नवनियुक्त एसएसपी से मिले अधिवक्तागण, जिले में शांति व्यवस्था की अपील की

आज अधिवक्ता अभिलाष शर्मा एवं अधिवक्ता कार्तिक पाण्डेय ने देहरादून के नव-नियुक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेन्द्र सिंह डोभाल से मुलाकात की और उन्हें देहरादून जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का पदभार संभालने पर हार्दिक बधाई दी तथा उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

दोनों अधिवक्ताओं ने आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में देहरादून जनपद में कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा हाल ही में जनपद में हुई पाँच जघन्य हत्याओं की घटनाओं के बाद शहर में शांति, सुरक्षा और जनविश्वास का वातावरण स्थापित होगा। उन्होंने यह भी कामना की कि उनके कुशल प्रशासन में देहरादून एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और बेहतर शहर के रूप में आगे बढ़ेगा।

दून मेडिकल कॉलेज में सीएम ने मरीजों और तीमारदारो से सीधे संवाद कर जाना हाल-चाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार रात्रि राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, देहरादून पहुंचकर अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। देर रात हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में सक्रियता बढ़ गई।

मुख्यमंत्री ने आपातकालीन कक्ष, वार्डों, दवा वितरण केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे बातचीत कर उपचार, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में फीडबैक लिया।

मरीजों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पताल में स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति तथा जांच सेवाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि गंभीर मरीजों के उपचार में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा तीमारदारों को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं निजी अस्पतालों के समकक्ष बेहतर और भरोसेमंद बनें, यह सरकार की प्राथमिकता है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधनों का विस्तार कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के चिकित्सक व अधिकारी मौजूद थे।

अज्ञात ईमेल के जरिए देहरादून कोर्ट को बम से उड़ाने की मिली धमकी, पुलिस सक्रिय

देहरादून जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह जानकारी अज्ञात ईमेल के जरिए देहरादून जिला न्यायाधीश के मेल पर प्राप्त हुई। सूत्रों के मुताबिक ईमेल की जिम्मेदारी पाकिस्तान की आईएसआई ने ली है। इस संबंध में देहरादून जिला जज न्यायमूर्ति प्रेम सिंह खिमल ने एसएसपी देहरादून को लिखित में जानकारी देकर कार्यवाही करने को कहा है।

जानकारी के मुताबिक बीते रोज अज्ञात ईमेल के जरिए देहरादून न्यायालय के मेल पर एक सूचना प्राप्त हुई। जिसमें कोर्ट परिसर में पांच आरडीएक्स से बम ब्लास्ट की धमकी दी गई है।

धमकी से भरे ईमेल में लिखा है कि बम पहले से ही परिसर के महत्वपूर्ण स्थानों पर रखे जा चुके हैं। दोपहर के भोजन के समय 1 या 2 सदस्य जज के कार्यालय के निकट आएंगे और जैसे ही ब्रांच-आईएसआई के सदस्य, जो रिमोट कंट्रोल ट्रिगर लिए हुए हैं, परिसर के 100 फीट के दायरे में आएंगे, IED अपने आप फट जाएंगे। यदि किसी कारणवश वे सक्रिय नहीं होते हैं, तो सदस्य स्वयं इमारत के अंदर आकर खुद को और सभी कर्मचारियों को श्रीलंका के ईस्टर ऑपरेशन की तरह ही उड़ा लेंगे। हम एक संदेश देना चाहते हैं और आपका कोर्ट फिलहाल सबसे आसान निशाना है।

उत्तराखंड ने सौर ऊर्जा स्थापना में 01 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया

उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) से अधिक के स्तर पर पहुँचा दिया है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार राज्य में कुल स्थापित सौर क्षमता लगभग 1027.87 मेगावाट से अधिक हो चुकी है, जो स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में सौर ऊर्जा क्षमता के 1 गीगावाट का आंकड़ा पार करने पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति उनकी स्पष्ट नीति का परिणाम है|मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा के जिस विजन को देश के सामने रखा, उसी से प्रेरित होकर उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दिया गया है। केंद्र सरकार की योजनाओं और राज्य सरकार की सक्रिय पहल के समन्वय से आज हजारों युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

