सीएम धामी ने वन क्लिक से 9.80 लाख लाभार्थियों को ₹145.42 करोड़ की पेंशन राशि की जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाएं केवल वर्तमान आवश्यकताओं को नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाएं ऐसी हों जो समय के साथ निरंतर प्रभावी बनी रहें तथा अन्य राज्यों के लिए भी बेस्ट प्रैक्टिस का उदाहरण बनें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, डोईवाला (देहरादून), बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास, पाइनस (नैनीताल) तथा बाबू जगजीवन राम बालिका छात्रावास, सोमेश्वर (अल्मोड़ा) के निर्माण कार्य हर हाल में अक्टूबर माह तक पूर्ण किए जाएं, ताकि अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को शीघ्र बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का इंटीग्रेशन किया जाए तथा योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निर्माण कार्यों में वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही पात्र नागरिक स्वतः वृद्धावस्था पेंशन के दायरे में आ जाएं, जिससे उन्हें किसी प्रकार की अनावश्यक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े और समय पर पेंशन का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेंशन योजनाओं की माह जून-2026 की देय पेंशन राशि का डीबीटी (वन क्लिक) के माध्यम से हस्तांतरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कुल 9,80,950 लाभार्थियों को लगभग ₹145 करोड़ 42 लाख की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की। इसमें केंद्र सरकार का अंश लगभग ₹7 करोड़ 2 लाख तथा राज्य सरकार का अंश लगभग ₹138 करोड़ 40 लाख रहा।

माह जून-2026 में वितरित इस राशि में वृद्धावस्था पेंशन के 6,11,245 लाभार्थियों को ₹91.69 करोड़, विधवा पेंशन के 2,35,850 लाभार्थियों को ₹35.38 करोड़, दिव्यांग पेंशन के 88,787 लाभार्थियों को ₹13.32 करोड़, किसान पेंशन के 27,207 लाभार्थियों को ₹3.26 करोड़, परित्यक्ता पेंशन के 8,258 लाभार्थियों को ₹99.10 लाख, भरण-पोषण अनुदान के 7,297 लाभार्थियों को ₹51.08 लाख, तीलू रौतेली पेंशन के 2,179 लाभार्थियों को ₹26.15 लाख तथा बौना पेंशन के 127 लाभार्थियों को ₹1.52 लाख की सहायता प्रदान की गई।

बैठक में बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की भी समीक्षा की गई। यह योजना अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक, उच्च एवं विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने हेतु संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार प्रति छात्र ₹3.25 लाख तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है तथा आवश्यकता होने पर राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप राशि देकर आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण छात्रावासों का निर्माण सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है जो आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करे। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान प्रत्येक पात्र नागरिक का अधिकार है। उत्तराखण्ड में ऐसा सुशासन मॉडल विकसित किया जाएगा, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाने के लिए प्रेरित हों।

बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण सचिव सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव बर्द्धन ने जानी राज्य के कलस्टर विद्यालयों की प्रगति

