उत्तराखंडः हर बड़े शहर में ऑडियोटोरियम, इन्डोर एवं आउटडोर स्टेडियम बनाएं जाएंगे

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु ने सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागीय मुखियाओं को अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने राज्य को मिले लक्ष्य के अनुरूप विभागों द्वारा प्रस्ताव न आने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि राज्य में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है इसके बावजूद विभाग प्रस्ताव नहीं भेज पा रहे हैं, यह स्थिति ठीक नहीं है।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के हर बड़े शहर में ऑडिटोरियम, इन्डोर एवं आउटडोर स्टेडियम बनाए जाएं। उन्होंने खेल सुविधाओं के लिए पूरे प्रदेश का मास्टर प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि प्राथमिकताएं तय करते हुए अगले 5-10 सालों का प्लान तैयार किया जाए। प्रदेश के रिवर फ्रंट डेवेलपमेंट की योजनाओं के लिए पर्यटन विभाग को एंकर विभाग बनाया जाए ताकि रिवर फ्रंट डेवेलपमेंट के कार्यों को पर्यटन की दृष्टि से तैयार किया जा सके।

मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को स्कूलों में विद्यालय भवनों, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय आदि निर्माण में तेजी लाते हुए शीघ्र प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों द्वारा योजना की अगली किस्त के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र दिए जाने हैं, शीघ्र उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएं। एस.ए.एस. योजनाओं की तकनीकी मूल्यांकन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि केन्द्र द्वारा दी जा रही विशेष सहायता का लाभ राज्य को मिल सके।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, एसएन पाण्डेय सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

पर्वतीय जनपदों में पार्किंग के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जाना अत्यन्त आवश्यकः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में प्रदेश में बनने वाली सभी टनल, ऑटोमेटेड और सरफेस पार्किंग की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड एक पर्वतीय प्रदेश होने के कारण यहां पार्किंग एक बहुत बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में पार्किंग के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने लगातार प्रयास कर प्रदेश में अधिक से अधिक पार्किंग्स बनाए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने पार्किंग्स के निर्माण में धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रदेश में सभी प्रकार की पार्किंग्स के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने टनल पार्किंग्स की साप्ताहिक मॉनिटरिंग करते हुए शीघ्र कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में छोटी-छोटी परन्तु अधिक संख्या में पार्किग्स बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पार्किंग की प्रगति की साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। लगातार बैठकें आयोजित करा कर समस्याओं का निस्तारण किया जाए। समस्या का समाधान निर्धारित समय में न होने पर मुख्य सचिव स्तर पर बैठक आयोजित कराई जाए।
बैठक के दौरान बताया गया कि प्रदेश में टनल पार्किंग के लिए 11 स्थानों को चिन्हित किया गया है। जिनमें 7 की डीपीआर तैयार हो रही है, 1 की डीपीआर स्वीकृत हो गई हैं। 2 की तकनीकी जांच गतिमान हैं। बताया गया कि ऑटोमेटेड पार्किंग के लिए 9 लोकेशन चिन्हित की गई हैं। 5 प्रस्तावों को राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत दे दी गई है। 2 की डीपीआर तैयार की जा रही है, 1 की डीपीआर तैयार है स्वीकृति की जा चुकी है, 1 भूमि की एनओसी स्तर पर लंबित है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन एवं सचिव एस. एन. पांडेय सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

