मुख्य सचिव ने ली कुम्भ मेला 2027 की तैयारियों को लेकर बैठक, आपत्तियों के निस्तारण को दिया 03 दिन का समय

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में कुम्भ मेला – 2027 की तैयारियों के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों एवं अधिकारियों के साथ बैठक ली। सर्वप्रथम मुख्य सचिव ने कुम्भ मेले से संबंधित निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों के शासनादेश जारी ना होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आपत्तियों का निराकरण कर अगले 3 दिनों में शासनादेश जारी किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कुंभ मेले के लिए भूमि अधिग्रहण और भूमि आबंटन की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर ली जाए। उन्होंने कहा कि विभागों और संस्थानों को आबंटित होने वाली भूमि को 30 जून तक आबंटित कर दिया जाए। उन्होंने आयुक्त गढ़वाल को भूमि अधिग्रहण एवं आवंटन प्रक्रिया कुम्भ मास्टर प्लान में शामिल किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि निर्माणदायी संस्थाओं द्वारा मेला क्षेत्र के अंतर्गत अपने कार्यालयों को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी आवश्यक तैनातियां शीघ्र से शीघ्र सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अनिवार्य रूप से कराये जाने वाले अस्थायी प्रकृति के कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र से शीघ्र शुरू किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला क्षेत्र के लिए रेलवे एवं सड़क मार्ग यातायात प्लान तैयार कर फाईनल किए जाने हेतु मेलाधिकारी कुम्भ, आईजी कुम्भ और डीआरएम मुरादाबाद को शीघ्र बैठक कर सभी बुनियादी आवश्यकताएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार, नजीबाबाद और मैंगलोर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एनएचएआई एवं लोक निर्माण विभाग के स्तर से होने वाले स्पर्र और जंक्शंस का निर्माण और मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण कराया लिया जाए। उन्होंने कुम्भ क्षेत्र के आसपास के जनपदों में भी ट्रैफिक प्लान और पार्किंग सुविधाओं का विस्तार किए जाने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए।

मुख्य सचिव ने आकस्मिक यातायात प्लान भी तैयार रखे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रवेश करने वाले स्थानों पर भी पार्किंग, रुकने, खाने एवं शौचालयों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कुम्भ मेला क्षेत्र में चिह्नित पार्किंग स्थलों में भी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने पूरे कुम्भ क्षेत्र के लिए सैनिटेशन का डेडिकेटेड प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कुम्भ मेले के दौरान देश विदेश से लाखों-करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। इस लिए कुम्भ क्षेत्र में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे जाने के लिए विशेष सैनिटेशन प्लान शीघ्र तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने उपयुक्त मात्रा में पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना किए जाने पर भी जोर दिया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा ना हो और समय पर उचित जानकारी मिल सके।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विभिन्न लोक कलाओं के निपुण कलाकारों को इससे अपनी संस्कृति देश विदेश तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण महत्त्वपूर्ण दिवसों को छोड़कर प्रत्येक दिवस ऐसे पौराणिक, ऐतिहासिक एवं लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए।

इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी, रणवीर सिंह चौहान, मेलाधिकारी सोनिका, आईजी कुम्भ योगेन्द्र सिंह रावत एवं रेलवे डिवीजन मुरादाबाद से वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केदारनाथ धाम में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा ने रफ्तार पकड़ ली है। केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है, जहां राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सुगम और सुरक्षित दर्शन कर सकें।

केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि केदारनाथ के कपाट खुले हुए तीसरा दिन है। साथ ही भगवान भैरवनाथ के कपाट भी खुल गए हैं। उन्होंने बताया अब तक करीब 1 लाख 10 हजार लोगों ने भगवान श्री केदारनाथ के दर्शन कर लिए हैं। वर्तमान समय में केदारनाथ धाम में व्यवस्थाएं बिल्कुल ठीक हैं। प्रत्येक श्रद्धालु को दर्शन का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कुछ अराजक तत्व द्वारा धाम को बदनाम किया जाना बेहद निंदनीय है।

