अनिल जोशी को फिर से सचिवालय क्रिकेट क्लब की कमान

शुक्रवार को सचिवालय क्रिकेट क्लब की आम सभा सचिवालय स्थित राज्य आपदा परिचालन केन्द्र सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि फिट इंडिया मूमेन्ट के अन्तर्गत सचिवालय में खिलाड़ियों को खेल के प्रति प्रोत्साहन किया जायेगा, शीघ्र ही नये प्रारूप में सचिवालय कार्मिकों के मध्य क्रिकेट टुर्नामेन्ट का सक्रियता से आयोजन किया जायेगा।
बैठक में चन्दन सिंह विष्ट पूर्व कोषाध्यक्ष द्वारा आय-व्ययक का लेखा जोखा प्रस्तुत किया गया। अनिल जोशी, अध्यक्ष, सचिवालय क्रिकेट क्लब द्वारा क्लब की गतिविधियों से सदन को अवगत कराया गया, साथ ही गठित कार्यकारिणी का कार्यकाल पूर्ण होने पर वर्तमान कार्यकारणी को भंग करते हुए आम सदस्यों से नई कार्यकारणी गठित करने का अनुरोध किया गया।
पन्ना लाल शुक्ला अध्यक्ष सचिवालय बैडबिन्टन क्लब, डी०एम०एम०सी० के देख रेख में क्लब के चुनाव सम्पन्न हुये, जिसमें सर्वसम्मति से 3 वर्षो के लिए सचिवालय क्रिकेट क्लब की कार्यकारणी निर्विरोध निर्वाचित हुई जिसमें अनिल जोशी को निर्विरोध अध्यक्ष तथा टी०एच० खान को उपाध्यक्ष, राजेन्द्र रतूडी को सचिव, रवि रंसवाल को संयुक्त सचिव तथा अतुल परमार को कोषाध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
चुनाव अधिकारी पन्ना लाल शुक्ला के द्वारा आम सदस्यों से सदन में ध्वनिमत प्रस्ताव के आधार पर अन्य कार्यकारिणी सदस्यों को नामित किये जाने हेतु अध्यक्ष एवं नई कार्यकारिणी को अधिकृत किया गया।
इस अवसर पर राकेश जोशी, अध्यक्ष डी०सी०डी०यू०, पूर्व उपाध्यक्ष राकेश महर, पूर्व सचिव हरीश सैनी, पूर्व कोषाध्यक्ष चन्दन सिंह विष्ट, संयुक्त सचिव अमित तोमर, पूर्व कार्यकारिणी सदस्य, मनोज भट्ट आदि उपस्थित रहे।

सभी समस्याओं का हल निकालने का हो रहा प्रयास-राधा रतूड़ी

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने मंगलवार को सचिवालय में मीडिया को जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा आन्दोलनरत अभ्यर्थियों द्वारा उठाये गये सभी मुद्दों को गम्भीरता से लेते हुए स्वस्थ एवं सौहार्दपूर्ण संवाद से उनकी सभी समस्याओं को हल करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार अभ्यर्थियों के हितों के लिए सदैव आगे बढ़ कर बातचीत करने एवं समाधान निकालने हेतु तत्पर है। राज्य के युवाओं की सबसे बड़ी मांग थी की नकल विरोधी कानून को सख्त बनाया जाय।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं की मांग को गम्भीरता से लेते हुए अत्यन्त अल्पावधि में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून उत्तराखण्ड में लागू किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून केवल राज्य सरकार द्वारा सरकारी भर्ती के लिए आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं पर लागू होगा। स्कूलों और डिग्री कॉलेज की परीक्षाओं में यह लागू नहीं होगा। केंद्र सरकार की राज्य में आयोजित की जाने वाली भर्ती परीक्षाओं पर यह कानून लागू नहीं होगा। एसीएस राधा रतूड़ी ने कहा कि युवाओं द्वारा यूकेएसएसएससी एवं लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में पाई गई अनियमितताओं के सम्बन्ध में चल रही एसआईटी एवं एसटीएफ की जांच का पर्यवेक्षण उच्च न्यायालय के न्यायधीश से करवाने की मांग की गई थी। इस पर राज्य सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। युवाओं की अपील पर लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक को भी हटा दिया गया है। इस पद पर अन्य अधिकारी की तैनाती कर दी गई है। इस प्रकार से जो भी मुद्दे आन्दोलनरत अभ्यर्थियों ने सरकार एवं अधिकारियों के समक्ष रखे थे, उन सभी का निराकरण कर दिया गया है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा बनाया गया नकल विरोधी कानून देश का सबसे सख्त कानून है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि युवाओं के हितों से खिलवाड़ करने वाले या अनुचित तरीके इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही छात्रों को दिग्भर्मित करने, बरगलाने तथा भ्रामक खबरों के प्रचार-प्रसार करने वालों के विरूद्ध भी सख्त कार्यवाही की जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि गत 12 फरवरी को आयोजित की गई राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी ध्लेखपाल) की परीक्षा राज्य के 13 जनपदों के 498 परीक्षा केन्द्रों पर पूरी पारदर्शिता एवं शान्तिपूर्ण तरीके से आयोजित की गई।
इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, एडीजी (लॉ एण्ड ऑर्डर) वी. मुरूगेशन व अपर सचिव जगदीश प्रसाद काण्डपाल मौजूद रहे।