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई। बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई एवं दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर में हरेला पर्व को बड़े स्तर पर मनाये जाने के लिए सभी जनपदों को एक्शन प्लान तैयार किये जाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि इस पर्व को आमजन से जोड़े जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस पर्व से अधिक से अधिक लोगों को जोड़े जाने के लिए स्कूल, एनजीओ न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत आदि को जोड़ते हुए वृहद स्तर पर हरेला का आयोजन किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में क्लस्टर विद्यालयों की प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों के साथ प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में छात्र व छात्राओं को यातायात सुविधा दिए जाने के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों के माध्यम से सरकार छात्र व छात्राओं को वो सभी सुविधाएं एक जगह पर देने का प्रयास कर रही है, जो उन्हें मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों को सभी आवश्यक सुविधाओं से परिपूर्ण करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चिन्हित क्लस्टर विद्यालयों में से श्लो हैंगिंग फ्रूटश् जैसे विद्यालयों को शुरूआती चरण में लिया जा सकता है। मुख्य सचिव ने आयुक्त गढ़वाल एवं आयुक्त कुमाऊँ को इस सम्बन्ध में साप्ताहिक समीक्षा करते हुए, क्लस्टर विद्यालयों में शीघ्र से शीघ्र विद्यार्थियों को यातायात सुविधा उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. वी. षणमुगम, चंद्रेश कुमार यादव एवं विनोद कुमार सुमन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में केदारनाथ पुनर्निर्माण और पुनर्विकास कार्य एवं बद्रीनाथ मास्टर प्लान कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण से सम्बन्धित कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य के भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के साथ ही पूर्ण होने की समयसीमा की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि केदानाथ धाम में जिन 6 ब्लॉक्स का कार्य शुरू किया जाना है, उन्हें तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण कराए जाने हेतु प्रत्येक कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को केदारनाथ धाम यात्रा क्षेत्र के लिए एक व्यापक एवं एकीकृत कूड़ा प्रबंधन योजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के कूड़े के डिस्पोजल की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी वित्तीय, तकनीकी और अन्य सहयोग की आवश्यकता होगी, वह उपलब्ध करायी जाएगी।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ मास्टरप्लान फेज 1 और फेज 2 के कार्यों की प्रगति की भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रत्येक कार्य की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की जानकारी ली एवं प्रत्येक कार्य के पूर्ण होने की समयसीमा के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में निहित सभी प्रकार के कंटेंट और आर्ट वर्क को साथ साथ शुरू कराया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि केदारनाथ धाम एवं बद्रीनाथ धाम में जो भी असेट्स एवं सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं, उनके ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इनके संचालन के लिए संस्थाएं पूर्व निर्धारित रहेंगी तो हैंड ओवर करने के उपरांत मेंटेनेंस आदि की जिम्मेदारी निर्धारण में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार एवं सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

सीएस की अध्यक्षता में हुई नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्राईमरी सेक्टर पर जोर देते हुए, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत् अधिक से अधिक प्रोजेक्ट शामिल किए जाने के निर्देश विभागों को दिए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट अगले तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समय से प्रतिपूर्ति जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भी चिंता जाहिर करते हुए पुरानी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव स्लो गोईंग प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए कार्यों को पूर्ण कराएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों द्वारा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने पर ही किसी क्षेत्र में योजनाओं का उचित लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि-बागवानी क्षेत्र में सम्पूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टर्स को शामिल करते हुए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक क्षेत्र के आसपास के सभी क्लस्टर्स को कोल्ड चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन आदि की सुविधा एक ही प्राजेक्ट के अंतर्गत मिल सके।

मुख्य सचिव ने इसके लिए नाबार्ड से तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह सभी परियोजनाओं का अध्ययन कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 4, 5 क्षेत्र चिन्हित करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों के एक सम्पूर्ण लिंकेज प्लान तैयार करने में तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करा सकें। इस पर नाबार्ड ने शीघ्र एक टीम लगाए जाने के आश्वासन दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान विभाग को पॉलीहाऊस परियोजना को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराए जाने हेतु सचिव स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करते हुए लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग को भी सभी जनपदों में बड़े स्तर के अस्पतालों को स्थापित कर दूरस्थ क्षेत्रों में पशुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके हैं, उन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र एवं रिपोर्ट, शीघ्र से शीघ्र नाबार्ड को उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 1 हजार करोड़ के प्रस्ताव का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 500 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो गए हैं। इनमें से कुल 271 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को प्राप्त हो गए हैं, इन 271 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 210 करोड़ की डीपीआर नाबार्ड को प्राप्त हो गई हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल एवं सीजीएम नाबार्ड पंकज यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कांवड़ यात्रा मार्ग पर नियमित कूड़ा उठान, परिवहन, कीटनाशक छिड़काव, फॉगिंग व पथ प्रकाश व्यवस्था करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में 30 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर सम्बन्धित विभागों, जनपदों के ज़िलाधिकारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने सभी सम्बन्धित विभागों को अपने स्तर से सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि 30 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक कांवड़ मेले के दौरान रूट प्लान और भीड़ प्रबंधन की तैयारियाँ कर ली जाएँ। उन्होंने कहा की 31 जुलाई से 04 अगस्त, 202ये तक पंचक काल के दौरान कांवड़ मेले में अत्याधिक भीड़ रहेगी, जिसके लिए विशेष तैयारियाँ किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप कांवड यात्रियों के लिए कांवड पटरियों व प्रमुख पड़ाव स्थल पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कराने के साथ ही मोबाइल शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नियमित कूड़ा उठान, परिवहन, कीटनाशक छिड़काव, फॉगिंग व पथ प्रकाश व्यवस्था को समुचित रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कांवड़ यात्रा मार्ग में अस्थायी सेक्टर चिकित्सालय, बी.एल.एस. एम्बुलेन्स, बाइक एम्बुलेन्स, प्राथमिक उपचार केन्द्र आदि की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कावंड मेला के दौरान हरिद्वार आने वाले वाहनों की पार्किंग के लिए पार्किंग स्थलों की मरम्मत एवं विस्तारीकरण का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाए। साथ ही, कांवड यात्रा के सुचारू संचालन हेतु राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवश्यक बैरिकेटिंग व साफ-सफाई तथा मार्ग सुधारीकरण का कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने यूपीसीएल द्वारा पॉवर सप्लाई ऑडिट कराये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा आने वाले समय के लिए यात्रा मार्गों में विद्युतीकरण की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाए। उन्होंने कांवड यात्रा के दौरान खाद्य पदार्थों का निरीक्षण एवं सैम्पलिंग हेतु टीमों को गठित किए जाने के साथ ही स्थायी व अस्थायी खाद्य स्टॉलों, धार्मिक भण्डारों, होटलों, ढाबों, दुकानों, आपूर्ति वाहनों, रेस्टोरेन्ट, दुग्ध पदार्थ विक्रेता का निरीक्षण व नमूना संग्रहण का कार्य के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कांवड़ के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए सभी आवश्यक क़दम उठाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। राज्यों के साथ अंतर्राज्यीय बैठक शीघ्र आयोजित कराते हुए अन्य राज्यों से सहयोग का अनुरोध शीघ्र कर लिया जाए।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, विनोद कुमार सुमन, धीरज गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, आयुक्त गढ़वाल आनन्द स्वरूप, जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान, डीएम पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया, डीएम टिहरी नीतिका खंडेलवाल सहित इन जनपदों के पुलिस अधीक्षक भी उपस्थित थे।

सीएम का देश-विदेश में बसे उत्तराखंडवासियों से विकसित और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में निरंतर सहयोग का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुंबई में आयोजित प्रवासी उत्तराखंडवासियों के भव्य सम्मेलन में प्रदेश और देश-विदेश में बसे उत्तराखंड मूल के लोगों के साथ आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यसेवक के रूप में पिछले पाँच वर्षों की विकास यात्रा, जनसेवा के संकल्प तथा विकसित उत्तराखंड के विजन को साझा करते हुए प्रवासी समाज को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक राजधानी मुंबई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को जीवंत बनाए रखने वाले प्रवासी उत्तराखंडवासियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विशेष आत्मीयता और गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी चाहे कितनी भी हो, उत्तराखंड और उसके प्रवासी परिवारों के बीच भावनात्मक संबंध सदैव अटूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडवासी अपनी मेहनत, संस्कार, उपलब्धियों और उत्कृष्ट कार्यों के माध्यम से देश-दुनिया में राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं तथा वे वास्तव में उत्तराखंड के सांस्कृतिक दूत और सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्रति प्रवासी समाज का स्नेह, समर्पण और जुड़ाव राज्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि से यह भावनात्मक संबंध नई पीढ़ी को भी उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़े रखने का कार्य कर रहा है। उन्होंने इस अवसर पर सभी प्रवासी संगठनों और उपस्थित उत्तराखंडवासियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रवासी उत्तराखंडवासियों की प्रतिभा, अनुभव और विशेषज्ञता को उत्तराखंड के विकास से जोड़ने के उद्देश्य से प्रवासी उत्तराखंड परिषद का गठन किया है। इसके माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखंडवासी राज्य की विकास योजनाओं, निवेश, नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवासी समाज के सुझावों और अनुभवों को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार मानती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के दौरान भी प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने सदैव आगे बढ़कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के आह्वान पर अब तक देश-विदेश में रह रहे 27 प्रवासियों ने उत्तराखंड के 29 गांवों को गोद लिया है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सकारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मुंबई में रहने वाली प्रख्यात अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी द्वारा अपने पैतृक गांव को गोद लेने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और देवभूमि के देवी-देवताओं के आशीर्वाद से उत्तराखंड आज विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बागवानी, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण सहित सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि एक जनपद-दो उत्पाद, हाउस ऑफ हिमालयाज, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, होम-स्टे योजना, वेड इन उत्तराखंड, लखपति दीदी, सौर स्वरोजगार योजना सहित अनेक पहलों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में श्अचीवर्सश् तथा स्टार्टअप रैंकिंग में श्लीडर्सश् श्रेणी में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आई है तथा जी-20 बैठकों, राष्ट्रीय खेलों, शीतकालीन यात्रा और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजनों ने उत्तराखंड की वैश्विक पहचान को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से राज्य को 3.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि हुई है, प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, राज्य का बजट एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है तथा उद्योगों और स्टार्टअप्स की संख्या में भी निरंतर विस्तार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन आधारित नीतियों के सकारात्मक परिणामस्वरूप प्रदेश में होटल और होम-स्टे की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा रिवर्स पलायन को भी नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी रोजगार के लिए गांव छोड़ने को विवश थे, वे अब नए अवसरों के साथ अपनी मातृभूमि लौट रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और जनसांख्यिकीय संतुलन के संरक्षण के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के माध्यम से सुशासन को और अधिक मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से हजारों युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है जहां पहाड़ का पानी और जवानी प्रदेश के विकास में ही योगदान दें तथा किसी भी युवा को मजबूरी में पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर गांव, आधुनिक सुविधाएं, बेहतर शिक्षा, रोजगार और मजबूत आधारभूत संरचना के माध्यम से उत्तराखंड को देश का अग्रणी और विकसित राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने देश-विदेश में बसे सभी प्रवासी उत्तराखंडवासियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव, निवेश, नवाचार और सामाजिक योगदान के माध्यम से उत्तराखंड के विकास में इसी प्रकार सक्रिय भागीदारी निभाते रहें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और प्रवासी समाज के साझा प्रयासों से उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने का संकल्प अवश्य साकार होगा।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आत्मीय स्वागत करते हुए राज्य सरकार की विकास यात्रा, जनहितकारी निर्णयों तथा उत्तराखंड को नई पहचान दिलाने के प्रयासों पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प दोहराया।

इस अवसर पर प्रवासी उत्तराखंड संगठनों के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े प्रवासी उत्तराखंडवासी तथा बड़ी संख्या में मुंबई एवं आसपास के क्षेत्रों में निवासरत प्रवासी उत्तराखंडवासी उपस्थित रहे।

राहतः 220.90 मीटर लंबे धनगढ़ी सेतु से वर्षभर सुगम होगा आवागमन, बरसात में मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या से मिलेगी स्थायी राहत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-121 (नया राष्ट्रीय राजमार्ग-309) पर धनगढ़ी नाले के ऊपर 29.65 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 220.90 मीटर लंबे प्री-स्ट्रेस्ड गर्डर सेतु (धनगढ़ी पुल) का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया।

यह राष्ट्रीय राजमार्ग काशीपुर-रामनगर-मार्चुला-बुवाखाल मार्ग पर स्थित है, जो कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों को जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रमुख प्रवेश द्वार होने के साथ-साथ नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत तथा पौड़ी गढ़वाल सहित लाखों लोगों के दैनिक आवागमन, व्यापार, पर्यटन एवं आवश्यक सेवाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

धनगढ़ी नाले में बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ जाने से मार्ग अक्सर बाधित हो जाता था, जिससे आमजन, पर्यटकों तथा आपातकालीन सेवाओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नव निर्मित सेतु के निर्माण से इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। साथ ही, वन क्षेत्र में यातायात सुचारु होने से वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि धनगढ़ी सेतु का लोकार्पण केवल एक पुल का उद्घाटन नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के वर्षों के संघर्ष, धैर्य और अपेक्षाओं की सार्थक परिणति है। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान धनगढ़ी नाले में जलस्तर बढ़ने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता था, जिससे जनजीवन, व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती थीं। इसी समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा कराया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धनगढ़ी सेतु सम्पूर्ण उत्तराखण्ड का महत्वपूर्ण पुल है, जो कुमाऊँ एवं गढ़वाल मंडलों को सुदृढ़ रूप से जोड़ता है। इस सेतु के निर्माण से दोनों मंडलों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित एवं सुगम होगा तथा पर्यटन, व्यापार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ष्सेवा, सुशासन और विकासष् के पाँच वर्ष पूर्ण करते हुए प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक विकास पहुँचाने का कार्य किया है। सरकार की प्राथमिकता अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना रही है। इसी सोच के अनुरूप राज्य में आधुनिक सड़कें, मजबूत पुल, विस्तृत रेल नेटवर्क, रोपवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कार्यसंस्कृति ष्सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टिष् पर आधारित है। इसी के अनुरूप जिन योजनाओं का शिलान्यास किया जाता है, उनका समयबद्ध ढंग से निर्माण पूर्ण कर लोकार्पण भी सुनिश्चित किया जाता है, ताकि जनता को शीघ्र लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होना केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है। राज्य सरकार विकास की गति को और तेज करते हुए उत्तराखण्ड को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि धनगढ़ी सेतु के निकट लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 175.60 मीटर लंबे पनौद पुल का निर्माण कार्य भी लगभग पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में इस पुल पर यातायात संचालित हो रहा है तथा डामरीकरण का अंतिम कार्य शीघ्र पूर्ण कर इसे भी जनता को समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि धनगढ़ी सेतु और पनौद पुल इस पूरे क्षेत्र के विकास की मजबूत आधारशिला सिद्ध होंगे तथा संतुलित विकास, सुरक्षित आवागमन और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के सशक्त प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामनगर क्षेत्र के वन खत्तों में निवासरत परिवारों की समस्याओं पर भी उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि रामनगर-रानीखेत मोटर मार्ग सहित अन्य महत्वपूर्ण मोटर मार्गों के चौड़ीकरण हेतु सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार में प्रस्ताव प्रेषित किए जा चुके हैं तथा आवश्यक कार्यवाही प्रगति पर है।

इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि धनगढ़ी सेतु के निर्माण से वर्षभर सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात सुनिश्चित होगा। बरसात के दौरान मार्ग अवरुद्ध होने की समस्या समाप्त होगी तथा दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यह सेतु कुमाऊँ और गढ़वाल के बीच संपर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ व्यापार, कृषि, पर्यटन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई गति प्रदान करेगा। चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं तथा जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि लगभग 18.43 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पनौद पुल का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गर्जिया देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने नव निर्मित धनगढ़ी सेतु का पैदल भ्रमण किया तथा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सीमा पर पुल के समीप आए वन्यजीवों का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर विधायक रामनगर दीवान सिंह बिष्ट, विधायक सल्ट महेश जीना, विधायक रानीखेत प्रमोद नैनवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री शंकर कोरंगा, संजय डॉर्बी, जेड. ए. वारसी, गणेश रावत, रंजन बरगली सहित अन्य जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डेय, अधीक्षण अभियंता (राष्ट्रीय राजमार्ग) मनोहर सिंह धर्मशक्तू तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

देवभूमि उत्तराखंड से शिवधाम की पावन यात्रा का शुभारंभ, श्रद्धा, संस्कृति और आतिथ्य का अद्भुत संगम

उत्तराखंड से संचालित पावन कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ टनकपुर से हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदा पर्यटक आवास गृह से कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सभी श्रद्धालुओं की मंगलमय एवं सफल यात्रा की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक छोलिया नृत्य से स्वागत किया गया तथा पुलिस द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं का रुद्राक्ष की माला एवं भगवान शिव का पटका पहनाकर स्वागत किया और उनसे आत्मीय संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही किसी श्रद्धालु को इस पवित्र यात्रा का अवसर प्राप्त होता है। यात्रा के दौरान आने वाली प्रत्येक चुनौती का सामना श्रद्धा और धैर्य के साथ करना चाहिए, क्योंकि शिव में अटूट विश्वास ही सभी कठिनाइयों को सरल बना देता है।

उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा सीमांत क्षेत्रों के लिए विकास और समृद्धि का माध्यम भी है। यह यात्रा सीमांत गांवों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जीवन से देशभर के लोगों को जोड़ती है। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्थानीय हस्तशिल्प एवं उत्पादों की खरीद कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। देशभर में प्राचीन मंदिरों का पुनरुद्धार एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिससे भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से सभी की सुखद एवं सफल यात्रा की प्रार्थना की।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भी राज्य सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की। सातवीं बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु अनिल कुमार जैन सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए बेहतर प्रबंध किए गए हैं।

शनिवार सायंकाल टनकपुर पहुंचे प्रथम दल का देवभूमि की परंपरा के अनुरूप छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं एवं भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं लोक कलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं।

शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि प्रथम दल में चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष एवं 15 महिला श्रद्धालु हैं। दल में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के श्रद्धालु सम्मिलित हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्रीय एकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

दल के साथ तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार चिकित्सक के रूप में शामिल हैं। राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल दल के सबसे वरिष्ठ तीर्थयात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं। यह यात्रा सभी आयु वर्ग के लोगों की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों से लगातार दूसरे वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन टनकपुर मार्ग से किया जा रहा है। इससे सीमांत जनपद चम्पावत को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिली है तथा स्थानीय व्यापार, पर्यटन, परिवहन, होटल व्यवसाय एवं रोजगार के अवसरों को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिल रहा है।

हर-हर महादेव एवं बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान टनकपुर में प्रथम दल के प्रस्थान के साथ ही पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। देवभूमि उत्तराखंड ने एक बार फिर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि सत्कार की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, मंडल आयुक्त कुमाऊं एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं मंडल निवेदिता कुकरेती, प्रबंध निदेशक कुमाऊं मंडल विकास निगम विनीत तोमर, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक चम्पावत रेखा यादव, जीएम कुमाऊं मंडल विकास निगम मनोज कुमार, उपजिलाधिकारी टनकपुर प्रमोद कुमार, जनप्रतिनिधिगण, आईटीबीपी, सेना, एसएसबी एवं ग्रेफ के अधिकारी, विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु, जिला स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने ग्राफिक एरा कौशल ज्योति योजना का शुभारंभ कर मेधावी छात्रों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद के भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में नवनिर्मित अकादमिक ब्लॉक एवं आधुनिक ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्राफिक एरा कौशल ज्योति योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों का शुभारंभ भी किया। साथ ही संस्थान के मेधावी छात्र-छात्राओं एवं ग्राफिक एरा कौशल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत निःशुल्क सर्टिफिकेट कोर्स कर रहे विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए यह अवसर विशेष महत्व का है, क्योंकि आज उत्तराखण्ड सरकार ने सेवा, सुशासन और विकास के पाँच वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं। उन्होंने कहा कि इन पाँच वर्षों में राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, रोजगार तथा युवाओं के सशक्तीकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखण्ड को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों को विश्वास दिलाया कि सरकार भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए राज्य को विकास के नए आयामों तक ले जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसकी सड़कों या इमारतों से नहीं, बल्कि उसके विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के सपनों से तय होता है। उन्होंने कहा कि ग्राफिक एरा ने शिक्षा, शोध, नवाचार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में जो पहचान बनाई है, वह केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने यह सिद्ध किया है कि यदि संकल्प, गुणवत्ता और दूरदृष्टि का समन्वय हो, तो उत्तराखण्ड जैसा पर्वतीय राज्य भी विश्वस्तरीय शिक्षा का केंद्र बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान में निर्मित नया अकादमिक ब्लॉक एवं आधुनिक ऑडिटोरियम विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को नई उड़ान देगा तथा शोध, नवाचार और रचनात्मक सोच को और अधिक गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि ग्राफिक एरा द्वारा भीमताल में परिसर की स्थापना कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुँचाना संतुलित एवं समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क होटल मैनेजमेंट एवं इंजीनियरिंग डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि कुमाऊँ मंडल में ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुदृढ़ होंगी तथा युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को शिक्षा, नवाचार एवं अनुसंधान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देहरादून में साइंस सिटी, हल्द्वानी में एस्ट्रो पार्क तथा अल्मोड़ा में साइंस सेंटर जैसे संस्थानों के माध्यम से राज्य में वैज्ञानिक सोच एवं अनुसंधान की संस्कृति को भी सशक्त किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विश्व तेजी से बदल रहा है और नई तकनीकें निरंतर नए अवसर प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही युवा सफल होगा, जो सीखने की क्षमता, नवाचार की सोच तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को ढालने का साहस रखेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल डिग्री प्राप्त करने तक स्वयं को सीमित न रखते हुए नेतृत्व क्षमता, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बने। इसी उद्देश्य से राज्य में स्टार्टअप, नवाचार एवं उद्यमिता को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के युवाओं की प्रतिभा किसी भी नकल माफिया की भेंट न चढ़े, इसके लिए उत्तराखण्ड में देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है और पिछले पाँच वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्राप्त हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए कठिन परिश्रम करने का आह्वान करते हुए कहा कि असफलताओं से कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि वही सफलता की मजबूत नींव बनती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संस्थान के विद्यार्थी भविष्य में वैज्ञानिक, चिकित्सक, अभियंता, शिक्षक, प्रशासक, उद्यमी एवं उत्कृष्ट नागरिक बनकर राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे।

इस अवसर पर धामी सरकार के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्राफिक एरा परिवार की ओर से केक भी काटा गया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक सरिता आर्या, विधायक प्रताप सिंह बिष्ट, राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) डॉ. अनिल कपूर डब्बू, ध्रुव रौतेला, शंकर कोरंगा, दिनेश आर्या, शांति मेहरा, हुकुम सिंह कुंवर, देवेन्द्र सिंह ढेला, ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे, ग्राफिक एरा ग्रुप के चेयरमैन प्रो. कमल घनशाला, निदेशक अनिल कुमार नायर, ओबीसी आयोग के सदस्य डॉ. ज़ेड. ए. वारसी, प्रकाश आर्य सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, संस्थान के पदाधिकारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

ऋषिकेश में आयोजित सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में 3.5 हजार से अधिक लोगों ने उठाया जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईडीपीएल ग्राउंड, ऋषिकेश में सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान कार्यक्रम में 20 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया एवं मुख्यमंत्री को उनके कार्याकाल के सफलतम 5 साल होने पर बधाई दी।

सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में देहरादून, हरिद्वार एवं टिहरी जनपदों के विभिन्न विभागों ने समन्वित रूप से सेवाएं प्रदान कीं। इंटीग्रेटेड एफर्ट (एकीकृत प्रयास) के तहत आमजन की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया तथा पात्र लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों पर आमजन को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया गया। इससे नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक विभागों की सेवाएं प्राप्त हुईं।

कार्यक्रम में आयोजित विशाल स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गंभीर एवं पुरानी बीमारियों की 1009 मरीजों की जांच एवं उपचार किया गया। शिविर में 212 हड्डी रोगियों, 70 स्त्री रोगियों तथा 81 नेत्र, नाक एवं कान संबंधी रोगियों का परीक्षण एवं उपचार किया गया। इसके अतिरिक्त 13 बच्चों का टीकाकरण किया गया, 15 आयुष्मान कार्ड एवं 20 आभा कार्ड बनाए गए। 95 एक्स-रे एवं 70 रक्त जांचें की गईं। आयुष विभाग द्वारा 310 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क औषधियों का वितरण भी किया गया। इसके अतिरिक्त 23 लोगों के विकलांग प्रमाण पत्र ऑनलाइन पंजीकरण किए गए।

समाज कल्याण विभाग द्वारा विधवा वृद्धावस्था दिव्यांग सहित 75 लोगों की पेंशन मौके पर स्वीकृत की गई तथा 10 लोगों के यूडीआईडी कार्ड भी निर्गत किए गए। वही 280 दिव्यांगजनो को सहायक उपकरण वितरित किए गए। शिविर में कृषि, उद्यान, उद्योग, डेयरी, मत्स्य, रेशम, पशुपालन, लीड बैंक ने करीब 1200 से अधिक लाभार्थियों को विभागीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

पुरस्कार /सम्मान
राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लघु उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न विभागों की योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान सहकारिता विभाग के अंतर्गत पंजीकृत पांच स्वयं सहायता समूहों को उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक समूह को ₹5 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया।

इसके अतिरिक्त कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत अल्मोड़ा, देहरादून तथा टिहरी जनपद के तीन युवाओं का जापान में रोजगार हेतु चयन होने पर मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। चयनित युवाओं को लगभग ₹1 लाख प्रतिमाह के पैकेज पर रोजगार प्राप्त हुआ है, जिसे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताया गया।

कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के एक, उद्यान विभाग के एक, उद्योग विभाग के तीन तथा डेयरी विभाग के एक लाभार्थी को भी अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया।