प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन के पहले सत्र में जल, जमीन, जंगल पर अहम चर्चा

प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेेलन का पहला सत्र जल, जंगल, जमीन के संरक्षण की परम आवश्यकता पर केंद्रित रहा। इस मौके पर जोर देते हुए कहा गया कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी खूबसूरती जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। जोर देते हुए कहा गया कि जीडीपी तय करते हुए एक पैमाना यह भी होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र की पारिस्थितिकी प्रगति किस तरह की रही है।

दून विश्वविद्यालय में आयोजित इस सम्मेलन के पहले सत्र में हेस्को संस्था के संस्थापक पदम भूषण डा. अनिल जोशी ने कहा कि देश का कोई कोना हो या विश्व की कोई अन्य जगह, पारिस्थितिकी और विकास के बीच संतुलन की चर्चा केंद्र में है। हिमालयी प्रदेश होने के कारण हमारे यहां तो यह चर्चा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच संतुलन अति आवश्यक है, क्योंकि आज पारिस्थितिकी संकट गहराने लगा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जीडीपी तय करते वक्त औद्योगिक विकास, रोजगार समेत अन्य पैमानों पर ध्यान दिया जाता है, उसमें पारिस्थितिकी प्रगति का भी मूल्यांकन जरूरी है।

यूएनडीपी के स्टेड हेड प्रदीप मेहता ने कहा कि यह जरूरी है कि हम परंपरागत कृषि करें, लेकिन परिस्थिति और सुविधाओं के अनुरूप उसमें बदलाव किया जाना भी आवश्यक है। वन विभाग के पूर्व पीसीसीएफ और आईआईटी रूड़की की फैकल्टी डा. कपिल जोशी ने कहा कि निसंदेह हिमालयी क्षेत्रों में विकास हुआ है, लेकिन यह समीक्षा होनी भी जरूरी है कि उससे पारिस्थितिकी तंत्र पर कितना असर पड़ा है। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में आंकडे़ भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि चाहे तापमान हो, बारिश हो या पारिस्थितिकी से जुड़ी अन्य कोई बात, आंकडे़ बता रहे हैं कि उनमें बहुत ज्यादा चरम स्थिति दिख रही है, जो कि ठीक नहीं है।

वन विभाग की पीसीसीएफ और यूकेएफडीसी की एमडी नीना ग्रेवाल ने कहा कि प्राकृतिक संपदा का उतना ही इस्तेमाल जरूरी है, जितने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने संबोधन में वनों पर आधारित रोजगार, ईको-टूरिज्म की आवश्यकता पर जोर दिया। एटरो रीसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ नितिन गुप्ता ने कहा कि ई-वेस्ट कोे रिसाइकल करके हम इस समस्या को अवसर में बदल सकते हैं।

इस सत्र के कोऑर्डिनेटर वन विभाग के पीसीसीएफ डा. एसपी सुबुद्धि ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडियों की ओर से उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया। प्रवासी उत्तराखंडियों में डा. मायाराम उनियाल, रामप्रकाश पैन्यूली, सतीश पांडेय और राजेंद्र सिंह ने सुझाव दिए।

दून विवि में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के वार्षिक अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के प्रख्यात विद्वानों द्वारा सार्थक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस चिंतन-मंथन से सामाजिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जन-जन के कल्याण के लिए ठोस एवं व्यवहारिक उपायों का संकलन भी हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। उनके प्रधान सेवक बनने के बाद पिछले 11 वर्षों में अनेक नीतियों एवं योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक वर्ग के कल्याण की दिशा में संकल्पपूर्वक प्रयास किए गए हैं। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रारंभ की गई जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसी अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों नागरिकों को प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे अभियान और प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान जैसी योजनाएं पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य सरकार भी प्रदेश में सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के साथ सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने के साथ ही पति-पत्नी दोनों को पेंशन देने तथा सभी पेंशन योजनाओं में त्रैमासिक के स्थान पर मासिक भुगतान की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार ने प्रत्येक निर्णय में प्रदेश में सामाजिक न्याय स्थापित करने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ संकल्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हुए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ एक सुरक्षित व न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य सरकार ने इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए त्रि-स्तंभीय एवं नौ-सूत्रीय नीति की शुरुआत की है, जो सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। सरकार मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर आया है। राज्य में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सतत कृषि और जल संसाधन प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक विकास के क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ तीन अत्यंत महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा ट्रस्ट के सहयोग से राज्य में जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समग्र और सतत विकास को सशक्त किया जा रहा है, वहीं नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, पायथन, जनरेटिव एआई, कौशल विकास एवं स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में युवाओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी नवाचारों के माध्यम से उत्तराखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट के एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, आईएएसएसआई के अध्यक्ष एवं नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, प्रो. आर.पी. ममगांई, प्रो. आई.सी. अवस्थी, प्रो. अलख शर्मा एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