अपर मुख्य सचिव ने बेरोजगार संघ को सरकार की कार्यवाही से कराया अवगत

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से शुक्रवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ के सदस्यों ने भेंट की। बेरोजगार संघ के सदस्यों ने अपर मुख्य सचिव रतूड़ी को अपने मुद्दों से अवगत कराया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बेराजगार संघ द्वारा रखे गये मुद्दों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवा अपनी बात शांतिपूर्वक तरीके से रखें।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बिल्कुल निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाए। इसी उद्देश्य से उत्तराखण्ड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाया गया है। गत दिवस उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश-2023 के प्रख्यापन हेतु मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। इतना सख्त कानून बनाने का उद्देश्य है कि राज्य के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल रहे। युवाओं को अपनी मेरिट के आधार पर नौकरी मिलें। देश में इतना सख्त कानून किसी भी अन्य राज्य में नही है।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि गत एक वर्ष से परीक्षाओं में धांधली से सम्बन्धित शिकायतों पर पूरी निष्पक्षता से जांच हुई है। जांच के परिणामस्वरूप कई दोषी जेल की सलाखों के पीछे हैं। सरकार ने अत्यन्त त्वरित कार्यवाही की है। बहुत सख्ती से जांच हुई है। भर्ती परीक्षाओं में अनुचित कार्य करने की मंशा रखने वाले लोगों के लिए एक कड़ा संदेश गया है।

पर्वतीय जिलों में खूबसूरत पर्यटन स्थलों के आसपास छोटी-छोटी पार्किंग बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश में बनने वाली टनल पार्किंग की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पर्वतीय जनपदों में खूबसूरत पर्यटन स्थलों के आसपास छोटी-छोटी पार्किंग बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नेशनल हाईवे और स्टेट हाइवे से लगे कम ढलान वाले क्षेत्रों में भी सर्फेस पार्किंग आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि टनल और ऑटोमेटेड पार्किंग के लिए जिन स्थानों का चिन्हीकरण हो गया है, उन्हें गतिशक्ति पोर्टल के माध्यम से पोर्टल बेस्ड मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने प्रदेश में लगातार नए पार्किंग स्थल ढूंढ़ते रहने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पार्किंग के लिए नए स्थलों का चिन्हीकरण एक लगातार प्रक्रिया के रूप में भविष्य में भी जारी रहना चाहिए। कहा कि किसी भी पार्किंग प्रोजेक्ट में किसी भी स्तर में आ रही समस्या के लिए सम्बन्धित अधिकारी या सचिव से लगातार सम्पर्क कर समस्या का निस्तारण किया जाए। उन्होंने पार्किंग प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह की जाए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश भर में कुल 26 स्थल टनल पार्किंग के लिए चयनित किए गए हैं। जिनका विभिन्न स्तरों में कार्य प्रगति पर है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन एवं प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

