महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर है यूसीसी: धामी

नैनीताल में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य सरकार ने प्रदेश की जनता से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा किया था, जिसे सरकार ने अपने संकल्प के अनुरूप पूरा किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड गंगा, यमुना, आदि कैलाश, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसी पवित्र धार्मिक स्थलों की भूमि है, और इसी पावन भूमि से समानता, न्याय और सामाजिक समरसता का संदेश पूरे देश को दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित भावना के अनुरूप समान नागरिक संहिता को लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि 27 जनवरी को राज्य में यूसीसी लागू होने के एक वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जिसे राज्यभर में “यूसीसी दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, जनसंवाद एवं अन्य आयोजन किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यूसीसी महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और सभी नागरिकों की सुरक्षा की दृष्टि से एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम साबित हुआ है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य की जनता ने सक्रिय सहयोग दिया है तथा विवाह, तलाक, वसीयत एवं अन्य प्रावधानों के अंतर्गत बड़ी संख्या में पंजीकरण कराए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि अधिक से अधिक लोगों को इसके प्रावधानों, लाभों और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी मिले, ताकि समाज में समान अधिकार और न्याय की भावना और अधिक सशक्त हो।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वन्य मानव संघर्ष और जंगली जानवरों के हमलों से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस वर्ष कई क्षेत्रों में वन्य जीवों के कारण ग्रामीण जनता को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में कई बच्चों, युवाओं और ग्रामीणों ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए न केवल अपनी रक्षा की, बल्कि अन्य लोगों की जान भी बचाई।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठा रही है। वन्य जीव प्रबंधन, सुरक्षा उपायों, त्वरित राहत, मुआवजा व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि भविष्य में आम नागरिकों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े।

नैनीताल में यातायात जाम की समस्या के समाधान से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मानसखंड क्षेत्र के अंतर्गत कैंचीधाम सहित कई प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल आते हैं, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का भारी आवागमन रहता है। इसी कारण यहां यातायात दबाव बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए बाईपास, वैकल्पिक मार्ग, सड़क चौड़ीकरण और पार्किंग जैसी कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों—दोनों को जाम से राहत मिले और आवागमन सुरक्षित एवं सुगम हो।

आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों से संबंधित प्रश्न पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि चारधाम यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन—तीनों दृष्टियों से राज्य की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए हर वर्ष की भांति सभी हितधारकों के साथ विस्तृत बैठकें की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष के अनुभवों, सुझावों और फीडबैक के आधार पर इस वर्ष की तैयारियां और भी अधिक प्रभावी एवं बेहतर की जाएंगी। सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन सहित सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो |

कैंचीधाम जाम से मिलेगी स्थायी राहत, प्राथमिकता पर हो रहा बाईपास का निर्माण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी प्रशासनिक निर्णयों के परिणामस्वरूप नैनीताल जनपद की बहुप्रतीक्षित कैंचीधाम बाईपास (सैनिटोरियम–रातीघाट) परियोजना तेजी से अपने निर्णायक चरण की ओर अग्रसर है। आज मुख्यमंत्री ने नैनीताल भ्रमण के दौरान इस महत्वपूर्ण परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी यात्रा एवं पर्यटन सीजन से पूर्व बाईपास मार्ग को पूर्ण कर यातायात के लिए खोलना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध श्री कैंचीधाम मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन होता है। श्रद्धालुओं को सुचारु, सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कैंचीधाम बाईपास का निर्माण तेज़ी से कराया जा रहा है, जिससे वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव होगा।

लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह धर्मशक्तू ने अवगत कराया कि 18.15 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित बाईपास मार्ग में से 8 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कर हॉटमिक्स किया जा चुका है, जिसके लिए 12 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रभावी उपयोग किया गया है। शेष 10.15 किलोमीटर मार्ग में पहाड़ कटिंग कार्य हेतु प्राप्त 5 करोड़ 6 लाख रुपये की धनराशि से कार्य पूर्ण किया जा चुका है। वर्तमान में इस खंड में 9 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से कलमठ निर्माण, सुरक्षा दीवारों का निर्माण एवं अन्य आवश्यक कार्य तेजी और गुणवत्ता के साथ प्रगति पर हैं।

