कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 30 जुलाई से प्रारंभ होने वाली कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक विभाग यह सुनिश्चित करे कि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे तथा सभी व्यवस्थाएं पूरी संवेदनशीलता, समन्वय और सेवा-भाव के साथ संचालित हों। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के स्वागत-सत्कार तथा विभिन्न स्थानों पर भंडारों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग से पर्याप्त संख्या में साफ-सुथरे पिंक टॉयलेट्स स्थापित किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था राज्य के सभी प्रमुख स्थलों पर की जाए।

मेला नियंत्रण भवन सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कांवड़ मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आस्था, प्रशासनिक क्षमता, सेवा-भाव और कार्यकुशलता का भी प्रतीक है। हमारा लक्ष्य ‘सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़’ होना चाहिए। प्रत्येक श्रद्धालु देवभूमि उत्तराखण्ड से सुरक्षित, संतुष्ट और सुखद अनुभव के साथ लौटे, यही राज्य सरकार का ‘विकल्प रहित संकल्प’ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न प्रकार की वैश्विक चुनौतियों के बावजूद तमाम क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उत्तराखण्ड में भी प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार तीर्थाटन और पर्यटन गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि 55 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश की यात्रा कर चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार तीन गुना अधिक तीर्थयात्री उत्तराखण्ड पहुंचेंगे। इस वर्ष कांवड़ यात्रा में भी रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिए सभी व्यवस्थाएं उसी अनुरूप की जाएं, जिसमें धार्मिक परंपराओं एवं गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारियों, धर्माचार्यों एवं संत समाज के सहयोग से कांवड़ मेले का सफल संचालन और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि धर्माचार्यों एवं संतों के संदेशों पर आधारित वीडियो संदेश तैयार कर कांवड़ यात्रियों तक पहुंचाए जाएं, ताकि यात्रा अनुशासित एवं मर्यादित ढंग से संपन्न हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाए। पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन एवं एआई आधारित निगरानी प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के विरुद्ध तत्काल एवं कठोर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने अथवा भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों पर भी कड़ी निगरानी रखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रैफिक प्लान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। कांवड़ यात्रियों एवं स्थानीय नागरिकों के लिए आवश्यकतानुसार पृथक यातायात व्यवस्था बनाई जाए, ताकि आमजन को अनावश्यक परेशानी न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में वीआईपी मूवमेंट के कारण श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रमुख पड़ावों एवं मेला क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहे। प्रमुख घाटों पर वाटर एंबुलेंस तैनात किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस तथा अग्निशमन सेवाओं को पूरी तरह अलर्ट रखा जाए। भारी वर्षा, जलभराव अथवा अन्य आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए पूर्व तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे कांवड़ मार्ग एवं मेला क्षेत्र में पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थलों, प्रकाश व्यवस्था तथा स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नियमित सफाई अभियान चलाया जाए तथा नो-प्लास्टिक अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा समाप्त होने के बाद भी तत्काल सफाई कर क्षेत्र को पूर्व स्थिति में लाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि होटलों, ढाबों एवं प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस एवं पंजीकरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली घटना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें। चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाइन पूरी तरह सक्रिय रहें। जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रतिदिन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने हर की पैड़ी, कांगड़ा पुल एवं अन्य प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल पुलिस की पर्याप्त तैनाती, भीड़ नियंत्रण व्यवस्था एवं आपातकालीन निकासी योजना को पूरी तरह तैयार रखने को कहा। उन्होंने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखने तथा अत्यधिक ऊंची कांवड़ एवं निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि वाले डीजे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल एवं हेल्प डेस्क को सक्रिय रखने पर भी विशेष जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान आगामी महाकुंभ-2027 की तैयारियों में व्यवधान नहीं आना चाहिए। दोनों व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाते हुए विकास कार्यों एवं तैयारियों को निर्धारित समय पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि उत्तराखण्ड एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट व्यवस्थाओं का उदाहरण प्रस्तुत कर सके।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी विनय रोहिला, सुनील सैनी, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जगदग्नि, श्यामवीर सैनी, देश राज कर्णवाल, दिनेश कौशिक, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, विधायक आदेश चौहान, अध्यक्ष जिला पंचायत किरण चौधरी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, भाजपा के जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, व्यापार मंडल हरिद्वार के महामंत्री प्रदीप कालड़ा सहित अन्य जन-प्रतिनिधियों ने भी कांवड़ यात्रा को लेकर अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप एवं पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने कांवड़ मेले की तैयारियों एवं व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल, पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया एवं एसएसपी सर्वेश पंवार, टिहरी की जिलाधिकारी नीतिका खंडेलवाल ने भी अपने-अपने जिलों में कांवड़ मेला को लेकर की गई तैयारियों की जानकारी दी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, एल. फैनई व आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, सचिव नितेश कुमार झा, पंकज पाण्डे, विनय शंकर पांडे, विनोद कुमार सुमन, धीराज सिंह गर्ब्याल, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक अभिसूचना अभिनव कुमार, आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक कुंभ मेला योगेंद्र सिंह रावत, मेलाधिकारी कुंभ सोनिका, एसएसपी कुंभ आयुष अग्रवाल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

सीएम ने हरिद्वार गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 235 करोड़ रुपये की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का किया भूमि पूजन एवं शिलान्यास

हरिद्वार को आधुनिक, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 235 करोड़ रुपये की चार प्रमुख आधारभूत अवसंरचना परियोजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। उत्तराखण्ड निवेश एवं आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) द्वारा संचालित इन परियोजनाओं से आगामी महाकुंभ-2027 की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ वर्षभर आने वाले श्रद्धालुओं एवं कांवड़ यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी बेहतर आधारभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा तथा पर्यटन, व्यापार, परिवहन, होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प एवं अन्य सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अलकनंदा होटल हरिद्वार में आयोजित समारोह में 43.25 करोड़ रुपये की लागत से प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही 66.76 करोड़ रुपये की लागत से हर की पैड़ी एवं सुभाष घाट के पुनरुद्धार, 66.34 करोड़ रुपये की लागत से हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास तथा 58.84 करोड़ रुपये की लागत से रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ गंगा की असीम कृपा और संत समाज के आशीर्वाद से प्रारंभ हुई ये परियोजनाएं हरिद्वार को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में विकसित करने के व्यापक विजन का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केवल शिलान्यास करने में नहीं, बल्कि समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी ढंग से परियोजनाओं को पूर्ण कर जनता को समर्पित करने की कार्यसंस्कृति पर विश्वास करती है। सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने तथा गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जागरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के साथ-साथ केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, शारदा कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर तथा विवेकानंद कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर भी कार्य कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना भी है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र, भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान तथा सनातन सभ्यता का आध्यात्मिक द्वार है। आगामी महाकुंभ-2027 भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व होगा। राज्य सरकार इसे इतिहास का सबसे दिव्य, भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित महाकुंभ बनाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। आज जिन चार परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है, वे भी इसी व्यापक तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि महाकुंभ को दृष्टिगत रखते हुए हरिद्वार में नए घाटों एवं पुलों का निर्माण, प्रमुख संपर्क मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण तथा यातायात व्यवस्था के आधुनिकीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। बहादराबाद-सिडकुल से शिवालिक नगर तक सड़क चौड़ीकरण, ज्वालापुर एवं शिवालिक नगर के बीच रोह नदी पर नए पुल का निर्माण तथा पतंजलि योगपीठ से फेरूपुर तक संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य महाकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक बनाना है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार को आस्था के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, आधुनिक आधारभूत सुविधाओं और रोजगार के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी नगरों में विकसित किया जा रहा है। हरिद्वार मेडिकल कॉलेज निर्माण अंतिम चरण में है। लालढांग में मॉडल डिग्री कॉलेज तथा श्यामपुर में स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना से स्थानीय लोगों को बेहतर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेलीपोर्ट, पॉड टैक्सी परियोजना तथा हर की पैड़ी से माँ चंडी देवी और माँ मनसा देवी तक रोपवे परियोजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त लालढांग क्षेत्र में पुल एवं झूला पुल निर्माण, शंकराचार्य फ्लाईओवर के नीचे गेम जोन तथा मोतीचूर फ्लाईओवर के नीचे पार्किंग, पार्क एवं कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कांवड़ यात्रा के दौरान केवल अस्थायी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन राज्य सरकार ने इस सोच को बदलते हुए कांवड़ पटरी मार्ग के स्थायी एवं आधुनिक विकास का कार्य प्रारंभ किया है, ताकि प्रत्येक वर्ष आने वाले करोड़ों कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम एवं बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता और देवभूमि की मूल पहचान के संरक्षण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, नकल विरोधी कानून तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि से 12 हजार एकड़ से अधिक अतिक्रमण हटाया गया है तथा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग से उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प अवश्य पूरा होगा। उन्होंने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रशासनिक मार्ग का नाम परिवर्तन संबंधी सुझाव पर संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लेने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार में विश्वस्तरीय आधारभूत अवसंरचना के विकास से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पूरे राज्य की पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ होगा।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा एवं राम सिंह कैड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक एवं प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी महाकुंभ से पूर्व सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