यह उपलब्धि विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से संभव हुई है, जिनमें ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर परियोजनाएं, ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट, सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र, कृषि क्षेत्र के लिए सोलर पंप, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर योजनाएं तथा कॉमर्शियल एवं औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।

राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता में प्रमुखतः ग्राउंड माउंटेड 397 मेगावाट, रूफटॉप सोलर पावर प्लांट (पीएम सूर्यघर) 241 मेगावाट, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना 137 मेगावाट, कॉमर्शियल नेट मीटरिंग 110 मेगावाट, कैप्टिव सोलर पावर प्लांट 51 मेगावाट, कनाल टॉप एवं कनाल बैंक पर 37 मेगावाट एवं सरकारी भवनों पर 26 मेगावाट सोलर पावर प्लांट शामिल हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के संयंत्र, कैप्टिव सोलर पावर प्लांट के 30 मेगावाट तथा सरकारी भवनों पर 13.5 मेगावाट के सोलर पावर प्लांट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिला है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) का विशेष योगदान रहा है। UREDA ने राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में अग्रणी भूमिका निभाई है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर ऊर्जा समाधान पहुँचाने के निरंतर प्रयासों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है।

राज्य में सौर ऊर्जा की बढ़ावा देने हेतु अनुकूल नीतिगत वातावरण, सब्सिडी प्रावधान, सरल अनुमोदन प्रक्रिया तथा निजी निवेश को प्रोत्साहन जैसी पहलों ने भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं। उत्तराखंड तेजी से देश के अग्रणी सौर ऊर्जा राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

सरकार ने भविष्य में भी सौर ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाने, दूरस्थ क्षेत्रों में सौर समाधानों को प्रोत्साहित करने तथा आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह उपलब्धि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है।