परियोजना के अंतर्गत बाईपास को रातीघाट स्थित अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने हेतु 74.15 मीटर स्पान का मोटर पुल भी निर्मित किया जा रहा है। इसके लिए शासन से 9 करोड़ 63 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और पुल निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाईपास के पूर्ण होने से न केवल कैंचीधाम में लगने वाले जाम से निजात मिलेगी, बल्कि पहाड़ी जनपदों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी एक वैकल्पिक, सुगम और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध होगा। यह परियोजना पर्यटन, धार्मिक यात्रा और स्थानीय आवागमन—तीनों के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री धामी ने 9 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत से निर्मित सैनिटोरियम से अल्मोड़ा मार्ग तक भवाली बाईपास सड़क एवं इसी मार्ग पर शिप्रा नदी पर निर्मित 30 मीटर स्पान के डबल लेन मोटर पुल का भी निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बाईपास के चालू होने से भवाली बाजार में वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान होगा और पर्यटन सीजन में यात्रियों को निर्बाध आवागमन सुविधा मिलेगी।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की तथा उनके कल्याण और सुरक्षा के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने बर्फबारी देखने पहुंचे देश के विभिन्न राज्यों से आए पर्यटकों से भी बातचीत की। पर्यटकों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, बेहतर व्यवस्थाओं और सुरक्षित वातावरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें यहां किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई है और वे भविष्य में भी यहां आते रहेंगे।

होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़ा घोटाला, डीआईजी निलंबन के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री खरीद से जुड़े घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रकरण वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान होमगार्ड्स के लिए वर्दी सामग्री की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। महानिदेशक, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा, देहरादून की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।

महादिनदेशक की संतुति पर सीएम धामी ने डिप्टी कमांडेंट को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

रेन बसेरा में रहने वाले लोगों का हाल जान डीएम ने नगर निगम को सफाई व्यवस्था के निर्देश दिए

राजधानी देहरादून में लगातार हो रही बारिश एवं बढ़ती ठंड को दृष्टिगत रखते हुए शीतलहरी में रात्रि में जिलाधिकारी सविन बसंल शहर के चौक चौराहों पर पंहुच अलाव व्यवस्था देखी तथा इस दौरान उन्होंने रेनबसेरों में रहने वालों का हाल जाना तथा नगर निगम एवं तहसील प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने देहरादून में देर सांय चौक चौराहों पर अलाव व्यवस्था का औचक निरीक्षण करते हुए रैन बसेरों में रह रहे असहाय एवं जरूरतमंद लोगों का हाल चाल जाना।

जिलाधिकारी ने रैन बसेरा का निरीक्षण कर वहां ठहरे लोगों से बातचीत की तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने नगर निगम एवं तहसील प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ठंड के मौसम में कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति असुविधा का शिकार न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। सभी चौक चौराहो पर अलावा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए इसकी दैनिक सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा असहाय, निराश्रित एवं बेघर लोगों की सहायता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ठंड एवं बारिश के दौरान रैन बसेरों में रह रहे लोगों को पर्याप्त कंबल, भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि रैन बसेरों की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं तत्काल की जाएं, जिससे किसी भी व्यक्ति को ठंड से प्रभावित न होना पड़े। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरी, डीडीएमओ ऋषभ कुमार मौजूद रहे।

