प्रमुख सचिव ने की चम्पावत विधान सभा क्षेत्र की सीएम घोषणाओं की समीक्षा

प्रमुख सचिव वित्त रमेश कुमार सुधांशु की अध्यक्षता में सचिवालय में चम्पावत विधान सभा क्षेत्र की सीएम घोषणाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के साथ उनकी प्रभावी निगरानी के लिए विभागाध्यक्षों को प्रत्येक सप्ताह तथा विभागीय सचिवों को 15 दिन में समीक्षा करने के निर्देश दिये। उन्होंने इसके लिये विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने तथा पोर्टल को नियमित रूप से अपडेट करने के भी निर्देश दिये हैं।

प्रमुख सचिव ने चम्पावत विधान सभा क्षेत्र की वर्ष 2021 से वर्षवार विभागीय लम्बित घोषणाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि अधिकारी, सीएम घोषणाओं को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उन्हें पूर्ण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार जिन घोषणाओं के शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उनके शीघ्र शासनादेश जारी किये जायें। सभी विभाग आपसी समन्वय से जिन घोषणाओं को समायोजित या विलोप्ति किया जाना है, उनकी कार्यवाही शीघ्र पूर्ण की जाय तथा तत्संबंधित सूचना की प्रति घोषणा सेल को भी उपलब्ध कराई जाए।

बैठक में विधान सभा क्षेत्र चम्पावत के अंतर्गत गोलू देवता, घोडाखाल व चितई को मिलाकर एक विशेष गोल्ज्यू कोरिडोर बनाये जाने की घोषणा के संबंध में अवगत कराया गया कि व्यय वित्त समिति की संस्तुति एवं सीएम के अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया है। इस पर प्रमख सचिव ने पत्रावली वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिये। अवगत कराया गया कि चम्पावत में जिम कार्बेट ट्रेल बनाने को लेकर पूर्व में नामित कार्यदायी संस्था लोनिवि के स्थान पर उत्तराखण्ड राज्य अवस्थापना विकास निगम ब्रिडकुल को नामित किया गया है। इस पर प्रमुख सचिव ने जल्द शासनादेश जारी करने तथा एक सप्ताह के अन्दर डीपीआर भेजने के निर्देश दिये। बैठक में बताया गया कि घोषणा के तहत आंशिक रूप से चूका ट्रेक रूट सुदृढीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी चम्पावत को नगर क्षेत्र चम्पावत में सीवर लाइन के काम का यूयूएसडीए के साथ परीक्षण कर 15 दिन के अन्दर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। प्रमुख सचिव ने जवाहर नवोदय विद्यालय लटौली चम्पावत में क्रीड़ा मैदान विस्तारीकरण हेतु जिलाधिकारी को टी.ए.सी. संस्तृति सहित युवा कल्याण विभाग को उपलब्ध कराने, हनुमान मंदिर मेला स्थल का सौन्दर्यीकरण के संबंध में प्रकरण वन क्षेत्र से बाहर होने संबंधी रिपोर्ट प्रेषित करते हुए घाोषणा को धर्मस्व/पर्यटन विभाग को भेजने हेतु तथा नारियाल गांव में एबीसी सेंटर श्वान बंधियाकरण की स्थापना को लेकर शीघ्र निर्णय लेते हुए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। टनकपुर, बनबसा क्षेत्र में 220/33 केवी विद्युत स्टेशन स्थापना के संबंध में अवगत कराया गया कि इसका शासनादेश और अनुबन्ध हो चुका है तथा कार्य गतिमान है। प्रमुख सचिव ने पारेषण लाइन हेतु 0.9552 हे. वन भूमि को गैरवानिकी में परिवर्तित किये जाने हेतु सैद्धान्तिक स्वीकृति के लिये अपर सचिव वन एवं पर्यावरण को आवश्यक निर्देश दिये।

बैठक में अवगत कराया गया कि गुरू गोरखनाथ धाम में गोरखनाथ मंदिर सड़क का चौड़ीकरण कार्य एवं चम्पावत में रोजवेज स्टेशन में आधुनिक सुसज्जित मल्टी स्टोरी पार्किंग व शॉपिंग कॉम्पलैक्स निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