अपर मुख्य सचिव ने बैंकर्स के साथ बैठक कर रोजगार सृजन योजनाओं की समीक्षा की

अपर मुख्य सचिव आनन्दवर्धन ने राज्य में संचालित सभी रोजगार सृजन योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु एक इंटिग्रेटेड सिस्टम विकसित करने के साथ ही सिंगल पोर्टल बनाने हेतु उद्योग विभाग के नेतृत्व में पर्यटन विभाग तथा शीर्ष बैंको की पांच सदस्यी उप समिति गठित करने के निर्देश दिए है। अपर मुख्य सचिव आनन्दवर्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में अवस्थापना विकास बैंकर्स स्थायी समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना (होम स्टे), पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अति सूक्ष्म (नैनो), मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत लम्बित ऋण आवेदन पत्रों का समय सीमा में निस्तारण करने के निर्देश दिए। बैंक प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत वर्ष 2022-23 में बैंकों द्वारा वार्षिक लक्ष्य 6000 के सापेक्ष माह दिसम्बर तक 6173 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का 103 प्रतिशत है। बैंकों को निर्देश दिए गए कि वे 28 फरवरी 2023 तक लम्बित ऋण आवेदन पत्रों का निस्तारण तथा स्वीकृत ऋण आवेदन पत्रों पर ऋण वितरण करें। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत दिसम्बर माह तक वार्षिक लक्ष्य 1783 के सापेक्ष 1867 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गए, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 105 प्रतिशत है। होम स्टे योजना (वीसीएसजीएसवाई) के तहत वर्ष 2022-23 के माह दिसम्बर तक बैंकों द्वारा वाहन मद में निर्धारित लक्ष्य 150 के सापेक्ष 156 ऋण आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का 104 प्रतिशत है तथा गैर वाहन मद में निर्धारित लक्ष्य 100 के सापेक्ष 59 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का 59 प्रतिशत है। इस सम्बन्ध में बैंकों को लम्बित ऋण आवेदन 28 फरवरी 2023 तक निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना के तहत वर्ष 2022-23 के दिसम्बर माह तक बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य 200 के सापेक्ष 139 आवेदकों को ऋण वितरित किए गए हैं। इस संबंध में बैंकों को ऐसे ऋण आवेदन पत्रों का अविलम्ब निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें सेक्शन 143 अंतर्गत अकृषि प्रमाण पत्र एवं निर्माणधीन इकाई का मानचित्र अधिकृत एजेन्सी से स्वीकृति की आवश्यकता नही हैं। बैंक प्रतिनिधियों ने अवगत कराया कि पी.एम. स्वनिधि योजना अंतर्गत ऋण प्रदान करने की समय सीमा दिसम्बर माह 2024 तक बढ़ा दी गई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वर्ष 2022-23 के दिसम्बर माह 2022 तक 217258 लाभार्थियों को निर्धारित लक्ष्य 2500 करोड़ रूपये के सापेक्ष 2173.51 करोड़ के ऋण वितरित किए गए हैं, जोकि लक्ष्य का 87 प्रतिशत है। योजना के तहत अनुमानतः 307174 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ है। ऋण के गारंटी कवर लेने के लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
बैठक में वित्तीय समावेशन हेतु राष्ट्रीय रणनीति (एनएसएफआई) 2019-2024 जिसमें नई बैंक शाखाएं खोलने, बैंकिग सेवाओं से अनाच्छादित गांवों, बिजनेस कॉरोस्पोन्डेट तथा कैपेसिटी बिल्डिंग, कॉमन सर्विस सेन्टर को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के कार्य प्रदान करने एवं सामाजिक सुरक्षा योजना पर चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बैंकिग सेवा रहित 80 गांवों में डीसीबी द्वारा सेवाएं देने में असमर्थ होने की स्थिति में शीर्षस्थ बैंकों को इस दिशा में पहल करनी होगी। डिजिटल पेमेंट ईको सिस्टम को मजबूत करने तथा विस्तार देने के लिए अल्मोड़ा तथा चमोली जिले में अच्छा काम हुआ है। अब पिथौरागढ़ तथा पौड़ी जनपद में इस दिशा में काम किया जाना चाहिए।
बैठक में अपर सचिव पर्यटन पूजा गबयार्ल, अपर सचिव शहरी विकास नवनीत पांडे, सहायक महाप्रबंधक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति नरेंद्र सिंह रावत, मीनाक्षी सहायक महाप्रबंधक आरबीआई, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि व विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा, हम हर कीमत पर चाहते हैं छात्रों का हित, भरोसा रखें युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि हम किसी भी कीमत पर छात्रों का हित चाहते हैं। इसीलिए जिन भी परिक्षाओं में गड़बड़ियां पाई गई, राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल रद्द करते हुए नई तिथि घोषित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभ्यर्थियों को असुविधा न हो, इसके लिए उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में परीक्षा के लिए आने पर निशुल्क व्यवस्था की गयी है और परीक्षा शुल्क को भी नहीं लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नकल अध्यादेश को लेकर हमने कहा था कि इसे हम जरूर लेकर आएंगे। लेकिन किन्हीं कारणों से कैबिनेट होने में देरी हो गयी। कैबिनेट न होने के बावजूद हमने नकल विरोधी अध्यादेश को विचलन से महामहिम राज्यपाल को अग्रसारित कर दिया है। यह भी तय कर दिया है कि अब जितनी भी परीक्षाएं होंगी वो सभी इस अध्यादेश से आच्छादित होंगी। सबसे सख्त कानून जो हो सकता है, वो हमने बनाने का काम किया है। इस कानून के तहत आजीवन कारावास तक की सजा के अलावा दस करोड़ रूपए तक के जुर्माने के सख्त प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अपने छात्रों, बेटों-बेटियों से कहना चाहते हैं कि सभी परीक्षा पारदर्शी होंगी, किसी भी अफवाहों पर न जाएं, परीक्षा की तैयारी पर ध्यान दें, सभी परीक्षाएं निष्पक्ष और शुचिता के साथ होंगी।

सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधायें विकसित करने पर जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने गुरुवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाए जाने के लिए विभिन्न स्तरों में कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम मूलभूत सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूलों में आवश्यकता के अनुरूप कक्षा कक्षों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्कूलों में स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, खेल मैदान और कंप्यूटर आदि भी उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से ऐसे स्कूलों को विकसित किए जाने हेतु साइट स्पेसिफिक प्लान बनाया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए बजट की चिंता न की जाए। एक अच्छे प्रोजेक्ट के लिए किसी भी प्रकार से बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन, अपर सचिव योगेन्द्र यादव, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने विद्युत विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय स्थित अपने सभागार में विद्युत विभाग की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विद्युत विभाग को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आज जो भी कार्य किए जा रहे हैं, उन्हें अगले 10, 15 साल बाद की आवश्यकता के अनुरूप तैयार किया जाए।
मुख्य सचिव ने भावी योजनाओं की डीपीआर टाइमलाइन के साथ तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भविष्य की मांग को देखते हुए सभी प्रोजेक्ट्स टाइमलाइन के साथ पूरे किए जाएं। साथ ही, विद्युत उत्पादन के अन्य स्रोतों के क्षेत्र में देश विदेश की बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन कर उत्तराखण्ड में भी अपनाए जाने की संभावनाओं को तलाशा जाए।
मुख्य सचिव ने पिटकुल को आने वाले 10, 15 सालों की आवश्यकता के अनुरूप सब स्टेशन और लाइन अलाइनमेंट आदि की प्लानिंग तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक लाइंस के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में भारत नेट और ब्रॉडबैंड लाइंस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराए जाने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने मांग की दृष्टि से प्रदेश के पीक सीजन के अनुरूप विद्युत उत्पादन बढ़ाए जाने हेतु अन्य विकल्पों पर भी ध्यान देने की बात कही। कहा कि कैनाल बेस्ड सोलर प्रोजेक्ट्स, हाइड्रो काइनेटिक टर्बाइन की दिशा में भी कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि पुराने छोटे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स का नवीनीकरण, आधुनिकीकरण और उन्नयन का कार्य शुरू किया जाए।
इस अवसर पर सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक उरेडा रंजना राजगुरु एवं ऊर्जा निगमों के प्रबन्ध निदेशक सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेश में पंचकर्मा केन्द्रों को बढ़ावा देने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में आयुष विभाग के अन्तर्गत प्रदेश में पंचकर्मा केन्द्रों को बढ़ावा दिए जाने के सम्बन्ध में बैठक की।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह प्रदेश में आयुर्वेद को मजबूती दिए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए आयुर्वेद में पंचकर्मा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऋषिकेश और देहरादून में विश्वस्तरीय पंचकर्मा केन्द्र बनाए जाएं।
मुख्य सचिव ने कहा कि केरला आयुर्वेद को प्रदेश में बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के डॉक्टर्स सहित 100 प्रतिशत स्टाफ को प्रशिक्षण कराया जाए। डॉक्टर्स को प्रशिक्षण हेतु उच्च स्तरीय संस्थानों में भेजे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए सेमिनार भी आयोजित किए जाने की बात कही। कहा कि आयुर्वेदिक संस्थानों और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को राज्य से जो भी सहायता चाहिए, उन्हें दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि आयुर्वेदिक पद्यति उच्च स्तरीय होने के बावजूद प्रमाणों की कमी के कारण ज्यादा प्रयोग में नहीं ली जाती। उन्होंने कहा कि इसके लिए अनुसंधान और प्रलेखन की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। रिसर्च को बढ़ावा दिए जाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि जानकारी और प्लेटफॉर्म न मिलने के कारण इस दिशा में किए गए कार्यों की किसी को जानकारी नहीं होती। उन्होंने इसके लिए ई-मैगजीन भी संचालित किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसमें सभी के लिए शोध आदि प्रकाशित किए जाएं, ताकि इससे इस दिशा में किए जा रहे कार्यों की सभी को जानकारी हो सके। साथ ही, आमजन को जानकारी के लिए ई-पत्रिका, टीवी चैनल और रेडियो चैनल भी संचालित किए जा सकते हैं।
मुख्य सचिव ने आयुष विभाग को अपनी वेबसाइट भी अपग्रेड करने के निर्देश दिए। कहा कि अपनी वेबसाइट में बीमारी और उनके उपचार के साथ ही प्रदेश में उनसे सम्बन्धित कौन कौन सी सुविधाएं कहां कहां उपलब्ध हैं, सभी प्रकार की जानकारी उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने हाईपरटेंशन, डायबिटीज आदि जैसी आम बीमारियों के कारण एवं उपचार को भी इसमें शामिल किए जाने की बात कही।
मुख्य सचिव ने इस क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे फर्जी डॉक्टर्स और संस्थानों को रोकने हेतु सिस्टम विकसित किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए संस्थानों को रजिस्टर किए जाने के साथ ही मान्यता पर भी कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सचिव आयुष डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