सीएम से केंद्रीय राज्यमंत्री की भेंट, राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सड़क सुरक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार में राज्य मंत्री अजय टम्टा ने मुलाक़ात की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा के मध्य उत्तराखंड में सड़क, राजमार्ग एवं आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सड़क सुरक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी तथा चल रही एवं प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में सड़क एवं परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क न केवल प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि पर्यटन, चारधाम यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी मजबूती प्रदान करेगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने उत्तराखंड के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी राज्य को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में भूमिका निभाएगा विकसित उत्तराखंड का विजन: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस दो दिवसीय शिविर के माध्यम से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार की जाएगी। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र विकास से जुड़े सभी प्रमुख क्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। जिससे राज्य के भविष्य के लिए एक स्पष्ट, व्यवहारिक और समयबद्ध दिशा निर्धारित की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प तभी साकार हो सकता है जब देश का प्रत्येक राज्य समान रूप से विकसित हो। इसके लिए उत्तराखण्ड को भी अपने संसाधनों, क्षमताओं और विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की एक स्पष्ट और दीर्घकालिक दिशा तय करनी होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “विकसित भारत” का संकल्प किसी एक सरकार, किसी एक कार्यकाल या किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा व्यापक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, जिसमें भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, सामरिक तथा सांस्कृतिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प निहित है। इस विज़न की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें विकास को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे मानव केंद्रित, समावेशी और सतत बनाया गया है। विकसित भारत का अर्थ एक ऐसे भारत का निर्माण है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों, जहाँ शासन व्यवस्था पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित हो।

*प्रशासनिक तंत्र की भूमिका*
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति निर्माण से लेकर उसके क्रियान्वयन और अंतिम सफलता तक प्रशासन की सक्रियता, संवेदनशीलता और दक्षता ही ये तय होती है। इसलिए इस विज़न को साकार करने में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमारे प्रशासन को न केवल तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा, बल्कि प्रत्येक नीति, निर्णय और योजना को ‘लक्ष्य आधारित’ एवं ‘जन-केंद्रित’ दृष्टि से लागू करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आप लोग अपने कार्यों को केवल आदेश देने या मीटिंग करने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दायरे में आने वाले प्रत्येक कार्य को नवाचार, पारदर्शिता, समयबद्ध और परिणाम केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तत्परता और जवाबदेही के साथ पूर्ण करें। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज हम विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का रोडमैप बना रहे हैं। इसका अर्थ केवल योजनाएं और नीतियां बनाने या लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें ये ये देखना होगा कि हमारी योजनाओं और नीतियों से आम नागरिकों के जीवन में क्या बदलाव आएगा। इसके लिए हमें, किसानों की आय वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार सृजन, महिलाओं के लिए समान अवसर जैसे मानकों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति ही विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत की वास्तविक कसौटी तय करेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के नाते हमारे सामने कुछ विशेष चुनौतियाँ भी हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों के भीतर अनेकों अवसर छिपे हुए हैं। यदि हम अपनी नीतियों और योजनाओं को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालें, तो उत्तराखण्ड इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित कर देश में विकास को नई दिशा दे सकता है। इसके लिए हमें तय करना होगा कि वर्ष 2047 में हमारा राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, तकनीक और सुशासन जैसे क्षेत्रों में किस स्तर तक पहुँचना चाहिए। साथ ही साथ विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर विजन 2047 को साकार करने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगामी पच्चीस वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमें “सोलो प्लेयर” वाली मानसिकता से ऊपर उठकर निकलकर “टीम उत्तराखंड” के रूप में कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिस स्थान से आपने अपनी सेवा शुरु की है वहां के विकास पर विशेष ध्यान दें, साथ ही जन जन की सरकार, जन जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाली जनसमस्याओं को डायरी में नोट करते हुए, उनके निराकरण करें।