बैठक में सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गर्ब्याल, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय, डॉ. आनन्द श्रीवास्तव, गिरधारी सिंह रावत, मनुज गोयल, कल्याणी, सुरेश चन्द जोशी, एस.एल. सेमवाल, संतोष बडोनी, अपर निदेशक सूचना आशीष कुमार त्रिपाठी सहित अन्य विभागों के उच्च स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी का प्रदेशभर के स्कूली बच्चों को कराया जाएगा भ्रमणः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विकसित उत्तराखंड की आधारशिला हैं। राज्य सरकार उत्तराखंड को अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकी विकास का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को प्रयोगशालाओं और पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय आमजन के जीवन से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने पायनियर समाचार पत्र समूह एवं उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के तत्वावधान में आई.आर.डी.टी. सभागार में आयोजित “Mainstreaming Science, Technology and Innovation for a Prosperous Uttarakhand” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व की प्रगति प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की क्षमता से निर्धारित हो रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीकें स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पर्यटन और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही हैं। इन क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रतिभा, नवाचार और परिश्रम में किसी से कम नहीं है। आवश्यकता उन्हें आधुनिक संसाधन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और उपयुक्त अवसर उपलब्ध कराने की है। सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत एवं वैज्ञानिक संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में नवाचार आधारित विकास को नई गति दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प की आधारशिला विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे अभियान भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर बनाना है। उन्होंने कहा कि देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, जो उत्तराखंड को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के स्कूली विद्यार्थियों का नियमित रूप से साइंस सिटी भ्रमण कराया जाए, ताकि उनमें विज्ञान के प्रति जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ना भविष्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, लैब्स ऑन व्हील्स, जीआईएस आधारित डैशबोर्ड, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर तथा स्टेम लैब्स जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, प्री-इन्क्यूबेशन लैब्स तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में वैश्विक स्तर के अवसर उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि देवभूमि उत्तराखंड को वीरभूमि और खेलभूमि के साथ-साथ विज्ञान और नवाचार की भूमि के रूप में भी वैश्विक पहचान मिले। उन्होंने सभी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत एवं नीति-निर्माताओं का आह्वान किया कि वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पद्मश्री डॉ.बी.के. संजय, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, पंतनगर यूनिवर्सिटी से प्रो. जे. पी. जयसवाल, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी. पी उनियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने किया आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर शिशु वाटिका का लोकार्पण

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, उत्तराखंड द्वारा रुड़की में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उत्कृष्ट सफलता यह सिद्ध करती है कि परिश्रम, अनुशासन और संस्कार के बल पर हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके आत्मविश्वास को नई ऊर्जा देगा और भविष्य की सभी परीक्षाओं एवं जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि विद्या भारती ने सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा देकर देशभर में शिक्षा और संस्कार की मजबूत नींव रखी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 में गोरखपुर से प्रारंभ हुआ सरस्वती शिशु मंदिर आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। वर्तमान में विद्या भारती देशभर में करीब 45 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा एवं संस्कार प्रदान कर रही है। विद्या भारती के उत्तराखंड में 562 विद्यालयों में लगभग सवा लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने संगठन के सभी आचार्यों, स्वयंसेवकों एवं कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाया है। सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, निरूशुल्क पाठ्यपुस्तकें, जूते-बैग वितरण, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजना, भारत भ्रमण कार्यक्रम, मॉडल कॉलेजों की स्थापना, आईटी लैब एवं छात्रावास निर्माण जैसे अनेक कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही कौशल विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कौशल कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता के साथ सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। इसके अलावा यूपीएससी, एनडीए और सीडीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे की तैयारी के लिए 50 हजार की वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए कहा कि वे भारत के वर्तमान और भविष्य हैं। उनके ज्ञान, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व क्षमता के बल पर ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकेगा और भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित होगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर शिशु वाटिका का लोकार्पण भी किया।

कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष आनंद स्वरूप आर्य सरस्वती विद्या मंदिर, रुड़की कौशल्या देवी आर्या, केंद्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती डोमेशवर साहू, मंत्री भारतीय शिक्षा समिति डॉ रजनीकांत शुक्ला, निर्देशक आई आई टी रुड़की कमल किशोर पंत, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, जिलाध्यक्ष भाजपा रुड़की डॉ मधु सिंह, राज्यमंत्री श्यामवीर सिंह सैनी, दिनेश कौशिक, अजीत चौधरी,आदेश सैनी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ, उप जिलाधिकारी भगवानपुर भगवानपुर देवेंद्र नेगी सहित विभिन्न जिलों से आये अभिभावक छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सेवक सदन में लेखकों एवं साहित्यकारों से किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन देहरादून में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों एवं साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनके साहित्यिक योगदान और वर्तमान लेखन पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक चेतना के संवर्धन में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सशक्त साहित्यिक वातावरण तैयार करने तथा साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास सहित अनेक ऋषि-मुनियों की तपोभूमि एवं कर्मभूमि रही है। इस पावन भूमि ने ऐसे साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति विकसित करने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के पुराने, बिखरे एवं अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। साहित्यकारों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2022 में श्उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मानश् तथा वर्ष 2025 में श्दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मानश् प्रारम्भ किए गए हैं।

रुद्रप्रयाग के श्1000 पुस्तक दान अभियानश् को मुख्यमंत्री का सहयोग

हरेला पर्व के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा संचालित श्1000 पुस्तक दान अभियानश् को मुख्यमंत्री ने अपना सहयोग प्रदान किया। उन्होंने श्लेखकों से संवादश् कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की।

गौरतलब है कि रुद्रप्रयाग में ष्एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्यष् थीम पर सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए पुस्तक संग्रह अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकें समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच का आधार होती हैं। उनका यह योगदान पुस्तक दान की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में अध्ययन की आदत को भी प्रोत्साहित करेगा।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, साहित्यकार प्रो .सुधा रानी पांडे, आलोक लाल, बुद्धिनाथ मिश्रा, प्रेम कुमार साहिल, शिव मोहन सिंह, राम मोहन सिंह, नेहा नेगी, कुलभूषण केन, अनमोल जैन, रूपा सोनी, अमर खरबंदा, शीशपाल गुसाईं, रमाकांत, दिवेश जोशी, प्रभा पंत, रूबी गुप्ता, रणधीर कुमार अरोड़ा सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद स्मारक पर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए उनके अद्वितीय त्याग, शौर्य और राष्ट्रसेवा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगी ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता, अटूट मनोबल और सर्वाेच्च बलिदान का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया तथा विश्व के समक्ष भारत की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का परिचय कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वाेच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा, वीरता पदक विजेताओं की समृद्ध विरासत तथा यहां के युवाओं का राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की सुरक्षा नीति अधिक सशक्त, निर्णायक और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हुई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत संरचना का तीव्र विकास तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए गए प्रयास नए भारत की शक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तथा सैनिक कल्याण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णयों से देश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों का सम्मान बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। इसके साथ ही सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करना, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा तथा सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को संपत्ति क्रय पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी अनेक जनकल्याणकारी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के जिला अदालतों में भूमि धोखाधड़ी के जो मामले पेंडिंग हैं, उनके शीघ्र निस्तारण के प्रयास किये जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के श्पांचवें धामश् के रूप में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से निर्मित यह सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रेरणा-स्थल बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला श्अग्निवीर रोजगार सेलश् गठित किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग तथा अन्य राज्य सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि कारगिल के अमर शहीदों के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर विकसित भारत तथा विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वाेच्च बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं शहीद परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि में वृद्धि की है तथा अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सचिव सैनिक कल्याण युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि), जिला अधिकारी डॉ .आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिजन उपस्थित थे।

