आत्मनिर्भर व डिजिटल लेनदेन के लिए फेरी व्यवसाइयों को किया जागरुक

अवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय भारत के निर्देश पर नगर पालिका परिषद मुनिकीरेतीे-ढालवाला के फेरी व्यवसाइयों को पीएम स्वनिधि योजना (मैं भी डिजिटल) के तहत आत्मनिर्भर बनाने और डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरुक किया गया।

पालिका सभागार में आयोजित पीएम स्वनिधि योजना के तहत लगाए गए प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हुए पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने बताया कि आधुनिक युग में डिजिटल लेनदेन की जानकारी होने के बाद धोखाधड़ी जैसे मामलों से बचा जा सकता है। कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत पालिका फेरी व्यवसाइयों का पूर्ण सहयोग करने में लगी है। ईओ बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि पालिका क्षेत्र के अधिकांश फेरी व्यवसाइयों को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ मिल चुका है।

कहा कि कोरोना में लगे लाॅकडाउन के कारण फेरी व्यवाइयों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है। इससे उबारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत फेरी व्यवसाइयों को 10 हजार रुपए का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। बताया कि पालिका क्षेत्र में 184 फेरी व्यवसाई हैं। इनमें 80 प्रतिशत से अधिक को ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरुक करने के लिए प्रत्येक फेरी व्यवसाई को बैंक, पेटीएम, गूगल पे और भीम पे आदि की ओर से बारकोड उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिजिटल लेनदेन के लिए मोबाइल का बैंक में लिंक होना अति आवश्यक है। इससे फेरी व्यवसाई के खाते में लेनदेन होने पर मोबाइल पर मैसेज की सुविधा मिल सकेगी। बताया कि इस योजना के तहत फेरी व्यवसाइयों को डिजिटल लेनदेन पर 100 रुपए मासिक कैशबेक भी प्राप्त होता है। इसके बाद विभिन्न बैंको से आए प्रतिनिधियों ने फेरी व्यवसाइयों को बारकोड बांटे और मोबाइल पर डिजिटल लेनदेन करने की जानकारी दी।

मौके पर आईओबी बैंेक के शाखा प्रबंधक अजिताभ, यूनियन बैंक से शशांक बिजल्वाण, एसबीआई स्वर्गाश्रम से ज्योति, पीएनबी से मनोज राणा, बैंक आॅफ इंडिया से अमित ध्यानी, सिटी मिशन मैनेजर अरविंद जोशी, नीलम उनियाल, अनिता नेगी, स्वास्थ्य लिपिक दीपक कुमार, कर अधीक्षक अनुराधा गोयल और फेरी व्यवसाई उपस्थित थे।

स्वरोजगार पर आधारित वीडियो गीत यू-ट्यूब पर हुआ लांच

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने स्वरोजगार पर आधारित ऑडियो-वीडियो गीत यू-ट्यूब पर लॉन्च किया। इस गीत को बीबी इंटरटेनमेंट चैनल पर अपलोड किया गया है तथा इस गीत के गीतकार एवं गायक भूपेन्द्र सिंह बसेड़ा हैं। इस गीत में हाल ही में लॉन्च की गयी ‘‘मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना’’ का उल्लेख करते हुये बेरोजगारों को स्वरोजगार अपनाने तथा स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रेरित किया गया है।

गीत में योजनान्तर्गत कौशल विकास, आसान ऋण की सुविधा, प्रशिक्षण आदि के साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा होने व वेबसाइट का उल्लेख किया गया है। गीत की लॉन्चिंग के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने निर्माताओं को बधाई दी एवं कहा कि इस गीत के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार अपनाने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा।

इस अवसर पर पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार एसएस नेगी, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव आरके सुधांशु, अमित नेगी, आर मीनाक्षी सुंदरम, दिलीप जावलकर आदि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार कर रहा महिलाओं का सहायता समूह

