उत्तराखंड: नए विषयों से बढ़ेगा युवाओं का दायरा, मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ

उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक, पारदर्शी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों और दूरदर्शी नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम–2021 (National Commission for Allied and Healthcare Professions Act – 2021) के तहत उत्तराखंड राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद के गठन की प्रक्रिया को तेजी देने हेतु सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा–संवेदनशील राज्य में आधुनिक, प्रशिक्षित और प्रमाणित allied health workforce का विकास अत्यंत आवश्यक है। परिषद के गठन से न केवल शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि देशभर में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभाएगा।

*परिषद गठन पर विस्तृत चर्चा, चयन समिति के गठन का निर्णय*
बैठक में परिषद के गठन, उसकी संरचना, भविष्य की आवश्यकताओं और कार्य प्रणालियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। यह तय किया गया कि परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए “तलाश–सह–चयन समिति” बनाई जाएगी, जो निर्धारित योग्यताओं और अनुभवों के आधार पर नामों का चयन करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए प्रारंभिक बजट, कार्यालय संरचना, तकनीकी सहायता और मानव संसाधन की उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि परिषद अपने दायित्वों का निर्वहन शीघ्र आरंभ कर सके।

वर्तमान में राज्य में पैरामेडिकल शिक्षा उत्तराखंड पैरामेडिकल अधिनियम–2009 और स्टेट मेडिकल फैकल्टी के माध्यम से संचालित होती है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषयों के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। राष्ट्रीय अधिनियम लागू होने के बाद इन सभी पाठ्यक्रमों को और अधिक मानकीकृत, रोजगारोन्मुख, और कौशल आधारित बनाया जाएगा। नए अधिनियम में कुल 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी गई है। इससे विद्यार्थियों को न सिर्फ व्यापक करियर अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग्यता को उच्च पहचान मिलेगी।

*मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ*
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि अधिनियम के तहत कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे—
पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन आदि। इन विषयों के शामिल होने से राज्य के युवाओं को विस्तृत करियर विकल्प, निजी और सरकारी क्षेत्र में बेहतर प्लेसमेंट, तथा शोध और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं में अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम उत्तराखंड को स्वास्थ्य शिक्षा और allied health services के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेगा और भविष्य में राज्य एक “हेल्थ एजुकेशन हब” के रूप में स्थापित होगा।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़, सुगठित और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन हमारे लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगा। इससे पैरामेडिकल तथा allied health शिक्षा में एकरूपता आएगी, पाठ्यक्रमों का मानकीकरण होगा और पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी बनेगी। नए अधिनियम के तहत कई उभरते विषय और विशेषज्ञताएँ शामिल होंगी, जिससे युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल राज्य बनकर उभरे।

दीपावली पर हाई अलर्ट मोड में स्वास्थ्य विभाग, 24 घंटे रहेंगी एक्टिव

दीपावली पर्व के अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पूरी तरह सक्रिय और सतर्क बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के दिशा-निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के प्रशासन और चिकित्सा संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्वों की खुशियाँ तभी सार्थक हैं जब हर नागरिक सुरक्षित और स्वस्थ हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दीपावली के दौरान आग, सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए चौबीसों घंटे स्वास्थ्य सेवाएँ तैयार रहें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि सभी अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं और आपात चिकित्सा इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विभाग ने पर्याप्त चिकित्सा कर्मियों की तैनाती, आवश्यक दवाओं और उपकरणों के भंडारण, तथा ब्लड बैंक और बर्न यूनिट की पूर्ण कार्यशीलता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि जन सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है, और हर जिले में व्यवस्था की सतत समीक्षा की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नागरिकों से अपील की कि दीपावली उत्साह से मनाएं, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन अवश्य करें।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को त्योहारों के दौरान 24×7 सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्वों के दौरान आग लगने, दुर्घटनाओं या अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियों की संभावना को देखते हुए अस्पतालों, ट्रॉमा सेंटरों और नियंत्रण कक्षों को पूरी तरह क्रियाशील रखा गया है। जारी परिपत्र के अनुसार, 108 नेशनल एम्बुलेंस सेवा, जिला नियंत्रण कक्ष, और अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड सतत निगरानी में रहेंगे। आपात सेवाओं के लिए पर्याप्त डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी तय की गई है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि सभी जिलों में अग्निशमन, पुलिस, परिवहन और स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। उन्होंने बताया कि पर्वों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स तैनात रहेंगी। जिलाधिकारियों को स्वास्थ्य संस्थानों की तैयारियों की समीक्षा और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि जनजागरूकता के माध्यम से नागरिकों को सुरक्षित पर्व मनाने का संदेश दिया जा रहा है। स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया और सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से लोगों से अपील की गई है कि आतिशबाज़ी सावधानी से करें, विद्युत उपकरणों का प्रयोग सोच-समझकर करें और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत 108 हेल्पलाइन पर संपर्क करें। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि “सभी अधिकारी और कर्मचारी यह सुनिश्चित करें कि पर्वों की खुशी के बीच किसी भी नागरिक को चिकित्सा सुविधा पाने में कठिनाई न हो।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि समय पर राहत और रोकथाम सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि दीपावली और इगास पर्व के दौरान विभाग पूरी तत्परता से कार्य करेगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे पर्वों की खुशियाँ जिम्मेदारी के साथ मनाएं, दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद के लिए संपर्क करें।

