पारिवारिक परिस्थितियों से निस्तेज हुई बालिकाओं की शिक्षा के दीपक में शिक्षारूपी लौ जला रहा प्रोजेक्ट “नंदा-सुनंदा”

जिला प्रशासन देहरादून द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “नंदा-सुनंदा” के 15वें संस्करण में आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में 39 जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित करते हुए रू0 12.98 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बालिकाओं को चेक वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा शिक्षा के प्रति निरंतर समर्पित रहने का संदेश दिया। नंदा-सुनंदा 15वें संस्करण में प्राइमरी की 12, अपर प्राइमरी की 9, सेकेंडरी की 5, सीनियर सेकेंडरी की 7, ग्रेजुएशन की 5 तथा पोस्ट ग्रेजुएशन की 1 बालिका को सहायता प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान भावुक क्षण तब आए जब बालिकाओं एवं उनकी माताओं ने अपनी जीवन संघर्ष की कहानी साझा की। कई बालिकाओं ने बताया कि पिता की मृत्यु, आर्थिक तंगी, पारिवारिक संकट अथवा एकल अभिभावक की परिस्थितियों के कारण उनकी शिक्षा बीच में रुकने की स्थिति में पहुंच गई थी। उनकी पीड़ा सुनकर सभागार में उपस्थित अधिकारी, कर्मचारी एवं अभिभावकों की आंखें नम हो गईं।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति से हर कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें प्राप्त अवसरों का पूरा उपयोग कर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि “नंदा-सुनंदा” मा० मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर बालिकाओं की शिक्षा को बाधित होने से बचाना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी प्रतिभा आर्थिक अभाव के कारण पीछे न रह जाए। जिलाधिकारी ने इस अभियान से जुड़े समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्राउंड टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बेटियों के सपनों को नई उड़ान देने का अभियान है।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि बच्चों को पूरी जिम्मेदारी और लगन से पढ़ाई करनी चाहिए, ताकि आगे चलकर वे स्वयं सक्षम बनें और समाज के अन्य जरूरतमंद लोगों के लिए भी सहयोग का माध्यम बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार एवं जिला प्रशासन हर हाल में यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक अभाव में न रुके। कार्यक्रम में कई प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए।

अंशिका शर्मा, एमएससी द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा ने बताया कि उनकी माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ती हैं तथा आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई जारी रखना कठिन हो गया था। मदीहा बेग, बीसीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता सिलाई कर परिवार चला रही हैं। तनिष्का मेहर ने कहा कि पिता के निधन के बाद पूरा परिवार मां के सहारे है और आर्थिक संकट के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। हर्षिता, बीएससी ओटीटी की छात्रा ने बताया कि उनकी विधवा माता सिलाई कार्य कर परिवार चला रही हैं और फीस भरना संभव नहीं था। आंचल पुण्डीर, बीएससी नर्सिंग की छात्रा ने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण उनकी शिक्षा रुकने की स्थिति में थी। अमृता शर्मा, बीए-बीएड की छात्रा ने बताया कि वर्ष 2020 में पिता के निधन के बाद उनकी माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ती के रूप में परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। सभी 39 बालिकाओं ने जिला प्रशासन द्वारा मिली सहायता का सदुपयोग करते हुए आगे बढ़ने तथा सफल होकर समाज के जरूरतमंद एवं असहाय लोगों की सेवा करने का संकल्प लिया।

जिला प्रशासन का यह प्रोजेक्ट अब तक 175 बालिकाओं की शिक्षा को नया जीवन दे चुका है। अब तक कुल रू0 57 लाख की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। योजना के अंतर्गत प्राइमरी की 41, अपर प्राइमरी की 31, सेकेंडरी की 24, सीनियर सेकेंडरी की 31, ग्रेजुएशन की 34, पोस्ट ग्रेजुएशन की 6, पीएचडी की 2, एएनएम की 1, सिविल इंजीनियरिंग की 1, एमबीबीएस की 1, होटल मैनेजमेंट की 1 तथा स्किल डेवलपमेंट की 2 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जा चुकी है।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, संबंधित क्षेत्रों की सीडीपीओ, अन्य अधिकारी, कार्मिक, बालिकाएं एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

राज्य आन्दोलनकारियों की जगी उम्मीद, डीएम ने तहसीलों से 7 दिन के भीतर समस्त लंबित सूचियों पर की रिपोर्ट तलब

