एम्स ऋषिकेश में उत्तरकाशी की महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म

ऋषिकेश के गाइनी डिपार्टमेंट में भर्ती उत्तरकाशी निवासी महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया है। महिला को उत्तरकाशी जिला अस्पताल से दून अस्पताल रेफर किया गया था, हाई रिस्क केस होने की वजह से महिला को बीते रविवार को दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश में रेफर किया गया था।

गाइनी विभाग की डा. अनुपमा बहादुर के अनुसार महिला का हिमोग्लोबिन काफी कम था, टीएसएच 13 था, लिहाजा ऐसी स्थिति में डिलीवरी में नवजात शिशु आईसीयू नीकु की आवश्यकता पड़ सकती थी, लिहाजा दून में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे एम्स भेजा गया था। जहां अल्ट्रासाउंड के जरिए पता चला कि महिला के पेट में चार बच्चे हैं। लिहाजा महिला को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। साथ ही बच्चों के फेफड़ों की मैच्योरटी के लिए महिला को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद ऑपरेशन से शनिवार को दोपहर में महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया। जिनमें दो लड़के व दो लड़कियां हैं। चिकित्सकों के अनुसार सभी बच्चे स्वस्थ हैं। जिनका वजन क्रमशरू 1.6 किग्रा, 1.5 किग्रा., 1.35 किग्रा. तथा 1.1 किलोग्राम है।

खासबात यह है कि उन्हें वेंटीलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ी। हाईरिस्क केस होने की वजह से चिकित्सकों के दल में नवजात शिशु विभाग की विभागाध्यक्ष डा. श्रीपर्णा बासू व डा. पूनम व गाइनी विभाग की प्रमुख डा. जया चतुर्वेदी, डा. अनुपमा बहादुर व डा. राजलक्ष्मी मुंदरा शामिल थे। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि एम्स ऋघ्षिकेश उत्तराखंड में नवजात शिशु मृत्युदर कम करने को लेकर गंभीर है, लिहाजा हम हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को प्राथमिकता देते हैं। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसके लिए संस्थान में सभी विश्वस्तरीय वार्ड, संसाधन, उपकरण एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं।

श्राइन बोर्ड के गठन से नाराज लेकर तीर्थ पुरोहितों ने आंदोलन शुरु किया

चार धाम सहित 51 मंदिरों को श्राइन बोर्ड के अधीन करने संबंधी सरकार के निर्णय का विरोध अब धीरे-धीरे बड़ा आकार लेने लगा है। गंगोत्री के तीर्थ पुरोहितों ने श्राइन बोर्ड की आड़ में धामों औरं मंदिरों के अधिग्रहण की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने इस निर्णय का विरोध करते हुए कलक्ट्रेट परिसर में धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। साथ ही उन्होंने श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव निरस्त नहीं करने पर आगामी यात्रा सीजन में कपाटोद्धाटन के दिन शीतकालीन प्रवास स्थलों से देव डोलियों को धामों तक नहीं ले जाने का भी एलान किया है।
शनिवार को गंगोत्री के तीर्थ पुरोहित जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए और उन्होंने कलक्ट्रेट में क्रमिक धरना आंदोलन शुरू कर दिया। धरना स्थल पर हुई सभा को संबोधित करते हुए तीर्थ पुरोहितों ने सरकार पर श्राइन बोर्ड की आड़ में हिंदुओं की आस्था के केंद्रों का अधिग्रहण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार यात्रा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए श्राइन बोर्ड के गठन की बात कह रही है, जबकि यह कार्य चार धाम विकास परिषद के माध्यम से भी किया जा सकता है। लेकिन एक दशक से भी ज्यादा समय पहले गठित परिषद को अभी तक अधिकार संपन्न नहीं बनाया गया।
तीर्थ पुरोहितों ंने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि श्राइन बोर्ड एक्ट से तीर्थ पुरोहितों के हक हकूक प्रभावित नहीं होंगे, जबकि हकीकत यह है कि तीर्थ पुरोहितों को श्राइन बोर्ड के बारे बताया ही नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार पहाड़ से पलायन रोकने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर श्राइन बोर्ड का गठन कर तीर्थ पुरोहितों एवं पुजारियों को भी पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है।
तीर्थ पुरोहितों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव वापस नहीं लिया, तो अगले यात्रा सीजन में वे शीतकालीन प्रवास स्थलों से देव डोलियों को धामों तक नहीं ले जाएंगे। श्राइन बोर्ड के विरोध में 18 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर महारैली का आयोजन किया जाएगा।
गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल, पूर्व राज्य मंत्री घनानंद नौटियाल, व्यापार मंडल महामंत्री अंकित उप्पल आदि लोगों ने धरना स्थल पर पहुंचकर तीर्थ पुरोहितों की मांग को जायज बताते हुए समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों में मंदिर समिति के सचिव दीपक सेमवाल, अरुण सेमवाल, कृपाराम सेमवाल, राजेश सेमवाल, हरीश सेमवाल, प्रकाश सेमवाल, धर्मानंद सेमवाल, रमेश सेमवाल, गणेश सेमवाल, पवन सेमवाल, कमलनयन, राकेश सेमवाल सहित कई तीर्थ पुरोहित मौजूद थे।