केदार सभा के वरिष्ठ सदस्य श्री उमेश चंद्र पोस्ती ने कहा कि बीकेटीसी एवं जिला प्रशासन के नेतृत्व में अब तक करीब 1 लाख 10 हजार लोगों ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए हैं। उन्होंने कहा सोशल मीडिया के माध्यम से कई लोग असत्य और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से निश्चिंत होकर केदारनाथ धाम आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन, सब मिलकर दिन रात व्यवस्थाओं में जुटा हुआ है। केदारनाथ में किसी तरह की अव्यवस्थाएं नहीं है। मंदिर में दर्शन के लिए यात्रियों के लिए टोकन व्यवस्था की गई है। जिससे जल्दी दर्शन हो रहे हैं।

केदार सभा के सदस्य संजय तिवारी ने सभी श्रद्धालुओं का केदारनाथ में स्वागत करते हुए कहा कि अब बाबा भैरवनाथ के कपाट भी खुल गए हैं। उन्होंने कहा शासन, प्रशासन, केदार सभा एवं स्थानीय लोगों द्वारा केदारनाथ आने वाले यात्रियों के ठहरने, दर्शन और खाने के लिए बेहतर व्यवस्था की गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया में केदारनाथ धाम के बारे में चल रही भ्रामक खबरों का खंडन करते हुए कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं की गई है।

चारधाम यात्रा की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी, सोशल मीडिया पर हर समय निगरानी

चारधाम यात्रा के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में उत्तराखंड पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई की गई है। इस क्रम में थाना सोनप्रयाग में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर विधिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित हो रही है तथा श्रद्धालु व्यवस्थित ढंग से दर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही भ्रामक एवं अप्रमाणित सूचनाएं न केवल जनमानस में भ्रम उत्पन्न करती हैं, बल्कि यात्रा व्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 4-5 अन्य संदिग्ध वीडियो की भी पुलिस टीम द्वारा गहन जांच की जा रही है। जांच के उपरांत दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड पुलिस द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि चारधाम यात्रा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24Û7 निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना का समय रहते संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अप्रमाणित अथवा भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करें। अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीएम ने बद्रीनाथ मास्टर प्लान की समीक्षा कर विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर पूर्ण करने के दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर उतरते हुए मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों का व्यापक एवं गहन स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समयबद्धता तथा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विभिन्न स्थलों का भ्रमण करते हुए मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कार्यों की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त करने के साथ-साथ उन्हें और अधिक प्रभावी एवं तीव्र गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि बद्रीनाथ धाम से जुड़े सभी विकास कार्य जिलाधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी में तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा कार्यों की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीआरओ बाईपास रोड, लूप रोड, लेक, आईएसबीटी, सिविक एमिनिटी भवन, टीआईसीसी एवं अराइवल प्लाजा जैसे पूर्ण हो चुके महत्वपूर्ण कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने इन परियोजनाओं के शीघ्र हस्तांतरण हेतु अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन सुविधाओं का लाभ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से इन सभी परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिससे दीर्घकालिक रूप से इन परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और उपयोगिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में किए जा रहे विकास कार्यों का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थ अनुभव प्रदान करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह भी जोर दिया कि सभी कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण प्राथमिकता में रखा जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्य करते समय स्वच्छता, हरित मानकों और सतत विकास के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य को अक्षुण्ण रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों और सतत निगरानी से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित कार्य समय पर पूर्ण होंगे और आने वाले समय में यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक आदर्श, भव्य और सुविधासंपन्न तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा।

शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडलः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचकर क्षेत्र का भ्रमण किया तथा वहां आए श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुखद एवं प्लास्टिक मुक्त हरित यात्रा बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर एवं स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए ग्रामीण महिलाओं का आभार व्यक्त किया और उनकी परंपराओं एवं संस्कृति की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की शत-प्रतिशत “लखपति दीदियों” से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए कहा कि ये उत्पाद न केवल स्थानीय आजीविका को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है और जो गांव पहले “अंतिम गांव” कहे जाते थे, उन्हें अब “प्रथम गांव” की संज्ञा देकर उनके समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार, पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्य प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से सीमांत गांव विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

ग्राम पंचायत माणा, विकासखण्ड ज्योतिर्मठ, जनपद चमोली, आज स्वयं सहायता समूहों और “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां कुल 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ग्राम में एक ग्राम संगठन “घुंघटी महिला ग्राम संगठन” तथा एक क्लस्टर स्तरीय संगठन “योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन” कार्यरत है और विशेष बात यह है कि यहां सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का प्रथम शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है।