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार कलेक्टेªट में राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में सम्पन्न हुई, जिसमें राज्य आन्दोलनकारियों से जुड़े विभिन्न लंबित प्रकरणों पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित एक-एक आंदोलनकारियों के बारी-बारी से सुझाव सुने तथा उनकी शंकाओं का भी समाधान किया।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपनी-अपनी तहसीलों में लंबित समस्त चिन्हीकरण प्रकरणों एवं सूचियों पर गंभीरता से कार्यवाही करते हुए 07 दिवस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक प्रकरण का पारदर्शी एवं तथ्यपरक परीक्षण किया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि चिन्हीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सहभागी बनाने के लिए संबंधित क्षेत्रीय आन्दोलनकारी समिति के सदस्यों को भी प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाए, जिससे वास्तविक आन्दोलनकारियों के मामलों का निष्पक्ष परीक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने संबंधित विभागों को भी निर्देशित किया गया कि वे अपने स्तर पर लंबित मामलों से संबंधित आख्या एवं अभिलेख 07 दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
ज्ञातब्य है कि शासन द्वारा राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु वर्ष 2021 तक प्राप्त लंबित आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए 06 माह का समय विस्तार प्रदान किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा इस अवधि के भीतर सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं न्यायसंगत निस्तारण हेतु गंभीरता से कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है। जिन आंदोलनकारियों के रिकार्ड नहीं मिल रहे है ऐसे आंनदोलनकारियों को चिन्हित करने हेतु वरिष्ठ आंदोलनकारियों एवं समिति के सदस्यों द्वारा दिए गए शपथपत्र के माध्यम से चिन्हीकरण किए जाने हेतु जिला प्रशासन द्वारा शासन को अनुरोध पत्र प्रेषित किया गया है, जिस पर शासन स्तर से निर्णय होना है।

बैठक में उपस्थित राज्य आन्दोलनकारियों ने चिन्हीकरण प्रक्रिया को गति देने एवं सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। आन्दोलनकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि जिलाधिकारी के कार्यकाल में लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान होगा तथा पात्र आन्दोलनकारियों को न्याय मिल सकेगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्टेªट राहुल आंनद, पुलिस अधीक्षक जया बलूनी, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, राज्य आंदोलनकारी सरोज डिमरी, उर्मिला शर्मा, निर्मला बिष्ट, पुष्पलता सिलमाना, जयप्रकाश उत्तराखण्डी, योगेश भट्ट, ओपी उनियाल, देवी गोदियाल, डीएस गुंसाई, विवेकानंद खण्डूरी आदि उपस्थित रहे।

राज्य में प्रथमबार समाज के महत्वपूर्ण अंग दिव्यांगजनों के लिए ऋषिकेश में बन रहा आधुनिक इंडोर बैडमिंटन हॉल

जनपद देहरादून में दिव्यांगजनों के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार एवं उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल की गई है। राज्य में प्रथमबार दिव्यांगजनों की मांग एवं उनकी विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश क्षेत्र में उनके उपयोगार्थ एक आधुनिक इंडोर बैडमिंटन हॉल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने दिव्यांगजनों इंडोर बैडमिंटन हॉल निर्माण हेतु भूमि चयनित करते हुए 02 किश्तों में 62.67 लाख की राशि प्रदान की गई है जिसमें नगर निगम ऋषिकेश को प्रथम किस्त 25.41 लाख धनराशि पूर्व में जारी कर दी गई है शेष धनराशि 37.26 का अनुमोदित की कर दी गई है।
जिला प्रशासन की इस पहल से जहां मेधावी दिव्यांगजन खिलाडियों हेतु इंडोर बैडमिंटन हॉल की सुविधा मिलेगी वहीं प्रतिभावान दिव्यांग खिलाड़ियों को अपना हुनर दिखाने का अवसर मिलेगा जिससे छुपी हुई प्रतिभा सामने आ सकेंगी तथा राज्य, राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश एवं राज्य का नाम रोशन कर सकेंगे। जिलाधिकारी के इस प्रसाय से ऐसे सितारे जो बहुत कुछ कर सकते हैं किन्तु सुविधओं के आभाव में कुछ नही कर पा रहें हैं उनको अब इस आधुनिक बैडमिंटन हॉल में अपना हुनर दिखाते हुए  राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरने का मौका मिलेगा।
जिलाधिकारी ने दिव्यांगजनों हेतु इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए Urgent Need Basis पर जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) मद के अंतर्गत पूर्व में रू0 25.41 लाख की धनराशि स्वीकृत एवं निर्गत की जा चुकी है। उक्त धनराशि नगर निगम, ऋषिकेश को चेक के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिस पर निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुका है। इसी क्रम में नगर निगम, ऋषिकेश द्वारा प्रस्तुत संशोधित आंगणन के अनुसार अब इस परियोजना की कुल लागत रू0 62.67 लाख आंकी गई है। जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त, नगर निगम ऋषिकेश द्वारा प्रस्तुत शेष रू0 37.26 लाख की अतिरिक्त धनराशि की मांग पर डीएम ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।  

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रशासन की प्राथमिकता में है। यह इंडोर बैडमिंटन हॉल न केवल उनके शारीरिक विकास एवं स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से जोड़ने का कार्य भी करेगा। जिला प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि परियोजना समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हो, जिससे दिव्यांगजनों को शीघ्र ही इस सुविधा का लाभ मिल सके।