नेलांग वैली को 30 किमी आगे तक खोलने की मुख्यमंत्री ने की घोषणा

हर्षिल एप्पल फेस्टिवल में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रतिभाग किया और उन्हें कई अहम घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि चीन सीमा से लगे प्रदेश के विकास खण्डों भटवाड़ी उत्तरकाशी, धारचूला, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, जोशीमठ चमोली में केेन्द्रीय योजना सीमान्त विकास योजना की भांती स्टेट एरिया डेवलपमेंट योजना लागू की जाएगी। नेलांग वैली से 30 किमी आगे तक पर्यटन हेतु खोला जाएगा। सीमावर्ती नेलांग में जिन लोगों की सम्पत्ति है उनके लिए घर बनाने के लिए अलग से फंड की व्यवस्था की जाएगी। यदि कोई स्थानीय होम स्टे योजना के तहत अपना घर बनाना चाहता है तो उसे होम स्टे योजना के लाभ के अलावा सरकार अलग से सहायता करेगी। सीमावर्ती विकास खण्ड के लिए राज्य में अलग से किसान फंड बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग के अनुरूप हर 15 दिन के भीतर मिट्टी की जांच व सेब के बारे में बागवानों को जानकारियां देने हेतु वैज्ञानिकों की सेवा ली जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र औद्यानिकी की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। पूरे देश की 45 प्रतिशत भाग की सिंचाई गंगा बेसिन से ही होती है। कृषि उत्पादन के लिए मां गंगा का अहम योगदान है। राज्य सरकार किसानों को खेती करने के लिए 1 लाख रूपये तक ब्याज मुक्त ऋण दे रही है। इसके साथ ही कृषि समूह के लिए 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए तमाम योजनाएं देश भर में चल रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुजुर्ग किसान, श्रमिक, नाई, होटल, मनरेगा के अन्तर्गत श्रमिकों आदि के लिए श्रमयोगी पेंशन योजना लागू की है।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने हर्षिल में पहुँचकर लक्ष्मीनारायण मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की तथा तिलक सोनी द्वारा लिखित पुस्तक टेकिंग गढ़वाल इन हिमालय का भी विमोचन किया। इस अवसर पर विधायक गोपाल सिंह रावत ने कहा कि हर्षिल सेब महोत्सव आयोजित होने से किसान व बागवान को इसका लाभ मिला है। सेब की अनेक किस्म की प्रजाति आज हर्षिल में उत्पादित हो रही है। सेब के उत्पादन के लिये मिट्टी की जांच के साथ ही सेब के पेड़ के लिए कब-कब आवश्यक रासायनिक व जैविक खाद व दवाई डाली जानी है इन सबकी जानकारी सेब विशेषज्ञ व वैज्ञानिकों द्वारा दी गई है। उन्होंने कहा कि सेब के साथ हम नकदी फसलों को भी बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि 2022 तक किसान की आय दोगुनी की जा सके।
इस अवसर पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री व जिला प्रभारी मंत्री डा. धन सिंह रावत, जिला उपाध्यक्ष भाजपा विजय संतरी, जिलाधिकारी डॉ आशीष चैहान, पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट सहित अधिकारी, स्थानीय ग्रामीण व देशी विदेशी पर्यटक भी मौजूद थे।

