एवं शिकायतें जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं। इस दौरान 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। जिनमें कई शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता एवं संवेदनशीलता के साथ करना सुनिश्चित करें तथा शिकायतकर्ता को भी कार्रवाई से अवगत कराया जाए।

शिकायतकर्ता प्रस्तुत शिकायत में तहसील विकासनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत पापड़ियांन में ग्राम प्रधान द्वारा वर्ष 2023 से 2026 तक आपदा के अंतर्गत किए गए कार्यों में कथित फर्जीवाड़े एवं अनियमितता की शिकायत पर जिलाधिकारी ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जिला विकास अधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को संयुक्त रूप से प्रकरण की जांच करते हुए 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि उपलब्ध अभिलेखों, कराए गए कार्यों एवं संबंधित मद में हुए व्यय का परीक्षण करते हुए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता मोहम्मद शाहिद राव, खुर्शीदा बेगम एवं इकराम, मिहूवाला निवासी द्वारा अपनी पैतृक भूमि पर भूमाफियाओं द्वारा मारपीट कर कब्जा करने का प्रयास किए जाने की शिकायत प्रस्तुत की गई। जिलाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रकरण में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा शिकायतकर्ता की शिकायत पर तथ्यात्मक जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

ग्राम झीवरहेड़ी, विकासनगर क्षेत्र में आबादी के बीच अवैध रूप से हैवी वेल्डिंग मशीनें लगाकर फैक्ट्री संचालित किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी विकासनगर एवं महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र (जीएमडीआईसी) को संबंधित फैक्ट्री को तत्काल सील करने के निर्देश दिए। प्रकरण में जिला उद्योग केंद्र द्वारा पूर्व में किए गए निरीक्षण में पाया गया था कि संबंधित स्थल औद्योगिक उपयोग के लिए वर्गीकृत नहीं है। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अग्निशमन विभाग की आवश्यक एनओसी भी प्राप्त नहीं की गई थी। जिलाधिकारी ने इस स्थिति के बावजूद फैक्ट्री संचालन तथा सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिकायतकर्ता सूर्य प्रकाश द्वारा दोनों पैरों में कृत्रिम अंग लगवाने हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में प्रस्तुत शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रकरण में आवश्यक कार्रवाई करते हुए 15 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए।

नगर निगम एवं ग्राम समाज की सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण किए जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर एवं तहसीलदार सदर को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। शिकायत में चार मंजिला मकान के निर्माण का भी आरोप लगाया गया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मौके का स्थलीय निरीक्षण करते हुए भूमि एवं निर्माण से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाए तथा यदि अतिक्रमण अथवा अवैध निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

विशेष बच्चे प्रिंस अग्रवाल के लतिका राय फांउडेशन में प्रवेश के संबंध में प्राप्त शिकायत का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। शिकायतकर्ता बच्चे के पिता एवं एकमात्र अभिभावक द्वारा बताया गया कि फाउंडेशन में प्री-एडमिशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण किए जाने के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई तथा बार-बार अनुरोध के बाद भी उचित समाधान नहीं हो पाया। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करते हुए बच्चे के हित में आवश्यक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया। जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को संयुक्त रूप से मामले की जांच कर 7 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। डीएम ने प्रकरण के सभी तथ्यों की निष्पक्षता से जांच की जाए तथा बच्चे के हित एवं उसके सर्वांगीण विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समाधान दिवस में प्राप्त शिकायतों को केवल औपचारिक रूप से निस्तारित न किया जाए, बल्कि शिकायत की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समयबद्ध निस्तारण, पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर विशेष जोर दिया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी जायसवाल, अपर पुलिस अधीक्षक, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम दून ने किया नंदा की चौकी पुल का निरीक्षण, धंसे हिस्से को शीघ्र सुरक्षित बनाकर यातायात सुचारू करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी, डॉ आशीष चौहान, ने प्रातःकाल नंदा की चौकी पुल का स्थलीय निरीक्षण किया। भारी वर्षा के कारण पुल से पहले एप्रोच रोड का एक हिस्सा धंस गया है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करते हुए मार्ग को सुरक्षित बनाकर शीघ्र ही यातायात के लिए पुनः सुचारु करने के निर्देश दिए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण करते हुए सोडा सरोली का दौरा किया, जहां वर्षा से क्षतिग्रस्त पीएमजीएसवाई सड़क को तत्काल खोलने के निर्देश दिए। वहीं, मलबा आने से बंद थानों मार्ग को त्वरित कार्रवाई करते हुए यातायात हेतु बहाल कर दिया गया है।

