कोविड के बचाव को राज्य में पर्याप्त मात्रा में डेडीकेटेड अस्पतालः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन द्वारा कोविड-19 के सम्बन्ध में वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से ली गयी बैठक में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को बताया कि त्योहार के सीजन को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए प्रचार व प्रसार पर विशेष ध्यान दिये जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोविड के बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में डेडीकेटेड अस्पताल हैं। इसके साथ ही अस्पताल में वेंटीलेटर, आईसीयू बेड एवं ऑक्सीजन सप्लाई भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सैंपल टेस्टिंग की 10 लैब कार्यरत है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने बताया कि बिना मास्क के लिए एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने के लिए लगातार चालान भी काटे जा रहे हैं। इसके साथ ही, जिनका मास्क न पहनने पर चालान काटा जा रहा है, उन्हें मास्क भी उपलब्ध कराये जा रहे ताकि लोग मास्क के प्रति जागरूक हो सकें। इस संबंध में जन जागरूकता के लिये भी प्रयास किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारी सीजन के चलते राज्य में काफी लोग दिल्ली व अन्य प्रदेशों से वापस आ रहे हैं, इससे कोविड के संक्रमण का खतरा भी बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि लोग जागरूक हो सकें इसके लिए ग्राम स्तर तक कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग एवं जागरूकता पर कार्य किया जा रहा है। सर्दी बढ़ने एवं त्योहारी सीजन के कारण कोविड-19 के संक्रमण के खतरे को देखते ही प्रदेश सरकार द्वारा संक्रमण की रोकथाम के लिये लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड ने कोविड-19 के संक्रमण पर काफी हद तक कंट्रोल किया है। परन्तु सर्दी बढ़ने एवं त्योहारी सीजन को देखते हुए अभी लापरवाही की गुंजाईश नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग एवं टेस्टिंग के साथ ही जागरूकता बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर सचिव श्री अमित नेगी एवं डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय भी उपस्थित थे।

एम्स प्रशासन ने अस्थमा रोगियों को किया अलर्ट, दिए आवश्यक सुझाव

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश ने शीतकाल के मद्देनजर अस्थमा रोगियों को विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया है। संस्थान के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि ठंड और कोहरे की यह समस्या सबसे अधिक अस्थमा रोगियों के लिए नुकसानदेय है। ऐसे में अस्थमा रोगियों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि नियमततौर पर मास्क लगाने से कोरोना से तो बचाव होगा ही, साथ ही मास्क का उपयोग अस्थमा रोगियों के लिए ठंडी हवा से रोकथाम में भी बेहतर विकल्प साबित होगा। बताया कि ठंड और कोहरे के कारण वायुमंडल में जल की बूंदें संघनित होकर हवा के साथ मिल जाती हैं। यह हवा जब सांस के माध्यम से शरीर के भीतर प्रवेश करती है, तो सांस की नलियों में ठंडी हवा जाने से उनमें सूजन आने लगती है। ऐसे में अस्थमा के रोगी गंभीर स्थिति में आ जाते हैं। उन्होंने मास्क के इस्तेमाल को इस समस्या से बचने का सबसे बेहतर उपाय बताया।

पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डा. गिरीश सिंधवानी ने बताया कि अस्थमा किसी भी व्यक्ति को और किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन समय पर इसके लक्षणों की पहचान होने से इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह रोग संक्रमण से नहीं फैलता है यह एलर्जी से होने वाली बीमारी है। जुकाम और बार-बार आने वाली छींकों से उत्पन्न यह एलर्जी जब नाक व गले से होते हुए छाती में फेफड़ों तक पहुंचती है तो अस्थमा का रूप ले लेती है। डा. सिंधवानी के अनुसार अस्थमा रोगियों को रात के समय अधिक दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि इस मर्ज का समय पर उपचार नहीं कराने से मरीज की सांस फूलने लगती है और दम घुटने के कारण उसे अस्थमा अटैक पड़ जाता है।
डा. सिंधवानी ने सुझाव दिया कि अस्थमा के रोगी नियमिततौर से दवा लेना नहीं भूलें। उन्होंने आगाह किया कि बीच-बीच में दवा छोड़ने से यह बीमारी घातकरूप ले लेती है। बताया कि लोगों में भ्रांति है कि इनहेलर का उपयोग केवल संकट के समय ही किया जाता है। जबकि यह तर्क पूरी तरह से गलत है। विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया कि इनहेलर का उपयोग अस्थमा के रोगी को नियमिततौर से करना चाहिए। इस बीमारी में इनहेलर सबसे उत्तम उपाय है। इससे बचना, नुकसानदेह होता है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश एम्स में इस बीमारी की सभी तरह के परीक्षण व उपचार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं।