रायवाला क्षेत्र की महिलाओं के समूह राधा कृष्णा निस्वार्थ सेवा समिति की ओर से तीर्थनगरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार किया जा रहा हैं। महिलाओं के समूह द्वारा समय-समय पर समाजिक कार्य किये जाते है। वहीं समूह द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लघु उधोग शुरू किए गए। जिसमें महिलाओं को पापड़, आचार, मोमबत्ती, दीपक बनना आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही दीपावली के त्यौहार में बच्चों को गिफ्ट देने की तैयारी भी की जा रही हैं।
महिलाओं के समूह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सन्देश से प्रभावित हो कर क्षेत्र की महिलाओं को घर-घर रोजगार से जोड़कर आमदनी का सहारा दिया जा रहा हैं।

समूह के कार्यों से ग्रामीण महिलाओं में काफी उत्साह हैं। संस्था की फॉउंडर एवं अध्यक्ष ममता गुसाईं, क्षेत्र के वार्ड सदस्य आशीष जोशी, अनिता शर्मा, कमला अधिकारी, शांति देवीमल, लीला शर्मा, बबिता गिरी, पारू शाही आदि उपस्थित रहे।

उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य में यह नई पहल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’ की प्रथम बैठक आयोजित की गई। राज्य में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने ‘‘स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता पर मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’’ स्थापित किया है। राज्य में स्टार्टअप ईकोसिस्टम विकसित करने के लिए इस समूह द्वारा नवाचार और उद्यमिता के लिए राज्य में एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने, अनुसंधान और नये उत्पादों, सेवाओं, व्यापार मॉडल के विकास को प्रोत्साहित करने, उपयुक्त पॉलिसी योजनाओं और आवश्यक समर्थन प्रणाली को विकसित करने हेतु परामर्श देना है। इसके अलावा पाठ्यक्रम, मॉड्यूल प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में नवाचार और उद्यमशीलता के बारे में जागरूकता, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों और एजेंसियों के साथ आवश्यक साझेदारी हेतु सलाह देना है। बनाए गए ‘मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’ में 07 सरकारी एवं 06 गैर सरकारी सदस्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकल के लिए वोकल बनने की जो बात कही गई यह उस दिशा में प्रयास है। उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य में यह नई पहल की जा रही है। जिसमें सरकारी के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के गैर सरकारी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इन विशेषज्ञों की सलाह से राज्य के औद्योगिक विकास एवं हिमालयी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड विविध जैव विविधताओं वाला राज्य है, यहां कि जैव विविधता का फायदा लेते हुए इस दिशा में अनेक कार्य हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे नवोदित राज्य में औद्योगिक विकास की बहुत संभावनाएं हैं। राज्य में इन्वेस्टर समिट के दौरान सवा लाख करोड़ के एमओयू हस्ताक्षरित किये गये। जिसमें से 25 हजार करोड़ के कार्यों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोविड 19 के जिस दौर से हम गुजर रहे हैं, उससे औद्योगिक गतिविधियां जरूर प्रभावित हुई हैं। इस दौर दिक्कतें भी आई हैं और नई संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस समूह के विशेषज्ञों द्वारा उत्तराखण्ड में मेडिकल एवं मेंटल हेल्थ को लेकर क्या कार्य हो सकते हैं, इस पर जरूर सुझाव दें। उन्होंने कहा कि ग्रुप के सभी सदस्यों के सुझावों पर गम्भीरता से कार्य किया जायेगा।

वीडियो कांफ्रेंस से विशेषज्ञों के सुझाव
वीडियो कांफ्रेंस से कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों और अवसरों, नवाचार और उद्यामिता को बढ़ावा देने के लिए नई पहलों पर चर्चा की गई। इंडियन एंजल नेटवर्क के फाउण्डर डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि राज्य में उद्यमिता के विकास के लिए जो भी योजना बने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से बने। स्टार्टअप के तहत जॉब क्रियेशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। उत्तराखण्ड के उत्पादों की अलग ब्रांडिंग हो, वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। नैना लाल किदवई ने कहा कि रूरल टूरिज्म एवं होम स्टे को बढ़ावा दिया जाय। एग्रो प्रोसेसिंग एवं फोरेस्टरी सेक्टर में अनेक कार्य किये जा सकते हैं। विनीत नायर ने कहा कि मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में अनेक कार्य हो सकते हैं। हमें सबसे पहले बच्चों के मेंटल हेल्थ पर फोकस करना होगा। स्टार्टअप का भविष्य साइंस और तकनीक पर आधारित है। इस दिशा में पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रमन रॉय ने कहा कि लाईवलीहुड बिजनेस पर ध्यान देने की जरूरत है। राज्य बिजनेस के कल्चर को प्रमोट करने की जरूरत है। विभिन्न सेक्टर में कार्य करने के लिए प्रत्येक सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने होंगे। संजीव बिखचंदानी ने कहा कि राज्य में कुछ बड़े उद्योग स्थापित करने होंगे। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत अनेक कार्य किये जा सकते हैं।

