देश के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर सैनिकों को अर्पित की श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के अदम्य साहस व शौर्य को नमन करते हुए देश के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में भी देश के लिये बलिदान की परम्परा रही है। कारगिल युद्ध में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड के सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुती दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिये वचनबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सेना ने अपने शौर्य और पराक्रम से हमेशा देश का मान बढ़ाया है। हमें अपने जवानों की वीरता पर गर्व है। भारतीय सेना के अदम्य साहस व शौर्य का लोहा पूरी दुनिया मानती है।
भारतीय सेना के वीर जवानों ने कारगिल में विपरीत परिस्थितियों में भी दुश्मन को भागने पर मजबूर किया था। कारगिल युद्ध में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वीर सैनिकों के बलिदान को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।

देश के पहले सीडीएस जनरल रावत का यूं जाना सभी को अखर रहा

भारत के सीडीएस जनरल बिपिन रावत का बुधवार को एक विमान हादसे में निधन हो गया। उनका सैन्य हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर के पास क्रैश हो गया जिसमें 14 लोग सावर थे। भारतीय वायुसेना ने बताया कि इस दुर्घटना में जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत 13 लोगों का निधन हो गया। जनरल बिपिन रावत भारत के पहले सीडीएस थे। एक बहादुर योद्धा के जाने से न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी मिलीं है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार शुक्रवार (10 दिसंबर) को दिल्ली छावनी में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर के कल शाम तक एक सैन्य विमान से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने की उम्मीद है। शवों को शुक्रवार को उनके घर लाया जाएगा और लोगों को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक श्रद्धांजलि देने की अनुमति दी जाएगी, इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा कामराज मार्ग से दिल्ली छावनी में बरार स्क्वायर श्मशान तक निकाली जायेगी।

सीसीएस की मीटिंग में दिखीं देश की कितनी बड़ी क्षति हुई है
देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के निधन से देश का हर शख्स उदास है। एक अजीब सा सन्नाटा है। इस मनहूस खबर के आने के बाद बुधवार शाम को जब पीएम आवास पर पीएम मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी की बैठक शुरू हुई तो हर चेहरा खामोश दिखा। चेहरे के हावभाव बता रहे थे कि सीडीएस रावत का जाना देश और सरकार के लिए कितनी बड़ी क्षति है। तमिलनाडु में कुन्नूर के पास बुधवार को सैन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटना में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और कुछ अन्य रक्षा अधिकारियों की मौत हो गई। प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति को इससे अवगत कराया गया। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और कैबिनेट सचिव राजीव गौबा भी बैठक में शामिल हुए। सीसीएस के सदस्यों को दुखद घटना के बारे में जानकारी दी गई। सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में रावत सहित सभी मृत लोगों के सम्मान में 2 मिनट का मौन रखा गया। सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति ने जनरल रावत के निधन पर शोक व्यक्त किया। बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि सम्मान के तौर पर सरकार गुरुवार को राष्ट्रीय शोक की घोषणा करेगी। इस दौरान अगले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के चयन पर भी चर्चा हुई।

भारतीय वायु सेना ने दिया आधिकारिक बयान
भारतीय वायु सेना ने एक बयान में कहा, गहरे अफसोस के साथ बताना पड़ रहा है कि यह पता चला है कि दुर्भाग्यपूर्ण घटना में जनरल बिपिन रावत, श्रीमती मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों की मौत हो गई है। जनरल रावत नीलगिरी हिल्स के वेलिंगटन में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में स्टाफ कोर्स के फैकल्टी और छात्र अधिकारियों को संबोधित करने के लिए जा रहे थे।
हेलीकॉप्टर में सवार 14 लोगों में से, एकमात्र जीवित, ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में डायरेक्टिंग स्टाफ, का वर्तमान में वेलिंगटन के सैन्य अस्पताल में इलाज चल रहा है। मधुलिका रावत, ब्रिगेडियर एल. एस. लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, नायक विवेक कुमार, नायक बी. साई तेजा और हवलदार सतपाल जनरल रावत के साथ यात्रा कर रहे थे। उनके अलावा, दो पायलट, एक ग्रुप कैप्टन और एक गनर दुर्भाग्यपूर्ण रूप से क्रैश हुए हेलिकॉप्टर में सवार थे। सिंह अपनी पत्नी और सात कर्मचारियों के साथ सुबह 8ः47 बजे कोयंबटूर के पास सुलूर आईएएफ बेस के लिए दिल्ली में एक उड़ान में सवार हुए थे।