गंगोत्री और हिमालय घाटी का फोटो संग्रहालय विश्व को किया समर्पित

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने गंगोत्री धाम में पूजा अर्चना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने गंगोत्री धाम में मां गंगा से प्रदेश की खुशहाली व समृद्धि की कामना की।
इसके बाद मुख्यमत्री और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने तपोवनम् कुटी, गंगोत्री में संयुक्त रूप से स्वामी सुंदरानंद के नवनिर्मित तपोवन हिरण्यगर्भ कलादीर्घा एवं तपोवनम् हिरण्यगर्भ मंदिर और ध्यान केन्द्र का उद्घाटन किया। हिरण्यगर्भ कलादीर्घा में स्वामी सुंदरानंद ने 1948 से अब तक गंगोत्री, हिमालय और उपला टकनौर की संस्कृति और परंपरा को तस्वीरों में कैद किया है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 81 करोड़ 19 लाख 68 हजार रूपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण भी किया।

शिलान्यास की गई योजनाओं में कुवां कफनोल राड़ी मोटर मार्ग लागत 168.92, राजगढ़ी से मस्सू मोटर मार्ग लागत 106.03, राष्ट्रीय राजमार्ग से डंडालगांव तक मोटर मार्ग निर्माण लागत 50.00, स्याना चट्टी से कुंसाला मोटर मार्ग में सतह सुधार तथा क्षतिग्रस्त दिवारों व स्कवरों का पुनः निर्माण लागत 85.96, भाटिया प्रथम में पार्किग स्थल का निर्माण लागत 32.76, नाकुरी सिंगोट मोटर मार्ग के किमी 5,6,7 मंे चैड़ीकरण व डामरीकरण कार्य लागत 280.62, हरेथी से जिनेथ होते हुए पटारा स्यालना तक मोटर मार्ग का नव निर्माण लागत 210.60, ब्रहमखाल से मंडियासारी-मसौन मोटरमार्ग का निर्माण लागत 322.85, ज्ञानसू साल्ड मोटर मार्ग से उपला बस्ती ज्ञानसू तक मोटर मार्ग का निर्माण लागत 273.60, डुण्डा देवीदार से खटटूखाल तक मोटर मार्ग निर्माण 254.03, धनारी से पीपली थाती बैंड से धारकोट मुसड़गांव तक मोटर मार्ग का पुनः निर्माण कार्य व डामरीकरण व 24 मीटर स्पान का स्टील गार्डर सेतु सहित कार्य लागत 354.29, कमद अयारखाल मोटर मार्ग के किमी 1 से 5 तक डामरीकरण का कार्य लागत 411.57, द्वारी रेथल मोटर मार्ग का डामरीकरण का कार्य लागत 209.54, भटवाड़ी में मीनी स्टेडियम रेथल पंहुच मार्ग का डामरीकरण व विस्तार कार्य 330.26 इन्दरा टिपरी के कण्डारा खोल से दिवारी खोल तक मोटर मार्ग नव निर्माण कार्य 118.33, बादसी गोपाल गोलोकघाम मोटर मार्ग से खाण्ड तक मोटर मार्ग का नव निर्माण कार्य लागत 131.11, आराकोट कलीच थुनारा डामटी मोटर मार्ग का निर्माण 221.80, टिकोची पुल से झाकूली दूचाणू कण्डासी धार मोटर मार्ग का निर्माण लागत 440.00, कलीच थुनारा डामटी अवशेष मोटर मार्ग का विस्तार 175.00 स्यानाचट्टी से निसणी मोटर मार्ग लागत 380.16, पुजार गांव से पाली मोटर मार्ग लागत 278.51, स्यालना डांग सरतली मोटर मार्ग स्टेज 2 लागत 158.11, राजकीय आयुर्वेेदिक चिकित्सालय चमियारी भवन निर्माण का कार्य लागत 88.67, नौगांव पुरोला मोटर मार्ग के किमी 2 से थली लागत 623.3 कुल 57 करोड़ 5 लाख 75 हजार शामिल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी जी का संकलन आने वाली पीढ़ी के लिए विश्व धरोहर हैं। स्वामी जी की 72 वर्ष की तपस्या का संग्रह आज विश्व को समर्पित हो गया है। स्वामी जी की तस्वीरें हिमालय को करीब से देखने के लिए पूर्ण सहयोग करेंगी। साथ ही हमारे वैज्ञानिकों और हिमालयन शोधकर्ताओं के लिए यह एक संजीवनी का कार्य करेगा। उन्होंन कहा कि स्वामी सुंदरानंद ने गंगोत्री धाम में एक विश्व धरोहर दी है, जिसका सरक्षंण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्वामी सुंदरानंद के स्वास्थ्य का हालचाल भी जाना।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने कहा कि हमें गंगा की निर्मलता और इसके प्रवाह को सरंक्षित करना है। जिसके लिए गंगा किनारे रहने वाले 45 करोड़ लोगों को भी अपना कर्तव्य समझना चाहिए। सभी देशवासी मिलकर गंगा की निर्मलता और स्वच्छता को बनाये रखेंगे, तब जाकर गंगा की सेवा पूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को अक्षुण बनाएं रखने में साधु समाज का अहम योगदान रहा है। हिमालय की विशालता गंगा की पवित्रता विश्व में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक लोग हिमालय व गंगा पर शोध करने आते हैं, इस कला दिर्घा के चित्रों यदि ठीक से देखा व समझा जाए तो निश्चित ही हिमालय के दर्शन एक ही स्थान पर हो सकते है।
इस अवसर पर स्वामी सुंदरानंद ऑटोग्राफी पुस्तक का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर विधायक गोपाल सिंह रावत, स्वामी सुन्दरानन्द महाराज, स्वामी राघवाचार्य महाराज, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चैहान, पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट सहित देश विदेश से आये श्रद्धालु, साधु संत आदि उपस्थित थे।

