पीएम मोदी ने उत्तराखंड को कई सौगातें दीः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के अन्तर्गत बने ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का स्थलीय निरीक्षण किया। यहां मुख्यमंत्री ने पौधा रोपण भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने रेल विकास निगम लि. के अधिकारियों से रेलवे स्टेशन में अवस्थापना सुविधाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश में बने इस रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्वरूप दिया गया है। रेलवे स्टेशन के निर्माण में पर्यावरणीय अनुकूलन का विशेष ध्यान रखा गया है। बुजुर्गों व दिव्यागों के हिसाब से अलग से यूटिलिटी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद प्रदेशवासियों को आवागमन की सुविधा तो होगी ही, साथ ही बद्रीनाथ एवं केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को भी काफी सुविधा होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अवस्थापना विकास के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को कई सौगातें दी हैं। ऑल वेदर रोड, हवाई कनेक्टिविटी एवं रेल लाईनों के निर्माण से उत्तराखण्ड में आवागमन की सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। डोईवाला-उत्तरकाशी रेल लाईन बनने के बाद उत्तराखण्ड के चारों धाम रेल कनेक्टिविटी से जुड़ जायेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के बाद चन्द्रेश्वर नगर, ऋषिकेश में बन रहे 7.5 एमएलडी के मल्टीपर्पज सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का औचक निरीक्षण भी किया। यह एसटीपी नमामि गंगे योजना के तहत उत्तराखण्ड पेयजल निगम द्वारा बनाया गया है। 12 करोड़ रूपये की लागत के इस एसटीपी से चन्द्रेश्वर नाला, ढ़ालवाला नाला एवं श्मशान घाट नाला को टेप करने के बाद शोधन किया जा रहा है। शोधित जल की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होने पर गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। यह भारत का पहला एसटीपी है, जिसे बहुमंजिला ईमारत के रूप में तैयार किया गया है। इसकी ऊंचाई 21 मीटर है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि गंगा कि निर्मलता एवं अविरलता बनाये रखने के लिए नमामि गंगे के तहत प्रदेश में विभिन्न जगहों पर एसटीपी बनाये जा रहे हैं। गंगा की निर्मलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रयासों से नमामि गंगे के तहत देशभर में अनेक कार्य हो रहे हैं। एसटीपी से शोधित जल का सिंचाई के लिए भी उपयोग किया जायेगा।

कुंभ मेले में मान्यताओं एवं परम्पराओं का रखा जायेगा ध्यान, निर्धारित समय पर होगा आयोजनः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में नगर विकास मंत्री मदन कौशिक एवं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी एवं अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ आगामी कुम्भ मेले के आयोजन के संबंध में विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अखाड़ा परिषद के सदस्यों के विचार एवं सुझावों पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अखाड़ा परिषद के सदस्यों से अपनी समस्याओं से नगर विकास मंत्री को अवगत कराने को कहा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि 2021 में हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुम्भ निर्धारित समय पर आयोजित होगा। इसका स्वरूप कैसा रहेगा यह उस समय की परिस्थितियों पर भी निर्भर रहेगा। उन्हो।ने कहा कि अखाड़ों द्वारा श्रद्धालुओं के लिये अपने स्तर पर की जाने वाली व्यवस्थाओं के लिये जिनके पास भूमि उपलब्ध होगी उन्हें ग्रान्ट के रूप में धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी, कार्यों की गुणवत्ता आदि की जांच हेतु विभागीय अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ से पूर्व हरिद्वार में संचालित सभी स्थायी निर्माण कार्य पूर्ण कर दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार को जोड़ने वाले पुलों एवं सड़कों के निर्माण में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अखाड़ा परिषद के सदस्यों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जायेगा। अखाड़ों को जोड़ने वाली सड़कों के पुनर्निर्माण के साथ ही अतिक्रमण को हटाने तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने मुख्यमंत्री से हरिद्वार कुम्भ मेले में घाटों का नाम 13 अखाड़ों के ईष्ट देवों तथा सेक्टरों के नाम भी अखाड़ों के नाम पर रखे जाने का अनुरोध किया। उन्होंने अखाड़ों को दी जाने वाली धनराशि से होने वाले कार्यों की गुणवत्ता की जांच आदि के लिये किसी अधिकारी को नामित करने का भी अनुरोध किया, उन्होंने अखाड़ों के सम्पर्क मार्गों की मरम्मत, बिजली, पानी, साफ-सफाई, शौचालयों की मरम्मत आदि के लिए भी मेले से जुड़े अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध मुख्यमंत्री से किया।