उत्तराखंडः बच्चों की सुरक्षा सर्वाेच्च, प्रतिबंधित कफ सिरप के खिलाफ सघन अभियान

प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के दिशा-निर्देश पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) उत्तराखंड द्वारा पूरे राज्य में प्रतिबंधित और संदिग्ध कफ सिरप की बिक्री एवं वितरण के खिलाफ सघन अभियान चलाया जा रहा है।

आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. आर. राजेश कुमार के आदेशों के क्रम में प्रदेशभर में लगातार छापेमारी की जा रही है। टीमों द्वारा विभिन्न मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों से सैंपल एकत्र कर उन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं को भेजा जा रहा है।

एफ.डी.ए. मुख्यालय में अपर आयुक्त ताजवर सिंह जग्गी की पत्रकार वार्ता
इसी कड़ी में सोमवार को एफ.डी.ए. मुख्यालय, देहरादून में अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर (एफ.डी.ए.) एवं ड्रग कंट्रोलर ताजवर सिंह जग्गी ने पत्रकारवार्ता का आयोजन किया। पत्रकारवार्ता में उन्होंने प्रदेशभर में संदिग्ध औषधियों की जांच, सैंपलिंग और बाजार नियंत्रण की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से जानकारी साझा की गई। अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप के सेवन से बच्चों के बीमार होने और मृत्यु की घटनाओं के बाद उत्तराखंड सरकार ने यह कदम एहतियातन और जनहित में उठाया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रदेश के हर जिले में चलाया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

सभी जिलों में सैंपलिंग और जांच अभियान तेज
अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में औषधि नियंत्रण अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे सीएफटीओ, मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों से कफ सिरप के नमूने एकत्र करें और परीक्षण हेतु अधिकृत प्रयोगशालाओं को भेजें। उन्होंने कहा कि निर्माण कंपनियों से भी कच्चे माल जैसे पॉलीइथिलीन ग्लाइकॉल, सॉर्बिटॉल और अन्य रासायनिक तत्वों के सैंपल लेकर गुणवत्ता जांच की जा रही है, ताकि उत्पादन स्तर पर भी किसी प्रकार की कमी या गड़बड़ी की संभावना समाप्त की जा सके।

अब तक प्रदेशभर में 63 औषधियों के नमूने एकत्र किए जा चुके हैं, जिनकी जांच प्रक्रिया जारी है। विभाग द्वारा प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बिना डॉक्टरी परामर्श बच्चों को न दें दवा
अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजवीर सिंह जग्गी ने आम जनता से अपील की कि वे बिना चिकित्सक की सलाह के बच्चों को कोई भी कफ सिरप या औषधि न दें। उन्होंने कहा बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का जोखिम न लिया जाए। यदि बच्चे में सर्दी, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो केवल योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर ही दवा दें। उन्होंने कहा यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा, ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने बताया कि विभागीय टीमें इस अभियान की सतत निगरानी कर रही हैं और प्रत्येक जिले में औषधि दुकानों व थोक विक्रेताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