केन्द्रीय जलमंत्री ने मुख्यमंत्री को दिया भरोसा, हर संभव करेंगे मदद

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में संचालित सिंचाई, पेयजल, बाढ़ सुरक्षा से सम्बन्धित विभिन्न योजनाओं के संचालन एवं राज्य में निर्मित होने वाले सौंग व जमरानी बांध के साथ ही प्रस्तावित जलाशय व झील निर्माण से संबंधित योजनाओं के संबंध में चर्चा की। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने केन्द्रीय स्तर पर राज्य की लम्बित योजनाओ पर समुचित कार्यवाई किये जाने का आश्वासर मुख्यमंत्री को दिया, उन्होंने पानी बचाने की व्यापक मुहिम संचालित करने पर बल देते हुए स्कूल व कॉलेजों में भी इसके लिए जनजागरण की बात कही।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया कि देहरादून में सौंग नदी पर 109 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाना प्रस्तावित है। इससे देहरादून की वर्ष 2051 तक की आबादी हेतु पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इसमें भूजल स्तर में सुधार के साथ ही रिस्पना एवं बिंदाल के पुनर्जीवीकरण में मदद मिलेगी। योजना की लागत 1290 करोड़ है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने गोला नदी पर 130.60 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाना प्रस्तावित है। इसमें नैनीताल व हल्द्वानी की पेयजल समस्या का समाधान होने के साथ ही उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड के 150027 हे. कमाण्ड में 57065 हे. अतिरिक्त सिंचन क्षमता की वृद्धि होगी। इसके साथ ही इस योजना से 14 मेगावाट विद्युत उत्पादन, मत्स्य पालन व पर्यटन योजनाओं का विकास होगा। इसके लिये जल संसाधन मंत्रालय की एडवाइजरी कमेटी द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है योजना की लागत 2584.10 करोड़ है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखण्ड राज्य का 86 प्रतिशत भू-भाग पर्वतीय है साथ ही राज्य का लगभग 63 प्रतिशत क्षेत्र वन भूमि से भी आच्छादित है तथा राज्य को प्रतिवर्ष विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं यथा बाढ़, अतिवृष्टि, बादल फटना आदि से जूझना पड़ता है। दैवीय आपदा से राज्य में निर्मित नहरों को अत्यधिक क्षति पहुँचती है एवं राज्य की वित्तीय स्थिति के दृष्टिगत सभी नहरों का जीर्णोद्धार, सुदृढीकरण किया जाना सम्भव नहीं है जिस कारण सृजित सिंचन क्षमता को बनाये रखना संभव नहीं हो पा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश जल स्त्रोंतों, जिनमें सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण संभव है, किया जा चुका है एवं संतृप्ता की स्थिति में है। अन्य क्षेत्रों में लिफ्ट नहर योजनाओं का निर्माण कर सिंचाई सुविधा प्रदान की जा रही है।