ग्राम की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक एवं गैर-कृषि कार्यों को बढ़ावा देते हुए आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, फर्नीचर, टोकरी निर्माण, दाल, कालीन, पापड़, मसाले तथा भोजनालय संचालन जैसे विविध कार्यों में संलग्न हैं और इन उत्पादों का विपणन कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इसके अतिरिक्त कृषि, पशुपालन, डेयरी, होमस्टे, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से भी महिलाएं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। स्थानीय उत्पादों को सरस मॉल एवं विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल रही है और वे “लखपति दीदी” योजना से लाभान्वित हो रही हैं।

माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्र के समग्र विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय महिलाओं के परिश्रम ने विकास की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चारधाम यात्रा के संचालन को शुभकामना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा शुरु होने पर देशवासियों को शुभकामना संदेश देते हुए, उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों से पांच संकल्पों का पालन करने का आग्रह किया है।
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रेषित अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि – देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि बाबा केदार के दर्शन सहित चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माध्वाचार्य ने भी अपने धर्मविचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी।
आज भी हिमालय की गोद में विराजमान ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं। हर वर्ष विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हुए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है।

विकसित भारत में विकसित उत्तराखंड की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले, उन्होंने बाबा केदार के द्वार पर खुद ये कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। जिससे श्रद्धालुओं, संतजनों और पर्यटकों को सुविधा हो रही है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले अतिथियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे उन्हें एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।

पांच संकल्प

पहला संकल्प – स्वच्छता सर्वाेपरि
धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।

दूसरा संकल्प – प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहे। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, एक पेड़ मां के नामश् जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।

तीसरा संकल्प – सेवा, सहयोग और एकता पर बल
पुरातन काल से तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। इसीलिए तीर्थयात्री अपनी यात्रा के प्रत्येक दिन, किसी ना किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें।
सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़े। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर ष्एक भारत, श्रेष्ठ भारतश् की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।

चौथा संकल्प – वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
अपने मूल स्थान से चलकर घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।

पांचवां संकल्प – अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन
यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से, इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो। प्रधानमंत्री ने क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स से भी उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।

हर हर महादेव के उद्घोष के साथ खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, सीएम बने साक्षी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बने कपाट खुलने के दिव्य क्षणों के साक्षी हर हर महादेव, जय श्री केदार के उदघोष से प्रफुल्लित हुई बाबा केदार की नगरी

श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी, ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज बुधवार को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में कपाट खुलते ही पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय श्री केदार” के उद्घोष से गूंज उठा। धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम से की गई।

इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे और उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर प्रदेश एवं देश की सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। सिख रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों के बीच कपाट उद्घाटन का यह दिव्य क्षण और भी अलौकिक बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केदारनाथ धाम न केवल सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा हर वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और इस वर्ष भी बाबा केदार के आशीर्वाद से यात्रा ऐतिहासिक होगी।

मुख्यमंत्री ने की अपील
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने सभी उत्तराखंडवासियों से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रति सेवा और आतिथ्य भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बाबा केदारनाथ का अनन्य भक्त बताते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद उनके मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का भव्य एवं दिव्य पुनर्निर्माण हुआ है, जो आज विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।

फूलों से सजा बाबा केदार का धाम
भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से गुप्तकाशी, फाटा और गौरीकुंड होते हुए कल शाम ही धाम पहुंच चुकी थी। इसी क्रम में कपाट खुलने की प्रक्रिया आज प्रातः 5 बजे से प्रारंभ हुई। इसके बाद प्रातः 8 बजे रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी गंगाधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, तीर्थ पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती सहित धर्माचार्यों एवं वेदपाठियों ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर विधिवत पूजा-अर्चना की। देव आवाहन एवं लोककल्याण के संकल्प के साथ ठीक 8 बजे कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट उद्घाटन के अवसर पर श्री केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

ये रहे मौजूद
कपाट खुलने के अवसर पर गीता धामी, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत, ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य अमित मैखंडी, पूर्व जिलाध्यक्ष महावीर पंवार, तीर्थ पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग/मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, सहित बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहितगण, हकहकूकधारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