राज्य सरकार शहीदों के परिजनों के साथ हमेश खड़ी है-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सूबेदार अजय सिंह और नायक हरेंद्र सिंह के पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने उनकी शहादत को नमन करते हुए कहा कि राज्य सरकार शहीदों के परिजनों के साथ हर समय खड़ी है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, स्वामी यतीश्वरानंद ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

एवलांच की चपेट में आए नौ सेना अधिकारी की याद में बनेगा शहीद द्वार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जोगीवाला स्थित गंगोत्री विहार में अनंत कुकरेती के परिजनों से मुलाकात करने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए दिवंगत आत्मा के शांति की कामना की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री स्वामी यतिश्वरानंद एवं मेयर सुनील उनियाल गामा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनंत कुकरेती की स्मृति में शहीद द्वार बनाया जाएगा। गौरतलब है कि त्रिशुल पर्वत में एवलांच आने से नौ सेना के पर्वतारोही दल में शामिल सदस्यों की मृत्यु हो गई थी।

भारतीय सेना की जासूसी कर रहा था पत्रकार, नेपाली साथी और चीनी महिला के साथ हुआ गिरफ्तार

देश के सुरक्षा मामलों और सेना की जानकारी चीन को देने के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा, चीनी महिला किंग शी और एक नेपाली साथी शेर सिंह उर्फ राज बोहरा को गिरफ्तार किया है। राजीव शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने चीन को संवेदनशील दस्तावेज सौंपे हैं। इसके लिए चीनी महिला किंग शी फर्जी कंपनी के जरिए उन्हें करीब 40 लाख रूपये भी दिए है।

स्पेशल सेल के अधिकारियों का कहना है कि राजीव ने ने चीन को सेना के कुछ बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए हैं इसके बदले में उसके अकाउंट में करीब 40 लाख रूपये की रकम जमा कराई है। इसके अलावा राजीव के पास से काफी मोबाइल फोन, कई लैपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण और संवेदनशील वस्तुएं बरामद हुई हैं। इन सबका प्रयोग वह चीन से संपर्क करने, उन्हें दस्तावेज व सूचनाएं पहुंचाने के लिए करता था।

स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने ये भी बताया कि राजीव शर्मा ने चीनी खुफिया विभाग को 2016 से 2018 के बीच में रक्षा और रणनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। वह चीनी खुफिया अधिकारियों से अलग-अलग देशों के अलग-अलग ठिकानों पर मुलाकात करता था।

डीसीपी ने ये भी बताया कि उसके दो साथी चीनी महिला और नेपाली युवक की महिपालपुर में कंपनी है, जहां से वो चीन को दवाइयां एक्सपोर्ट करते हैं। चीन से भेजे गए पैसे यहां एजेंट को दिए जाते हैं। जांच में पता चला है कि पिछले एक साल में 40 लाख रुपये पत्रकार को दिए गए हैं।

डीसीपी यादव ने ये भी कहा कि राजीव शर्मा के पास पत्रकारिता का 40 सालों का अनुभव है। भारत के कई समाचार पत्रों में काम के साथ ही राजीव ने चीन की मीडिया एजेंसी ग्लोबल टाइम्स के लिए भी फ्रीलांस पत्रकारिता की है।
 

केन्द्र सरकार ने दोगुनी रफ्तार से समीओं में निर्माण कार्यों को बढ़ाने का काम किया शुरु

