प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी तथा सरकार और जनता के बीच सेतु हैं। वे स्थानीय समस्याओं को बेहतर समझते हैं और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से काम करने और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में सशक्त किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, जनसुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक पंचायत स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करे, ताकि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। ग्राम सभाओं में लोगों के सुझाव लिए जाएं और कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा हो। पंचायत प्रतिनिधि यह भी देखें कि योजनाओं का लाभ वास्तव में किन परिवारों तक पहुंच रहा है। कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत की गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत का उद्देश्य कामकाज को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। विकास कार्यों की संख्या से अधिक उनका प्रभाव मायने रखता है। सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों तथा स्थानीय बाजारों की सफाई हेतु कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी इस कार्य के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और गांवों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गांवों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन कम करना सरकार की प्राथमिकता है। महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने सहित अनेक कदम उनके सशक्तिकरण के लिए उठाए गए हैं। गांवों की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी समान ध्यान देना होगा।

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग कर पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित उत्तराखण्ड का संकल्प साकार होगा।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास की तमाम योजनाएं पंचायतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचती हैं। पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से गांवों में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।

बांद्रा टर्मिनस से दिल्ली सराय रोहिल्ला गरीब रथ का हरिद्वार तक विस्तार, हरिद्वार से वेरावल और ओखा के लिए नई एसी एक्सप्रेस

देहरादून। उत्तराखण्ड में रेल कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे मंत्रालय ने बांद्रा टर्मिनस-दिल्ली सराय रोहिल्ला गरीब रथ एक्सप्रेस का हरिद्वार तक विस्तार करने के साथ ही हरिद्वार-वेरावल एसी एक्सप्रेस और हरिद्वार-ओखा एसी एक्सप्रेस के संचालन को स्वीकृति प्रदान की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र के माध्यम से ये जानकारी दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की धार्मिक, पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को गति देने में बेहतर रेल कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में रेल सेवाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश में आने वाले तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

सीएम धामी ने हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतंजलि वेलनेस योगग्राम, ग्राम औरंगाबाद, हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के उद्घाटन समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने गुरुकुलम् के शुभारंभ पर योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण तथा समस्त पतंजलि परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख केंद्र है। देवभूमि में पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का शुभारंभ भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की गुरुकुल परंपरा हजारों वर्षों से ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण का आधार रही है। गुरुकुलों में विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी बोध कराया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का भाव हमारी प्राचीन शिक्षा परंपरा का आधार रहा है। सच्ची शिक्षा वही है, जो मनुष्य को अज्ञान, भय और संकीर्णता से मुक्त कर उसके व्यक्तित्व का समग्र विकास करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। यहां आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का समन्वय विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में तेजी से बदलती दुनिया में गुरुकुल शिक्षा की प्रासंगिकता और बढ़ी है। आधुनिक ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और संतुलित जीवन शैली की शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग, आयुर्वेद, शिक्षा, अनुसंधान और जन-स्वास्थ्य के क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है। स्वामी रामदेव ने योग को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि आचार्य बालकृष्ण द्वारा आयुर्वेद के अध्ययन, शोध और प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कौशल, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल दिया गया है। उत्तराखण्ड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। अपनी जड़ों और विरासत से जुड़कर आधुनिक ज्ञान को अपनाने वाली युवा पीढ़ी भविष्य की चुनौतियों का अधिक आत्मविश्वास से सामना कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और संस्कृति के अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध विरासत को जाने, समझे और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विज्ञान, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी विकसित की जा रही है। विभिन्न क्षेत्रों में साइंस एवं इनोवेशन सेंटर सहित वैज्ञानिक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन विकसित किए जा रहे हैं। राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर मिले हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् जैसे शिक्षण संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण सहयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् आने वाले समय में उत्तराखण्ड और देश के साथ विश्वभर के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, विज्ञान, योग और आयुर्वेद के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ज्ञान, संस्कार और सेवा की भावना के साथ समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक ज्वालापुर ई.रवि बहादुर, पूर्व कैबिनेट स्वामी यतिस्वारानंद, गोल्डन बाबा, स्वामी भू देव, जिलाध्यक्ष भाजपा आसुतोष शर्मा, जिला अध्यक्ष भाजपा रुड़की डॉ मधु सिंह, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, राज्य मंत्री आदेश सैनी, श्यामवीर सैनी, अजीत सिंह, मेयर नगर निगम रुड़की अनीता अग्रवाल, वरिष्ठ कार्यकर्ता भाजपा राजेंद्र चौधरी, लव शर्मा, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, जॉइन मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ, सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार हर गिरी, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा सहित बड़ी संख्या संस्थान के छात्र-छात्राएं एवं जनप्रतिनिधि में मौजूद रहे।

ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के विशिष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जाए: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल के समग्र विकास से संबंधित प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष संस्थान के प्रस्तावित स्वरूप एवं विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके समग्र विकास में आयुर्वेद, मेडिकल टूरिज्म, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को विशेष प्रमुखता दी जाए। इन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शैक्षणिक, शोध एवं अध्ययन की व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, जिससे यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच प्रभावी सेतु बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष, योग और संस्कृत देवभूमि उत्तराखण्ड की प्रमुख पहचान हैं। राज्य की इस विशिष्ट पहचान को ऋषिकुल के विकास में प्रमुखता से प्रतिबिंबित किया जाए। संस्थान में विकसित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियां उच्च स्तरीय हों तथा यहां भारतीय ज्ञान, प्राच्य विद्याओं, आयुर्वेद और योग से संबंधित अध्ययन एवं शोध के लिए उत्कृष्ट वातावरण तैयार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परिसर का वास्तुशिल्प प्राच्य एवं पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप हो। भवनों के बाह्य स्वरूप और फसाड में प्राचीन स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाई दे, जबकि परिसर में उपलब्ध कराई जाने वाली व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं आधुनिकतम हों। उन्होंने कहा कि प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलित समन्वय से परिसर की विशिष्ट पहचान विकसित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के प्रत्येक पहलू में इसकी मूल अवधारणा स्पष्ट रूप से दिखाई दे। संपूर्ण परिसर को इस प्रकार विकसित किया जाए कि यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और अध्यात्म की अनुभूति हो तथा यह उन्हें आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक रूप से आकर्षित करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के कारण हरिद्वार का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार आते हैं। इसलिए ऋषिकुल के विकास की अवधारणा में हरिद्वार की इस विशिष्टता को केंद्र में रखा जाए। यहां आने वाले लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म की समृद्ध विरासत को जानने और अनुभव करने का अवसर मिले।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से संबंधित सभी कार्यों को समयबद्ध किया जाए। विभिन्न कार्यों के लिए स्पष्ट चरण और समय-सीमा निर्धारित करते हुए इन्हें चरणबद्ध तरीके से दो वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। प्रस्तुतीकरण में ऋषिकुल को योग एवं ध्यान, उच्च स्तरीय शैक्षणिक गतिविधियों, आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, कला-संस्कृति तथा शोध गतिविधियों के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। प्रस्तावित मास्टर प्लान में अकादमिक, योग एवं ध्यान, आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं वेलनेस सहित विभिन्न क्षेत्रों के समग्र विकास की अवधारणा रखी गई है।

मुख्य सचिव बोले, तकनीकी युग में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण

डीपीएस स्कूल रानीपुर के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘द गोल्डन जुबली लिटरेसी फेस्टिवल-गोल्डन कंटिन्यूम : स्वर्ण अक्षर-2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य सचिव ने दीप प्रज्वलित कर एवं राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि ‘स्वर्ण अक्षर’ नाम अपने आप में विशेष अर्थ रखता है। स्वर्ण अनमोलता का प्रतीक है, जबकि अक्षर मानव मन के विचारों, कल्पना और शक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए 50 वर्षों की यात्रा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि किसी संस्था का निर्माण केवल कक्षाओं और भवनों से नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और उससे जुड़े लोगों के योगदान से होता है। आज का दौर तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, ऐसे समय में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि चारों ओर उपलब्ध सूचना को ज्ञान नहीं कहा जा सकता। साहित्य व्यक्ति को प्रश्न पूछना, चिंतन करना और अपने ज्ञान का विस्तार करना सिखाता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड का हिमालय, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत साहित्य के महत्व को रेखांकित करती हैं। उन्होंने छात्रों को पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर अधिक से अधिक साहित्य पढ़ने और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय के विकास में योगदान देने वाले शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डीपीएस के छात्र विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे समय-समय पर स्वयं से तीन सवाल जरूर पूछें—मैंने क्या सीखा, मैंने क्या योगदान दिया और मैंने किसकी मदद की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना आवश्यक है।

इस अवसर पर डीपीएस रानीपुर की 50 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह का संतों की उपस्थिति में संदेश, बार बार चुनाव विकास में बाधक

हरिद्वार के प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समागम को सम्बोधित करते हुए “एक राष्ट्र-एक चुनाव” की ताकत और आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की प्रगति के लिए बाधक बताते हुए संत समाज से इस संवैधानिक परिवर्तन के लिए जनजागरण का आह्वान किया। उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मौके पर उपस्थित रहे और केंद्रीय मंत्री के साथ जुड़कर समर्थन व्यक्त किया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए इस आग्रह और संकल्प का खुलकर समर्थन करते हुए “एक राष्ट्र-एक चुनाव” की परिकल्पना को देश के हित में आवश्यक करार दिया। कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव राष्ट्र की विकास गति और जनसेवा को प्रभावित कर रहे हैं और समय, पैसा तथा प्रशासनिक ऊर्जा का भारी क्षय कर रहे हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि लगातार चुनावों के कारण स्कूलों में पढ़ाई रुकती है, प्रशासनिक मशीनरी चुनाव की तैयारियों में लग जाती है और जनता तक विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। उन्होंने चुनावों की तैयारी पर लगने वाले समय और खर्च, जो रिपोर्ट के मुताबिक लाखों करोड़ तक पहुँचते हैं, को रोका जा सके तो देश लाभान्वित होगा। चौहान ने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ हों तो संसाधनों की बचत होगी, चुनाव सम्बंधी समय की बचत होगी और प्रशासनिक ध्यान विकास पर केंद्रित रहेगा।

उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे अपनी उपस्थिति और कहने की शक्ति से जनजागरण में मदद करें। कहा कि संतों के आशीर्वाद और उनके शिष्यों के व्यापक प्रभाव से यह विचार देश में तेजी से फैल सकता है और राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित के लिए एक मजबूत जनप्रेरणा बन सकती है।उन्होंने यह भी निवेदन किया कि संत अपने प्रवचनों में “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का समर्थन करें ताकि जनता में उत्साह पैदा हो और संवैधानिक संशोधन का मार्ग सुगम बने। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस विषय पर उठाए गए कदमों और विधेयक का उल्लेख करते हुए उनका समर्थन किया और कहा कि यह काम सिर्फ एक पार्टी का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है, देश आगे रहेगा तो पार्टियाँ भी बनी रहेंगी।

