महाकुंभ का मुख्य शाही स्नान सफलता पूर्वक सम्पन्न


कुम्भ मेला का मुख्य शाही स्नान सकुशल और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो गया। मेष संक्रांति के स्नान पर विगत के कुम्भ मेलों में घटित कुछ अप्रिय घटनाओं के इतिहास एवं कोविड की अभूतपूर्व चुनौतियों को देखते हुए शाही स्नान को सुव्यवस्थित व निर्विघ्न संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा था। इन चुनौतियों के बीच मुख्य शाही स्नान बिना किसी अप्रिय घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। सायं तक 13 लाख 51 हजार श्रद्धालु कुम्भ क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर स्नान कर चुके थे।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कुम्भ मेले के मुख्य शाही स्नान के सकुशल सम्पन्न होने पर मेले से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों, स्वयं सेवी संस्थाओं सहित सभी जनमानस को बधाई देते हुए हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करते हुए मेले से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मिकों ने जिस मनोयोग से कुम्भ की व्यवस्थाओं को संभाला तथा देश-विदेश के श्रद्वालुओं को सुविधाएं उपलब्ध करायी, वह सराहानीय है। शाही स्नान सकुशल सम्पन्न होने से राज्य सरकार की दिव्य-भव्य एवं सुरक्षित कुम्भ की परिकल्पना भी साकार हुई है। मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेले से सफल आयोजन का सामूहिक प्रयासों का भी नतीजा बताते हुए साधु-संतों, अखाडों, मेला क्षेत्र की जनता, व्यापारियों, गंगा सभा, तीर्थ पुरोहितों, मीडियाकर्मियों, स्वयंसेवी संगठनों आदि का भी अत्यधिक उल्लेखनीय सहयोग रहा है। जिसके लिए सभी लोग बधाई के पात्र है।

मेला अधिकारी दीपक रावत ने शाही स्नान सम्पन्न होने के बाद मीडिया सेंटर कुम्भ मेला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुम्भ मेलों के बैसाखी के शाही स्नानों में कुछ छोटी मोटी घटनाएं हुई थी, इसलिए मेला प्रशासन व पुलिस के आपसी सहयोग से इसे सफल बनाने की पूरी कोशिश की थी और इसमें हम सब सफल रहे। उन्होंने इस सफलता के लिए पुलिस, स्वयंसेवी संस्थाओं व सफाई कर्मियों के अलावा व्यापारी व आम जनता का भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि थोड़ी बहुत परेशानी के बावजूद उन्होंने पूरे दिल से प्रशासन का साथ दिया। उन्होंने बताया कि कोरोना के मध्यनजर जिला स्वास्थ्य विभाग व मेले में जुड़ी अन्य एजेंसियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 50 हजार टेस्ट हो रहे हैं।

पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल ने बताया कि मेला क्षेत्र की सीमाओं पर श्रद्धालुओं के कोबिड सर्टिफिकेट की सघन जांच हो रही है, जिस कारण सर्टिफिकेट न होने पर अब तक 56 हजार श्रद्धालुओं को सीमा से ही वापस लौटाया जा चुका है। उन्होंने शाही स्नान को सफलता से आयोजित करने में राज्य की पुलिस सहित केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बलों, अन्य राज्यों की पुलिस एवं पी.एस.सी., होमगार्ड्स आदि की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस बार पुलिस, केन्द्रीय सुरक्षाबलों के अतिरिक्त पहली बार एन.एस.जी को भी तैनात किया गया था। कोरोना काल के बावजूद शाम तक करीब 13 लाख 51 हजार लोग गंगा में पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुम्भ मेला जनमेजय खण्डूड़ी नेग मेला में सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
नोडल अधिकारी सूचना मनोज श्रीवास्तव ने देशभर के मीडिया के साथ साथ स्थानीय मीडिया का धन्यवाद करते हुए कहा कि खासकर स्थानीय मीडिया ने मेला प्रशासन के मिलकर एक मेजबान की भूमिका भी निभाई और कुम्भ की महत्ता को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।

सीएम तीरथ सिंह रावत ने शाही स्नान पर पहुंचे श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर किया स्वागत, लिया संतो का आर्शीवाद