राज्य को निवेशकों के लिए आदर्श प्लेटफार्म देने में हम कृत संकल्पः त्रिवेन्द्र

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से स्टेट बिजनेस रिफार्म एक्शन प्लान 2019 के चैथे एडिशन के तहत ईज आफ डूईंग बिजनेस के क्षेत्र में राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की रेकिंग जारी की। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें शामिल हुए। रैकिंग में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा तेलंगाना क्रमश प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे। उत्तराखण्ड 2015 में 23वें स्थान पर था जो अब 11वें स्थान पर आ गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2019 की ईज ऑफ डूईंग बिजनेस रैंकिंग की घोषणा के अवसर पर कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 से राज्यों की ईज ऑफ डूईंग बिजनेस रैंकिंग जारी की जा रही है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के अंतर्गत राज्यों द्वारा किये जा रहे रिफॉर्म, केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों के बीच सकारात्मक साझेदारी की अनूठी मिसाल है।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के पश्चात निर्धारित रिफॉर्म एक्शन प्लान राज्यों को निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए एक समुचित रोड मैप प्रदान करता है। उत्तराखण्ड ने आरंभ से ही ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के क्षेत्र में लगातार सक्रियता से कार्य किया है। वर्ष 2015 की पहली रैंकिंग में हम 23वें स्थान पर थे और वर्ष 2019 में 11वें स्थान पर रहे हैं। उत्तराखण्ड राज्य राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि प्राप्त करने वाले राज्यों की श्रेणी में सम्मिलित हो इसके लिये प्रभावी प्रयास किये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के अंतर्गत निवेश से सम्बन्धित आवश्यक क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। बावजूद इसके इसमें स्वच्छ पर्यावरण एवं जलवायु, बेहतर कानून व्यवस्था, अनुशासित वर्कर्स एवं उत्पादकता तथा श्रमिक विवादों की अनुपस्थिति आदि हमारे राज्य के सकारात्मक क्षेत्र है। ये परिस्थितियां निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उत्तराखण्ड राज्य को निवेशकों के लिए एक आदर्श गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में हम कृत संकल्प है। इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा राज्य में निवेश हेतु उद्यमियों को अनेक सहुलियतें दिये जाने से सम्बन्धित कार्ययोजना बनायी है, जिसका परिणाम शीघ्र धरातल पर दिखायी देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उद्यौगों के अनुकूल माहोल तैयार करने के साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा आत्म निर्भर भारत के लिए की गई पहल को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा कारगर प्रयास किये जा रहे है, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही एक जनपद एक उत्पाद की दिशा में भी योजना बनायी जा रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने आखिर क्यों कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारे ढ़ोंग

