आदेश जारी, बायोमेट्रिक और प्रति सेमेस्टर में 75 फीसद उपस्थिति अनिवार्य

10 जुलाई को जारी पब्लिक नोटिस के बाद राज्य में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय ने अपने सभी 24 निजी और आठ सरकारी सेल्फ फाइनेंस बीएड कॉलेजों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने बताया कि विवि से संबद्ध बीएड और एमएड संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि चालू शिक्षा सत्र से बायोमेट्रिक उपस्थिति शुरू कर इसकी रिपोर्ट विवि को प्रेषित करना सुनिश्चित करें। उधर, डीएवी पीजी कॉलेज में भी चालू शिक्षा सत्र से बीएड के विद्यार्थियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के कड़े नियमों के बाद शासन के निर्देशानुसार कॉलेज के बीएड विभाग के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन बायोमेट्रिक उपस्थिति और प्रति सेमेस्टर में 75 फीसद उपस्थिति अनिवार्य होगी। जिसके लिए इसी सत्र से बीएड बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होने जा रही है। उन्होंने बताया कि कॉलेज के विधि संकाय में भी बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से लागू कर दी गई है। मॉनिटरिंग कमेटी गठित एनसीटीई ने इसके लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है, जो समय-समय बीएड कॉलेजों से छात्रों और शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति का ब्योरा तलब करेगी। प्रतिवर्ष दस हजार छात्र करते हैं बीएड प्रदेश के सरकारी सेल्फ फाइनेंस और निजी बीएड कॉलेजों की संख्या 112 है। जिसमें प्रतिवर्ष 10100 छात्र-छात्राएं दो वर्षीय पाठ्यक्रम के प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेते हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने सभी बीएड कॉलेज को 10 अगस्त तक बायोमेट्रिक उपस्थिति की स्टेटस रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे।
श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत का कहना है कि नियमों की अनदेखी और लापरवाही बरतने वाले संस्थानों की सेक्शन 17 ऑफ द एनसीटीई एक्ट 1993 के अनुसार मान्यता तक समाप्त की जा सकती है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों का शत फीसद पालन किया जा रहा है। विवि से संबद्ध निजी और सेल्फ फाइनेंस बीएड कॉलेजों में इसी सत्र से बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से शुरू करने को लेकर निर्देशित किया गया है। यह मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सार्थक पहल है।
वहीं, डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि डीएवी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद और शासन के निर्देशानुसार चालू सत्र से बीएड के साथ-साथ विधि संकाय में भी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रारंभ कर दी गई है। इसका पालन करना अनिवार्य है। जिस छात्र की एक सेमेस्टर में उपस्थिति 75 फीसद से कम रही उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा।

रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन की जटिलताओं में आती है कमीः एम्स निदेशक

एम्स ऋषिकेश में पहली मर्तबा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने यूरो ओंकोलॉजी एवं यूरोगाइनीकोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जटिल सर्जरियों पर विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभवों को साझा किया।
इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान के यूरोलॉजी विभाग की ओर से पहली अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक यूरोलॉजी कांफ्रेंस आयोजित की गई। जिसमें देश के ही नहीं अपितु अन्य देशों के भी प्रसिद्ध रोबोटिक शल्य चिकित्सकों द्वारा अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश हमेशा बेहतर उपचार परिणामों के साथ रोगियों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित है, इस श्रंखला में यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में शनिवार का दिन गुर्दे के कैंसर के इलाज एवं महिला पैल्विक रोगों के उपचार व विचार विमर्श के लिए समर्पित रहा। निदेशक प्रो. रवि कांत बताया कि रोबोटिक सर्जरी से पारंपरिक सर्जरी की तुलना में बेहतर परिणाम मिलते हैं,इससे .शरीर से रक्त का बहाव कम होता है और छोटे छोटे चीरे लगने से कम निशान पड़ते हैं एवं घाव आसानी से भर जाते हैं। साथ ही बताया कि रोबोटिक सर्जरी से बेहतर सूचरिंग के कारण सर्जरी में आसानी होती है और ऑपरेशन से संबंधित जटिलताओं में कमी आती है। उन्होंने बताया कि कांफ्रेंस में खासतौर से आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक सर्जन डा. डेविड गिल्लाट ने प्रतिभागियों को रोबोटिक सर्जरी की बारिकियों से अवगत कराया। निदेशक प्रो. रवि कांत ने उम्मीद जताई कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा किए गए मंथन से आने वाले समय में मरीजों को लाभ मिलेगा।