चंपावत जिला अस्पताल में 20 करोड़ से 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक निर्माणाधीन, स्वास्थ्य सुविधाओं को मिलेगा बड़ा विस्तार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, देहरादून से वर्चुअल माध्यम से ‘चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि चंपावत के प्रत्येक घर में इन दिनों उत्साह और उमंग का वातावरण है। उन्होंने उल्लेख किया कि होली का पर्व समीप है और काली कुमाऊँ की होली अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के कारण पूरे देश में अलग स्थान रखती है। बैठकी होली, खड़ी होली, चौफुला, सुर-ताल और लोकसंस्कृति का ऐसा अद्भुत संगम देश में विरल ही देखने को मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत की पुण्य भूमि इतिहास, अध्यात्म और संस्कृति की धरोहर रही है। उनके अनुसार ‘चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026’ केवल सात दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक गरिमा, प्राकृतिक सौंदर्य, मातृशक्ति के सामर्थ्य, युवाओं के उत्साह और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प का जीवंत उत्सव है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष महोत्सव को “शीतकालीन कॉर्बेट महोत्सव” के रूप में भी आयोजित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में शीतकालीन पर्यटन को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि महोत्सव के अंतर्गत पैराग्लाइडिंग, माउंटेन बाइकिंग, हॉट एयर बलून, रिवर राफ्टिंग, पैरामोटरिंग, पक्षी अवलोकन और ट्रेकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों के माध्यम से चंपावत को राष्ट्रीय स्तर पर साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से युवाओं को नए अवसर मिलेंगे तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन विकसित होंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि जिम कॉर्बेट और उनकी कहानियाँ देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। उनकी आत्मकथाओं के माध्यम से चंपावत-लोहाघाट क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर वन्यजीव प्रेमियों और टाइगर लवर्स के बीच पहचान मिली। वर्ष 1907 में चंपावत क्षेत्र में कुख्यात आदमखोर बाघिन का अंत कर उन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाई और आगे चलकर वन्यजीव संरक्षण की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि यह क्षेत्र आज भी साहस, इतिहास और प्रकृति प्रेम का अद्भुत केंद्र माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव में मधुबनी चित्रकला एवं आधुनिक कला कार्यशालाएं, क्विज प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, लोक संस्कृति कार्यक्रम और जागरूकता कार्यशालाएं इसे बहुआयामी स्वरूप प्रदान करेंगी। साथ ही आयोजित खाद्य उत्सव पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान देगा। स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों का यह संगम नई पीढ़ी को अपनी खाद्य संस्कृति से परिचित कराने के साथ स्थानीय उत्पादकों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन ‘Vocal for Local’ की भावना को सशक्त करते हुए ‘Local for Global’ का मार्ग प्रशस्त करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद चंपावत को आदर्श एवं श्रेष्ठ जिला बनाने के उद्देश्य से अनेक विकासपरक परियोजनाओं पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कराया जा रहा है। विभिन्न मोटर मार्गों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के साथ जाम की समस्या के समाधान हेतु मल्टीस्टोरी पार्किंग का निर्माण भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत देवीधूरा वाराही मंदिर का विकास कार्य किया जा रहा है तथा माँ पूर्णागिरी मंदिर के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से रोपवे निर्माणाधीन है। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शारदा कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट का विकास किया जाएगा। इस परिक्रमा मार्ग से माँ पूर्णागिरी धाम, चूका, श्यामलाताल और शारदा घाट जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए चंपावत में वे-साइड एमेनिटीज केंद्र का निर्माण किया गया है तथा चूका क्षेत्र को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है। अमोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया है और अमोड़ी में हाउस ऑफ हिमालया के विपणन केंद्र की स्थापना की गई है। सूखीढांग से डाडामीनार मोटर मार्ग के पुनर्निर्माण एवं डामरीकरण के साथ हनुमानगढ़ी से खेतखेड़ा के बीच स्पान आर्च पुल का निर्माण कराया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर से जौलजीबी मार्ग पर लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत से स्पान आर्च पुल का निर्माण किया जा रहा है तथा 33 करोड़ रुपये की लागत से मार्ग का सुधारीकरण भी हो रहा है। भारत-नेपाल सीमा पर 177 करोड़ रुपये की लागत से ड्राई पोर्ट का निर्माण क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा। विज्ञान और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए 57 करोड़ रुपये की लागत से साइंस सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों की सूची अत्यंत विस्तृत है और सभी का उल्लेख करना संभव नहीं, किंतु वे चंपावत को आदर्श जिला बनाने के अपने संकल्प को पूर्ण किए बिना विश्राम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ प्रदेश की पहचान, संस्कृति और सामाजिक संतुलन की रक्षा के लिए संकल्पित है। “विकास भी और विरासत भी” के विकल्प रहित संकल्प के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चंपावत की जनता का सहयोग और समर्थन इस संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में खेल प्रतियोगिताएं अब जनचेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ननूरखेड़ा, देहरादून में मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी 2025-26 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद को विजेता ट्रॉफी एवं 05 लाख रुपये का चेक प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भव्य समापन केवल एक प्रतियोगिता का अंत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के उज्ज्वल खेल भविष्य की नई शुरुआत है। खेल आयोजन आज हमारे गाँव-गाँव, न्याय पंचायतों और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान देने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड में खेल प्रतियोगिताएं अब जनचेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब देवभूमि के साथ-साथ खेलभूमि भी बन चुका है। इस आयोजन में 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के खातों में भेजी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत खेल जगत में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश में खेलों की संस्कृति को नई ऊर्जा मिली है। देश में फिटनेस एक जन आंदोलन बन चुकी है। हमारी युवा पीढ़ी खेलों के प्रति नए उत्साह और समर्पण के साथ आगे बढ़ रही है। आज भारत ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन कर रहा है। हमारे खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड संख्या में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है और कई खेलों में भारत ने विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खेलों को नई प्राथमिकता मिली है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और सम्मान मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। उत्तराखंड को देवभूमि के साथ खेलभूमि के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर आगे बढ़ी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल और भव्य आयोजन इसका सशक्त प्रमाण बना है, जिसने उत्तराखंड का मान पूरे देश में बढ़ाया है। इन खेलों में हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 7वाँ स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आधुनिक और विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है। हमारे स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और सुविधाएँ अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भी सक्षम हो चुकी हैं। सरकार द्वारा राज्य में स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान पर कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नई खेल नीति में खिलाड़ियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रावधान किए गए हैं। हल्द्वानी में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाई जा रही है। इसमें खिलाड़ी आधुनिक कोचिंग, खेल विज्ञान और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को मासिक छात्रवृत्ति के साथ-साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। सरकार खिलाड़ियों के साथ-साथ उन्हें तैयार करने वाले प्रशिक्षकों का भी पूरा ध्यान रख रही है। उनके मानदेय और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की गई है, ताकि वे और बेहतर ढंग से नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ा सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मान देने के लिए “उत्तराखंड खेल रत्न”, “द्रोणाचार्य पुरस्कार” और “हिमालय खेल रत्न” जैसे सम्मान भी दिए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मेहनत को सही पहचान मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष से खेल महाकुंभ तथा अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में आवेदन करने पर 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 23 नवम्बर 2025 से न्याय पंचायत स्तर से शुरू हुई खेल प्रतियोगिताओं का समापन 18 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी के साथ किया जा रहा है। इसमें हर खिलाड़ी और जनप्रतिनिधि को जोड़ा गया। इसमें 01 लाख 62 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में 26 खेल स्पर्धाएँ शामिल की गईं। आगामी राष्ट्रीय खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक खेलों के लिए इस तरह के आयोजन खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह एवं खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

आईआईएफएल बैंक की मनमानी, डीएम के एक्शन पर सम्पति नीलाम; शाखा पर तालबन्दी तय

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन महिला, बुजुर्ग बच्चों, असहायों के शोषण पर निरंतर कड़ा एक्शन ले रहा है। जिलाधिकारी सविन बसंल के समक्ष बैंक से बीमित ऋण धनराशि उपरान्त महिला को बैंक द्वारा वसूली लिए प्रताड़ित करने का मामला सामने आया जिस पर जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी ने सम्बन्धित बैंक से वसूली कर शेष ऋण धनराशि का भुगतान करते हुए पीड़ित का न्याय दिलाया।
नवाबगढ़ निवासी विधवा ज्योति ने जिलाधिकारी के समक्ष गुहार लगाई कि कि उनके पति दान सिंह ने वर्ष 2021 में आईआईएफएल बैंक से होम लोन लिया गया था, जिसका बीमा भी कराया गया था। अगस्त 2023 में उनके पति की हृदय गति रुकने से आकस्मिक मृत्यु हो गई। पति द्वारा जीवित रहते हुए ऋण की किस्तों के रूप में धनराशि रू0 2,71,278 जमा कराए गए थे तथा पति की मृत्यु के उपरांत विधवा ज्योति द्वारा धनराशि 39,470 की अतिरिक्त किस्त भी जमा की गई।
शिकायत के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी बजाज फाइनेंस द्वारा बैंक को बीमित ऋण की धनराशि रू0 14,61,375 का भुगतान किए जाने के बावजूद बैंक द्वारा भूमि के मूल अभिलेख वापस नहीं किए गए। इतना ही नहीं, बैंक के वसूली एजेंटों द्वारा विधवा ज्योति एवं उनकी दो मासूम पुत्रियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है तथा वसूली हेतु दबाव और दुर्व्यवहार किया गया, जिससे परिवार भय एवं तनाव की स्थिति में आ गया।
जिलाधिकारी ने प्रकरण की गंभीरता पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी को तत्काल जांच कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। जांच में पाया गया कि बीमित ऋण की राशि प्राप्त होने के बावजूद बैंक द्वारा शेष धनराशि के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था।
जिलाधिकारी के निर्देश पर शेष धनराशि रू0 2 लाख की वसूली राजस्व वसूली की भांति कराते हुए जिला प्रशासन की टीम ने बैंक से संबंधित देयता का निस्तारण कराया। साथ ही बैंक को तत्काल नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने एवं भूमि के मूल अभिलेख ज्योति को सुपुर्द करने के कड़े निर्देश दिए गए। निर्देशों का अनुपालन न करने की दशा में संबंधित शाखा पर तालाबंदी, संपत्ति कुर्की एवं अन्य कठोर विधिक कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद में किसी भी बैंक, वित्तीय संस्था या वसूली एजेंट द्वारा आमजन, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं असहाय परिवारों के साथ किसी प्रकार की अभद्रता, दबाव या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। जिला प्रशासन का यह एक्शन न केवल जनमानस के प्रति जिला प्रशासन की संवेदनशीलता एवं जवाबदेही को दर्शाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि जनपद में किसी भी प्रकार के आर्थिक शोषण, अन्याय या मनमानी के विरुद्ध प्रशासन दृढ़तापूर्वक खड़ा है।

मजबूत परिवार, मजबूत राष्ट्र, मातृ संस्कार समागम में गूंजा सांस्कृतिक जागरण का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेल नगर, देहरादून में विश्वमांगल्य सभा के तत्वाधान में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न अपने बचपन और निजी जीवन के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन किसी विशेष सुविधा या संसाधनों से नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से बना है। साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने प्रारंभ से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व समझा। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साधारण जीवन शैली ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने की सीख दी। सादगी, संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना ने उनके विचारों और निर्णयों को आकार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन में ऊँचा पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। यही मूल्य आज भी उनके हर निर्णय और कार्यशैली का आधार हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर से पधारी माताओं और बहनों के बीच उपस्थित होने का अवसर प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस आयोजन के माध्यम से देश-प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत परिवारों की मातृशक्ति, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली नारीशक्ति तथा प्रदेश की बेटियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन समाज और राष्ट्र के विकास में मातृशक्ति की भूमिका को और अधिक सशक्त एवं व्यवहारिक रूप से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च माना गया है। मातृशक्ति को परिवार की धुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और यदि परिवार सशक्त होगा तो समाज और राष्ट्र भी सशक्त होंगे। उन्होंने विश्वमांगल्य सभा द्वारा मातृशक्ति और पारिवारिक मूल्यों को रेखांकित करने के निरंतर प्रयासों की सराहना की तथा सभी कार्यकर्ताओं और जुड़ी हुई मातृशक्ति के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक परंपराओं, धर्मग्रंथों और ऐतिहासिक घटनाओं में माता द्वारा दिए गए संस्कारों का अद्वितीय महत्व रहा है। उन्होंने प्रभु श्रीराम एवं माता कौशल्या, भगवान श्रीकृष्ण एवं माता यशोदा तथा छत्रपति शिवाजी महाराज एवं माता जीजाबाई के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों के व्यक्तित्व निर्माण में मातृसंस्कारों की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि माता द्वारा दिए गए संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यवहार की नींव रखते हैं तथा उनमें नैतिकता, धैर्य, सहनशीलता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके जीवन में भी उनकी माताजी द्वारा दिए गए संस्कारों और मूल्यों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ पारिवारिक संरचना में व्यापक परिवर्तन आए हैं। संयुक्त परिवारों का स्वरूप सीमित हुआ है और एकल परिवारों का प्रचलन बढ़ा है। सुविधा और स्वतंत्रता के साथ-साथ सामूहिकता और आत्मीयता का भाव भी कहीं न कहीं प्रभावित हुआ है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, व्यस्तता और प्रतिस्पर्धा के कारण परिवारों के बीच संवाद में कमी आई है। विवाह-विच्छेद की बढ़ती घटनाएं और परिवार संस्था से दूर जाने की प्रवृत्तियां सामाजिक बदलाव का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के निर्णय लेने का अधिकार है, किन्तु परिवार की मूल भावना—त्याग, सहयोग, जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव—को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने आधुनिकता और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा को समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि परिवार केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कारों का प्रथम विद्यालय है, जहां से बच्चे सम्मान, अनुशासन, सहयोग, सहिष्णुता और राष्ट्रभाव जैसे मूल्य सीखते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इस प्रकार के कार्यक्रम विशेष महत्व रखते हैं और समाज में सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्जागरण को नई दिशा देते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित यह वैचारिक संवाद मातृशक्ति को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान करेगा तथा समाज और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और सुदृढ़ करेगा।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति में वह सामर्थ्य है जिसके बल पर वे न केवल अपने परिवार को सशक्त बना सकती हैं, बल्कि समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण में भी निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है और जब सेवा किसी परिवार की परंपरा बन जाती है तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरे समाज की चेतना को जागृत करता है।

उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में ‘सेवा परमो धर्मः’ का भाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की वास्तविक साधना है। उन्होंने उपस्थित सेवा-समर्पित परिवारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों ने सेवा को अपने जीवन का संस्कार बनाया है। जब परिवार के सदस्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के प्रति संवेदनशील होते हैं और जरूरतमंदों के दुःख को अपना दुःख समझते हैं, तभी समाज में करुणा, समरसता और मानवीय मूल्यों की स्थापना संभव होती है।

धामी ने भारतीय संस्कृति में माँ की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि माँ केवल स्नेह की प्रतिमूर्ति नहीं, बल्कि समाज निर्माण की आधारशिला है। वही प्रथम संस्कारदाता होती है, जो बच्चों के मन में सेवा, त्याग और संवेदना के बीज बोती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रत्येक परिवार अपनी अगली पीढ़ी को सेवा भाव से जोड़ दे, तो असंवेदनशीलता, स्वार्थ और सामाजिक विघटन जैसी समस्याएं स्वतः ही कम हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति और व्यस्त जीवनशैली के कारण परिवारों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ रही है। ऐसे समय में सेवा-निष्ठ परिवार समाज के लिए प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि सफलता का मापदंड केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि समाज के लिए कितना योगदान दिया गया है।

गीता धामी ने कहा कि बच्चों को केवल प्रतिस्पर्धा की भावना नहीं, बल्कि संवेदना, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ भी पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर या अधिकारी बनना महत्वपूर्ण है, किंतु उससे भी अधिक आवश्यक है कि बच्चे अच्छे और संवेदनशील नागरिक बनें। परिवार को उन्होंने पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि यहीं से समाज को दिशा देने वाले नागरिक तैयार होते हैं।

उन्होंने कहा कि बढ़ती एकल परिवार व्यवस्था और सीमित संवाद के कारण पारिवारिक संबंधों में जो दूरी आ रही है, उसे पाटने में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। माताएँ ही घर की सांस्कृतिक धुरी होती हैं, जो बच्चों को रिश्तों का महत्व, बड़ों के प्रति सम्मान और समाज के प्रति कर्तव्य का बोध कराती हैं।

इस अवसर पर उन्होंने सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने घरों में संवाद को जीवित रखें, सेवा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और बच्चों को समाज के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास के जरूरतमंद परिवारों का सहारा बने, तो समाज की अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः ही संभव है।

गीता धामी ने कहा कि यह वैचारिक संवाद केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि समाज के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को स्मरण कराने का अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा उत्तराखंड सहित व्यापक समाज में सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सप्त मातृ शक्ति सम्मान के तहत 7 विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मन्जू टम्टा व कविता मलासी को सम्मानित किया।

कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी प्रशांत हरतालकर, डॉ वृषाली जोशी, पूजा माधव, अनुराधा यादव, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई महिलाए, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में आवास विभाग के अधीन विभिन्न पार्किंग प्रोजेक्ट पर तेजी से हो रहा है काम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आवास विभाग प्रदेश के बड़े शहरों, तीर्थ स्थलों और पयर्टन केंद्रों पर जाम की समस्या दूर करने के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के 11 स्थानों पर जल्द पार्किंग सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, जिसमें 1082 वाहन पार्क हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यभार ग्रहण करते ही, आवास विभाग को, विकास प्राधिकरणों के जरिए बड़े शहरों, तीथार्टन और पयर्टन केंद्रों में युद्धस्तर पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, इसके बाद विभिन्न विकास प्राधिकरणों के जरिए 195 स्थानों पर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव प्राप्त हुए, इसमें सरफेंस पार्किंग से लेकर मल्टी लेबल पार्किंग और टनल पार्किंग के तक के विकल्प शामिल थे। इसी आधार पर आवास विभाग 114 जगह पार्किंग की डीपीआर को मंजूरी प्रदान कर चुका है, जिसके लिए बजट भी जारी हो चुका है। जिसमें से प्रथम चरण में 54 स्थानों पर कुल 3244 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है, यानि इन स्थानों पर पार्किंग सेवा शुरु हो चुकी है। अब दूसरे चरण में 11 अन्य स्थानों पर पार्किंग निर्माण करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है, आवास विभाग इसी वित्तीय वर्ष में यहां निर्माण पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इससे 1082 वाहनों के लिए पार्किंग सेवा उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा विकास प्राधिकरणों द्वारा अपने संसाधनों से 11 अन्य स्थानों पर भी पार्किंग निर्माण की जा रही है, जिससे 359 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
*सचिव आवास ने निर्देश*
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार ने सभी विकास प्राधिकरणों को पार्किंग निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आगामी यात्रा सीजन से पहले सभी चिन्हित स्थानों पर पार्किंग सुविधा बहाल की जाए, साथ ही पार्किंग स्थलों पर शौचालय, लाइट और साफ सफाई की भी उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का पालन करने के भी निर्देश दिए हैं।

*उत्तराखंड में प्रतिवर्ष करोड़ों लोग तीर्थाटन, पयर्टन के लिए पहुंच रहे हैं। सड़कों का नेटवर्क अच्छा होने से अब बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों से आते हैं, इस कारण यातायात जाम की समस्या होने की स्वाभाविक है। इसी समस्या को देखते हुए, बीते चार सालों में विभिन्न स्थानों पर करीब छह वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। जिसमें से कुछ पर काम पूरा भी हो चुका है। इससे यातायात जाम की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड*

छोटे उद्योगों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू की जाए: सचिव पिछड़ा आयोग

केंद्र सरकार द्वारा कारोबार में सुगमता बढ़ाने के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन एवं मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में राज्य में ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस (फेज 2) के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन ने बताया की उत्तराखंड ने डी-रेगुलेशन 1.0 कम्प्लायंस रिडक्शन में देश में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा सिंगल विंडो सिस्टम, लैंड यूज, होम स्टे तथा उद्यमिता एवं श्रम सुधारो के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयोगों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य के लिए फेस-2 के तहत कुल 9 प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं जिसमें राज्य को भूमि उपयोग, भवन एवं निर्माण की स्वीकृति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, पर्यावरण, पर्यटन के क्षेत्र में नवाचार, जैसी प्राथमिकताएँ शामिल हैं। इन प्राथमिकताओं का उद्देश्य राज्य में विकास कार्यों को और गति देना, निवेश और आधारभूत ढांचे को और अधिक मजबूत करना तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव ने सुझाव देते हुए कहा कि उद्योग से संबंधित प्रकरणों एवं प्रस्तावों को निर्धारित समय के अंदर मंजूरी मिले इसके लिए भी कार्य किया जाए। साथ ही छोटे उद्योगों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू की जाए ताकि छोटे निवेशकों को भी बढ़ावा मिल सके।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव ने बताया कि उत्तराखंड का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 26 प्रतिशत योगदान करता है, जो कि राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा औपचारिक रूप से पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित किया जाता है। राज्य में विनिर्माण क्षेत्र के लिए सकारात्मक वातावरण है, जिसमें कुशल मानव संसाधन, उच्च साक्षरता दर, जीवन की अच्छी गुणवत्ता और सुंदर प्राकृतिक वातावरण शामिल हैं। इन विशेषताओं के चलते उत्तराखंड निवेश और उद्योग के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बताया कि राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण विकसित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा इसके साथ भवन एवं निर्माण, बिजली, श्रम सुधार, अग्निशमन, पर्यटन, स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सुधार के लिए प्रभावी प्रयास किया जा रहे हैं साथ ही निवेश को बढ़ाने के लिए निवेशकों की सुविधा अनुसार नियमों में सुधार किया जा रहा है।

मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस फेज 2 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करने तथा राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण को और अधिक सरल बनाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर केंद्रीय अपर सचिव राहुल शर्मा, राजेश शर्मा, सचिव आर राजेश कुमार, श्रीधर बाबू अदाकी, रंजीत सिन्हा, रविशंकर, विशेष सचिव मधुकर पराग धकाते, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहेला एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।