सीएम तीरथ सिंह ने गंगोत्री विधायक के निधन पर जताश शोक, व्यक्त की संवेदना


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं गंगोत्री विधायक गोपाल रावत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी हित और गंगोत्री वैली के विकास के लिए किए गए उनके कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत एवं अन्य मंत्रीगणों ने कैम्प कार्यालय में 02 मिनट का मौन रखकर गंगोत्री विधायक गोपाल रावत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी जिले के ग्राम नैताला (रैथल, भटवाङी और बारसू) में मुख्यमंत्री त्वरित समाधान कार्यक्रम के तहत रात्रि चैपाल में किया वर्चुअल प्रतिभाग

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उत्तरकाशी जिले के ग्राम नैताला (रैथल, भटवाङी और बारसू) में मुख्यमंत्री त्वरित समाधान कार्यक्रम के तहत रात्रि चैपाल में वर्चुअल प्रतिभाग किया और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया। चैपाल में कुल 18 शिकायतें प्राप्त हुईं। इन सभी शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 में फर्जी बिलों की शिकायत और नमामि गंगे में गड़बड़ियों की शिकायत पर जिलाधिकारी को 10 दिन में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में सभी जिला स्तरीय अधिकारी, एसपी, सीडीओ तथा स्थानीय और आसपास के ग्रामीण मौजूद थे। इस दौरान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री जी के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, जिनका मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।

एक ग्रामीण महिला ने गांव में एएनएम सेंटर खुलवाने की मांग की। सीएमओ उत्तरकाशी ने बताया कि एएनएम सेंटर का भवन है, लेकिन मैन पॉवर की कमी होने के कारण यह संचालित नहीं हो पा रहा है, इस पर मुख्यमंत्री ने एएनएम सेंटर में एएनएम और फार्मासिस्ट की नियुक्ति कर प्राथमिकता के आधार पर उसे शीघ्र शुरू करवाने के निर्देश दिए।

नैताला के बीडीसी सदस्य ने बताया कि नैताला के समीप स्थित तोक जहां 300 से 400 लोग रहे हैं, वहां सड़क की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दो बार शासन से एस्टीमेट वापस आ चुके हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि ग्राम में अभी तक पशु चिकित्सालय का भवन अब तक नहीं बन पाया है। इस पर पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में पशु चिकित्सालय किराये पर चल रहा है और डॉक्टर भी पदस्थ है और अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि जिला योजना में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने शीघ्र भवन निर्माण के निर्देश दिए।

नैताला के वार्ड 2 से जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि उनके यहां नमामि गंगे के तहत घाट बनना अति आवश्यक है। वो स्वीकृत भी था, बाद में उसे बनाना निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के किनारे स्थित पर्यटन स्थलों के समीप दीवार बनाना भी आवश्यक है, यह बरसात में क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा होता है। इस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारी को शीघ्र प्रस्ताव देकर निर्माण करवाने के निर्देश दिए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने नमामि गंगे योजना में घोटाले की सूचना मिलने की बात कही और इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान नैताला ग्रामसभा की महिलाओं के समूह की सुनीता भट्ट ने ग्राम में दूध डेयरी खोलने के लिए जगह नहीं मिलने की समस्या बताई, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारी को महिला समूह को शीघ्र जमीन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।

एक अन्य व्यक्ति ने ग्राम के समीप 1955 में बनी 4 किमी लंबी नहर का जीर्णोध्दार नहीं होने से सिंचाई में समस्या से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के प्रस्ताव और एस्टीमेट भी तैयार है, परंतु उसका जीर्णोद्धार नहीं हो पा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने मामला जिला योजना की बैठक में रखने के संबंधित अधिकारी को निर्देश दिए।