जिलाधिकारी लगातार फील्ड में रहकर वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं तथा राहत एवं पुनर्स्थापन कार्यों की मॉनिटरिंग करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

जलभराव, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को सभी विभागों को प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य करने के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0आशीष चौहान ने मानसून अवधि में संभावित आपदाओं, डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम, जलभराव की समस्या तथा स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल बैठक कर व्यापक समीक्षा की।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून अवधि में सभी विभाग अलर्ट मोड पर कार्य करें तथा प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करते हुए समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग समन्वय के साथ पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जनपद के नदी किनारे स्थित लो-लाइन क्षेत्रों में जीपीएस युक्त जेसीबी मशीनें पूर्व से ही तैनात रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी आपदा संचालन केंद्रों (डीओसी) पर आवश्यक चिकित्सा संसाधनों के साथ एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्वतीय, दुर्गम एवं वन क्षेत्रों में संभावित आपदा की त्वरित सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, जलभराव निस्तारण, डेंगू एवं मलेरिया नियंत्रण तथा जनजागरूकता अभियान को पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ संचालित किया जाए, ताकि जनपदवासियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की प्रभावी रूप से रक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को निर्देशित किया कि डेंगू, मलेरिया, जलभराव तथा संभावित आपदा की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना के साथ कार्य करें तथा और अधिक फागिंग मशीन क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव, नालियों की सफाई तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वे अभियान में तेजी लाई जाए। प्रत्येक घर में संभावित डेंगू लार्वा की जांच, बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान तथा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जाए। संदिग्ध मामलों की तत्काल जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षण संस्थानों में डेंगू से बचाव को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, नगर निगम एवं नगर निकायों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित किया जाए कि विद्यालय परिसर डेंगू की दृष्टि से सुरक्षित हैं। विद्यालयों में कहीं भी जलभराव, गंदगी अथवा मच्छरों के पनपने की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में यह सुनिश्चित कराया जाए कि छात्र-छात्राएं पूर्ण बाजू (फुल स्लीव) की वर्दी अथवा वस्त्र पहनकर विद्यालय आएं, जिससे मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संबंध में निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध एपिडेमिक एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी विद्यालयों एवं कार्यालय परिसरों में नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग एवं डेंगू निरोधक उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

जनपद में कूड़ा उठान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नए बने गार्बेज प्वाइंटों का चिन्हीकरण कर तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में नगर निगम एवं नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान चलाया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में कूड़े के ढेर अथवा नए गार्बेज प्वाइंट पाए जाते हैं तो संबंधित उप जिलाधिकारी एवं नगर निकाय के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कलेक्ट्रेट सभागार अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के के मिश्रा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार, सिंचाई विभाग लोक निर्माण के विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे तथा समस्त उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय एवं समस्त संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।

जिले में दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चों के चिन्हीकरण एवं उपचार की डीएम ने की समीक्षा, हर संभव सहायता के निर्देश