दून विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ ने एक दिन का वेतन सीएम राहत कोष में आपदा प्रभावितों को लिये दिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में आज दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने शिष्टाचार भेंट की और इस अवसर पर मुख्यमंत्री को दून विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान स्वरूप भेंट किया, ताकि आपदा प्रभावित लोगों की मदद की जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सामूहिक सहयोग भावना की सराहना करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में दून विश्वविद्यालय का यह योगदान न केवल एक प्रेरक कदम है, बल्कि यह राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कुलपति और विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए यह विश्वास जताया कि राज्य के अन्य शैक्षणिक, सामाजिक और निजी संस्थान भी इसी प्रकार आगे आकर आपदा राहत कार्यों में अपना सहयोग प्रदान करेंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित कर रही है और जन सहयोग से यह कार्य और अधिक प्रभावी रूप से संपन्न हो सकेगा।

देहरादूनः सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज में हिंदू सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर शिक्षण और शोध-कार्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानव सेवा उत्थान समिति द्वारा हरिद्वार में बैसाखी महापर्व के अवसर पर आयोजित सद्भावना सम्मेलन एवं राष्ट्रीय एकता शिविर में प्रतिभाग किया।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मानव कल्याण के उद्देश्य से आयोजित ये विशाल सम्मेलन न केवल समाज में एकता औऱ सद्भावना का संदेश देगा बल्कि मानव सेवा के लिए भी जन-जन को प्रेरित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन सनातन हिंदू संस्कृति हमें “वसुधैव कुटुम्बकम’’ अर्थात संपूर्ण पृथ्वी को अपना परिवार मानने की प्रेरणा देती है। हमारे ऋषियों-मुनियों ने समाज में अध्यात्म और ज्ञान द्वारा लोगों को सद्भावना का मार्ग दिखाया है। उसी मार्ग पर चलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज हमारा देश वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर आधारित ष्एक पृथ्वी – एक परिवार – एक भविष्यष् की अवधारणा को वैश्विक मंचों पर साकार कर रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोरोना काल में विश्व के लगभग 100 देशों को कोविड की वैक्सीन देना हो, योग एवं आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर ले जाना हो या अनेकों छोटे देशों को आर्थिक सहायता देनी हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदैव पूरी पृथ्वी को मानवता के एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। आज विश्व में कहीं भी कोई आपदा आती है तो भारत तत्काल पीड़ित देश को राहत सामग्री पहुँचाने का कार्य करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में जब म्यांमार में विनाशकारी भूकंप आया था तो भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के अंतर्गत वहां 625 टन राहत सामग्री भेजने के साथ ही डॉक्टरों की टीम को भी भेजा, जिसने वहां पर सैकड़ों लोगों का उपचार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की शक्ति और स्थिरता का आधार होती है। यदि देश के नागरिकों में आपसी सद्भावना होगी, तो वे मिलकर देश की उन्नति के लिए कार्य करेंगे। इसी को ध्यान में रखकर आज देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नागरिकों में एकता की भावना को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश में एकता, समानता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हाल ही में, हमनें प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने जैसा ऐतिहासिक कार्य किया है। इसके माध्यम से जाति, धर्म और लिंग आदि के आधार पर कानूनी मामलों में होने वाले भेदभाव को पूर्ण रूप से खत्म कर प्रदेश के सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का प्रयास किया गया है।
इसके साथ ही, हमारी सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आज एक ओर जहां, केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में वृहद स्तर पर पुनर्निमार्ण के कार्य किए जा हैं वहीं, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरीडोर के निर्माण की दिशा में भी हम कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की पढ़ाई प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। इस सेंटर में हिंदू सभ्यता और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर शिक्षण और शोध-कार्य किए जाएंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया की रही है। इस विचार के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर विधायक आदेश चौहान, जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, विनय रोहिल्ला, जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह,एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित सभी जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गयाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित गंग धारा-विचारों का अविरल प्रवाह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने पहाड़ी उत्पादों पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम हेतु आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को पोषित करने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। जिस प्रकार गंगा का प्रवाह अविरल है, उसी प्रकार हमारे विचारों का प्रवाह भी गतिमान रहता है। विचारों का प्रवाह हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा विचारों का आदान-प्रदान सदैव हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। हमारे प्राचीन गुरुकुलों में भी संवाद और चर्चा को शिक्षा का आधार माना गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति पर हमें श्रद्धेय स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इस दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान पलायन, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण जैसे विषयों के साथ हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सभी विषय हमारे राज्य के साथ समस्त हिमालयी क्षेत्र के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कार्य कर रहा है। लोकल फॉर वोकल, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार, राज्य में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने, एवं समग्र विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। राज्य सरकार दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना करने जा रही है। जहाँ हिंदू सभ्यता, दर्शन, इतिहास और सिद्धांतों पर गहन अध्ययन और शोध कार्य किया जाएगा। इकॉनमी और इकोलॉजी के समन्वय के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराखंड एकमात्र राज्य है जहां जीडीपी के साथ जीईपी को भी मापने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा। राज्य सरकार स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड सरकार ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता पर कार्य किया। जिसे जनवरी 2025 तक लागू कर दिया जाएगा। समान नागरिक संहिता के कई प्रावधानों का सरलीकरण किया जा रहा है। इसे समझने हेतु एप्लीकेशन भी तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्यवाही तेज की है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून एवं नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार ने जो भी कार्रवाई की है, वो किसी धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के उद्देश्य से की है।

इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, विधायक विनोद चमोली, कुलपति दून विश्वविधालय डॉ. सुरेखा डंगवाल, एंव अन्य लोग मौजूद रहे।

राज्य में निवेश को बढ़ावा देने को 30 नई नीतियां बनाई गईं हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में कौशल विकास एवं रोजगार कॉन्क्लेव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर जनरेशन इंडिया और उत्तराखण्ड सरकार के बीच एमओयू भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉन्क्लेव हमारे युवाओं के कौशल विकास के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। यह कॉन्क्लेव युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने हेतु प्रेरित भी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को दुगना करने के लक्ष्य को लेकर सरकार कार्य कर रही है। दो साल में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 1.3 गुना वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किये गये हैं। राज्य में विभिन्न क्षेत्रों के लिए 30 नई नीतियां बनाई हैं। उत्तराखण्ड राज्य के युवाओं को रोजगार देने में भी अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। राज्य में एक साल में बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी तेजी से बढ़ी है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की रैकिंग में राज्य को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच वर्षों में हम राज्य की जीएसडीपी को दोगुना करने के साथ-साथ कौशल विकास और रोजगार सृजन में भी उल्लेखनीय कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है, जहां 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यदि इस ऊर्जा को सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान किया जाए, तो हमारा देश न केवल एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरेगा, बल्कि एक सशक्त और समृद्ध समाज की नींव भी रख सकेगा। यही कारण है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में ही स्किल इंडिया अभियान की शुरुआत की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हमारे युवाओं को उनकी रुचि और क्षमताओं के अनुसार उत्कृष्ट और व्यावसायिक रूप से उपयोगी प्रशिक्षण प्रदान करना था। यह अभियान न केवल युवाओं को रोजगार के अवसर बढ़ा रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग से हमारी सरकार भी राज्य में युवा शक्ति को प्राथमिकता देते हुए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ इस संबंध में निरंतर कार्य कर रही है। कौशल विकास को राज्य के प्रमुख एजेंडे में शामिल करते हुए कई योजनाओं और नीतियों को लागू किया गया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत हजारों युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का रोजगार परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, तकनीकी नवाचार और वैश्विक परिवर्तन के कारण रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। इसके लिए हमें अपने युवाओं को “फ्यूचर-रेडी“ बनाना होगा। इस दिशा में युवाओं को “डिमांड बेस्ड स्किल ट्रेनिंग“ देने के लिए विभिन्न उद्योगों और कॉरपोरेट संस्थानों के साथ समझौते किए गये हैं। राज्य के 13 आई.टी.आई. संस्थानों में दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ 20 अल्पकालिक पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किये जा रहे हैं। साथ ही, आई.टी.आई. काशीपुर में इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ स्थापित किया गया है। फिलिप्स के सहयोग से आई.टी.आई. हरिद्वार में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ स्थापित किया गया है। अशोक लेलैंड कंपनी के साथ भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अशोक लेलैंड प्रत्येक वर्ष हमारे एक हजार युवाओं को अपने प्लांट में इंटर्नशिप और रोजगार प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा विदेशी प्लेसमेंट नीति के तहत राज्य के युवाओं को विदेशी भाषाओं सहित विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि हमारे युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें। इसके पहले चरण में 23 युवाओं को जापान भेजा है। 25 युवाओं को जर्मनी और ब्रिटेन में नर्सिंग क्षेत्र हेतु भेजने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कॉन्क्लेव में विभिन्न सत्रों के माध्यम से राज्य के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर्स, जैसे आयुष, वेलनेस, पर्यटन, बागवानी एवं खाद्य प्रसंस्करण, वन आधारित आजीविका, डिजिटल मार्केटिंग, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, अक्षय ऊर्जा आदि पर चर्चा से जो विचार और सुझाव प्राप्त होंगे। वे राज्य में युवाओं के कौशल विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध होंगे।