समारोह में दायित्वधारी विश्वास डाबर, ओम प्रकाश जमदग्नि, विनय रोहिल्ला, सुनील सैनी, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल, दिनेश कौशिक, नितिन गौतम, अजीत चौधरी, शोभाराम प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, सचिव विनय शंकर पांडेय, मेलाधिकारी सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, आईजी कुंभ डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, नगर आयुक्त नंदन कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हरिद्वार गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत चार प्रमुख परियोजनाओं का विवरण

1. हर की पैड़ी-सुभाष घाट पुनर्विकास परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत हर की पैड़ी कॉरिडोर के सुभाष घाट क्षेत्र का समग्र विकास किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। बढ़ती संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए धनुष घाट क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा, जिससे पवित्र स्नान एवं अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो सके।

परियोजना के अंतर्गत धनुष पुल, आस्था पथ एवं बोर्डवॉक पुल का निर्माण किया जाएगा। साथ ही भीड़ प्रबंधन एवं आपातकालीन निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। गंगा घाट के पैदल मार्ग का पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम एवं सुविधाजनक हो सके।

2. हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना विकास परियोजना

इस परियोजना का उद्देश्य हर की पैड़ी के उत्तर क्षेत्र में आधुनिक एवं सुव्यवस्थित आधारभूत सुविधाओं का विकास करना है। आगामी महाकुंभ एवं कांवड़ यात्रा सहित वर्षभर आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग, भीड़ प्रबंधन एवं सार्वजनिक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों का विकास, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार तथा क्षेत्र की आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा, जिससे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान आवागमन एवं व्यवस्थाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित हो सके।

3. रोड़ी बेलवाला क्षेत्र पुनर्विकास परियोजना

रोड़ी बेलवाला क्षेत्र के समग्र पुनर्विकास के माध्यम से श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ एवं आधुनिक वातावरण विकसित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के अनुरूप आधुनिक आधारभूत संरचना तैयार करना है।

इसके अंतर्गत जल निकासी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, विभिन्न सिविल कार्य, निगरानी प्रणाली (सर्विलांस), पैदल सुविधाओं का विकास तथा अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

4. प्रशासनिक मार्ग कॉरिडोर विकास परियोजना

इस परियोजना के माध्यम से प्रशासनिक मार्ग का चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण एवं आधुनिक स्वरूप में विकास किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य हरिद्वार के प्रमुख मार्ग पर सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

मार्ग के उन्नयन से यातायात संचालन में सुधार होगा, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की आवाजाही अधिक सुविधाजनक बनेगी तथा महाकुंभ, कांवड़ यात्रा एवं अन्य बड़े आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

सभी कांवड़ यात्रियों को अपने साथ वैध पहचान पत्र रखने के लिए प्रेरित किया जाएः बर्द्धन

आगामी 30 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक आयोजित होने वाले कांवड़ मेला-2026 के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हरिद्वार स्थित मेला नियंत्रण भवन के सभागार में अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, पेयजल, संचार व्यवस्था, आपदा प्रबंधन तथा संबंधित राज्यों के मध्य समन्वय को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। सभी राज्यों ने साझा कार्ययोजना के तहत समन्वित एवं एकजुट होकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक में निर्णय लिया गया कि कांवड़ मेले के प्रभावी प्रबंधन के लिए संबंधित राज्यों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही सर्विलांस की साझा व्यवस्था विकसित करते हुए उत्तराखंड की सीमाओं पर पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ संयुक्त चेकपोस्ट एवं बैरियर स्थापित किए जाएंगे।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि कांवड़ यात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर प्रस्थान करते हैं। ऐसे में यात्रा का सफल संचालन सभी संबंधित राज्यों एवं एजेंसियों के प्रभावी समन्वय पर निर्भर करता है। उन्होंने कांवड़ यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगमता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी राज्यों से समय रहते सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने तथा पूरी यात्रा अवधि के दौरान निरंतर सतर्क एवं सजग रहते हुए कार्य करने का आग्रह किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि रियल-टाइम समन्वय, त्वरित सूचना आदान-प्रदान, आधुनिक सर्विलांस प्रणाली, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था तथा वैज्ञानिक भीड़ प्रबंधन कांवड़ यात्रा की सफलता की आधारशिला होंगे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कांवड़ यात्रा का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यात्रा मार्ग से जुड़े किसी भी राज्य अथवा जिले में होने वाली किसी भी घटना का व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी राज्यों को अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा, यातायात एवं आपदा प्रबंधन की व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करनी होंगी।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रियों के प्रवेश के प्रारंभिक बिंदुओं पर ही यात्रा से संबंधित दिशा-निर्देशों, प्रतिबंधों एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी कांवड़ यात्रियों को अपने साथ वैध पहचान पत्र रखने के लिए प्रेरित किया जाए तथा किसी भी प्रकार के घातक हथियार अथवा प्रतिबंधित सामग्री के साथ यात्रा में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध का कड़ाई से पालन कराया जाए।

उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को अनुशासित एवं सुरक्षित यात्रा के लिए प्रेरित करने हेतु प्रमुख संतों एवं धार्मिक गुरुओं के संदेशों का विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

मुख्य सचिव ने यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सेवाओं तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें। उपयुक्त जगहों पर साइनेज की स्थापना कर मार्गों की जानकारी, पार्किंग व्यवस्था तथा डायवर्जन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेस-वे) का उपयोग कांवड़ यात्रा के लिए नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को आवश्यक प्रबंधन समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया की सतत निगरानी पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना अथवा आपत्तिजनक सामग्री का तत्काल तथ्यात्मक खंडन किया जाए। इसके लिए सभी राज्यों के सोशल मीडिया सेल एवं साइबर इकाइयों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए, जिससे किसी भी अफवाह को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सके।

रेलवे अधिकारियों को निर्देशित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान विशेष ट्रेनों के संचालन, स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन एवं सुरक्षा के समुचित प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने हरिद्वार एवं आसपास के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर पर्याप्त होल्डिंग एरिया विकसित करने तथा यात्रियों की सुविधाओं के अनुरूप व्यवस्थाएं करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) अभिनव कुमार तथा सचिव गृह शैलेश बगौली ने कांवड़ मेला-2026 की तैयारियों की जानकारी देते हुए सभी संबंधित राज्यों एवं एजेंसियों से बेहतर समन्वय स्थापित कर मेले के सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सफल आयोजन में सहयोग करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि कांवड़ मेला 30 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई से 4 अगस्त तक पंचक अवधि रहेगी तथा 5 अगस्त से श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होने लगेगी। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त से प्रारंभ होने वाला डाक कांवड़ चरण मेले का सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण एवं अत्यधिक भीड़ वाला चरण होगा। जिलाधिकारी ने स्थानीय स्तर पर की जा रही व्यवस्थाओं, सुरक्षा उपायों, यातायात प्रबंधन, प्रतिबंधों तथा मेले के लिए तैयार की गई विस्तृत कार्ययोजना की जानकारी भी दी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, यातायात एवं पार्किंग प्रबंधन, संयुक्त निगरानी प्रणाली तथा एकीकृत नियंत्रण एवं कमांड व्यवस्था के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

बैठक में सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा, सचिव लोक निर्माण विभाग विनीत कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. वी. मुरूगेशन, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका, आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक कुंभ मेला डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन एसपी निशा यादव ने किया।

बैठक में उत्तराखंड सहित उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश के प्रशासन एवं पुलिस विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी, सीआरपीएफ, आरपीएफ, एनडीआरएफ, भारतीय रेलवे तथा विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

बैठक से पूर्व मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड में मां गंगा की पूजा-अर्चना कर कांवड़ मेला-2026 के सफल, सुरक्षित एवं निर्विघ्न आयोजन की कामना की।

रूड़की में एचआरडीए द्वारा नवनिर्मित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का मुख्यमंत्री धामी ने किया लोकार्पण

       मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुड़की में एचआरडीए द्वारा 3 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर का निरीक्षण कर उपलब्ध कराई गई खेल सुविधाओं का अवलोकन किया तथा खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों से संवाद भी किया।

      मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार खेलों के समग्र विकास और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक खेल अवसंरचना युवाओं की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास का अवसर मिल सके।

        उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई पहचान मिली है। उत्तराखंड सरकार भी खेल नीति के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने, प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था करने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है।

     मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के निर्माण से हरिद्वार एवं रुड़की सहित आसपास के क्षेत्रों के खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इससे युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

           नवनिर्मित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में इनडोर खेलों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां खिलाड़ियों के लिए सुसज्जित जिम, बैडमिंटन कोर्ट तथा अन्य आवश्यक खेल संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह कॉम्पलेक्स खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण एवं विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा।

           कार्यक्रम में परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, जिलाध्यक्ष भाजपा मधु सिंह, मेयर नगर निगम रुड़की अनीता अग्रवाल, श्यामवीर सैनी, आदेश सैनी, शोभाराम प्रजापति, मेलाधिकारी कुंभ सोनिका, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ एसपी देहात शेखर सुयाल, एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह, नगर आयुक्त रुड़की गोपाल राम बिनवाल, सीओ मंगलौर अभिनव चौधरी सहित जनप्रतिनिधियों, खेल विभाग के अधिकारियों प्रशिक्षकों, खिलाड़ियों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित दधीचि अंगदान संकल्प अभियान में केंद्रीय मंत्री, सीएम संग सैकड़ों लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज हरिद्वार में दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा की उपस्थिति में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर देशभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं साधकों ने अंगदान के महत्व पर विचार रखे तथा अनेक लोगों ने मानव सेवा के लिए अंगदान का संकल्प लिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान मानव सेवा का सर्वाेच्च कार्य है, जिसके माध्यम से गंभीर रूप से जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से समझने की आवश्यकता है। भारत सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचे को विकसित किया गया है और राज्यों में भी अंगदान से जुड़े संगठनों को सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से देश में अंगदान की संख्या में वृद्धि हुई है और जनभागीदारी से इसे एक व्यापक जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति त्याग, समर्पण, सेवा और परमार्थ की महान परंपरा पर आधारित रही है। महर्षि दधीचि के त्याग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों तक का दान कर दिया था। इसी प्रकार राजा शिवि द्वारा एक पक्षी की रक्षा के लिए अपने शरीर का अंश अर्पित करने की कथा भारतीय संस्कृति में करुणा और परोपकार की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य कोई नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा ढांचे के विकास और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकारी एवं निजी अस्पतालों, प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग तथा संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। दून मेडिकल कॉलेज में राज्य के प्रथम सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र के निर्माण सहित अंग प्रत्यारोपण केंद्रों, अंग बैंक और जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों के नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है, ताकि जरूरतमंदों को समय पर अंग उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार द्वारा एक शताब्दी से आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने आध्यात्मिक चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सरल रूप में जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। उनका संदेश “हम बदलेंगे तो युग बदलेगा” समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का मेरुदण्ड है। यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, सहयोग, कर्तव्यबोध और लोकमंगल की भावना को जागृत करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए अपने समय, श्रम और संसाधनों का समर्पण ही यज्ञ की वास्तविक भावना है।

इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद, डॉ. अनिल कुमार, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला, डॉ. विजय धस्माना सहित अनेक विशेषज्ञों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक एवं कानूनी पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिभागियों को अंगदान का संकल्प दिलाया।

इस अवसर पर राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रो. मीनू सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, पत्रकार, गणमान्य नागरिक एवं देशभर से आए साधक उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 70वीं बैठक में कुंभ मेला हरिद्वार के लिए मिली 115.61 करोड़ की धनराशि

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति की 70वीं बैठक में हरिद्वार कुंभ मेला-2027 के लिए प्रस्तावित “एकीकृत स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट तथा जनस्वास्थ्य प्रबंधन योजना” के लिए 115.61 करोड की धनराशि स्वीकृत की गई है।

₹ 115.61 करोड की लागत वाली यह परियोजना पूर्णतः केंद्रीय क्षेत्र के अंतर्गत प्रस्तावित है। परियोजना का उद्देश्य कुंभ मेले के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

