कोरोना को हराने के लिए सर्तकता और बचाव जरुरीः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि कोविड-19 को लेकर सर्विलांस, कान्टेक्ट ट्रेसिंग, सैम्पल टेस्टिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट और जन जागरूकता, इन पांच बातों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कोविंड-19 से लड़ाई के लिये हर प्रकार की तैयारी की गई है। स्थिति काफी कुछ नियंत्रण में होने पर भी हम पूरी तरह सतर्क हैं। राज्य में कोविड के दृष्टिगत हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया गया है। टेस्टिंग लैब, आईसीयू, वेंटिलेटर, पीपीई किट, एन 95 मास्क, आक्सीजन सपोर्ट की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। नियमित सर्विलांस सुनिश्चित किया जा रहा है। घर-घर जाकर कोरोना जैसे संदिग्ध लक्षणों वाले लोगों का पता लगाया जा रहा है। इसमें आशा और आंगनबाङी कार्यकत्रियों द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। लगभग सभी जिलों में सर्विलांस का एक राउंड पूरा किया जा चुका है। कई जिलों में दूसरा तो कुछ में तीसरा राउंड चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेम्पल टेस्टिंग में पहले की तुलना में काफी सुधार किया गया है। कोरोना संक्रमण के शुरूआत में राज्य में एक भी टेस्टिंग लेब नहीं थी जबकि अब उत्तराखंड में 5 सरकारी और 2 प्राईवेट लेब में कोविड-19 संक्रमण के सैम्पल की जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त एनसीडीसी दिल्ली व पीजीआई चंडीगढ़ में भी सेम्पल टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। सेम्पल टेस्टिंग की सुविधा जिला स्तर पर कराने के लिए सभी जिलों को ट्रूनेट मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं। प्रदेश के चिकित्सालयों में फ्लू क्लिनिक के माध्यम से आ रहे समस्त श्वास व इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले मरीजों का कोविड-19 संक्रमण जांच के लिए सेम्पल लिए जा रहे हैं। सेम्पल टेस्टिंग की संख्या बढाने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। प्रति मिलियन जनसंख्या पर 6408 सेम्पल लिए जा रहे हैं। जल्द ही इसे देश के औसत के बराबर कर लिया जाएगा। देहरादून व नैनीताल दो जिलों में प्रति मिलियन सेम्पल राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। देहरादून जिले का औसत तो राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। अन्य जिलों को भी सेम्पल टेस्टिंग बढाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जरूरी संसाधन बढाए जा रहे हैं।
प्रदेश में बनाए गए डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में हर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वर्तमान में राज्य में 325 कोविड केयर सेंटर स्थापित हैं। इनमें कुल बेड क्षमता 22890 है जिनमें से 289 बेड उपयोगरत हैं जबकि 22601 बेड रिक्त हैं। इस प्रकार कोविड केयर सेंटर में पर्याप्त संख्या में बेड की उपलब्धता है।
राज्य में कोविड फेसिलिटी में आक्सीजन सपोर्ट बेड की संख्या 15 मई को 673 थी जो कि अब बढ़कर 1126 हो गई है। कोविड फेसिलिटी में आईसीयू बेड की संख्या 15 मई को 216 से बढाकर 247 और वेंटिलेटर की संख्या 116 से बढाकर 159 कर दी गई है। कोविड केयर सेंटर में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक तरफ सैम्पल टेस्टिंग में लगातार वृद्धि हो रही है वहीं रिकवरी रेट और डबलिंग रेट भी राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है और इनमें लगातार सुधार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह से राज्य में सतर्कता बरती जा रही, उम्मीद है कि हम जल्द ही हालात पर नियंत्रण पा लेंगे। सभी जिलों में अधिकारी और कर्मचारी अपनी पूरी सजगता के साथ मिशनरी मोड में काम कर रहे हैं। उच्च स्तर से भी लगातार मानिटरिंग की जा रही है। जहां कमियां पाई जाती हैं उन्हें तत्काल दूर किया जाता है। इन लगभग चार माह में प्राप्त अनुभव से प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने किसके लिए कहा, सोशल मीडिया के नाम पर कलंक है, पढ़े पूरी खबर