*विकसित उत्तराखण्ड की नींव*
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखंड की नींव सुशासन, तकनीक एवं नवाचार और जन केंद्रित सतत एवं संतुलित विकास के तीन स्तंभों पर टिकी है। सुशासन का अर्थ केवल नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना नहीं बल्कि हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हर निर्णय समय पर हो, हर योजना पारदर्शी हो और हर अधिकारी अपने दायित्व के प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि हमें ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके शासन को और अधिक प्रभावी, तेज और पारदर्शी बनाना होगा। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और सीमांत गाँवों तक भी पहुँचे। इसके साथ ही, हमारी नीतियों और योजनाओं के केंद्र में आम नागरिकों का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आपदा प्रबंधन को हमें विकास योजना का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रत्येक योजना का स्पष्ट आउटपुट और आउटकम निर्धारित करना होगा। केवल रुपया व्यय हो जाना ही किसी योजना की सफलता का पैमाना नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपका प्रत्येक निर्णय केवल आज को प्रभावित नहीं करता, बल्कि आने वाले भविष्य की दिशा भी तय करता है। बतौर प्रशासनिक अधिकारी आपके निर्णय, कार्य और नीतियों से जनता के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, वही भविष्य में आपकी वास्तविक पहचान बनेंगे। इसलिए अपने दायित्वों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का अवसर मानकर निभाएँ। उन्होंने कहा कि कभी कभी देखने में आता है कि जनता की बात अनसुनी रह जाती है, कभी लालफीताशाही कार्यों में देरी लाती है ये स्थितियाँ प्रशासन पर जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड की ये यात्रा लंबी है, यदि हमारी दिशा सही रहेगी, हमारी नीति स्पष्ट रहेगी, हमारी नीयत साफ रहेगी और हमारा संकल्प अडिग रहेगा तो हम अपने लक्ष्य को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।

*संबोधन में बाद भी मंथन में शामिल हुए सीएम*
सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उद्घाटन सत्र के बाद भी काफी देर तक शामिल हुए। प्रथम सत्र में संबोधन के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंच के नीचे हॉल की प्रथम पंक्ति में बैठ गए। इस दौरान मंच पर विभिन्न विषयों पर मंथन और संवाद चलता रहा, सीएम पुष्कर सिंह धामी इस दौरान हॉल में बैठकर, परिचर्चा को सुनते रहे, साथ ही संवाद के प्रमुख बिंदुओं और सुझावों को नोट भी करते रहे।

इस अवसर पर सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग से प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल, आईएएस अधिकारी एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मौजूद थे।

ऋषिकेश- डोईवाला बाईपास रेलवे लाईन परियोजना को डीएम वन विभाग के साथ करें वार्ता: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मण्डल रेल प्रबन्धक, उत्तर रेलवे मुरादाबाद विनीता श्रीवास्तव के साथ मुख्य सचिव कार्यालय में बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान उत्तर रेलवे से सम्बन्धित प्रकरणों एवं परियोजनाओं के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा हुयी।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश- डोईवाला बाईपास रेलवे लाईन परियोजना के तहत् जिलाधिकारी देहरादून को राजाजी नेशनल पार्क एवं वन विभाग की 3.62 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर रेलवे, मुख्य वन्यजीव वार्डन और राजाजी नेशनल पार्क के साथ मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण कराते हुए निरीक्षण आख्या शासन को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने देहरादून- मोहण्ड- सहारनपुर टनल आधारित रेलवे लाईन परियोजना के सम्बन्ध में परियोजना का फाईनल लोकेशन सर्वे कराते हुए अद्यतन स्थिति से शीघ्र अवगत कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को हर्रावाला रेलवे स्टेशन विस्तारीकरण का मास्टर प्लान को भी शासन से साझा किए जाने की बात कही। कहा कि रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त सर्वे करते हुए शीघ्र ही निरीक्षण आख्या शासन को उपलब्ध कराए।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला – 2027 के दौरान यातायात व्यवस्था दुरूस्त रखने एवं श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा उपलब्ध कराने के दृष्टिगत रेलवे अधिकारियों को जिलाधिकारी हरिद्वार, एसएसपी हरिद्वार, मेलाधिकारी एवं राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को मिलकर संयुक्त रूप से ट्रैफिक प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे सुरंग हरिद्वार के पास ढलान स्थिरीकरण (slop stabilization) कार्य को शीघ्र कराते हुए कृत कार्यवाही की आख्या शासन को भी उपलब्ध कराए जाने की बात कही।

