राजकुमार को शामिल कर भाजपा ने कांग्रेस पर फिर बनाई बढ़त

विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही उत्तराखंड में सियासत तेज हो गई है। बड़े नेताओं को पार्टी से जोड़ने की कवायद की कड़ी में रविवार दोपहर उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक राजकुमार भाजपा में शामिल हो गए। नई दिल्ली पार्टी मुख्यालय में उन्होंने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख व राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। बता दें कि उत्तराखंड में लगभग चार-पांच माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले सभी पार्टियां लगातार कद्दावर नेताओं को अपने पाले में लाने की कवायद में जुटी हुई है। फिलहाल भाजपा इसमें सबसे आगे है। हाल ही में धनोल्टी विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद कुछ और विधायकों के भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। कहा गया कि एक अन्य निर्दलीय और एक कांग्रेस विधायक भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इन चर्चाओं के बीच रविवार दोपहर पुरोला विधायक राजकुमार ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
राजकुमार बीते तीन दिनों से दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। पहले उनके शनिवार को भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं चल रही थीं। हालांकि ऐसा नहीं हो पाया। इसके पीछे कारण यह बताया गया कि कुछ बिंदुओं को लेकर कांग्रेस विधायक और भाजपा के बीच सहमति नहीं बन पाई थी।
शनिवार देर रात तक विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। रविवार सुबह सभी बिंदुओं पर सहमति बन गई। इसके बाद दोपहर में पुरोला विधायक विधिवत रूप से भाजपा में शामिल हो गए। उनके भाजपा में आने से अब भाजपा में विधायकों की कुल संख्या 57 पहुंच गई है। हालांकि, भाजपा के गंगोत्री विधानसभा सीट के विधायक गोपाल सिंह रावत के निधन से भाजपा की एक सीट कम हो गई है। इस सीट पर उप चुनाव नहीं हुआ है।
आपको बता दें कि पुरोला से विधायक राजकुमार पहले भारतीय जनता पार्टी में ही थे। वे भाजपा से विधायक रह चुके हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी न बनाए जाने पर वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

गरतांग गली को नुकसान पहुंचाने पर गंगोत्री थाने में अज्ञात पर मुकदमा दर्ज

असामाजिक तत्व खूबसूरत चीजों को बदरंग करने से बाज नहीं आते। उत्तरकाशी में भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह रही ऐतिहासिक गरतांग गली (Gartang gali disfigured) पर भी ऐसे ही असामाजिक तत्वों की नजर पड़ी है। 300 साल पुराने लकड़ी से बने इस खूबसूरत पुल को हाल में पर्यटकों के लिए खोला गया है। लेकिन अराजक तत्वों ने इस लकड़ी पर भी अपने नाम गोद डाले हैं। जिससे इसकी खूबसूरती पर दाग लग रहा है। ऐसे अराजक तत्वो के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

गंगोत्री थाने में इन अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद सिंह की तहरीर पर धारा 427 के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कारवाई के आदेश दिए हैं।

ऐतिहासिक गरतांगगली भारत-तिब्बत व्यापार का प्रमुख मार्ग रहा है। करीब 300 साल पहले पेशावर सेआए पठानों ने इसका निर्माण किया था। लेकिन भारत चीन युद्ध के बाद इस मार्ग को बंद कर दिया गया था। इस मार्ग पर करीब 500 मीटर लंबाई की लकड़ी की सीढ़ियां आकर्षण का केंद्र हैं।

राज्य सरकार के प्रयासों के बाद हाल ही में इस गली का जीर्णोद्धार कराया गया है। देवदार की लकड़ी से दोबारा सीढ़ीदार रास्ता तैयार किया गया है। इस ऐतिहासिक जगह को देखने पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है इंजीनियरिंग का नायाब नमूना गरतांग गली की सीढ़ियां

भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह रही उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का देश-विदेश के पर्यटक दीदार करने लगे हैं। गरतांग गली की सीढ़ियों का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई माह में पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही ऐसे में रोमांचकारी जगहों पर जाने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह जगह एक शानदार विकल्प है।

गरतांग गली की करीब 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। इंसान की ऐसी कारीगरी और हिम्मत की मिसाल देश के किसी भी अन्य हिस्से में देखने के लिए नहीं मिलेगी।