उन्होंने उपस्थित संत समाज और जनता से आशीर्वाद मांगा और वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि संत समाज का साथ मिलने पर “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का संकल्प पूरा हो सकता है और इससे भारत के समृद्धि, विकास व आत्मनिर्भरता के मार्ग खुलेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में वंदे मातरम के महत्व पर विशेष जोर दिया और कहा कि यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, न कि किसी पार्टी या समुदाय का। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पूर्व मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के दो टुकड़े कर दिए गए थे और वही विभाजन का एक कारण बना; अब और भारत विभाजित नहीं होने दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने संत समाज से आह्वान किया कि वे अपने प्रवचनों में वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करें और जनता में यह भावना जगाएं कि देश की मातृभूमि की वंदना में कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संतों की आवाज़ से जनजागरण होगा, तो कोई भी वंदे मातरम के पूरे गान का विरोध करने का साहस नहीं कर पाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और देश के संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र में पर्व के समान हैं, लेकिन निरंतर चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लागू होने के साथ बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और सुरक्षा बलों को चुनाव संबंधी दायित्वों में लगाना पड़ता है। यदि देश में एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को जनसेवा और विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है, तो यह लोकतंत्र को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाते हुए इसे आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की निरंतर गति आवश्यक है। आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ऐसे समय में शासन का अधिकतम समय विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों पर लगना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पूज्य संत-महात्माओं से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास निरंतर हो, संस्कृति सुरक्षित हो और राष्ट्र सर्वोपरि रहे।

हरिद्वार में मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को किया नमन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा प्रेम नगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत विभाजन की त्रासदी में शहीद हुए लाखों भारतीयों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की साझा विरासत, संस्कृति, पहचान और भावनाओं का भी विस्थापन था। सदियों से साथ रहने वाले लोग रातों-रात एक-दूसरे से अलग हो गए और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले निर्दाेष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस दर्दनाक इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। इसका उद्देश्य उन पीड़ित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा नई पीढ़ी को देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से पुनः जुड़ रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी विरासत को दिव्यता और भव्यता के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव, तीन तलाक की प्रथा पर रोक, नागरिकता संशोधन कानून, वक्फ कानून में संशोधन तथा 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने जैसे निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह सब संभव हो पाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही राज्य की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी कुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित रखने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर ब्लड कैम्प का अवलोकन किया तथा रक्तदान करने वालों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया तथा इस अवसर पर विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के बुजुर्गों को शॉल भेट कर सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 14 अगस्त 1947 तक भारत अखंड था और मध्यरात्रि के बाद देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय एक बड़ी विडंबना यह थी कि देश का बंटवारा तो हो गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान की सीमाएं तत्काल स्पष्ट नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करने की जिम्मेदारी अंग्रेज अधिकारी सर सिरिल रेडक्लिफ को सौंपी गई, जिन्हें भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने भारत को पहले समझा तक नहीं था, उसे इतने बड़े और संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी सौंपना विभाजन की प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं प्रदीप बत्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में मेयर हरिद्वार किरण जैसल, नगर पालिका अध्यक्ष शिवालिक नगर राजीव शर्मा, विधायक आदेश चौहान, सविता कपूर, प्रदेश अध्यक्ष उत्तरांचल पंजाबी महासभा करण मल्होत्रा, प्रदेश महामंत्री राजकुमार फुटेला, जिला अध्यक्ष प्रमोद पांधी, जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राज ओबराय, गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा, जिला महामंत्री प्रदीप कालरा राम अरोड़ा, राज्य मंत्री विश्वास डाबर सहित विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के लोग मौजूद रहे।

पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन के साथ देवभूमि ने किया शिवभक्त कांवड़ियों का अभिनंदन

धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था, सेवा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। राज्य सरकार की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के सम्मान के साथ-साथ कांवड़ यात्रा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल संचालन के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी संदेश दिया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरिद्वार आगमन पर हरकीपैड़ी से लेकर कांवड़ यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर से शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। अलकनंदा होटल परिसर में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने पाँच शिवभक्त कांवड़ियों का चरण प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रियों की स्वास्थ्य सहायता एवं सुविधाओं के लिए स्थापित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने शिविर में उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं का अवलोकन किया और श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार, आवश्यक दवाइयां तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों के बीच पहुंचकर उनका स्वागत किया और अपने हाथों से भोजन परोसा।

