युवा अवस्था में जोखिम लेने का जज्बा भी होता है और समय भीः त्रिवेंद्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस के अवसर पर ‘‘आत्मनिर्भरता से अंत्योदय तक’’ वर्चुअल युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं में जो उत्साह एवं जोश होता है, सही दिशा मिलने पर युवा सब कुछ कर सकता है। युवा अवस्था में जोखिम लेने का जज्बा भी होता है और समय भी। किसी भी कार्य क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए वैचारिक दृढ़ता का होना जरूरी है। हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है, इसके लिए सोच स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण में युवाओं एवं महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उत्तराखण्ड में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने के लिए अपार संभावनाएं हैं। प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है, पर्वत श्रृंखलाएं, पर्याप्त जल, जंगल, जैव विविधता जैसी प्राकृतिक चीजें हमें वरदान स्वरूप मिली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वरोजगार के लिए भी पर्याप्त अवसर हैं। एडवेंचर टूरिज्म, वाटर स्पोर्ट एवं पर्यटन के क्षेत्र में अनेक गतिविधियां की जा सकती है। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। इस योजना में लगभग सभी प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। हमें आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जब राज्य आत्मनिर्भर होंगे तो देश स्वतः ही आत्म निर्भर हो जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में ग्रोथ सेंटर की शुरुआत की है, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत बस खरीदने के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इन बसों का रोडवेज से अनुबंध करने की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में पर्यटन के तहत हम 10 हजार मोटर बाईक देंगे। इसमें दो साल का ब्याज राज्य सरकार देगी। 25-25 किलोवाट के 10 हजार छोटे सोलर पावर प्रोजेक्ट की योजना मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लाई गई है। इसके तहत 25 प्रतिशत सब्सिडी और बिजली की खरीद की गारंटी है। पिरूल से बिजली उत्पादन का कार्य शुरू किया गया है। सोलर फार्मिंग की शुरूआत की गई है जिसमें 208 मेगावाट के कार्यों की शुरूआत हुई है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कृषकों को 03 लाख तक का एवं स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख रूपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। उड़ान योजना के तहत हेली सेवाओं को विस्तार दिया गया है। ऑलवेदर रोड पर तेजी से कार्य चल रहा है। हमें स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना होगा। उसकी ब्रान्डिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग करनी होगी। उत्तराखण्ड के लोकल उत्पादों को हिमालयी ब्रान्ड बनाने की दिशा में कार्य करने होंगे।

पंडित दीनदयाल ने गरीबों के कल्याण को किया सदैव प्रयास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तहसील चैक, देहरादून स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही अपने आवास में उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी पुष्प अर्पित कर कहा कि पंडित दीनदयाल ने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद मंत्र और समाज सेवा जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी। उनका राजनीतिक दर्शन भारतीय चिंतन पर आधारित था। उनका मानना था कि देश तभी खुशहाल व समृद्ध हो सकता है, जब समाज के अन्तिम पंक्ति पर खड़े गरीबों का उत्थान हो। गरीबों के कल्याण के लिए वे निरन्तर प्रयासरत रहे। केन्द्र व राज्य सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा दिये गये जीवन दर्शन का अनुसरण करते हुए समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं, उनके जीवन दर्शन एवं चिन्तन को सबने साराहा।

