राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों का सम्मान करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, साहस और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। उन्होंने सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए उनके संघर्ष को सदैव स्मरण रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान इन मूल अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया, किंतु देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक माध्यमों से इसका जवाब देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण को केंद्र में रखकर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय, राष्ट्र प्रथम तथा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र के आधार पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। साथ ही, आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सभी अपना योगदान दें। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया तथा उनके संघर्ष और योगदान का स्मरण करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की गई।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद थे।

पीएम आवास शहरी के तहत रूद्रपुर में साकार हो रहा 1872 परिवारों का आशियाने का सपना, जल्द सौंपी जाएंगी चाबियां

गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार मिलकर एक ऐसी आवासीय परियोजना को अंतिम रूप दे रही हैं, जो हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में 1872 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की सतत निगरानी में विकसित यह परियोजना राज्य में गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (उधमसिंह नगर) द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास अब तक पक्का मकान नहीं है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है।

गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की नई बस्ती
‘अपना घर, अपना स्वाभिमान’ की भावना के साथ तैयार की गई इस परियोजना में कुल 1872 आवासों का निर्माण किया गया है। इनमें से 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 512 अतिरिक्त फ्लैटों में अंतिम चरण के छोटे-मोटे कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजना शीघ्र ही परियोजना का लोकार्पण कर लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपने की है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह लाख रुपये लागत वाले इन आधुनिक फ्लैटों के लिए लाभार्थी को मात्र तीन लाख रुपये ही देने होंगे। शेष राशि भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इससे सीमित आय वाले परिवारों को भी सम्मानजनक आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस आवासीय परिसर
करीब 6.0281 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण क्षेत्रफल लगभग 39,220 वर्ग मीटर है। योजना में कुल 23 बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक शहरी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथरूम और बरामदा उपलब्ध कराया गया है। लगभग 28 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इन आवासों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छोटे परिवारों को पर्याप्त सुविधा और बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परियोजना की विशेषता यह है कि सभी भवन भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित किए गए हैं। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
बागवाला आवासीय परियोजना को केवल मकानों का समूह नहीं, बल्कि एक आधुनिक और टिकाऊ आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सीवरेज सिस्टम और अत्याधुनिक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था की गई है।परियोजना में हरे-भरे पार्क, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण के व्यापक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। हॉर्टिकल्चर का कार्य पूर्ण होने से परिसर का वातावरण आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल बन गया है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगी सुविधा
आवासीय परिसर का स्थान भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बागवाला स्थित यह परियोजना मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बस स्टेशन छह किलोमीटर और रेलवे स्टेशन आठ किलोमीटर दूर स्थित है। बेहतर सड़क संपर्क और शहर के प्रमुख क्षेत्रों से नजदीकी के कारण यहां रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

पारदर्शी होगी आवंटन प्रक्रिया
सरकार ने आवास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। पात्र लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को 17 जून 2015 से पूर्व का उत्तराखंड निवासी होना चाहिए तथा उसकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। मात्र पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शेष राशि के भुगतान के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर खरा परिसर
परियोजना में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में आरसीसी बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी ब्लॉकों में विद्युत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं तथा यूपीसीएल द्वारा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच भी पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट द्वारा फायर फाइटिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। जलापूर्ति व्यवस्था के लिए अंडरग्राउंड टैंक और ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं, जबकि एसटीपी भी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है।

धामी सरकार की समावेशी विकास सोच का उदाहरण
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित बागवाला परियोजना उत्तराखंड में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाओं को गति दे रही है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल रहा है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में जब हजारों परिवार अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तब यह केवल मकानों का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की एक नई शुरुआत होगी। बागवाला की यह आवासीय बस्ती उत्तराखंड में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बदलने वाली एक नई पहचान बनने जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के बागवाला में विकसित की गई यह परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए गए हैं। शीघ्र ही पात्र लाभार्थियों को आवासों का आवंटन कर चाबियां सौंपी जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।