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर तीखा व्यंग्य कसा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारों को कोर्ट ने ढोंग करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा देने के मामले में ‘पाखंडी’ साबित हुई है। हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी विभिन्न क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस उपलब्ध कराने के लिए निकले टेंडरों में कंपनियों की योग्यता के पैमाने में बदलाव को लेकर की है।
हाईकोर्ट की पीठ सेंटर फॉर एविएशन पॉलिसी, सेफ्टी एंड रिसर्च की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने केंद्र और एएआई को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और साथ ही निर्देश दिया कि टेंडरों के आवंटन की वैधता याचिका के निस्तारण पर आने वाले फैसले पर निर्भर होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर राजनीतिक नेतृत्व पर सख्त रुख दिखाया और कहा, यह बेहद दुख कि बात है कि एकतरफ सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर’ बनने की बात कर रही है तथा दूसरी तरफ ऐसे टेंडर निकालती है, जो छोटी कंपनियों को क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस के लिए हिस्सेदारी करने से रोकते हैं।
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा, असल में यह दिखता है कि यदि आप वास्तव इन लोगों (छोटी कंपनियों) को हटाना चाहते हैं तो ऐसा ही कहिए। अपने भाषणों में आप बड़ी बड़ी बातें करते हैं। आपका राजनीतिक नेतृत्व मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत की बात करता है, वे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कहते हैं, लेकिन आपकी कार्रवाई आपके शब्दों से मेल नहीं खाती। आप पूरी तरह पाखंडी हैं।
पीठ ने एडिशन सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से अपने राजनीतिक नेतृत्व से यह बोलने के लिए कहा कि यदि आप इस तरह से चलना चाहते हैं तो मेक इन इंडिया पर भाषण क्यों देते हैं। संजय जैन केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की तरफ से उपस्थित हुए थे। पीठ ने उनसे सवाल किया, क्या वे (राजनीतिक नेतृत्व) को इसके बारे में पता भी है। पीठ ने कहा, हम कहते हैं कि इस देश या उस देश से आयात बंद करो और दूसरी तरफ हम हमारे अपने उद्यमियों को भी विफल कर रहे हैं।
टेंडर में भाग लेने के लिए 35 करोड़ रुपये से ज्यादा की उपलब्धता और शेड्यूल्ड एयरलाइंस के साथ काम करने की योग्यता का पैमाना बनाया गया है। इसका हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, आप बड़ी जेब और शायद विदेशी टाइप वाले बड़े खिलाड़ी (कंपनियां) को ही अंदर आने देना चाहते हैं।
क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर जहां आने वाली फ्लाइटों की संख्या कुछ ही होती हैं, वहां काम कर रहे छोटे खिलाड़ियों के चार्टर्ड एयरलाइंस को संभालने के अनुभव की आपने अनदेखी कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा, यदि छोटे खिलाड़ियों को विकसित नहीं होने दिया जाएगा, तब कुछ ही स्थापित बड़े खिलाड़ी बचेंगे, जो अपने मार्केट प्रभुत्व के कारण सरकार पर अपनी शर्तें थोपना चाहते कर देंगे।