जनपद देहरादून में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चिन्हित बच्चों के उपचार, आर्थिक सहायता, रेफरल प्रक्रिया तथा उपचार की प्रगति का विस्तृत परीक्षण किया गया।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने अवगत कराया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में अब तक 16 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है, जो विभिन्न दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बच्चों का उपचार देश के विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों के उपचार में अत्यधिक व्यय होता है तथा कई मामलों में उपचार की अवधि भी लंबी होती है, जिसके कारण निरंतर आर्थिक सहयोग की आवश्यकता रहती है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न होने पाए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति, अनुमोदन, रेफरल एवं वित्तीय सहायता से संबंधित समस्त औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएं ताकि बच्चों का उपचार बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के उपरांत भी उपचार पर अतिरिक्त धनराशि व्यय होती है, तो ऐसे मामलों में जिला प्रशासन द्वारा राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, अभिभावकों के साथ सतत संपर्क बनाए रखा जाए तथा शासन स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियां एवं सहायता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित कराई जाए।
बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, आर्थिक सहायता की उपलब्धता, रेफरल प्रक्रिया, चिकित्सकीय प्रगति तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे के उपचार में किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम दून का नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत यातायात सुधार पर विशेष फोकस

मोबिलिटी प्लान के अंतर्गत देहरादून शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने तथा पार्किंग की समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार, पार्किंग स्थलों के बेहतर उपयोग, लंबित निर्माण कार्यों की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि देहरादून शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए आवश्यकतानुसार सड़कों, चौराहों एवं जंक्शनों के सुधारीकरण हेतु माइक्रो लेवल प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा योजनाओं को समयबद्ध रूप से धरातल पर उतारें।

बैठक में आढ़त बाजार क्षेत्र में यातायात सुधार एवं व्यवस्थाओं, जंक्शन इम्प्रूवमेंट कार्यों की प्रगति, पार्किंग उपयोगिता की मॉनिटरिंग व्यवस्था, इंदिरा मार्केट पुनर्विकास कार्य, मंडी शिफ्टिंग, परेड ग्राउंड पार्किंग, रामराय पार्किंग सहित विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने आढ़त बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि शहर के प्रमुख चौराहों के सुधारीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करते हुए कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराया जाए, जिससे यातायात का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।

बैठक में इंदिरा मार्केट में निर्माणाधीन मल्टीलेवल कार पार्किंग की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया गया कि यहां लगभग 1050 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग विकसित की जा रही है। जिलाधिकारी ने कार्य की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त करते हुए एमडीडीए के अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित कार्यदायी संस्था/फर्म के साथ बैठक कर प्रगति की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की जाए तथा निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि पार्किंग स्थलों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि शहर में अनावश्यक जाम की स्थिति को कम किया जा सके और आमजन को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक यातायात एवं नगर निगम को प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यातायात प्रबंधन के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण, बेहतर पार्किंग व्यवस्था एवं सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं।

जिलाधिकारी ने मंडी शिफ्टिंग, आढ़त बाजार सड़क सुधार, परेड ग्राउंड एवं रामराय पार्किंग सहित अन्य विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने देहरादून शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक, व्यवस्थित एवं जनसुविधा केंद्रित बनाने के लिए सभी विभागों को गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के मिश्रा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी संदीप सैनी, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, एमडीडीए, नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने कोरोनेशन अस्पताल के वार्डों में गंदगी देख दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी
अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।

अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी
सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40 से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे।

जनपद में मानसून को लेकर अलर्ट, डीएम ने आपदा कंट्रोलरूम का निरीक्षण कर दिए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

जनपद में हुई वर्षा एवं संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली तथा आपदा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे तथा किसी भी सूचना पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सड़कों की स्थिति, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, जलभराव, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे या असुरक्षित स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं संस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की स्थिति का सत्यापन कर यह प्रमाणित करें कि वे वर्तमान में संचालित नहीं हैं तथा नदियों में किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 01 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। यदि इस अवधि में खनिज परिवहन करते हुए कोई वाहन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि वहां वार्निंग सायरन एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं, ताकि जलस्तर बढ़ने अथवा आपदा की स्थिति में पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनकी आगामी एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर प्रसव संभावित है, उन्हें पूर्व से ही सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आपात स्थिति में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