कौशल विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास की दिशा में निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। औद्योगिक संस्थानों की मांग के अनुसार युवाओं के कौशल विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इन प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास के लिए लघु अवधि के कोर्स भी नियमित कराये जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष अवस्थापना परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, उपाध्यक्ष सेतु आयोग राजशेखर जोशी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, नीति आयोग में राज्य से नोडल अधिकारी सोनिया पंत, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, अपर सचिव विजय जोगदण्डे, एसीईओ सीपीपीजीजी डॉ. मनोज पंत, अपर सचिव मनमोहन मैनाली उपस्थित थे।

दून विश्वविद्यालय में प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की घोषणा, बोले प्रवासियों के परिषद का करेंगे गठन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में “प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन“ में सभी प्रवासी उत्तराखंड़ियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अल्मोड़ा जनपद में बस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की माटी से जुड़े हुए प्रवासियों ने शिक्षा, अनुसंधान, ब्यूरोक्रेसी, फिल्म निर्माण, उद्योग, व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान उत्तराखंड से हैं। भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस विपिन रावत भी इसी भूमि से थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति अपने आप में विशिष्ट है। हमारे प्रवासी देश के विभिन्न राज्यों में अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन सालों में उन्हें देश के अनेक राज्यों में पर्वतीय समाज के लोगों से मिलने का अवसर मिला और उन्होंने महसूस किया कि हमारे प्रवासियों के भीतर बसा उत्तराखंड सदैव उनके साथ रहता है। उन्होंने उत्तराखंड की भाषा, संस्कृति और संस्कारों को कभी नहीं छोड़ा। यह प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन सभी को उत्तराखंड की मिट्टी से पुनः जोड़ने का एक प्रयास है। यह ऐसा समागम है जहां सभी प्रवासी भाई बहन न सिर्फ राज्य के अधिकारियों के साथ संवाद कर सकेंगे बल्कि उन्हें विभिन्न राज्यों में निवासरत अन्य उत्तराखंडी प्रवासियों से भी मिलने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यहां से निकलने वाला संदेश लाखों उत्तराखंडी प्रवासियों तक पहुँचेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूर्ण करने में उत्तराखंड भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, पेयजल सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से मजबूत हो रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य भी तेजी से चल रहा है। एयर कनेक्टिविटी को मजबूत बनाया जा रहा है। 30 से अधिक नई नीतियां लाकर उत्तराखंड को निवेश और रोजगार सृजन के लिए अनुकूल बनाया है। प्रदेश में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी प्राथमिकता के साथ कार्य हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश हित में कई कठोर एवं ऐतिहासिक निर्णय लिये गये हैं। यूसीसी का कानून राज्य में जल्द लागू होगा। देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण रोधी कानून और दंगा रोधी कानून लागू किया गया है। लैंड जिहाद के खिलाफ भी मुहिम चलाकर प्रदेश भर में 5000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करवाया है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत् विकास के लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी में है। एक वर्ष में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत कम हुई है। राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई फिल्म नीति को भी मंजूरी दी है जिसमें राज्य में फिल्मों की शूटिंग करने पर कई प्रकार की सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंड़ियों को प्रदेश की विभिन्न जानकारियां उपलब्ध कराने और उनकी समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से एक डेडीकेटेड वेबसाइट भी तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रवासियों से अपील की कि कम से कम वर्ष में एक बार अपने गांव और पैतृक घर पर जरूर आएं और अपनी-अपनी विशेषज्ञता के हिसाब से अपने क्षेत्र के विकास में योगदान दें। आपके सुझावों एवं कार्यों के आधार पर विशिष्ट नीतियां बनाकर उन पर कार्य किया जायेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आज होने वाले मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह अवश्य ही उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि यह गौरवशाली क्षण है, आज प्रवासी उत्तराखंड़ियों ने अपने संघर्ष और परिश्रम के बल पर देश के कोने-कोने में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। राज्य में कार्य करने के लिए अनेक क्षेत्रों में संभावनाएं हैं।