यह हैं अस्थमा के प्रमुख लक्षण-
खांसी, जुकाम, छींकें आना, सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना आदि।

यह है अस्थमा रोग को बढ़ाने वाले कारक-
ठंड, कोहरा, धुंध, धुवां, धूल, प्रदूषण, संक्रमण, पेंट की गंध, परागकण। इसके अलावा बंद घरों के भीतर रहने वाले पालतू कुत्ते और बिल्लियों के बालों से भी अस्थमा मरीजों की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

इस तरह अस्थमा से बचाव का उपाय-
फ्रिज का पानी, ठंडी और बासी चीजों का सेवन कदापि नहीं करें। सर्दी से बचाव के सभी जरुरी उपाय जैसे गर्म कपड़े पहनना, धूप आने से पहले बाहर नहीं निकलना, कमरों के भीतर बैठने के बजाय धूप में बैठना आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। धूप में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है और यह जनरल बूस्टर का कार्य करते हुए शरीर की इम्यूनिटी क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा ग्रसित मरीज दवा का सेवन नियमित तौर पर करें।

एम्स में रोबोटिक सजरी अब किडनी, मूत्राशय और किडनी के कैंसर में भी संभव

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की ओर से मूत्राशय, प्रजनन अंगों और किडनी के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। संस्थान के यूरोलाॅजी विभाग में इस बीमारी के निदान के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा के साथ ही उच्चस्तरीय तकनीक आधारित उपचार उपलब्ध है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार इस तकनीक से की जाने वाली सर्जरी के दौरान जहां जोखिम का खतरा निहायत कम हो जाता है, साथ ही रोगी को अस्पताल से जल्दी छुट्टी दे दी जाती है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि ऋषिकेश एम्स राज्य का एकमात्र ऐसा स्वास्थ्य संस्थान है, जिसमें किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

संस्थान के यूरोलाॅजी विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि मूत्र संबंधी विकृतियों में सबसे आम समस्या प्रोस्टेट कार्सिनोमा से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट ग्रन्थि पुरुषों में पाई जाती है। इस छोटी सी ग्रंथि का वजन लगभग 20 ग्राम होता है। यूरोलाॅजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार प्रोस्टेट ग्रन्थि शुक्राणु परिवहन करने वाले वीर्य का उत्पादन करती है। बढ़ती उम्र के साथ ही अधिकांश पुरुषों की इस ग्रन्थि में रोग पैदा होने लगते हैं। खासतौर से बुजुर्ग अवस्था में मूत्र रोग से उत्पन्न यह समस्या कैंसर का रूप ले लेती है। भारत में एक लाख की जनसंख्या में से 8 से 9 प्रतिशत लोग गुर्दे के कैंसर से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत के यह आंकड़े एशिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक हैं।

प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब करते समय परेशानी होना, पेशाब में रक्त आना, वीर्य में रक्त आना, पेल्विक क्षेत्र में असुविधा और रीढ़ की हड्डी में दर्द होना शामिल हैं। प्रोस्टेट कैंसर का पता स्क्रीनिंग, डिजिटल रेक्टल जांच और रक्त परीक्षण (यानी सीरम पीएसए) के माध्यम से लगाया जाता है।

मूत्राशय के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में रक्त आना, पेशाब करते समय दर्द होना, पेल्विक( पेड़ू ) में दर्द और बार-बार पेशाब आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में शामिल है।

किडनी के कैंसर के प्रमुख लक्षण-
पेशाब में खून आना, भूख में कमी होना, वजन में गिरावट, थकान होना, बुखार और पेट में गांठ बन जाना।

अगर आप कोरोना होने के बाद ठीक हो गए हैं, तो ये खबर आपके लिए है…

अगर आप को कोरोना हुआ था और अब आप स्वस्थ्य हो गए हैं, तो आपके लिए यह खबर काम की है। एम्स ऋषिकेश प्रशासन के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने परामर्श दिया है कि कोविड पॉजिटिव पेशेंट को स्वस्थ होने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क का नियमित तौर पर उपयोग व जरुरी दवाओं का सेवन अनिवार्य रूप से करना ही होगा।

निदेशक प्रो. रविकांत ने सुझाव दिया है कि स्वस्थ हो चुके रोगियों को किसी भी सूरत में अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। कोरोना संक्रमण को लेकर आईसीएमआर द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करना सभी का कर्तव्य है, तभी हम कोविड-19 के संक्रमण से स्वयं और अपने परिवार को बचा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी है कि मरीज नियमित व्यायाम करें व हमेशा गर्म पानी का ही सेवन करें। ऐसे मरीजों के लिए किसी भी प्रकार का नशा धूम्रपान, मद्यपान आदि घातक साबित हो सकता है। लिहाजा इससे दूरी बनाएं।

डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि मरीजों से भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूरी बनाए रखने, किसी भी स्थान पर 15 मिनट से अधिक समय तक नहीं रहें। सांस लेने में तकलीफ वाले कोविड संक्रमित मरीजों को सलाह दी गई है कि वह छाती के बल लेटने की आदत डालें, ऐसा करने से उनकी स्वसन प्रणाली में सुचारू से कार्य करने में मदद मिलेगी।

कैंसर की रोकथाम में सहायक होगा कैन एप्प

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कैंसर की रोकथाम हेतु कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन द्वारा निर्मित कैनएप्प को लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि यह एप कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए कारगर साबित हो सकता है। इसे राज्य की स्थानीय बोलियों में भी बनाया जाय।

कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. सुमिता प्रभाकर ने कहा कि इस एप में स्तन कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए चार बाधाओं को दूर करने में कारगर होगा। जागरूकता की कमी, पर्याप्त जानकारी की कमी, कैंसर की रोकथाम के लिए उपकरणों की कमी और रिकॉर्ड न होने के कारण स्तन कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। कैनएप स्तन कैंसर का जल्द पता लगाने के लिए कारगर होगा। यह एप स्तन कैंसर के लक्षणों, जोखिम कारकों, शुरूआती जांच के तरीकों के बारे में नवीनतम जानकारी प्रदान करता है। इसमें डॉक्टर की विजिट का रिमाइंडर, आगामी परीक्षण के रिमांडर की सुविधा उपलब्ध है। परीक्षण के दौरान पाये जाने वाले किसी भी असामान्य लक्षण का रिकॉर्ड एप में बनाया जा सकता है, जो पूरी तरह ग्राफिकल है। यह एप गढ़वाली, हिन्दी, अंग्रेजी और अवधी भाषा में बनाया गया है।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल, कैन प्रोटेक्ट फाउंडेशन के सचिव प्रवीण डंग, मधुकांत कौशिक, परम दत्ता, ललित आनंद एवं समीर दत्ता उपस्थित थे।

कोरोना कालः एम्स के विशेषज्ञों ने स्कूल खुलने पर बच्चों के लिए जारी किए सुझाव

दो नवंबर से उत्तराखंड के कक्षा दस से 12वीं के विद्यालय खुल रहे है। ऐसे में बच्चों के समक्ष कई तरह की दिक्कतें हो सकती है। इसके लिए एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रवि कांत ने सुझाव दिया है। बताया है कि कोविड-19 ने अभिभावकों में बच्चों के प्रति व्यापक चिंता पैदा की है। लिहाजा इस बीमारी के दुष्प्रभावों को लेकर माता-पिता द्वारा आशंकित होना और बच्चों की सुरक्षा के बारे में चिंता करना स्वाभाविक है। बच्चों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए उन्हें साबुन से बार-बार हाथ धोने के लिए प्रेरित करना जरूरी है। बच्चों में विटामिन-डी की कमी नहीं हो, इसलिए धूप में थोड़ी देर परस्पर 1 से 2 मीटर की दूरी बनाते हुए और मास्क पहनकर खेलने दें। साथ ही स्क्रीन टाइम कम करने के लिए उन्हें किताबें पढ़ने, व्यायाम करने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए उनमें रुचि पैदा करनी चाहिए।