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने आज हरिद्वार में हर की पैड़ी पहुंचकर मां गंगा से प्रदेशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर शाही स्नान के लिए मां गंगा के तट पर आए साधु-संतों और श्रद्धालुओं का मुख्यमंत्री ने स्वागत किया। इस अवसर पर श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री का गंगाजली, प्रसाद और चुनरी भेंट कर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सभी साधु-संतों का आभार माना। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मां गंगा में शाही स्नान करने के लिए श्रद्धालु रात से ही जुटने लगे थे। जनता की सुविधा के लिए हमारी सरकार ने सभी इंतजाम कर रखे हैं। कई श्रद्धालुओं ने अलसुबह स्नान किया और वे सुरक्षित अपने घरों को लौटे। इसके पश्चात अखाड़े के साधु-संतों का स्नान शुरू हुआ और सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से स्नान किया। सभी अखाड़े के साधु संतों का स्नान होने के पश्चात फिर जनता ने स्नान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ में जनता के लिए कोई भी रोक-टोक नहीं है, किसी से भी सख्ती नहीं की जाएगी। उन्होंने जनता से निवेदन किया कि कोविड-19 से बचाव की गाइडलाइन का पालन करने के साथ ही मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कुंभ का प्रथम शाही स्नान है। इसे विशेष बनाने के लिए सभी साधु-संतों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि सभी साधु-संत काफी खुश नजर आ रहे हैं साथ ही प्रशासन भी जनता की समस्याएं दूर करने के लिए मुस्तैदी से लगा है। उन्होंने कहा कि दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ के आयोजन के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

महाकुम्भ में संतों के दर्शन मात्र से जीवन होता है सफलः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हरिद्वार में पंचायती अखाड़ा निरंजनी की पेशवाई में शामिल साधु-संतों से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ में संतों के दर्शन मात्र से ही जीवन सफल हो जाता है। संतों के आशीर्वाद से सरकार दिव्य व भव्य और सुरक्षित कुम्भ के आयोजन में पूरी तरह सफल होगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने हरिद्वार भ्रमण के दौरान सर्वप्रथम पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की छावनी एसएमजेएन पीजी कॉलेज में पहुंचे। जहां महाकुम्भ की पहली पेशवाई अखाड़े की ओर से निकलनी थी। मुख्यमंत्री ने यहां पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, अखाड़े के सचिव व मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी, अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद आदि संतों के साथ पूजन कर पेशवाई को रवाना किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री पंचदशनाम जूना भैरव अखाड़ा मायादेवी मंदिर में दर्शन पूजन करने पहुंचे। वहां उन्होंने पूजा अर्चना कर मां से दिव्य व भव्य कुंभ के आयोजन का आशीर्वाद मांगा। उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि आदि से आशीर्वाद लिया। परिसर में ही स्थापित दत्रात्रेय चरण पादुका के साथ ही श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा चरण पादुका का पंच अग्नि अखाड़ा में पूजा की।

यहां से मुख्यमंत्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा कनखल पहुंचे। वहां उन्होंने अखाड़े के महंत रविन्द्रपुरी आदि के साथ धर्मध्वजा का पूजन किया। संतों से आशीर्वाद लेने और कुम्भ की व्यवस्थाओं पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री कनखल स्थित जगदगुरु आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने जगदगुरू शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम से आशीर्वाद प्राप्त किया। वह कनखल के ही शंभू पंचायती अटल अखाड़ा पहुंचे। उन्होंने मंदिर में दर्शन के बाद परिसर में स्थापित धर्मध्वजा का भी पूजन किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री बैरागी कैंप कनखल के अखिल भारतीय पंच निर्मोही अनि अखाडे़ पहुंचे। वहां हनुमान मंदिर में पूजा कर अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज आदि से आशीर्वाद लिया।

इससे पूर्व गुरूकुल कांगड़ी में बने हैलीपैड पहुंचने पर मुख्यमंत्री का मेलाधिकारी दीपक रावत, आईजी कुंभ संजय गुंज्याल, जिलाधिकारी सी. रविशंकर, वरिष्ष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंभ जन्मेजय खंडूड़ी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार सेंथिल अबूदई कृष्ण राज एस, दायित्वधारी डा0 विनोद आर्यां, भाजपा जिलाध्यक्ष डा0 जयपाल सिंह चैहान, जिला महामंत्री विकास तिवारी, नरेश शर्मा, विमल कुमार, उज्जवल पंडित, लव शर्मा आदि ने स्वागत किया।