पीएम मोदी की प्राथमिकताओं में किसानः त्रिवेंद्र
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार किसानों की सबसे बड़ी हितैषी सरकार है। संसद में सरकार द्वारा पारित कराए गए कृषि विधेयकों से किसानों की दशा और दिशा में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। इन विधेयकों में ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे किसान स्वयं अपनी उपज को अच्छी कीमतों पर मंडी में या मंडी के बाहर कहीं भी बेच सकेगा। मोदी हमेशा से किसानों के हितैषी रहे हैं। वे जब गुजरात के सीएम थे तो उन्होंने वहां किसानों के लिए 7 घंटे नियमित और निश्चित बिजली की व्यवस्था की। उन्होंने कृषि महोत्सवों की शुरूआत की। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी किसान हमेशा उनकी प्राथमिकताओं में रहे। उनकी सरकार में गांव, गरीब और किसानों का सबसे पहले ख्याल रखा गया है। वर्ष 2009 में यूपीए की सरकार में कृषि मंत्रालय का बजट केवल 12 हजार करोड़ रूपए था जो आज कई गुना बढ़ाकर 1 लाख 34 हजार करोड़ किया गया है। पहले कभी भी केंद्र सरकार एक साल में 75 हजार करोड़ रूपए किसानों के हित में खर्च नहीं कर पाई थी। लेकिन मोदी सरकार ने यह मुमकिन कर दिया। पीएम किसान योजना से अब तक 92 हजार करोड़ रूपए सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में पहुंच चुके हैं। मोदी सरकार ने कृषि अवसंरचना के लिए 1 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। यूपीए के समय किसानों को 8 लाख करोड़ का कर्ज मिलता था, आज 15 लाख करोड़ का ऋण सालाना दिया जा रहा है।

धान खरीद के लिए 10 लाख मी.टन का निर्धारित किया लक्ष्य, बनाये जाएंगे 242 क्रय केन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने खरीफ खरीद सत्र 2020-21 के लिए धान क्रय सम्बन्धी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष 242 धान क्रय केन्द्रों के माध्यम से 10 लाख मी0टन धान क्रय के लक्ष्य पर सहमति व्यक्त की। साथ ही सभी आवश्यक व्यवस्थाये सुनिश्चित करने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। सीएम ने इस वर्ष ए ग्रेड धान का मूल्य रूपये 1888 प्रति कुंतल तथा औसत धान का रूपये 1868 प्रति कुंतल निर्धारित किये जाने पर भी सहमति जतायी। उन्होंने आगामी 01 अक्टूबर से की जाने वाली धान क्रय के सम्बन्घ में सभी व्यवस्थायें ससमय सुनिश्चित करने को भी कहा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि धान क्रय के सम्बन्ध में पिछले वर्ष की व्यवस्थाओं में यदि कोई कमी रह गई हो तो उसका संज्ञान लेकर उससे बेहतर व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाये। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि क्रय केन्द्रों पर किसानों को कोई परेशानी न हो इसका ध्यान रखा जाय। उन्होंने धान मूल्य का किसानों को अविलम्ब भुगतान की व्यवस्था बनाने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में सहकारिता विभाग को आवश्यक धनराशि व्यवस्था करने के साथ ही प्रबन्ध निदेशक मण्डी को भी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। किसानो को बेहतर सुविधाये उपलब्ध हो इसके लिए किसानों का डाटा तैयार करने पर भी ध्यान देने के निर्देश भी दिये।

केंद्रीय मंत्री ने गरीब परिवारों को एक रूपये पेयजल कनेक्शन देने पर मुख्यमंत्री की सराहना की

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के मध्यम से मुख्यमत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के साथ राज्य में जल जीवन मिशन के तहत संचालित किये जा रहे कार्यों की गहनता से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि समयबद्धता वाले जल जीवन मिशन कार्यक्रम के लिये धनराशि की कमी नहीं होने दी जायेगी। राज्य में योजना के तहत एक रूपये में पेयजल कनेक्शन दिये जाने की व्यवस्था के लिये उन्होंने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए इसे देश के लिये अभिनव पहल बताया।

उन्होंने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से उत्तराखण्ड मॉडल स्टेट बन सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के हालातों के बावजूद भी देश में योजना के क्रियान्वयन की स्थिति सन्तोषजनक है। उन्होंने कहा कि योजना में धन की कमी न हो इसके लिये 15 वें वित्त आयोग द्वारा भी 60 हजार करोड़ पंचायती राज विभाग को दिये गये हैं जिसमें से 30 हजार करोड़ पेयजल से सम्बन्धित योजनाओं पर व्यय किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देश में पिछले एक वर्ष में 2.25 करोड़ घरों को पेयजल कनेक्शन से जोड़ा गया है।