कृषि अवसंरचना निधि के तहत वित्तीय सुविधा“ योजना होगी राज्य के कृषकों के लिए कारगार साबित

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई “कृषि अवसंरचना निधि के तहत वित्तीय सुविधा“ योजना से कृषि क्षेत्र में बङे सुधार लाने में सहायक होगी। इससे कृषि उद्यमियों, कृषि साख समितियों, विपणन सहकारी समितियों, इससे जुड़े स्टार्टअप को कम ब्याज पर ऋण और क्रेडिट गारंटी लाभ मिलने से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से किसानों को फायदा मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा ‘‘कृषि अवसंरचना निधि के तहत वित्तीय सुविधा’’ नामक केन्द्रीय क्षेत्र की एक नई अखिल भारतीय योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत ब्याज में छूट और वित्तीय सहायता के जरिये, फसलोपरांत प्रबंधन से संबंधित अवसंरचना तथा सामुदायिक कृषि-परिसम्पत्तियों की व्यावहारिक योजनाओं में निवेश के लिए मध्यम और लम्बी अवधि की ऋण-सुविधा के रूप में वित्त-पोषण किया जाएगा।

यह जानकारी केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को प्रेषित पत्र में दी गई है, उन्होंने कहा है कि प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स), विपणन सहकारी समितियों, कृषि उद्यमियों, स्टार्ट-अप और सार्वजनिक – निजी भागीदारी परियोजनाओं इत्यादि को बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा 1 लाख करोड़ रूपये की वित्त पोषण सुविधा प्रदान की जाएगी, इस योजना के तहत वर्तमान वर्ष में 10,000 करोड़ रूपये और अगले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 30,000 करोड़ रूपये के ऋण प्रतिवर्ष वितरित किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इसमें वित्तीयन सुविधा के अंतर्गत 2 करोड़ रूपये तक के सभी ऋणों पर 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज छूट प्रदान की जाएगी और 2 करोड़ रूपये तक के ऋणों के मामले में ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्रेडिट गारण्टी फण्ड ट्रस्ट’ के तहत पात्र ऋण-ग्रहीताओं के लिए क्रेडिट गारण्टी कवरेज भी उपलब्ध होगा। इस कवरेज के लिए शुल्क का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। एफपीओ के मामले में कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की एफपीओ संवर्धन योजना के तहत दी गई सुविधा से क्रेडिट गारंटी लाभ उठाया जा सकता है। इस वित्तपोषण सुविधा के तहत ऋणों की अदायगी के लिए अधिस्थगन अवधि न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 2 वर्ष होगी।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने अवगत कराया है कि कृषि अवसरंचना निधि का प्रबंधन तथा निगरानी ऑनलाइन एमआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। रियल टाइम निगरानी और प्रभावी फीड-बैक सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों की स्थापना की जाएगी। योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2020 से 2029 (10 वर्ष) तक होगी।
केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र से योजना के प्रभावी एवं सफल कार्यान्वयन में सहयोग की अपेक्षा करते हुए योजना की प्रगति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के साथ साझा करने की भी अपेक्षा की है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने इस योजना को उत्तराखण्ड के व्यापक हित में बताया है, उन्होंने उत्तराखण्ड में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये।

सीएम ने केंद्रीय रक्षा मंत्री से किया अनुरोध, न्यूनतम दरों पर गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज की भूमि लीज पर देने की मांग