देहरादून डीएम ने 136 से अधिक बालिकाओं की शिक्षा को किया पुनर्जीवित

ऋषिपर्णा सभागार कलेक्ट्रेट में आज ‘‘ नंदा-सुनंदा’’ 14वें संस्करण का आयोजन किया गया। नवंरात्र के पावन अवसर पर जिलाधिकारी सविन बसंल ने नंदा-सुनंद देवी रूपी 10 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर की देवियों की स्तुति। नंदा-सुनंदा देवी रूपी 10 बालिकाओं की शिक्षा 2.03 लाख के चैक वितरित किए गए। जिला प्रशासन का प्राजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’ से जनपद अंतर्गत अब तक 136 से अधिक असहाय जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा चुका है। यह पहल समाज के कमजोर वर्गों की बेटियों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है तथा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का सकंल्प है कि जनमानस के विकास, शिक्षा आदि के लिए संचालित योजना के क्रियान्वयन में जिले स्तर पर यदि कहीं कोई गैप रह जाते हैं तो उनको भरते हुए जरूरममंदो को योजना से लाभान्वित किया जाना है।

मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’ का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि नंदा-सुनंदा देवी रूपी बालिकाओं को शिक्षित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करना है। इस योजना के माध्यम से ऐसी बालिकाओं को चिन्हित किया जा रहा है जिनके परिवार में किसी दुर्घटना/घटना से परिवार आर्थिक से शिक्षा बाधित हो गई है ऐसी होनहार बालिकाओं जिनमें शिक्षित होकर आगे बढने की ललक है उनकी शिक्षा को पुनर्जीवित कर सशक्त बनाना है।

जिलाधिकारी ने चयन समिति एंव ग्रांउड स्तर पर कार्य कर ही टीम के कार्यों की सराहना भी की। यदि हम किसी बेटी को सशक्त करते हैं तो पूरा कुल सशक्त होता है।

बनियावाला निवासी आराध्या सिंह जिनके पिता की मृत्यु होने के उपरान्त कक्षा 4की शिक्षा बाधित हो गई थी। ग्राम सुद्धोवाला निवासी मान्यता ठाकुर जिनके पिता लापता हैं तथा 05 भाई-बहन है तथा बड़ी बेटी विकलांग है परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है बेटी की 10वीं शिक्षा बाधित हो गई है। मोलाराम कालोनी सहस्त्रधारा निवासी माही चौहान जिनके पिता की मृत्यु 2021 में हो गई है परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। एमडीडीए कालोनी डालनवाला निवासी नियति वासुदेव जिनके पिता नशे के आदी है नशामुक्ति केन्द्र में भर्ती है परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है तथा कक्षा 06 की शिक्षा बाधित हो गई थी। नई बस्ती गुरूरोड पटेलनगर निवासी सोफिया अल्वी पिता की मृत्यु हो चुकी है परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है।

झंडाबाजार निवासी अनुष्का शर्मा पिता की मृत्यु 2022 में हो गई चुकी माता कपड़े की दुकान काम करती है परिवार की आर्थिक स्थिति रूप से अत्यंत कमजोर होने से कक्षा 9 की शिक्षा बाधित हो गई है। ओगल भट्टा सुभाषनगर निवासी नंन्दनी व नंदिता जिनके पिता 01 वर्ष से अलग रह रहे है तथा माता घरों मे साफ-सफाई कर घर का खर्चा चलाती हैं, माता हार्ट पेंशेंट है तथा नंदनी की कक्षा 6 व नंदिता की कक्षा 4 की शिक्षा बाधित हो गई है। हरिपुर रायवाला निवासी हर्षिता की जिनके पिता की मृत्यु हो गई है परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बीकॉम की शिक्षा बाधित हो गई है। हर्रावाला निवासी त्रिशा जिनकी माता की कैंसर से मृत्यु हो गई है माता के उपचार पर अत्यधिक खर्चा होने के उपरान्त आर्थिक स्थिति खराब हो गई है पिता फीस देने में असमर्थ है तथा कक्षा 5 की शिक्षा बाधित हो गई थी सभी बालिकाओं की शिक्षा को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से पुनर्जीवित कर दिया है। पारिवारिक घटनाओं से आर्थिक संकट में फंसे परिवार की बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनदां से शिक्षा पुनर्जीवित सशक्त बनाने बेड़ा उठाया है अब तक 136 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि बालिकाएं अपनी पढाई पर ध्यान दें प्रशासन आपकी आगे भी सहायता करता रहेगा। उन्होंने अपेक्षा की सफल होकर अपने जैसे अन्य जरूरतमंदो को आगे बढाएं। पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का यह प्रोजेक्ट सराहनीय है बालिकाओं एवं उनके परिजनों को पुलिस की सहायता की आवश्यकता है तो पुलिस सदैव तत्पर है।

कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने मुख्यमंत्री के निर्देशन में जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित करने पर राज्य सरकार का जिला प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस योजना को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट उपस्थित रहे।

एलपीजी सिलेंडर होमडिलिविरी सुनिश्चित कराने को जिले की प्रत्येक गैस एजेंसी पर अधिकारी तैनात

जिलें में एलपीजी गैस की आपूर्ति, वितरण, बैकलॉग के सम्बन्ध में जिलाधिकारी सविन बसंल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार कलेक्ट्रेट में जिला प्रशासन की क्यूआरटी एवं सम्बन्धित जिला स्तरीय अधिकारी, गैस एजेंसियों के स्वामी एवं तेल कम्पनियों के पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिला प्रशासन ने गैस एजेसियों पर होमलिडिविरी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने हेतु एजेंसियों पर अधिकारी तैनात कर दिए गए है, जो एजेंसी पर होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखेंगे वस्तुस्थिति से अवगत कराएगें।

जिलाधिकारी ने बढते बैकलॉग का कारण जाना तो तेल कम्पनियों के अधिकारियों ने बताया कि 03 दिन जब बुंकिग सोफ्टवेयर में काईसिस आ गई थी तो मैन्युअल रजिस्टर में अंकन कर उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति की गई, जिसकी लगभग 25 से अधिक की एन्ट्री साफ्टवेयर पर अद्यतन होनी बाकी है तथा 11 मार्च से गैस बुकिंग व डिलिविरी के समय शहरी क्षेत्र में 25 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों 45 दिन कर दिया गया है उससे पूर्व की जो एडवांस बुकिंग हो रखी हैं वह बैकलॉग में दर्शाई गयी है, जिससे बैकलॉग बढा हुआ दिख रहा हैं। जिस पर जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए कि तेल कम्पनियों से सम्पर्क करते हुए आज शाम तक मैन्युअल एन्ट्री को साफ्टवेयर पर एजेंसी के माध्यम से एन्ट्री कराएं तथा जिन उपभोक्ताओं की एडवांस बुकिंग 25 एवं  45 दिन का बैकलॉग दिख रहा है उनकी संख्या अलग-2 दर्शाते हुए शाम तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों का अनुपालन न करने पर सम्बधित गैस एजेसीं तेल कम्पनियों पर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक नगर को निर्देश दिए कि छापेमारी में जो अवैध रूप सिलेंडर पकड़े जा रहे हैं उनको ट्रेस किया जाए कि वह किस गैस एजेंसी के है, सम्बन्धित गैस एजेंसी की पहचान करते हुए एजेंसी स्वामी को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कर जेल भेजे। जिलाधिकारी ने जिले की गैस एजेंसीवार नामित क्यूआरटी में शामिल 30 अधिकारियों को निर्देश दिए कि गैस एजेंसी पर स्टॉक, बैकलॉग, वितरण आदि रजिस्टर का अवलोकन कर प्रतिदिन की सम्पूर्ण आख्या प्रेषित करें। साथ ही निर्देशित किया यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि किसी भी गैस एजेंसी व गोदाम से सिलेंडर न दिया जाए तथा उपभोक्ताओं को सिलेंडर होमडिलिवरी के माध्यम से ओटीपी आधार पर ही दिया जाए तथा एजेंसियों पर उपभोक्ता जागरूकता फ्लैक्सी, बुकिंग नम्बर, उपभोक्ताओं के लिए बड़े-बडे अक्षरों में जानकारी चस्पा रहे।

जिला प्रशासन की होमडिलिविरी व्यवस्था से एजेंसियों पर जुटने वाली भीड़ से हो रही अव्यवस्था से निजात मिला है वहीं कानून व्यवस्था भी नियंत्रण में है। जिला प्रशासन की क्यूआरटी के औचक निरीक्षणों एवं  एलपीजी कालाबाजारी करने वालों पर दर्ज हुए मुकदमों एवं एजेंसियों की नाफरमानी पर की गई प्रवर्तन की कार्यवाही से गैस की कालाबाजारी करने वालों में भी भय का माहौल है। उपभोक्ताओं को होमडिलिविरी के माध्यम से ओटीपी आधार पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है।  जिला प्रशासन द्वारा गैस की कालाबाजारी पर 05 मुकदमें दर्ज किए गए हैं तथा 03 को जेल भेजा, 150 घरेलू, 139 व्यवसायिक तथा 07 छोटे सिलेंडर जब्त किए हैं।

बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, नगर आयुक्त नगर निगम ऋषिकेश गोपालराम बिनवाल, उप जिलाधिकारी हरिगिरि, उप जिलाधिकारी अपर्णा ढौंडियाल, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी के.के अग्रवाल, निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार एवं  क्यूआरटी के सभी अधिकारी सहित तेल कम्पनियों एवं गैस एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे तथा उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर,  उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार सहित क्यूआरटी में शामिल अन्य अधिकारी एवं तेल कम्पनियों के प्रतिनिधि ऑनलाईन माध्यम से जुडे़ रहे।