(एनएन सर्विस)
राज्य में अब सोशल मीडिया की गतिविधियां पर खुफिया विभाग की नजर होगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने खुफिया तंत्र से जुड़ी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वह सोशल मीडिया पर निगाह रखे। यह जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत से बातचीत के दौरान कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार सोशल मीडिया असामाजिक हो जाता है। उसमें तमाम तरह के ऐसे लोग आ गए हैं जिन्हें देखकर कई बार लगता है कि वो सोशल मीडिया के नाम पर कलंक हैं। वे अपराध कर रहे हैं। इसलिए खुफिया विभाग को सोशल मीडिया पर निगाह रखने को कहा गया है। वे ये देखेंगे कि कहीं किसी का कोई खास एजेंडा तो नहीं है। खुफिया विभाग की उन पर लगातार नजर लगी रहनी चाहिए। जो अच्छे लोग हैं, उन्हेें शाबाशी मिलनी चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के मामलों की समयबद्ध जांच की वकालत की। विजिलेंस विभाग को गोपनीय के स्थान पर खुले रूप से जांच करने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जांच का फायदा तभी होता है, जब वह समयबद्ध हो। अगर वह समयबद्ध नहीं होती है तो कई बार उसके परिणाम भी प्रतिकूल हो जाते हैं। जो अपराधी होता है, वो अपने बचने के तमाम तौर तरीके निकाल लेता है। इसलिए जांच समयबद्ध होनी चाहिए, तभी उस पर प्रभावी कार्रवाई हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि करप्शन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि जब मैंने शपथ ली थी, तभी मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कह दिया था कि हम जीरो टालरेंस की नीति पर काम करेंगे। यह तब तक रहेगी जब तक हम हैं। अगर हमारे पास कोई भी तथ्यात्मक जानकारी आती है, उस पर एक्शन करेंगे। हमने एक्शन किए हैं, आगे भी करेंगे।

एक्टिव मामलों में कमी लेकिन हम और सतर्क रहना होगाः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि कोविड-19 के एक्टीव मामलों में कमी होने पर भी लगातार सावधान रहने की जरूरत है। प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की शिथिलता न हो। शनिवार को मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम तथा बचाव के लिए किए जा रहे कार्यों की सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि हमारी रिकवरी रेट 81 प्रतिशत से अधिक हो गई है। मृत्यु दर को कम करने पर विशेष ध्यान देना होगा। गम्भीर मामलों पर जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्वयं लगातार नजर रखें। ऐसे मामलों में अविलम्ब रेस्पोंस सुनिश्चित किया जाए। लगातार सर्विलांस किया जाए और संदिग्ध मामलों में सेम्पलिंग जरूर की जाए।

एक्टीव मामलों में कमी आई, पर किसी तरह की ढ़िलाई न आए
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले लगभग 4 माह में कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए काफी काम किया गया है। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में प्रदेश में कोरोना का रिकवरी रेट 81 प्रतिशत से अधिक है और यह निरंतर बढ़ रहा है। हमारे यहां एक्टीव मामलों की संख्या 500 से भी कम हो गई है। परंतु अभी आराम का समय नहीं है। सतत सतर्कता बनाए रखनी है। कान्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारेंटाईन सेंटरों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डेथ ऑडिट रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित की मृत्यु के कारणों का विश्लेषण कर देखा जाए कि कहां-कहां सुधार किए जाने की जरूरत है। क्लिनिकल मैनेजमेंट में गम्भीरतम मामलों पर उच्च स्तर से मॉनिटरिंग की जाए।

आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को समय पर मिले मानदेय
आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री आदि फ्रंटलाईन वर्कर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में हमारे प्रमुख योद्धा हैं। इनके मानदेय के भुगतान में किसी प्रकार का विलम्ब नहीं होना चाहिए। साथ ही इन्हें फेस शील्ड, सेनेटाईजर आदि उपलब्घ करवाना सुनिश्चित किया जाए।

मास्क व फिजीकल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। आई.सी.यू., वेंटिलेटर, टेस्टिंग मशीन व लेब आदि सुविधाओं में भी काफी वृद्धि हुई है। लोगों को लगातार जागरूक करने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क व फिजीकल डिस्टेंसिंग का पालन सख्ती से कराया जाए। कोविड-19 को लेकर भ्रामक व गलत समाचार प्रसारित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कोराना से ठीक हुए लोगों के अनुभवों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में साझा किया जाए ताकि आम जन में इसके प्रति जागरूकता आए।