मुंख्यमंत्री ने बाढ़ प्रबन्धन कार्यक्रम के तहत जी.एफ.सी.सी पटना द्वारा बाढ़ प्रबन्धन कार्यक्रम के अन्तर्गत उत्तराखण्ड की 38 बाढ़ सुरक्षा योजनायें जिनकी लागत रू. 1108.37 करोड़ है, की इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस तथा वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने तथा कृषि सिंचाई योजना-त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के तहत केन्द्रांश की धनराशि रू. 77.41 करोड़ स्वीकृत करने का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से जल जीवन मिशन योजना के तहत योजना की लागत में ग्राम के आन्तरिक कार्यों की लागत के सापेक्ष उपभोक्ता से 5 प्रतिशत अंशदान लिए जाने की शर्त पर्वतीय ग्रामों में भवनों के दूर-दूर स्थित होने और इस कारण आन्तिरिक कार्यों की भी योजना लागत अधिक आने के साथ-साथ ग्रामवासियों की आर्थिक स्थिति भी ठीक न होने के दृष्टिगत पर्वतीय राज्यों को उपभोक्ता अंशदान से मुक्ति प्रदान करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से यह भी अपेक्षा की कि पर्वतीय क्षेत्रों में सतही वर्षाजल को रोककर लघु जलाशयों (नद्यताल) का निर्माण आसपास के क्षेत्रों में भूजल के संवद्धनध्रिचार्ज, कम लागत की पम्पिंग योजनाओं के निर्माण तथा क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विकास हेतु अति आवश्यक है, किन्तु यह कार्य काफी व्ययसाध्य है। अतः इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा पृथक से केन्द्र पोषित योजना निरूपित कर राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता सुलभ करायी जाय।

आपदा प्रभावित क्षेत्र में राहत सामाग्री देकर लौटते समय क्रैश हुआ हेलीकॉप्टर

आपदा प्रभावित क्षेत्र से राहत सामाग्री देकर लौट रहा एक हेलीकॉप्टर आराकोट न्याय पंचायत क्षेत्र के मोल्डी गांव में क्रैश हो गया। हादसे में पायलट, को-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हो गई। इसके बाद समूचे आपदा प्रभावित इलाकों में फिलहाल हेली रेस्क्यू पर रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतक आश्रितों को 15-15 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। बता दें कि हादसे में मारे गए पायलट ने छह साल पहले केदारनाथ आपदा के दौरान भी रेस्क्यू में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 225 किलोमीटर दूर आराकोट इलाके में बीती रविवार तड़के बादल फटने से भारी तबाही मची थी। यहां 35 गांवों में मोटर और पैदल मार्गों के साथ ही पुल-पुलिया बह गई हैं। इसकी वजह से रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए सोमवार से हेली रेस्क्यू चलाया जा रहा है। बुधवार दोपहर करीब पौने बारह बजे आराकोट से छह किलोमीटर दूर मोल्डी गांव में राशन व राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हैरिटेज कंपनी के हेलीकॉप्टर ने मोरी स्थित हेलीपैड से उड़ान भारी। 12 बजे हेलीकॉप्टर मोल्डी गांव में पहुंचा। वहां राशन व राहत सामग्री को छोड़कर वापस लौट रहा था, तभी हेलीकॉप्टर गांव के पास ही बागीचों से सेब की पेटियों को सड़क तक पहुंचाने के लिए लगाई गई ट्रॉली की तारों से उलझकर क्रैश हो गया। देखते ही देखते हेलीकॉप्टर में आग लग गई और वह बरसाती नाले से सटे जंगल में जा गिरा।