उत्तराखण्ड में 2022 तक हर घर नल से जोड़ने का है लक्ष्य

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में 2022 तक प्रत्येक घर को नल से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, इसके लिये अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये गये हैं। इसके लिये 1500 कनेक्शन प्रतिदिन दिये जाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि हर हाल में लक्ष्यों की पूर्ति करने के लिये अधिकारियों को हिदायत दी गई है। इस सम्बन्ध में आवश्यक तंत्र विकसित करने के साथ ही कार्य अवधि बढ़ा कर कार्य करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्य राज्य के लोगों के व्यापक हित में है अतः इसमें कोई लापरवाही न हो यह देखा जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये अधिप्राप्ति नियमावली में भी संशोधन कर सीमान्त क्षेत्रों के विपरीत भौगोलिक परिस्थिति वाले गांवों को हर घर नल से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रू. 2350 के स्थान पर गरीब परिवारों को एक रूपये में कनेक्शन देने की योजना को आम जनता द्वारा काफी सराहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 25 दिसम्बर तक देहरादून व बागेश्वर जनपद के अवशेष सभी घरों को नल से जोड़ दिया जायेगा। इसकी कार्य योजना भी तैयार की गई है। राज्य के सभी घरों को 2022 तक नल से जोड़ने के लक्ष्य के प्रति मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है।

आनंद वन पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा, सीएम ने सिटी फाॅरेस्ट का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं वन मंत्री डॉ. हरक सिह रावत ने झाझरा वन रेंज परिसर में उत्तराखण्ड सिटी फॉरेस्ट ‘आनंद वन’ का लोकार्पण किया। झाझरा में विकसित किये गये इस सिटी फारेस्ट में उत्तराखण्ड के विभिन्न प्रजातियों की जीव-जन्तुओं एवं प्राकृतिक दृश्यों को प्रतिकृतियों के माध्यम से दिखाया गया। इसे नेचर एजुकेशन सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के जीव-जन्तुओं एवं वनस्पतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इस वर्ष नवरात्रि के प्रथम दिवस से यह सिटी फारेस्ट सेंटर आम जन के लिए खोला जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि झाझरा में वन विभाग द्वारा प्रकृति से छेड़छाड़ किये बिना अच्छी सिटी फॉरेस्ट तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें केवल प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया गया है। आनंद वन में उत्तराखण्ड की उपकृति को दिखाने का अच्छा प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की जो संस्कृति ग्राम की परिकल्पना है। इसकी झलक भी लोगों को यहां पर देखने को मिले। जिसमें उत्तराखण्ड की संस्कृति, शिल्प, देवस्थानों एवं परम्पराओं के बारे में भी लोगों को जानकारी मिले। इसके बारे में जरूर विचार किया जाय, कि यहां पर उत्तराखण्ड की आंशिक झलक लोगों को देखने को मिले। उन्होंने कहा कि यह सिटी पार्क पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस सिटी पार्क पर एक लघु फिल्म बनाई जाय।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एक सिटी फॉरेस्ट हल्द्वानी में विकसित किया जा रहा है। प्रकृति से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मनुष्य ने जो भी प्राप्त किया है, वह प्रकृति से सीखकर किया है। प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाये रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। दुनिया प्रकृति के संरक्षण के लिए जागरूक हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उत्तराखण्ड में जल संरक्षण की दिशा में अनेक कार्य किये गये। 25 मई 2017 से व्यापक स्तर पर जल संचय अभियान चलाया गया। कोसी एवं रिस्पना नदी के पुनर्जीवीकरण के लिए व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया गया।

कैंपा के जरिए 10 हजार लोगों को मिलेगा रोजगारः डा. हरक
वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि यह सिटी फॉरेस्ट वन विभाग द्वारा समाज को एक धरोहर के रूप में सौंपा जा रहा। हल्द्वानी और ऋषिकेश में भी थीम बेस्ड सिटी पार्क बनाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वन विभाग को 10 हजार लोगों को रोजगार का जो लक्ष्य दिया गया है, वह पूरा किया जायेगा। इस वर्ष कैम्पा के माध्यम से 400 करोड़ रूपये के कार्य किये जायेंगे। जिसमें 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा जायेगा। भारत सरकार के सहयोग से देहरादून एवं कोटद्वार में नगर वन बनाने की योजना बनाई जा रही है। राज्य के अनेक विकासखण्डों में नेचर वन बनाने की योजना बनाई गई है। जल संवर्द्धन के साथ ग्रेविटी वाटर की दिशा में वन विभाग द्वारा कार्ययोजनाएं बनाई गई हैं।

मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस की बढ़ी बैचेनी, ज्यादातर विधायक पाॅजीटिव

23 सितंबर को एक दिवसीय मानसून सत्र आयोजित होगा। विपक्ष का पल्ला यहां कमजोर होने वाला है, ऐसा इस कारण है कि कांग्रेस के कई विधायक बीमार है। कोरोना संक्रमण के चलते 15 विधायक वर्चुअल आधार पर सत्र में भाग लेंगे। बेरोजगारी पर विपक्ष के हमले की संभावना से पहले ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में रोजगार के आंकड़े जारी कर विपक्ष को करार जवाब दिया है।

15 विधायकों ने वर्चुअल आधार पर सत्र की कार्यवाही से जुड़ने के लिए विधानसभा को सहमति दी है। सत्र के दिन केवल मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वाहनों को विस परिसर में प्रवेश मिलेगा। विधायकों के वाहन परिसर से बाहर पार्क होंगे और उनके साथ कोई भी सहवर्ती भी नहीं होगा।

इन विधायकों ने दी है सहमति
पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, बिशन सिंह चुफाल, चंदन रामदास, नवीन चंद्र दुम्का, संजीव आर्य, भरत चैधरी, राजकुमार, गणेश जोशी, ऋतु खंडूड़ी भूषण, दिलीप रावत, महेश नेगी, पुष्कर धामी, चंद्रा पंत, हरभजन सिंह चीमा व मनोनीत विधायक जार्ज आइवन ग्रेगरी मैन ने अब तक सत्र से वर्चुअल आधार पर जुडने की सहमति दी है।

भाजपा विधायक के मुद्दे पर घेरेगी कांग्रेस
कांग्रेस विधानमंडल दल की विधानसभा में बैठक हुई। इसमें एक महिला के यौन उत्पीड़न को लेकर भाजपा विधायक महेश नेगी पर लगे आरोपों के मामले पर सरकार को घेरेने पर चर्चा हुई।

बेरोजगारी पर सरकार का जवाब
विधानसभा सत्र में बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष के संभावित हमले को देखते हुए सरकार ने पहले ही जवाब दे दिया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की। कांग्रेस के शासनकाल में 2014 से 2017 के बीच उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 801 पदों पर चयन किया। वहीं 2017 से अब तक यानी त्रिवेंद्र सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में 6000 पदों पर आयोग ने चयन किया। इस अवधि में 10339 पदों पर चयन हुआ है।

एक-एक करोड़ की विधायक निधि विकास कार्य के लिए सीएम ने की स्वीकृत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश के सभी विधान सभा क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिये सभी विधायकों को एक-एक करोड़ की विधायक निधि को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

मुख्यमंत्री ने यह धनराशि विधायक निधि वर्ष 2020-21 में विधायक निधि योजनान्तर्गत प्रदेश के 71 विधायकों को द्वितीय किस्त के रूप में प्रति विधायक एक-एक करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निधि से विद्यायकों को अपने क्षेत्रों में क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्य सम्पादित करने में मदद मिलेगी।

जनता से किए 85 फीसदी वायदे पूरे किए, स्वरोजगार पर फोकसः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। इसमें 4 वानर रेस्क्यू स्ेंटरों की स्थापना, 125 किमी जंगली सूअर रोधी दीवार, 50 किमी सोलर फेंसिंग, 13 किमी हाथी रोधी दीवार, 250 किमी हाथी रोधी खाईयों का निर्माण शामिल है। महिला पौधालयों की स्थापना पर भी काम किया जा रहा है जिसमें कि लगभग 20 हजार महिलाओं को रोजगार सम्भावित है। एक वैश्विक स्तर का साईंस कॉलेज और प्रदेश के 5 हजार स्कूलों में हिमालय इको क्लबों की स्थापना की कार्ययोजना भी बनाई गई है।

रोजगार
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल पर वर्चुअल प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपै्रल 2017 से सितम्बर 2020 तक विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 7 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। इनमें से नियमित रोजगार लगभग 16 हजार, आउटसोर्स-अनुबंधात्मक रोजगार लगभग 1 लाख 15 हजार और स्वयं उद्यमिताध्प्राईवेट निवेश से प्रदानध्निर्माणाधीन परियोजनाओं से रोजगार लगभग 5 लाख 80 हजार है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की गई भर्तियों की बात की जाए तो इसके माध्यम से वर्ष 2014 से 2017 तक कुल 08 परीक्षाएं आयेजित की गईं जिनमें 801 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। जबकि वर्ष 2017 से 2020 तक कुल 59 परीक्षाएं आयोजित की गईं जिनमें 6000 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। वर्तमान में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 7200 पदों पर अधियाचन-भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। मनरेगा में प्रति वर्ष 6 लाख लोगों को रोजगार दिया जाता है। कोविड के दौरान इसमें अतिरिक्त रोजगार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 84 हजार अतिरिक्त परिवारों (2 लाख अतिरिक्त श्रमिकों) को रोजगार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 170 करोड़ रूपए अतिरिक्त व्यय किए गए हैं। आगामी तीन माह में कैम्पा के अंतर्गत 40 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना है। युवाओं और प्रदेश में लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई। एमएसएमई के तहत इसमें ऋण और अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसमें लगभग 150 प्रकार के काम शामिल किए गए हैं।

गैरसैंण, उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी
गैरसैंण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया। इसकी विधिवत अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अब गैरसैण में राजधानी के अनुरूप आवश्यक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना बनाई जा रही है। भविष्य की आवश्यकताओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दृष्टि से चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें तीर्थ पुरोहित और पण्डा समाज के लोगों के हक हकूक और हितों को सुरक्षित रखा गया है। अटल आयुष्मान योजना में राज्य के सभी परिवारों को 5 लाख रूपए वार्षिक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने वाला उत्तराखण्ड, देश का पहला राज्य है। अभी 2 लाख 5 हजार मरीजों को योजना में निशुल्क उपचार मिला है। जिस पर 180 करोड़ रूपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। नेशनल पोर्टेबिलिटी की सुविधा देते हुए देशभर के 22 हजार से अधिक अस्पताल इसमें सूचीबद्ध हैं।

कार्यसंस्कृति में सुधार
ई-कैबिनेट, ई-ऑफिस, सीएम डैश बोर्ड उत्कर्ष, सीएम हेल्पलाईन 1905, सेवा का अधिकार और ट्रांसफर एक्ट की पारदर्शी व्यवस्था के चलते कार्यसंस्कृति में गुणात्मक सुधार हुआ है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सरकार की प्रमुख नीति है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद पहले चरण में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। अगले डेढ़ वर्ष में इसे 40 हजार करोड़ तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

रिवर्स पलायन पर सुनियोजित प्रयास
पर्वतीय राज्य की अवधारणा से बने उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। एमएसएमई के केंद्र में पर्वतीय क्षेत्रों को रखा गया है। सभी न्याय पंचायतों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। 100 से अधिक ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी भी दी जा चुकी है। बहुत से ग्रोथ सेंटर शुरू भी हो चुके हैं। हर गांव में बिजली पहुंचाई गई है। किसानों को तीन लाख रूपए और महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के गन्ना किसानों को अवशेष गन्ना मूल्य का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया गया है।

नए पर्यटन केद्रो का विकास
13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्रों का विकास हो रहा है। होम स्टे योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। जलसंरक्षण और जलसंवर्धन पर काफी काम किया गया है। प्रदेश की नदियों, झीलों, तालाबों और जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक जनअभियान शुरू किया गया है।