अपर आयुक्त ने यह भी बताया कि आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भारत सरकार की एडवाइजरी को तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए। साथ ही औषधि दुकानों और निर्माण इकाइयों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

पुरानी या खुली दवाइयाँ बच्चों को बिल्कुल न दें
अपर आयुक्त एवं ड्रग कंट्रोलर ताजवीर सिंह जग्गी ने आम जनता से अपील की है कि अपने घरों में पहले से खुली हुई कफ सिरप या किसी भी प्रकार की दवाई बच्चों को बिल्कुल न दें। उन्होंने कहा कि कई बार पुरानी या खुली दवाइयाँ अपनी प्रभावशीलता खो देती हैं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। इसलिए ऐसी किसी भी खुली बोतल या अधूरी दवाई को सुरक्षित तरीके से नष्ट करें और घर में दवाइयाँ खुले रूप में न रखें। उन्होंने आम लोगों से आग्रह किया कि दवाइयाँ केवल चिकित्सक की सलाह पर ही उपयोग करें और हर दवा की एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें, ताकि किसी प्रकार की अनचाही स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।

मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश-“बच्चों की सुरक्षा सर्वाेच्च
अपर आयुक्त ने कहा मुख्यमंत्री जी, स्वास्थ्य मंत्री जी व आयुक्त महोदय अभियान की लगातार अपडेट ले रहे हैं। उनके सख्त निर्देश हैं कि हर घर की थाली शुद्ध रहे और हर बच्चे का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है। औषधि और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सभी गतिविधियों की कड़ी निगरानी की जा रही है। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण औषधियां ही आमजन तक पहुंचें, यह सुनिश्चित किया जा रहा है।

दीपावली से पहले खाद्य पदार्थों पर भी सख्त निगरानी
अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजवर सिंह जग्गी ने बताया कि राज्य में दवाइयों के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान भी तेजी से चलाया जा रहा है। दीपावली पर्व को देखते हुए विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत राज्य की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई गई है, और मिठाइयों व खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा त्योहारों के समय मिलावटखोरी पर अंकुश लगाना हमारी प्राथमिकता है। विभाग की टीमें फील्ड में सक्रिय हैं और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

एफ.डी.ए. की अपील
प्रेस वार्ता के अंत में अपर आयुक्त ने कहा कि एफ.डी.ए. की यह कार्रवाई सरकार की जनहित प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने कहा उत्तराखंड सरकार जनता के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान प्रदेशव्यापी है और निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने आम जनता के साथ ही मीडिया के साथियों से भी सहयोग की अपील की। ताकि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सके।

सीएम धामी के निर्देशों पर धराली से गंगोत्री तक तैनात हैं स्वास्थ्य के सिपाही, हर गांव तक पहुंचीं चिकित्सा टीमें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तरकाशी जिले में आई आपदा के बाद स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड की टीमें तेजी से राहत और चिकित्सा सेवा कार्यों में जुट गई हैं। प्रभावितों को प्राथमिक उपचार से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता तक हर संभव सुविधा प्रदान की जा रही है। विभाग की टीमें धराली से लेकर गंगोत्री और चिन्यालीसौड़ तक हर जगह तैनात हैं और बिना रुके राहत कार्यों में लगी हुई हैं।

मातली में 128 यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण, 25 को प्राथमिक उपचार
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि आज शुक्रवार को हेली सेवा के माध्यम से धराली से रेस्क्यू कर 128 यात्रियों को मातली लाया गया। यहां तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी यात्रियों का परीक्षण किया, जिनमें से 25 लोगों को प्राथमिक उपचार की आवश्यकता पाई गई और उन्हें मौके पर ही राहत प्रदान की गई। एक गंभीर मरीज को जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी में भर्ती किया गया है।

चिन्यालीसौड़ में 76 यात्रियों की स्क्रीनिंग, सभी स्वस्थ
वहीं दूसरी ओर, चिन्यालीसौड़ हेलीपैड पर पहुंचे 76 यात्रियों की भी स्वास्थ्य जांच की गई। सभी यात्री स्वस्थ पाए गए और उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। चिकित्सकों ने सतर्कता से सभी की स्क्रीनिंग की और आवश्यक परामर्श दिए।

