जनपद में मानसून को लेकर अलर्ट, डीएम ने आपदा कंट्रोलरूम का निरीक्षण कर दिए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

जनपद में हुई वर्षा एवं संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली तथा आपदा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे तथा किसी भी सूचना पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सड़कों की स्थिति, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, जलभराव, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे या असुरक्षित स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं संस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की स्थिति का सत्यापन कर यह प्रमाणित करें कि वे वर्तमान में संचालित नहीं हैं तथा नदियों में किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 01 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। यदि इस अवधि में खनिज परिवहन करते हुए कोई वाहन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि वहां वार्निंग सायरन एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं, ताकि जलस्तर बढ़ने अथवा आपदा की स्थिति में पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनकी आगामी एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर प्रसव संभावित है, उन्हें पूर्व से ही सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आपात स्थिति में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

उन्होंने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए। साथ ही खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्राथमिकता के आधार पर नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी एवं नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार की जाए तथा भारी वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। ज्ञातब्य है कि संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव एवं नदी किनारे वाले ऐसे 29 क्षेत्र नगर निगम ने चिन्हित किए हैं, जिनमें 3700 परिवार एवं 900 घर है जिन्हे प्रशासन द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।

बैठक में बारिश के दौरान सड़क निर्माण कार्यों की प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय तथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। जबकि जनपद के समस्त उप जिलाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहेः डीएम दून

भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के निर्देशानुसार चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत आज जिला कार्यालय स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों, प्रतिनिधियों तथा सचिवों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। इस पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न कराने के लिए सभी राजनीतिक दलों, बीएलओ एवं बीएलए का समन्वित सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 01 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए उत्तराखण्ड सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें प्राप्त कर डिजिटाइजेशन की कार्यवाही भी की जा रही है।

जनपद के 13,76,813 मतदाताओं में से 13,55,948 (98.48 प्रतिशत) मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। इनमें से 10,98,179 (79.76 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन भी पूर्ण कर लिया गया है, जबकि 1,42,485 (10.35 प्रतिशत) प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन शेष है। जनपद में वर्तमान में केवल 1,36,149 (9.89 प्रतिशत) मतदाता ऐसे हैं, जिनसे गणना प्रपत्र प्राप्त होना शेष है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने बूथ लेवल एजेंट के माध्यम से मतदाताओं से गणना प्रपत्र प्राप्त कराने एवं समयबद्ध रूप से जमा कराने में सक्रिय सहयोग करें, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।

बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि जिन मतदाताओं तक किसी कारणवश गणना प्रपत्र नहीं पहुँच पाया है, उनके संबंध में बीएलओ स्थानीय जांच एवं पड़ताल के आधार पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में पृथक सूची तैयार करेंगे। यह सूची पंचायत भवनों, नगर निकाय कार्यालयों एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी तथा राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की सहभागिता लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को सफल बनाने में जिला प्रशासन एवं निर्वाचन विभाग का पूर्ण सहयोग करें, जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हो तथा निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेन्द्र देवली, बीजेपी से अरविन्द कुमार जैन, कांग्रेस से डॉ जसविन्दर, सुनील जायसवाल व सतेन्द्र, बीएसपी से सतेन्द्र सिंह व सतेन्द्र चोपड़ा, सीपीआई (एम) से अन्नत आकाश, आप से कमल राना उपस्थित रहे।

रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय मिशन है।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों एवं गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही संपूर्ण क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वे कराकर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नदी किनारे विकसित किए जाने वाले स्थलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का समुचित तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक प्रभावी टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी में कूड़ा गिरने की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने नगर पालिका मसूरी को निर्देश दिए कि मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न जाने दिया जाए। वहीं वन विभाग को नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म रणनीति के अनुरूप कार्य किए जाएं। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल उठान, गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन, नदी में कूड़ा फेंकने पर रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाए। वहीं लॉन्ग टर्म योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समग्र कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्टेªट आशीष तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम ने बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित करने तथा सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज केदारपुरम स्थित नारी निकेतन, बाल सुधार गृह एवं किशोरी गृह का स्थलीय निरीक्षण कर वहां संचालित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आवासीय संस्थानों में रह रहे बच्चों एवं महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं पुनर्वास संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाल सुधार गृह में रह रहे बालकों से संवाद स्थापित कर उनकी दिनचर्या, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि बाल सुधार गृह में बेसिक लर्निंग प्रोग्राम संचालित किया जाए, जिससे बच्चों की शैक्षिक एवं बौद्धिक क्षमता का विकास हो सके। साथ ही उन्होंने बाल सुधार गृह में निवासरत सभी बालकों का विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि संस्थान में रह रहे प्रत्येक बालक की नियमित काउंसलिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास में सहायता मिल सके। उन्होंने बच्चों के पुनर्वास एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी बल दिया।

नारी निकेतन एवं किशोरी गृह के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में निवासरत किशोरियों एवं संवासिनियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए तथा उनकी आवश्यकताओं एवं समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी ने परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों में रहने वाले बच्चों एवं महिलाओं को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वर्तमान में नारीनिकेतन में 160 संवासनिया, बाल सुधार ग्रह में 07 किशोर, किशोरी संप्रेक्षण ग्रह में 12 किशोरिया है।

निरीक्षण के दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नमिता ममगाईं, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, सदस्य पीएन जौहर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

डीएम बोले, उद्योग मित्रों की समस्याओं का समाधान करना हमारी प्राथमिकता

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला उद्योग मित्र समिति की बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि उद्योग मित्रों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण करना जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास की दिशा में उद्योग क्षेत्र एक गेम चेंजर की भूमिका निभाता है तथा औद्योगिक विकास से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि औद्योगिक आस्थानों से संबंधित वे समस्याएं, जिनका समाधान लंबे समय से लंबित है और जिनके संबंध में शासन को पूर्व में पत्राचार किया जा चुका है, उन्हें “मिसिंग लिंक” के रूप में चिह्नित करते हुए पुनः शासन को प्रेषित किया जाए ताकि उनका उचित समाधान हो सके।

बैठक में औद्योगिक आस्थान सेलाकुई में निर्माणाधीन 220 केवी विद्युत स्टेशन की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान यूपीसीएल अधिकारियों ने अवगत कराया कि आगामी दो से तीन दिनों के भीतर विद्युत स्टेशन पूर्ण रूप से सक्रिय हो जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने संतोष व्यक्त करते हुए परियोजना को निर्धारित समय में संचालित करने के निर्देश दिए।

औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत शटडाउन की समस्या पर जिलाधिकारी ने महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र (जीएमडीआईसी) को निर्देशित किया कि उद्योगपतियों एवं यूपीसीएल अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित कर शटडाउन का पूर्व निर्धारित समय तय किया जाए, जिससे उत्पादन गतिविधियों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। उन्होंने उद्योगों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के भी निर्देश दिए, जिसमें उद्योग मित्र अपनी समस्याएं सीधे साझा कर सकें। स्मार्ट मीटरों में रीडिंग जंप होने के कारण उपभोक्ताओं को अधिक विद्युत बिल आने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने यूपीसीएल अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही जीएमडीआईसी को इस संबंध में शासन को विस्तृत पत्र प्रेषित करने को कहा।

औद्योगिक क्षेत्र मोहब्बेवाला में सड़कों पर विक्रम वाहनों की अवैध पार्किंग तथा सब्जी एवं रेहड़ी-फड़ी विक्रेताओं द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस एवं नगर निगम अधिकारियों को आद्यौगिक आस्थानों में नियमित अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के उपरांत पुनः अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों एवं कामगारों के कौशल विकास पर विशेष बल देते हुए सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने कर्मचारियों का ऑनलाइन पंजीकरण कराकर कौशल अभिवृद्धि कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए।