एम्स के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष व आयोजन सचिव डा. अंकुर मित्तल ने बताया कि यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल काफ्रेंस के दूसरे दिन शनिवार को डा. रवि मोहन ने एक मरीज के गुर्दे को बचाते हुए गुर्दे की गांठ की सर्जरी का प्रदर्शन किया। कांफ्रेंस के दौरान यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर मित्तल ने वेसिको वेजाइनल फिस्टुला रिपेयर ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हैं। इस अवसर पर उन्होंने एम्स संस्थान की ओर से प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। यूरोलॉजी विभाग के डा. सुनिल कुमार ने प्रतिभागियों को रोबोट पर सिमुलेशन के द्वारा प्रशिक्षण दिया।
सम्मेलन के आयोजन में डा. किम जैकब मैमन, डा. सुनील कुमार, डा. विकास कुमार पंवार, डा. शिव चरण नावरिया, डा. तुषार नारायण आदित्य,डा. निशित के अलावा यूरोलॉजी व गाइनेकोलॉजी टीम ने सहयोग किया।

सरकार ने भेजा नोटिस, हाईकोर्ट से भी नही मिली डाॅक्टरों को राहत

उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कालेजों से बांड के तहत एमबीबीएस करने वाले गैरहाजिर डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग ने ज्वाइनिंग का अंतिम नोटिस जारी कर दिया है। इसके बाद बांड की शर्तों के मुताबिक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं न देने वाले बांड धारक डॉक्टरों से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ फीस की वसूलने की कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।
प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने सरकारी मेडिकल कालेजों में बांड योजना शुरू की थी। जिसमें बांड भरकर एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को फीस में भारी छूट दी गई। लेकिन एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ डॉक्टर ने युवाओं ने दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने से इनकार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सख्ती करने पर ऑल इंडिया रैकिंग से बांड के तहत एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
जिसमें हाल ही में हाईकोर्ट ने बांड की शर्त के अनुसार ज्वाइनिंग न करने वाले डॉक्टरों से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ फीस वसूलने के आदेश दिए। अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, युगल किशोर पंत ने बताया स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों से गैरहाजिर चल रहे बांड धारक डॉक्टरों का रिकॉर्ड तैयार कर नोटिस जारी किए गये हैं। जिसमें ऑल इंडिया रैकिंग के करीब 22 डॉक्टर हैं। वहीं राज्य कोटे की सीट से बांड भरने वाले डॉक्टरों को नोटिस संबंधित कालेजों को भेजे गए हैं।
वहीं, इस साल से सरकार ने दून और हल्द्वानी मेडिकल कालेज में बांड के माध्यम से एमबीबीएस करने की योजना को समाप्त कर दिया है। अब श्रीनगर मेडिकल कालेज और अगले साल से अल्मोड़ा मेडिकल कालेज में ही बांड भरकर कम फीस पर एमबीबीएस की सुविधा मिलेगी।
बांड से प्रशिक्षित डॉक्टरों से एमबीबीएस की 15, 25, 50 हजार रुपये की फीस ली जाती है। जबकि बिना बांड के फीस चार लाख रुपये सालाना देनी होती है। बांड से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एक साल तक मेडिकल कालेजों में सेवाएं देनी होती हैं। इसके बाद दो साल तक दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों और दो वर्ष तक जिला चिकित्सालयों में सेवाएं देनी अनिवार्य हैं।

तो मोदी के समर्थन में हैं कांग्रेस के दिग्गज नेता, पार्टी फैसलों से जता रहे नाराजगी