जिला चिकित्सालय में 09 मरीजों का उपचार जारी
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि उत्तरकाशी जिला अस्पताल में वर्तमान में 09 मरीज भर्ती हैं। इन सभी का उपचार विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी दी कि मरीजों को हर प्रकार की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है।

धराली में टीम मुस्तैद
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी दी कि धराली में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ मेघना असवाल के नेतृत्व में टीम गई है। इसके अलावा टीम में डॉ मोहन डोगरा, डॉ कुलवीर सिंह राणा, निश्चेतक डा. संजीव कटारिया, जनरल सर्जन डा. परमार्थ जोशी, निश्चेतक डा. एम एस कौशिक, अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. शिवम् पाठक और मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित गोदिवाल शामिल हैं। इसके अलावा गंगोत्री, गंगनानी, भटवाड़ी, जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी, मातली, चिन्यालीसौड़ में विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम तैनात की गयी है ताकि किसी भी आपदा प्रभावित को जरूरी इलाज समय से मिल सके। धराली क्षेत्र से नेटवर्क बाधा के कारण डेटा नहीं मिल पाया है। फिर भी, स्वास्थ्य विभाग की टीम वहाँ डॉ. मेघना असवाल के नेतृत्व में लगातार सक्रिय है और राहत कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।

सीएम धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा राहत कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर, एम्बुलेंस और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक रेस्क्यू यात्री की स्वास्थ्य जांच की जा रही है और आवश्यक उपचार तत्काल दिया जा रहा है।

गंगोत्री से चिन्यालीसौड़ तक, हर क्षेत्र में तैयार स्वास्थ्य सेवाएं
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि आपदा राहत कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यक स्वास्थ्य संसाधनों की समुचित व्यवस्था की है। गंगोत्री, हर्षिल, भटवाड़ी, मातली और चिन्यालीसौड़ जैसे प्रमुख राहत केंद्रों में चिकित्साधिकारियों की तैनाती के साथ-साथ एम्बुलेंस सेवाएं, जीवनरक्षक दवाएं और मेडिकल किट्स उपलब्ध कराई गई हैं। हर्षिल में 9 चिकित्साधिकारी और 3 एम्बुलेंस के साथ 20 मेडिकल किट्स की व्यवस्था की गई है, जबकि मातली में 5 चिकित्साधिकारी और 14 चिकित्सा कर्मी 8 एम्बुलेंस व पर्याप्त उपकरणों के साथ कार्यरत हैं। इसी प्रकार चिन्यालीसौड़, गंगोत्री और भटवाड़ी में भी जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य टीमों की तैनाती कर हर स्तर पर मरीजों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीमें तैनात
राज्य नोडल अधिकारी डॉ बिमलेश जोशी ने बताया कि आपदा राहत कार्यों के लिए विभिन्न स्थानों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें तैनात की गई हैंः-

धराली टीमरू-
डॉ. मेघना असवाल (गायनेकोलॉजिस्ट)
डॉ. मोहन डोगरा
डॉ. कुलवीर सिंह राणा
डॉ. संजीव कटारिया (निश्चेतक)
डॉ. परमार्थ जोशी (जनरल सर्जन)
डॉ. एम. एस. कौशिक (निश्चेतक)
डॉ. शिवम् पाठक (अस्थिरोग विशेषज्ञ)
डॉ. रोहित गोदिवाल (मनोरोग विशेषज्ञ)

अन्य टीमेंः-
मातलीरू डॉ आर.एस. बिष्ट, डॉ. रमेश कुंवर ( डिप्टी सीएमओ हरिद्वार), डॉ. अनमोल सिंह, डॉ. मनीष शर्मा
गंगोत्रीरू डॉ. दीपक रावत, डॉ. पीयूष राणा
गंगनानीरू डॉ. राहुल लाल, डॉ. विशाल सिंह
भटवाड़ीरू डॉ. वेदप्रकाश
चिन्यालीसौड़रू डॉ. विनोद कुकरेती

जिला चिकित्सालय उत्तरकाशीः-
डॉ. आलोक जैन (ईएनटी)
डॉ. के एस भंडारी (अस्थिरोग विशेषज्ञ)
डॉ. एच एस सलूजा (जनरल सर्जन)
डॉ. यशपाल तोमर (गायनेकोलॉजिस्ट)
डॉ. अरविंद राणा (अस्थिरोग विशेषज्ञ)
डॉ. अभिषेक नौटियाल (निश्चेतक)

सीएस ने प्रदेश के अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण के सम्बन्ध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश के अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण के सम्बन्ध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिला एवं उपजिला अस्पतालों को आवश्यक सुविधाओं से संतृप्त किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला एवं उप जिला अस्पतालों में चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं बाल रोग विशेषज्ञ सहित रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिला एवं उपजिला अस्पतालों में NICU, SNCU और PICU जैसी आवश्यक सुविधाएं में अनिवार्य रूप से उपलब्ध करायी जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेशभर के ऐसे सीएचसी, जिनमें मरीजों की संख्या अधिक है या जो प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हैं, को भी फिजिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं बाल रोग विशेषज्ञ जैसी न्यूनतम आवश्यक मेडिकल सुविधाओं से संतृप्त किया जाए। साथ ही, रेडियोलॉजिस्ट एवं टेक्नीशियन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।

सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रदेश के जिला एवं उप जिला अस्पतालों के चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, रेडियोलॉजिस्ट एवं उपकरणों की उपलब्धता पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा एवं निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने किया 5 मोबाइल मेडिकल यूनिट का शुभारम्भ

प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए, पांच पूर्ण रूप से सुसज्जित मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

इस योजना का शुभारम्भ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मुख्यमंत्री आवास परिसर मेें किया गया। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को दूर करने हेेतु प्रभावी प्रयास बताया। सरकार के ‘स्वस्थ उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड’ मिशन के अनुरूप सप्ताह में छह दिन संचालित होने वाले ये एमएमयू आवश्यक निदान और उपचार सुविधाओं से सुसज्जित हैं। राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में ये 5 एमएमयू निश्चित रूप से मददगार होंगे।

इन एमएमयू का संचालन सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) द्वारा किया जाएगा और आरईसी (ग्रामीण विद्युतीकरण निगम) द्वारा अपने कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के हिस्से के रूप में वित्त पोषित किया जाएगा। प्रारम्भ में ये इकाइयां हरिद्वार में 2, उधम सिंह नगर में 2 और टिहरी गढ़वाल में 1 इकाई तीन साल की अवधि के लिए संचालित होंगी।

इन पांच एमएमयू में से एक समर्पित महिला मोबाइल मेडिकल यूनिट भी है, जिसमें पूर्णतः महिला स्वास्थ्य देखभाल करने वाले कार्मिक सक्रिय हैं। वंचित क्षेत्रों में महिलाओं की विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसे विशेष रूप से तैयार किया गया है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, डी. एस. एन. मूर्ति, एम. डी. धनुष हेल्थ केयर, सुभाष चन्द्र उप महाप्रबंधक पी. एन. बी., एम. डी. पेनेसिया हॉस्पिटल देहरादून अश्विनी, सीएससी स्टेट हेड दीपक आदि उपस्थित थे।

नर्सिंग कोर्स में जर्मन और जापानी भाषाओं को भी सिखाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिला अस्पतालों एवं उप जिला अस्पतालों को चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं उपकरणों से परिपूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिला अस्पतालों में मैनपावर, उपकरण एवं आधारभूत चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की मान्यता प्राप्त करने की दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि नैक की मान्यता के लिए पात्रता मानदंडों को पूर्ण किए जाने के लिए समय सीमा निर्धारित करते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि जर्मनी और जापान में नर्सिंग के क्षेत्र में जॉब की अत्यधिक सम्भावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कराए जाने वाले नर्सिंग कोर्स में जर्मन और जापानी भाषाओं को भी सिखाए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दून विश्वविद्यालय एवं अन्य भाषायी संस्थानों को जोड़ा जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में भारतीय चिकित्सा पद्धति अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एलोपैथिक चिकित्सा के साथ ही भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी शामिल किया जाए। इसके लिए एलोपैथी और आयुष को मिलकर कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने चारधाम मार्गों पर स्थित अस्पतालों के मजबूतीकरण पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पताल को आधारभूत चिकित्सा सुविधाओं और उपकरणों से पूर्णतः परिपूर्ण किया जाए। इन्हीं अस्पतालों को सक्षम बना कर चारधाम यात्रा के दौरान अन्य अस्पतालों से चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं करनी पड़ेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन कारगर सिद्ध हो रही है। इसे आगे भी जारी रखा जाए। उन्होंने इसके लिए डेडिकेटेड टीम लगाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति स्वास्थ्य केन्द्रों में कनेक्टिविटी बढ़ायी जाए।

समीक्षा बैठक के दौरान सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। दो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों डाईवाला एवं भटवाड़ी को उप जिला अस्पतालों में अपग्रेड किया जा रहा है। रूद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज का कार्य प्रगति पर है। विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्स और लैब तकनीशियनों की भर्ती के साथ ही स्वास्थ्य उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त पंचायत कार्यक्रम में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लक्ष्य से अधिक सफलता प्राप्त किया गया है।

इस अवसर पर मिशन निदेशक स्वाति भदौरिया, अपर सचिव रीना जोशी एवं महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

टीबी उन्मूलन में उत्तराखंड को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दिया राष्ट्रीय पुरस्कार

राज्य सरकार के सतत प्रयासों से उत्तराखंड ने टीबी उन्मूलन में बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत सरकार ने “टीबी मुक्त पंचायत पहल“ में समुदाय-आधारित प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को पुरस्कृत किया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री, जगत प्रकाश नड्डा द्वारा प्रदान किया गया। जिसे एनएचएम की मिशन निदेशक, स्वाति एस. भदौरिया ग्रहण किया। इस उपलब्धि पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने खुशी जाहिर करते हुये अधिकारियों की जमकर सराहना की, साथ ही उन्होंने जनसहयोग के लिये प्रदेश की आम जनता का आभार जताया।

नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने उत्तराखंड में टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुये कहा कि उत्तराखंड ने टीबी उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भविष्य में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगी।

मिशन निदेशक एनएचएम, स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का सफल संचालन किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है।

मिशन निदेशक ने इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय प्रशासन, आशा कार्यकर्ताओं, पंचायती राज संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समुदाय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “टीबी मुक्त पंचायत पहल“ के अंतर्गत जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता, त्वरित पहचान, बेहतर उपचार और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। राज्य में टी.बी. उन्मूलन हेतु प्रभावी ट्रैकिंग सिस्टम और मल्टी-सेक्टोरल एप्रोच को अपनाया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड में टीबी उन्मूलन को एक जन आंदोलन के रूप में अपनाया गया है, जहां ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया गया है ताकि वे अपने स्तर पर टीबी के मामलों की निगरानी और नियंत्रण कर सकें। “निक्षय मित्र योजना“ के माध्यम से निजी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया, जिससे मरीजों को पोषण और सामाजिक समर्थन मिला।
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यह पुरस्कार टीबी उन्मूलन की दिशा में किए गए अथक प्रयासों का प्रतिफल है। टीबी मुक्त उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। जब हम मिलकर इस चुनौती का सामना करेंगे, तभी स्वस्थ उत्तराखंड का सपना साकार हो सकेगा।
– ’डॉ. धन सिंह रावत,
स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड सरकार

पीएम के आह्वान को धरातल पर उतारने के लिए धामी सरकार ने कसी कमर

उत्तराखंड की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया के जिस अभियान का जिक्र किया था, उसे धरातल पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। इस क्रम में राज्य सरकार ने सबसे पहले, शैक्षणिक संस्थानों पर फोकस किया है। ईट राइट इंडिया अभियान की पृष्ठभूमि में छात्र-छात्राओं में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए नए सिरे से कवायद की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में विद्यालयी शिक्षा समेत पांच विभागों को पत्र भेजा है। पत्र में जोर दिया गया है कि छात्र-छात्राओं में संतुलित आहार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