ग्राम की पूजा राणा ने बताया कि इंटर कॉलेज बिल्डिंग में पर्याप्त कमरे नहीं होने से की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग के लिए 2 अतिरिक्त कक्ष बनाने की योजना है। इस पर मुख्यमंत्री ने कमरों का शीघ्र निर्माण करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त बजट फंडिंग की व्यवस्था है।

सीएम त्रिवेंद्र ने मोरी में 46 करोड़ की योजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा पुरोला को करोड़ों की विकासपरक योजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री सीमांत तहसील मोरी पहुँचे, जहां उन्होंने 28 करोड़ 92 लाख की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं 17 करोड़ 45 लाख 47 हजार के विकास कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने मोरी में राजकीय महाविद्यालय खोलने समेत कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री रावत ने एसडीएम से कहा कि यदि कोई भवन उपलब्ध हो जाए तो आगामी शिक्षा सत्र से ही इस महाविद्यालय में शिक्षण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तरकाशी जिला सीमांत जरूर है लेकिन यहां के लोगों में आगे बढ़ने का जज्बा है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ उठाने में उत्तरकाशी नंबर एक पर रहा है। मनरेगा के तहत भी 100 दिन में सबसे अच्छा काम उत्तरकाशी जिले में हुआ है। हमारी सरकार ने मनरेगा का कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 150 किए हैं ताकि ऐसी ही मेहनत कश लोगों को इस योजना का और अधिक लाभ मिल सके। खुशी की बात यह है कि उत्तरकाशी जिले में सर्वाधिक 4882 लोग 100 दिन पूरे कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी खासकर यमुना वैली मोरी से उनका पुराना नाता है। मैं यहां अक्सर आता रहा हूं, इसलिए घाटी की समस्या से भलीभांति वाकिफ हूं। प्राथमिकता के आधार पर इलाके की समस्याओं का निदान होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों से ही किसी क्षेत्र के विकास के रास्ते खुलते हैं। हमारी सरकार ने प्रदेश में सड़कों का जाल बछाने में फोकस किया। राज्य निर्माण के बाद 17 वर्षों के दौरान कुल जितनी सड़कें बनीं, हम अपने कार्यकाल में उस संख्या से महज 124 सड़क पीछे हैं। यानि हमने अपने चार वर्ष के कार्यकाल में उससे पूर्व के 17 वर्षों के लगभग बराबर ही सड़कों का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि अब पहाड़ी जिलों विशेषक सीमांत जनपदों में 127 पुलों के निर्माण के बजट स्वीकृत किया गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने मोरी-नैटवाड़-सांकरी मार्ग के डामरीकरण, पेयजल योजना और बुराड़ी-पैसल मोटर मार्ग की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री के साथ उच्च शिक्षा एवं जनपद प्रभारी मंत्री डॉ. धनसिंह रावत, विधायक विकासनगर मुन्ना सिंह चैहान, विधायक पुरोला राजकुमार, यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसपी मणिकांत मिश्रा, ब्लाक प्रमुख मोरी बचन पंवार उपस्थित रहे।