काँवड़ यात्रियों के अभिनदंन कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि देवभूमि आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक वातावरण मिले। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट पर्व है। इसके सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार सभी संबंधित विभागों के समन्वय से निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों से उन्हें कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के बीच आने और उनकी सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का नाम करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ऊर्जा और विश्वास का आधार है। कठिन परिस्थितियों में भी शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैं और “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कांवड़ यात्रा अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक शिवभक्त गंगाजल लेकर सफलतापूर्वक अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास का व्यापक कार्य हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, श्रीराम जन्मभूमि, केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान जैसी परियोजनाएं भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान कर रही हैं।

उन्होंने केदारनाथ आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कर इसे भव्य और दिव्य स्वरूप दिया गया है। वहां आस्था पथ, सरस्वती घाट, आदि शंकराचार्य की प्रतिमा, तीर्थ पुरोहित आवास सहित अनेक सुविधाओं का विकास किया गया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी योजनाएं राज्य के विकास और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, एंबुलेंस सेवाएं, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन सहायता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने शिवभक्तों से यात्रा के दौरान अनुशासन, मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।

उन्होंने पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण मित्रों, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य सेवा कार्यों में जुटे कर्मयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी का सामूहिक सहयोग ही इस विशाल आयोजन को सफल बनाता है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पाँच पुलिसकर्मियों तथा पाँच पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन सभी कर्मयोगियों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक है, जो यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

इस अवसर पर महामण्डलेश्वर ललितानंद गिरी महाराज, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा एवं राम सिंह कैड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, हरिद्वार की मेयर किरण जैसल, रुड़की की मेयर अनिता अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़िए उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने किया।

गुरुकुल कांगड़ी केवल शिक्षण संस्थान नहीं, राष्ट्र निर्माण और संस्कारों का केंद्रः धामी

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि युवाओं के चेहरों पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और संस्कारों का जीवंत प्रतीक है। यहां विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, राष्ट्रसेवा और भारतीय मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है, जहां 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 42 वर्ष से कम आयु की है। यही युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि आज का युवा नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि स्टार्टअप और नवाचार के माध्यम से रोजगार देने वाला ष्जॉब क्रिएटरष् बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी योजनाओं ने युवाओं को नए अवसर प्रदान किए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा प्रोत्साहन योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विकास योजना, कौशल विकास योजना, एक जनपद-दो उत्पाद योजना, हाउस ऑफ हिमालय ब्रांड, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, सौर स्वरोजगार योजना, नई पर्यटन नीति और नई फिल्म नीति जैसी योजनाओं के माध्यम से रोजगार एवं स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 44 प्रतिशत रिवर्स पलायन दर्ज हुआ है और बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी आई है। साथ ही नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों के इंडेक्स में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए राज्य में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पिछले साढ़े चार वर्षों में 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा गया तथा बिना भेदभाव के साथ 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी गई हैं, जो पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक हैं।

युवा संवाद कार्यक्रम के आयोजक/युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विक्रम भुल्लर ने मुख्यमंत्री को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।

युवा शक्ति संवाद कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, कुलपति प्रतिभा लूथरा, जिलाध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, राज्य मंत्री डॉ जयपाल सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधि एवं भारी संख्या में युवा शक्ति मौजूद रहे।

कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 30 जुलाई से प्रारंभ होने वाली कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक विभाग यह सुनिश्चित करे कि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे तथा सभी व्यवस्थाएं पूरी संवेदनशीलता, समन्वय और सेवा-भाव के साथ संचालित हों। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के स्वागत-सत्कार तथा विभिन्न स्थानों पर भंडारों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग से पर्याप्त संख्या में साफ-सुथरे पिंक टॉयलेट्स स्थापित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था राज्य के सभी प्रमुख स्थलों पर की जाए।

मेला नियंत्रण भवन सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कांवड़ मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आस्था, प्रशासनिक क्षमता, सेवा-भाव और कार्यकुशलता का भी प्रतीक है। हमारा लक्ष्य ‘सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़’ होना चाहिए। प्रत्येक श्रद्धालु देवभूमि उत्तराखण्ड से सुरक्षित, संतुष्ट और सुखद अनुभव के साथ लौटे, यही राज्य सरकार का ‘विकल्प रहित संकल्प’ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न प्रकार की वैश्विक चुनौतियों के बावजूद तमाम क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उत्तराखण्ड में भी प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार तीर्थाटन और पर्यटन गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि 55 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश की यात्रा कर चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार तीन गुना अधिक तीर्थयात्री उत्तराखण्ड पहुंचेंगे। इस वर्ष कांवड़ यात्रा में भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए सभी व्यवस्थाएं उसी अनुरूप की जाएं, जिसमें धार्मिक परंपराओं एवं गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारियों, धर्माचार्यों एवं संत समाज के सहयोग से कांवड़ मेले का सफल संचालन और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि धर्माचार्यों एवं संतों के संदेशों पर आधारित वीडियो संदेश तैयार कर कांवड़ यात्रियों तक पहुंचाए जाएं, ताकि यात्रा अनुशासित एवं मर्यादित ढंग से संपन्न हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाए। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने अथवा भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों पर भी कड़ी निगरानी रखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रैफिक प्लान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। कांवड़ यात्रियों एवं स्थानीय नागरिकों के लिए आवश्यकतानुसार पृथक यातायात व्यवस्था बनाई जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में वीआईपी मूवमेंट के कारण श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रमुख पड़ावों एवं मेला क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहे। प्रमुख घाटों पर वाटर एंबुलेंस तैनात किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस तथा अग्निशमन सेवाओं को पूरी तरह अलर्ट रखा जाए। भारी वर्षा, जलभराव अथवा अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए पूर्व तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे कांवड़ मार्ग एवं मेला क्षेत्र में पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थलों, प्रकाश व्यवस्था तथा स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नियमित सफाई अभियान चलाया जाए तथा नो-प्लास्टिक अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा समाप्त होने के बाद भी तत्काल सफाई कर क्षेत्र को पूर्व स्थिति में लाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि होटलों, ढाबों एवं प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस एवं पंजीकरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें। चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाइन पूरी तरह सक्रिय रहें। जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रतिदिन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने हर की पैड़ी, कांगड़ा पुल एवं अन्य प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल पुलिस की पर्याप्त तैनाती, भीड़ नियंत्रण व्यवस्था एवं आपातकालीन निकासी योजना को पूरी तरह तैयार रखने को कहा। उन्होंने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखने तथा अत्यधिक ऊंची कांवड़ एवं निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि वाले डीजे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल एवं हेल्प डेस्क को सक्रिय रखने पर भी विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान आगामी महाकुंभ-2027 की तैयारियों में व्यवधान नहीं आना चाहिए। दोनों व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाते हुए विकास कार्यों एवं तैयारियों को निर्धारित समय पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि उत्तराखण्ड एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट व्यवस्थाओं का उदाहरण प्रस्तुत कर सके।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी विनय रोहिला, सुनील सैनी, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जगदग्नि, श्यामवीर सैनी, देश राज कर्णवाल, दिनेश कौशिक, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, विधायक आदेश चौहान, अध्यक्ष जिला पंचायत किरण चौधरी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, भाजपा के जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, व्यापार मंडल हरिद्वार के महामंत्री प्रदीप कालड़ा सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों ने भी कांवड़ यात्रा को लेकर अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप एवं पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने कांवड़ मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल, पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया एवं एसएसपी सर्वेश पंवार, टिहरी की जिलाधिकारी नीतिका खंडेलवाल ने भी अपने-अपने जिलों में कांवड़ मेला को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, एल. फैनई व आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, सचिव नितेश कुमार झा, पंकज पाण्डे, विनय शंकर पांडे, विनोद कुमार सुमन, धीराज सिंह गर्ब्याल, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक अभिसूचना अभिनव कुमार, आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक कुंभ मेला योगेंद्र सिंह रावत, मेलाधिकारी कुंभ सोनिका, एसएसपी कुंभ आयुष अग्रवाल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।