मन की बात को सुनकर बोले सीएम, पीएम के नेतृत्व में जन जन का सपना हो रहा साकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व सैनिकों, शहीद सैनिकों के परिजनों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के 136वें संस्करण को सुना।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम, देश के नागरिकों के जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला कार्यक्रम बन चुका है। यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों को प्रेरित करने के साथ ही देश के विकास और जनभागीदारी से जुड़े विषयों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में डीआरडीओ की उपलब्धियों, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता, रक्षा उत्पादों के निर्यात, जल संरक्षण, हस्तशिल्पों के संवर्धन तथा वोकल फॉर लोकल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संदेश आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूत करने वाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज भारत हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन जन का सपना साकार हो रहा है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सचिव युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सभरवाल (से.नि.) एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने कारगिल युद्ध में दिया सर्वाेच्च बलिदान, देवभूमि को वीरभूमि बनाने में सैनिकों का महत्वपूर्ण योगदानः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय कारगिल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में आयोजित सैनिक सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, शहीदों के परिजनों तथा सैन्य विभूतियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विजय कारगिल दिवस भारतीय सेना के अद्वितीय पराक्रम, अटूट संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति और अदम्य साहस का वह गौरवशाली अध्याय है, जो भारत के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जमा देने वाली ठंड, दुर्गम पहाड़ियों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और अद्भुत शौर्य का परिचय देते हुए देश की विजय सुनिश्चित की। कारगिल विजय हमारे वीर सैनिकों के सर्वाेच्च बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण की अमर गाथा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वीरता और बलिदान की चर्चा होती है, देवभूमि उत्तराखंड का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। प्रदेश के लगभग हर दूसरे घर का कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसी कारण उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। इन अमर सपूतों का बलिदान प्रदेश और देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान और राष्ट्र की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारतीय सेना का आत्मविश्वास, सामर्थ्य और आधुनिक क्षमता पूरी दुनिया देख रही है। भारत अब आतंकवादी हमलों के बाद केवल निंदा तक सीमित रहने वाला देश नहीं है, बल्कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से दुश्मन को निर्णायक जवाब देने वाला राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों, पुलों और अन्य रणनीतिक आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। वन रैंक-वन पेंशन की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान और न्याय दिया गया है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण, रक्षा बजट में निरंतर वृद्धि तथा सैनिकों के कल्याण से जुड़े अनेक निर्णय इस बात का प्रमाण हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और सैनिकों का सम्मान केंद्र सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि बलिदानी सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय-सीमा को भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है। शहीद परिवारों के लिए नौकरी-पूर्व प्रशिक्षण और पुत्री विवाह सहायता जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये किया गया है। देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के पांचवें धाम के रूप में निर्माणाधीन सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। यह सैन्य धाम देश के अमर बलिदानियों की वीरता और उत्तराखंड की सैन्य परंपरा की जीवंत गाथा बनेगा। इसके साथ ही खटीमा और टनकपुर के बीच भव्य सैन्य स्मारकन स्थापित करने का संकल्प भी लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सेवामुक्त अग्निवीरों की रोजगार संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए देश के पहले अग्निवीर रोजगार सेल की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पुलिस, वन विभाग तथा अन्य सरकारी सेवाओं में होने वाली भर्तियों में सेवामुक्त अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। स्वरोजगार के इच्छुक अग्निवीरों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों और सेवामुक्त अग्निवीरों को पर्वतीय क्षेत्रों में होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु विशेष सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस से संबंधित लंबे समय से चली आ रही मांग पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही जिला अदालतों में सैन्य परिवारों से संबंधित भूमि धोखाधड़ी के लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और बलिदानियों के आश्रितों के हितों की रक्षा के लिए अपने श्विकल्प रहित संकल्पश् के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम में आयोजित कवि सम्मेलन के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कविता राष्ट्रप्रेम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह श्दिनकरश् की ओजस्वी पंक्तियों का उल्लेख करते हुए अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, वीर सैनिक, पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं, शहीदों के परिजन, सैन्य अधिकारी, सम्मानित कविगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में प्रदेशवासी उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड में राज्य कर विभाग की उल्लेखनीय सफलता, संग्रहण में 24 फीसदी की वृद्धि

देहरादून। प्रदेश में राज्य कर विभाग ने जीएसटी संग्रहण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में नेट एसजीएसटी संग्रहण में 24 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि नॉन-जीएसटी संग्रहण में 12 प्रतिशत और कुल संग्रहण में 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

राज्य कर विभाग की प्रमुख सचिव आर के सुधांशु की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में जीएसटी संग्रहण, कर अनुपालन, विभागीय कार्यों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। बताया गया कि अप्रैल से जून 2026 की अवधि में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में नॉन-जीएसटी संग्रहण ₹658 करोड़ से बढ़कर ₹740 करोड़ हो गया है, जो 12 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में नेट एसजीएसटी संग्रहण ₹2,457 करोड़ से बढ़कर ₹3,056 करोड़ हो गया है, जो 24 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी प्रकार कुल संग्रहण ₹3,115 करोड़ से बढ़कर ₹3,796 करोड़ हो गया है, जिसमें 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

बैठक में केंद्रीय खुफिया इकाई के कार्यों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ब्प्न् के माध्यम से ₹12.92 करोड़ की वसूली की गई थी, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जून 2026 तक ₹16.48 करोड़ की वसूली दर्ज की गई है। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 27.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्रमुख सचिव ने जीएसटी संग्रहण में हुई प्रगति को बनाए रखते हुए आगामी अवधि में इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कर अनुपालन को बढ़ावा देने और विभागीय कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपलब्ध आंकड़ों और तकनीक का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया।

प्रमुख सचिव ने विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि करदाताओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और जीएसटी अनुपालन को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

बैठक में विशेष जांच शाखा, मोबाइल स्क्वाड और ऑडिट कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने सभी संबंधित इकाइयों को निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में होटल और रेस्टोरेंट सेवाओं, वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में जीएसटी अनुपालन की स्थिति और विभाग की आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए जीएसटी संग्रहण और अनुपालन को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर वित्त सचिव दिलीप जावलकर, आयुक्त राज्यकर प्रतीक जैन, अपर सचिव/अपर आयुक्त महमोहन मैनाली, अपर सचिव/अपर आयुक्त अनिल सिंह सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट के किसी भाग में लागत में अप्रत्याशित बढ़त के मामलों को गंभीरता से लेंः सीएस

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान समिति द्वारा विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने पंपिंग पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को सतत् और किफायती बनाए रखने के लिए सॉलर पावर से संचालित किए जाने की संभावना तलाशते हुए प्रस्ताव में शामिल किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पंपिंग पेयजल परियोजनाओं के निर्माण में सोलराइजेशन की संभावनाओं को अनिवार्य रूप से तलाश जाए। उन्होंने नियोजन विभाग को इस सम्बन्ध में शासनादेश जारी किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने विभागों द्वारा अभी भी कंसल्टेंट्स को दी जाने वाली फीस, प्रोजेक्ट कॉस्ट के प्रतिशत के रूप में दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कंसल्टेंट्स को फीस लमसम में दिए जाने हेतु पूर्व में दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस सम्बन्ध में किया गया शासनादेश पुनः विभागों को प्रेषित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट या प्रोजेक्ट के किसी भाग में लागत में अप्रत्याशित बढ़त के मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिस एजेंसी द्वारा ग़लत आंकलन किए जाने के कारण लागत में बढ़ोतरी हुयी है, उस एजेंसी पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने नियोजन विभाग को, लोक निर्माण विभाग के मार्गदर्शन में कॉस्ट वेरिएशन के लिए गाइडलाइन तैयार किए जाने के निर्देश दिए। इससे परियोजनाओं की लागत में अनावश्यक बढ़ोत्तरी को रोक जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष की दृष्टि से काफी संभावना है, इस दिशा में अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएं, प्रोजेक्ट की लोकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने गरुड़ (बागेश्वर) में आईटीआई के प्रस्ताव पर आसपास हॉस्टल की व्यवस्था भी सुनिश्चित किए जाने की बात कही। कहा कि इससे आईटीआई में एडमिशन लेने वाले छात्रों को काफ़ी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी एवं सी. रविशंकर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शौर्य स्थल, चीड़बाग, गढ़ीकैंट, देहरादून में आयोजित ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र की रक्षा के लिए उनके सर्वाेच्च बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम, शौर्य और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। वर्ष 1999 में भारतीय वीर जवानों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा की और विश्व के समक्ष भारतीय सेना के अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि देश सदैव अपने वीर सैनिकों और शहीदों के बलिदान का ऋणी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को वीरों की भूमि के रूप में जाना जाता है। प्रदेश के अनेक वीर सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में अपने अद्वितीय साहस और सर्वाेच्च बलिदान से देश का गौरव बढ़ाया है। राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा उनके सम्मान और हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें तथा देश की एकता, अखण्डता और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, युवा, मातृशक्ति और अनेक गणमान्य मौजूद थे।