सीएम निर्देश, आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने तथा आम जनता को उचित दरों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के माध्यम से कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित संबंधित विभाग बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं उनके मूल्यों की नियमित निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर आम जनता से अधिक मूल्य न वसूला जाए। उन्होंने कहा कि बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों में प्रशासन द्वारा नियमित रूप से बाजारों का निरीक्षण किया जाए। आवश्यक वस्तुओं के निर्धारित एवं प्रचलित बाजार मूल्यों की जांच के साथ ही स्टॉक की स्थिति पर भी नजर रखी जाए। कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आम जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में अनावश्यक वृद्धि का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के घरेलू बजट पर पड़ता है, इसलिए मूल्य नियंत्रण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं प्रभावी और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए बाजार की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उपराष्ट्रपति जी की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उन्होंने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक एवं प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं और उन्हें अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों तथा अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वाेच्च स्थान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। ‘मिशन स्पथ्म्’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के माध्यम से लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। साथ ही, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था तथा पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ-साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के अनुरूप देश में वनों और पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे जहां भी अपनी सेवाएं दें, राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें।

उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन बना लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम

मेडिकल, पुलिस और अग्निशमन सेवाओं के लिए 108 नंबर से लगभग हर कोई परिचित है, लेकिन उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, शिकायत निवारण और लाभार्थियों की सक्रिय निगरानी का अहम माध्यम बन गई है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था केवल नागरिकों की कॉल का जवाब नहीं देती, बल्कि जरूरतमंद मरीजों तक खुद पहुंचकर उनके स्वास्थ्य और उपचार की स्थिति का फॉलोअप भी करती है।

स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में संचालित 104 कॉल सेंटर अब तक एक करोड़ 38 लाख से अधिक स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है। यह व्यवस्था राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंच बना रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर दे रही है। इसी सोच के तहत 104 हेल्पलाइन को केवल सूचना देने वाले कॉल सेंटर के बजाय प्रोएक्टिव हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है।

अस्पताल में रजिस्ट्रेशन के बाद शुरू होता है फॉलोअप

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम है। राज्य के किसी भी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में मरीज के पंजीकरण के बाद संबंधित जानकारियाँ 104 कॉल सेंटर पहुँचाई जाती है। इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से जूझ रहे लाभार्थी से नियमित रूप से संपर्क कर उसकी स्थिति की जानकारी ली जाती है।

खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने से लेकर प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं का फॉलोअप किया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है, ताकि जरूरी टीके और स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें।

27 स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी निगरानी

104 कॉल सेंटर आयुष्मान भारत योजना, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, काउंसलिंग, डेंगू, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, एचआईवी, एचपीवी, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी और थैलेसीमिया समेत विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों से संपर्क करता है।

इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और एंटी रेबीज सेवाओं के तहत लाभार्थियों को जरूरी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए परामर्श भी दिया जाता है।

सिर्फ जानकारी नहीं, योजनाओं की डिलीवरी की भी पड़ताल

104 की भूमिका यहीं खत्म नहीं होती। कॉल सेंटर के माध्यम से मरीजों से सीधे फीडबैक लिया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी लाभार्थियों से क्रॉस-चेक की जाती है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं।

एक दशक के सफर में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने यह साबित किया है कि एक टोल-फ्री नंबर सिर्फ फोन उठाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, निगरानी, फॉलोअप और जवाबदेही का प्रभावी तंत्र भी बन सकता है। पहाड़ी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण उत्तराखंड में यह मॉडल दूरदराज के लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। 104 हेल्थ हेल्पलाइन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो केवल नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही, बल्कि लाभार्थियों तक स्वयं पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी और फॉलोअप सुनिश्चित कर रही है।

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

दून विवि में सीएम धामी ने युवाओं से किया संवाद, कहा बदलती तकनीक के अनुरूप फ्यूचर के लिये रेडी हो युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पलायन रोकने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने, उत्तराखंड को उच्च शिक्षा का हब बनाने, विज्ञान, तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में रोजगार की नई संभावनाओं तथा देहरादून में यातायात जाम की समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल पूछे।

पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने से संबंधित सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब रिवर्स माइग्रेशन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं सौर स्वरोजगार योजना सहित पर्यटन, उद्योग और फिल्म नीति के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और उनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा को मजबूत करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध होंगे तथा युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विज्ञान, तकनीक एवं एआई के दौर में रोजगार की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है और नई संभावनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करते हुए ‘फ्यूचर रेडी’ बनना होगा। सरकार भी युवाओं को आधुनिक कौशल एवं नई तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

देहरादून में यातायात जाम की समस्या के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। बिंदाल और रिस्पना नदी के ऊपर एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देहरादून शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और जाम की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।

सीएम सौर स्वरोजगार योजना के तहत राज्य में हो रहा 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 210 मेगावाट क्षमता सौर उर्जा का उत्पादन

देहरादून। उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है। योजना के तहत जून माह तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य प्रदान किया है। योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है। शेष परियोजनाओं पर स्थापना का कार्य चल रहा है।

टिहरी जिले ने बनाई बढ़त
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी सबसे आगे है। यहां 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है। इसी तरह हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों की 15,440 किलोवाट, चमोली में 72 संयंत्रों की 11,725 किलोवाट और अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की 5,600 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है। देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

3500 लोगों को रोजगार
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना केवल सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है। योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हो रही हैं। जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती और पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सीएम धामी बोले, आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली मेरे सपनों का उत्तराखण्ड एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का नीट, जेईई, क्लेट, सेट जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र व छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि एआई हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर एआई की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम धामी ने किया उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कई योजनाओं का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए अनेक नई कल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने श्रमिक और श्रमिक परिवारों के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ योजना के अन्तर्गत 02 मेडिकल मोबाइल वैन का भी फ्लैग ऑफ किया।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार श्रमिक कल्याण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में आज शुरु की जा रही कल्याणकारी योजनाएं भी श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री पोषण योजना” के माध्यम से जहां श्रमिक परिवारों को पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री शिक्षा सामग्री योजना के माध्यम से श्रमिक भाई -बहनों के बच्चों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरणा लेकर शुरु की जा रही मुख्यमंत्री स्वच्छता सामग्री वितरण कार्यक्रम के जरिए श्रमिक परिवारों में हाईजिन किट का वितरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को कौशल प्रदान करने के लिए शुरु की जा रही, मुख्यमंत्री योग एवं वेलनेस आरोग्य योजना, के अंतर्गत पात्र छात्र-छात्राओं को योग एवं वेलनेस के क्षेत्र में निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना के तहत हर साल 210 बच्चों को आवासीय सुविधायुक्त प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 70 युवाओं को भी प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद रोजगार से जोड़ने की भी व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड पारदर्शी तरीके से कार्य कर रहा है, इसका लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के अंतर्गत शुरु मोबाइल मेडिकल वैंस के जरिए विशेष स्वास्थ्य दल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचकर श्रमिक भाई-बहनों को उनके कार्य एवं आवास स्थल पर ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराएंगे। इस मोबाइल मेडिकल वैन में एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की जाँचें पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएँगी। साथ ही इस वैन में टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह भी मिलेगी तथा जाँच के बाद तीन महीने तक उनके स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इसकी शुरुआत पौड़ी गढ़वाल और चम्पावत जनपद से हो रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में श्रमिकों के मान सम्मान को बढ़ाने के लिए’’श्रमेव जयते’’ का मंत्र दिया था। इसी क्रम में राज्य सरकार भी ’’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’’ के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल श्रमशक्ति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की विकासशक्ति मानती है।

सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि जो हाथ प्रदेश के विकास का निर्माण करते हैं, उनका और उनके परिवार का जीवन भी सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध होना चाहिए। इसी सोच के तहत एक ओर राज्य सरकार श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। वहीं महिला श्रमिकों एवं श्रमिक परिवारों को मातृत्व के दौरान बेहतर देखभाल और पोषण के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा श्रमिक परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए भी आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बोर्ड में पंजीकरण नवीनीकरण कराते रहें श्रमिक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिकों को उनके कार्य के लिए आवश्यक औजार, साइकिल और सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर उन्हें आजीविका की दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास भी कर रही है। इसके अलावा, पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को अपना घर बनाने या घर खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, वृद्ध निर्माण श्रमिकों को मासिक पेंशन उपलब्ध कराकर उनके जीवन को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान देने का कार्य भी हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आग्रह करते हुए कहा कि सभी पात्र श्रमिक उत्तराखंड भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में अपना पंजीकरण समय-समय पर नवीनीकृत कराते रहें, जिससे सरकार द्वारा संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंच सके। इससे पहले बोर्ड के सचिव पीसी दुम्का ने बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करने के साथ ही नई योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

इस मौके पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, राज्य सलाहकार संविदा बोर्ड के अध्यक्ष कैलाश पंत, सतर्कता समिति की अध्यक्ष गीता रावत, उपाध्यक्ष मोहनी पोखरिया, अध्यक्ष मीडिया सलाहकार समिति प्रो. गोविन्द सिंह, सचिव श्रीधर बाबू अद्यांकी, श्रमायुक्त पी. सी. दुम्का उपस्थित हुए।

सीएम ने 212 महिला लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये की हस्तांतरित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने योजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत 212 नई महिला लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में 1 करोड़ 55 लाख 40 हजार रुपये तथा योजना के प्रथम चरण की 276 महिला लाभार्थियों को द्वितीय किश्त के रूप में 1 करोड़ 20 लाख 76 हजार 875 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की। इस प्रकार आज कुल 488 महिला लाभार्थियों को 2 करोड़ 76 लाख 16 हजार 875 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई। ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के प्रथम चरण में 10 फरवरी 2026 को 484 महिला लाभार्थियों को 03 करोड़ 45 लाख की सहायता राशि प्रदान की गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी मातृशक्ति होती है। जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र भी सशक्त बनता है। उत्तराखण्ड की माताएं और बहनें परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक महिला को सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का सशक्त आधार उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का उद्देश्य एकल, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं के साथ-साथ एसिड अटैक पीड़िताओं, अन्य आपराधिक घटनाओं से प्रभावित महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर को स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत महिलाओं को उनके निवास स्थान अथवा स्थानीय क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने के लिए अधिकतम 2 लाख रुपये तक की परियोजना स्वीकृत की जाती है, जिसमें 75 प्रतिशत तक अनुदान राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मानपूर्वक अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। महिला आरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी अभियान तथा तीन तलाक जैसी कुप्रथा की समाप्ति जैसे ऐतिहासिक निर्णयों ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी प्रदान की है। राज्य सरकार भी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना तथा मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 15 हजार से अधिक महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों एवं लखपति दीदियों को इन्क्यूबेशन सुविधा उपलब्ध करा रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की लगभग 5 लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। 7 हजार से अधिक ग्राम संगठन तथा 500 से अधिक क्लस्टर संगठन महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व को सशक्त बना रहे हैं। वहीं, 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। राज्य सरकार महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए भी सुदृढ़ व्यवस्था विकसित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया है। साथ ही, समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश की हजारों महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना प्रदेश की एकल महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और आत्मविश्वास का नया अध्याय लिख रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को सहायता की पात्र नहीं, बल्कि विकास की साझेदार मानते हुए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य कर रही है। योजना के माध्यम से एकल महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन और उद्यमिता से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने लाभार्थी महिलाओं से इस अवसर का पूरा लाभ उठाकर अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना की लाभार्थी महिलाओं ने राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को आगे बढ़ाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सचिव महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास चन्द्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विवि का किया भ्रमण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर राज्य के युवाओं को विदेश में सीधे रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड सरकार की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से मंगलवार को जापान के आए प्रतिनिधि मंडल ने सर्वे चौक, देहरादून स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। यह सभी प्रतिनिधिमंडल अनाडुकी ग्लोबल करियर कंपनी लिमिटेड, जापान से हैं। जिसमें हिदेतारो उसुई, माई इकुता एवं मिहोको मात्सुमोतो शामिल हैं।

जापानी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा उत्तराखण्ड और जापान के मध्य कौशल विकास, जापानी भाषा प्रशिक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय रोजगार सहयोग को नई गति प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा युवाओं को दिए जा रहे भाषा एवं कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया तथा जाना कि उत्तराखण्ड सरकार किस प्रकार युवाओं को वैश्विक रोजगार के लिए तैयार कर रही है। साथ ही, उन्होंने उन क्षेत्रों की संभावनाओं का अध्ययन किया जिनमें उत्तराखण्ड के युवाओं को जापान में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में भ्रमण के दौरान किया छात्रों से भी किया संवाद

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में भ्रमण किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन और वैश्विक रोजगार योजना के अंतर्गत जापानी भाषा सीख रहे प्रशिक्षित अभ्यर्थियों से संवाद किया तथा उनके जापानी भाषा, तकनीकी दक्षता एवं रोजगार संबंधी तैयारियों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधियों ने छात्रों को जापानी भाषा के सही उच्चारण, व्यावहारिक संवाद और कॉरपोरेट एथिक्स की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने जापान की कार्य संस्कृति से छात्रों को अवगत कराया।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस समय जापान में आईटी, हॉस्पिटैलिटी, इंजीनियरिंग, केयरगिविंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कुशल और जापानी भाषा जानने वाले युवाओं की आवश्यकता है।

इस अवसर पर मौजूद निदेशक सेवायोजन नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को वैश्विक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के माध्यम से युवाओं को विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति एवं रोजगार संबंधी आवश्यक कौशल भी प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जापान की प्रतिष्ठित कंपनियों के प्रतिनिधियों का उत्तराखंड आगमन राज्य के युवाओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिससे उन्हें विदेशों में बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

दून विश्वविद्यालय में भाषा की बारीकियों के साथ वर्क कल्चर पर हुई चर्चा

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने दून विश्वविद्यालय का भ्रमण कर जापानी भाषा विभाग के प्राध्यापकों एवं प्लेसमेंट प्रभारियों के साथ बैठक की। बैठक में जापानी भाषा शिक्षा को और अधिक प्रभावी एवं रोजगारोन्मुख बनाने, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों के लिए जापान में उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जापान में सफल करियर के लिए भाषा के ज्ञान के साथ जापान की कार्य संस्कृति, सामाजिक व्यवहार, रहन-सहन और सांस्कृतिक मूल्यों की समझ भी आवश्यक है। साथ ही, दोनों पक्षों के बीच भविष्य में भी शैक्षणिक एवं कौशल विकास संबंधी सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी सहमति बनी।

इस अवसर पर मौजूद मुख्यमंत्री के अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य युवाओं को देश के साथ विदेशों में भी रोजगार देने का कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि जापान सहित विभिन्न देशों के साथ स्थापित हो रहा यह सहयोग उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार और करियर के नए द्वार खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मनमोहन मैनाली ने कहा कि जापानी प्रतिनिधिमंडल द्वारा राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई है। उन्होंने कहा शिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे भी कार्य किया जाएगा, ताकि उत्तराखण्ड के युवा वैश्विक रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें और उन्हें विदेशों में बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों।

इस अवसर पर उपनिदेशक चंद्रकांता, नोडल अधिकारी विनीता बड़ोनी, लर्नेट स्किल्स के स्टेट हेड रमेश पेटवाल, दून विश्वविद्यालय से जापानी भाषा की असिस्टैंट प्रोफेसर डॉ. दीपिका भाटिया, प्लेसमेंट सेल की प्रभारी डॉ. स्वाति बिष्ट एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा का सीएम धामी व रेल मंत्री वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से किया संयुक्त फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा का संयुक्त रूप से फ्लैग ऑफ कर नियमित संचालन का शुभारंभ किया। यह रेल सप्ताह में दो बार चलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई रेल सेवा उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों के बीच विकास, संपर्क और अवसरों की नई जीवनरेखा सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड में रेलवे अवसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनगर से देहरादून तक संचालित होने वाली यह रेल सेवा काशीपुर, रोशनपुर, पिपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार होते हुए चलेगी, जिससे कुमाऊं और गढ़वाल के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े क्षेत्र से भी प्रदेश की सीधी और सुगम रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे यात्रियों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों तथा पर्यटकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे आधुनिकता के नए युग में प्रवेश कर चुकी है। रेलवे सुरक्षा, गति, तकनीकी उन्नयन और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। वंदे भारत और नमो भारत जैसी अत्याधुनिक ‘मेड इन इंडिया’ ट्रेनों ने भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि रेलवे अब हरित एवं अत्याधुनिक तकनीकों की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य अंतिम चरण में है। यह परियोजना राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को दो वंदे भारत ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है तथा वर्ष 2026-27 में प्रदेश को रेलवे अवसंरचना विकास के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का रेल बजट प्राप्त हुआ है। वर्तमान में राज्य में लगभग 39 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न रेलवे परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से विकास की गति दोगुनी हुई है और राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

केंद्रीय रेल मंत्री बोले- यात्रियों की संख्या बढ़ने पर रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस का संचालन प्रतिदिन किया जाएगा

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल देश के सर्वांगीण विकास का मजबूत आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रेल संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है और नई रेल सेवाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, पर्यटन और जनसुविधाओं को नई गति प्रदान करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो इसे प्रतिदिन चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेस गढ़वाल और कुमाऊं के लिए सेतु का कार्य करेगी।

उत्तराखण्ड में रेलवे के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए केन्द्रीय रेल मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए प्रमुख नई और विस्तसारित 20 रेल सेवाएं शुरू की गई। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के 11 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उन्होंने राज्य में रेलवे के विस्तार के लिए पूरा सहयोग देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।
रेल मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023 से अब तक उत्तराखंड से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रमुख नई/विस्तारित नियमित रेल सेवाओं की सूची-

1. देहरादून दृ आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस
2. देहरादून दृ लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस
3. योग नगरी ऋषिकेश दृ प्रयागराज एक्सप्रेस
4. योग नगरी ऋषिकेश दृ वीरभूमि (मालदा टाउन) एक्सप्रेस
5. योग नगरी ऋषिकेश दृ यशवंतपुर (बेंगलुरु) एक्सप्रेस
6. देहरादून दृ बनारस एक्सप्रेस
7. देहरादून दृ सुभेदारगंज (प्रयागराज) एक्सप्रेस
8. हरिद्वार दृ गोरखपुर एक्सप्रेस
9. हरिद्वार दृ अमृतसर एक्सप्रेस (विस्तारित/नई सेवा)
10. टनकपुर दृ दिल्ली (पूर्णागिरि जनशताब्दी सेवा का विस्तार/सुदृढ़ीकरण)
11. लालकुआँ दृ राजकोट एक्सप्रेस (विस्तारित सेवा)
12. लालकुआँ दृ कोलकाता एक्सप्रेस
13. काठगोदाम दृ जैसलमेर एक्सप्रेस
14. काठगोदाम दृ मुंबई (बांद्रा टर्मिनस) एक्सप्रेस (विस्तारित सेवा)
15. देहरादून दृ कोटा एक्सप्रेस (सुधारित/विस्तारित सेवा)
16. हरिद्वार दृ लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष सेवा (बाद में नियमित संचालन)
17. लालकुआँ दृ किशनगंज एक्सप्रेस (विशेष से नियमित संचालन की दिशा में सेवा)
18. उत्तराखंड से विभिन्न राज्यों के लिए नई मौसमी/विशेष सेवाओं में से एक को बाद में नियमित सेवा के रूप में शामिल किया गया।
19. टनकपुर से नांदेड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस।
20. रामनगर- देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा।

इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, अरविंद पांडे और रेलवे के अधिकारी मौजूद थे।