बैठक में औद्योगिक भूमि के दुरुपयोग का मामला भी प्रमुखता से उठा। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन प्रकरणों में उद्योग स्थापना के उद्देश्य से भूमि आवंटित की गई है, लेकिन लंबे समय से उद्योग स्थापित नहीं किए गए हैं अथवा आवंटन उद्देश्य से भिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ऐसे मामलों की गहन जांच की जाएगी। इसके लिए उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जीएमडीआईसी को निर्देशित किया कि ऐसे सभी प्रकरणों की स्पष्ट एवं तथ्यात्मक आख्या चार दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि नियमों के विपरीत कार्य पाए जाने अथवा जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।

बैठक में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं एवं उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए तथा औद्योगिक विकास को गति देने के लिए समन्वित एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अध्यक्ष उत्तराखण्ड उद्योग संघ पंकज गुप्ता, सदस्य राज्य स्तरीय उद्योग मित्र समिति शांतनु बिष्ट, महाप्रबन्धक मीना बोरा सहित उद्योग मित्र समिति के सदस्य एवं सम्बन्धित विभगाों के अधिकारी एवं उद्योगपति उपस्थित रहे।

गंभीर अथवा जन्मजात बीमारी से ग्रसित बच्चें की जानकारी निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र में देंः डीएम

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने जनपद में गंभीर एवं जन्मजात बीमारियों से ग्रसित ऐसे बच्चों के चिन्हीकरण एवं उपचार की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं, जिनके परिजन आर्थिक रूप से उपचार का व्यय वहन करने में सक्षम नहीं हैं। जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग को 06 वर्ष तक की आयु के बच्चों तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी, देहरादून को 06 वर्ष से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों एवं किशोरों के चिन्हीकरण हेतु विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में कोई भी बच्चा केवल आर्थिक अभाव के कारण उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन्मजात अथवा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों की पहचान कर उनकी जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें समयबद्ध उपचार प्रदान किया जा सके।

डीएम ने बताया कि चिन्हित बच्चों का उपचार भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत निःशुल्क कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त जिन गंभीर बीमारियों का उपचार आरबीएसके के तहत संभव नहीं होगा, उनके उपचार के लिए अन्य उपलब्ध वित्तीय संसाधनों एवं राइफल फंड का उपयोग किया जाएगा, जिससे बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में बाल विकास विभाग द्वारा जनपद में अब तक 06 वर्ष तक की आयु के 12 गंभीर रूप से बीमार बच्चों का चिन्हीकरण किया जा चुका है। इन बच्चों के उपचार एवं आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा रही है।

डॉ0 चौहान ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य एवं भविष्य सुरक्षित करना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के माध्यम से व्यापक सर्वेक्षण कर ऐसे बच्चों की पहचान में तेजी लाई जाए। साथ ही चिन्हित बच्चों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर उपचार हेतु अग्रसारित किया जाए।

जिला प्रशासन का यह अभियान केवल एक प्रशासनिक कार्यवाही नहीं, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग के प्रति मानवीय दायित्व का निर्वहन है। जिला प्रशासन प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे तक उपचार की सुविधा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी बच्चे का जीवन प्रभावित न हो।

जनपदवासियों से भी अपील की गई है कि यदि उनके संज्ञान में कोई ऐसा बच्चा है जो किसी गंभीर अथवा जन्मजात बीमारी से ग्रसित है और जिसका परिवार उपचार कराने में असमर्थ है, तो उसकी जानकारी निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र, विद्यालय, स्वास्थ्य केन्द्र अथवा संबंधित विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि उसे समय पर उपचार एवं सहायता प्रदान की जा सके।