ई ऑफिस प्रणाली को प्रभावी बनाने को दून जनपद में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशों के अनुपालन में जनपद देहरादून के समस्त कार्यालयों में शासकीय कार्यों का संचालन पूर्णतः ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने की दिशा में कार्यवाही तेज कर दी गई है। इसी क्रम में आज एनआईसी सभागार, कलेक्ट्रेट देहरादून में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के संचालन, फाइल प्रबंधन, पत्राचार, नोटशीट तैयार करने, फाइलों के ऑनलाइन अग्रसारण, डिजिटलीकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यालयी कार्यों को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध, कागजरहित एवं प्रभावी बनाना है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी विभागों में शासकीय कार्यों का निष्पादन ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी के दृष्टिगत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण सत्र में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (छप्ब्) अंकुश पाण्डेय एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को वर्चुअल एवं फिजिकल माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने ई-ऑफिस पोर्टल पर लॉगिन प्रक्रिया, ई-फाइल निर्माण, दस्तावेज अपलोड, डिजिटल हस्ताक्षर, फाइल ट्रैकिंग तथा ऑनलाइन अनुमोदन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से कार्यों के निष्पादन से न केवल कार्यालयों में कार्य संस्कृति अधिक सुव्यवस्थित होगी, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी तथा अभिलेखों का सुरक्षित एवं सुगम रख-रखाव सुनिश्चित होगा। उन्होंने सभी विभागों से अपेक्षा की कि वे निर्धारित समयावधि में ई-ऑफिस प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाते हुए शासन की मंशा के अनुरूप डिजिटल प्रशासन को मजबूत करें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी वर्चुअल तथा प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे तथा ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त की। जिला प्रशासन द्वारा आगामी दिनों में भी आवश्यकता अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जनपद के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

विदेश रोजगार प्रकोष्ठ से रोजगार पाई सपना राणा ने सीएम धामी से की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में सपना राणा ने मुलाकात की। सपना राणा द्वारा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर भाषा परीक्षा उर्तीण की गई, जिसके उपरान्त उनको जर्मनी के हैमबर्ग शहर के शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में 3060 यूरो (₹ 3,30,000) प्रतिमाह के वेतन पर नियुक्ति प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अन्तर्गत गठित विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों से राज्य के युवाओं को जोड़े जाने हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा राज्य के युवाओं को जापान एवं जर्मनी में सेवायोजित किये जाने हेतु भाषा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक करीब 65 युवाओं को जापान में सेवायोजित किया जा चुका है।

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि जर्मनी में नर्सिंग क्षेत्र में युवाओं हेतु रोजगार के अवसर उपलब्ध है। जिसके दृष्टिगत प्रकोष्ठ द्वारा जर्मन भाषा का प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। इसी प्रशिक्षण को प्राप्त करने के उपरान्त टिहरी गढवाल की नर्सिंग प्रशिक्षित युवा महिला सपना राणा का जर्मनी में नर्स के रूप में चयन हुआ है। सुश्री सपना द्वारा अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पोखाल टिहरी गढवाल से तथा नर्सिंग की शिक्षा स्टेट नर्सिंग कॉलेज देहरादून से प्राप्त की गई। सपना द्वारा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर जर्मनी के हैमबर्ग शहर के शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में नियुक्ति प्राप्त हुई है।

इस अवसर पर सचिव सी. रविशंकर भी मौजूद रहे।

हेमकुंट साहिब की यात्रा सुरक्षित, श्रद्धालुओं ने कहा कुछ लोग उड़ा रहे अफवाह

हेमकुंट साहिब की यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों ने पुलिस – प्रशासन के सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा है कि यात्रा सकुशल चल रही है। कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया व्यूज के लिए अफवाह फैलाकर माहौल बिगाड़ रहे हैं।

पंबाज से अपने परिवार के साथ हेमकुंट साहिब दर्शन के लिए आई श्रद्धालु सुखबीर कौर ने बताया कि वो 19 जून को यात्रा पर निकली थी। इस दौरान उन्हें कई लोगों ने यात्रा को लेकर सतर्क किया। मंगलवार को वापसी में गोविंदघाट पहुंची सुखवीर कौर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें पूरी यात्रा में कहीं कोई दिक्कत नहीं आई। स्थानीय प्रशासन से लेकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पूरी क्षमता से यात्रा संचालित कर रही है। चिकित्सा सुविधा से लेकर, रहने खाने तक की पर्याप्त सुविधा है। उन्होंने बताया कि यात्रा में स्थानीय लोग भी भरपूर सहयोग कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया व्यूज के लिए यात्रा को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अन्य श्रद्धालुओं से भी यात्रा कर दर्शन लाभ करने की अपील की है।