कम्यूनिटी एंड मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मीनाक्षी खापरे ने इस बारे में बताया कि बच्चों की शारीरिक ऊर्जा को चैनलाईज करने की आवश्यकता है। इसके लिए बच्चों को विभिन्न खेलों, ड्राईंग, पेंटिंग, अभिनय, बागवानी, खाना बनाने और घर की साफ-सफाई में शामिल किया जा सकता है।

सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग की डा. रुचिका गुप्ता और डा. श्रेया अग्रवाल ने बताया कि बच्चों को स्वस्थ आहार उपलब्ध कराना, नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना, बच्चों में कौशल विकास की रुचि विकसित करना और उन्हें रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखना चाहिए। उनमें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पैदा करने के लिए हमें उन्हें टीम भावना से कार्य करना सिखाना होगा।

एम्स ऋषिकेश में ब्रेन हैमरेज का एन्यूरिज्म क्वाइलिंग द्वारा हुआ सफल इलाज

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में चिकित्सकों ने एक पेशेंट की ब्रेन हैमरेज के सफल इलाज को अंजाम दिया है। पेशेंट को बीते दिनों हेलीकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश पहुंचाया गया था। गौरतलब है कि पौड़ी गढ़वाल निवासी एक चिकित्सक जो कि बीती दो अक्टूबर को अस्पताल में अचानक चक्कर खाकर गिर गए थे, जिन्हें राज्य सरकार की ओर से एयरलिफ्ट कर उसी शाम को एम्स हेलिपैड पर उतारा गया था। सीटी स्कैन में उनको ब्रेन हैमरेज पाया गया था। और एंजियोग्राफी में नस फटने के कारण एन्युरिज्म पाया गया। चिकित्सकों के अनुसार उनके दिमाग की एक नस फट गई थी। जिसे इंडोवैस्कुलर क्वाईलिंग या एन्यूरिज्म क्वाइलिंग द्वारा ठीक किया गया।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने इस सफलता के लिए चिकित्सकों के प्रयास को सराहनीय बताया। उन्होंने बताया कि संस्थान में मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि राज्य में एयर एंबुलेंस सेवा व एम्स परिसर में हेलीपैड की सुविधा उपलब्ध होने से मरीज को तत्काल एम्स पहुंचाया जा सका, जिससे तत्काल उनका उपचार शुरू हो सका।

पारंपरिक तरीके में क्षतिग्रस्त नस को दिमाग की सर्जरी द्वारा क्लिप किया जाता है। इस नवीनतम इंडोवस्क्युलर तकनीक में सिर को बिना खोले ईलाज सम्भव है। इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलाजिस्ट डॉ. संदीप बुडाठोकी ने बताया कि इस प्रक्रिया को जांघ के पास 2.5 एमएम का सुराग करके वहां से नसों के जरिए कैथेटर को ब्रेन हेमरेज वाली जगह पर पहुंचाया गया व वहां पर दिमाग के हैमरेज वाले हिस्से को क्वायल किया गया। उन्होंने बताया कि मरीज अब पूरी तरह से खतरे से बाहर है। उन्होंने बताया कि मरीज के जीवन को बचाने में दो चीजों की भूमिका अहम रहीं। जिनमें हेमरेज के तत्काल बाद उन्हें एयरलिफ्ट करके एम्स ऋषिकेश पहुंचाने व इंडोवैस्कुलर क्वाइलिंग विधि से उपचार करना रहा। उन्होंने बताया कि इस विधि से उपचार करने से मरीज जल्दी रिकवरी कर सकेगा।