उन्होंने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए। साथ ही खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्राथमिकता के आधार पर नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी एवं नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार की जाए तथा भारी वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। ज्ञातब्य है कि संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव एवं नदी किनारे वाले ऐसे 29 क्षेत्र नगर निगम ने चिन्हित किए हैं, जिनमें 3700 परिवार एवं 900 घर है जिन्हे प्रशासन द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।

बैठक में बारिश के दौरान सड़क निर्माण कार्यों की प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय तथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। जबकि जनपद के समस्त उप जिलाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहेः डीएम दून

भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के निर्देशानुसार चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत आज जिला कार्यालय स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, प्रतिनिधियों तथा सचिवों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों, बीएलओ एवं बीएलए का समन्वित सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 01 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए उत्तराखण्ड सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें प्राप्त कर डिजिटाइजेशन की कार्यवाही भी की जा रही है।

जनपद के 13,76,813 मतदाताओं में से 13,55,948 (98.48 प्रतिशत) मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। इनमें से 10,98,179 (79.76 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन भी पूर्ण कर लिया गया है, जबकि 1,42,485 (10.35 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन शेष है। जनपद में वर्तमान में केवल 1,36,149 (9.89 प्रतिशत) मतदाता ऐसे हैं, जिनसे गणना प्रपत्र प्राप्त होना शेष है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त कराने एवं समयबद्ध रूप से जमा कराने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।

बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि जिन मतदाताओं तक किसी कारणवश गणना प्रपत्र नहीं पहुँच पाया है, उनके संबंध में बीएलओ स्थानीय जांच एवं पड़ताल के आधार पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में पृथक सूची तैयार करेंगे। यह सूची पंचायत भवनों, नगर निकाय कार्यालयों एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी तथा राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सहभागिता लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को सफल बनाने में जिला प्रशासन एवं निर्वाचन विभाग का पूर्ण सहयोग करें, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हो तथा निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली, बीजेपी से अरविन्द कुमार जैन, कांग्रेस से डॉ जसविन्दर, सुनील जायसवाल व सतेन्द्र, बीएसपी से सतेन्द्र सिंह व सतेन्द्र चोपड़ा, सीपीआई (एम) से अन्नत आकाश, आप से कमल राना उपस्थित रहे।

रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय मिशन है।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों एवं गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही संपूर्ण क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वे कराकर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नदी किनारे विकसित किए जाने वाले स्थलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का समुचित तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक प्रभावी टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी में कूड़ा गिरने की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने नगर पालिका मसूरी को निर्देश दिए कि मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न जाने दिया जाए। वहीं वन विभाग को नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म रणनीति के अनुरूप कार्य किए जाएं। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल उठान, गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन, नदी में कूड़ा फेंकने पर रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाए। वहीं लॉन्ग टर्म योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समग्र कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्टेªट आशीष तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम ने बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित करने तथा सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह एवं किशोरी गृह का स्थलीय निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आवासीय संस्थानों में रह रहे बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं पुनर्वास संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाल सुधार गृह में रह रहे बालकों से संवाद स्थापित कर उनकी दिनचर्या, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित किया जाए, जिससे बच्चों की शैक्षिक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास हो सके। साथ ही उन्होंने बाल सुधार गृह में निवासरत सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि संस्थान में रह रहे प्रत्येक बालक की नियमित काउंसलिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायता मिल सके। उन्होंने बच्चों के पुनर्वास एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी बल दिया।

नारी निकेतन एवं किशोरी गृह के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में निवासरत किशोरियों एवं संवासिनियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी ने परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों में रहने वाले बच्चों एवं महिलाओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वर्तमान में नारीनिकेतन में 160 संवासनिया, बाल सुधार ग्रह में 07 किशोर, किशोरी संप्रेक्षण ग्रह में 12 किशोरिया है।

निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नमिता ममगाईं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, सदस्य पीएन जौहर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।