सभी शैक्षणिक संस्थानों में डिस्पले होगी ईट राइट थाली
स्वास्थ्य सचिव डा आर राजेश कुमार की ओर से विद्यालयी शिक्षा के अलावा समाज कल्याण, कौशल विकास एवं सेवायोजन, संस्कृत शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिवों को पत्र प्रेषित किया गया है। इसमें अपेक्षा की गई है कि शैक्षणिक संस्थानों में टीन प्लेट/डिस्पले बोर्ड के माध्यम से ईट राईट थाली का प्रचार-प्रसार किया जाए। ईट राइट इंडिया अभियान के राज्य नोडल अधिकारी गणेश चंद्र कंडवाल के अनुसार-खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से स्कूली बच्चों के लिए वर्ष 2020 में खाद्य सुरक्षा मानक तय किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि ईट राइट थाली में क्या-क्या संतुलित आहार बच्चों के लिए होने चाहिए।

छह ईट राइट किचन का प्रस्ताव केंद्र को भेजेंगे

फिट इंडिया अभियान के अंतर्गत विद्यालयी शिक्षा विभाग छह ईट राइट किचन का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस प्रस्ताव को जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के अपर निदेशक कुलदीप गैरोला के अनुसार-छह विद्यालयों में ईट राइट की व्यवस्था के लिए ये किचन बनाए जाएंगे, जिन्हें हम मार्डन किचन भी कह सकेंगे। इसके अलावा, टीन प्लेट, डिस्पले बोर्ड के माध्यम से फिट इंडिया और ईट राइट का संदेश प्रसारित किया जाएगा। जागरूकता के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाने भी प्रस्तावित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी ने सभी नागरिकों से स्वस्थ रहने का जो आह्वान किया है, उसे धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड कृतसंकल्प है। सरकार ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। स्वस्थ भारत, स्वस्थ उत्तराखंड बनाने के लिए यह जरूरी है कि सभी लोग संतुलित आहार पर ध्यान देना शुरू करें। मैं सभी से अपील करता हूं कि वह इस अभियान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

उत्तराखण्ड में कोरोना का एक भी केस नहीं, हर परिस्थिति से निपटने को तैयार स्वास्थ्य विभागः राजेश कुमार

देहरादून। देश में कोविड के नए मामले सामने आने के बाद उत्तराखण्ड स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। कोविड गाइडलाइंस जारी करने के बाद स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर आर राजेश कुमार ने डेली मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। कोविड के नये वेरियंट के दृष्टिगत आज राज्य सचिवालय में स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी जनपदों के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी व स्वास्थ्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से मौजूद रहे। स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर आर राजेश कुमार ने कहा उत्तराखंड में अभी कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया है। कोरोना के नए वेरिएंट को लेकर विस्तृत गाइडलाइन के साथ ही अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। हर परिस्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने आम मानस से अपील करते हुए कहा कि सभी कोरोना गाइडलाइंस का पालन करें। राज्य के सभी अस्पतालों में सैंपलिंग हो रही है। संदिग्ध मरीजों की निगरानी की जा रही है।

कोविड को लेकर सचिवालय में हुई अहम बैठक में स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशत करते हुए कहा कि कोविड की जांच आरटीपीसीआर के माध्यम से की जाए।उन्होने कहा सभी कोविड पॉजिटिव सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की जाए। कोविड मरीजों की लगातार निगरानी जनजागरुकता अभियान संचालित करें साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए की किसी भी स्वास्थ्य इकाइयों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी ना हो।

सचिव द्वारा कोविड की दैनिक मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोविड के मामले शून्य व नए वेरियंट जेएन.1 को लेकर भी भारत सरकार से मिले दिशा.निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी जिलाधिकारी आम जनमानस में कोविड संबंधित भ्रातियों को बढ़ने ना दें व स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही अनुपालन करें।

बैठक में महानिदेश स्वास्थ्य डॉ विनीता शाहए अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर संयुक्त निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ महेंद्र कुमार पंतए कार्यक्रम अधिकारी डॉ पकंज कुमार सहित समस्त मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य राज्य एवं जिला आईडीएसपी टीम द्वारा प्रतिभा किया गया।