(एनएन सर्विस-डेस्क)
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन के द्वारा बाधाएं पैदा करने के बाद भी केन्द्र सरकार ने निर्माण परियोजनाएं को नही रोकने का निर्णय लिया है। केन्द्र सरकार निर्माण कार्य रोकने के बजाय दोगुनी रफ्तार से इन्हें आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। दरबुक से श्योक नदी और फिर दौलत बेग ओल्डी एयरबेस तक 255 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण चीन को सबसे ज्यादा अखर रहा है। 
सूत्रों ने बताया कि श्योक और गलवां नदी के संगम स्थल के पास जैसे ही पुल का निर्माण शुरू किया गया, चीन ने आपत्ति जताने के साथ तनातनी का माहौल बनाना शुरू कर दिया। इसके बावजूद सेना ने इस बेहद महत्वपूर्ण पुल को अपग्रेड करने का काम पूरा कर लिया। गलवां घाटी की घटना के बाद से रोड कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं में भी तेजी लाई जा रही है। हिंसक झड़प वाली जगह से कुछ ही दूर पुल बनाया जा रहा था। चीन की कोशिश थी कि किसी तरह से पुल का निर्माण रुकवा दिया जाए। एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना से और हिंसक संघर्षों की आशंका बन गई थी। ऐसे में पुल तैयार होना और भी जरूरी हो गया था। इसके लिए पुल निर्माण दल से कहा गया, किसी भी सूरत में इस पुल के निर्माण को अंजाम तक पहुंचाए। बताया जा रहा है कि सैनिकों की शहादत के तीन दिन में इसे टेस्टिंग के साथ सैन्य मूवमेंट के लिए तैयार भी कर लिया गया। इस तरह का पहला पुल ब्रिटिश वार ऑफिस में तैनात डोनाल्ड बेली के मॉडल पर वर्ष 1940-41 में तैयार किया गया था। उन्हीं के नाम से पुल के डिजाइन का नामकरण हो गया।
नागरिक सेवाओं के काम भी नहीं करने देता ड्रैगन- एलएसी के उस पार चीन धड़ल्ले से निर्माण करता आ रहा है लेकिन इस पार छिटपुट निर्माण पर भी चीन आपत्ति जताकर काम रुकवाता रहा है। लद्दाख के स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार कई मर्तबा एलएसी से सटे ग्रामीणों के लिए सिंचाई कूहल समेत बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्माण भी केवल चीन की आपत्ति को देखते हुए बंद कर दिए गए। 
वहीं, सीमा पर तनाव को देखते हुए छुट्टी पर घर पहुंचे भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गईं हैं। सभी को जल्दी से जल्द अपने अपने बटालियनों में उपस्थिति देने के आदेश दिए गए हैं। जोशीमठ स्थित सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर में सेना की बैठक में चमोली जिले से लगी सीमा पर जारी गतिविधियों की जानकारी ली गई। सेना व आईटीबीपी के अधिकारियों ने सीमा पर स्थिति का जायजा लिया। सूत्रों के अनुसार शनिवार को जोशीमठ स्थित सेना के हेलिपैड पर दो चेतक हेलिकॉप्टर उतरे। सीमा पर सेनाओं की अलर्टनेस बढ़ गई है। सीमा पर प्राइवेट ट्रकों से भी जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। 
वहीं, एक महत्वूपर्ण जानकारी देते हुए गिलगित बाल्टिस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ता और इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित बाल्टिस्तान स्टडीज के निदेशक सेंगे एच सेरिंग ने कहा कि लद्दाख में भारत के बुनियादी ढांचा निर्माण से चीन डरता है। इसलिए वह भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित सेरिंग ने कहा, भारत बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और काराकोरम पास तक पहुंच को और आसान बना रहा है। इसके जरिये अब भारत गलवां घाटी से चीन के राष्ट्रीय राजमार्ग जी 219 तक पहुंच सकता है। ऐसे में अगर भारत पूर्व और उत्तर की ओर बढ़ता है तो वह तिब्बत को जिनजियांग से काट सकता है। साथ ही साथ व पूर्वी रूट को भी काट सकता है, जोकि सीपेक का दूसरा रास्ता है।

333 युवा सैन्य अफसर बनकर देश सेवा को हुए समर्पित

देश के 333 भावी सैन्य अफसर आज देश सेवा में समर्पित हुए। इसके अलावा 90 विदेशी कैडेट्स भी अपने देश की सेना में शामिल हुए। इनमें 90 युवा सैन्य अधिकारी नौ मित्र देशों अफगानिस्तान, तजाकिस्तान, भूटान, मॉरीशस, मालद्वीव, फिजी, पपुआ न्यू गिनी, श्रीलंका व वियतनाम की सेना का अभिन्न अंग बने। कड़े प्रशिक्षण में खरा उतरने के बाद जांबाज कैडेट्स ने आज आईएमए में अंतिम पग भरा। इसके साथ ही वे भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। परेड में सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने बतौर रिव्यूइंग ऑफिसर भाग लिया।

आज सुबह छह बजकर 42 मिनट पर कैडेट परेड स्थल पहुंचे और परेड शुरू हुई। डिप्टी कमांडेंट ने सबसे पहले परेड की सलामी ली। ठीक सात बजकर पांच मिनट पर कमांडेंट ले. ज. जयवीर सिंह नेगी ने परेड की सलामी ली। इसके बाद सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने परेड का निरीक्षण किया। रिव्यूइंग ऑफिसर ने विजेताओं को पुरुस्कार वितरित किए। फिर ये जांबाज अंतिम पग भर सेना में शामिल हो गए। पीपिंग व ओथ सेरेमनी के बाद 423 जेंटलमैन कैडेट बतौर लेफ्टिनेंट देश-विदेश की सेना का अभिन्न अंग बन गए।