1962 भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी की सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था, अब करीब 59 सालों बाद वह दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया है। कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस ही लोगों को पुल में भेजा जा रहा है। पेशावर से आए पठानों ने 150 साल पहले इस पुल का निर्माण किया था। आजादी से पहले तिब्बत के साथ व्यापार के लिए उत्तकाशी में नेलांग वैली होते हुए तिब्बत ट्रैक बनाया गया था। यह ट्रैक भैरोंघाटी के नजदीक खड़ी चट्टान वाले हिस्से में लोहे की रॉड गाड़कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। इसके जरिए ऊन, चमड़े से बने कपड़े और नमक लेकर तिब्बत से उत्तरकाशी के बाड़ाहाट पहुंचाया जाता था। इस पुल से नेलांग घाटी का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। यह क्षेत्र वनस्पति और वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध है और यहां दुर्लभ पशु जैसे हिम तेंदुआ और ब्लू शीप यानी भरल रहते हैं।

सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है नेलांग घाटी
नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। गरतांग गली भैरव घाटी से नेलांग को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में मौजूद है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी चीन सीमा से लगी है। सीमा पर भारत की सुमला, मंडी, नीला पानी, त्रिपानी, पीडीए और जादूंग अंतिम चौकियां हैं।

वहीं, सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखंड कहा ने भारत सरकार ने पर्यटकों की आवाजाही पर लगाई थी रोक। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां के ग्रामीणों को एक निश्चित प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल में एक ही बार पूजा अर्चना के लिए इजाजत दी जाती रही है। इसके बाद देश भर के पर्यटकों के लिए साल 2015 से नेलांग घाटी तक जाने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इजाजत दी गई।

पर्यटन सचिव ने बताया कि दिलीप जावलकर उत्तराखंड धरोहर संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का 64 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कार्य पूरा करने के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। गरतांग गली के खुलने के बाद स्थानीय लोगों और साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक मुख्य केंद्र बन रहा है।

वहीं, मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी ने कहा के पुनर्निर्माण कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुरानी शैली में पुननिर्माण कार्यों को जुलाई माह में पूरा कर लिया गया था। कोरोना नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

नेलांग घाटी के आसपास-हर्षिल
हर्षिल, हिमालय की तराई में बसा एक गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से गंगोत्री की दूरी मात्र 21 किलो मीटर ही बचती है, जो कि हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गंगोत्री तक रास्ता अपने आप में इतना मनमोहक है कि एक बार से आपका मन नहीं भरेगा।

केदारताल
केदारताल उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है।

साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए निम का प्रशिक्षण शिविर शुरु

उत्तराखंड में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए देश-दुनिया को दर्जनों नामचीन पर्वतारोही देने वाले उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) प्रदेश के युवाओं को कम ऊंचाई पर ट्रेकिंग, पहाड़ पर चढ़ने और राहत व बचाव की बारीकियां सिखाएंगे। सात दिन तक चलने वाले कम ऊंचाई पर ट्रेकिंग गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने यूटीडीबी व निम के संयुक्त तत्वावधान में चलने वाले सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे अभ्यर्थियों को शुभकामनाऐं दी। पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में साहसिक खेलों की अपार संभावनाऐं हैं। साहसिक पर्यटन उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण के लिए रोजगार सृजित करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह राज्य के साहसिक पर्यटन क्षेत्र मंू एक नवीनतम कदम है, जो राज्य में साहसिक पर्यटन को नई ऊचाईयां देगा। इससे उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को एक नई पहचान मिलेगी। प्रदेश भर के युवाओं को इससे जोड़कर उन्हें साहसिक खेलों में भविष्य बनाने में मदद मिलेगी।

यूटीडीबी के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (साहसिक पर्यटन) कर्नल अश्विन पुंडीर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर बताया कि प्रदेश में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से ट्रेकिंग ट्रक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना को लागू किया गया था। योजना के तहत प्रदेश के छह जिलों में 13 ट्रेकिंग ट्रक्शन सेंटर में 73 गांवों को अधिसूचित किया गया है। इन अधिसूचित गांवों से इच्छुक युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विभाग की ओर से निम के साथ मिलकर सात दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। पहले चरण में पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी गढ़वाल के 49 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए निम और यूटीडीबी के बीच जुलाई माह में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए थे।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में कम ऊंचाई पर ट्रेकिंग गाइड प्रशिक्षण के लिए 4 बैच संचालित किए जाने प्रस्तावित है, जिसमें लगभग 260 युवा व युवतियों को स्वरोजगार से जोड़े जाने की योजना है। प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद युवाओं को निम और यूटीडीबी द्वारा संयुक्त रूप से पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मयूर दीक्षित जिलाधिकारी उत्तरकाशी, ले. कर्नल योगेश धूमल, वाइस प्रिंसिपल नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, रनवीर सिंह नेगी थल क्रीड़ा विशेषज्ञ, जगमोहन सिंह रावत मुख्य प्रशिक्षक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, प्रकाश खत्री जिला पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी, निम क्यूरेटर विशाल रंजन मौजूद रहे।