डबल इंजन का असर
डबल इंजन का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रूपए की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत हुई हैं। बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजनाघ्, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियोजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, भारत नेट फेज -2 परियोजना, एयर कनेक्टीवीटी पर किया जा रहा काम मुख्य है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां उड़ान योजना में हेली सेवा प्रारम्भ की गई है। श्री बदरीनाथ धाम का भी मास्टर प्लान बनाया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों में उत्तराखण्ड ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। नीति आयोग द्वारा जारी ‘‘भारत नवाचार सूचकांक 2019’’ में पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखण्ड सर्वश्रेष्ठ तीन राज्यों में शामिल है। राज्य को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट घोषित किया गया। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को सात पुरस्कार मिले हैं। ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ अभियान में ऊधमसिंह नगर जिले को देश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में चुना गया। उत्तराखंड को खाद्यान्न उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दूसरी बार कृषि कर्मण प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। जैविक इंडिया अवार्ड 2018 के साथ ही मनरेगा में देशभर में सर्वाधिक 16 राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य को मिले। मातृत्व मृत्यु दर में सर्वाधिक कमी के लिए उत्तराखण्ड को भारत सरकार से पुरस्कृत किया गया है।

लोक कल्याणकारी सरकार
आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आंगनबाड़ी सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन की राशि को 1000 रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1200 रूपए प्रतिमाह किया गया। ग्राम प्रहरियों का मानदेय रूपए 2000 हजार प्रतिमाह किया गया। दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां अनाथ बच्चों की चिंता करते हुए उनके लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना राहत राशि को मृत्यु पर 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख, गम्भीर घायल होने पर 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार और साधारण घायल होने पर 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रूपए किया है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी दी जा रही है। विशिष्ट सेवा पदक से अलंकृत सैनिकों को अनुमन्य राशि में कई गुना बढ़ोतरी की है।

कोविड-19 से लड़ाई, हेल्थ सिस्टम को मजबूती
उत्तराखण्ड में सभी के सहयोग से कोविड-19 से लड़ाई लड़ी जा रही है। परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले रहे हैं। सर्विलांस, सेम्पलिंग, टेस्टिंग पर फोकस किया जा रहा है। राज्य में हेल्थ सिस्टम को मजबूत किया गया है। पर्याप्त संख्या में कोविड अस्पताल, आइसोलेशन बेड, आईसीयू बेड, आक्सीजन सपोर्ट बेड और वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। अब राज्य के सभी जनपदों में आई0सी0यू0 स्थापित किए जा चुके हैं। मार्च में राज्य में कोरोना संक्रमण की टेस्टिंग सुविधा नहीं थी। वर्तमान में 5 सरकारी और विभिन्न प्राईवेट लेब में कोविड-19 के सेम्पल की जांच की जा रही है। वर्तमान में 481 आईसीयू बेड, 543 वेंटिलेटर, 1846 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 30500 आईसोलेशन बेड उपलब्ध हैं। रुद्रपुर, हरिद्वार और पिथौरागढ़ में भी मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। पिछले लगभग तीन साल में पर्वतीय क्षेत्रों में डाक्टरों की संख्या में पहले से लगभग ढाई गुना वृद्धि की गई है। टेलीमेडिसीन और टेलीरेडियोलोजी भी लाभदायक साबित हो रही हैं।

सीएम बोले सरकार ने जो वायदे जनता से किए अधिकांश पूरे हुए, शेष पर तेजी से हो रहा कार्य

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पिथौरागढ़ के विकास कार्य के लिए 112 करोड़ 47 लाख 11 हजार की लागत के 27 विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास किया। जिसमें 32 करोड़, 30 लाख, 63 हजार रूपये की लागत से निर्मित 15 योजनाओं का लोकार्पण एवं 80 करोड़, 16 लाख, 48 हजार रूपये की लागत की कुल 12 विकास कार्यों का शिलान्यास शामिल है।

