उत्तराखण्ड में आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर सीएम ने निवेशकों से की चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को राजपुर रोड स्थित होटल में उत्तराखण्ड में पर्यटन क्षेत्र के विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) की ओर से उत्तराखण्ड में आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की संभावना विषय पर चर्चा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथ प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन से संबंधित योजनाओं पर तेजी से क्रियान्वयन के लिए सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जायेगा। जिसमें वित्त, आवास, लोक निर्माण विभाग, पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं सबंधित विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड निवेशकों को सुरक्षित निवेश की गारंटी देता हैं। निवेशकों को हर संभव मदद देने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य आने वाले 5 साल में उत्तराखण्ड को पर्यटन क्षेत्र में सर्वाेपरि बनाने का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों को आगे की कार्ययोजना में शामिल किया जायेगा। जो भी समस्याएं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों द्वारा रखी गई, उनकी निदान के हर संभव प्रयास किये जायेंगे। सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि के भाव से कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। राज्य में हवाई, सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य में हवाई कनेक्टिविटी बढ़े इसके लिए ए.टी.एफ में 18 प्रतिशत की कमी की गई है। उत्तराखण्ड का नैसर्गिक सौन्दर्य पर्यटकों को उत्तराखण्ड आने के लिए आकर्षित करता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पर्यटन नीति लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में नई कार्य संस्कृति आई है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के मूल मंत्र पर देश आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा। 2025 तक उत्तराखण्ड को हर क्षेत्र में देश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। सभी विभागों को अगले 10 सालों का रोडमैप बनाने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 माह बाद भी पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों से संवाद किया जायेगा।
सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि निवेशकों के लिए सरकार की ओर से बनाई गई नीतियों का सरलीकरण किया जाएगा। जिससे निवेशकों को उत्तराखण्ड में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश करने में आसानी हो सके। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने कहा कि पर्यटन से उत्तराखण्ड का जहां राजस्व बढ़ता हैै वहीं बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार के साधन भी उपलब्ध होते हैं। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद पर्यटन में निवेश की असीम संभावनाएं हैं। कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों व निवेशकों ने पर्यटन और प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अपने सुझाव भी दिए।
इस अवसर पर सचिव एस.एन. पाण्डेय, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक एवं विभिन्न राज्यों से आये पर्यटन व्यवसायी मौजूद रहे।

चारधाम यात्रा, 42 हजार तीर्थ यात्रियों ने किया रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में चार धाम शुरु हो गई है। यात्रा प्रारम्भ होने से प्रदेश में चार धाम से जुड़े व्यवसायों की उम्मीद बढ़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों से चार धाम यात्रा शुरू होने से कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद बंद पड़े कारोबार को संजीवनी मिलेगी। चार धामों में अब तक लगभग साढ़े पांच हजार लोग दर्शन कर चुके हैं जबकि अब तक 42 हजार से अधिक लोगों को ई-पास जारी किये जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संवेदनशीलता का ही परिणाम है कि कोविड संक्रमण के चलते आर्थिक मंदी से जूझ रहे चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज जारी कर संजीवनी देने का काम किया। जिसकी बदौलत चारों धाम के होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी संचालक आदि के साथ ही पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एकमुश्त सहायता राशि सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गई है। पर्यटन विभाग की ओर से अब तक लगभग 15 हजार लोगों को 7 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। यह धनराशि लाभार्थियों के खाते में सीधे जमा कराये जा रही है। मुख्यमंत्री इस बात का साफ संकेत दे चुके हैं कि यात्रा से जुड़े व्यवसाइयों, तीर्थ पुरोहितों की परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। जिसका असर धरातल पर दिखने लगा है।