लार्ज स्केल पर दून के 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 3.67 करोड़ से 884 स्मार्ट टीवी इंस्टालेशन प्रक्रिया प्रारम्भ

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल की विशेष पहल एवं उनके व्यक्तिगत निर्देशन में जनपद देहरादून के राजकीय संचालित माध्यमिक विद्यालयों में “प्रोजेक्ट उत्कर्ष” के अंतर्गत डिजिटल एवं उन्नत शिक्षण सुविधाओं के विकास हेतु एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ी पहल करते हुए जनपद के 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षण व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके अंतर्गत कुल 884 स्मार्ट टीवी स्थापित किए जा रहे हैं, जिनकी कुल लागत रू0 3.67 करोड़ है। सभी विद्यालयों में स्मार्ट टीवी की आपूर्ति पूर्ण हो चुकी है तथा इंस्टॉलेशन प्रक्रिया तेजी से जारी है।
स्मार्ट टीवी के माध्यम से कक्षाओं में ऑडियो-वीडियो कंटेंट, ई-लर्निंग मॉड्यूल एवं डिजिटल पाठ्îसामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी, रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनेगी। इस पहल से विद्यार्थियों को दिक्षा पोर्टल, पीएम ई-विद्या, शैक्षिक वीडियो एवं वर्चुअल कक्षाओं जैसी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी अवधारणात्मक समझ एवं शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा।

परियोजना के अंतर्गत विद्यालयों की आवश्यकता के अनुसार 43 इंच एवं 55 इंच के स्मार्ट टीवी क्रय किए गए हैं। इस हेतु स्वीकृत धनराशि जिला खनन निधि से उपलब्ध कराई गई है। इससे पूर्व भी जनपद के सभी सरकारी विद्यालयों को रू0 5 करोड़ के सीएसआर फंड से फर्नीचरयुक्त किया जा चुका है।
स्मार्ट टीवी का क्रय जैम पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रक्रिया द्वारा पूर्ण पारदर्शिता एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रणाली के तहत किया गया। निविदा प्रक्रिया में 12 फर्मों ने प्रतिभाग किया, जिनमें तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन के उपरांत पात्र न्यूनतम दर वाली फर्म का चयन किया गया।

जिला प्रशासन की यह पहल शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी जिला प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। शीघ्र ही सभी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षण सुविधा से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह पहल न केवल डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का सशक्त प्रयास है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तकनीक-सक्षम शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इसे जनपद में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि प्रशासन विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। जनपद प्रशासन द्वारा स्मार्ट टीवी की आपूर्ति एवं स्थापना कार्य को समयबद्ध रूप से पूर्ण कराते हुए सभी विद्यालयों में शीघ्र ही डिजिटल शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

डीएम के आदेशों की अहवेलना, गैस एजेंसी के सिलेंडर जब्त, मुकदमा दर्ज

एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम गठित की गई है। क्यूआरटी टीम आज क्षेत्रवार गैस एजेंसियों के निरीक्षण करते हुए एलपीजी गैस की मांग, आपूर्ति आदि सभी गतिविधियों देखी। जिलाधिकारी जिलें में गैस आपूर्ति/वितरण बैकलॉक की स्वयं मॉनिटिरिंग कर रहे है।

जिला प्रशासन के आदेशों की नाफरमानी पर शहीद हीरा गैस एजेंसी शिमला बाईपास रोड के सिलेंडर जिला प्रशासन ने जब्त कर लिए तथा गैस एजेंसी स्वामी के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर दिया है। जिलाधिकारी को शिकायत प्राप्त हुई कि हीरा गैस एजेंसी द्वारा जिला प्रशासन के होमडिलिविरी सम्बन्धी आदेश की अहवेलना करते हुए उपभोक्ताओं को ऐजेंसी से ही गैस सिलेंडर वितरित किये जा रहे हैं, जिससे भारी भीड़ लग गई है तथा कानून व्यवस्था पर विपरित असर पड़ने की संभावना है। जिस पर जिलाधिकारी ने तत्काल गैस एजेंसी पर कार्यवाही के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार क्यूआरटी टीम सहित मौके पर पंहुचे।

हीरा गैस सर्विस, नया गांव पेलियो, देहरादून द्वारा होम डिलीवरी न करते हुये घरेलू गैस सिलेण्डर का वितरण गैस गोदाम में ट्रक के माध्यम से किया जा रहा था। तत्काल प जिलाधिकारी, विकासनगर, तहसीलदार विकासनगर एवं जिला पूर्ति कार्यालय के पूर्ति निरीक्षकों कि संयुक्त टीम द्वारा मौके पर जाकर उक्त प्रकरण के सम्बन्ध में जांच की गई।