मुंह पर मास्क पहनकर की परेड
इस बार 333 भारतीय और 90 विदेशी कैडेट आईएमए से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना और विदेशी कैडेट अपने देशों की कमान संभालने को तैयार हो गए हैं। ऐसा पहली बार है जब कैडेट बिना अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के अंतिम पग भरा। परेड भी कैडेट मुंह पर मास्क पहनकर कर रहे हैं।
पहली बार ऐसा हुआ कि आईएमए की पासिंग आउट परेड (पीओपी) के दौरान ड्रिल स्क्वायर पर सीना चैड़ा किए कदमताल करके अपने बेटे को देखने और उसके कंधों पर पीप्स (सितारे) सजाने की माता-पिता की इच्छा पूरी नहीं हुई।
बता दें कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार पीओपी में आईएमए की ओर से किसी भी कैडेट्स के परिजनों को बुलावा नहीं भेजा गया है।

ये बने सर्वश्रेष्ठ
– स्वार्ड आफ आनर-आकाशदीप सिंह ढिल्लो
– स्वर्ण-शिवकुमार सिंह चैहान
– सिल्वर-सक्षण राणा
– ब्रांज-सूरज सिंह
– टीजी सिल्वर-भरत योगेंद्र
– सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट-डोनवान सोन वियतनाम
– चीफ आफ आर्मी स्टाफ बैनर-अलामिन/सिंहगढ कंपनी

फ्रंट लाइन वॉरियर्स पर भारतीय सेना ने हेलीकॉप्टर से बरसाए फूल

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में रविवार को भारतीय सेना ने संस्थान के कोरोना फ्रंट लाइन वॉरियर्स को सम्मानित किया। इसी दौरान कोरोना वायरस कोविड19 संक्रमित मरीजों की चिकित्सकीय सेवा से जुड़े चिकित्सकों,नर्सिंग ऑफिसर्स व अन्य सहकर्मियों के सम्मान में आसमान से सेना के हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई।

रविवार को एम्स ऋषिकेश में भारतीय सेना की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कोविड19 से ग्रसित मरीजों की चिकित्सा सेवा में दिन- रात जुटे कोरोना फ्रंट लाइन वॉरियर्स के सम्मान स्वरूप हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए गए। निदेशक प्रो. रविकांत कहा कि संस्थान कोविड19 की जंग के लिए पूरी तरह से राज्य सरकार के साथ है।संस्थान इससे ग्रसित मरीजों को तत्परता के साथ चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करता रहेगा। इस अवसर पर सेना के रायवाला कैंट के कमांडर ब्रिगेडियर आकाश बजाज ने एम्स निदेशक को भारतीय सेना की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, वरिष्ठ सर्जन व आईबीसीसी प्रमुख प्रो. बीना रवि, डीन अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा आदि को सम्मानित किया।