बुजुर्गो और गम्भीर बीमार व्यक्तियों के हेल्थ स्टेटस की लगतार मॉनिटरिंग
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि कोविड-19 को लेकर किसी भी प्रकार का निर्णय बहुत सोच समझकर लिया जाता है। प्रदेश में स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। अन्य बहुत से प्रदेशों से हमारी स्थिति बेहतर है। परंतु अभी भी हमारे प्रयासों में किसी प्रकार की ढ़िलाई नहीं आनी चाहिए। कान्टेक्ट ट्रेसिंग में कमी न रहे। कोविड-19 के प्रति संवेदनशील बुजुर्गो, छोटे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को टार्गेट करते हुए उनके हेल्थ स्टेटस को लगातार मॉनिटर किया जाए। जो भी डाटा प्राप्त होता है, जिलाधिकारी भी उसका विश्लेषण कर देखें कि उनके जिले में कहां कमियां रही हैं। उनमें सुधार किया जाए। कोविड-19 के साथ ही डेंगू पर भी ध्यान देना है। बरसात के सीजन को देखते हुए भी सभी तैयारियां कर ली जाएं।

विभिन्न मानकों पर राज्य की स्थिति बेहतर
सचिव अमित नेगी ने बताया कि राज्य में कोविड-19 के कुल एक्टीव केस 500 से भी कम रह गए हैं। पिछले सात दिन में कोरोना की वृद्धि दर 0.56 प्रतिशत है जबकि भारत में यह 1.28 प्रतिशत है। उत्तराखण्ड में पॉजिटीविटी रेट 4.68 प्रतिशत है और देश में औसत पॉजिटीविटी रेट 6.73 प्रतिशत है। राज्य में कुल पॉजिटिव मामलों में से 89 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में और 11 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में पाए गए हैं। सेम्पलिंग में भी पहले की तुलना में लगातार बढ़ोतरी हुई है। राज्य की डबलिंग रेट 57.39 दिन है जबकि देश की डबलिंग रेट 23.52 दिन है।

आईसीयू, वेंटीलेटर व आक्सीजन सपोर्ट की पर्याप्त उपलब्धता
कोविड केयर सेंटरों में वर्तमान में 22601 रिक्त बेड उपलब्ध हैं। कोविड फेसिलिटी में 1126 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 247 आईसीयू बेड और 159 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। जिलों को सेम्पलिंग के लिए 16 ट्रू-नेट मशीन उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं। जिलों की आवश्यकता के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

कान्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए तीन राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम कार्यरत
आईजी संजय गुन्ज्याल ने बताया कि प्रदेश में कान्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए तीन कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं। देहरादून, उत्तरकाशी व टिहरी के लिए देहरादून कंट्रोल रूम, हरिद्वार, पौड़ी, चमोली और रूद्रप्रयाग के लिए हरिद्वार कंट्रोल रूम और कुमायूं मण्डल के सभी जिलों के लिए रामनगर कंट्रोल रूम कार्य कर रहा है। सभी 13 जिलों में कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए बीआरटी और सीआरटी सक्रिय हैं। हर जिले में इसके लिए एक नोडल अधिकारी भी तैनात है।

बैठक में आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, आयुक्त कुमायूं अरविंद सिंह ह्यांकि, सचिव डा. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव युगल किशोर पंत, महानिदेशक स्वास्थ्य डा. अमिता उप्रेती सहित सभी जिलाधिकारी व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में फ्लोटिंग टरबाइन से अवसर तलाशने को कहा

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य की नदियों एवं नहरों में फ्लोटिंग टरबाइन के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सोलर व विंड पावर की भांति ऊर्जा उत्पादन की यह विधि राज्य की नहरों एवं नदियों के अनुकूल होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में नदियों में इस प्रकार के फ्लोटिंग टरबाइन ऊर्जा उत्पादन के साथ ही खेतों की सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति में मददगार हो सके इसकी भी संभावनाएं तलाशी जाएं, इससे वर्षा जल पर आधारित खेतों की सिंचाई की निर्भरता कम होगी। उन्होंने इसके लिए स्थानीय लोगों को भी प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नदियों एवं नहरों का राज्य हित में तकनीकी के माध्यम से ऊर्जा एवं पर्यटन की दृष्टि से बेहतर उपयोग समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस दिशा में नदियों व नहरों की क्षमता के उपयोग लागत आदि का भी आधुनिक तकनीकी दक्षता के साथ आकलन करने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर इस संबंध में प्रस्तुतीकरण भी प्रस्तुत किया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री के तकनीकी सलाहकार नरेंद्र सिंह, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा, तीनों ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशकों के साथ ही अन्य संस्थानों के अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से राज्य के लोगों को मिल रहा बड़ा फायदाः सीएम