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से देहरादून केंट स्थित गोरखा मिलिट्री इण्टरमीडिएट कॉलेज के भवन एवं भूमि को न्यूनतम दरों पर पुनः लीज पर दिये जाने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1927 से रक्षा विभाग भारत सरकार से लीज पर 3.542 एकड़ की भूमि पर गोरखा मिलिट्री इण्टरमीडिएट कॉलेज संचालित किया जा रहा है जिसमें कक्षा 06 से कक्षा 12 तक कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इस विद्यालय में सैनिकों, पूर्व सैनिकों, अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों के बच्चों को नाम मात्र के शिक्षण शुल्क पर शिक्षा ग्रहण कराई जा रही है तथा कक्षा 6 से कक्षा 9 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा एवं पाठ्य पुस्तकें भी प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री को यह भी अवगत कराया है कि इस सम्बन्ध में विद्यालय के प्रबन्धक ने उनसे भेंट कर बताया कि विद्यालय को रक्षा विभाग द्वारा लीज पर दी गई भूमि अवधि बढ़ाये जाने के क्रम में रक्षा सम्पदा अधिकारी, मेरठ द्वारा भारत सरकार द्वारा पुनः पट्टा सृजन के पश्चात निर्धारित दरों पर भाड़ा जमा करने का उल्लेख करते हुए उक्त विद्यालय भूमि की लीज अवधि बढ़ाने पर निर्णय नहीं लिया गया है तथा विद्यालय भवन एवं भूमि को खाली करने हेतु विद्यालय प्रबन्धन को नोटिस दे दिया गया है। चूंकि विद्यालय द्वारा न्यून शिक्षण शुल्क पर छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण कराई जाती है तथा विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदान से किया जा रहा है तथा विद्यालय प्रबन्ध समिति के पास आय के अत्यन्त सीमित संसाधन हैं जिस कारण बढ़ी हुई दरों में लीज की धनराशि का भुगतान करने में प्रबन्ध समिति असमर्थ है।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री से विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए देहरादून स्थित गोरखा मिलिट्री इण्टरमीडिएट कॉलेज के भवन एवं भूमि को न्यूनतम दरों पर पुनः लीज में दिये जाने हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित करने का अनुरोध किया है।

सीएम त्रिवेन्द्र ने राज्य में सेंपलिंग और टेस्टिंग बढ़ाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर पिछले दिनों में कोविड-19 के दृष्टिगत सर्विलांस और सेंपलिंग में काफी बढोतरी हुई है। राज्य के सभी जनपदों में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के जरिए हर घर जाकर सर्विलांस किया जा रहा है। साथ ही जानकारी जुटाई जा रही है कि किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण तो नहीं हैं। इनमें विशेष रूप से सीनियर सीटीजन और गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों की जानकारी रखी जा रही है। अधिकांश जिलों में सर्विलांस के 2 या 2 से ज्यादा राउंड हो चुके हैं। उत्तरकाशी में 4, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, अल्मोडा, चमोली व टिहरी में 3-3, बागेश्वर, चम्पावत, पौङी व ऊधमसिंह नगर में 2-2 और पिथौरागढ़, देहरादून व हरिद्वार में 1-1 राउंड सर्विलांस का किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को आगे भी लगातार करते रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पूरी गम्भीरता से सर्विलांस करने और इससे प्राप्त जानकारियों के आधार पर जरूरी कदम उठाने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने सेम्पलिंग और टेस्टिंग को भी बढाने के निर्देश दिये हैं। राज्य में सेम्पलिंग में लगातार वृद्धि हो रही है। इस सप्ताह औसतन 2487 सेम्पल प्रतिदिन लिए गए जबकि पिछले सप्ताह यह औसत 1660 प्रतिदिन था। प्रति मिलियन जनसंख्या पर सेम्पलिंग का औसत बढ़कर 9981 हो गया है जो कि राष्ट्रीय औसत से कुछ ही कम है। एक सप्ताह में इसके राष्ट्रीय औसत से ऊपर जाने की पूरी संभावना है। चम्पावत, देहरादून, नैनीताल, पौङी और रुद्रप्रयाग में सेम्पलिंग, राष्ट्रीय औसत से अधिक है। टेस्टिंग और सेम्पलिंग को बढाने के लिए जिलाधिकारियों को प्राईवेट लेब का भी उपयोग करने को कहा गया है। जिलों में ट्रूनाट मशीनें और एंटीजन टेस्टिंग किट भी उपलब्ध करवाई गई हैं। राज्य में वर्तमान में 342 डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर हैं जिनमें 23436 बेड की क्षमता है। इनमें से 22762 अभी खाली हैं। कोविड फेसिलिटी में आईसीयू बेड 338, वेंटिलेटर 243 और ऑक्सीजन सपोर्ट बेड 1197 हैं। इनकी संख्या में भी लगातार वृद्धि की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में पाजिटिव मामलों में वृद्धि देखी गई है। परंतु स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। सर्विलांस और टेस्टिंग व सेम्पलिंग पर फोकस किया जा रहा है। सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति को समय पर उचित इलाज उपलब्ध हो।

कोविड-19 के साथ हमें डेंगू से भी रहना होगा सजगः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सीएम आवास और आवासीय कार्यालय परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने गमलों, नालियों आदि को चेक किया कि कहीं पानी तो इकट्ठा नहीं हो रखा है। जिन गमलों में पानी था, उन्हें खाली किया। मुख्यमंत्री ने पानी की टंकियों में भी देखा कि डेंगू के लार्वा तो नहीं पनप रहे हैं।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने डेंगू पर वार करने के लिए आमजन से हर रविवार को 15 मिनट का समय निकालकर घर और घर के आस पास एकत्र पानी को हटाने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के साथ-साथ हमें डेंगू को लेकर भी बहुत सजग रहना है। साफ पानी में ही डेंगू पनपता है। हमें डेंगू को पनपने नहीं देना है। इसके लिए अपने घर और घर के आस पास पानी इकट्ठा न होने दें। हम हर सप्ताह रविवार को केवल 15 मिनट का समय निकालें और डेंगू पर वार करें। आमजन का योगदान बहुत जरूरी है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने सीमांत क्षेत्र विकास योजना के लिए स्वीकृत की 10 करोड़ की धनराशि

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा सहायतित सीमांत क्षेत्र विकास योजना के साथ ही मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत क्षेत्रीय विकास पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों की अवस्थापना सुविधाओं के विकास से पलायन रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने देश की सुरक्षा की दृष्टि से राज्य के सीमान्त क्षेत्रों से पलायन रोकने को देश की सुरक्षा से जुड़ा विषय भी बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना के लिए 10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।

आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल के साथ पहुंचे अधिकारियों एवं शासन के उच्च अधिकारियों के साथ आइटीबीपी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सीमांत जनपदों के सीमा क्षेत्रों में आईटीबीपी की चौकियों को नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना अविलंब तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सीपीडब्लूडी द्वारा निर्मित सड़को की मरम्मत बीआरओ के द्वारा कीे जाय। इन क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की स्थापना के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी देहरादून को आईटीबीपी को फ्रंटियर हेड क्वार्टर के लिए लगभग 15 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं। सचिव राजस्व को आईटीबीपी को उनके जोशीमठ केम्पस की भूमि का स्वामित्व प्रदान करने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट में लाने के भी निर्देश उन्होंने दिए हैं। मुख्यमंत्री ने महानिदेशक आईटीबीपी को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा सीमान्त क्षेत्रों में आवाजाही बढ़ाई जाने एवं इन क्षेत्रों से लोगों का पलायन रोकने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी द्वारा साहसिक पर्यटन की गतिविधियों के प्रति विशेष ध्यान दिए जाने के साथ ही इससे संबंधित तकनीकी दक्षता भी है। उन्होंने इसके लिए पर्यटन एवं आइटीबीपी के अधिकारियों का वर्किंग ग्रुप बनाए जाने तथा विन्टर टूरीज्म सेल से समन्वय बनाने पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री ने सीमान्त क्षेत्र विकास के तहत सीमांत क्षेत्रों के ट्रेक रूटों की मरम्मत के लिये आई0टी0बी0पी0 को धनराशि उपलब्ध कराने, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय वनस्पति के उत्पादन पर ध्यान देने, दूरस्थ सीमान्त क्षेत्रों मलारी, माणा, हर्षिल, नेलांग जैसे क्षेत्रों मे पर्यटन से सम्बन्धित योजनाओं में शामिल करने पर भी ध्यान देने को कहा, इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी को राज्य सरकार द्वारा यथा सम्भव सहयोग का भी आश्वासन दिया गया।

आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देशवाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में उनकी 5 बटालियन हैं। मसूरी अकादमी के साथ ही फ्रंटियर हेड क्वार्टर भी यहां से संचालित होता है। उन्होंने फ्रंटीयर हेड क्वार्टर के लिए देहरादून के आस पास 15 एकड़ भूमि की व्यवस्था करने का अनुरोध करते हुए जोशीमठ की भूमि का स्वामित्व प्रदान करने एवं उनकी सीमांत 42 चौकियों में ग्रिड से बिजली आपूर्ति, सीपीडब्ल्यूडी द्वारा सीमांत क्षेत्रों में निर्मित सड़कों के रखरखाव, चौकियों के आसपास मोबाइल टावरों की स्थापना आदि की भी बात रखी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि सीमान्त क्षेत्रों के गांवों में आवाजाही बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। सीमा क्षेत्रों में आवाजाही से वहां तैनात बलों को भी सुविधा रहती है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों द्वारा बॉर्डर तक आवाजाही बढ़ाई गई है हमें भी अपने क्षेत्रों में केवल अपने देश के लोगों को इनर लाइन परमिट की व्यवस्था करनी चाहिए। अभी इन क्षेत्रों में ग्रास लैंड के लिए ही कैटल ग्रीजिंग के लिए परमिट जारी किए जाते हैं।

प्रत्येक न्याय पंचायत में बनेंगे ग्रोथ सेंटरः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने टिहरी जनपद के ख्यार्सी ग्राम में ‘एग्री बिजनेस ग्रोथ सेंटर’ के नवनिर्मित भवन ‘ग्राम्यनिधि’ का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ग्रोथ सेंटर नई परिकल्पना है। इस तरह के सेंटर राज्य की सभी न्याय पंचायतों में खोले जाएंगे। अभी तक 96 ग्रोथ सेंटर स्वीकृत किए जा चुके है। इनसे भविष्य की टाउनशिप विकसित होंगी। स्थानीय संसाधनों के अनुरूप ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। इससे स्थानीय किसान अपने उत्पाद यहां बेच सकेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने टिहरी जनपद के ख्यार्सी ग्राम में ‘एग्री बिजनेस ग्रोथ सेंटर’ के नवनिर्मित भवन ‘ग्राम्यनिधि’ का लोकार्पण किया।

किसानों के उत्पादों की स्थानीय स्तर पर हो सकेगी बिक्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि किसानों के उत्पादों की बिक्री उनके घर के पास ही हो जाए। ग्रोथ सेंटर बनने से आढ़ती व व्यापारी उत्पाद खरीदने यहां आ सकेगे। इससे किसानों को अच्छी कीमत मिल सकेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया। पहले किसान मंडी में ही अपने उत्पाद बेच सकता था। अब वह कहीं भी बेच सकता है। इससे किसान को मूल्य अधिक मिलेगा।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 25 प्रतिशत तक सब्सिडी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में निशुल्क राशन की व्यवस्था की। 20 लाख करोड़ रूपए का आत्मनिर्भर पैकेज दिया। प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रवासी लौटकर आए। हमें स्वरोजगार की ओर जाना होगा। इसी लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई है। इसमें लगभग 150 प्रकार के काम लिए गए है। इसमें 10 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी की व्यवस्था है।

10 हजार छोटे सोलर पावर प्रोजेक्ट से युवाओं को मिलेगी आजीविका
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में पर्यटन के अंतर्गत हम 10 हजार मोटर बाईक देंगे। इसमें दो साल का ब्याज राज्य सरकार देगी। जल्द ही 25-25 किलोवाट के 10 हजार छोटे सोलर पावर प्रोजेक्ट की योजना मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लाएंगे।

बिना ब्याज के 3 लाख रूपए तक ऋण
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक सहकारिता के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज के 1 लाख रूपए तक का ऋण दे रहे हैं, अब हमने इसकी सीमा 3 लाख रूपए कर दी है। अब किसान बिना ब्याज के 3 लाख रूपए तक का ऋण ले सकते हैं। खेती में हमें नए तरीकों को भी अपनाना होगा। अच्छा मूल्य देने वाले उत्पाद उत्पन्न करने होंगे। सेब, किवी, आडू आदि फलों की नई व उच्च गुणवत्ता की किस्में अपनानी होगी। यहां की भौगोलिक स्थिति और मौसम के अनुरूप फलों की खेती पर ध्यान देना होगा। मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन आदि क्षेत्र में काफी कुछ किया जा सकता है।

ख्यार्सी एग्री बिजनेस ग्रोथ सेंटर से किसान लाभान्वित हो रहे
एग्री बिजनेस ग्रोथ सेंटर, ख्यार्सी का निर्माण जलागम प्रबंध निदेशालय द्वारा किया गया है। इस सेंटर द्वारा स्थानीय स्तर पर किसानों को स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, कृषि निवेशों की उपलब्धता और कृषि यंत्रों की सुविधा प्रदान की जा रही है। यहां दालें, अनाज, मसाले, तेल, अचार, जैम, चटनी, स्क्वैश, सुगन्धित मोमबत्ती आदि के विपणन का कार्य किया जा रहा है। ग्रोथ सेंटर की विभिन्न गतिविधियों दर्जनों गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं। ग्रोथ सेंटर की द्वारा स्थानीय उत्पादों के क्रय से 36 ग्रामों के 707 किसान लाभान्वित हुए हैं। नई गतिविधि के रूप में स्थानीय उपलब्ध उत्पादों से बेकरी उत्पादों का निर्माण प्रारम्भ किया जा रहा है।

पलायन रोकने और रोजगार को बढ़ाने में सीएम त्रिवेन्द्र की भूमिका…

राजेन्द्र जोशी (स्वतंत्र पत्रकार)। पलायन रोकने और रोजगार को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए है। मुख्यमंत्री जानते है कि उत्तराखंड में कृषि, बागवानी और पर्यटन की अपार संभावनाएं है। आज हम किसानों के संदर्भ में सरकार के द्वारा लिये गये निर्णयों की जानकारी देने का प्रयास कर रहे है।

क्या आप जानते है… उत्तराखंड में किसानों को समाज कल्याण विभाग की ओर से पेंशन दी जाती है। यह सौगात और किसी ने नहीं बल्कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सत्ता संभलाने के बाद प्रदेश के किसानों को दी। उन्होंने किसानों के पलायन को रोकने के लिए किसान पेंशन योजना की शुरूआत की। इस योजना में 60 साल से अधिक उम्र के किसानों को उत्तराखंड सरकार की तरफ से 1000 रुपये महीने का पेंशन दिया जाता है। यह योजना उत्तराखंड के छोटी जोत के किसानों के लिए वरदान है। राज्य के नौ जिले पर्वतीय है और यहां लोगों के पास छोटी-छोटी जोते है। मुख्यमंत्री ने इस योजना के माध्यम से उन्हें बड़ी राहत दी है। अगर आपके आस-पास भी ऐसे किसान है तो उन्हें इस योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित करे।