प्लास्टिक कचरे के लिए एम्स ऋषिकेश का तीन संस्थाओं के साथ हुआ करार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के लिए तीन संस्थाओं में करार हुआ है। एम्स, सीएसआईआर आईआईपी देहरादून और सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) के मध्य हुए करार के तहत संस्थान में प्लास्टिक बैंक स्थापित किया गया है। जिसमें जमा होने वाले प्लास्टिक की रिसाक्लिंग सीएसआईआर-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पैट्रोलियम (आईआईपी) देहरादून में की जाएगी। बताया गया कि इस कचरे से पैट्रोल व डीजल तैयार किया जाएगा।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश ने तीर्थनगरी में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में नया कदम बढ़ाया है। संस्थान परिसर में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए सतत पौधरोपण मुहिम व हरित पट्टी विकसित करने के साथ साथ एम्स ने संस्थान से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे के ठोस निस्तारण के लिए देहरादून की दो संस्थाओं से प्लास्टिक बैंक की स्थापना को लेकर करार किया है।

एम्स में आयोजित बैठक में संस्थान के निदेशक प्रो. रवि कांत, सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डा. अंजन रे व सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने करार पर हस्ताक्षर किए। करार के मुताबिक तीनों संस्थाओं द्वारा मिलकर एम्स ऋषिकेश में प्लास्टिक बैंक की स्थापना की गई है, जिसमें संस्थान से निकलने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे को जमा किया जाएगा। एकत्रित प्लास्टिक कचरे की आईआईपी में साइंटिफिक टेक्निक से रिसाइक्लिंग कर इससे डीजल व पैट्रोल तैयार किया जाएगा।

इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने इसे हर्ष का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इससे एम्स प्रतिष्ठान एक और जन व पर्यावरण हित के कार्य से जुड़ रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान प्लास्टिक बैंक की योजना में अपना पूर्ण सहयोग व भागीदारी निभाएगा।

आईआईपी के निदेशक डा. अंजन रे कहा कि उनका संस्थान प्लास्टिक रिसाक्लिंग की अपनी तकनीक को निरंतर विकसित करने में जुटा है, जल्द ही आईआईपी कोविड-19 संक्रमण से बचाव में इस्तेमाल किए जा रहे मास्क, ग्लब्स व पीपीई किट की रिसाक्लिंग की व्यवस्था भी करेगा। जिससे उक्त सामग्रियों का भी सही तरीके से निस्तारण किया जा सके।
एसडीसी के संस्थापक अनूप नौटियाल ने हर्ष जताया कि उत्तराखंड के दो प्रतिष्ठित केंद्रीय प्रतिष्ठान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस नेक कार्य में साथ आ रहे हैं, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल अन्य संस्थाओं को भी प्रेरित करेगी व निकट भविष्य में अन्य संस्थान भी इस मुहिम का हिस्सा बनेंगे।

अमेरिकी सोसाइटी ने ऋषिकेश एम्स को दिया अनुदान, रक्त कैंसर पर होंगे रिसर्च

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को अमेरिकन सोसायटी ऑफ हेमेटोलॉजी से ब्लड कैंसर पर अनुसंधान के लिए अनुदान मिला है, जिस पर संस्थान के हेमेटोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक रिसर्च का कार्य जल्द शुरू करेंगे। एम्स ऋषिकेश भारत देश की ऐसी पहली संस्था है जिसे यह अनुदान ग्रांट मिली है, रक्त कैंसर पर अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली अमेरिकन सोसायटी की ओर से अब तक देश के किसी भी मेडिकल संस्थान को यह ग्रांट नहीं दी है।
गौरतलब है कि भारत में दुनिया के मुकाबले रक्त कैंसर के रोगियों की मृत्यु दर अधिक है। जिसका सबसे मुख्य वजह कैंसर के शरीर में दोबारा लौटना भी है, साथ ही जानकार इसकी एक वजह देश में रक्त कैंसर के प्रति लोगों में जनजागरुकता का अभाव को भी मानते हैं। ऐसे कई कारण हैं जिनके बारे में वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी व्यक्ति के पहली बार कैंसर ग्रसित होने पर उसे खत्म करने के लिए जो दवा अथवा कीमोथेरेपी दी जाती है, वह उसी व्यक्ति में कैंसर के दोबारा लौटने की स्थिति में अपेक्षाकृत प्रतिरोधक नहीं होती, जिससे व्यक्ति की मृत्यु की संभावनाएं बढ़ जाती है।
उनका मानना है कि कैंसर के दूसरी बार व्यक्ति में आने पर कैंसर सेल में कई तरह के बदलाव आते हैं, मसलन जीन म्यूटेशन, चेंज इन द माइक्रो इन्वायरमेंट आदि। लिहाजा ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को पूर्व में दी गई दवा अथवा उपचार काम नहीं कर पाता है।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि संस्थान को इस अंतर्राष्ट्रीय अमेरिकन सोसायटी ऑफ हेमेटोलॉजी द्वारा दिए गए अनुदान से रक्त कैंसर रिसर्च में नए विषयों पर अनुसंधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस विषय में रिसर्च के दौरान एम्स के अनुसंधान कर्ताओं का फोकस कीमो रिस्टेन्सेंस कोशिकाओं द्वारा प्राप्त अंतर आणविक परिवर्तनों को समझने पर रहेगा। इस अनुसंधान के लिए जिनोमिक्स, प्रोटियोमिक्स और क्रिस्पर जैसी तकनीकियों का प्रयोग किया जाएगा।

बताया कि यह अध्ययन कीमोथैरेपी प्रतिरोधी रोगियों के लिए कुछ नए चिकित्सीय पद्धतियों के आविष्कार में मदद करेगा। बताया गया कि एम्स संस्थान में इस परियोजना का नेतृत्व मेडिकल ओंकोलॉजी एंड हेमेटोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नीरज जैन करेंगे। जो कि डीबीटी रामलिंगस्वामी फैलोशिप प्राप्त हैं।

विभाग प्रमुख डा. नाथ ने बताया कि यह अनुदान भारत में पहली बार एम्स संस्थान के रक्त कैंसर अनुसंधान विशेषज्ञ डा. नीरज जैन को प्राप्त हुआ है। जिसके लिए उन्होंने सोसायटी से रक्त कैंसर पर अनुसंधान के लिए आवेदन किया था।
बताया गया है कि इस रिसर्च परियोजना को ढाई वर्ष में पूर्ण किया जाएगा। जिसके लिए अमेरिकन सोसायटी की ओर से डेढ़ लाख डॉलर (1.10 करोड़) की स्वीकृति प्रदान की गई है। संस्थान की डीन रिसर्च प्रो. वर्तिका सक्सैना ने जानकारी दी कि संस्थान उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा अनुसंधान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिसके लिए एम्स में विभिन्न विस्तृत अनुसंधान प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है।

पौड़ी के घिल्डियाल बाजार में लगाया स्वास्थ्य कैंप, मरीजों ने उठाया लाभ

विकास खंड कल्जीखाल के मानियारस्यूं पट्टी स्थित घण्डियाल बाजार में चैखम्बा मेडिकॉज व स्टार क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में प्रदेश के वरिष्ठ फिजिशियन व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ एस डी जोशी एक सौ पचास से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस मौके पर 60 से अधिक मरीजों की निशुल्क ईसीजी व पैथोलॉजी टेस्ट किया गया।
घण्डियाल के साधन सहकारी भवन में आयोजित इस शिविर में डॉ जोशी से स्वास्थ्य परीक्षण करवाने के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। चैखम्बा मेडिकॉज ग्रुप के सौजन्य से शिविर में आये 60 मरीजों का निशुल्क ईसीजी व 75 मरीजों का पैथोलॉजी टेस्ट किये गए।

स्टार क्लब श्रीनगर को सहयोगी के रूप में जोड़कर वरिष्ठ फिजिशियन व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ एसडी जोशी पहुंचे। उन्होंने लगभग डेढ़ सौ से अधिक लोगों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण करवाया और औषधि वितरित की। साथ ही स्टार क्लब श्रीनगर ने शिविर में आये मरीजों को मास्क सैनिटाइजर व जूस वितरित किये गए।

इस मौके पर राकेश बिजल्वाण, सामाजिक कार्यकर्ता व वॉइस ऑफ माउंटेन के जगमोहन डाँगी, विक्रम पटवाल, स्टार क्लब के पीबी नैथानी, वेद व्रत शर्मा, नवल किशोर जोशी, अजय जोशी, प्रदीप मल्ल, ग्राम उप प्रधान संजय रावत, दीपक जुगरान, सुशील कुमार, नरेश भारद्वाज, मोहन पुरोहित, कंचन, विकास रावत, मेहर चंद आदि मौजूद थे।