लोकार्पण –
मैन्द्रथ-भंकवाड़ मोटर मार्ग किलोमीटर 9 में 24 मीटर लौह सेतु के निर्माण कार्य लागत 142.23 लाख ।
ट्रांजिस्ट हॉस्टल पुरोला का निर्माण लागत 264.28 लाख।
ट्रांजिस्ट हॉस्टल नोगांव का निर्माण लागत 264.28 लाख।
रा.उ.मा विद्यालय भंकोली भवन सुदृढ़ीकरण कार्य लागत 68.36 लाख।
रा.उ.मा विद्यालय गढ़ खाटल भवन सुदृढ़ीकरण कार्य लागत 61.04 लाख।
खरसाड़ी से जीवाणु मोटर मार्ग स्टेज प्प् निर्माण कार्य लागत 821.07 लाख।
खरसाड़ी से जीवाणु मोटर मार्ग के किमी 2 में केदार नदी पर 30 मीटर स्पान स्टील गाडर सेतु का निर्माण लागत 198.13 लाख।
ग्राम खोदी लिवाड़ी के निकट सुपिन नदी पर 90 मीटर स्पान के पैदल सेतु का पुनःनिर्माण कार्य लागत 607.98 लाख।
दिल्ली – यमुनोत्री मोटर मार्ग के रिखाऊ खड्ड से रिखाऊ गांव तक मोटर मार्ग का निर्माण कार्य लागत 464.63 लाख
शिलान्यास –
देवजानी – घटटूगाड के सागली राटा तोक में क्षतिग्रस्त पैदल आरसीसी पुलिया का पुनःनिर्माण 17.70 लाख।
देवती-ठडियार मोटर मार किमी एक में सुधार एवं डामरीकरण कार्य लागत 38.39 लाख।
गुंदियाटगांव से रामा मोटर मार्ग किलोमीटर 1 से 2 तक सुधार एवं डामरीकरण कार्य लागत 51.86 लाख।
त्यूणी-पुरोला-नौगांव राज्य मार्ग संख्या 17 के किमी 84 में इंटर लॉकिंग टाइल्स एवं नाली निर्माण का कार्य 41.48 लाख
ढकाड़ा मोटर मार्ग में आरसीसी पुलिया निर्माण 28.05 लाख।
गुंदियाटगांव मोटर मार्ग के किमी 6 से 12 का हल्का वाहन मोटर मार्ग का चैड़ीकरण एवं डामरीकरण लागत 279.5 लाख।
सुनाली निचला देवरा मोटर मार्ग किमी एक में सुदृढ़ीकरण एवं डामरीकरण कार्य लागत 73.85 लाख।
प्राथमिक विद्यालय बीफ भवन निर्माण कार्य 24.77 लाख।
रा.उ.मा.विद्यालय देवजानी मुख्य भवन निर्माण कार्य लागत 141.43 लाख।
मुसई सट्टा किमी 7 से मसरी मोटर मार्ग स्टेज प्प् एवं किमी एक पर 24 मीटर स्पान लौह सेतु निर्माण लागत 250.32 लाख।
कलासी से बिंगसारी मोटर मार्ग स्टेज प्प् , लम्बाई 6.5 किमी के निर्माण कार्य लागत 331.38 लाख।
मैन्द्रथ-भंकवाड़ सड़क किमी 2.50 से बेगल मोटर मार्ग स्टेज प्प्,लम्बाई 6 किमी के निर्माण कार्य 333.07 लाख।
जखोल-लिवाड़ी मोटर मार्ग किमी एक में सूपिन नदी पर 54 मीटर स्पान स्टील गाडर सेतु का निर्माण कार्य 413.17 लाख।

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया त्यूणी महाविद्यालय के नए भवन का लोकार्पण

तहसील त्यूणी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नव निर्मित महाविद्यालय भवन लागत 711.21 लाख एवं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान रूसा परियोजना के अंर्तगत कम्प्यूटर प्रयोगशाला लागत 201.99 लाख की महत्वपूर्ण योजना का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने त्यूणी के नव निर्मित महाविद्यालय भवन का नाम पंडित शिवराम शर्मा जी के नाम पर रखने की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने जौनसार बावर क्षेत्र की लाइफ लाइन कहे जानी वाले मीनस-अटाल मोटर मार्ग समेत तमाम सड़कों के डामरीकरण, मेघातु पम्पिंग योजना के निर्माण, नीनुस मोटर मार्ग के निर्माण, रायगी में शेड पुड़िया महाराज मंदिर का सौन्दीर्यकरण करने आदि की घोषणाएं कीं।

कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षा उन्नयन के क्षेत्र में कई सफल प्रयास किए हैं। आज उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां के सभी महाविद्यालयों में 97 परसेंट फैकल्टी है। त्यूणी माहाविद्यालय में तो 100 फीसदी फैकल्टी तैनात है। इतना ही नहीं हमारा राज्य साक्षरता के लिहाज से देश में अग्रणी राज्यों में हैं। देहरादून उन जिलों में शुमार हुआ है जो लगभग शत प्रतिशत साक्षर है, हालांकि अभी थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब केवल रोजगार नहीं है। 130 करोड़ के देश मे 2.5 करोड़ ही सरकारी कर्मचारी हैं। बाकी लोग अपनी मेहनत से काम कर रहे हैं। हम ऐसा काम करें जिससे हम औरों को भी रोजगार दे सकें। सरकारी नौकरी के बजाए स्वरोजगार को पहली प्राथमिकता में रखें। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा निर्देशन में बनी देश की नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति के अनुरूप है जिसका पूरा विश्व अध्ययन कर रहा है।

प्रदेश के उच्च शिक्षा,सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि अगले साल प्रत्येक महाविद्यालय में 4जी नेटवर्क जोड़ दिया जाएगा। प्रत्येक कॉलेज को एनसीसी दी जा रही है। अब स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। महाविद्यालय के टॉपर बच्चे को 1 लाख इनाम दिया जाएगा। गरीब बच्चों के कोचिंग, आईएएस आदि तैयारी करने वाले बच्चों के लिए 1 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चैहान ने कहा कि राज्य सरकार निरन्तर सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने डागुठा-मुडाली मोटर मार्ग, चांजोई सड़क मार्ग, झजरेड पुल, सहित सरकार की कई विकासपरक योजनाओं की उपलब्धियां गिनाईं।

विधायक मुन्ना सिंह चैहान ने भी जनता को सम्बोधित करते हुए बताया कि त्रिवेन्द्र सरकार किस तरह योजनाबद्ध तरीके से राज्य का विकास कर रही है। उन्होंने चमोली आपदा में जनपद के मिसिंग लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उत्तराखंड जनजाति आयोग के अध्यक्ष मूरत राम शर्मा ने भी क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का आभार जताया।

इस दौरान देहरादून जिला उपाध्यक्ष भाजपा राजाराम, ग्राम प्रधान रतन चैहान, रमेश डोभाल, महाविद्यालय के प्राचार्य अंजना श्रीवास्तव, दर्जाधारी राज्य मंत्री उत्तरकाशी जगवीर सिंह भंडारी समेत कई जनप्रतिनिधिगण व जनता मौजूद रही।

सीएम ने आईटीबीपी के जवानों के साथ मनाई दीपावली

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आईटीबीपी कैम्प कोपांग उत्तरकाशी में आईटीबीपी के जवानों एवं हर्षिल उत्तरकाशी में 9वीं बटालियन बिहार रेजिमेंट के सेना के जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जवानों का हौंसला बढ़ाया एवं जवानों व उनके परिवारजनों को दीपावली की शुभकामनाएं दी। जवानों ने मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इससे कार्य करने का जज्बा और होंसला बढ़ता है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हमारी सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के जवान सीमान्त एवं दुर्गम क्षेत्रों में देश की रक्षा के लिए कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं। इन सैनिकों की वजह से पूरा देश चैन की नींद सोता है। हमारे जवान अपने परिवारों से दूर रहकर देश की रक्षा के लिए जिस वीरता एवं साहस से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते है। इसके लिए वे निश्चित रूप से बधाई के पात्र हैं ।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आज सेना एवं आईटीबीपी के जवानों के साथ मुझे कुछ समय बिताने का मौका मिला, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उत्तराखण्ड का सेना एवं अर्द्धसैन्य बलों से गहरा नाता रहा है। उत्तराखण्ड के अनेक जवान इन सैन्य बलों में सेवाएं दे चुके हैं एवं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे पिताजी भी सेना में रहे हैं, एक सैनिक परिवार से होने के नाते मेरा सैनिकों से व्यक्तिगत लगाव भी है। सेना एवं अर्द्ध सैन्यबलों के प्रति देश का सम्मान, श्रद्धा एवं विश्वास का भाव रहता है। हमारे सैन्य बल दुनिया के सर्वोत्कृष्ट सैन्य बल माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने दुर्गम एवं सीमान्त क्षेत्रों में महिला अधिकारी जिस जज्बे के साथ ड्यूटी कर रहे हैं, यह सबके लिए अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य के आईएएस, आईएफएस एवं आईपीएस अधिकारियों की कैम्पिंग हम सीमांत क्षेत्रों में हर साल करेंगे।