सीएम बोले, राज्य में किसानों को तीन लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जा रहा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि एग्री इंफ्रा फंड से कृषि सेक्टर को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर कृषि से आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देकर ही देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार दी जा सकती है। इसके लिए कृषि और किसान की भूमिका महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने एक लाख करोड़ रूपए से एग्री इंफ्रा फंड की घोषणा करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की छठी किश्त की राशि भी जारी की है। इस मद के लिए 17 हजार करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। इसका सीधा लाभ देश के 8.5 करोड़ किसानों को मिलेगा। उनके बैंक खातों में सीधे दो हजार रुपये जमा होंगे। कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि की राशि जारी होने से उत्तराखंड के किसान भी लाभान्वित होंगे। राज्य में इस योजना में अभी तक 8.33 लाख किसान पंजीकृत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भी किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। किसानों को तीन लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जा रहा है। जबकि स्वयं सहायता समूह को पांच लाख रूपये तक ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुपालन, हार्टिकल्चर, हर्बल, मत्स्य, आदि क्षेत्रों में भी अनेक पहल की गई है। किसानों को सब्जी बीज अनुदान पर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना शुरू की की गई है। भारत सरकार द्वारा 251.71 करोङ रूपए की उत्तराखंड एकीकृत औद्यानिकी विकास परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत सेब में ओलावृष्टि से होने वाली क्षति को भी रिस्क फेक्टर में शामिल किया गया है। इसी प्रकार सगंध खेती के लिए एरोमा वैली विकसित की जा रही हैं। आगामी पांच वर्षों में एक हजार हैक्टेयर में नया चाय प्लांटेशन की योजना पर काम किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के आर्थिक पैकेज से स्वावलंबन भारत की ओर बढ़ रहा देश: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत अभियान कोविड-19 की विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के साथ ही आधुनिक भारत की पहचान भी बना रहा है। मुख्यमंत्री, मीडिया सेंटर सचिवालय में आयेजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत में एमएसएमई क्षेत्र को कई तरह की रियायतें देते हुए मजबूती प्रदान की गई। साथ ही गरीबों, किसानों श्रमिकों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत 20 लाख करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा के बाद केवल डेढ़ माह की अवधि में ही इसके सकारात्मक प्रभाव भी दिखने लगे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा ‘वोकल फॉर लोकल एंड मेक इट ग्लोबल’ के लिए किए गए आह्वान को सभी देशवासियों का समर्थन मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए तीन लाख करोड़ रूपए के कोलेटरल फ्री ऋण की व्यवस्था की गई। एमएसएमई के लिए 50 हजार करोड़ रूपए का ‘फंड्स ऑफ फंड’ भी बनाया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के मानकों में सुधार किया गया है। इससे इन उद्यमों को विस्तार का अवसर मिलेगा जिससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होगा। उद्योगों और श्रमिकों के लिए तीन महीने तक ईपीएफ सपोर्ट दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 की परिस्थितियों में गरीबों, किसानों और मजदूरों की सहायता करने के लिए प्रधानमंत्री ने 1.70 लाख करोड़ रूपए की घोषणा की। इसके तहत प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि की तीन माह की अग्रिम किस्तें किसानों के खातों में जमा की गई। महिला जन-धन खाताधारकों के खातें में 500-500 रूपए की तीन किस्तें जमा की गईं। उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ से अधिक महिलाओं को तीन गैस सिलेंडर मुफ्त दिए गए। दिव्यांगों, विधवाओं और बुजुर्गों को भी 1 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी गई।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में देश के 80 करोड़ लोगों को राहत देने के लिए अप्रैल,मई व जून तीन माह के लिए निशुल्क खाद्यान्न दिया गया। अब इस योजना को नवम्बर माह तक बढ़ा दिया गया है। इसमें हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहू या चावल और प्रति परिवार 1 किलो चना नवम्बर तक निशुल्क मिलता रहेगा। इस योजना पर लगभग डेढ़ लाख करोड़ रूपए खर्च होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा में केंद्र सरकार ने 40 हजार करोड़ रूपए का अतिरिक्त आवंटन किया। उत्तराखण्ड में ही मनरेगा में 36 हजार नए लोगों के काम उपलब्ध करवाया गया है। 6 राज्यों के 116 जिलों में प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए गरीब कल्याण रोजगार योजना शुरू की गई है। किसानों के लिए भी बहुत से कदम उठाए गए। किसानों के हित में अनेक फार्मिंग रिफार्म किए गए हैं। किसानों को फसल पर लागत मूल्य का कम से कम डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार ने 14 खरीफ फसलों पर एमएसपी को बढ़ाया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी काफी महत्वपूर्ण है।
अर्थव्यवस्था में कोविड-19 के प्रभाव से उबारने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार भी किए गए हैं। रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बल दिया गया है। पीपीपी मॉडल पर हवाई अड्डों का निर्माण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 की परिस्थितियों में सबसे अधिक सुधार स्वास्थ्य क्षेत्र में किया गया है। कोरोना संक्रमण की शुरूआत में पीपीई किट का निर्माण नहीं होता था। अब देश में पीपीई किट का इतनी अधिक मात्रा में उत्पादन किया जा रहा है कि इनका निर्यात भी किया जाने लगा है। वेंटीलेटर, एन-95 मास्क भी बडे स्तर पर बनाए जा रहे हैं। इनके निर्माण में अनेक स्टार्टअप आगे आए हैं। चीन के विभिन्न मोबाईल एप पर प्रतिबंध लगाने के बाद स्वदेशी एप बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वापिस लौटे प्रवासियों और युवाओं के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई है। इसमें 150 प्रकार के कामों को लिया गया है।