भगवान बद्रीनाथ की हुई ध्वजा स्थापना, श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

महाकुंभ 2021 में देवडोलियों के स्नानार्थ आगमन के उपलक्ष्य में त्रिवेणी घाट ऋषिकेश में परमाध्यक्ष मोहन सिंह रावत गांववासी पूर्व कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड तथा भद्रकाली मंदिर ढालवाला में सुबोध उनियाल कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड द्वारा श्री बद्रीनाथ जी के पावन ध्वजा की स्थापना की।

श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति द्वारा हरिद्वार महा कुम्भ पर्व में 24 व 25 अप्रैल को आयोजित होने वाले देवत्व स्नान एवं शोभायात्रा के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में देव प्रतीक चिन्हों के साथ देव डोलियां के स्नानार्थ अमृतमय कुम्भ पहुचेगी। जिनके आगमन के उपलक्ष्य में त्रिवेणी घाट ऋषिकेश तथा श्रीभद्रकाली मंदिर ढालवाला मुनि की रेती में भगवान श्री बद्रीनाथ जी की पावन ध्वज स्थापना समारोह का आयोजन किया गया।

समिति के परमाध्यक्ष मोहन सिंह रावत गांववासी व उपाध्यक्ष बंशीधर पोखरियाल द्वारा महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास महाराज, स्वामी विजयानंद महाराज, स्वामी गोपालचार्य महाराज, स्वामी लोकेश दास, स्वामी प्रदीप दास, स्वामी नागेंद्र पूरी, महामंडलेश्वर वीरेंद्रानंद, महंत सध्वागिरी, स्वामी कृष्णकांत महाराज, महंत सुखबीर सिंह, पंडित रवि शास्त्री, प्रदीप शर्मा आदि संत-महात्माओं का माल्यार्पण व अंगवस्त्रम प्रदान कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

इस अवसर पर ध्वजा पूजन, विष्णुसहस्रनाम के पाठ के उपरान्त आमन्त्रित पूज्य संत-महात्माओं द्वारा श्री बद्रीनाथ व श्री हनुमानजी के ध्वज का आरोहण किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता डॉ. धीरेंद्र रांगड़ व पूजन कार्य पं.रमेश पैन्यूली ने किया।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, राजपाल खरोला, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार सिंघल, राज्यमंत्री भगतराम कोठारी, प्रमुख भगवान सिंह पोखरियाल, मुनि की रेती पालिका अध्यक्ष रोशन रतूड़ी, संयोजक संजय शास्त्री, ज्योति सजवाण, गजेन्द्र सिंह कंडियाल, भगवान सिंह रांगड़, हुक्म सिंह रावत, प्यारेलाल जुगलान, जयेन्द्र रमोला, ब्रह्मानंद भट्ट, बीसी पंत, पीताम्बर दत्त पैन्यूली, सुशील नौटियाल, धनसिंह रांगड़, दर्शनलाल आर्य, प्रताप सिंह सजवाण, विनोद शर्मा, चेतन शर्मा, आशाराम व्यास, कमला प्रसाद भट्ट, राहुल शर्मा, सुरेश उनियाल, लक्ष्मी सजवाण, सरोज डिमरी, शाकम्बरी बिष्ट, उषा भंडारी, विमला रावत, द्वारिका बिष्ट, पुष्पा ध्यानी, शीलू पंत, मीना गौड़, गुड्डू जोशी, रुक्मणी रौतेला, कुसुम जोशी, प्रमिला जोशी, तनु रस्तोगी, परमेश्वरी जोशी, मीनाक्षी जोशी, नंदन टोडरिया, रामबल्लभ भट्ट, ज्योति पंवार, मनोहर रौतेला, सुनील थपलियाल, विशाल मणि पैन्यूली, यतेंद्र कंडियाल आदि उपस्थित थे।

त्रिवेणी घाट पर संत समाज ने किया गंगा स्नान, निकाली शोभायात्रा

महाकुंभ के तहत बसंत पंचमी पर्व पर विभिन्न अखाड़ों के साधु संतों ने त्रिवेणी घाट पर आस्था की डुबकी लगाई। इस मौके पर हर हर महादेव के जयकारों से त्रिवेणी घाट गूंजायमान हो उठा। मौके पर साधु समाज ने भगवान शिव के शस्त्र त्रिशुल की भी पूजा अर्चना की।