इस अवसर पर विधायक गोपाल सिंह रावत, मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार डॉ. केएस पंवार, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी उत्तरकाशी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक पंकज भट्ट, सेना एवं आईटीबीपी के जवान उपस्थित थे।

दो चरणों में होगा लच्छीवाला नेचर पार्क का पुननिर्माण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लच्छीवाला नेचर पार्क के पुनर्निमाण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नेचर पार्क का निर्माण दो चरणों में किया जायेगा। जिस पर 1008.35 लाख का व्यय आगणित है। इसके लिये कैम्पा मद में भी एक करोड़ की धनराशि प्रविधानित है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा जनपद पौड़ी के विधानसभा क्षेत्र चैबटाखाल के विकासखण्ड एकेश्वर में पाटीसैंण तछवाड़ एकेश्वर मोटर मार्ग के सुधारीकरण एवं डामरीकरण के लिये 306.42 लाख तथा विधानसभा क्षेत्र घनसाली के अंतर्गत कोट से चैठारा होते हुए हुन्ण तक मोटर मार्ग निर्माण हेतु 28.04 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री घोषणा के तहत विकास खण्ड जयहरीखाल के अन्तर्गत मोलखण्डी अकरी तथा मोलखण्डी सकरी हेतु मोटर मार्ग नव निर्माण हेतु भी मुख्यमंत्री द्वारा 17.24 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पौत्रियों के विवाह को सरकार ने दी धनराशि
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनपद देहरादून, पौड़ी उत्तरकाशी एवं बागेश्वर के 06 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पौत्रियों के विवाह हेतु 3 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इस प्रकार 50 हजार की धनराशि प्रति आवेदक को उपलब्ध होगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड मुक्त विश्व विद्यालय हल्द्वानी में अतिथि गृह, कुलपति आवास एवं बहुउदेश्यीय भवन हेतु फर्नीचर फिक्सिंग कार्य हेतु 928.55 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह धनराशि विश्व विद्यालय द्वारा स्वयं के संसाधनों से व्यय की जायेगी।

उत्तराखंडः चीन सीमा को लेकर चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर उतरा वायुसेना का विमान

भारत-चीन की 345 किलोमीटर लंबी सीमा उत्तराखंड में है। इसमें उत्तरकाशी में करीब 122 किलोमीटर लंबी सीमा है। इस सीमा पर चैकसी की जिम्मेदारी आइटीबीपी (भारत तिब्बत सीमा पुलिस) के पास है। वायुसेना यहां चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर अस्थाई एयरबेस बना सकती है। इसी क्रम में वायुसेना का मल्टीपरपस विमान एएन-32 ने सात बार सुरक्षित लैंडिंग की और टेकआफ किया। चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर 29 अक्टूबर को एयर चीफ मार्शल आने वाले है।

भारत-चीन सीमा पर लद्दाख में चीन सेना की घुसपैठ के बाद बढ़े गतिरोध के बीच भारतीय सेना और वायु सेना अलर्ट मोड पर है। सीमा को अभेद्य बनाने के लिए वायु सेना अभ्यास में जुट गई है।