इस धनराशि से कुम्भ मेले के लिए 13,915 शौचालय, 8,065 यूरिनल तथा 2,000 स्नानगृह स्थापित किए जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 4,840 कूड़ादान, 31.38 लाख लाइनर बैग, 491 अपशिष्ट संग्रहण वाहन, 2 ट्रैश बूम, 15 घाट सफाई मशीनें, 190 स्प्रेइंग मशीन एवं ट्रैक्टर, 55 फॉगिंग मशीनें, 30 घास काटने की मशीनें, कीटनाशक, पीपीई किट, प्राथमिक उपचार किट तथा सड़क सफाई हेतु आवश्यक उपभोग्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

इस योजना में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ट्रांसफर स्टेशन सुविधाओं, गैस आधारित शवदाह गृह तथा फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही निगरानी एवं प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने हेतु क्लाउड-आधारित डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा स्वीकृत की गई धनराशि से हरिद्वार में 2027 में आयोजित होने वाले कुम्भ मेले में स्वच्छता, ठोस अपशिष्ठ तथा जन स्वास्थ्य प्रबन्धन के साथ ही निगरानी एवं प्रबन्धन को सुदृढ बनाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री का भी आभार व्यक्त किया।

श्री आनंद धर्मशाला सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना का सजीव प्रतीकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में श्री आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा निर्मित धर्मशाला के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की तथा इस अवसर पर आनंद धर्मशाला ट्रस्ट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षत्रिय एकलौता समाज ने सदैव अपने परिश्रम, साहस और संस्कारों के बल पर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि खेती, व्यापार, शिक्षा, समाज सेवा तथा देश की सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इस समाज के लोगों ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तथा अन्य सुरक्षा बलों में सेवाएं देकर समाज के वीर सपूत राष्ट्र की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बना रहे हैं। उन्होंने श्री आनंद धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा धार्मिक जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और मानव कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि श्री आनंद धर्मशाला सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना का सजीव प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति का प्रवेश द्वार है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु माँ गंगा की गोद में आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धर्मशाला का निर्माण पुण्य और सराहनीय कार्य है तथा यह आगामी कुंभ और चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार कुंभ को भव्य, दिव्य और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि घाटों के पुनरुद्धार, सड़क व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात और मूलभूत सुविधाओं के विकास हेतु तेजी से कार्य किए जा रहे हैं, ताकि हर श्रद्धालु को सुव्यवस्थित और सुरक्षित अनुभव प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ धाम पुनर्विकास, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी केदारखंड एवं मानसखंड क्षेत्रों के प्राचीन मंदिरों के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य निरंतर प्रगति पर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सनातन मूल्यों और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति के सम्मान और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निर्धारित स्थलों पर ही धार्मिक आयोजन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार पतित पावनी माँ गंगा करोड़ों श्रद्धालुओं को आस्था, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती हैं, उसी प्रकार श्री आनंद धर्मशाला भी आने वाले समय में श्रद्धालुओं, जरूरतमंदों और समाज के लिए सेवा, सहयोग और सुविधा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
इस अवसर पर हरी चेतना नन्द महाराज महामंडलेश्वर, कैलाश विजयवर्गीय मंत्री नागरिक प्रशासन मध्य प्रदेश, विनय रोहिला उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन, विशाल पटेल पूर्व विधायक देपालपुर इन्दौर, संतोष पटेल, उपाध्यक्ष आनंद ट्रस्ट धर्मशाला, आशाराम सिसोदिया अध्यक्ष महाकालीका ट्रस्ट इन्दौर, सीताराम पटेल अध्यक्ष देवास छात्रावास, जिलाध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर, पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोभाल, उप जिलाधिकारी हरिद्वार जितेन्द्र कुमार, योगेश मेहरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए ट्रस्टी एवं श्रद्धालू मौजूद रहे।

उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्रः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि रही है। ऋषिकुल, हरिद्वार में इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का कार्य जल्द शुरू किया जाए। कुंभ शुरू होने से पहले यह कार्य पूर्ण किया जाए। पर्यटन विभाग इसमें नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देश दिये कि इस संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें की जाएं। इसमें विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियां भी इसमें शामिल की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाए। बैठक में संस्थान में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है। यह संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने कहा कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र, ई-लर्निंग सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक के दौरान संस्थान में भारतीय विद्या शाखाओं के गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के साथ ही पर्यटन, आयुर्वेद ज्योतिष और योग शिक्षा के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को संस्थान में वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जायेगा। जिसमें शैक्षणिक क्षेत्र के श्रुति केन्द्र में वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा, दर्शन केन्द्र में भारतीय दर्शन और चेतना के गहन विचार, आयु केन्द्र में आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के माध्यम से जीवन का संतुलन, विज्ञान केन्द्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक विज्ञान की विरासत और कला केन्द्र में भारतीय कला, संस्कृति एवं सौन्दर्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया जायेगा।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार, डॉ. आर. राजेश कुमार, रंजना राजगुरू, उपाध्यक्ष हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण सोनिका, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित मौजूद थे।

मुख्यमंत्री धामी ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को बताया भारत की पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हरिद्वार में ऋषिकुल मैदान में आयोजित “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” के सद्भावना सम्मेलन, बैसाखी महोत्सव 2026 में प्रतिभाग करते हुए कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सदैव से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत पर आधारित रही है, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में सम्मेलन में उपस्थित देशभर से आए संतों, अतिथियों, माताओं, बहनों, युवाओं एवं सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए वैशाखी पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना से परिपूर्ण इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

उन्होंने कहा कि सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” द्वारा समाज में समरसता, सेवा और नैतिक जागरण के लिए किए जा रहे कार्य अत्यंत प्रेरणादायी हैं। वर्तमान समय में जब विश्व विभिन्न संघर्षों और तनावों से गुजर रहा है, ऐसे में प्रेम, सद्भाव और मानवता का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव वैश्विक स्तर पर मानवता की सेवा को प्राथमिकता दी है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश द्वारा ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’ की भावना को आगे बढ़ाने का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल में अनेक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराना, योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाना तथा विभिन्न आपदाओं के समय सहायता प्रदान करना भारत की मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द किसी भी राष्ट्र की प्रगति के मूल आधार होते हैं। इसी दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने को सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर एवं शारदा कॉरिडोर के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही, दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सद्भावना सम्मेलन समाज में एकता, सद्भाव और सेवा की भावना को और अधिक सशक्त करेगा तथा इसके सकारात्मक परिणाम दूरगामी होंगे। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए सतपाल महाराज एवं “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” को शुभकामनाएं भी दीं।

हरिद्वार में तेजी से बन रहा पीएम यूनिटी मॉल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में हरिद्वार में प्रस्तावित पीएम यूनिटी मॉल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज देहरादून स्थित राज्य सचिवालय में सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में पीएम यूनिटी मॉल के निर्माण कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, जिसके चलते अब तक करीब 46 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। यह मॉल न सिर्फ व्यापार, बल्कि पर्यटन और स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) के अनुसार 160.57 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस यूनिटी मॉल का निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए तेजी से किया जा रहा है। फरवरी 2023 में घोषित इस परियोजना को सरकार की प्राथमिकता में रखा गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर सचिव आवास विनोद गिरी, सचिव हरिद्वार-विकास प्राधिकरण मनीष सिंह सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

*‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ को मिलेगा मंच*
पीएम यूनिटी मॉल को ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) की अवधारणा पर विकसित किया जा रहा है। इसके तहत देशभर के राज्यों और उत्तराखंड के जिलों के पारंपरिक और विशिष्ट उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और छोटे उत्पादकों को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है।

*56 दुकानें और मल्टीप्लेक्स की सुविधा*
प्रस्तावित मॉल में 56 दुकानों की व्यवस्था की जा रही है, जहां विभिन्न राज्यों के उत्पाद प्रदर्शित और बेचे जाएंगे। इसके साथ ही तीन मल्टीप्लेक्स भी बनाए जाएंगे, जिससे यह मॉल व्यापार के साथ-साथ मनोरंजन और पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।

*पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा*
अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से हरिद्वार में पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी यह मॉल अहम भूमिका निभाएगा।

*दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य*
परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। समय पर निर्माण पूरा होने पर यह यूनिटी मॉल देश की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।

*आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार का बयान*
आवास सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश हैं कि पीएम यूनिटी मॉल परियोजना को गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने बताया कि यह मॉल ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ जैसी पहल को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना की नियमित समीक्षा की जा रही है और निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है, ताकि दिसंबर 2026 तक इसे पूरा कर प्रदेश को एक बड़ा व्यापारिक और पर्यटन केंद्र दिया जा सके।