जिलाधिकारी द्वारा विगत दिवस सभी गैस एजेंसियों को गैस की होम डिलीवरी के निर्देश दिये गये है किन्तु गैस एजेन्सी द्वारा गोदाम से उपभोक्ताओं को गैस वितरित की जा रही थी, जिससे ऐजेंसी पर भारी भीड़ लग गई तथा कानून व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल संभावना बन रही थी। जिला प्रशासन ने सम्बन्धित गैस एजेन्सी के विरूद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (यथा संशोधित), आपदा प्रबन्धन अधिनियम-2005 एवं भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत थाना पटेलनगर में वाद दर्ज कराया गया तथा गैस सिलेण्डर आदि को जब्त कर लिया गया जिसे जिला पूर्ति अधिकारी एवं सम्बन्धित तेल कम्पनी की सुपुर्दगी में दे दिये गये हैं।

जिला प्रशासन द्वारा प्रसारित 1077, 0135-2626066, 2726066 और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 के माध्यम से 05 बजे तक कुल 111 शिकायतें एलपीजी गैस की आपूर्ति के सम्बन्ध में दर्ज हुई है, वही कंट्रोल रूम में मौजूद जिला खाद्य पूर्ति विभाग, देहरादून में एलपीजी गैस की आपूर्ति, सिलेंडर उपलब्धता या अन्य किसी प्रकार की समस्या को लेकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में आज लगभग 18120 अधिक उपभोक्ताओं कोे घरेलू तथा 21 अपभोक्ताओं को व्यवसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। जबकि घरेलू गैस सिलेंडर में 75 हजार के लगभग बैकलॉग है।

जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में अपर जिलाधिकारी वित्त एंव राजस्व के के मिश्रा कन्ट्रोलरूम से जिले में गैस वितरण, आपूर्ति की मॉनिटिरिंग जनमानस की समस्या के निस्तारण हेतु निगरानी बनाए हुए है।

मुरझाए हुए चेहरों पर अब दिखने लगी खुशियां, आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर के बच्चों ने खेली होली

जिलाधिकारी सविन बंसल के संवेदनशील एवं दूरदर्शी प्रयासों से सड़क पर भटकता और भिक्षावृत्ति व बालश्रम में संलिप्त बचपन अब शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने लगा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर ऐसे बच्चों के जीवन में नई आशा की किरण बनकर उभरा है।
कभी मुरझाए हुए चेहरों पर अब त्योहारों की खुशियां दिखाई दे रही हैं। उनकी आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने संजोए जा रहे हैं। आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में न केवल उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है, बल्कि उनके भविष्य की स्पष्ट दिशा भी तय की जा रही है।

जिला प्रशासन की इस अभिनव पहल के तहत अब तक 174 से अधिक बच्चों को भिक्षावृत्ति एवं बाल श्रम से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। रेस्क्यू अभियान के माध्यम से चिन्हित बच्चों को आधुनिक केयर सेंटर में लाकर काउंसलिंग, ब्रिज कोर्स, नियमित शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण एवं मानसिक संबल प्रदान किया जा रहा है।
हारिश, कक्षा 6, साधुराम इंटर कॉलेज का छात्र है। वह शारीरिक रूप से अत्यंत सक्रिय है और सभी प्रकार की खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेता है।

वह मई माह 2025 में आईसीसी (ICC) से जुड़ा था। उससे पहले वह किसी भी विद्यालय में नामांकित नहीं था और उसे औपचारिक स्कूली शिक्षा का पूर्व अनुभव भी नहीं था।

आईसीसी से जुड़ने के बाद अगस्त 2025 माह में उसे कक्षा 6 में साधुराम इंटर कॉलेज में मुख्यधारा (Mainstream) में प्रवेश दिलाया गया।

विद्यालय में प्रवेश के पश्चात उसने नियमित उपस्थिति दर्ज कराई है तथा प्रत्येक खेल गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी सक्रियता और प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय दिया है।

जिलाधिकारी के निर्देशन में संबंधित विभागों की समन्वित कार्यवाही से इन बच्चों को औपचारिक विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही सेंटर में संगीत, योग, खेलकूद एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
त्योहारों में शामिल हो रहा है बचपन
हाल ही में सेंटर के बच्चों ने उत्साहपूर्वक होली का पर्व मनाया। रंगों के साथ खिलखिलाती हंसी यह संदेश दे रही थी कि अब यह बचपन उपेक्षा का नहीं, बल्कि अवसरों का प्रतीक है। तीज-त्योहारों में सहभागिता से बच्चों में आत्मविश्वास एवं सामाजिक जुड़ाव की भावना विकसित हो रही है।

जिला प्रशासन द्वारा निरंतर रेस्क्यू अभियान चलाकर बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों की पहचान की जा रही है। ऐसे बच्चे जो पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण इन गतिविधियों में संलिप्त थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान कर शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में अग्रसर किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहां कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित जीवन का अधिकार है। प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को रेस्क्यू करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नागरिक बनाना है।