राज्य हित में जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये गठित यूआईआईडीबी के परिणाम शीघ्र धरातल पर उतारेंः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यू.आई.आई.डी.बी.) की पहली बोर्ड बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव डॉ.एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव मुख्यमंत्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विनय शंकर पाण्डे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बोर्ड एवं कार्य समिति की संरचना के साथ ही 10 करोड के प्रारम्भिक कॉरपस कोष के गठन को भी मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी परियोजनाओं की पहचान कर उनका प्राथमिकता के साथ उनका सफल क्रियान्वयन हो इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। राज्य में हवाई अड्डों के विकास एवं विस्तार, दूरसंचार अवसंरचना, मेडिकल कॉलेजों के विकास, नई टाउनशिप-आवास, औद्योगिक लॉजिस्टिक गलियारे, पर्यटन संबंधी निर्माण विकास जैसी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र की परियोजनाओं के विकास के लिए अत्यधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि राज्य में वित्तीय संसाधनों की सीमितता के दृष्टिगत राज्य के आधारभूत अवसंरचनात्मक ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु इस क्षेत्र के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पूंजी निवेशकों को आकर्षित किया जाना आवश्यक है। इसके लिए लोक निजी सहभागिता (पी०पी०पी०) परियोजनाओं के प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के बुनियादी ढांचागत विकास के क्षेत्र में निरन्तर परिवर्तित हो रहे परिदृश्य एवं विकास की नवीन आवश्यकताओं के दृष्टिगत उत्तराखंड राज्य में आधारभूत ढांचे के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने हेतु और पी०पी०पी० परियोजनाओं को विकसित करने हेतु उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड (यू.आई.आई.डी.बी.) गठित किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि राज्य हित में जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये यू.आई.आई.डी.बी. का गठन किया गया उसके परिणाम शीघ्र धरातल पर दिखाई दे इसके लिये प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य किया जाय।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि बोर्ड की संरचना तथा कार्यकारी समिति से संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों सहित अच्छे विषय विशेषज्ञों को भी नामित किया जाय। यदि बोर्ड से अच्छे और अनुभवी विशेषज्ञ जुडेंगे तो कार्यों का संचालन भी बेहतर ढंग से हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिन योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना है उनकी प्राथमिकता तय कर समयबद्धता के साथ उन्हें पूरा करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिये कि हरिद्वार, ऋषिकेश कोरिडोर, शारदा कोरिडोर के साथ वेडिंग डेस्टिनेशन के लिये प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर स्थान चयन में प्राथमिकता दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य वेडिंग डेस्टिनेशन के लिये त्रिजुगीनारायण के अलावा कई और भी सुरम्य स्थल है। राज्य को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भी निर्देश है। अतः इस दिशा में तेजी से कार्य किया जाय। इसके लिये उन्होंने वेडिंग प्लानर की सेवा लेने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में दो नई टाउनशिप के प्रस्तावों पर भी शीघ्र कार्यवाही के साथ बिहारीगढ के आसपास के क्षेत्रों के विकास के साथ रेसकोर्स, यमुना कॉलोनी, एच.एम.टी. रानीबाग के पुनर्विकास की योजनाओं पर भी ध्यान देने को कहा।