प्रवासी और पलायन रोकने के लिए उत्तराखंड में खेती को मनरेगा से जोड़ा गया है। कृषि वैज्ञानिक इसे ऐतिहासिक कदम मान रहे है। मनरेगा के तहत जहां एक ओर प्रवासियो के साथ ही यहां रहे रहे लोगों को मजदूरी मिलेगी। वहीं, सामूहिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार का सृजन तो होगा ही। साथ ही सीमांत क्षेत्रों में आबादी की बसावट होने से घुसपैठ रोकने में मदद भी मिलेगी।

वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना को मंजूरी दी गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत योजना में प्रत्येक ब्लाक में एक-एक गांव चयनित कर, वहां क्लस्टर आधार पर खेती होगी। इसमें गांव में रहने वाले और प्रवासी, सभी की भूमि में खेती होगी। क्लस्टर कम से कम 10 हेक्टेयर का होगा और इसमें सौ किसान खेती करेंगे। योजना संचालन को प्रति गांव 15 लाख रुपये मिलेंगे।

आपको बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस वर्ष गैरसैंण में बजट प्रस्तुत करते हुए किसानों के बंपर घोषणाएं की है। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की तर्ज पर ही मुख्यमंत्री ने राज्य में कृषि विकास योजना लागू करने के साथ ही बजट में ही 18 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया। वहीं मत्स्य पालकों की आय दोगुनी करने और पशुचारा परिवहन योजना शुरू करने की घोषणा की थी। सरकार ने गेहूं और धान की खरीद के लिए 2300 करोड़ रुपये की व्यवस्था की। तो वहीं जैविक खेती पर भरोसा जताते हुए जैविक कृषि विधेयक लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 800 कस्टम हायरिंग सेंटर और 500 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के निर्देश दिये गये है। जहां से किसान अपने जरूरत के हिसाब से मशीन किराए पर ले सकते हैं। किसानों को अपने नजदीकी बाजार में उत्पादों को बेचने के लिए कई प्रकार की रियायतें दी जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के द्वारा किसानों के हित में लगातार कई ऐसे कार्य किये जा रहे है। जिनसे उनकी आर्थिकी संवरे और वह आत्मनिर्भर बन सके। बात चाहें गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की हो या संकट में चीनी मिलों को उबारने की, मुख्यमंत्री ने इस बार के बजट में कई घोषणायें की है।

जब सरकार उत्तराखंड में कृषि को संवारने और आर्थिकी का मुख्य जरिया बनाने के लिए प्रयासरत हो तो हमें भी कुछ जिम्मेदारी निभानी होगी। युवाओं को पांच से दस हजार रुपये की नौकरी के लिए शहरों में भटकने से बेहतर है कि हम इन योजनाओं का लाभ उठाये। अब समय आ गया है कि अपनी आर्थिकी के साथ ही राज्य की आर्थिकी संवारने में योगदान दे।

कोरोना से बचाव का मंत्र है सावधानीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोगों से अपील की है कि वे कोरोना संक्रमण को लेकर बहुत सावधानी बरतें। विशेषज्ञों की राय है कि बरसात के सीजन में आद्रता बढ़ने से कोरोना वायरस की ग्रोथ बढ़ती है। उन्होंने कहा कि जरा सी भी लापरवाही कोरोना को घर में आने का निमंत्रण दे सकती है।

मुख्यमंत्री प्रदेश पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह बरसात का सीजन है। इसमें आद्रता बढ़ती है। विशेषज्ञों की राय है कि आद्रता में वायरस की ग्रोथ बढ़ती है। एक चीज और सामने आई है कि कोरोना का ड्राप्लेट अभी 50 माइक्रोन का है, लेकिन आद्रता के कारण एरोसॉल में बदल जाता है।

इसका मतलब यह है कि यह पांच माइक्रोन का हो जाता है। इसकी हवा में उड़ने की गति बहुत ज्यादा है। यह काफी दूर तक ट्रैवल कर सकता है। इसलिए जितनी सावधानी बरत सकते हैं, बरतें। उन्होंने कहा कि अभी कोविड का कोई इलाज नहीं है। इससे बचाव का एक ही मंत्र है सावधानी। इसका कोई दोस्त है न रिश्तेदार है। इसके लिए सब बराबर हैं।