आज जो बच्चे कभी सड़कों पर थे, वही अब विद्यालयों में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं, खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। उनकी बदलती जिंदगी अन्य जरूरतमंद बच्चों और समाज के लिए प्रेरणा बन रही है।
जिला प्रशासन की यह पहल समाज के सहयोग से और अधिक सशक्त रूप से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा और सम्मानजनक जीवन से वंचित न रहे।

एचडीसी कॉलोनी में सीवर धंसे, सड़क टूटी, डीएम ने मांगा जबाव, जनदर्शन से गायब इंजीनियर का रोका वेतन

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जनता दर्शन/जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन कर जनसमस्याओं का निस्तारण किया गया। जनता दरबार में उपस्थित फरियादियों ने भूमि विवाद, निजी भूमि का सीमांकन, अवैध कब्जा, आपसी विवाद, आर्थिक सहायता, फीस माफी, उपचार से संबंधित कुल 92 शिकायतें एवं समस्याएँ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं। जिलाधिकारी ने सभी जनशिकायतों एवं समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

एचडीसी कॉलोनी निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग एल.एन. नौटियाल ने अवगत कराया कि उनके मोहल्ले में सीवर लाइन, सड़क एवं नाली निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण न होने के कारण सीवर चौंबर धंस गए हैं। सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है तथा वर्षा ऋतु में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे आमजन को आवागमन में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कई स्तरों पर समस्या रखने के बावजूद समाधान न होने पर उन्होंने जनता दरबार में अपनी पीड़ा व्यक्त की। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से स्पष्टीकरण चाहा। जनता दरबार में अनुपस्थित पाए जाने पर डीएम ने अधिशासी अभियंता के एक दिन के वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही एडीएम को मामले की जांच कर संबंधित विभागों से शीघ्र समस्या समाधान सुनिश्चित करने कहा।

मोथरोवाला निवासी एक बुजुर्ग दंपत्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि सुनील कुमार एवं उनकी पत्नी सुधा, जो उनके आवास में रह रहे थे, न्यायालय के आदेश के बावजूद घर खाली नहीं कर रहे हैं तथा उनके साथ मारपीट एवं अभद्र व्यवहार कर मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए एसडीएम सदर को त्वरित कार्रवाई कर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

राजीव नगर निवासी वृद्धा मंजू देवी ने अवगत कराया कि उनका पुत्र एवं बहू उन्हें घर से बेदखल कर संपत्ति हड़पने का प्रयास कर रहे हैं तथा प्रतिदिन अभद्र व्यवहार एवं जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को ‘भरण-पोषण अधिनियम’ के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसी क्रम में अजबपुर कलां निवासी असहाय बुजुर्ग विधवा सीमा उनियाल ने अपने जेठ एवं उनके पुत्रों पर मारपीट, अभद्र भाषा का प्रयोग तथा निजी संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया। जिलाधिकारी ने तहसीलदार को मौके पर जांच कर पीड़िता को न्याय दिलाने एवं समस्या का यथाशीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डोईवाला निवासी मीना क्षेत्री ने बताया कि संपत्ति से बेदखल किए जाने के बाद उनका पुत्र उनके साथ अभद्र व्यवहार कर रहा है तथा उन्हें जान से मारने का प्रयास कर रहा है। एक असहाय बुजुर्ग महिला की व्यथा को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ‘सीनियर सिटीजन एक्ट’ के अंतर्गत वाद दर्ज कर आवश्यक विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए जिलाधिकारी ने बुजुर्ग महिला को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने हेतु ‘सारथी वाहन’ की व्यवस्था भी कराई।

लख्खीबाग निवासी मौ० यासीन ने अपनी आर्थिक तंगी का उल्लेख करते हुए अपने पुत्र की विद्यालय शुल्क माफी की प्रार्थना की। जिलाधिकारी ने प्रकरण को सहानुभूति पूर्वक लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित विद्यालय से समन्वय स्थापित कर नियमानुसार राहत दिलाने के निर्देश दिए, ताकि आर्थिक अभाव के कारण बच्चे की शिक्षा बाधित न हो।

तिपरपुर परगना निवासी बुजुर्ग बाला देवी ने शिकायत की कि उनकी निजी भूमि पर कुछ लोगों द्वारा जबरन अवैध कब्जा किया जा रहा है तथा विरोध करने पर उन्हें धमकाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार को स्थलीय निरीक्षण कर निष्पक्ष जांच करते हुए शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मोथरोवाला निवासी नरेन्द्र नाथ ने वाहन दुर्घटना में घायल अपने पुत्र के उपचार हेतु आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उनका आयुष्मान कार्ड भी कार्य नहीं कर रहा है, जिससे उपचार में कठिनाई उत्पन्न हो रही है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि आयुष्मान कार्ड की स्थिति तत्काल जांच कर आज ही रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

मोहकमपुर जन कल्याण समिति द्वारा मोहकमपुर-लोअर नत्थनपुर एवं नेहरूग्राम क्षेत्र की जर्जर सड़कों, झुके हुए विद्युत पोल एवं झूलती विद्युत तारों से संभावित खतरे, फ्लाईओवर के नीचे व्याप्त गंदगी तथा अतिक्रमण जैसी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया कि समस्त बिंदुओं की स्थलीय जांच कर 10 मार्च तक विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए, साथ ही आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर एवं क्षेत्र विकास समिति तथा स्थानीय निवासियों ने केदारपुरम कॉलोनी स्थित चक डांडा लखौंड, लिंक रोड सहस्रधारा रोड क्षेत्र में सरकारी भूमि पर तारबाड़ कर किए गए अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराई। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम सदर को निर्देशित किया कि राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कर स्थलीय निरीक्षण के उपरांत 15 मार्च तक स्पष्ट आख्या प्रस्तुत की जाए।

देहरादून से डोईवाला, भानियावाला, रानी पोखरी एवं भोगपुर होते हुए थानों तक स्मार्ट सिटी अथवा इलेक्ट्रिक बस सेवा प्रारंभ किए जाने की मांग पर भी जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित स्मार्ट सिटी प्रबंधन से पूछा कि अब तक परिवहन सेवा क्यों प्रारंभ नहीं की गई। इस संबंध में कारणों सहित विस्तृत रिपोर्ट 17 मार्च तक प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, जिससे आमजन को शीघ्र राहत मिल सके। जनता दरबार में अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा, एसडीएम विनोद कुमार, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम अपर्णा ढ़ौडियाल, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

राज्य की कृषि, सरकारी भूमि पर गिद्ध नजर गढाये बैठे भू-माफिया बिल्डर्स पर जिला प्रशासन की स्ट्राइक

जनपद में न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित भूमि के अवैध क्रय-विक्रय से जुड़े गंभीर फर्जीवाड़े के मामले में जिलाधिकारी सविन बंसल ने कड़ा संज्ञान लेते हुए क्रेता एवं विक्रेता के विरुद्ध थाना शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य की सरकारी भूमि पर गिद्ध नजर गढाये बैठे भू-माफिया बिल्डर्स पर जिला प्रशासन कड़े प्रहार करने के मूड मेें है। चंडीगढ पंजाब बाहरी लोग राज्य की प्रतिबन्धित भूमि जिनपर न्यायालय द्वारा क्रय-व्रिकय पर रोक लगा रखी है ऐसी भूमि पर भू-माफियाओं की नजर है ऐसी भूमि को कूटरचित दस्तावेज से जमीन बेचने का मामला संज्ञान में आया है। जिस पर जिलाधिकारी ने एक्शन लेते हुए मुकदमा दर्ज कराया है तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस तरह के अन्य प्रकरणों पर कार्यवाही की जाए। ऐसे प्रकरणों पर जिला प्रशासन कड़ा एक्शन लेने के मूड में है।
जिलाधिकारी के संज्ञान में आया कि मौजा आमवाला तरला स्थित खसरा संख्या 94ख, 134, 135 एवं 136 की भूमि, जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा क्रय-विक्रय पर रोक लगाई गई है, उसे कूटरचित (फर्जी) अभिलेख तैयार कर पंजीकृत कराया गया। शिकायतकर्ता द्वारा विलेख संख्या 8614/2025 एवं 8615/2025 के संबंध में आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया गया कि उक्त भूमि पीएसीएल (पर्ल्स एग्रो टेक कॉर्पाेरेशन लिमिटेड) से संबंधित प्रतिबंधित श्रेणी में आती है।
प्राथमिक जांच में पाया गया कि विक्रेता द्वारा संबंधित भूमि का वास्तविक विवरण छिपाते हुए रजिस्ट्री कराई गई। यह भी सामने आया कि भूमि विवादित होने के बावजूद क्रय-विक्रय कर दिया गया, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। संबंधित भूमि का संबंध कथित रूप से गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी परिसंपत्तियों से भी बताया जा रहा है, जिन पर पूर्व से विभिन्न स्तरों पर प्रतिबंध लागू हैं।
जिलाधिकारी के निर्देश पर रजिस्ट्रार देहरादून एवं उप जिलाधिकारी सदर को विलेखों की पुनः जांच के आदेश दिए गए। यदि इन विलेखों के आधार पर दाखिल-खारिज के आदेश जारी हुए हैं, तो उन्हें तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 83 के तहत कूट रचना कर पंजीकरण कराने के मामले में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध थाना कोतवाली में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय देहरादून की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की संभावना व्यक्त की गई है। साथ ही, ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की तर्ज पर रजिस्ट्रार कार्यालय देहरादून का वृहद निरीक्षण भी शीघ्र किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना तथा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि लेन-देन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।