महिलाओं के अधिकारों में बाधा पहुंचाने वालों को करारा जवाब देगी मातृशक्तियां

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज भाजपा प्रदेश कार्यालय, देहरादून में आयोजित एक विस्तृत एवं महत्वपूर्ण प्रेस कांफ्रेंस के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित विषय पर विपक्ष के महिला विरोधी रवैये के संबंध में अपने विचार और तथ्य विस्तारपूर्वक रखे। उन्होंने इस विषय को केवल एक विधायी पहल नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों, सम्मान और सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ ऐतिहासिक अवसर बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय-निर्माण में समान भागीदारी देने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता था। यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी, जिससे लोकतंत्र और अधिक समावेशी और संतुलित बनता। लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (ज्डब्) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (क्डज्ञ) जैसे विपक्षी दलों ने एक बार फिर राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसे सफल नहीं होने दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं के प्रति उनकी वास्तविक सोच को भी उजागर करता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी देश में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाया जाता है, तब-तब विपक्षी दलों द्वारा किसी न किसी बहाने से उसे रोकने या कमजोर करने का प्रयास किया जाता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों को टालने और दबाने का रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब महिलाओं को शीघ्र 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की दिशा में ठोस पहल की गई, तब विपक्ष ने बहानों, भ्रामक तर्कों और राजनीतिक गणित के जरिए इस प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि यह महिलाओं की प्रगति को रोकने का प्रयास था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा लगातार यह भ्रम फैलाया गया कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण कुछ राज्यों या क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि यह पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है। इस विषय पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने भी संसद में स्पष्ट किया था कि परिसीमन की इस प्रक्रिया से देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसके बावजूद विपक्ष ने जनता को गुमराह करने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज देश की मातृशक्ति जागरूक है, सक्षम है और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवा रही हैकृचाहे वह राजनीति हो, प्रशासन हो, शिक्षा, विज्ञान, खेल या उद्यमिता का क्षेत्र। ऐसे में महिलाओं को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा से दूर रखना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में देश की मातृशक्ति उन दलों को करारा जवाब देगी, जो उनके अधिकारों में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल दर्शक नहीं हैं, बल्कि वे देश की नीति और दिशा तय करने में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र और राज्य सरकारें महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू कर रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं और भविष्य में भी ऐसे सभी प्रयास किए जाते रहेंगे, जो देश की मातृशक्ति को सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानित बनाने में सहायक सिद्ध हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे प्रयासों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा महिलाओं को उनका उचित स्थान और सम्मान अवश्य प्राप्त होगा।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधायक सविता कपूर, पार्टी की वरिष्ठ महिला पदाधिकारीगण, विभिन्न प्रकोष्ठों एवं मोर्चों की प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता, युवा कार्यकर्ता, तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।

एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने पहाड़ी बोली भाषा के शब्दों को दी अपने भाषण में जगह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-दून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुभारंभ पर उत्तराखंडवासियों से सीधे कनेक्ट किया। उन्होंने सिर पर ब्रहमकमल टोपी, भाषण के शुरूआत में गढ़वाली-कुमाऊंनी के छोटे-छोटे वाक्य रखे। मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने चिर परिचित अंदाज में एक बार फिर साबित किया कि उत्तराखंड की प्रगति से उनका खास वास्ता है।