यात्रा सम्पन्न कर चुके अन्य तीर्थयात्रियों ने भी वीडियो बयान में कहा है कि यात्रा सकुशल चल रही है, भारी भीड़ के बावजूद सभी सुविधाएं मिल रही है। इसमें पुलिस प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है। तीर्थयात्रियों ने कहा कि यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाई जा रही है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि यात्रा पहले की तरह शांतिपूर्वतक ढंग से चल रही है। जिसमेँ स्थानीय लोग भी पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सीएम ने उच्च स्तरीय बैठक कर अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से ऑडिट की प्रक्रिया पूरी की जाए।

इस अवसर पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत बिन्द्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना और सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अपर सचिव तृप्ति भट्ट मौजूद थे।

सीएस की अध्यक्षता में हुई उत्तराखण्ड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड की निदेशक मंडल की द्वितीय बैठक

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखण्ड रोपवे डेवलपमेंट लिमिटेड की निदेशक मंडल की द्वितीय बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने केदारनाथ रोपवे एवं हेमकुंट साहिब रोपवे प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुयी। बैठक में विभिन्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गयी।

मुख्य सचिव ने केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट एवं हेमकुंट साहिब रोपवे प्रोजेक्ट के अंतर्गत फॉरेस्ट लैंड क्लीयरेंस पर तेजी से कार्य किए जाने की बात कही। उन्होंने सभी आवश्यक सर्वे कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए। कहा कि यूटिलिटी शिफ्टिंग के साथ ही पावर और वाटर सप्लाई से सम्बन्धित कार्यों को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने रोपवे प्रोजेक्ट्स के तहत् पार्किंग, लास्ट माईल कनेक्टिविटी और रोपवे के आसपास व्यावसायिक क्षेत्र विकसित किए जाने पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही। कहा कि हितधारकों से भी लगातार संवाद किया जाए।

बैठक में एनएचएलएमएल के अधिकारियों ने बताया गया कि केदारनाथ रोपवे का लिडार सर्वे और वीडियोग्राफी का काम पूरा हो गया है। कंसेशनियर ने जियो-टेक्निकल जांच शुरू कर दी है। गौरीकुंड और सोनप्रयाग स्टेशन के लिए जियो-टेक्निकल सर्वे पूरा हो गया है। टोपोग्राफी सर्वे भी पूरा हो गया है। शुरुआती अलाइनमेंट पूरो कर लिया गया है, फाइनल अलाइनमेंट जून 2026 तक होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि रियल साइज़ के कंटेनरों के साथ देहरादून से सोनप्रयाग तक लॉजिस्टिक्स का ड्राई रन पूरा हो गया है। बताया गया कि हेमकुंट साहिब रोपवे के लिए ज़मीन का सर्वे चल रहा है। खराब मौसम की वजह से ड्रोन सर्वे में देरी हुई। आखिरी हिस्से के लिए डीजीपीएस और लिडार सर्वे को फिर से शुरू किया गया।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, धीराज गर्ब्याल एवं एनएचएलएमएल के अधिकारी उपस्थित थे।

वर्तमान समय में शासन व प्रशासन का मूल्यांकन केवल उसकी मंशा के आधार पर नहीं, बल्कि उसके परिणामों के आधार पर संभवः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने अर्थ एवं संख्या निदेशालय एवं सी.पी.पी.जी.जी, नियोजन विभाग द्वारा ‘Data Harmonization-Building Data Linked Governance System’ विषयक कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शासन-प्रशासन का मूल्यांकन केवल उसकी मंशा के आधार पर नहीं, बल्कि उसके परिणामों के आधार पर किया जाता है, और इन परिणामों का प्रभावी आंकलन गुणवत्तापूर्ण डेटा के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने उल्लेख किया कि उत्तराखण्ड को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, आपदा संवेदनशीलता, उच्च पलायन दर तथा पर्यावरणीय चुनौतियों के कारण विशिष्ट विकासात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में डेटा Harmonization को प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण के बजाय पूर्वानुमान आधारित एवं सक्रिय योजना निर्माण में अत्यन्त महत्वपूर्ण है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता एवं मशीन लर्निंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को डेटा समन्वयन के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया, साथ ही यह भी रेखांकित किया कि इनके प्रभावी उपयोग से पूर्व डेटा की गुणवत्ता, गोपनीयता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव ने प्रतिभाग कर रहे समस्त विभागों को सांख्कीय कार्य से जुड़े अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में भी चिन्हित कर उनके क्षमता वर्धन के निर्देश दिये।

कार्याशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सचिव, सांख्यिकीय एवं कार्यकम कियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार श्री सौरभ गर्ग द्वारा अपने उद्बोधन में उत्तराखण्ड राज्य की सराहना करते हुए कहा कि यह उन अग्रणी राज्यों में है जिसने भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के पश्चात् डेटा समन्वयन विषय को गंभीरता से लेते हुए कार्यशाला आयोजित की है। यह राज्य में आंकड़ों के सटीक रख-रखाव तथा साक्ष्य आधारित निर्णय लेने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अधिकत्तम उपयोग, प्रभावी नियोजन तथा नागरिकों के आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं पर खरा उतरने हेतु डेटा महत्वपूर्ण है परन्तु कई बार डेटा को इतना महत्व नहीं देते।

इस अवसर पर प्रमुख आर्थिक सलाहकार, नीति आयोग अन्ना रॉय ने कहा कि डेटा संग्रह ही नहीं, बल्कि उसका मूल्यांकन और सही व्याख्या भी आवश्यक है। उन्होंने राज्य को नीति आयोग की ओर से राज्य को आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्रों का आयोजन प्रमुख सचिव डॉ० आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव रंजीज सिन्हा तथा बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में किया गया।

कार्यशाला के समापन पर सी.पी.पी.जी.जी. के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ० मनोज कुमार पंत ने राज्य के आगामी कार्ययोजना का खाका प्रस्तुत करते हुए समस्त प्रतिभागियों, विशेषज्ञों, ISB हैदराबाद, IIM अहमदाबाद, J-Pal वर्ल्ड बैंक तथा अन्य विषय विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। निजी क्षेत्र, कॉरपोरेट तथा देश एवं प्रदेश के ख्यातिप्राप्त प्रबन्धन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने कार्यशाला के विभिन्न सत्रों के दौरान अपने विचार व्यक्त किये।

इतिहास में संतों एवं मनीषियों ने समाज को मार्गदर्शन देने के साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाईः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं विशाल संत सम्मेलन में प्रतिभाग करते हुए पूज्य संत-महात्माओं का अभिनंदन किया तथा आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा, संस्कार एवं समाज जागरण के कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों एवं जीवन के वास्तविक उद्देश्य से जोड़ने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने संत समाज को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र चेतना का संवाहक बताते हुए कहा कि इतिहास में संतों एवं मनीषियों ने समाज को मार्गदर्शन देने के साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में संत समाज का योगदान अतुलनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए युग का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ धाम के पुनर्विकास जैसे कार्य भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता, आध्यात्मिक पहचान एवं सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए राज्य सरकार दृढ़ संकल्पित है। इसी उद्देश्य से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता तथा भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जोड़ने के लिए दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना की गई है, जहां भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं सभ्यता पर उच्च स्तरीय अध्ययन एवं शोध कार्य किए जाएंगे। हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने स्वामी हरिचेतानन्द महाराज का आभार व्यक्त करते हुए संत समाज से राज्य एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संतों के आशीर्वाद और जनसहयोग से उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को अवश्य पूर्ण किया जाएगा।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, प्रदीप बत्रा, संतगण एवं अन्य गणमान्य मौजूद थे।

योग दिवस पर सीएम का युवाओं से नशामुक्त, अनुशासित एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बनबसा में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित योग साधकों, सशस्त्र सीमा बल के जवानों, छात्र-छात्राओं, युवाओं, मातृशक्ति एवं वरिष्ठ नागरिकों के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ शारदा की पावन भूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्रवासियों के साथ योगाभ्यास करने का अवसर प्राप्त होना उनके लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने योग दिवस के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी योग प्रशिक्षकों, साधकों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि योग मन को स्थिरता प्रदान करता है तथा व्यक्ति को सकारात्मक, संतुलित एवं सफल जीवन की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तनाव, अवसाद और अस्वस्थ जीवनशैली से उत्पन्न चुनौतियों के बीच योग एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार प्रणाली के रूप में कार्य कर रहा है। योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक एकाग्रता मजबूत होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग ने विश्वभर में मानवता को जोड़ने का कार्य किया है तथा भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” के संदेश को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक पहचान मिली और आज विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग से जुड़ चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड योग, अध्यात्म और साधना की प्राचीन परंपराओं की भूमि है। राज्य सरकार उत्तराखंड को योग एवं वेलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा देश की पहली योग नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत योग एवं ध्यान केंद्रों की स्थापना के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी तथा योग, ध्यान एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध एवं अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए 10 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रदेश में पांच नए योग हब विकसित किए जा रहे हैं तथा सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटरों में योग सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बनबसा में राज्य स्तरीय योग दिवस कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य शारदा नदी तट पर भी योग एवं आध्यात्मिक साधना को व्यापक रूप से बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शारदा कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से क्षेत्र को आध्यात्मिक एवं पर्यटन विकास की नई पहचान देने के लिए कार्य कर रही है। लगभग 3300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही इस परियोजना के अंतर्गत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट सहित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। प्रथम चरण में 179 करोड़ रुपये की लागत से शारदा घाट के पुनर्विकास कार्यों का शुभारंभ किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं तथा नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी उत्तराखंड को योग का वैश्विक केंद्र बनाने के संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे।

योग दिवस कार्यक्रम के अवसर पर कैबिनेट मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री भरत चौधरी, अध्यक्ष जिला पंचायत आनंद सिंह अधिकारी, सचिव मुख्यमंत्री एवं आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत,सचिव आयुष रंजना राजगुरु, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, जिलाधिकारी उधमसिंह नगर नितिन सिंह भदौरिया, पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी मौजूद थे।

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मुख्य सचिव संग हजारों लोगों ने किया योग, प्रकृति की गोद से गूंजा स्वास्थ्य का संदेश

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण {एमडीडीए} द्वारा सिटी फॉरेस्ट पार्क में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने शिरकत की। इस दौरान मुख्य सचिव व अन्य प्रशासनिक अधिकारीगण अपर सचिव मुख्यमंत्री एवं एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया, प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रकृति की हरियाली और पहाड़ों की शांत वादियों के बीच एक हजार से अधिक लोगों ने सामूहिक योग कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने योग प्रशिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा योग जागरूकता के लिए उनके योगदान की सराहना की।

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मुख्य सचिव ने परखी सिटी फॉरेस्ट पार्क की धड़कन, डिजिटल फीडबैक सिस्टम के दिए निर्देश

एमडीडीए के सिटी फॉरेस्ट पार्क को और अधिक आधुनिक, सुविधायुक्त और जनहितैषी बनाने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के बाद उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने 12 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित पार्क का विस्तृत निरीक्षण किया और विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने चिल्ड्रन पार्क, कैफेटेरिया, साइकिल ट्रैक, थ्री-डी मूवी थिएटर, सोलर प्लांट, नर्सरी, ओपन जिम, ओपन थिएटर, ईवी चार्जिंग स्टेशन तथा पूछताछ केंद्र सहित पार्क की प्रमुख सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने पार्क में मौजूद नागरिकों, पर्यटकों और कैफेटेरिया संचालकों से बातचीत कर सुविधाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता के बारे में फीडबैक भी लिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थल की सफलता उसकी जनस्वीकृति और उपयोगिता पर निर्भर करती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पार्क आने वाले लोगों की राय और सुझाव प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन फीडबैक सिस्टम विकसित किया जाए, जिससे नागरिक सीधे अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करा सकें। उनका मानना था कि तकनीक और जनभागीदारी के समन्वय से सार्वजनिक सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने पार्क की स्वच्छता, हरित क्षेत्र, ऊर्जा संरक्षण व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय पहलुओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सिटी फॉरेस्ट पार्क शहरी जीवन के बीच प्रकृति से जुड़ने का उत्कृष्ट माध्यम बनकर उभरा है। यहां उपलब्ध सुविधाएं इसे परिवारों, बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आदर्श सार्वजनिक स्थल बनाती हैं।

मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद एमडीडीए ने पार्क की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावों और निर्देशों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा। पार्क में डिजिटल सेवाओं, जनसुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सिटी फॉरेस्ट पार्क देहरादून के सबसे बेहतर सार्वजनिक स्थलों में अपनी पहचान और मजबूत कर सके।