इससे पूर्व सुबह से ही त्रिवेणी घाट पर जल पुलिस की टीम पूरी तैयारी के साथ तैनात दिखी। मौके पर जवानों ने राफ्ट आदि सुरक्षा किटों के साथ गंगा घाट पर मौजूद रहे।

मौके पर गंगा स्नान की व्यवस्थाओं को परखने के लिए मेयर अनिता ममगाईं, एसडीएम वरूण चैधरी और एसपी देहात स्वत्रंत कुमार ने त्रिवेणी घाट पर निरीक्षण किया। बता दें कि साधु संतों ने स्नान से पहले शहर में भव्य शोभायात्रा भी निकाली। शोभा यात्रा का श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर के स्वागत भी किया। इस दौरान गंगा घाटों पर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस ने वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग भी लगाकर रखी।

त्रिवेणी घाट पर गंगा सभा के सदस्य लगातार एलाउंसमेंट से श्रद्धालुओं को गंगा में किनारे पर ही रहकर स्नान करने के लिए आगाह भी करते रहे। इस खास पर्व पर सैकड़ों स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी गंगा स्नान कर मोक्ष की प्राप्ति की, वही दान कर पुण्य अर्जित किया। एसपी देहात स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से जल पुलिस के जवान भी गंगा घाटों पर तैनात किए गए हैं। महापौर अनीता ममगाईं ने बताया कि स्नान करने में किसी भी प्रकार की श्रद्धालुओं को परेशानी न हो इसके लिए व्यवस्था बनाई गई है।

श्रीभरत भगवान की शोभायात्रा पर उमड़े श्रद्धालु

बसंत पंचमी के पावन पर्व पर नगर यात्रा पर निकली श्री भरत भगवान की डोली नगर में गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों के साथ निकली धर्म यात्रा का श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर जगह-जगह स्वागत किया। कोविड-19 का विशेष ध्यान रखते हुए इस बार की शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने नियमों का भी पालन किया।

मौके पर हजारों लोगों ने हृषिकेश नारायण भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कोविड-19 की वजह से यात्रा में श्रद्धालुओं ने विशेष जगह पर ही रंगोली देखने को मिली। इसी बीच श्रद्धालुओं ने भरत भगवान को भोग लगाकर सुख समृद्धि की कामना की। ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी से ही होली महोत्सव का शुभारंभ हो जाता है आज ही के दिन भरत जी महाराज को रंगों से होली भी खिलाई जाती है और सभी भक्तगण एक-दूसरे पर गुलाल फेंक कर भगवान के साथ होली भी मनाते हैं पितांबर रंग जिसे हम पीला रंग कहते हैं वह भगवान को बहुत ही प्रिय है इसलिए लोग गुलाल चढ़ाकर और भगवान को भेली का भोग बसंत पंचमी में लगाया जाता है।

उधर, बसंत पंचमी के अवसर पर प्राचीन श्री भरत मंदिर परिसर में आयोजित मेले में लोगों ने झूलों और विभिन्न व्यंजनों का भी जमकर लुफ्त उठाया। बसंत पंचमी पर्व पर ब्रह्म मुहूर्त में पौराणिक श्री भरत मंदिर में भगवान श्री नारायण की विधिवत पूजा अर्चना शुरू हुई। दोपहर में आरती पूजन के बाद मंदिर के श्री महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य के परम सानिध्य में बैंड बाजे और पहाड़ के पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र की थाप के बीच श्री भरत भगवान की उत्सव प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा मायाकुंड स्थित गंगा तट पर श्री भरत नारायण भगवान की प्रतिमा को विशेष पूजा अर्चना के बाद मुख्य पुजारी धर्मानंद सेमवाल, रवि शास्त्री द्वारा शालिग्राम भगवान को गंगा में स्नान कराया गया। तत्पश्चात भगवान को नगर भ्रमण कराया गया धर्म यात्रा विभिन्न मार्गो से होती हुई संत समाज ने भगवान नारायण का स्वागत वेद मंत्र स्तुति से किया। इसके बाद मंदिर में भगवान की प्रतिमा को पुनः स्थापित किया गया नगर उत्सव यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया।