देवसिंह मैदान में स्थित नवनिर्मित बहुमंजिला कार पार्किंग के लोकार्पण कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के आज साढ़े तीन साल पूर्ण हो रहे हैं। सरकार द्वारा इन साढ़े तीन सालों में राज्य के विकास हेतु जो वादे किये गये थे उनमें से अधिकांश पूर्ण कर लिये गये हैं। शेष विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने हेतु कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। सरकार द्वारा राज्य में इन्वेस्टर समिट का आयोजन कर पहाड़ों के लिए 40 हजार करोड़ के एमओयू साइन किये गये। इनमें से अनेक होटल व्यवसाय के क्षेत्र में भी कार्य हुए जिनसे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है जिसका सीधा लाभ स्थानीय जनता को मिल रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा स्वरोजगार को बढ़ाये जाने हेतु विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य कराये जा रहे हैं जिसमें से 800 करोड़ की सोलर फार्मिंग का कार्य प्रारम्भ हो गया है।

25 हजार बंदरों के लिए 04 बंदरबाड़े बनाए जा रहे
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि स्वरोजगार के क्षेत्र में राज्य में 10 हजार नौजवानों को मोटर बाईक टैक्सी दी जा रही है, इसके अतिरिक्त कैंपा के तहत 40 हजार लोगों को प्रत्येक गांव में ही कार्य उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों एवं काश्तकारों को बन्दरों से होने वाले नुकसान को रोके जाने हेतु सरकार द्वारा प्रदेश में 25 हजार बन्दरों की क्षमता वाले 04 बन्दरबाडे बनाये जा रहे हैं जिसका शिलान्यास आगामी 09 नवम्बर 2020 को किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में समय-समय पर सरकारी विभागों में नौकरी हेतु भर्तियां की गयी, वर्ष 2017 में राज्य में 1084 चिकित्सक तैनात थे जो आज 2500 तक हो गये हैं। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से शीघ्र ही 4 हजार नयी भर्तियां की जायेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य की कुल 86 प्रतिशत साक्षरता दर है इससे शत प्रतिशत करने के लिये एक पढ़े, एक को पढ़ायें के तहत राज्य की निरक्षरता को दूर कर उत्तराखंड को निरक्षरता से दूर किया जा सकता है।

कुपोषित बच्चों को गोद लेने का अभियान सफल दिशा में जा रहाः त्रिवेंद्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कुपोषण मुक्त उत्तराखण्ड के लिए शुरू किये गये गोद अभियान में कुपोषण मुक्त बच्चों के अभिभावकों को सम्मानित किया। कहा कि प्रधानमंत्री ने कुपोषण मुक्त भारत का जो अभियान चलाया है। इस दिशा में स्वयं सेवी संस्थाओं, जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने बच्चों को गोद लेकर उनको कुपोषण मुक्त करने की दिशा में अच्छा कार्य किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एक वर्ष पूर्व अति कुपोषित बच्चों को गोद लेने का जो अभियान शुरू किया गया था, इसके अच्छे परिणाम रहे। बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने में माँ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों की नियमित एवं संतुलित खान-पान से कुपोषित बच्चे जल्द सामान्य श्रेणी में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के कुपोषित होने पर उसका नुकसान न केवल बच्चे के माता-पिता पर पड़ता है, बल्कि पूरे समाज को इसका नुकसान होता है। कुपोषण मुक्त भारत बनाने के लिए हम सबको प्रयास करने होंगे।

सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास सौजन्या ने कहा कि कुपोषण मुक्त उत्तराखण्ड के लिए शुरू किये गये गोद अभियान को आगे भी जारी रखा जायेगा। पिछले वर्ष जब यह अभियान शुरू हुआ था, तब राज्य में 1700 अति कुपोषित एवं 12 हजार कुपोषित बच्चे थे। इस अभियान के तहत 9 हजार 177 बच्चों को गोद लिया गया। जिसमें से 2349 बच्चों के ग्रेड में सुधार हुआ है। बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से टेक होम राशन का घरों में वितरण किया जा रहा है। सरकार द्वारा अतिकुपोषित एवं कुपोषित बच्चों को प्रति सप्ताह दो-दो दिन अण्डा, केला एवं दूध दिया गया, इससे भी बच्चों को कुपोषण से सामान्य श्रेणी में लाने में मदद मिली।