सीएम धामी से बीआरओ के महानिदेशक ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिवालय में बी.आर.ओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने बीआरओ द्वारा पिथौरागढ़ में बनाई जा रही बलुआकोट से तवाघाट और लिपुलेख से जोलिंगकोंग सड़क मार्ग की कार्यवाही के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में आदि कैलास और पार्वतीकुंड आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। राज्य में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि की संभावनाओं को दृष्टिगत राज्य सरकार आगामी 50 सालों की व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बी.आर.ओ. द्वारा राज्य में किये जा रहे कार्यों में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जायेगा।
महानिदेशक बी.आर.ओ. रघु श्रीनिवासन ने कहा कि बीआरओ द्वारा उत्तराखण्ड में 05 एयरफील्ड गूंजी, कालसी, टनकपुर, घनसाली और नाविढ़ांग को विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि जोशीमठ से औली सड़क मार्ग जिसकी लम्बाई 13.40 कि.मी. है उसके 2.25 कि.मी. पर भारतीय सेना द्वारा रखरखाव किया जा रहा है। उन्होंने सामरिक महत्व के इस मार्ग के अवशेष भाग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य लोक निर्माण के स्थान पर बी.आर.ओ. को हस्तांतरित कर दिया जाय। इसी प्रकार जोशीमठ के बड़गांव के हनुमान शिला से औली के लिये 15 कि.मी. वैकल्पिक मार्ग के निर्माण को भी बी.आर.ओ. को सौंपा जाए।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, चीफ इंजीनियर लोक निर्माण विभाग दीपक कुमार यादव एवं बी.आर.ओ. के अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस ने प्रदेश के किसानों को उनके उत्पादों को अधिक लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास करने दिए निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए बनाए गए अम्ब्रेला ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के किसानों को उनके उत्पादों का अधिक से अधिक लाभ दिया जा सके और उनके उत्पादों को एक अच्छी ब्रांडिंग और बाजार मिल सके इसके लिए सभी संबंधित विभागों द्वारा लगातार प्रयास किए जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज के लिए विश्वस्तरीय वेबसाइट तैयार की जाए, साथ ही मोबाइल ऐप भी तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों से उत्पाद खरीदने के बाद वैल्यू एडिशन के लिए पूरे प्रदेश में उत्पादन क्षेत्रों के आसपास ही प्रोसेसिंग और पैकेजिंग सेंटर तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज में उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने के बाद ही शामिल किया जाए। गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले स्थानीय उत्पादों को लगातार हाउस ऑफ हिमालयाज में शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने हाउस ऑफ हिमालयाज को शीघ्र शुरू किए जाने हेतु प्रत्येक स्तर के पूर्ण होने की टाईमलाईन निर्धारित करते हुए निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि हाउस ऑफ हिमालयाज को विश्वस्तरीय ब्रांड बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों द्वारा अपने अंतर्गत उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सचिव राधिका झा एवं अपर सचिव मनुज गोयल, आनन्द स्वरूप सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम ने उत्तराखंड को विश्व का सर्वश्रेष्ठ योग गंतव्य बनाने के लिए नई योग नीति शीघ्र लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड को आयुष और वेलनेस के क्षेत्र में प्रमुख डेस्टिनेशन बनाने के प्रभावी कार्य योजना के साथ कार्य किये जाएं। उत्तराखण्ड को विश्व का सर्वश्रेष्ठ योग गंतव्य बनाने के लिए नई योग नीति शीघ्र लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पंचकर्मा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किये जाएं। राज्य में जड़ी बूटियों के उत्पादन को और बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए आयुष विभाग उद्यान और वन निगम से समन्वय कर संग्रह और विपणन की उचित व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों तक आयुष चिकित्सा की उपलब्धता पर ध्यान दिये जाने की जरूरत बताते हुये कहा कि आयुष के क्षेत्र में निजी भागीदारी के साथ गुणवत्ता युक्त आयुष चिकित्सालयों की स्थापना पर भी ध्यान दिया जाय। आयुष के क्षेत्र को बढावा देने के लिये जडी बूटी कृषकों के उत्पादों के विपणन के लिये उचित प्लेटफार्म की व्यवस्था बनाने के भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये। स्कूली छात्रों को आयुष संबंधी जानकारी दिये जाने के लिये आयुर्विधा कार्यक्रमों के संचालन में तेजी लाये जाने के प्रयासों की जरूरत बताते हुये उन्होंने सभी स्कूलों में इसकी व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने तथा आयुष नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में भी शीघ्रता के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने आयुष के क्षेत्र में बेहतर कार्य संचालन के लिये वेलनेस केंद्रों की स्थापना, आयुष सेवाओं के प्रमाणीकरण तथा आयुष चिकित्सकों एवं फार्मशिस्टों को प्रसिद्ध आयुष विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण की व्यवस्था पर ध्यान देने को कहा। इससे आयुष चिकित्सा को जनता से जोडने में मदद मिलेगी।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में आयुष नीति लागू की गई है। इसमें वेलनेस, स्वास्थ्य, आयुष उत्पादन, आयुष शिक्षा और शोध एवं औषधीय पादपों की खेती से संबंधित प्राविधान किये गये हैं। नीति में उच्च गुणवत्ता युक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के उत्पादन को प्रोत्साहन किये जाने, गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेज (जीएपी) के अंतरराष्ट्रीय मानक का पालन किये जाने की अनिवार्यता, ड्रोन आधारित नवीनतम तकनीक का प्रयोग, पीपीपी मोड पर कोल्ड स्टोरेज की स्थापना, औषधीय पादपों के विक्रेताओं (कृषकों, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं) तथा क्रेताओं (औषध-निर्माताओं) को एक मंच पर लाए जाने हेतु ऑनलाइन प्लेटफार्म की स्थापना, औषधीय पादपों के लिए ‘एश्योर्ड बाय-बैक’ योजना, राज्य में अग्रणी निर्माताओं एवं प्रतिष्ठित विपणन एजेंसी के सहयोग से उत्तराखंड में उगाए जाने वाले प्रमुख औषधीय पादपों की ब्रांडिंग के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश शामिल किये गये हैं।

आयुष नीति में नवीनतम एमएसएमई नीति तथा मेगा औद्योगिक व निवेश नीति आयुष विनिर्माण इकाइयों पर भी लागू की गई है। सभी आयुष विनिर्माण इकाइयों के लिए 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त पूंजीगत सहायता, आयुष उत्पादों की गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए राज्य के 2-3 महत्वपूर्ण स्थानों पर सामान्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना को प्रोत्साहन, आयुष उत्पादों हेतु आयुष प्रीमियम मार्क/आयुष स्टैंडर्ड मार्क प्राप्त किया जाना अनिवार्य किया गया है। इस नीति में आगामी 5 वर्षों में एनएबीएच से प्रत्यायन प्राप्त करने वाले प्रत्येक आयुष चिकित्सालय/आयुष हेल्थकेयर क्लिनिक को एनएबीएच से प्रत्यायन प्राप्त करने हेतु निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति, आयुष टेली कंसल्टेशन ऐप प्रारंभ किए जाने की योजना शामिल की गई है।

आयुष के क्षेत्र में राज्य पर्यटन नीति, 2023 के माध्यम से वेलनेस रिसोर्ट, आयुर्वेद / योग/ नेचुरोपैथी रिसोर्ट को 50 प्रतिशत तक की पूंजीगत सहायता तथा श्रेणी बी और श्रेणी सी क्षेत्रों में स्थापित होने वाले वेलनेस केंद्र, आयुर्वेद / योग/ नेचुरोपैथी रिसोर्ट को 5 प्रतिशत की अतिरिक्त पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। आयुष शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आयुष कॉलेजों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से निर्धारित मानकों को पूर्ण करने वाले आयुष कॉलेजों को 15 लाख तक की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान किये जाने का प्राविधान किया गया है।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण समिति विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव आयुष डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय एवं आयुष विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने की उद्योग विभाग की समीक्षा, स्वरोजगार से रोजगार पर किया फोकस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उद्योग विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड इन्वेस्टर्स समिट के तहत हुए करारों की ग्राउंडिंग के लिए और तेजी से कार्य किये जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड के तहत हुए करारों की ग्राउंडिंग के लिए संबंधित विभागों द्वारा किये गये कार्यों का प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पूरा ब्योरा देने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थानों में राज्य के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर मिल सके, इसके लिए रोजगार मेलों के आयोजन किये जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों और जिन नीतियों में संसोधन की आवश्यकता है, उनका प्रस्ताव जल्द लाया जाए। उन्होंने अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल पार्क, काशीपुर में बनने वाले इलेक्ट्रोनिक पार्क, सितारगंज में बनने वाले प्लास्टिक पार्क के लिए राज्य स्तर से होने वाली कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। राज्य में रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई आई.टी.पॉलिसी को भी जल्द लाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। निर्यात संवर्द्धन के लिए डेडिकेटेड सेल बनाने के साथ देहरादून-ऋषिकेश में कन्वेंशन सेंटर की स्थापना के लिए भी शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।
बैठक में जानकारी दी गई कि उद्योग विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 13640 करोड़ के निवेश का लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 28800 करोड़ का निवेश की ग्राउडिंग की जा चुकी है। इस वित्तीय वर्ष में अभी तक निवेश की ग्राउडिंग में 250 प्रतिशत वृद्धि हो चुकी है। मार्च 2024 तक 17200 करोड़ के और निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग का लक्ष्य है। जबकि 46 हजार रोजगार सृजन का लक्ष्य भी पूर्ण किया जा चुका है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के तहत राज्य में 215 यूनिट का रजिस्ट्रेशन हुआ है। जिसमें 5-5 गोल्ड और सिल्वर तथा 205 ब्रांज सेर्टिफिकेशन शामिल हैं। राज्य में 6180 एकड़ का लैंड बैंक बनाया गया है। राज्य में जिन परियोजनाओं पर कार्यवाही गतिमान है, उनमें एरोमा पार्क काशीपुर, प्लास्टिक पार्क सिंतारगंज, इलेक्ट्रोनिक पार्क काशीपुर, फूड पार्क कोटद्वार के निर्माण का कार्य गतिमान हैं। इसके साथ ही हरिद्वार में 200 करोड़ की लागत से 5 लाख स्क्वायर फीट में फ्लेटेड फैक्ट्री का निर्माण, पंतनगर और हरिद्वार में रेन्ट बेस एकमोडेशन के लिए 60 करोड़ की लागत 2 एकड़ में भवन निर्माण किया जायेगा। निवेशकों की सुविधाओं के लिए उद्योग विभाग द्वारा अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री को सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय द्वारा राज्य को ओडीओपी के तहत राष्ट्रीय स्तर पर प्रदान किये गये द्वितीय पुरस्कार की शील्ड तथा प्रमाण पत्र सौंपा गया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विनय शंकर पाण्डेय, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सतत विकास लक्ष्यों का नियमित रूप से अनुश्रवण करने के सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में नियोजन विभाग की समीक्षा करते हुए नियोजन विभाग के तहत कार्यरत विभागों एवं प्रकोष्ठों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिये। उन्होंने विकास से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने तथा उनके प्रभावी अनुश्रवण तथा राज्य में बेहतर नियोजन प्रणाली, प्रभावी नीति निर्धारण एवं नवाचारों को प्रोत्साहन देने के लिए गठित स्टेट इंस्टीट्यूट इम्पावरिंग एण्ड ट्रांसफार्मिंग उत्तराखण्ड (सेतु) को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियोजन विभाग द्वारा सरकार की सभी योजनाओ की प्रभावी समीक्षा की जाए। राज्य के संसाधनों के कुशल और प्रभावी उपयोग के साथ विभागों के मध्य आपसी समन्वय, भागीदारी तथा नेटवर्किंग व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये। उन्होंने सशक्त उत्तराखण्ड के अन्तर्गत राज्य की अर्थव्यवस्था को 05 वर्षों में दोगुना करने के प्रयासों, सतत विकास लक्ष्यों का नियमित रूप से अनुश्रवण करने के भी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने पूर्व में सभी विभागों से एक-एक ऐसी योजना पर कार्य करने को कहा था, जो प्रदेश के विकास में गेम चेंजर साबित हो। इस संबंध में उन्होंने नियोजन विभाग को निर्देश दिये कि विभागों द्वारा इसके लिए किये गये प्रयासों का पूरा विवरण लेकर, रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने नीति आयोग द्वारा संचालित नवाचारी कार्यों के राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास तथा आधारभूत सुविधाओं के लिए नीति आयोग स्तर पर चयनित 06 आकांक्षी जनपदों और राज्य स्तर पर चयनित 09 आकांक्षी जनपदों में संचालित कार्यक्रमों एवं योजनाओं के नियमित अनुश्रवण के निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने राज्य में संचालित विभिन्न परियोजनाओं में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण के भी निर्देश दिये, ताकि योजनायें गुणवत्तापूर्वक समय पर पूर्ण हो। बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘‘परिवार पहचान पत्र उत्तराखण्ड/हमार कुटुम्ब’’ से संबंधित प्रगति की भी जानकारी ली।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण समिति विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा, नियोजन विभाग से मनोज पंत एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

आपदा मोचन तथा आपदा न्यूनीकरण निधि के प्रस्तावों को लेकर हुई बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य आपदा मोचन निधि एवं राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के प्रस्तावों के अनुमोदन हेतु राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक आयोजित हुयी।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समिति में प्रस्तावों के लाने से पूर्व जिला स्तरीय एवं राज्य स्तरीय मूल्यांकन समिति द्वारा प्रस्तावों की जांच अनिवार्य रूप से करा ली जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर विभिन्न जनपदों द्वारा प्रस्तावों की स्वीकृति के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएं अपनाई जा रही है। इसमें सुधार लाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी जनपदों से सुझाव मांगते हुए प्रस्तावों के अनुमोदन के लिए एक समान प्रक्रिया अपनाए जाने के निर्देश दिए।

शीतलहर को देखते हुए मुख्य सचिव ने जनपदों द्वारा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त धनराशि के प्रस्ताव शासन को शीघ्र प्रेषित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य में शीतलहर के प्रकोप से बचाव के लिए जनपद पौड़ी के लिए 15 लाख सहित बाकी 12 जनपदों को 10 -10 लाख (कुल ₹135 लाख) आबंटित कर कार्याेत्तर स्वीकृति सहित विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति दी गयी।

इस अवसर पर सचिव रंजीत कुमार सिन्हा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जनपदों से जिलाधिकारी सहित शासन से अन्य वरिष्ठ उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

नशीले पदार्थों के प्रचलन को रोकने को एनडीपीएस एक्ट में करें कार्रवाईः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में राज्य स्तरीय एनसीओआरडी की बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि नशीले पदार्थों पर प्रभावी रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनायी जाए। उन्होंने दवाइयों के रूप में नशीले पदार्थों के प्रचलन को रोकने के लिए भी एनडीपीएस एक्ट के तहत लगातार कार्रवाई किये जाने के निर्देश दिए। इसके लिए संयुक्त टीम बनाकर छापेमारी की कार्रवाई की जाय। हल्द्वानी और कोटद्वार में बनाये जा रहे नशा मुक्ति केन्द्रों की संचालन की शीघ्र कार्यवाही की जाए। उत्तराखण्ड के बोर्डर एरिया में नशीले पदार्थों की तस्करी को पूर्णतया रोकने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जाय।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान वर्चुअल माध्यम से जुड़े ‘नशा मुक्त शहर-नशा मुक्त गांव’ के अन्तर्गत चिन्हित 85 गांव/वार्ड के ग्राम प्रधानों और वार्ड मेम्बर को ‘जिंदगी को हां नशे को ना’ की शपथ भी दिलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025 तक उत्तराखण्ड को ड्रग्स फ्री राज्य बनाने के लिए सभी विभागों को प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान में अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जाए। पुलिस, स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, समाज कल्याण विभाग और जनपद स्तर पर जिलाधिकारी ड्रग्स फ्री उत्तराखण्ड के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलायें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जेलों में ड्रग काउंसलिंग सेंटर बनाये जाएं। शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा और नशे के दुष्प्रभाव से संबंधित विषय शामिल करें। नशा मुक्ति के लिए जागरूकता के साथ ही नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए हर स्तर पर प्रयास किये जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और उच्च शिक्षा विभाग नशा मुक्ति के लिए प्रभावी कार्ययोजना भी तैयार करे। सभी जिलाधिकारी यह प्रयास करें कि उनका जनपद सबसे पहले नशे से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के लिए प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में सेल बनाने की आवश्यकता प्रतीत होती है, तो बनाये जाएं।

बैठक में शासन के अधिकारियों और जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा नशा मुक्ति के लिए अपने सुझाव दिये गये। इस अवसर पर विश्वविद्यालयों में ड्रग्स कंट्रोल क्लब बनाने, नशा मुक्ति के लिए ई.प्रतिज्ञा लेने, नशा मुक्ति अभियान में महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने, नशे को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल, विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान से सबंधित सुझाव दिये गये।

बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अभिनव कुमार, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, सचिव एच.सी. सेमवाल,डॉ. आर. राजेश कुमार, विजय कुमार यादव, विशेष सचिव गृह रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव रंजना राजगुरू, निवेदिता कुकरेती, डीआईजी पी. रेणुका देवी वर्चुअल माध्यम से नारकोक्सि कंट्रोल ब्यूरो के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ज्ञानेन्द्र सिंह, सभी जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।