इस दौरान यात्रा मार्गों में लोगों ने विभिन्न स्थानों पर खड़े होकर ढोली के दर्शन के लिए घंटों प्रतीक्षा की यात्रा में श्री भरत संस्कृत महाविद्यालय, भरत मंदिर पब्लिक स्कूल, श्री हेमकुंड गुरुद्वारा स्थित गुरमत संगीत विद्यालय, श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज संत समाज स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। धर्म यात्रा में हुए शामिल बसंत उत्सव के संयोजक हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, दीप शर्मा, मंदिर के मुख्य पुजारी धर्मानंद सेमवाल, विनय उनियाल, जयेंद्र रमोला, मधुसूदन शर्मा, पंडित सुरेंद्र दत्त भट्ट, गोविंद सिंह रावत, वचन पोखरियाल, डीबीपीएस रावत, रंजन अंथवाल, सुनील थपलियाल, सुधीर कुकरेती, बंशीधर पोखरियाल, अशोक अग्रवाल, तेजपाल पंवार, नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा, रामकृपाल गौतम, जगमोहन सकलानी, राजीव मोहन मनोज पवार, तेजपाल पंवार, हितेंद्र पंवार, अभिषेक शर्मा, राम चैबे ,धीरेंद्र जोशी आदि उपस्थित थे।

कुंभ महापर्व में स्नान करेगी बाबा महाकाल की पालकी

हरिद्वार में होने जा रहे कुम्भ महापर्व 2021 में उज्जैन से 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा महाकाल की दिव्य पालकी भी शामिल होगी।

यह जानकारी देते हुए श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतिय शोभायात्रा समिति प्रवक्ता डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बताया कि देवडोली समिति के तत्वावधान में तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय उत्तराखंड सरकार के सहयोग तथा सहभागिता से आयोजित होने वाले भव्य एवं दिव्य कुम्भ स्नान एवं शोभायात्रा में राजाधिराज बाबा महाकाल की दिव्य रजत पालकी प्रथम बार शामिल होने जा रही है।

रमेश चंद्र शर्मा एवं विश्वजीत सिंह राठौर के नेतृत्व में पुजारी सहित 15 सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल 24 अप्रैल को हरिद्वार पहुँचेगा।

चैत्र शुक्ल त्रयोदशी सर्वार्थ अमृत सिद्धयोग रविवार 25 अप्रैल 2021 को दक्ष प्रजापति कनखल से हर की पैड़ी तक समस्त डोलियों के साथ सेमनागराजा भगवान श्रीकृष्ण जी तथा परम् वैकुण्ठ धाम श्री बद्रीनाथ जी के ध्वज के नेतृत्व में पर्वतीय क्षेत्र के पारम्परिक वाद्य यंत्र, ढोल-दमाऊ, रणसिंहा आदि के साथ भव्य शोभायात्रा निकलेगी। समिति के परमाध्यक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी के संयोजन में शोभायात्रा ब्रह्मकुंड में स्नानोपरांत पंतदीप के पंडाल में एकत्र होगी। जहां बाबा महाकाल के मनमहेश स्वरूप का दिव्य दर्शन व पूजन सन्त महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं प्रशासन द्वारा किया जायेगा।

देवडोलियों के आयोजन को लेकर हुई बैठक

श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति द्वारा कुंभ महापर्व 2021 में देव डोलियों के दिव्य,भव्य एवं सुरक्षित स्नान व शोभायात्रा के आयोजन को लेकर बैठक हुई। इस दौरान देवी देवताओं के आमंत्रण को लेकर दायित्व बांटे गए।

भरत मंदिर, झण्डा चैक में आयोजित बैठक की शुरूआत स्वस्ति वचन से हुई। महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में मङ्गल गीत प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समिति के परमाध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहन सिंह रावत गॉंववासी ने कहा कि यह कार्यक्रम हमारी आस्था एवं विश्वास का प्रतीक है। जो हमारी सांस्कृतिक विरास्त एवं लोकपरम्परा को संरक्षित रखें हुए है। उन्होंने कहा कि इस पुनीत कार्यक्रम को हमने दिव्य एवं अविस्मरणीय बनाना है। उपाध्यक्ष बंशीधर पोखरियाल ने सभी प्रतिनिधियों को उनके दायित्व की जानकारी दी।

संजय शास्त्री, दीप शर्मा (पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष) ने कहा कि योगनागरी ऋषिकेश व धर्मनगरी हरिद्वार में होने वाले महा उत्सव को से ऐतिहासिक बनाया जायेगा। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने किया।