तीर्थ पुरोहितों का आंदोलन हुआ स्थगित
मुख्यमंत्री ने देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों के मन में उठ रहे संशय को दूर करते हुए यह स्पष्ट किया कि चारधाम से जुड़े लोगों के हक-हकूक को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया जायेगा। देवस्थानम बोर्ड के तहत बनाई गई उच्च स्तरीय समिति द्वारा चारधाम से जुड़े तीर्थ पुरोहित की बात सुनकर सरकार के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। कमेटी में चारों धामों से दो-दो तीर्थ पुरोहितों को भी शामिल किया जायेगा। मुख्यमंत्री की कार्यपद्धति से प्रभावित होकर तीर्थ पुरोहितों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया।

सुरकंडा रोपवे में चाइनीस उपकरणों के स्थान पर स्वदेशी उपकरणों को प्रयोग में लाएंः पर्यटन मंत्री

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। पर्यटन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के पर्यटन व्यवसाइयों को कोरोना संकट की परिस्थितियों से उबारने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके मद्देनजर पूर्व में 75 करोड़ की आर्थिक सहायता पर कैबिनेट अपनी मुहर लगा चुकी है। नेगेटिव कोरोना टेस्ट रिपोर्ट वाले पयर्टक अब आराम से चारधाम यात्रा तथा अन्य पर्यटक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। मेरा अनुरोध है कि सभी लोग सामाजिक दूरी तथा आत्म अनुशासन का परिचय दें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि यथाशीघ्र विकास कार्यों को पूरा कर राज्य की जनता को समर्पित किय जाये।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कैरवान पार्क बनाने के साथ-साथ यात्रियों के लिए सभी तरह की आधुनिक सुविधाएं विकसित करने के लिए भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कोविड- 19 को देखते हुए तय किया गया है कि 72 घण्टे पूर्व कोविड टेस्ट करवाने वाले यात्री की रिपोर्ट यदि नेगेटिव पाई जाती है तो वह कहीं भी घूम सकता है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि सुरकंडा रोपवे निर्माण कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह चाइनीस उपकरणों के स्थान पर स्वदेश निर्मित उपकरणों को रोपवे निर्माण में प्रयोग करे। इसीलिए उसे एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया है।

सतपाल महाराज ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रह आवास (होम स्टे) योजना जो कि कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से काफी प्रभावित हुई है उससे जुड़े व्यक्तियों एवं कार्मिकों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राहत कोष से स्वीकृत 24. 30 करोड़ रुपए की धनराशि के सापेक्ष 11. 85 करोड़ की धनराशि उपलब्ध करवाई गई है। पर्यटन मंत्री ने बताया कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना को और अधिक आकर्षक बनाए जाने के उद्देश्य से प्रदेश के मार्गों पर संचालन हेतु एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 50 बसों-इलेक्ट्रॉनिक बसों के क्रय हेतु ऊंची संक्रम की लागत के 50 प्रतिशत किंतु अधिकतम 15 लाख रुपए की राजकीय सहायता देने का निर्णय लिया गया है।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि प्रसाद योजना के तहत केदारनाथ विकास कार्यों का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। बद्रीनाथ में भी विकास कार्य किए जा रहे हैं गंगोत्री एवं यमुनोत्री के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। बाह्य सहायतित योजनाओं में झील के समग्र पर्यटन विकास हेतु 1210 करोड रुपए के ऋण प्रदान किए जाने पर नेशनल डेवलपमेंट बैंक द्वारा सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई है।

पर्यटन मंत्री जी कहा कि शीतकालीन डेस्टिनेशन के रूप में टिबरसैंण महादेव के मंदिर को विकसित करने के लिए कंेन्द्र सरकार से अनुमति मांगी है। टिबरसैंण महादेव में अमरनाथ की तरह बहुत बड़े शिवलिंग की रचना होती है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी से मोरी हरकीदून एवं जखोल सर्किट को पर्यटन एवं ट्रैकिंग के रूप में विकसित करने के लिए कनैक्टिविटी को ध्यान रखते हुए दिशा निर्देश बोर्ड लगाने चाहिए। रोप वे परियोजनाओं के अंतर्गत हम शीतकालीन में भगवान केदारनाथ के दूर से दर्शन करते हुए केदारनाथ घाटी के सुन्दर व रमणीक पर्वतीय पहाड़ों के दर्शन कर सकते हैं।