विधायक विनोद चमोली ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना बड़े संघर्षों के बाद हुई। राज्य में कार्य करने के लिए बहुत अच्छा वातावरण है। हम सबको राज्य के विकास के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

प्रवासी उत्तराखंडी और मेयर लखनऊ सुषमा खरकवाल ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें प्रवासी सम्मेलन में आने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मेरे लिए मातृभूमि उत्तराखंड है। यह देवभूमि प्रतिभाओं की धनी है।

प्रवासी उत्तराखंडी और अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने कहा कि राज्य में क्षेत्रीय फिल्मों को बढ़ावा मिलना चाहिए। उत्तराखंड की लोक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के आयोजन सेतु के रूप में कार्य करेंगे।

प्रवासी उत्तराखंडी और भारत सरकार में सचिव वाणिज्य सुनील बर्थवाल ने कहा कि प्रवासियों को अपने गांव को गोद लेने वाला विचार बहुत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए वे हर संभव सहयोग देंगे और अपनी मातृभूमि के विकास के लिए भागीदार बनेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जैविक उत्पाद के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। इनकी मांग राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ी है। सामुहिक खेती से उत्त्राखंड में जैविक उत्पादों को बढ़ाया जा सकता है।

प्रवासी उत्तराखंडी और राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंड़ियों को अपने माटी से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सराहनीय पहल की गई है। राज्य में पर्यटन, ऊर्जा, वन संपदाओं, उद्योग के क्षेत्र में कार्य के अनेक संभावनाएं हैं। हर क्षेत्र में राज्य तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि के लिए कार्य करने के लिए उन्हें जो भी अवसर मिलेगा, वे हमेशा उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, किशोर उपाध्याय, सविता कपूर, विधायक एवं प्रवासी उत्तराखंडी सुरेन्द्र मैठाणी, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अनेक संख्या में आये प्रवासी उत्तराखंडी और शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सहकार से समृद्धि के स्वप्र को साकार करने को पीएम ने सहकारिता मंत्रालय का किया गठनः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में सहकार भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने सहकार भारती के संस्थापक स्व. लक्ष्मणराव इनामदार का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने मूकसाधक की भांति राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन जिया और देश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी स्थापना से ही सहकार भारती ने सहकारिता आंदोलन को राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया है और हमेशा अपने कार्यों से यह प्रयास किया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा जाए। उन्होंने कहा कि सहकारिता में स्पर्धा की बजाए सहयोग की भावना रहनी चाहिए क्योंकि सहकारिता किसी पर उपकार नहीं बल्कि एक दूसरे को स्वावलंबी बनाने का कार्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए सहकारिता का बहुत महत्व है, क्योंकि आज की पीढ़ी जल्द स्वावलंबी बनना चाहती है। इसीलिए सहकार से समृद्धि के स्वप्न को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारिता मंत्रालय का गठन किया। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यह मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान कर रहा है। मंत्रालय सहकारी समितियों के लिए कारोबार में सुगमता के लिए प्रक्रियाओं को कारगर बनाने और बहु-राज्य सहकारी समितियों के विकास को सक्षम बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सहकारिता विभाग व उससे सम्बन्धित समस्त संस्थाओं का उद्देश्य न केवल कृषकों को सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान कराना है, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी निर्बल और निर्धन वर्ग को सशक्त बनाते हुये उनके जीवन स्तर को उन्नत करना भी है। सहकार भारती सहकारिता और सहकारी समितियों का एकमात्र अखिल भारतीय संगठन है। अपने मिशन के अनुसरण में सहकार भारती आत्मनिर्भर सहकारी संस्थानों के निर्माण के लिए जनता को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अपने अनुशांगिक प्रकोष्ठ ‘गंगा सहकार ग्राम’ के तहत प्राकृतिक खेती, औषधि एवं पौधारोपण आदि कार्यों को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के तहत पशुपालकों को साइलेज उपलब्ध कराया जा रहा है। देशभर में बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण कार्य की शुरुआत उत्तराखंड से हुई है। राज्य की सभी 670 समितियों का कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। सहकारी समितियों के साथ 95 जन औषधि केंद्र एवं जन सुविधा केंद्रों की शुरूआत भी सबसे पहले उत्तराखंड ने की है। सहकारिता की भावना से प्रारंभ किए गए जन औषधि केंद्रों से लोगों को सस्ती दवाएं मिल रही हैं।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीनानाथ ठाकुर, मिलेनियम इंडिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. उदय काकरू, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल उपस्थित थे।

होम्योपैथिक अत्यंत कारगर होने के साथ किफायती भीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय, देहरादून में राष्ट्रीय होम्योपैथिक सम्मेलन ‘होम्योकॉन- 2023’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने होम्योपैथिक पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लॉच किया। होम्योपैथी के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले चिकित्सकों को मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होम्योपैथी के जन्मदाता सैमुअल क्रिश्चियन हैनिमैन का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने होम्योपैथी के रूप में एक ऐसी उपचार पद्धति विकसित की, जो अत्यंत कारगर होने के साथ साथ किफायती भी थी। उन्होंने कहा कि शरीर ही सारे कर्तव्यों को पूर्ण करने का एकमात्र साधन है। शरीर की रक्षा करना और उसे निरोगी बनाये रखना मनुष्य का सर्वप्रथम कर्तव्य है। यदि मनुष्य निरोगी होगा तो, वह जीवन में सब कुछ कर सकता है। जीवन शैली में तेजी से बदलाव हो रहा है, ऐसे में और भी अधिक आवश्यक हो जाता है कि हम अपने शरीर का जितना हो सके उतना ख्याल रखें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों के कारण ही आज योग, आयुर्वेद और होम्योपैथी पद्धति समेत तमाम प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियां अपना विलुप्त होता वैभव पुनः प्राप्त कर रही हैं। चाहे वो आयुष मंत्रालय का गठन हो या फिर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन हो। प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि के कारण ही आज पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को लोग अपना रहे हैं। भारत में पारम्परिक चिकित्सा प्रणाली को बढावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में पृथक से आयुष मंत्रालय का गठन किया था। राज्य सरकार प्रदेश में आयुष चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा होम्योपैथी को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्रचलित चिकित्सा पद्धति माना गया है। हम सभी ने कोरोना काल में होम्योपैथी की दवाइयों सहित पारंपरिक चिकित्सा के महत्व को बहुत करीब से देखा है, जिसके बाद होम्योपैथी की विश्वभर में स्वीकार्यता बड़ी है। इन सुखद परिणामों के चलते ही नई स्वास्थ्य नीति में होम्योपैथी को एक प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थान मिला है। राज्य सरकार देवभूमि को एक महत्वपूर्ण आयुष प्रदेश के रूप में स्थापित करने हेतु कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य में आयुष और विशेष रूप से किफायती और कारगर होने के कारण होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति की महत्ता और बढ़ जाती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला में होने वाले विचार-विमर्श एवं चिन्तन से होम्योपैथी के विकास में और अधिक गति मिलेगी।
केन्द्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने होम्योपैथी और आयुष को तेजी से आगे बढ़ाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी जटिलतम रोगों के निदान का एक कारगर उपाय है। देवभूमि उत्तराखण्ड आयुष की प्रेरक रही है। होम्योपैथी हमारी परंपरागत चिकित्सा पद्धति रही है। होम्योपैथी पर अधिक से अधिक अनुसंधान होने चाहिए। उन्होंने कहा कि आयुष और योग के क्षेत्र में भी भारत की वैश्विक स्तर पर अलग पहचान है। इनको हमें अधिक से अधिक बढ़ावा देना होगा।
इस अवसर पर सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, निदेशक होम्योपैथिक डॉ. जे.एल. फिरमाल, डॉ. रामजी सिंह, डॉ. नितीष दुबे, डॉ. जसवंत पाटिल एवं होम्योपैथी से जुड़े चिकित्सक उपस्थित थे।

राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापरक मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में अग्रसर होना है-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने शुक्रवार को दून विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में 36 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। समारोह में वर्ष 2021 के स्नातक, परास्नातक एवं पी.एच.डी के 669 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 36 विद्यार्थियों में 24 छात्राएं शामिल थीं। जिन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की थीम ‘उभरती नारी शक्ति’ को चरितार्थ किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देवभूमि उत्तराखंड को नमन करते हुए कहा कि आज दून विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेकर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। डिग्री और मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन की स्मृति इन विद्यार्थियों के जीवन-यात्रा के सबसे यादगार अनुभव में से एक रहेगी। आज इन विद्यार्थियों का एक सपना साकार हो रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के विभिन्न मानकों पर एक उत्कृष्ट संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाएगा। राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति, उसके मानव संसाधन की गुणवत्ता पर निर्भर होती है। मानव संसाधन की गुणवत्ता, शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। आज का युवा, कल का भविष्य है, इस सूत्र वाक्य को अंगीकार करते हुए, दून विश्वविद्यालय को सिर्फ राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्तापरक मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में कार्यरत रहना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि दून विश्वविद्यालय युवाओं को सक्षम बनाने हेतु उन्हें कौशल प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। विश्वविद्यालय द्वारा पांच विदेशी भाषाओं और तीन स्थानीय भाषाओं का भी अध्ययन व अध्यापन कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय भाषाओं को प्रोत्साहित करना हमारी लोक संस्कृति की संरक्षण का सराहनीय प्रयास है। हमारी लोक भाषाएं हमारी संस्कृति की अमूर्त धरोहर हैं। विश्वविद्यालय ने वर्तमान सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया है। भारत को नॉलेज सुपर पावर बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में यह उपयोगी कदम है। उन्होंने कहा कि हम स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है कि देश को अगले पच्चीस वर्षाे के अमृत- काल में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल करें। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवा शक्ति का सहयोग अधिक महत्वपूर्ण होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विश्वविद्यालय में ’सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी चेयर स्थापित की गई है, जो राज्य के विकास के लिए नीति-निर्माण और क्षमता विकास के लिए समर्पित है। डॉ. नित्यानंद हिमालयी शोध एवं अध्ययन केन्द्र भी स्थापित किया गया है, जिसमें राज्य के भौगोलिक, ईकोलॉजिकल, आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों में शोध और अध्ययन को प्रोत्साहित किया जायेगा। उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय स्तर के अनेक संस्थान भारतीय सैन्य अकादमी, भारतीय वन्य जीव संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, वन अनुसंधान संस्थान, भारतीय पेट्रोलियम अनुसंधान संस्थान तथा गोविंद वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय विद्यमान हैं जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दून विश्वविद्यालय भी इन संस्थानों की तरह ख्याति प्राप्त करेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो पूरे राष्ट्र में बदलाव ला सकता है। शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि छात्र तकनीकी कौशल से और अधिक सम्पन्न हां और स्वयं रोजगार की तलाश करने के बजाए दूसरों को रोजगार उपलब्ध करवाएं। विश्वविद्यालय में डेमोग्राफिक रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किये गये डाटा सेंटर से राज्य की डेमोग्राफिक इंफोर्मेशन सहज उपलब्ध होगी, और डेमोग्राफिक रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी बेटियां जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रही हैं। इसका साक्षात उदाहरण आज के इस दीक्षांत समारोह में देखने को मिला 36 गोल्ड मेडल्स में से 24 मेडल छात्राओं को प्राप्त हुए हैं, जबकि सोलह शोधार्थियों में से आठ बेटियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई है। इससे यह सिद्ध होता है कि संस्थान में महिलाओं को शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं और उनको प्रोत्साहित करने के लिए संस्थान प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय में तकनीकी शिक्षा को विशेष रूप से बढ़ावा देने के लिए, तीन तकनीकी स्कूल-स्कूल ऑफ बायोलोजिकल साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन और स्कूल आफ एनवायरमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारी बेटियां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों में और अधिक उत्कृष्टता प्राप्त करेंगी तो महिला सशक्तीकरण को और अधिक बल मिलेगा। आज उपाधि और पदक प्राप्त करने के बाद, इन विद्यार्थियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थी जिस भी क्षेत्र में जाएं, उस कार्य को बहुत निष्ठा से और सर्वाेत्तम रूप से करें, तभी शिक्षा कारगर और सार्थक होगी।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि आज एक सुखद अनुभूति रही है। आज दून विश्वविद्यालय में सर्वाेच्च मातृशक्ति के रूप में माननीय राष्ट्रपति जी हम सभी को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु उपस्थित हुई हैं। विश्वविद्यालय ने पूरे वर्ष के लिए ‘उभरती नारी शक्ति’ थीम को आत्मसात किया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे सामने है, आज विश्वविद्यालय की मीडिया एवं एन.सी.सी की टीम में बड़ी तादात में हमारी बेटियां भाग ले रही हैं। राज्यपाल ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन इन विद्यार्थियों के लिए एक उत्सव का दिन है, लेकिन आज का दिन मनन का भी है। कुछ साल पहले जब इन विद्यार्थियों ने इस ज्ञान के मन्दिर के अन्दर कदम रखा था, तो इनके ज्ञान के सच्चे साधक होने का प्रशिक्षण, आपके आलोचनात्मक सोच के क्षितिज को व्यापक बनाने का प्रशिक्षण शुरु हुआ था। दीक्षांत समारोह औपचारिक रूप से उस दीक्षा के पूरा होने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करने का यह अर्थ नहीं है कि हमारी सीखने एवं ज्ञान अर्जन की प्रक्रिया पूरी हो गयी, उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये विद्यार्थी पूरे जीवन ज्ञान और विद्या के शिक्षार्थी बनें रहेंगे। राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि ये विद्यार्थी अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग न केवल अपनी भौतिक समृद्धि के लिए करेंगे, बल्कि अपनी आध्यात्मिक समृद्धि के लिए भी करेंगे। जीवन की सफलताओं में विनम्र बने रहेंगे, एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी के संघर्षमय जीवन का फलक अत्यंत व्यापक रहा है। उनकी प्रगतिशील चेतना ही थी जिसने इन भीषण संघर्षों की ज्वाला में तपाकर उनको विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत की राष्ट्रपति होने का गरिमामय आसन प्रदान किया। राष्ट्रपति का जीवन संघर्ष के साथ साथ महिला सशक्तिकरण की भी प्रेरणादाई मिसाल है। उनका सरल स्वभाव, धैर्यशीलता एवं विनम्र आचरण सभी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा राज्य प्राचीन काल से ही धर्म, आध्यात्म और संस्कृति की महान परम्परा का ध्वजवाहक रहा है। देवभूमि उत्तराखंड सच्चे अर्थों में वसुधैव कुटुम्बकम की समृद्ध विचारधारा का पुण्य स्त्रोत है, जहां से “चिपको“ जैसा जनआंदोलन प्रारंभ हुआ जिसने प्रकृति की महत्ता को विश्व पटल पर पुनः रेखांकित किया और विश्व को गौरा देवी जी जैसी जुझारू महिला के व्यक्तित्व से परिचित होने का मौका दिया। उत्तराखण्ड के शैक्षणिक संस्थान भारत ही नहीं अपितु विश्वभर में विद्या के प्रचार प्रसार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उत्तराखंड की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हुये दून विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उत्तराखण्ड सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को राज्य में लागू करने का निर्णय लिया जा चुका है। दून विश्वविद्यालय के लिये नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसलिये भी प्रासंगिक हो जाती है क्योंकि दून विश्वविद्यालय उत्तराखण्ड का एकमात्र विश्वविद्यालय है जहाँ विदेशी भाषाओं जैसे जापानी, फ्रेंच, जर्मन, चीनी तथा स्पेनिश में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएच०डी० कोर्स संचालित किये जा रहे हैं, जिससे छात्रों को न केवल अंतराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों की भाषा एवं संस्कृति को समझने में मदद मिल रही है बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामना देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करना वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। राज्य में उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य में 05 लाख से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिसमें से 65 प्रतिशत बालिकाएं हैं। 2025 तक राज्य को पूर्ण साक्षर बनाने, क्षय रोग मुक्त उत्तराखण्ड, नशा मुक्त उत्तराखण्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर वैज्ञानिक, पद्म विभूषण डॉ० के. कस्तूरीरंगन, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल, सुबोध उनियाल, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, विधायकगण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।