बैठक में सभी ने तय किया कि कोविड-19 को देखते हुए मास्क, सैनिटाइजर की व्यवस्था के साथ ही सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया जायेगा। वहीं, विभिन्न क्षेत्रों से पधारे प्रतिनिधियों को दायित्व सौपते हुए देवी देवताओं के आमंत्रण हेतु गजेन्द्र सिंह कंडियाल, भगवान सिंह रांगड़ एवं द्वारिका प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन किया गया। जो टिहरी, उत्तरकाशी, प्रतापनगर, पौड़ी, चकरोता, रुद्रप्रयाग, चमोली, कोटद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा आदि के देवस्थानों पर जाकर संपर्क करेगी। मांगलिक गीत की सुंदर प्रस्तुति दर्शनी भंडारी,शशि कण्डारी, सुरेश उनियाल एवं मीना मंदवाण ने दी।

श्रीभरत मंदिर के महंत वत्सल महाराज व हर्षवर्धन शर्मा ने 24 अप्रैल को आगन्तुक देवडोली का श्री भरत मन्दिर परिवार द्वारा मंदिर प्रंगङ्ग में सम्मान व स्वागत की सहमति प्रदान की।
बैठक नागेन्द्र गिरी महाराज, कुँवर ठाकुर भवानी प्रताप, पूर्व राज्यमंत्री उषा रावत, आशाराम व्यास, रंगकर्मी बलदेव राणा, हर्षमणी व्यास, लक्ष्मी प्रकाश सेमवाल,पुष्पा ध्यानी, विजयपाल रांगड़, सुनील कोठियाल, आशीष कुकरेती आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सरोज डिमरी, विमला रावत, बी सी पंत, लक्ष्मी प्रसाद सेमवाल, उषा भंडारी,सूरत सिंह रौतेला, रमेश पैन्यूली, सुरेंद्र भंडारी, निर्मला शर्मा, विनय उनियाल,विशाल मणि पैन्यूली, विजय प्रसाद मैठानी, यतेंद्र कंडियाल आदि उपस्थित थे।

इस्लामिक राष्ट्र गाम्बिया से सीख लें भारतवासीः स्वामी आनंद

भरत मन्दिर सभागार में हिन्दू पंचायत आज सम्पन्न हुई। शंकराचार्य परिषद द्वारा आयोजित इस पंचायत की अध्यक्षता करते हुए परिषद के अध्यक्ष श्री स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज ने कहा कि दुनिया में जहां-जहां मुस्लिमों की जनसंख्या 50 प्रतिशत से ऊपर हुई, वह देश इस्लामिक राष्ट्र बन गए। अभी कुछ महीने पहले ही गाम्बिया नाम का गैर-इस्लामिक देश 52 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या होते ही विश्व का 56वां इस्लामिक राष्ट्र बन गया है। भारतवासियों को इससे सबक लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिन्दू पंचायतों का आयोजन भारत को हिन्दू गणराज्य बनाने के लिए किया गया है। हम चाहते हैं कि यह राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र बने जिसका संविधान भगवदगीता बने। उन्होंने भारतीय धर्मतन्त्र को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के लिए आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इसके पूर्व उन्होंने विशिष्ट अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर पंचायत सभा का उद्घाटन हुआ। मेयर अनिता ममगाई और पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा ने अतिथियों एवं उपस्थित जनसमुदाय का अभिनन्दन किया। मेयर ममगाई ने कहा कि किसी अभियान को जब मजबूत नेतृत्व मिल जाता है तब आधा कार्य पहले ही हो चुका होता है। आज स्पष्ट बोलने वाले व्यक्ति बहुत कम मिलते हैं, उन्होंने स्वामी आनन्द स्वरूप की गणना देश के मुखर, स्पष्टवादी व बहादुर संन्यासियों में की।

प्रख्यात साहित्यकार एवं इस्लाम विशेषज्ञ विनय कृष्ण चतुर्वेदी ‘तुफैल’ ने इस्लाम की विस्तृत व्याख्या की और कहा कि कुछ सदी पहले भारत के आसपास के अनेक देश भारत (हिन्दुस्थान) का अंग थे। लम्बे संघर्ष के बाद आजाद भारत में साल 1947 में पुनः हम बंटे, और हमारा हिस्सा इस्लामिक राष्ट्र बन गया, जिसका नाम पाकिस्तान रखा गया। उस समय पश्चिम पाकिस्तान में हिन्दुओं की संख्या 24 प्रतिशत थीं, आज वहां हिन्दू जनसंख्या मात्र 1 प्रतिशत रह गई है। इसी तरफ पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांगलादेश की जनसंख्या 29.7 से घटकर 8 प्रतिशत रह गई है। दुःख है कि हमारे भारतवासी इस पर चिन्ता व चिन्तन नहीं करते। आज लोकतन्त्र इस्लाम को बढ़ाने और अत्याचार करने का टूल बना हुआ है।

भाग्योदय फाउण्डेशन के अध्यक्ष व संस्थापक आचार्य राम महेश मिश्र ने मुगलकाल से लेकर अंग्रेजों के काल तक के प्रमुख क्रांतिवीरों को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हीं के समर्पण एवं बलिदान के कारण आज हम भारतवासी आजादी की सांस ले रहे हैं। उन्होंने सभी हिन्दू जातियों व समूहों के एकीकरण पर जोर दिया।

इस अवसर पर राज्यमंत्री भगत राम कोठारी, संदीप गुप्ता, कृष्ण कुमार सिंघल, राजपाल खरोला, भरत मन्दिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, वरुण शर्मा, हर्षवर्धन शर्मा, मधु जोशी, रीना शर्मा, विजय लक्ष्मी शर्मा, नर्मदा सेमवाल, एडवोकेट संजय दरमोड़ा, उत्तराखण्ड उद्योग व्यापार संघ के अध्यक्ष इन्द्र प्रकाश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

पंचायत सभा का समापन शंकराचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रवि शास्त्री के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। शंकराचार्य परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोनिका आनन्द, शंकराचार्य परिषद के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष राजकिशोर यादव, परिषद के न्यासी व उद्योगपति नरेन्द्र खड़का, शंकराचार्य गुरुकुल संभाग के प्रतिनिधि डाॅ. सूरज शुक्ल, भाग्योदय फाउण्डेशन के न्यासी सचिव दिलीप कुमार नायक, एडवोकेट सुनीता शर्मा आदि उपस्थित रहे।

लोकपरंपरा व संस्कृति के रंगों से सराबोर हुई कुंभनगरी

हरिद्वारः कुंभ 2021 के लिए तैयार हो रही धर्म नगरी इस बार लोक परंपराओं व संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठी है। यहां दीवारों पर उकेरा गया धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं व पौराणिक सांस्कृति का वैभव भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा। सरकार की ओर से धर्मनगरी को सजाने-संवारने के साथ ही स्वच्छ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि “राज्य सरकार दिव्य और भव्य कुम्भ के लिए प्रतिबद्ध है। प्रयास किए जा रहे हैं कि कुंभ में यहां आने वाले करोड़ों श्रद्धालु उत्तराखण्ड की लोक व सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू हों।“

प्रदेश में देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व संवर्धन के लिए सरकार गम्भीरता से प्रयास कर रही है। हरिद्वार कुंभ-2021 को भी इसके लिए मुफीद मौका माना जा रहा है। इसके लिए चित्रकला को जरिया बनाया गया है। कुंभ क्षेत्र में सरकारी भवनों समेत पुल, घाट आदि की दीवारों को धार्मिक मान्यताओं के पौराणिक चित्रों व संस्कृति के रंग बिखेरते चित्रों से सजाया गया है। इसके पीछे भी मंशा यही है कि देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं के मन में आस्था भाव का तो जागृत हो ही वह यहां की परंपरा, संस्कृति और पौराणिक विरासत से भी रूबरू हो सकें। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के ‘पेंट माई सिटी’ कैम्पेन से धर्म नगरी की फिजा ही बदल दी गई है। यहां दीवारों व खाली स्थानों पर देवभूमि की परंपराओं और संस्कृति के बखरे पड़ें रंग देखने लायक है। कहीं देवी-देवताओं, धार्मिक परम्पराओं के तो कहीं लोक संस्कृति के चित्र सजीवता लिए हुए हैं। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कुंभ मेला क्षेत्र को चित्रकला से सजाने में विभिन्न संस्थाओं का सहयोग रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप मेक माय सिटी कैंपेन से धर्म नगरी में परंपराओं और संस्कृति के रंग भी देखने को मिलेंगे। कुंभ तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस बार का कुंभ दिव्य और भव्य होगा।