इस अवसर पर सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत, अपर सचिव रीना जोशी सहित रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ऋषिकेश त्रिवेणी घाट–नीलकंठ रोपवे परियोजना में बड़ी प्रगति: आर राजेश कुमार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार राज्य में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण–अनुकूल शहरी परिवहन प्रणाली विकसित करने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में देहरादून सहित प्रमुख शहरों में मेट्रो रेल, ई-बीआरटी एवं रोपवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आज सचिवालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूकेएमआरसी) द्वारा संचालित एवं प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान यूकेएमआरसी के प्रबंध निदेशक द्वारा राज्य में शहरी परिवहन को सुदृढ़ करने से जुड़ी योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

*देहरादून में ई-बीआरटी परियोजना को मिली सैद्धांतिक सहमति*
बैठक में प्रबंध निदेशक, यूकेएमआरसी ने अवगत कराया कि यूकेएमआरसी बोर्ड द्वारा देहरादून शहर में दो प्रमुख कॉरिडोरों पर ई-बीआरटी (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) परियोजना लागू करने के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी गई है। इसके लिए आवश्यक अध्ययन कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अध्ययन पूर्ण होने के पश्चात परियोजना प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जाएगा। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि देहरादून शहर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए ई-बीआरटी जैसी पर्यावरण–अनुकूल मास रैपिड ट्रांजिट प्रणाली की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल प्रदूषण को कम करेगी, बल्कि आम नागरिकों को तेज, सुरक्षित और किफायती परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराएगी।

*हरकी पौड़ी के लिए इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को हरी झंडी*
बैठक में हरिद्वार स्थित हरकी पौड़ी के लिए प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना पर भी चर्चा की गई। प्रबंध निदेशक ने बताया कि यूकेएमआरसी बोर्ड द्वारा इस परियोजना को अनुमोदन प्रदान कर दिया गया है तथा प्रस्ताव शीघ्र ही सक्षम प्राधिकरण को प्रस्तुत किया जाएगा। आवास सचिव ने निर्देश दिए कि प्रस्ताव को शीघ्र प्रस्तुत करते हुए आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम आवागमन सुविधा मिल सके।

*त्रिवेणी घाट–नीलकंठ रोपवे परियोजना में बड़ी प्रगति*
त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना के संबंध में प्रबंध निदेशक ने जानकारी दी कि इस परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। फॉरेस्ट क्लियरेंस स्टेज–1 की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। सचिव ने निर्देश दिए कि सभी आवश्यक अनुमोदन समयबद्ध रूप से पूर्ण कर टेंडर प्रक्रिया शीघ्र आरंभ की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा विकल्प उपलब्ध हो सके।

*नैनीताल, कांची धाम और मसूरी में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं*
बैठक में नैनीताल, कांची धाम और मसूरी में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं पर भी चर्चा की गई। यूकेएमआरसी द्वारा इन स्थलों के लिए संभाव्यता अध्ययन कराया जा रहा है। आवास सचिव ने इन प्रस्तावों की सराहना करते हुए कहा कि विशेष रूप से नैनीताल और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर रोपवे परियोजनाएं यातायात जाम को काफी हद तक कम करने में सहायक सिद्ध होंगी और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी उपयोगी रहेंगी।

*देहरादून में सेकंड ऑर्डर मास ट्रांजिट पर भी मंथन*
इसके अतिरिक्त बैठक में देहरादून शहर में सेकंड ऑर्डर मास ट्रांजिट सिस्टम की संभावनाओं पर भी सचिव को अवगत कराया गया। इस पर सचिव ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक परिवहन योजना तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में यूकेएमआरसी द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। बैठक उपरोक्त निर्देशों के साथ संपन्न हुई।

बैठक में ब्रजेश कुमार मिश्रा, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, संजीव मेहता, निदेशक (वित्त), धीरेन्द्र कुमार सिंह, संयुक्त सचिव, आवास विभाग, कृष्णानन्द शर्मा, कंपनी सचिव, अजय बाबू, संयुक्त महाप्रबंधक (संकेतन एवं दूरसंचार), सौरभ शेखर, संयुक्त महाप्रबंधक (विद्युत), सर्वेश कुमार, खंड अभियंता तथा अशोक डोभाल, सहायक खंड अभियंता उपस्थित रहे।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हर्रावाला, रुड़की व कोटद्वार स्टेशनों का कायाकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में डीआरएम, मुरादाबाद विनीता श्रीवास्तव ने शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर राज्य में रेल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पूर्ण एवं प्रगतिरत रेल परियोजनाओं तथा भविष्य की आवश्यकताओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

भेंट के दौरान डीआरएम, मुरादाबाद विनीता श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड राज्य में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएँ सफलतापूर्वक पूर्ण की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि रुड़की से देवबंद को जोड़ने वाली नई रेलवे लाइन परियोजना (27.45 किलोमीटर) का कमीशनिंग कर दिया गया है, जिसके अंतर्गत बनहेड़ा खास एवं झबरेड़ा में नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य के प्रमुख रेल मार्गों पर गति वृद्धि से संबंधित कार्य भी पूर्ण किए गए हैं, जिनमें लक्सर–हरिद्वार रेल खंड को 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक उन्नत किया गया है, जबकि सहारनपुर–हरिद्वार खंड को 110 किलोमीटर प्रति घंटा करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 130 किलोमीटर प्रति घंटा गति लक्ष्य हेतु डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है तथा दीर्घकालिक रूप से 160 किलोमीटर प्रति घंटा गति के लिए मार्गों की पहचान की गई है।

उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड में लक्सर, लंढौरा–धनौरा, रुड़की, चोड़ीआला एवं ऐथल सहित कई स्थानों पर आरओबी, आरयूबी एवं एलएचएस से संबंधित कार्य पूर्ण किए गए हैं, जिससे रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और व्यस्त स्थानों पर यातायात जाम की समस्या में कमी आई है।

डीआरएम विनीता श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि राज्य में कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएँ वर्तमान में प्रगति पर हैं। उन्होंने अवगत कराया कि हर्रावाला, रुड़की एवं कोटद्वार रेलवे स्टेशनों पर अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकास कार्य किया जा रहा है, जिसमें नए स्टेशन भवनों का निर्माण, एसी प्रतीक्षालय, फूड कोर्ट, दिव्यांगजन एवं पैदल यात्रियों के अनुकूल डिज़ाइन, प्लेटफार्म ऊंचाई का मानकीकरण, प्लेटफार्म शेड, नए एवं चौड़े फुट ओवर ब्रिज (FOB) तथा आधुनिक सर्कुलेटिंग एवं पार्किंग क्षेत्र का विकास शामिल है।

उन्होंने यह भी बताया कि हरिद्वार एवं देहरादून रेलवे स्टेशनों के लिए क्षमता वृद्धि के साथ व्यापक पुनर्विकास प्रस्तावित है, जिसमें विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएँ, आइकॉनिक टर्मिनल डिज़ाइन, आगमन एवं प्रस्थान का पृथक्करण तथा बेहतर बाह्य यातायात व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके साथ ही योग नगरी ऋषिकेश से कर्णप्रयाग को जोड़ने वाली नई रेलवे लाइन परियोजना निर्माणाधीन है, जिसकी कुल लंबाई 125.20 किलोमीटर है। इस परियोजना में मार्ग में 12 स्टेशन, 35 पुल एवं 17 सुरंगें शामिल हैं तथा प्रमुख सुरंगों का कार्य लगभग 94 प्रतिशत तक पूर्ण किया जा चुका है।

डीआरएम ने यह भी जानकारी दी कि राज्य में नए माल टर्मिनलों के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिसमें पत्री (PRI) में एकीकृत माल टर्मिनल सुविधा का विकास तथा पत्री एवं ज्वालापुर (JWP) स्टेशनों को एलएमवी लोडिंग हेतु उन्नत किया जा रहा है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इकबालपुर आरओबी, जिसमें पीडब्ल्यूडी के पास अप्रोच भूमि लंबित है, धनौरा आरओबी, जिसमें रक्षा भूमि से संबंधित प्रकरण लंबित है, तथा लक्सर एलएचएस, जिसे उच्च जलस्तर के कारण संशोधित किया गया है और जहाँ दोपहिया वाहनों के अनुकूल एफओबी प्रस्तावित है, जैसे कार्यों पर राज्य एवं रेलवे के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार–देहरादून रेल खंड की क्षमता वृद्धि योजना की समीक्षा करते हुए बताया कि हर्रावाला में 24-कोच हैंडलिंग सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जिसमें लूप लाइन विस्तार एवं गति वृद्धि के लक्ष्य शामिल हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस परियोजना के अंतर्गत वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सहयोग से वन्यजीव न्यूनीकरण योजना तैयार की जा रही है।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए कि टनकपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए तथा आगामी अर्द्धकुंभ के दृष्टिगत रेल एवं यात्री सुविधाओं से संबंधित सभी तैयारियाँ समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जाएँ, ताकि श्रद्धालुओं एवं यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सके |

उद्यान एवं कृषि विभाग बड़े और इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट्स करें तैयार: बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पूंजीगत व्यय, सीएसएस योजनाएं, एसएएससीआई, एसएनए स्पर्श एवं विभागों की व्यय योजनाओं के सम्बन्ध में विभिन्न विभागों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने वाह्य सहायतित योजनाओं (ईएपी) के सम्बन्ध में अधिकारियों को धीमी प्रगति वाले प्रोजेक्ट्स में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति के लिए विभागाध्यक्ष एवं सचिव जिम्मेदार होंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यान एवं कृषि विभाग को मिलकर बड़े एवं एकीकृत प्रोजेक्ट्स पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सेब, कीवी और ऐरोमा के क्षेत्र में इंटीग्रेटेड फार्मिंग की दिशा में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि फिशरीज के अंतर्गत ट्राउट उत्पादन में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कोल्ड स्टोरेज की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने पशुपालन विभाग एवं सहकारिता विभाग को मिलकर लाइवस्टॉक एवं फिशरीज को लेकर इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट तैयार किया जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने ऐपल मिशन के तहत सेब के उत्पादन के लिए नर्सरी एवं कोल्ड स्टोरेज चैन तैयार किए जाने हेतु अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में जहां जहाँ आवश्यकता है, कोल्ड स्टोरेज चैन तैयार की जाए ताकि प्रदेश का कोई भी किसान स्वयं अपने किसी भी उत्पाद कोल्ड स्टोर में रखकर अनुकूल समय पर अपने उत्पाद बाज़ार में उतार सकता है।

मुख्य सचिव ने पीएमजीएसवाई के तहत प्रदेशभर में भूमि मुआवजा वितरण कार्य अभियान चलाकर शून्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को जिलावार डेटा उपलब्ध कराते हुए इस वित्तीय वर्ष में भूमि मुआवजा पूर्ण रूप से वितरित किए जाने हेतु लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग चैन लिंक फेंसिंग के लिए प्राप्त प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता तय करते हुए प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजे जायें।

*सारा के तहत् जल संरक्षण के लिए छोटे-छोटे बैराज और चेक डैम के बड़े प्रोजेक्ट्स किए जाएं तैयार*

मुख्य सचिव ने स्प्रिंग एवं रिवर रेजूविनेशन प्राधिकरण के तहत जल संरक्षण हेतु बैराज एवं चेक डैम के प्रोजेक्ट्स संबंधित विभागों द्वारा तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने सारा के तहत फंड्स को पूर्णतः यूटिलाइज़ किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने परिवहन विभाग को नए बस स्टेशन, चार्जिंग स्टेशन के कार्यों में तेजी लाते हुए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने मार्च 2026 तक के टारगेट तत्काल वित्त विभाग को उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों को 30 जनवरी तक अपने सभी प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराये जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके उपरांत प्राप्त होने वाले प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। साथ ही विभाग को आबंटित फंड्स को उन अन्य विभागों को दिया जाएगा जो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव एल फ़ैनाई, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ वी षणमुगम, बृजेश कुमार संत, डॉ अहमद इक़बाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।