जिलाधिकारियों को सीएम का निर्देश, जिलों में ही जन समस्याओं का करें निराकरण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद उत्तरकाशी के आपदाग्रस्त क्षेत्रों के भ्रमण के बाद मीडियाकर्मियों से वार्ता की। कहा कि राज्य सरकार आपदा पीड़ितों के साथ हैं। प्रदेश में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के भी निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक परेशान न होना पड़े। यह सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिये गये हैं। जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि जन समस्याओं का समाधान जिलों में ही करना सुनिश्चित किया जाय। उन्होंने कहा कि जिलों की समस्यायें यदि शासन स्तर पर प्राप्त होगी तो इसके लिए सम्बंधित अधिकारी उतरदायी माना जायेगा। उन्होंने कहा कि आपदा के समय त्वरित समाधान करना हमारे लिये जरूरी है इसकी निरंतर समीक्षा की जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 के कारण विभिन्न पर्यटक गतिविधियों एवं चारधाम यात्रा की व्यवस्था में कार्यरत व्यक्तियों एवं उनके व्यवसाय पर सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वर्तमान में चारधाम की यात्रा एवं अन्य पर्यटक स्थलों के बन्द होने की वजह से होटल व्यवसाय, परिवहन व्यवसाय पोटर एवं अन्य गतिविधियाँ लगभग ठप्प हैं। विषम आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में कार्यरत व्यवसायरत व्यक्तियों के बैंक खाते में सीधे धनराशि हस्तान्तरित करेगी। इसके अतिरिक्त विभिन्न व्यवसायिक गतिविधियों हेतु लाईसेंस शुल्क आदि पर भी छूट प्रदान की जायेगी। इससे लगभग 01 लाख 64 हजार लाभार्थी व परिवार लाभान्वित होंगे। इसके लिए लगभग 200 करोड़ की व्यवस्था की गई हैं। इस पैकेज से पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को मदद मिलेगी एवं राज्य की आर्थिकी में भी तेजी आयेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस राहत एवं सहायता के अंतर्गत पर्यटन विभाग एवं अन्य विभागों में पंजीकृत पर्यटन व्यवसाय की विविध गतिविधियों के संचालन में संलग्न व्यक्तियों को 2000 रूपए प्रतिमाह की दर से 06 माह तक आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी, जिसके तहत 50,000 लाभार्थी लाभान्वित होंगे। उत्तराखण्ड पर्यटन यात्रा व्यवसाय नियमावली के अन्तर्गत पंजीकृत टुअर ऑपरेटरों एवं एडवेंचर टुअर ऑपरेटरों को 10,000 रूपए की दर से आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी, जिससे 655 लाभार्थियों को इसका लाभ प्राप्त होगा। कुल पंजीकृत 630 रीवर गाईडस को रूपये 10,000 की दर से आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी।

टिहरी झील के अन्तर्गत पंजीकृत कुल 93 बोट संचालकों को रूपये 10,000 की दर से आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। पर्यटन विभाग में पंजीकृत और लाईसेंस नवीनीकरण शुल्क से छूट प्रदान की जायेगी, जिसमें 600 लाभार्थी लाभान्वित होंगे। कुल 301 पंजीकृत राफ्टिंग एवं एयरों स्पोर्टस सेवा प्रदाताओं को लाईसेंस नवीनीकरण शुल्क में छूट दी जाएगी।

टिहरी झील के अन्तर्गत कुल 98 बोट संचालकों को नवीनीकरण में वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु नवीनीकरण शुल्क से छूट प्रदान की जायेगी। परिवहन विभाग के अन्तर्गत सार्वजनिक सेवायानों के चालक, परिचालक व क्लीनर को 2000 रूपए की मासिक दर से कुल 06 माह आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। इससे 103235 लाभार्थियों को योजना का लाभ प्राप्त होगा।

शहरी विभाग के अन्तर्गत नैनीताल जनपद के अन्तर्गत नैनी, नौकुचियाताल, भीमताल, सातताल एवं सडियाताल में पंजीकृत कुल 549 बोट संचालकों को रू० 10,000.00 की दर से आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। शहरी विभाग के अन्तर्गत नैनीताल जनपद में नैनी झील के अन्तर्गत बोट नवीनीकरण शुल्क में 671 लाभार्थियों हेतु वित्तीय वर्ष 2021-22 में छूट प्रदान की जायेगी।

सांस्कृतिक दलों का 2000 रूपए प्रतिमाह की प्रोत्साहन धनराशि 05 माह तक दी जायेगी। इससे 6500 लाभार्थियों को लाभ मिलेगा। वन विभाग के अन्तर्गत ट्रैकिंग एवं पीक फीस पर छूट प्रदान की जायेगी। नैनीताल जनपद के अन्तर्गत नौकुचियाताल, भीमताल, सातताल एवं सडियाताल के अन्तर्गत बोट नवीनीकरण हेतु कुल 329 लाभार्थियों को शुल्क में वित्तीय वर्ष 2021-22 हेतु छूट प्रदान की जायेगी। वित्त विभाग के अन्तर्गत वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली एवं दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना हेतु ऋण पर 06 माह के लिये ब्याज प्रतिपूर्ति सहायता प्रदान की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम् बोर्ड अधिनियम 15 जून, 2020 के गैजेट में अधिसूचित होने पर अस्तित्व में आया है। अधिनियम के अंतर्गत रावल, पंडे, पुजारी, हक-हकूकधारी, स्थानीय हितधारकों के पारंपरिक, धार्मिक एवं आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित रखने की बात रहने के बावजूद भी इन पवित्र धामों के कतिपय हितधारकों के मन में संशय एवं अनिश्चितता प्रतीत होती है।

उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड राज्य के लिए आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है एवं उससे राज्य के सभी वर्गों का हित व विकास जुड़ा है। उनका मानना है कि इस आर्थिक गतिविधि को नए आयाम देते हुए स्थानीय उद्देश्य व्यवसायियों एवं हक-हकूकधारियों के हकों को प्रतिकूल प्रभाव ना पढ़ने देने के उद्देश्य से कोई भी नई व्यवस्था को खरा उतरना होगा। अतः सर्व हितधारकों से प्रभावी विचार-विमर्श के उपरान्त राज्य सरकार सकारात्मक परिवर्तन-संशोधन करने के पक्ष में है। अतः इस अधिनियम से हुई व्यवस्था परिवर्तन से हितधारकों पर हुए परिणामों का आंकलन करने और व्यवस्था विचलन के विधिक परिणामों के आकलन हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जा रहा है। समिति की संस्तुति के आधार पर चारधाम देवस्थानम् बोर्ड की व्यवस्था के संदर्भ में अग्रिम निर्णय लिया जायेगा।

सीएम ने किया उत्तरकाशी के आपदा ग्राम क्षेत्रों का भ्रमण, गदेरे के दोनों और बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित मांडो व कंकराडी गांव का स्थलीय भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने मांडो गांव पहुंचकर आपदा से हुए नुकसान की जानकारी प्राप्त की और आपदा प्रभावितों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने आपदा में मृतक लोगों के परिजनों से मिलकल शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी तथा ढांढस बंधाया। उन्होंने आपदा प्रभावितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्रामीणों की मांग पर माण्डो गांव के विस्थापन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश डीएम को दिए हैं। वहीं जल्द भू-वैज्ञानिक सर्वे कराने के बाद विस्थापन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मृतक के पति देवानन्द भट्ट सर्प जोगत गांव में बेसिक स्कूल में अध्यापक है उनकी माता अनपूर्णा देवी द्वारा उनका स्थानान्तरण जिला मुख्यालय की नजदीकी स्कूल में करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने तत्काल उनका स्थानांतरण जिला मुख्यालय में करने के निर्देश डीएम को दिए। मांडो गांव के बाद मुख्यमंत्री कंकराड़ी गांव पहुंचे। जहां उन्होंने मृतक सुमन के परिजनों से मुलाकात की और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। और हर सम्भव मदद का भरोसा दिया।


मुख्यमंत्री ने आपदा पीड़ितों को आपदा राहत की मद से रूपये 04 लाख के अतिरिक्त 01 लाख रूपये की आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दिये जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने प्रभावित गांवों के विस्थापन, क्षतिग्रस्त पुलों व आन्तरिक मार्गों के शीघ्र निर्माण के निर्देश भी जिलाधिकारी को दिये।

इस दौरान काबीना व जिला प्रभारी मंत्री गणेश जोशी, प्रभारी सचिव मुख्यमंत्री एसएन पांडे, जिलाध्यक्ष भाजपा रमेश चैहान, ब्लाक प्रमुख शैलेंद्र कोहली, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसपी मणिकांत मिश्रा, सीडीओ गौरव कुमार आदि मौजूद थे।

उत्तरकाशी जिले में सीएम ने किया 14 योजनाओं का शिलान्यास, जबकि 12 योजनाएं का किया लोकार्पण


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उत्तरकाशी में लगभग 52 करोड़ 37 लाख रूपये की 26 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें से 17 करोड़ 41 लाख रूपये की 12 योजनाओं का लोकार्पण एवं 34 करोड़ 46 लाख रूपये की 14 योजनाओं के शिलान्यास किये गये।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा जिन योजनाओं का लोकार्पण किया गया। उनमें 3 करोड़ 20 लाख रूपये की जनपद के विभिन्न मोटर मार्गों पर बिटुमिन्स कंक्रीट द्वारा सतह सुधारीकरण का कार्य, 2 करोड़ 94 लाख की लागत के उत्तरकाशी घनसाली तिलवाड़ा मोटर मार्ग पर बिटुमिन्स कंक्रीट द्वारा सतह सुधारीकरण का कार्य, 2 करोड़ 74 लाख की लागत के ज्ञानसू साल्ड मोटर मार्ग से ज्ञानसू उपला बस्ती मोटर मार्ग का निर्माण, 2 करोड़ 05 लाख की लागत के गंगोत्री में वरूणाघाटी में भराणगांव-उपरीकोट मोटर मार्ग के 5 किमी में 30 मीटर स्पान के 1.50 लेन स्टील गर्डर सेतु का निर्माण, 1 करोड़ 68 लाख की लागत के विकासखण्ड भटवाड़ी के अन्तर्गत जसपुर बैण्ड से पुराली गांव तक मोटर मार्ग का निर्माण एवं 2 करोड़ 81 लाख की लागत के विधानसभा क्षेत्र गंगोत्री के अन्तर्गत नाकुरी सिंगोट मोटर मार्ग के चैड़ीकरण व डामरीकरण आदि के कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत द्वारा जिन योजनाओं का शिलान्यास किया गया। उनमें 4 करोड़ 64 लाख के अनुमानित लागत के जामक से बयाणा तक मोटर मार्ग निर्माण के स्टेज 2 का कार्य, 05 करोड़ 65 लाख के अनुमानित लागत के नाकुरी-कुंसी-मांगलीसेरा-बरसाली मोटर मार्ग निर्माण के स्टेज 2 का कार्य, 4 करोड़ 19 लाख की अनुमानित लागत के जामक से कामर मोटर मार्ग निर्माण के स्टेज 2 का कार्य, 03 करोड़ 75 लाख की अनुमानित लागत के बंदरकोट-जुगुल्डी-पंजिलयाला तक मोटर मार्ग निर्माण के स्टेज 2 का कार्य आदि शामिल हैं।

इस अवसर पर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वामी यतीश्वरानंद, जिलाध्यक्ष भाजपा रमेश चैहान, डॉ स्वराज विद्वान, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा आदि मौजूद थे।

कोविड केयर सेंटर बडकोट पहुंचे सीएम तीरथ सिंह रावत, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बड़कोट में कोविड केयर सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कोविड केयर सेंटर की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कोविड केयर सेंटर में दवाओं, खान-पान एवं अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। अवगत कराया गया कि कोविड केयर सेंटर में चिकित्सकों द्वारा नियमित देखभाल की जा रही है। भोजन, स्वच्छता एवं अन्य व्यवस्थाएं भी अच्छी हैं। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नौगांव का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कोविड सेल से होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों से फोन से वार्ता कर उनका हालचाल जाना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं। डॉक्टरों को दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती दी गई है। कोविड के दौरान डॉक्टरों की कमी न हो, इसके लिए जिलाधिकारियों को भी अधिकार दिया गया है कि कोविड के दौरान मानक के अनुसार एवं आवश्यकतानुसार डॉक्टरों की तैनाती कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरकाशी जनपद में कोविड के नियंत्रण के लिए अच्छे प्रयास हुए हैं। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर के दृष्टिगत सरकार द्वारा पूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। अस्पतालों एवं कोविड केयर सेंटरों में बच्चों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था के साथ ही उनके अभिभावकों के लिए भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सीएचसी स्तर तक भी आक्सीजन प्लांट की व्यवस्था की जा रही है।

इस अवसर पर राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार यतीश्वरानन्द, उत्तरकाशी के भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश चैहान, अपर जिलाधिकारी तीर्थपाल सिंह आदि उपस्थित थे।

सीएम तीरथ सिंह ने गंगोत्री विधायक के निधन पर जताश शोक, व्यक्त की संवेदना


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं गंगोत्री विधायक गोपाल रावत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी हित और गंगोत्री वैली के विकास के लिए किए गए उनके कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत एवं अन्य मंत्रीगणों ने कैम्प कार्यालय में 02 मिनट का मौन रखकर गंगोत्री विधायक गोपाल रावत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी जिले के ग्राम नैताला (रैथल, भटवाङी और बारसू) में मुख्यमंत्री त्वरित समाधान कार्यक्रम के तहत रात्रि चैपाल में किया वर्चुअल प्रतिभाग

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उत्तरकाशी जिले के ग्राम नैताला (रैथल, भटवाङी और बारसू) में मुख्यमंत्री त्वरित समाधान कार्यक्रम के तहत रात्रि चैपाल में वर्चुअल प्रतिभाग किया और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया। चैपाल में कुल 18 शिकायतें प्राप्त हुईं। इन सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 में फर्जी बिलों की शिकायत और नमामि गंगे में गड़बड़ियों की शिकायत पर जिलाधिकारी को 10 दिन में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में सभी जिला स्तरीय अधिकारी, एसपी, सीडीओ तथा स्थानीय और आसपास के ग्रामीण मौजूद थे। इस दौरान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जी के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, जिनका मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।

एक ग्रामीण महिला ने गांव में एएनएम सेंटर खुलवाने की मांग की। सीएमओ उत्तरकाशी ने बताया कि एएनएम सेंटर का भवन है, लेकिन मैन पॉवर की कमी होने के कारण यह संचालित नहीं हो पा रहा है, इस पर मुख्यमंत्री ने एएनएम सेंटर में एएनएम और फार्मासिस्ट की नियुक्ति कर प्राथमिकता के आधार पर उसे शीघ्र शुरू करवाने के निर्देश दिए।

नैताला के बीडीसी सदस्य ने बताया कि नैताला के समीप स्थित तोक जहां 300 से 400 लोग रहे हैं, वहां सड़क की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दो बार शासन से एस्टीमेट वापस आ चुके हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि ग्राम में अभी तक पशु चिकित्सालय का भवन अब तक नहीं बन पाया है। इस पर पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में पशु चिकित्सालय किराये पर चल रहा है और डॉक्टर भी पदस्थ है और अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि जिला योजना में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने शीघ्र भवन निर्माण के निर्देश दिए।

नैताला के वार्ड 2 से जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि उनके यहां नमामि गंगे के तहत घाट बनना अति आवश्यक है। वो स्वीकृत भी था, बाद में उसे बनाना निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के किनारे स्थित पर्यटन स्थलों के समीप दीवार बनाना भी आवश्यक है, यह बरसात में क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा होता है। इस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारी को शीघ्र प्रस्ताव देकर निर्माण करवाने के निर्देश दिए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने नमामि गंगे योजना में घोटाले की सूचना मिलने की बात कही और इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान नैताला ग्रामसभा की महिलाओं के समूह की सुनीता भट्ट ने ग्राम में दूध डेयरी खोलने के लिए जगह नहीं मिलने की समस्या बताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारी को महिला समूह को शीघ्र जमीन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।

एक अन्य व्यक्ति ने ग्राम के समीप 1955 में बनी 4 किमी लंबी नहर का जीर्णोध्दार नहीं होने से सिंचाई में समस्या से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के प्रस्ताव और एस्टीमेट भी तैयार है, परंतु उसका जीर्णोद्धार नहीं हो पा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने मामला जिला योजना की बैठक में रखने के संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए।

ग्राम की पूजा राणा ने बताया कि इंटर कॉलेज बिल्डिंग में पर्याप्त कमरे नहीं होने से की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग के लिए 2 अतिरिक्त कक्ष बनाने की योजना है। इस पर मुख्यमंत्री ने कमरों का शीघ्र निर्माण करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त बजट फंडिंग की व्यवस्था है।