नशे के खिलाफ सभी एजेंसियां मिलकर करें निर्णायक कार्रवाईः डीएम

जिलाधिकारी डा आशीष चौहान की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने, नशे की मांग एवं आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने तथा युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि जिले में संचालित सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को भी नारकोटिक्स समिति से जोड़ा जाए, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में नशा उन्मूलन संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस विषय को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में भी शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी मिल सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि नशा समाज के लिए अत्यंत नुकसानदायक है तथा आदर्श राष्ट्र निर्माण की दिशा में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थानों एवं आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। बैठक में जिलाधिकारी ने औषधि विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जनपद में संचालित दवा फैक्ट्रियों एवं मेडिकल स्टोरों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए सघन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने सभी मेडिकल स्टोरों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराने के निर्देश भी दिए।
जिलाधिकारी ने समस्त उप जिलाधिकारियों एवं पुलिस क्षेत्राधिकारियों को अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विशेष टास्क फोर्स के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित सभी सरकारी एवं निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में वृहदस्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त पैडलरों एवं संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर उनकी जीआईएस टैगिंग की जाए, जिससे प्रभावी निगरानी एवं लक्षित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए।

जिलाधिकारी ने विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही निजी एवं शासकीय सभी शिक्षण संस्थानों में गठित एंटी ड्रग्स कमेटियों को सक्रिय करते हुए उनकी सूची प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार की सूचना देने के लिए संचालित मानस हेल्पलाइन नंबर 1933 एवं एनसीओआरडी/मानस पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों एवं अन्य प्रमुख स्थानों पर बैनर एवं पोस्टर लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नशे के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त किया जा सके।

जिलाधिकारी ने एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), औषधि नियंत्रक विभाग तथा अन्य प्रवर्तनकारी एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों का विश्लेषण करते हुए मादक पदार्थों के कारोबार में संलिप्त नेटवर्क, उनके लिंकेज तथा कार्यप्रणाली का अध्ययन कर प्रभावी रणनीति तैयार की जाए। बैठक में नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने पर भी विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकाओं के माध्यम से गांव-गांव तक लोगों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही प्रत्येक नागरिक तक मानस हेल्पलाइन नंबर एवं पोर्टल की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति नशे के अवैध कारोबार से संबंधित सूचना आसानी से प्रशासन तक पहुंचा सके।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद ढौंडियाल, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी शिव प्रसाद, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