प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने संस्कृति विभाग के अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि वह सभी कार्यों को समय पर पूरा करें। संस्कृति विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों जानकारी देते हुए संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थ यात्रियों को दी जाने वाली धनराशि को 25000 से बढ़ाकर 50,000 कर दिया गया है। इसके अलावा लोक कलाकारों का मानदेय भी दुगना कर दिया गया है। बताया कि प्रदेश में विरासत की अंगीकार योजना लागू की गई है। उन्होंने बताया कि तीलू रौतेली के नाम पर संग्रहालय बनाने की स्वीकृति मिल गई है। बागेश्वर, चंपावत, जोशीमठ, नरेंद्र नगर एवं उधम सिंह नगर में प्रेक्षाग्रह का निर्माण जारी है। सुमित्रानंदन पंत वीथिका कौसानी, जनपद बागेश्वर में उनके घर का जीर्णोद्धार का काम पूरा हो चुका है। जबकि अनाशक्ति आश्रम, कौसानी के जीर्णोद्धार का कार्य प्रगति पर है। ऋषिकेश में हिमालय संग्रहालय का निर्माण कार्य और गड़ीकैट में हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र का कार्य भी प्रगति पर है।

बाढ़ सुरक्षा के तहत सिंचाई विभाग मुस्तैद, मंत्री ने दी जानकारी

(एनएन सर्विस)
बरसाती मौसम में उत्तराखंड की प्रमुख नदियों में बढ़ते जलस्तर से बाढ़ के खतरों को भांपते हुए राज्य का सिंचाई विभाग पूरी तैयारियों के साथ बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि मुस्तैद है। उत्तराखंड में बाढ़ सुरक्षा सम्बन्धी तैयारियों की जानकारी देते हुए प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि बरसात के मौसम में राज्य की प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग ने समय से अपनी पूरी तैयारियां कर दी हैं।
सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य की प्रमुख नदियों भागीरथी, अलकनंदा, पिंडर, मंदाकिनी, नयार और गंगा जिनका कि बरसात में जलस्तर बढ़ जाने से कई स्थानों पर भवन, भूमि, फसलों, मार्गों आदि को हमेशा खतरा बना रहता है। उस खतरे से निपटने के लिए सिंचाई विभाग ने बाढ़ सुरक्षा के तहत अपनी योजनाओं का काम पूरा कर लिया है।
श्री केदारनाथ धाम स्थित केदारपुरी में मंदाकिनी नदी से सुरक्षा, श्री केदारनाथ के सीतापुर/गौरीकण्ड के पूर्ननिर्माण कार्य, सौंग नदी के दायें तट पर स्थित गौरी माफी ग्राम में जल भराव से निजात दिलाने के लिए 379.49 लाख रूपये की लागत से लगभग 500 मीटर के बन्दे का निर्माण किया गया है। अल्मोडा के विकासखण्ड चैखुटिया में शीर्ष बन्धों का पुनर्निमार्ण कराया गया है। विकासखण्ड स्याल्दे, विकासखण्ड मुनस्यारी एवं चमोली जनपद के विकासखण्ड घाट में भी पुनर्निमार्ण के कार्य गतिमान हैं।
सतपाल महाराज ने बताया कि मानसून में बाढ़ तथा जल भराव की दृष्टि से हरिद्वार, पौड़ी, रूद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ, चम्पावत, उधमसिंह नगर, देहरादून और उत्तरकाशी जनपदों के सभी संवेदनशील स्थलों का चिन्हीकरण कर बाढ़ सुरक्षा की तैयारियां पूर्ण की जा चुकी हैं। उन्होने बताया कि देहरादून के सिंचाई खण्ड परिसर में राज्य का केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष बनाने के अलावा दोनों मण्डलों सहित जिला स्तर पर भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किये गये हैं। इतना ही नहीं प्रदेश स्तर पर सभी अधिकारियों का बाढ़ से सम्बन्धित सूचनाओं के आदान प्रदान हेतु एक वाट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया है। जिसके माध्यम से सुबह के समय नदी का डिसचार्ज एवं क्षेत्र में हुई वर्षा की माप की सूचना केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष को करवाई जायेगी।
सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने बाढ़ सुरक्षा तैयारियों के बारे में बताया केन्द्रीय जल आयोग से प्राप्त नदियों के जलस्तर का पूर्वानुमान शासन द्वारा सम्बन्धित जिलाधिकारी एवं विभाग के क्षेत्रीय एवं स्थानीय अधिकारियों को उपलब्ध करवाने के साथ-साथ केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के द्वारा प्रतिदिन बाढ़ संबंधित सूचनाएं शासन और उच्चाधिकारियों को भी पहुंचाई जायेंगी।
सतपाल महाराज ने बताया कि नैनीताल, उधमसिंह नगर, चम्पावत, हरिद्वार और टिहरी जनपदों में कुल 72 बाढ़ चैकियां स्थापित कर दी गई हैं जिनके माध्यम से ग्रामीणों को सजग रहने की व्यवस्था की गई है। सिंचाई मंत्री ने बताया कि बाढ़ सम्बन्धी सूचनाओं के लिए अल्मोडा, श्रीनगर और देहरादून में नोडल अधिकारियों की तैनाती भी की गई है। उन्होने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की मानिटरिंग के लिए जनपदों में एक स्टीयरिंग ग्रुप का भी गठन किया गया है।

10 करोड़ रूपए की लागत से तैयार हो रहा ट्रांजिट कैंप

विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा जाने वाले पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग की भूमि पर ट्रांजिट कैंप- रजिस्ट्रेशन कार्यालय का निर्माण कार्य इन दिनों तीव्र गति से जारी है। इसे पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर 10 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था के अनुसार कैंप का कार्य अगले वर्ष 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।

2013 की आपदा के बाद राज्य सरकार ने यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए ट्रांजिट हॉस्टल योजना पर काम करना शुरू किया। चंद्रभागा और गोपालनगर से लगती 3.70 हेक्टेअर वन भूमि को जनवरी 2019 में पर्यटन विभाग को ट्रांसर्फर किया गया। करीब साल बीतने के बाद आखिरकार पिछले कुछ दिनों पूर्व कार्यदायी संस्था बिडकुल ने यहां में काम शुरू कर दिया है। वर्तमान में 45 मीटर लंबी और चौड़ी बिल्डिंग निर्माण के लिए खुदाई का कार्य पूरा हो चुका है। बिडकुल के जेई राहुल ने बताया कि पर्यटन विभाग के निर्देश पर ट्रांजिट कैंप का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। मौसम आदि का कोई व्यवधान नहीं हुआ तो जुलाई 2021 तक ट्रांजिट कैंप का कार्य पूरा हो जाएगा।

ट्रांजिट कैंप का निर्माण भूतल, प्रथम और घ्द्वितीय तल में होगा। इसमें भूतल में दो मल्टीपल टिकट काउंटर होंगे। इसमें महिला, पुरूष के अलावा सिनियर सिटीजन और विकलांगों के लिए अलग से सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा इसी तल में बैंक व एटीएम सुविधा भी उपलब्ध होगी। पर्यटन विभाग और चारधाम यात्रा से जुड़ा संयुक्त रोटेशन का कार्यालय भी यहां होगा। प्रथम तल में दुकानें लगेंगी। इन दुकानों में यात्रियों के लिए भोजन आदि सुविधाएं उपलब्ध होंगी। द्वितीय तल मेें यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था होगी। करीब एक समय में 150 यात्री यहां ठहर सकेंगे। इसके अलावा यहां 250 बसों के लगभग पार्किंग की सुविधा भी होगी।