उन्होंने कहा एक्सप्रेस वे के निर्माण में मां डाटकाली के आशीर्वाद का प्रधानमंत्री ने खास तौर पर जिक्र किया। ये भी जोड़ा कि देहरादून पर मां डाटकाली की कृपा है। उत्तराखंड से लगे उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित संतला माता मंदिर का भी उन्होंने स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात से लेकर पंच बदरी, पंच केदार, पंच प्रयाग का भी प्रभावपूर्ण जिक्र कर जबरदस्त लोकल कनेक्ट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेे जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड, गढ़ी कैंट में आयोजित समारोह में 210 किमी लंबे, दिल्ली -देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का रिमोट बटन दबाकर लोकार्पण किया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने गढ़ी कैंट तक 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में प्रतिभाग करने के साथ ही डाटकाली मंदिर में दर्शन करने के उपरांत पूजा भी की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गढ़ी कैंट में आयोजित, समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को बैसाखी और बिहू पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आने वाले कुछ दिनों में उत्तराखंड में स्थित पवित्र चार धामों की भी यात्रा शुरु होने वाली है, जिसका देशभर के आस्थावान लोग प्रतीक्षा करते हैं। दिल्ली- देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से चारधाम के यात्रियों को भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य अपने स्थापना के 26वें प्रवेश कर चुका है, अब राज्य की प्रगति में दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे भी शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले उन्होंने बाबा केदार की धरती पर अनायास ही कहा था कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड के नाम होने जा रहा है, उन्हें यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि डबल इंजन वाली सरकार की नीतियों और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से उत्तराखंड तेजी से इस राह पर बढ़ रहा है।

उत्तराखंड ने देश को दिखाई राह
प्रधानमंत्री ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ बीआर अंबेडकर को उनकी जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बीते एक दशक से उनकी सरकार ने जो भी निर्णय लिए वो देश के संविधान की गरिमा को बढ़ाने वाले साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति और देश से माओवाद खत्म होने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू हो गया है। उन्होंने कहा कि, उत्तराखंड ने संविधान की भावना के अनुरूप, समान नागरिक संहिता लागू कर, पूरे देश को नई राह दिखाई है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का जीवन गरीबों, वंचितों और शोषितों को न्याय पूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित रहा है, केंद्र सरकार भी इसी भावना के साथ हर गरीब को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि देश का संतुलित विकास, सबको सुविधा और सबकी समृद़धि ही सामाजिक न्याय का माध्यम बन सकती है। इसलिए बाबा साहेब भी औद्योगिकरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भरपूर वकालत करते थे।

सड़कें बनेगी भविष्य की रेखा
प्रधानमंत्री ने देश के विकास में सड़क, रेलवे, रोपवे और वाटरवे की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग, भविष्य जानने के लिए हाथ की रेखाओं को दिखाने के लिए ज्योतिष शास्त्र की शरण में जाते हैं। आज इसी तरह सड़कें, राष्ट्र की भाग्य रेखाएं बनती जा रही हैं। उन्होनें कहा कि बीते एक दशक से सरकार विकसित भारत के लिए ऐसी ही भाग्यरेखाओं के निर्माण में जुटी हुई है। ये भाग्य रेखाएं, सिर्फ आर्थिकी का आधार नहीं बनेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी की समृद्धि की गारंटी भी बनेगी और यही मोदी की गारंटी भी है। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में सरकार ने इन विकास रेखाओं के निर्माण में अभूतपूर्व निवेश किया है। वर्ष 2014 तक, पूरे देश के इंफ्रा प्रोजेक्ट पर दो लाख करोड़ भी खर्च नहीं हो पाते थे, जबकि आज यह राशि छह गुना अधिक बढ़कर 12 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है। इस दौरान अकेले उत्तराखंड में ही, सवा दो लाख करोड़ रुपए के इंफ्रा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी उत्तराखंड के गांवों में सड़कों के इंतजार में पीढ़ियां बूढ़ी हो जाती थी, आज डबल इंजन की सरकार के कारण गांव गांव सड़क पहुंच रही है। इससे वीरान गांव फिर जीवंत हो रहे हैं। चारधाम महामार्ग परियोजना, रेल परियोजना, केदारनाथ, हेमकुंड रोपवे जैसे परियोजनाएं उत्तराखंड की भाग्य रेखाएं बन रही हैं।

नए भारत में स्पीड और स्केल पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत जिस स्पीड और स्केल पर काम कर रहा है, उसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है। उन्होने कहा कि बीते कुछ महीनों के भीतर ही दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ है, साथ ही मेरठ तक मेट्रो पहुंची है, नोएडा में एयरपोर्ट शुरु हुआ है और अब दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भी शुरु हो चुका है। इतने छोटे से क्षेत्र में इतना सबकुछ हो रहा है तो आप देशभर की प्रगति का आंकलन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में कई इकोनॉमिक कॉरिडोर पर काम चल रहा है। ये इकोनॉमी कॉरिडार प्रगति के नए द्वार बनने जा रहे हैं जिनसे हमारी उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली दृ देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जहां लोगों का आने जाने में समय बचेगा, वहीं ईंधन की खपत कम होने से किराया और माल भाड़ा भी बचेगा। साथ ही किसानों को अपने उत्पाद, तेजी से बड़ी मंडियों तक पहुंचाने की सुविधा मिलेगी। इस शानदार एक्सप्रेस वे का सर्वाधिक लाभ उत्तराखंड के पर्यटन को मिलेगा ।

बारामासी पर्यटन की ओर बढ़ा उत्तराखंड
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड सरकार द्वारा विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्ट्स और वेड इन उत्तराखंड जैसे अभियानों को बढ़ावा दिए जाने के लिए जारी प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि, अब उत्तराखंड बारामासी पर्यटन की तरफ बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने 2023 में अपनी आदि कैलाश- ओमपर्वत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि, पहले यहां साल में कुछ सौ लोग ही आते थे, जबकि 2025 में यह संख्या 40 हजार के पार पहुंच गई है। इसी तरह उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा में आने वाले पयर्टकों और तीर्थयात्रियों की संख्या भी 80 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख पहुंच गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए, प्रगति, प्रकृति और संस्कृति को साथ रखा जाना जरूरी है। इसलिए आज हर निर्माण का इस त्रिवेणी को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें ध्यान देना होगा कि इंसानों के लिए होने वाले विकास कार्यों से वन्य जीवों को कोई कष्ट न हो। इसलिए दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर 12 किमी लंबा एलिवेट रोड बनाया गया है।

उत्तराखंड की पवित्रता का करें पालन
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के लोगों के साथ ही यहां आने वाले पयर्टकों से अपील करते हुए कहा कि वो देवभूमि की धरोहर बहुत पवित्र है, ऐसे स्थानों का साफ सुधरा रखना हम सबका कर्तव्य है। यहां जगह -जगह कूड़ा डालने, प्लास्टिक की बोतलें फेंकने से देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचती है। इसलिए देवभूमि के तीर्थ स्थलों को स्वच्छ और सुंदर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले साल हरिद्वार में दिव्य, भव्य और स्वच्छ कुंभ मेले का आयोजन होगा, इसी के साथ उत्तराखंड में जल्द ही नंदा देवी राजजात भी आयोजित होने वाली है। ये यात्रा उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक चेतना का भी उदाहरण है, जिसमें मां नंदा को बेटी मानकर सम्मान के साथ विदा किया जाता है। उन्होंने कहा कि वो मां नंदा को प्रणाम करते हुए, विकसित भारत के निर्माण में माताओं बहनों की बड़ी भूमिका है।

2029 में आधी आबादी को मिलेगा पूरा हक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को राजनैतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए, संसद ने चार दशक के बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर दिया है, इससे लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तय हो गया है। अब इसे लागू करने में देर नहीं होने चाहिए, 2029 के लोकसभा और इससे आगे के विधानसभा चुनावों में इसे लागू किया जाना चाहिए। देश की इसी भावना के अनुरूप 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने सभी दलों से इस संसोधन अधिनियम को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि, 2029 में देश की पचास प्रतिशत आबादी को उनका हक मिलकर रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश, 1962 में शहीद हुए बाबा जसवंत सिंह के शौर्य को भुला नहीं सकता। सैनिकों के सम्मान के क्रम में केंद्र सरकार ने वन रैंक, वन पेंशन लागू करते हुए पूर्व सैनिकों के खाते में सवा लाख करोड़ से अधिक की धनराशि जमा की है। जिसका लाभ उत्तराखंड के हजारों परिवारों को भी मिला है। सरकार देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति को जोडते हुए विकसित भारत का संकल्प सच करने का प्रयास कर रही है।

पीएम-सीएम की फिर दिखी मजबूत बांडिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मजबूत बांडिंग एक बार फिर प्रदर्शित हुई। अपने संबोधन में प्रधाानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री के लिए लोकप्रिय, कर्मठ और युवा जैसे शब्दों का प्रयोग किया। जिस वक्त केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उस दौरान मोदी-धामी के बीच किसी विषय पर वार्तालाप हुआ। मुख्यमंत्री की बात को गौर से सुनते हुए प्रधानमंत्री दिखाई दिए।