पिछले कुछ समय से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा लगातार अपनी ही पार्टी के फैसलों से किनारा किया जा रहा है या तो फैसलों पर सवाल खड़े किए जा रहे है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और जयराम रमेश का भी नाम इस लिस्ट में जुड़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और जयराम रमेश ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है और ऐसा करके विपक्ष एक तरह से उनकी मदद करता है।
सिंघवी ने जयराम रमेश के एक बयान का हवाला देते हुए ट्वीट किया, मैंने हमेशा कहा है कि मोदी को खलनायक की तरह पेश करना गलत है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं, बल्कि ऐसा करके एक तरह से विपक्ष उनकी मदद करता है। उन्होंने कहा, काम हमेशा अच्छा, बुरा या मामूली होता है। काम का मूल्यांकन व्यक्ति नहीं बल्कि मुद्दों के आधार पर होना चाहिए। जैसे उज्ज्वला योजना कुछ अच्छे कामों में एक है। आपको बता दें कि इससे पहले जयराम रमेश ने राजनीतिक विश्लेषक कपिल सतीश कोमीरेड्डी की किताब मेलिवॉलेंट रिपब्लिकः ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द न्यू इंडिया का विमोचन करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन का मॉडल पूरी तरह नकारात्मक गाथा नहीं है और उनके काम के महत्व को स्वीकार नहीं करना तथा हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करके कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा था कि यह वक्त है कि हम मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया उसके महत्व को समझे, जिसके कारण वह सत्ता में दोबारा लौटे। इसी के कारण 30 प्रतिशत मतदाताओं ने उनकी सत्ता वापसी करवाई।

छात्रों को अब प्रवेश में नही आयेगी दिक्कत, सरकार ने बढ़ाई सीटें

सरकारी महाविद्यालयों में प्रवेश को लेकर अकसर मारामारी रहती है। इससे परेशान छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड सरकार ने बड़ी राहत प्रदान की है। प्रदेश के 17 राजकीय महाविद्यालयों में 10 फीसद सीटें बढ़ाने को सरकार ने हरी झंडी दे दी। इस संबंध में उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिए है।
सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसद आरक्षण देने के चलते राज्य के सभी 105 महाविद्यालयों में 10 फीसद सीटें नहीं बढ़ाई हैं। बीते 19 अगस्त को विधानसभा में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ धन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई विभागीय बैठक में उन महाविद्यालयों को चिह्नित किया गया, जहां प्रवेश को लेकर अधिक दबाव था। कॉलेजों में आवश्यकता को देखते हुए ही 10 फीसद कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित सीटों को बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। यह भी बताया गया कि हर कॉलेज में दाखिले को लेकर मारामारी की स्थिति नहीं है। साथ ही कुलपति और शिक्षा निदेशक की सहमति के बाद अतिरिक्त सीट की वृद्धि की छूट देने का निर्णय भी लिया गया। इससे पहले प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक ने बीती 17 अगस्त को इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेजा था।
अब शासनादेश जारी कर 17 कॉलेजों में गोपेश्वर, लोहाघाट, टनकपुर, पाटी, चंपावत, गंगोलीहाट, पिथौरागढ़, गरुड़, बागेश्वर, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, खटीमा, बाजपुर, रामनगर, मंगलौर, ऋषिकेश में 10 फीसद सीटें बढ़ाई गई हैं। उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव आनंद बर्द्धन का कहना है कि उक्त कॉलेज 10 फीसद से अधिक सीट वृद्धि चाहते हैं तो उच्च शिक्षा निदेशक और संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति से सामंजस्य स्थापित कर और उनकी सहमति से अधिकतम 20 फीसद सीमा तक सीटों में इजाफा कर सकेंगे।

उत्तराखंड में कौशल विकास से मिलेंगे रोजगार के अवसर
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थान व विश्वविद्यालयों में कौशल विकास (स्किल्ड डेवलपमेंट) केंद्र खोलने के प्रति सरकार गंभीर है, ताकि हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। केंद्र सरकार ने कौशल विकास के लिए अलग मंत्रालय खोला है, जिसका उत्तराखंड अधिक से अधिक लाभ अर्जित करेगा। यह बात उन्होंने उत्तराखंड तकनीकी विवि (यूटीयू) में कौशल विकास पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर कही।
यूटीयू में टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (टीईक्यूआइपी-3) के अंतर्गत देश के युवाओं के कौशल को रणनीति एवं अभ्यास से बदलना विषय पर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश और देश ही नहीं वैश्विक स्तर पर कौशल विकास कितना महत्वपूर्ण है। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में केंद्र में कौशल विकास मंत्रालय का गठन किया। इसका लाभ देशभर के राज्यों के लाखों युवाओं को मिल रहा है। कौशल विकास विवि, डिग्री कॉलेज, पॉलीटेक्निक, आइटीआइ, जिला व ब्लॉक स्तर पर गठित कौशल विकास केंद्र पर संचालित किया जा रहा है। जिसमें दर्जनों तकनीकी विषयों में युवाओं को पुस्तक अध्ययन के अलावा ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके बाद हजारों युवा सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

वन कर्मियों की कमी केंद्र और राज्य सरकार को देना है जवाब

उत्तराखंड में वनों को बचाने के लिए वन विभाग के पास जरुरी उपकरणों की कमी है। साथ ही एक तिहाई फील्ड कर्मचारियों कमी है। वन विभाग की मुताबिक, राज्य के वन 95 हजार करोड़ की पर्यावरणीय सेवा प्रदान कर रहे हैं। यहां गंगा-यमुना का कैचमेंट भी है, लेकिन वनों का प्रबंधन व सुरक्षा की बेहद खराब हालत है। फील्ड स्टाफ की कमी की वजह से एक फॉरेस्ट गार्ड सैकड़ों वर्ग किमी वनों की सुरक्षा में तैनात हैं। इस वजह से कर्मचारी श्रम कानूनों के अनुसार नियमित आठ घंटे के अतिरिक्त 24 घंटे ड्यूटी देने को मजबूर हैं। हाईकोर्ट ने वन विभाग की इन तमाम दुश्वारियों के मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र और उत्तराखंड सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव रहे संदीप तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर कर कहा है कि वन विभाग के पास वनों को बचाने के लिए जरूरी उपकरण जैसे आग बुझाने के उपकरण, बंदूक, कर्मचारियों की फायर वर्दी, सेटेलाइट मोबाइल आदि का अभाव है। उत्तराखंड में हर साल आगजनी की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। वन कर्मचारियों के पास अत्याधुनिक संचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, जंगली जानवरों का अवैध शिकार किया जा रहा है। अवैध तरीके से वन एवं खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है। वन कर्मचारी पैदल गश्त करते हैं। वन चैकियों या चेक पोस्ट में धर्मकांटा और सीसीटीवी का भी अभाव हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र या बुग्यालों में गश्त के लिए जरूरी उपकरण भी वन कर्मचारियों के पास नहीं हैं। आरोप लगाया कि दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों की तस्करी हो रही है। उन्होंने याचिका में पुलिस आधुनिकीकरण की तर्ज पर वन विभाग को बजट मुहैया कराने, रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने, उपकरण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को निर्देशित करने की गुहार लगाई गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद केंद्र और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

खतरनाक एडवेंचर रेस में राज्य का प्रतिनिधित्व करेगी ताशी और नुग्शी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में दुनिया की मुश्किल एवं खतरनाक एडवेंचर रेस इको चैलेंज में प्रतिभाग के लिए जा रही उत्तराखंड की पर्वतारोही ताशी एवं नुग्शी को उनकी टीम के साथ रवाना किया। मुख्यमंत्री ने इस प्रतियोगिता के लिए दोनों बहनों को शुभकामनाएं दी। फिजी में 9 सितंबर से 21 सितंबर 2019 तक इको चैलेंज 2019 के नाम से आयोजित होने वाली इस एडवेंचर रेस में 30 देशों की 67 टीमें भाग ले रही हैं। 675 किमी की इस एडवेंचर रेस में 12 एडवेंचर से संबंधित एक्टिविटी होंगी। ये सभी एक्टिविटी फिजी के घने जंगलों, पहाड़ों, नदियों एवं समुद्र के जरिए होंगी। इस रेस की मेजबानी प्रसिद्ध एडवेंचर्स बेयर ग्रिल्स कर रहे हैं। उत्तराखंड से ताशी के नेतृत्व में 4 सदस्यों की टीम इस प्रतियोगता में भाग ले रहे हैं। इस टीम के मैनेजर रिटायर्ड कर्नल वी. एस.मलिक हैं। इस मौके पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत और विधायक गणेश जोशी भी उपस्थित रहे।

वेलनेस समिट में रोजगार और पलायन पर फोकस कर रही सरकारः मुख्यमंत्री

इंवेस्टर्स समिट की तर्ज पर प्रदेश सरकार अब वेलनेस समिट का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर उद्योग विभाग समिट की कार्ययोजना बनाने में जुट गया है। ये समिट चार प्रमुख सेक्टरों पर केंद्रित होगा। इसमें आयुर्वेद, योग, पर्यटन, स्वास्थ्य प्रमुख हैं। सरकार प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से सर्विस सेक्टर को प्रोत्साहित कर रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए चार सेक्टर तय किए गए हैं।
सरकार ने गत वर्ष प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए पहली बार इंवेस्टर्स समिट आयोजित किया था। इसमें सरकार को उम्मीदों से अधिक निवेश के प्रस्ताव मिले। इंवेस्टर्स समिट में निवेश के लिए 15 सेक्टरों को चिन्हित किया गया था। सरकार ने 673 प्रस्ताव में 1.24 लाख करोड़ के निवेश पर एमओयू किए। इसी तर्ज पर इस साल सरकार वेलनेस समिट के आयोजन की तैयारी कर रही है। उत्तराखंड में जड़ी-बूटी, योग, पर्यटन और मेडिकल निवेश की अपार संभावनाएं है। इन सेक्टरों में निवेश से जहां रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। वहीं, सर्विस सेक्टर से सरकार का राजस्व बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से प्रदेश में वेलनेस समिट के आयोजन के लिए सरकार तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से निवेशकों का उत्तराखंड में निवेश करने के लिए अच्छा रिस्पांस मिला था। इस साल प्रदेश में वेलनेस समिट कराने की तैयारी कर रहे हैं। जिसमें मेडिकल, योग, आयुर्वेद, पर्यटन में सर्विस सेक्टर के उद्योगों को बढ़ावा देने पर फोकस होगा।
इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से सरकार ने 1.24 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। जिसमें अब तक 20 हजार करोड़ के निवेश को धरातल पर उतारने का काम शुरू हो गया है। नए उद्योगों के लिए सरकार जमीन चिन्हित कर रही है।
सरकार ने पर्यटन सेक्टर में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योग का दर्जा दिया है। इंवेस्टर्स समिट में पर्यटन में 15362 करोड़, वेलनेस एवं आयुष में 1751, हर्बल एवं ऐरोमेटिक में 745 करोड़, हेल्थ केयर में 16890 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले थे।

सेना में भर्ती होने का मौका, अवसर को कॅरिअर में बदलें युवा

देश की सेना के अलग-अलग हिस्सों में भर्ती होने का सुनहरा मौका है। अगर आप भी 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएट हैं तो इन भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जानिए, अलग-अलग भर्तियों के बारे में।

टेक्निकल भर्ती का मौका
ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई में टेक्निकल पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैं। इस भर्ती के लिए आवेदक की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक का बीटेक या बीई पास होना जरूरी है। इसके तहत 189 पदों पर भर्ती होगी। सिविल इंजीनियरिंग के 50, मैकेनिकल के 16, इलेक्ट्रिकल के 24, एयरोनॉटिकल के 12, कंप्यूटर साइंस के 47, इलेक्ट्रॉनिक्स के 25, फाइबर ऑप्टिक्स के 8, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग के तीन और आर्किटेक्चर के चार पदों पर यह भर्ती होगी। इसके लिए 22 अगस्त की रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

एलएलबी पास के लिए जैग एंट्री
सेना में एलएलबी पास युवाओं के लिए जैग एंट्री स्कीम के तहत आवेदन शुरू हो चुके हैं। इसके लिए आवेदक का एलएलबी पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा आवेदक की आयु 01 जनवरी 2020 को 21 से 27 वर्ष होनी चाहिए। इसके तहत पांच पुरुष और तीन महिला की भर्ती होगी। शर्त यह भी है कि आवेदक अविवाहित हो। इन पदों के लिए 14 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

10वीं, 12वीं पास के लिए यहां भर्ती का मौका
आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस अल्मोड़ा की ओर से बनबसा में सात से 13 सितंबर के बीच सेना भर्ती रैली होगी। रैली में अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के युवा हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए छह सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत सोल्जर जनलर ड्यूटी, सोल्जर टेक्निकल, सोल्जर नर्सिंग असिस्टेंट, सोल्जर क्लर्क, सोल्जर ट्रेड्समैन के पदों पर भर्ती की जाएगी।
वहीं, आर्मी रिक्रूटिंग ऑफिस पिथौरागढ़ की ओर से बनबसा में ही 21 से 23 सितंबर के बीच भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा। इस रैली में पिथौरागढ़ और चंपावत के युवा हिस्सा ले सकते हैं। इसके लिए पांच सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सोल्जर जनरल ड्यूटी के लिए आयु 17.6 से 21 वर्ष होनी चाहिए। कम से कम 45 परसेंट अंकों के साथ 10वीं पास हो। सोल्जर टेक्निकल के लिए आयु 17.6 वर्ष से 23 वर्ष हो। 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और अंग्रेजी के साथ कम से कम 50 परसेंट अंक हों। सोल्जर नर्सिंग असिस्टेंट के लिए आयु 17.6 वर्ष से 23 वर्ष के बीच हो। 12वीं में फि जिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेजी के साथ कम से कम 50 परसेंट अंक हों। सोल्जर क्लर्क के लिए आवेदक के 12वीं में कम से कम 60 परसेंट अंक हों। सोल्जर ट्रेड्समैन के लिए कम से कम 33 परसेंट मार्क्स के साथ 10वीं पास होना जरूरी है।

भर्ती रैली की जानकारी यहां देखें: www.joinindianarmy.nic.in

अकेले जीवन बिता रहे पुरुष सैनिकों को भी मिलेगी सीसीएल

केन्द्र सरकार ने अपने एक अहम फैसले में अकेले जीवन बिता रहे पुरुष सैनिकों को भी बच्चे की देखभाल के लिए मिलने वाली छुट्टी चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) देने को मंजूरी दे दी है। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महिला अधिकारियों के मामले में सीसीएल प्रावधानों में भी कुछ छूट प्रदान कर दी है। वर्तमान में सीसीएल केवल रक्षा बलों में महिला अधिकारियों को ही प्रदान किया जाता है। रक्षा मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के एक आदेश के अनुरूप है।
हाल में डीओपीटी ने प्रावधानों में कुछ संशोधन किए थे, ताकि असैन्य कर्मचारियों को सीसीएल दिया जा सके। इसके तहत महिला कर्मचारियों को दिया जाने वाला सीसीएल सरकारी पुरुष कर्मचारियों को भी दिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सीसीएल लेने के लिए पहले 40 प्रतिशत विकलांगता वाले बच्चे के मामले में 22 साल की आयु सीमा को भी हटा दिया गया है। साथ ही एक बार में सीसीएल लेने की न्यूनतम अवधि को 15 दिन के बजाय कम करके पांच दिन कर दिया गया है।
ऐसे ही लाभ रक्षा कर्मियों को प्रदान करने के एक प्रस्ताव को रक्षा मंत्री ने मंजूरी प्रदान दे दी है। इससे सिंगल (किसी भी कारण से जीवन साथी के बिना जीवन बसर करने वाले) पुरुष सैन्य कर्मी सीसीएल का लाभ उठा सकेंगे। सिंगल पुरुष सैन्य कर्मी और रक्षा बलों की महिला अधिकारी भी 40 प्रतिशत विकलांगता वाले बच्चे के मामले में सीसीएल की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे और इसके लिए बच्चे की आयु की कोई सीमा नहीं होगी।