एसटीपी, सीवर परियोजनाओं, नाला टैपिंग एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कार्यों की डीएम ने की गहन समीक्षा, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला गंगा संरक्षण समिति के साथ ही अर्धकुंभ मेला 2027 के लिए प्रस्तावित कार्यों के सम्बन्ध बैठक लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने जनपद अन्तर्गत संचालित गंगा संरक्षण, सीवरेज, अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल प्रस्तुतिकरण (प्रेजेंटेशन) नहीं, बल्कि धरातल पर कार्यों के प्रभावी परिणाम दिखाई देने चाहिए।
बैठक में जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता जल संस्थान एवं परियोजना प्रबंधन निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) को निर्देशित किया कि जनपद में संचालित सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हों, यह सुनिश्चित किया जाए।
टपकेश्वर मंदिर, गढ़ी कैंट क्षेत्र में प्रस्तावित एसटीपी निर्माण कार्य हेतु भूमि चयन की प्रक्रिया में हो रही देरी पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित विभागों एवं अधिकारियों के साथ पृथक बैठक आयोजित कर भूमि चयन की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने ऋषिकेश क्षेत्र में निर्माणाधीन एसटीपी, सीवेज पम्पिंग स्टेशन (एसपीएस) एवं सीवर लाइन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर निगम ऋषिकेश को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए जीआईजेड एवं नगर निगम ऋषिकेश द्वारा संयुक्त रूप से आवास विकास वार्ड में संचालित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पायलट परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए उसे मॉडल वार्ड के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक में नगरीय क्षेत्रों में डेयरी वेस्ट प्रबंधन की जानकारी मांगे जाने पर नगर निगम देहरादून के संबंधित अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
बिंदाल नदी में गिरने वाले प्रदूषित नालों की टैपिंग कार्यों में हो रही देरी पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पेयजल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नाला टैपिंग के सभी कार्य निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण किए जाएं। साथ ही आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर नालों की नियमित एवं प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने गंगा नदी सहित अन्य नदियों के तटों पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि संभावित प्रदूषण स्थलों का चिन्हीकरण कर लक्ष्य आधारित कार्ययोजना तैयार की जाए तथा नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
मसूरी क्षेत्र में 0.70 एमएलडी क्षमता के कैमल बैक एसटीपी की समीक्षा के दौरान वर्ष 2022 में बजट स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ न होने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने पेयजल निगम, मसूरी के संबंधित अधिकारी को कार्यप्रणाली में सुधार लाने की चेतावनी दी।
इसी प्रकार अर्केडिया जोन में प्रस्तावित 0.70 एमएलडी एसटीपी परियोजना में वर्ष 2022 से स्वीकृति प्राप्त होने के बावजूद भूमि चिन्हीकरण एवं म्यूटेशन की कार्यवाही लंबित रहने पर जिलाधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया तथा संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी को मामले की जांच कर सात दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सभी नगर निगमों एवं नगर निकायों को निर्देशित करते हुए कहा कि मा0 मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव द्वारा स्वच्छता व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में रखा गया है। उन्होंने सभी निकाय कूड़ा उठान व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएं तथा डंपिंग जोन का चिन्हीकरण कर वहां सीसीटीवी एवं अन्य तकनीकी माध्यमों से निगरानी सुनिश्चित करने को निर्देशित किया। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ एवं परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष बल दिया। नगर पंचायत सेलाकुई में अभी तक स्लज वाहन उपलब्ध न होने पर जिलाधिकारी ने हैरानी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को अपने संसाधनों से तत्काल वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने फल्ड प्लानिंग जोनिंग चिन्हीकरण की समीक्षा की बैठक में बताया गया कि गंगा नदी की हरिद्वार तक तथा रिस्पना नदी का फल्ड जोन चिन्हिकरण कर लिया गया है। आसन रिवर का चिन्हकरण कार्य पूर्ण हो गया है। सुसवा, सौंग, जाखन/रानीपोखरी, चन्द्रबागा, यमुना सर्वे कर लिया गया है, जिस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि फल्ड जोन चिन्हिकरण कार्य समयबद्ध पूर्ण कर लिया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अर्धकुंभ मेला 2027 हेतु प्रस्तावित निर्माण कार्यों को एनएमसीजी की अनुमति एवं निर्धारित एसओपी के अनुसार पूर्ण किए जाएं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर आयुक्त नगर निगम ऋषिकेश गोपाल राम बिनवाल, समिति सदस्य पंकज गुप्ता, पर्यावरणविद् विनोद जुगलान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

डीएम के प्रयासों से कैंसर पीड़ित विधवा को मिली आर्थिक सहायता, बच्चों की शिक्षा और उपचार में मिला सहारा

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जरूरतमंद, असहाय एवं वंचित परिवारों के कल्याण हेतु संवेदनशीलता, तत्परता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ निरंतर कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित न रहकर पीड़ित एवं संकटग्रस्त परिवारों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है। उपचार, शिक्षा, आर्थिक सहायता, रोजगार एवं ऋण राहत जैसे विषयों पर जिला प्रशासन द्वारा सैकड़ों प्रकरणों का प्रभावी निस्तारण कर जरूरतमंदों को नई आशा एवं संबल प्रदान किया गया है।
डोईवाला निवासी कैंसर पीड़ित एकल महिला सुनीता कलवार को जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण आर्थिक एवं शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। सुनीता कलवार ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वह एक विधवा महिला हैं तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण उनके समक्ष उपचार एवं बच्चों की शिक्षा दोनों को जारी रखना कठिन हो गया था। उन्होंने अपने दोनों बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए फीस माफी एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किए जाने का अनुरोध किया था।
प्रकरण को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा तत्काल आवश्यक निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन द्वारा रायफल क्लब फंड से विधवा सुनीता कलवार को रू0 50,000 की आर्थिक सहायता स्वीकृत एवं उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त उनके पुत्र का विद्यालय में दाखिला सुनिश्चित कराया गया, जबकि उनकी पुत्री की बाधित शिक्षा को जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से पुनः प्रारंभ कराया गया। जिला प्रशासन की इस पहल से दोनों बच्चों के भविष्य को नई दिशा एवं सुरक्षा मिली है।
उल्लेखनीय है कि सुनीता कलवार का 11 जुलाई 2024 को जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में कैंसर का ऑपरेशन हुआ था तथा वर्तमान में उनका उपचार निरंतर जारी है। उपचार के दौरान आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे इस परिवार को जिला प्रशासन ने न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि मानवीय सहयोग एवं भरोसे का भी संबल दिया है। जिला प्रशासन द्वारा उनके उपचार एवं पारिवारिक सहयोग के लिए लगातार समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन द्वारा विगत वर्षों में भी अनेक जरूरतमंद परिवारों को लाखों रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। साथ ही विद्युत एवं जल संबंधी बकाया प्रकरणों के निस्तारण, बैंक ऋण राहत, चिकित्सा सहायता एवं रायफल क्लब फंड से सहयोग उपलब्ध कराकर कई परिवारों को राहत पहुंचाई गई है। वहीं ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ के माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंद एवं असहाय बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें पुनः मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन की यह पहल शासन की संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी कार्यशैली का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें प्रशासन जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

दून डीएम का मानवीय निर्णय, 64 हजार का ऋण कराया जमा, रोजगार को रायफल क्लब फंड से दिए 25 हजार

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने एक बार फिर संवेदनशील एवं मानवीय प्रशासन का परिचय देते हुए ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार को बड़ी राहत प्रदान की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने आर्थिक तंगी और सामाजिक संकट से जूझ रहे दिव्यांग की फरियाद सुनते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए 64 हजार 915 रुपये की बकाया ऋण राशि सीएसआर फंड से जमा कराने के निर्देश दिए। 03 नौनिहाल बालिकाओं के 100 दिव्यांग पिता व 65 प्रतिशत् दिव्यांग माता के उपर से 64 हजार का बोझिल ऋण से जीविका उपार्जन के अति कठिन साधन व लाचारी में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा मदद का हाथ बढाते हुए ऋण माफी के साथ ही रोजगार हेतु रायफल क्लब फंड से 25 हजार आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, देहरादून से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने हेतु 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। प्रारम्भिक अवधि में उन्होंने लगभग 15 से 20 किश्तों का भुगतान भी किया, किन्तु वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया। आर्थिक संकट गहराने पर वे शेष किश्तें जमा नहीं कर सके।
ऋण अदायगी न होने पर निगम द्वारा 64,915 रुपये की आरसी तहसील देहरादून भेज दी गई। दिव्यांग दंपति केवल 3000 रुपये की पेंशन पर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि बेटियों की शिक्षा तक प्रभावित होने लगी थी। प्रार्थी ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अवगत कराया कि अमीन द्वारा तहसील जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, जिससे पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में जी रहा था।
मामले की गंभीरता और मानवीय पक्ष को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया तथा प्रभारी अधिकारी शस्त्र को निर्देशित किया कि दिव्यांग संजीव कुमार की बकाया ऋण राशि राइफल क्लब फंड से जमा कराई जाए, ताकि परिवार को राहत मिल सके और आरसी की कार्रवाई समाप्त हो सके।
जिलाधिकारी ने केवल आर्थिक राहत तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी पहल की। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को निर्देशित किया कि संजीव कुमार की 3 बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत शिक्षा सहायता प्रदान करने हेतु प्रकरण की जांच कर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। जिला प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से एक जरूरतमंद परिवार को नया संबल मिला है।  जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।