आइएमए परेडः 306 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बनें

आइएमए गीत पर कदमताल करते हुए जैसे ही जेंटलमैन कैडेट ड्रिल स्क्वायर पहुंचे, तो दर्शक दीर्घा में बैठे हर व्यक्ति के अंदर एक जोश भर कर गया। एक साथ उठते कदम और गर्व से तने सीने हर किसी को अपने ओर आर्कषित कर रहे थे। शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में अंतिम पग भरते ही 306 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। इसके साथ ही 71 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परेड की सलामी ली। उन्होंने कहा कि पासिंग आउट परेड का रिव्यू करते मुझे बेहद खुशी हो रही है। क्योंकि आज भारतीय सेना की गौरवशाली परम्परा की नयी कड़ी को जुड़ते हुए मैं प्रत्यक्ष देख रहा हूं। अपने नपे तुले और सधे कदमों से कदमताल करते कैडेटों में सुरक्षित और सुनहरे भारती की तस्वीर दिख रही है। सुबह 08 बजकर 45 मिनट पर मार्कर्स कॉल के साथ परेड का आगाज हुआ। कंपनी सार्जेंट मेजर रोनिश कुमार, हर्षित मिश्रा, संजय सिंह, शिवकुमार सारंग, मंजिल राय, विश्वन काटल, सबा उमा महेश व सत्यम पंत ने ड्रिल स्क्वायर पर अपनी-अपनी जगह ली। 8 बजकर 50 मिनट पर एडवास कॉल के साथ ही छाती ताने देश के भावी कर्णधार असीम हिम्मत और हौसले के साथ कदम बढ़ाते परिमल पराशर के नेतृत्व में परेड के लिए पहुंचे। परेड कमांडर विनय विलास गरड़ ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली। कैडेट्स ने शानदार मार्चपास्ट से दर्शक दीर्घा में बैठे हर शख्स को मंत्रमुग्ध किया।
युवा सैन्य अधिकारी अंतिम पग भर रहे थे, तो आसमान से हेलीकाप्टरों के जरिए उन पर पुष्प वर्षा हो रही थी। रक्षा मंत्री ने कैडेटों को ओवरऑल बेस्ट परफारमेंस व अन्य उत्कृष्ट सम्मान से नवाजा। उन्होंने कहा इस पूरी ड्रिल में कैडेटों की मेहनत व लगन के साथ ही प्रशिक्षण का प्रतिबिंब भी साफ-साफ दिख रहा है। कदम से कदम और कंधे से कंधा मिलाकर चलने की यह काबिलियत किसी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होती है। यही काबिलियत हमारी सशस्त्र सेनाओं को मजबूत भी बनाती है।
भारतीय सैन्य अकादमी, भारत की उस शौर्य परम्परा से जुड़ी हुई है जिसने हमें देश और समाज के मान-सम्मान व स्वाभिमान के लिए मरते दम तक बलिदान देने की प्रेरणा दी है। कैडेटों से कहा कि जितना गर्व आपको अपनी वर्दी पर है उतना ही गर्व उन माता-पिता को भी है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को समर्पित कर दिया। इसलिए यह दिन आपके परिवार के लिए भी खास है। क्योंकि उन्हें आज यह गौरव मिला है जिसका सपना उनकी आंखों में वर्षों से पल रहा था। रक्षा मंत्री ने सभी अभिभावकों का आभार जताया कि उन्होंने अपने बच्चे देश की हिफाजत के लिए भारतीय सेना को सौंप दिए हैं।

कहा बोले रक्षा मंत्री-हमारा पड़ौसी है कि सुधरता ही नही

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना में शामिल हुए युवा सैन्य अधिकारियों से सेवा एवं शांति का संदेश दुनिया तक ले जाने को कहा। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि भारत की कभी भी अतिरिक्त क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं नहीं रही हैं। भारत ने आज तक न तो दुनिया के किसी देश पर कभी आक्रमण किया है और न किसी की एक इंच भूमि पर कब्जा किया है। न ही हम किसी अन्य देश के मामले में दखल देते हैं। इसके बावजूद सीमाओं पर ऐसे खतरे मंडराते रहते हैं जहां आपको वीरता ही नहीं विवेक की भी जरूरत पड़ती है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर हमलावर होते हुए कहा कि वह विचित्र पड़ोसी है, सुधार के रास्ते पर चलते को तैयार नहीं है। कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी राष्ट्र नीति बना लिया है। पाकिस्तान में चरमंपथी तत्व इतने मजबूत हैं कि राजनीति के केंद्र में बैठे लोग उनके हाथों की कठपुतलियों से ज्यादा कुछ नहीं लगते। यही कारण है कि भारतीय सुरक्षाबलों को पाकिस्तान के खिलाफ अधिक चैकन्ना रहने की जरूरत है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने हमारे साथ चार लड़ाइयां लड़ीं, पर हर बार उसे हार मिली। पर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। इसलिए हमें पाकिस्तान जैसे पड़ोसी से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ एक मल्टी प्रोम्प्ट स्ट्रेटेजी अपनाई हुई है। जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद आतंकवाद के खतरे के प्रति हमेशा सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा है यह आज बताने की जरूरत नहीं है। क्योंकि हमने अपनी आंखों के सामने 9/11 और 26/11 की घटना देखी है। आज किसी भी सभ्य देश की आतंकवाद के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है। दुनिया यह जानती है कि 26/11 को अंजाम देने वाले संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लोग पाकिस्तान में बैठे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि मुम्बई हमले में जो 166 बेगुनाह लोग मारे गए, उन्हें और उनके परिवार को उस दिन न्याय मिलेगा जिस दिन 26/11 को अंजाम देने वालों को उनके अंतिम अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की क्षेत्रीय अवधारणाएं एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं लेकिन चीन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बाकी दुनिया के साथ खड़ा है। सीमांकन कार्य लंबे समय से लंबित होने के कारण चीन के साथ सीमा को लेकर कुछ मतभेद जरूर हैं। इस स्थिति में उत्तरी और पूर्वी सीमा पर सेना को अक्सर वीरता के साथ ही विवेक से भी काम लेना पड़ता है। इसका परिचय भारतीय सेना ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार दिया है।