हेलीकॉप्टर में पायलट सहित तीन लोग सवार थे, तीनों की मौके पर ही मौत हुई। इनमें पायलट, को-पायलट और एक स्थानीय व्यक्ति शामिल हैं। स्थानीय व्यक्ति भी एक निजी एविएशन कंपनी का मुलाजिम है, बताया गया कि वह रेस्क्यू टीम की मदद के लिए हेलीकॉप्टर में साथ गया था। आग लगने से तीनों के शव बुरी तरह झुलस गए थे। सूचना पर एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल) और आइटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) की टीम मौके पर पहुंची।

मुख्यमंत्री के खिलाफ अभ्रद टिप्पणी करने पर हवालात की सैर

अगर आप सोशल मीडिया में आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे है तो सवधान हो जाइए। सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करना आप को भारी पड़ सकता है। अमूमन सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी से लोग सोचते है कुछ नही होगा। लेकिन सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी जेल भी भिजवा सकती है। दरअसल सोशल मीडिया पर लोग अपनी बात रखने की बजाय आपत्तिजनक पोस्ट डालने लग गए है। जिसका असर समाज में तो पड़ ही रहा है लेकिन जिसके खिलाफ टिप्पणी की जा रही है उसकी भी मानहानि होती है।
ऐसा ही कुछ उत्तरकाशी जिले में हुआ जहां एक युवक को मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पर की गई टिप्पणी के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
थाना पुरोला प्रभारी रितुराज ने बताया कि पुरोला भाजपा नगर मंडल कार्यकारिणी अध्यक्ष पवन नौटियाल ने थाने में युवक के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के माध्यम से उन्होंने अवगत कराया कि डेरिका निवासी राजपाल सिंह (34) पुत्र दलवीर सिंह ने फेसबुक में मुख्यमंत्री के क्रियाकलापों को लेकर अभद्र टिप्पणी की। कहा कि एक बार आरोपित को समझाकर छोड़ दिया गया था, लेकिन अपने कृत्य से बाज न आने के चलते शनिवार देर शाम उसने फिर अभद्र टिप्पणी, लाइव वीडियो प्रसारित किया, जिसके चलते पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है। युवक से पूछताछ की जा रही है।

डीएम आपदा के दौरान तुरंत एक्शन लेः त्रिवेन्द्र

राज्य में अतिवृष्टि व ऑधी तूफान से हुयी क्षति के जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावन ने ली। उन्होंने राज्य आपदा परिचालन केंद्र में डयूटी पर तैनात कर्मचारियों को फोन के माध्यम से जिलों की आपदा की जानकारी लेने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले तीन माह वर्षाकाल के दौरान विशेष सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को किसी भी प्रकार के आपदा के लिए सतर्क रहने एवं शीघ्र रिस्पांस देने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जिला आपदा कंट्रोल रूम का भी लगातार निरीक्षण करते रहें। ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चिन्हित कर कार्यवाही करें।

जिलाधिकारियों को आपदा के दृष्टिगत निरन्तर जनप्रतिनिधियों के सम्पर्क में रहने के भी निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों की फोन नम्बर की लिस्ट भी अपडेट रखी जाए। ताकि किसी भी प्रकार की घटना होने पर शीघ्र सम्पर्क किया जा सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तरकाशी एवं पौड़ी में 28 मीमी की बारिश हुई है। जबकि देहरादून में 40 मीमी बारिश हुई। उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील के गंगटाड़ी में एक बच्ची के बहने की सूचना मिली है। जबकि पौड़ी जनपद के चाकीसैंण तहसील के बुमोच में अतिवृष्टि से चार पशुओं की हानि हुई है। उन्होंने राज्य में बादल फटने संबंधी जानकारी होने से साफ इंकार किया। सीएम बोले राज्य में कोई बादल नहीं फटा है। इस तरह की सूचना का कोई औचित्य नहीं है।