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवम्बर माह तक बढ़ाए जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना को 5 माह बढ़ाए जाने से देश के 80 करोड़ गरीबों को बड़ी राहत मिलेगी। आने वाला समय त्यौंहारों का है। प्रधानमंत्री जी की इस घोषणा से गरीब भाई-बहन, खुशी के साथ त्यौहार मना सकेंगे।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में अप्रैल-मई और जून माह में हर महीने 80 करोड़ गरीबों को प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं या 5 किलो चावल जबकि प्रति परिवार 1 किलो दाल प्रति माह निशुल्क उपलब्ध कराई गई। अब इस योजना को जुलाई से नवम्बर तक बढ़ाने से सरकार के इस संकल्प को बल मिलेगा कि कोई गरीब भूखा न सोए। योजना का 5 माह और विस्तार करने से 90 हजार करोड़ रूपए खर्च होंगे जबकि पहले के तीन माह भी जोड़ दिए जाएं तो इस योजना पर कुल खर्च 1 लाख 50 हजार करोड़ रूपए बैठता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से उत्तराखण्ड के लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। अब नवम्बर तक इस योजना को बढ़ाने से राज्य के इन परिवारों को राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी हम सभी के अभिभावक हैं। देश हित में उन्होंने हमेशा सही समय पर सही फैसले लिए। उनके फैसलों के केंद्र बिंदु में इस देश के गरीबों का कल्याण होता है। लॉकडाउन को लेकर उन्होंने सही समय पर साहसिक फैसला लिया जिसके फलस्वरूप लाखों लोगों की जान बची।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 130 करोड़ भारतीय अपने प्रधानमंत्री के साथ हैं। हम सभी को मिलजुलकर आगे बढ़ने का संकल्प लेना है। प्रधानमंत्री जी देशवासियों के हित में जो भी सम्भव है, कर रहे हैं। हमें भी अपने प्रधानमंत्री का साथ देना है। हमें केवल इतना करना है कि कोरोना को लेकर तमाम सावधानियां बरतनी हैं। मास्क का अनिवार्यता से प्रयोग करना है, दो गज की दूरी बनाए रखनी है और हाथों को नियमित रूप से धोना है। जब तक कोरोना की वेक्सीन तैयार नहीं होती तब तक यही इसकी दवा है। उन्होंने कहा कि अनलॉक-2 में राज्य में काफी सहूलियतें दी जा रही हैं, प्रदेशवासियों के लिये चारधाम यात्रा खोल दी गई है। होटल व्यवसाय को गति देने के लिये पर्यटक प्रदेश में आकर होटल में ठहर सकते हैं। इसके लिये उनका 48 घंटे पूर्व का कोरोना टेस्ट नेगेटिव होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के दृष्टिगत प्रदेश में सभी चीजों का आंकलन किया जा रहा है। इस महामारी के कारण सामाजिक आर्थिक एवं मानसिक दिक्कतें भी उत्पन्न हुई है। हम सबको इसका सतर्कता से सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रदेश में कोरोना के मामलों में ठहराव व गिरावट आयी है। इस दिशा में हम सचेत हैं तथा राज्य में आने वालों की सतत रूप से चेकिंग की जा रही है तथा उनकी ट्रैवल हिस्ट्री देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस महामारी का सामना करने के लिये हमारे डाक्टर तथा फ्रंट लाइन वर्कर सजगता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए कृषि ही मददगारः सुबोध उनियाल

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 26 वीं बैठक में उत्तराखण्ड के उद्यान, कृषि एवं रेशम विकास विभाग मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, परन्तु अभी भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। कृषि उत्पादों का निर्यात भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नई नई फसलों को विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को इंश्योरेंस के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में छोटे छोटे किसानों की संख्या अधिक है। उनको ध्यान में रखते हुए योजनाओं को तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों में सिंचाई के दायरे को बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। नए अध्यादेशों एवं फसल बीमा योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को पहुंचे इसके प्रयास किए जाएं, ताकि हमारे किसान आत्मनिर्भर भारत बनाने में अपना योगदान दें सकें।
उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में कृषि महिला आधारित है, इसलिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वुमन फ्रेंडली खेती की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैविक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए वनों के वेस्ट मटीरियल से खाद बनाने हेतु योजनाओं पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु सब्जी और फल फसलों में कीट नियंत्रण के लिए जैविक शोध कार्यक्रम चलाए जाने पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने राज्य के उत्पादों जैसे रेड राईस, राजमा, मंडुवा आदि की उन्नत किस्मों पर भी अनुसंधान किए जाने की आवश्यकता बताई।
कृषि मंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के साथ ही कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाले बीजों पर भी रिसर्च किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्तर्राष्ट्रीय बॉर्डर क्षेत्रों हेतु उचित जलवायु अनुसार फसलों पर अधिकाधिक शोध कराए जाएं ताकि सीमांत क्षेत्रों के किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़े। इससे पलायन भी रोका जा सकेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में नींबू वर्गीय फलों हेतु कल्मी पौध रोपण के लिए आईसीएआर एवं उद्यान विभाग उत्तराखण्ड द्वारा नींबू वर्गीय फलों के नेटवर्क परियोजना को लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने राज्य में आलू उत्पादन की अपार सम्भावनाओं के दृष्टिगत केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड राज्य में भी क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की भी मांग की।
इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम एवं अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

राज्य में संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा

(एनएन सर्विस)
कोरोना के मरीजों की संख्या भले ही बढ़ रही हो। लेकिन उत्तराखंड में इन मरीजों के ठीक होने की संख्या में दिन प्रतिदिन तेजी से सुधार हो रहा है। सोमवार को छह गुणा से अधिक 93 मरीज स्वस्थ होकर अस्पतालों से डिस्चार्ज हुए। रिकवरी दर लगातार अच्छा संकेत दे रही है। सोमवार को स्वस्थ हुए मरीजों का प्रतिशत 74.40 पहुंच गया। प्रदेश में अभी तक कोरोना के 2837 मामले आए हैं। जिनमें अब तक 2111 स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
हालांकि अभी भी राज्य के विभिन्न अस्पतालों व कोविड केयर सेंटरों में 664 मरीज भर्ती हैं। यह संख्या स्वस्थ हुए मरीजों से एक तिहाई से भी कम है। कोरोना पॉजिटिव 23 मरीज राज्य से बाहर जा चुके हैं, जबकि 39 की अब तक मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को 837 सैंपलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इनमें 823 निगेटिव और चैदह मामले पॉजिटिव हैं। देहरादून में दस और लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें एम्स ऋषिकेश के तीन नर्सिंग ऑफिसर भी शामिल हैं। इसके अलावा ऋषिकेश के मंसादेवी, इंदिरा नगर, रेशम माजरी, मोतीचूर और मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व बिजनौर निवासी एक-एक व्यक्ति की भी रिपोर्ट पॉजिटिव है। इनमें छह एम्स की आइपीडी-ओपीडी में आए मरीज और एक मरीज का अटेंडेंट है।
उत्तराखंड में पिछले दो-तीन दिन से कम संख्या में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं संत्मित मरीजों के ठीक होने की रफ्तार भी लगातार बढ़ रही है। जितने मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, उसके तीन गुणा ठीक हो चुके हैं। प्रवासियों की आमद बढ़ने के साथ जो संक्रमण दर एकाएक बढ़ी थी उसमें भी गिरावट दिखने लगी है। मौत का बढ़ता आंकड़ा जरूर चिंता का सबब बन रहा है। बता दें, उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला पंद्रह मार्च को सामने आया था।

चारधामः उत्तराखंड के लोग अब एक जुलाई से कर सकेंगे दर्शन

(एनएन सर्विस)
प्रदेश सरकार ने केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में एक जुलाई से प्रदेश में रह रहे लोगों को दर्शन करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए ऑनलाइन पास की व्यवस्था रहेगी। यदि कोई व्यक्ति दूसरे राज्य से आया है तो उसे क्वारंटीन के सभी दिशानिर्देशों का पालन करने के बाद ही चारधाम में दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। चारों धामों में दर्शन के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही सैनिटाइजर रखने के साथ ही मास्क पहनना अनिवार्य होगा। 

एक रात ठहरने की मिली अनुमति
बोर्ड की ओर से जारी एसओपी के अनुसार दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु को धाम के विश्राम गृह में एक रात ही ठहरने की अनुमति होगी। आपातकालीन स्थिति, सड़क बाधित होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में ही जिला प्रशासन की अनुमति से इसे बढ़ाया जा सकेगा। जिस लोगों के धाम क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, ढांबे और अन्य परिसंपत्तियां हैं, वे मरम्मत कार्य के लिए प्रशासन की अनुमति से जा सकेंगे और एक दिन से ज्यादा ठहर सकेंगे। 

बुुजुर्ग और बच्चों के लिए नियम
कोरोना संक्रमण को देखते हुए चारधाम में 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और 10 साल से कम आयु के बच्चों को जाने की अनुमति नहीं होगी। 

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इसका रखना होगा ध्यान 
कोरोना संक्रमण को देखते हुए धामों के मंदिरों में बाहर से लाए गए प्रसाद और चढ़ावे पर रोक रहेगी। मूर्तियों को छूने पर भी प्रतिबंधित रहेगा। मंदिर में प्रवेश से पहले हाथ और पैर धोना अनिवार्य होगा। 

सचिवालय में विजिटर्स को मिली अनुमति
एक जुलाई से सचिवालय में आगंतुकों (विजिटर्स) को प्रवेश मिल सकेगा। पहले चरण में एक दिन में अधिकतम 50 लोगों को ही प्रवेश मिल पाएगा। निजी सचिवों की ऑनलाइन मंजूरी के बाद प्रवेश पत्र आगंतुकों को जारी किए जाएंगे। अपर मुुख्य सचिव (सचिवालय प्रशासन) राधा रतूड़ी ने इस संबंध में आदेश जारी किए। कोविड-19 महामारी की रोकथाम के चलते मई और जून में सचिवालय प्रशासन ने सचिवालय में आगंतुकों के प्रवेश को पहले सीमित किया था, उसके बाद उनके प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। यह रोक अनलॉक 1.0 में भी जारी रही, लेकिन अब अनलॉक 2.0 में प्रदेश सरकार के स्तर पर दी जा रही ढील के क्रम में सचिवालय प्रशासन ने भी सचिवालय में प्रवेश की व्यवस्था लचीली कर दी है।

वन भूमि हस्तांतरण के मामलों में समय के साथ तेजी लाने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि बैठकों में लिए गए निर्णयों की अनुपालना समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जानी चाहिए। कार्यवाही केवल पत्राचार तक ही सीमित न रहे बल्कि इसका आउटपुट दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री, सचिवालय में उत्तराखण्ड राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड की 15 वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी बैठक का कार्यवृत्त उसी दिन बन जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनएच 72-ए उत्तराखण्ड के लिए बहुत अधिक महत्व का है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, स्वीकृतियों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं में किसी प्रकार की देरी न हो। कार्बेट रिजर्व व राजाजी टाईगर रिजर्व में गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन का काम टाईमबाउंड तरीके से हो। राजाजी टाईगर रिजर्व के अंतर्गत चैरासी कुटिया का विकास इंटीग्रेटेड एप्रोच के आधार पर किया जाए। इसकी कार्ययोजना में वन्यजीवन, आध्यात्मिकता, संस्कृति सहित सभी पहलुओं का समावेश किया जाए। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में स्थित गरतांग गली ट्रेल के मार्ग का पुनरूद्धार, इसकी मौलिकता को परिरक्षित रखते हुए किया जाए। आरक्षित वन क्षेत्रों में टोंगिया ग्रामों को राजस्व ग्रामों का दर्जा देने और संरक्षित क्षेत्रों से ग्रामों के विस्थापन के बाद वन भूमि पर बसाये गए नए स्थलों के नवीनीकरण और डिनोटिफिकेशन का काम शीघ्र किया जाए।
बैठक में गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विभिन्न मार्गों के निर्माण के लिए प्रस्तावों को अनुमति के लिए राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को भेजे जाने पर सहमति दी गई। इसी प्रकार सौंग बांध परियोजना के निर्माण से संबंधित वन भूमि हस्तांतरण और जौलीग्रान्ट हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के लिए वन भूमि हस्तांतरण के लिए अनुमति का प्रस्ताव भी राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को भेजा जाएगा।
बैठक में बताया गया कि कार्बेट टाईगर रिजर्व व राजाजी टाईगर रिजर्व में बाघों और जंगली हाथियों की धारण क्षमता का अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान से कराने के लिए प्रस्ताव प्राप्त हो गया है। इसी प्रकार गैण्डे के रिइन्ट्रोडक्शन के लिए साईट सूटेबिलिटी रिपेर्ट मिल गई है। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के रैशनलाईजेशन के लिए संबंधित जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के प्रतिनिधि की एक समिति का गठन कर लिया गया है।
बैठक में जानकारी दी गई कि 6 जून से 8 जून तक तीन दिन उत्तराखण्ड में हाथियों की गणना की गई। इसमें पाया गया कि राज्य में कुल 2026 हाथी हैं। वर्ष 2012 में 1559 जबकि 2017 में 1839 हाथी थे। इस प्रकार वर्ष 2017 से हाथियों की संख्या में 10.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसी प्रकार 22 से 24 फरवरी 2020 में जलीय जीवों की गणना की गई। इसमें पाया गया कि राज्य में 451 मगरमच्छ, 77 घड़ियाल और 194 ऊदबिलाव हैं। बताया गया कि वर्ष 2020 से 2022 तक राज्य में स्नो-लैपर्ड की जनसंख्या का आंकलन भी किया जाएगा। राज्य के 23 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में स्नो-लैपर्ड हैं।
बैठक में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत, विधायक धन सिंह नेगी, दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश राठौर, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, सचिव दिलीप जावलकर, सौजन्या, डीजीपी लॉ एंड आर्डर अशोक कुमार सहित बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की समीक्षा की, लोगों को दी कई राहते, आप भी जानें

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को सचिवालय में कोविड-19 एवं डेंगू के रोकथाम एवं बचाव के लिए सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाय। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। जिन जनपदों में पिछले वर्षों में डेंगू का फैलाव कम रहा, उन जनपदों में हम इसे पूरी तरह कैसे नियंत्रित कर सकते हैं, इसके लिए ठोस रणनीति बनायी जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि अस्पतालों में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता हो। नगर निकायों द्वारा समय-समय पर फोगिंग की जाए। डेंगू से बचाव में रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार हो इसके लिए डाॅक्टर समय-समय पर मीडिया से समन्वय स्थापित करे। शहरी क्षेत्रों में डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता एवं जल निकासी पर विशेष ध्यान दिया जाय। प्रत्येक जनपद में सप्ताह में एक दिन व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाय।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षाकाल को दृष्टिगत रखते हुए पेयजल व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाय। पर्वतीय जनपदों में वर्षाकाल में पेयजल लाईनें क्षतिग्रस्त होने से व दूषित जल से बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए जन प्रतिनिधियों से निरन्तर संवाद बनाये रखें। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू की रोकथाम एवं जनजागरूकता के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण के लिए सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाय। जो लोग होम क्वारंटीन एवं होम आईसोलेशन है उनकी लगातार निगरानी की जाय। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाय। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी जनपदों में दुकानों को शाम 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी जाय। देहरादून में अगले सप्ताह से शनिवार और रविवार को भी मार्केट को खोलने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोगों को सुबह 5 बजे से माॅर्निंग वाॅक की अनुमति दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना पाॅजिटव की रिकवरी रेट में तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता एवं सुरक्षात्मक दृष्टि से कार्य करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब 1700 से अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। सोमवार से मुक्तेश्वर में भी कोरोना की टेस्टिंग शुरू हो जायेगी। यहां पर प्रतिदिन 100 टेस्ट होंगे।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, सचिव शैलेष बगोली, सौजन्या, एस.ए. मुरूगेशन, पंकज पाण्डेय, डीजी स्वास्थ्य श्रीमती अमिता उप्रेती आदि उपस्थित थे।