आवश्यकता की वस्तुओं को राज्य में ही निर्माण करने पर सीएस का जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में शासन और विभाग के सभी अधिकारियों के साथ प्रदेश में निवेश योग्य योजनाओं के सम्बन्ध में चर्चा की। उन्होंने नियोजन विभाग से खरीद वरीयता नीति तैयार करने के निर्देश दिए। इस पॉलिसी के तहत विभागों से जानकारी मांगी जाए कि किस विभाग को किस प्रकार की खरीद करनी होती है। इसके अनुसार प्रदेश में ही वस्तुओं आदि का उत्पादन पर फोकस किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए प्रत्येक विभाग से एक प्रारूप में सभी प्रकार की जानकारियां मांगी जाएं ताकि प्रदेश में इन खरीदे जाने वाली वस्तुओं का उत्पादन किया जाए। इससे प्रदेश में उत्पादित होने से रोजगार तो उत्पन्न होगा ही साथ ही राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खपत संचालित योजनाओं से प्रदेश को लाभ होगा।
मुख्य सचिव ने लैंड बैंक को पोर्टल पर अपलोड किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग लैंड बैंक पोर्टल पर अपने लिए सबसे उपयुक्त भूमि की तलाश कर सकेगा। इससे उस भूमि पर योजना की सफलता के अधिक सम्भावना होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन विभाग के पास पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए विभिन्न जगहों पर अपनी भूमि हैं। पर्यटन विभाग के लिए पर्यटन से सम्बन्धित गतिविधियों के लिए उसकी लोकेशन बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। और पर्यटन इन भूमियों को प्रयोग करने की योजनाएं बना रहा है, परन्तु आसपास में किसी अन्य विभाग की भूमि है जो पर्यटन की उस योजना के लिए, अधिक अनुकूल है। तो पर्यटन विभाग को अपनी भूमि के बजाय उस अधिक उपयुक्त भूमि पर निवेश करने की आवश्यकता है न कि अपनी भूमि पर। उन्होंने कहा कि विभागों के पास जो भी भूमियां हैं वह सार्वजनिक सम्पत्ति है, जो विभाग को उनके कार्यों के लिए दी गयी है। उन्होंने अधिकारियों द्वारा उनके विभाग की भूमि में उन्हीं के विभाग से सम्बन्धित योजनाओं का ही संचालन हो, की मानसिकता को त्यागे जाने की जरूरत बताया। कहा कि प्रदेश के हित में जिस भूमि का जिस कार्य अथवा योजना के लिए अधिक उपयोगिता होगी, उसी कार्य के लिए प्रयोग की जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पोषक अनाजों पर अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस दिशा में योजनाएं तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्यान विभाग को हॉर्टी टूरिज्म की दिशा में योजनाएं लाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग को धनौल्टी की तर्ज पर प्रदेशभर में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिए जाने की भी बात कही। मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून मसूरी के आवासीय विद्यालय भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। इस प्रकार के आवासीय विद्यालयों पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। इससे सिर्फ इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी जिससे प्रदेश और प्रदेशवासियों को किसी न किसी रूप में लाभ मिलेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में बहुत से निवेश और उद्योग छोटी-छोटी समस्याओं के कारण अटक जाते हैं। इनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री स्तर पर तीन स्तर में समितियां गठित की जा सकती हैं। पहले स्तर पर शासन स्तर पर समस्या का निराकरण किया जाए। यदि वहां समस्या का निस्तारण नहीं होता तो मुख्य सचिव स्तर पर किया जाएगा उसके बावजूद नहीं हो सकेगा तो मुख्यमंत्री स्तर पर गठित समिति उस समस्या का निस्तारण करेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार एवं अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।