श्रद्धालुओं के लिये बद्रीनाथ धाम में लगा हारपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर

यात्रियों की आमद को देखते हुये सूबे के सीएम ने श्रद्धालुओं के चिकित्सा सुविधा की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए है। इसके तहत बद्रीनाथ धाम में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन चैंबर लगाया गया है, जबकि केदारनाथ धाम, गंगोत्री व यमुनोत्री में भी यह सुविधा जल्द शुरू होने वाली है।

उत्तराखंड सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने बताया कि यात्रा मार्ग पर चिकित्सा अधिकारी/फार्मेसिस्ट एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप वाले लोगों एवं वरिष्ठ नागरिक को आकस्मिक उपचार के लिए इकोस्प्रिन एवं सोर्बिट्रेट दवाओं की व्यवस्था की गई है। अधिक ऊचाँई पर होने वाले रोगों के उपचार हेतु प्रशिक्षित ‘सिक्स सिगमा हेल्थ केयर’, नई दिल्ली द्वारा उत्तराखण्ड में चारांे धाम के यात्रा मार्गों पर 21 जून तक विशिष्ठ सेवाएं दी जायेगी। इस हेल्थ केयर सेंटर द्वारा केदारनाथ धाम में कार्डियोलॉजिस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यमुनोत्री धाम में भी शीघ्र ही कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराये जाएंगे। चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नम्बर-104 को भी सुदृढ़ किया गया है। जिसके माध्यम से सभी स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सूचना दी जायेगी तथा शिकायत एवं सुझाव भी लिए जायेंगे। हेल्प लाइन के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्गो पर श्रद्धाुलुओं को स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जायेगी।

उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा मार्गों में कुल 20 स्थानों पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट बनाये गये हैं। 08 स्थानों पर फर्स्ट मेडिकल रिस्पोन्डर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जबकि 103 स्थानों पर चिकित्सा इकाईयां बनाई गई हैं। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों, फार्मासिस्टों एवं स्टाफ नर्स की समुचित व्यवस्था की गई है। चारधाम यात्रा मार्ग में 50 प्रमुख स्थानों पर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।

चीन सीमा को जाने वाला गंगोरी बेली ब्रिज तैयार

भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला गंगोत्री हाइवें पर बना गंगोरी बेली ब्रिज तनकर तैयार हो गया है। सीमा सड़क संगठन के चीफ इंजीनियर वीएसएम एएस राठौर ने पुल का उद्घाटन किया।

उन्होंने बताया कि 1.3 करोड़ रुपये की लागत से 190 फीट लंबे इस बेली ब्रिज को बीआरओ के जवानों ने सात दिन में तैयार किया है। पुल की भार क्षमता 18 टन से बढ़कर 40 टन होगी। तय समय से पहले पुल का निर्माण होने पर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बीआरओ की टीम को बधाई दी।

विदित हो कि एक अप्रैल को भारत-चीन सीमा पर स्थित गंगोत्री धाम व भटवाड़ी ब्लाक के 42 गांवों को जोड़ने वाला असी गंगा नदी पर बना गंगोरी बेली ब्रिज टूट गया था। ब्रिज बीआरओ ने आठ जनवरी 2018 में बनाया था, लेकिन उसकी भार क्षमता सिर्फ 18 टन थी। बीती एक अप्रैल को एक रेत से भरे डंफर के भार से ही पुल टूट गया था।

इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बीआरओ ने असी गंगा नदी में ह्यूम पाइप डालकर मार्ग तैयार किया। ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु रहे। बरसात से पहले नया पुल तैयार करने के दबाव के बीच बीआरओ ने इस टूटे पुल को हटाने और नया पुल बनाने की योजना तैयार की। इसके लिए पठानकोट, चंडीगढ़, भारत-चीन सीमा के रिमझिम बॉर्डर, जोशीमठ और ऋषिकेश से सामान एकत्र किया गया। 12 अप्रैल तक सामान एकत्र होने के बाद 13 अप्रैल से बीआरओ के जवानों ने ब्रिज को जोड़ने का कार्य शुरू किया। ब्रिज के निर्माण में बीआरओ ने आर्मी से भी तकनीकी सहयोग लिया।