अब रफ्ता-रफ्ता नहीं, पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारतः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि उनका प्रत्येक दौरा उत्तराखंड के लिए नई ऊर्जा और विकास की नई सौगात लेकर आता है। उन्होंने कहा आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और उत्तराखंड को ₹12 हजार करोड़ की लागत से बने एशिया के सबसे लंबे ऐलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सौगात मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कई मायनों में विशेष है। एक ओर जहां दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई गति मिल रही है, वहीं यह अवसर भीमराव अंबेडकर की जयंती का भी है। उन्होंने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक सौहार्द एवं समरसता को मजबूत करने के लिए वंचित वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है।

मुख्यमंत्री ने देशवासियों को बैसाखी और सिख नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमारे सांस्कृतिक वैभव और कृषि परंपराओं का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने बीते वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। 2014 के बाद भारत ने आधारभूत संरचना, अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी का तीसरा दशक, उत्तराखंड का दशक बताकर सभी का उत्साहवर्धन किया। प्रधानमंत्री ने सीमांत गांव माणा में आकर उसे देश का प्रथम गांव घोषित किया, इन्वेस्टर समिट के उद्घाटन पर वेड इन उत्तराखंड का संदेश दिया। आदि-कैलाश का दर्शन कर इस तीर्थ को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई, राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन से देवभूमि को खेलभूमि के रूप पहचान दिलाई, हर्षिल मुखबा से शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा दिया एवं रजत जयंती वर्ष के अवसर पर अगले 25 वर्षों के लिए राज्य को एक नया विजन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का श्रेष्ठ राज्य बनने के लिए अपने विकल्प रहित संकल्प के साथ ष्विकास भी और विरासत भी’’ की अवधारणा के अनुरूप प्रत्येक क्षेत्र में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन ष्अब रफ्ता-रफ्ता नहीं, पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारत अब नक्सलवाद, उग्रवाद और आतंकवाद से जीत रहा है भारत अब अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार के साथ-साथ नवाचार में भी कीर्तिमान बना रहा है भारत कविता से किया। मुख्यमंत्री ने कविता के माध्यम से प्रधानमंत्री के नेतृत्व, विकास कार्यों और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को सराहा और आभार व्यक्त किया।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को नंदा राजजात यात्रा पर आधारित स्मृति चिन्ह भेंट किया, जिसमें मां नंदा की डोली, यात्रा की अगुवाई करते खाड़ू तथा स्थानीय लोगों का सुंदर चित्रण किया गया है।


उत्तराखंड में एक लाख 30 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर चल रहा कामः गडकरी

सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने रखा विकास परियोजनाओं का विवरण
केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गड़करी ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तराखण्ड के विकास को नई गति प्रदान करेगा। उन्होने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखण्ड में करीब एक लाख 30 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

गडकरी ने कहा कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर छह लेन रोड़ का भी जून में उद्घाटन होने जा रहा है। इसी तरह 1650 करोड़ के लागत से पौंटा साहिब से देहरादून फोर लेन मार्ग अगले महीने तक शुरु हो जायेगा। 1600 करोड़ की लागत से हरिद्वार में फोर लेन ग्रीन फील्ड बाईपास फेज-1 अक्टूबर, 2026 तक पूरा हो जायेगा, जिससे हरिद्वार और ऋषिकेश जाने में ट्रेफिक जाम की समस्या हल होगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 1100 करोड़ की लागत से ऋषिकेश बाईपास परियोजना को भी मंजूरी प्रदान कर दी है, जिस पर अगस्त तक काम शुरू हो जायेगा।

उन्होंने कहा कि 1050 करोड़ की लागत से 21 किमी. लम्बा रूद्रपुर में फोरलेन बाईपास इसी साल अक्टूबर और 936 करोड़ की लागत से 15 किमी. लम्बा काशीपुर से फोरलेन बाईपास दिसंबर 2026 में पूरा होगा। साथ ही 716 करोड़ की लागत से 12 किमी. लम्बा देहरादून – झाझरा – आशारोड़ी फोर लेन एलिवेडेट रोड़ अगले साल अप्रैल और 745 करोड़ की लागत से 20 किमी. लम्बा भानियावाला, जौलीग्रांट से ऋषिकेश तक फोर लेन मार्ग अप्रैल 2028 तक पूरा होगा। साथ ही साथ 800 करोड़ की लागत से श्रीनगर में भी टू लेन बाईपास की भी डीपीआर बन रही है।

उन्होंने कहा कि पहले हमें मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल और चीन से होकर जाना पड़ता था। लेकिन अब 5200 करोड़ रूपये की लागत से टनकपुर-पिथौरागढ़ होकर लिपुलेख तक मार्ग बनाया जा रहा है। 370 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में से करीब 200 किमी. का कार्य पूरा हो चुका है।इसी तरह 12 हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 825 किमी लंबी चारधाम सड़क परियोजना में 640 किमी. का काम पूरा हो चुका है। 1300 करोड़ की लागत से रूद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक का कार्य दिसम्बर 2026 तक शुरू किया जायेगा। इसके साथ-साथ गंगोत्री धाम जाने के लिए 142 किमी का काम पूरा हुआ है और बाकी 100 किमी. का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। यमुनोत्री धाम में 2500 करोड़ की लागत से धरासू से यमुनोत्री तक 46 किमी. का काम पूरा हो चुका है तथा 30 किमी. का काम अप्रैल, 2028 तक पूरा हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार सोनप्रयाग – केदारनाथ रोपवे और गोंविदघाट से हेमकुंड साहिब पर भी काम कर रही है। प्रदेश में अनेक जगहों पर टनल भी बनाई जा रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल ले.ज (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, रेखा आर्य, खजान दास, डॉ. धन सिंह रावत, सौरभ बहुगुणा, मदन कौशिक, राम सिंह कैड़ा, भरत चौधरी, प्रदीप बत्रा, सांसद अनिल बलूनी, अजय भट्ट, माला राज्यलक्ष्मी शाह, नरेश बंसल उपस्थित हुए। वहीं, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं।

सीएम ने की राज्य की महत्त्वपूर्ण अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड निवेश और आधारभूत संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की चौथी बैठक के दौरान राज्य की महत्त्वपूर्ण अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हरिद्वार गंगा कॉरिडोर, शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर तथा ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजनाओं के अंतर्गत कार्यों में तेजी लाई जाए और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यूआईआईडीबी के गठन का मुख्य उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना तथा आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी संबंधित विभाग गंभीरता, समन्वय और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें। उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही प्रक्रियात्मक जटिलताओं को दूर करने के लिए कार्यों के सरलीकरण पर विशेष बल दिया, ताकि परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतर सकें।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी छह माह के भीतर इन परियोजनाओं के तहत कार्यों की वास्तविक प्रगति दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक परियोजना की स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की जाए तथा तय समयसीमा के भीतर कार्यों को पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा करने के भी निर्देश दिए, ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शारदा कॉरिडोर योजना के कार्यों में तेजी लाए जाने हेतु परियोजना के लिए भूमि की उपलब्धता के साथ इस क्षेत्र की भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशीलता का भी अध्ययन कर सुरक्षात्मक उपायों की प्राथमिकता पर ध्यान दिए जाने को कहा। उन्होंने कहा कि शारदा नदी के किनारे रिवर फ्रंट के विकास तथा घाटों के सौंदर्यीकरण से इस क्षेत्र में आनेवाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आगामी हरिद्वार कुंभ को ध्यान में रखते हुए गंगोत्री से हरिद्वार तक गंगा स्वच्छता के साथ हरिद्वार एवं ऋशिकेश के घाटों की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर प्राथमिकता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके और उत्तराखंड को निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शारदा और गंगा कोरिडोर का मुख्य उद्देश्य राज्य में धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा देने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा श्रद्धालुओं को सुविधा देना है। उन्होंने कहा कि दोनों परियोजनाओं में अलग-अलग डिजाइन पर कार्य किये जायेंगे। शारदा कोरिडोर के तहत बुनियादी ढ़ांचे, पर्यटन और लोगों की आर्थिकी को बढ़ावा देने से संबधित अनेक कार्य किये जायेंगे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, नितेश झा, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, बृजेश संत, धीराज गर्ब्याल, रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव अजय मिश्रा एवं संबंधित अधिकारी मौजूद थे।