रनवे का परीक्षण करने के लिए पायलट दल ने आसमान में चक्कर भी लगाया। पायलट दल ने रनवे को सुरक्षित लैंडिंग के लिए मुफीद पाया है। यह भी बताया जा रहा है कि वायु सेना चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी को अस्थाई रूप से एयर बेस बना सकती है। इसके लिए 20 अक्टूबर को वायु सेना की टीम दो चेतक हेलीकॉप्टर के जरिये चिन्यालीसौड़ पहुंची, जहां वायु सेना की टीम ने हवाई पट्टी पर मौजूद सुविधाओं के अलावा हवाई पट्टी के निकट उत्तराखंड जल विद्युत निगम के गेस्ट हाउस को भी देखा। बताया जा रहा है कि अभी वायु सेना की ओर से अस्थाई एयर बेस को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सीएम त्रिवेंद्र ने किसानों से कालावासा की खेती करने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनपद उत्तरकाशी के विकास खण्ड डुण्डा के ग्राम चकोन धनारी में 25 लाख लागत की 25 किलोवाट क्षमता की पिरूल से विद्युत उत्पादन की पहली परियोजना का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पर्यावरणीय चक्र को आग से बचाने के लिए यह परियोजना बेहद उपयोगी होगी। जंगलों में आग लगने के कारण जहां अनेक पेड, औषधीय पौधे, वनसपत्तियां नष्ट हो जाती थी वहीं बड़ी संख्या में जंगली जानवर भी प्रभावित होते हैं।

पिरूल से विद्युत उत्पादन परियोजना के बनने से वनों एवं जीव जन्तुओं को आग से सुरक्षा होगी तथा इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होगें। अभी राज्य को 1 हजार करोड़ की बिजली क्रय करनी पड़ रही है, इस प्रकार की परियोजना के बनने से राज्य को आर्थिक मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में 23 लाख मिट्रीक टन सालाना पिरूल उत्पादन होता है, जिससे लगभग 200 मेगावाट बिजली उत्पादित की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कालावासा काफी मात्रा में पाया जाता है। इसमें औषधीय तत्व विद्यमान हैं। यह विकरण किरणों से भी बचाता है तथा एंटीबायटिक हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों से कालावासा की खेती करने का आहवान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सीमान्त क्षेत्रों में नेटवर्किंग की समस्या को देखते हुए 250 सेटेलाईट फोन दिये गए है ताकि सीमान्त वासियों को नेटवर्क को लेकर कोई समस्या न हो। इसी तरह प्रदेश भर में जहां कनेक्टिविटी नहीं है तथा टावर लगाये जाने हैं वहां टावर लगाने के लिए सरकार द्वारा 40 लाख रूपये स्वीकृत किये हैं। सीमान्त वासियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए बीएडीपी की तर्ज पर मुख्यमंत्री सीमान्त क्षेत्र विकास निधि में इस वर्ष 20 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है, ताकि उनकी समस्याओं को हल किया जा सके। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सामरिक दृष्टि से सीमान्त क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय का होना अति आवश्यक है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के अन्तर्गत हर घर नल द्वारा जल देना है। इस वर्ष में 10 लाख लोगों को पानी का कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इस हेतु हर जिले की दैनिक रूप से मॉनिटरिंग की जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 14 लाख कनेक्शन दिये जाने है। वर्तमान में तीन माह के भीतर 51 हजार कनेक्शन दिये जाने का लक्ष्य रखा गया था जिसमें आज तक 67 हजार कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

अटल आयुष्मान योजना के अन्तर्गत अब तक 2 लाख लोगों ने इसका लाभ लिया है। तथा देश भर में 22 हजार अस्पतालों में गोलडन कार्ड से 5 लाख रूपये तक का ईलाज निःशुल्क करवा सकते हैं। इस योजना के अन्तर्गत 23 लाख लोगों को जोड़ा गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में तीन मेडिकल कालेज उद्यमसिंह नगर, हरिद्वार, व पिथोरागढ़ की स्वीकृति मिल चुकी है। जिसका शीघ्र ही निर्माण कार्य करवाया जाएगा। मेडिकल कालेज के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य हैं जहां छोटी सी आबादी में 6 मेडिकल कालेज होगें। किसानों को पहले 2 लाख तक बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है अब यह बढ़ाकर 3 लाख रूपये कर दिये है।

मुख्यमंत्री ने धनपति व इन्दिरावती नदी में बाढ़ सुरक्षा कार्य धन स्वीकृत व सौरा-सारी-पिलंग-बुढ़ाकेदार-पवाली केदारनाथ 45 किमी. सड़क स्वीकृत करने की घोषणा की। गंगोत्री विधायक गोपाल सिंह रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनपद में सोलर व पिरूल प्लांट के स्थापित होने से यहां के स्थानीय लोगों को इससे रोजगार मिलेगा। उन्होंने नौजवानों से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए आयाम विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांव के नौजवान स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आयें तथा समूह बनाएं उन्हें सरकार की ओर से हर स्तर पर सहयोग करने की बात कही। गंगाड़ी पिरूल प्लांट के स्वामी महादेव सिंह गंगाड़ी ने भी मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

भारत-चीन सीमा पर सेना के जवानों की बढ़ी तादात

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भारत-चीन सीमा पर आईटीबीपी के जवानों की सतर्कता को बढ़ाया गया है। आईटीबीपी की उप महानिरीक्षक अपर्णा कुमार ने बताया कि भारत-चीन सीमा पर सेना और आईटीबीपी के जवान मुस्तैदी के साथ ड्यूटी दे रहे हैं। यहां पूरी सतर्कता बरती जा रही है। उत्तरकाशी जनपद में जिला मुख्यालय से करीब डेढ़ सौ किमी आगे चीन की 117 किमी सीमा लगी हुई है। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद सरकार ने सीमावर्ती नेलांग और जाढ़ूंग गांव को खाली करवा कर यह क्षेत्र सेना के सुपुर्द कर दिया था।

वर्तमान में सीमा पर नेलांग, जाढ़ूंग, नागा, त्रिपाणी, मंडी, सुमला, पीडीए, थागला-1, थागला-2, मुनिंगलापास, टीसांचुकला आदि सीमावर्ती चैकियों पर भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवान मुस्तैद हैं। सीमाओं की निगरानी के लिए भारत की ओर से बॉर्डर इलाके में सड़कों का जाल बिछाया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब राज्य में हिम तेंदुए की गणना होगी

उत्तरकाशी वन प्रभाग क्षेत्र में हिम तेंदुए का संरक्षण केन्द्र बनाया जायेगा। यह संरक्षण केन्द्र भैरों घाटी के लंका नामक स्थान पर बनाया जायेगा। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हिम तेंदुओं की गणना की जाय। हिम तेंदुओं के सरंक्षण एवं इनकी संख्या में वृद्धि के लिए विशेष प्रयास किये जाय। पिछले कुछ वर्षों में जिन क्षेत्रों में हिम तेंदुए देखे गये हैं। स्थानीय लोगों एवं सैन्य बलों के सहयोग वन विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय। ऐसे क्षेत्रों में ग्रिड बनाकर इनकी गणना की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम तेंदुए एवं अन्य वन्य जीवों के संरक्षण से राज्य में विन्टर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों की अनेक प्रजातियां हैं, जो पर्यटकों के आर्कषण का केन्द्र बनती हैं। वन्य जीवों की लुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में प्रयासों की जरूरत है। आज वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लोग भी जागरूक हैं। उत्तराखण्ड के प्राकृतिक एवं नैसर्गिक सौन्दर्य में वन एवं वन्य जीवों का महत्वपूर्ण योगदान है।

बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जनपद में हिम तेंदुए अधिक मात्रा में देखे गये हैं। अभी तक इनकी गणना नहीं की गई है। विभिन्न शोधों के आधार पर उत्तराखण्ड में अभी 86 हिम तेंदुए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस अवसर पर प्रो. एन. फिन्स्ट्रा ने हिम तेंदुए के संरक्षण केन्द्र पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया।